राज्य की 90% वर्षा मानसून से आती है, फिर भी पश्चिम का बड़ा भाग सूखा रहता है — यही विरोधाभास इस भाग की कुंजी है। जब यह साफ़ हो जाए कि हवाएँ कहाँ से आती हैं और बिना बरसे क्यों निकल जाती हैं, तो कम वर्षा के कारण रटने नहीं पड़ते। इस भाग में दक्षिण-पश्चिमी मानसून का बनना, दोनों शाखाएँ, कम वर्षा के कारण, वर्षा का वितरण, सबसे ज़्यादा-सबसे कम के तथ्य और हाल के मानसून सत्र दिए गए हैं।
माइंड मैप खोलें ➜
1. वर्षा ऋतु व मानसून
- मानसून की खोज ➜ हिप्पोलस (यूनानी नाविक)
- पहला अध्ययन / व्याख्या ➜ अलमसूदी (अरबी यात्री)
- शब्द ➜ अरबी “मौसिम” = हवाओं की दिशा
राज्य की 90% वर्षा मानसून से होती है। गर्मियों में मानसूनी हवाएँ समुद्र से स्थल की ओर बहती हैं।
2. दक्षिण-पश्चिमी मानसून कैसे बनता है
मानसून बनने का क्रम
- अप्रैल–जून में थार बहुत तपता है
- उत्तर-पश्चिम में निम्न वायुदाब
- हिंद महासागर पर उच्च वायुदाब
- दक्षिणी गोलार्द्ध की दक्षिण-पूर्वी व्यापारिक हवाएँ विषुवत रेखा पार करते ही फेरल के नियम से अपनी दाईं ओर मुड़ जाती हैं — दिशा दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व हो जाती है, इसलिए नाम दक्षिण-पश्चिमी मानसून।
- विषुवतीय हिंद महासागर के ऊपर से आने से ये नमी से भरी होती हैं और हर साल केवल वर्षा ऋतु में बहती हैं।
- भारतीय प्रायद्वीप के त्रिभुजाकार आकार से ये दो शाखाओं में बँटती हैं — बंगाल की खाड़ी और अरब सागर; थार के निम्न दाब के कारण दोनों राजस्थान तक पहुँचती हैं।
भारत में मानसून — रोचक तथ्य
| बात | उत्तर |
|---|---|
| भारत में सबसे पहले प्रवेश | केरल (मालाबार तट = मानसून का प्रवेश द्वार) |
| भारत में सबसे अंत में | लद्दाख |
| भारतीय मानसून का “घर” | मैस्करीन द्वीप समूह |
… शेष 3 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें
मानसून पूर्व वर्षा के स्थानीय नाम
| नाम | कहाँ |
|---|---|
| दोगड़ा | राजस्थान — मई-जून में निम्न वायुदाब व ज़्यादा आर्द्रता से |
| आम्र वर्षा | केरल, कर्नाटक, महाराष्ट्र (मार्च-अप्रैल) |
| चेरी ब्लॉसम / फूलों की बौछार | केरल, कर्नाटक — कॉफ़ी को फ़ायदा |
| नॉर्वेस्टर / बोर्डोचिल्ला | असम, बंगाल, झारखंड, छत्तीसगढ़ |
… शेष 3 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें
3. बंगाल की खाड़ी शाखा
- राज्य में ज़्यादातर वर्षा इसी शाखा से — कुल वर्षा का लगभग 90%।
- पूरा गंगा-यमुना मैदान पार करके हाड़ौती से राज्य में आती है; सबसे पहले झालावाड़ में; दिशा दक्षिण-पूर्व से उत्तर-पश्चिम।
- यहाँ तक पहुँचते-पहुँचते इसकी नमी बहुत घट चुकी होती है — इसलिए वर्षा कम।
4. अरब सागर शाखा
- पहली उप-शाखा ➜ केरल के मालाबार तट पर वर्षा।
- दूसरी ➜ नर्मदा घाटी की ओर; महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और कर्नाटक के कुछ भागों में वर्षा; नर्मदा-ताप्ती घाटियों से होकर गंगा मैदान में बंगाल की खाड़ी शाखा से मिल जाती है।
- तीसरी ➜ कच्छ-सौराष्ट्र (गुजरात) से आती है, अरावली के समानांतर राजस्थान पार कर जाती है और बहुत कम बरसती है; हरियाणा-पंजाब पार कर धर्मशाला के पास हिमालय से टकराती है, वहाँ बरसकर लौटते हुए उत्तर-पश्चिमी राजस्थान में थोड़ी वर्षा करती है।
- राज्य में सबसे पहले यही शाखा पहुँचती है (मध्य जून तक); दिशा दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व; कुल वर्षा का लगभग 10%।
- इसकी ज़्यादातर वर्षा राज्य के दक्षिणी भाग में; माउंट आबू की सबसे ज़्यादा वर्षा इसी शाखा से।
- दोनों शाखाएँ बाँसवाड़ा में मिलती हैं — इसलिए मानसून की सबसे ज़्यादा सक्रियता बाँसवाड़ा में, और यही प्रवेश द्वार भी।
5. राजस्थान में कम वर्षा के कारण
- बंगाल की खाड़ी का मानसून राज्य में आने से पहले ही गंगा के मैदान में अपनी नमी ख़र्च कर चुका होता है।
- अरावली अरब सागर की मानसूनी हवाओं के समानांतर (दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व) है — उन्हें रोक नहीं पाती।
- रेगिस्तान पर पहुँचते ही अति उष्णता से हवाओं की नमी घट जाती है, और उन्हें रोकने वाली कोई ऊँची पर्वतमाला नहीं — इसलिए वे ऊपर से बिना बरसे निकल जाती हैं।
याद रखें: पश्चिमी राजस्थान में कम वर्षा का एक कारण सीधे-सीधे — अरब सागर शाखा का अरावली के समानांतर निकल जाना।
6. वर्षा का वितरण
- वर्षा उत्तर-पश्चिम से दक्षिण-पूर्व की ओर बढ़ती है, और दक्षिण/दक्षिण-पूर्व से उत्तर/उत्तर-पश्चिम की ओर घटती है; वर्षा के दिनों की संख्या भी इसी क्रम में।
- 50 सेमी वर्षा रेखा — राज्य को दो साफ़ जलवायु भागों में बाँटती है; 25 सेमी रेखा — उत्तर-पश्चिमी मरुस्थल को दो भागों में।
- पिछले 5 वर्षों में पश्चिमी रेगिस्तान में वर्षा बढ़ी है, जबकि मेवाड़ (जहाँ पहले सबसे ज़्यादा होती थी) में घटी है।
- औसत वार्षिक वर्षा ➜ 57.5 सेमी
- वर्षा वाले दिन ➜ 29
- वर्षा मापी ➜ रेनोमीटर (रेन गेज)
7. सबसे ज़्यादा व सबसे कम
| प्रश्न | उत्तर |
|---|---|
| सबसे ज़्यादा वर्षा — स्थान | माउंट आबू (सिरोही) — 48 दिन |
| सबसे कम वर्षा — स्थान | सम (जैसलमेर) — 0 दिन |
| सबसे ज़्यादा वर्षा — ज़िला | बाँसवाड़ा (40 दिन, 95 सेमी); फिर बाराँ (87), झालावाड़ (84) |
| सबसे कम वर्षा — ज़िला | जैसलमेर (5 दिन, 18 सेमी) |
… शेष 6 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें
ट्रिक: राज्य की औसत वार्षिक वर्षा के लगभग बराबर वर्षा — जयपुर, दौसा, राजसमंद में।
ध्यान दें: सबसे आर्द्र और सबसे ज़्यादा वर्षा वाला स्थान दोनों माउंट आबू; सबसे शुष्क स्थान फलौदी, पर सबसे कम वर्षा का स्थान सम — दोनों अलग-अलग।
8. ज़िलेवार औसत वार्षिक वर्षा
- राज्य का औसत ➜ 57.51 सेमी
याद रखें: परीक्षा (RAS Pre 2025): दक्षिण-पश्चिमी मानसून की औसत वर्षा का आरोही (बढ़ता) क्रम — जालौर < जयपुर < कोटा।
9. हाल के मानसून सत्र
- 2023 में सबसे ज़्यादा वर्षा ➜ सिरोही (137.01 सेमी); सबसे कम — जैसलमेर (28.22 सेमी) (जल संसाधन विभाग की वार्षिक रिपोर्ट 2023)।
- 2024 में मानसून सामान्य तिथि से 10 दिन देर, 25 जून को आया और जुलाई के पहले सप्ताह तक पूरे राज्य में फैल गया (आर्थिक समीक्षा 2024–25)।
- मानसून सत्र 2024 में राज्य के सभी ज़िलों में सामान्य से ज़्यादा वर्षा हुई।
मानसून 2023 (1 जून–30 सितम्बर) — ज़िलों का वर्गीकरण
| श्रेणी | ज़िले | संख्या |
|---|---|---|
| असामान्य (सामान्य से 60% या ज़्यादा) | बाड़मेर, जालौर | 2 |
| अधिक (+20 से +59%) | अजमेर, बीकानेर, श्रीगंगानगर, जोधपुर, नागौर, पाली, राजसमंद, सिरोही | 8 |
| सामान्य (±19%) | अलवर, बाँसवाड़ा, भरतपुर, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, चूरू, दौसा, धौलपुर, हनुमानगढ़, जयपुर, जैसलमेर, झुंझुनूँ, करौली, प्रतापगढ़, सवाई माधोपुर, सीकर, टोंक, उदयपुर | 18 |
मानसून 2024 — ज़िलों का वर्गीकरण
| श्रेणी | ज़िले | संख्या |
|---|---|---|
| असामान्य (60% या ज़्यादा) | अजमेर, अलवर, ब्यावर, भरतपुर, बीकानेर, दौसा, धौलपुर, डीडवाना-कुचामन, जयपुर, करौली, खैरथल-तिजारा, कोटपूतली-बहरोड़, नागौर, सवाई माधोपुर, टोंक, बालोतरा, बाड़मेर, जैसलमेर, जोधपुर, फलौदी, बूँदी | 21 |
| अधिक (+20 से +59%) | बाँसवाड़ा, बाराँ, भीलवाड़ा, चूरू, गंगानगर, हनुमानगढ़, झुंझुनूँ, कोटा, पाली, राजसमंद, सीकर | 11 |
| सामान्य (±19%) | चित्तौड़गढ़, डूँगरपुर, जालौर, झालावाड़, प्रतापगढ़, सलूम्बर, सिरोही, उदयपुर | 8 |
10. समदाब रेखाएँ
| महीना | समदाब रेखा | कहाँ से |
|---|---|---|
| जनवरी | 1019 मिलीबार | बीकानेर, फलौदी, नागौर, गंगानगर |
| जनवरी | 1018 मिलीबार | जैसलमेर, जोधपुर, पाली, राजसमंद, चित्तौड़गढ़, झालावाड़ |
| जुलाई | 997 मिलीबार | बीकानेर, फलौदी, जैसलमेर |
11. रैपिड फायर तथ्य
- मानसून की खोज ➜ हिप्पोलस (यूनानी नाविक); पहला अध्ययन अलमसूदी (अरबी यात्री)
- भारत में मानसून का प्रवेश द्वार ➜ केरल का मालाबार तट
- राज्य में सबसे पहले पहुँचने वाली शाखा ➜ अरब सागर शाखा (मध्य जून तक), कुल वर्षा का लगभग 10%
- ज़्यादातर वर्षा देने वाली शाखा ➜ बंगाल की खाड़ी, लगभग 90%; सबसे पहले झालावाड़ में आती है
- दोनों शाखाएँ जहाँ मिलती हैं ➜ बाँसवाड़ा
- औसत वार्षिक वर्षा ➜ 57.5 सेमी; वर्षा वाले दिन 29
- सबसे ज़्यादा वर्षा ➜ स्थान माउंट आबू; ज़िला बाँसवाड़ा (95 सेमी)
- सबसे कम वर्षा ➜ स्थान सम (जैसलमेर); ज़िला जैसलमेर (18 सेमी)
- वर्षा मापने का यंत्र ➜ रेनोमीटर (रेन गेज)
अगले भाग में लौटता मानसून, सर्दियों की वर्षा (मावठ), जेट स्ट्रीम और सर्दियों के रिकॉर्ड, फिर अलग-अलग आधारों पर राजस्थान के जलवायु प्रदेश।
पिछला भाग: राजस्थान की जलवायु: मूल बातें एवं जलवायु को प्रभावित करने वाले कारक
अगला भाग: राजस्थान की जलवायु: शीत ऋतु व मावठ एवं जलवायु प्रदेश
इन्हें भी पढ़ें: राजस्थान भौतिक विभाजन का आधार · राजस्थान में कृषि एवं प्रमुख फसलें
पूरी श्रृंखला: राजस्थान का भूगोल — सभी अध्याय · राजस्थान जी.के. नोट्स — सभी विषय
इस विषय का माइंड मैप ➜Complete Rajasthan GK पास देखें



