बिजली के बिना उद्योग, खेती और यातायात कुछ भी नहीं चलता, और राज्य के बिजली तंत्र की पूरी कहानी कुछ तारीख़ों, कम्पनियों और बिजलीघरों के नामों में सिमटी है। इस भाग में पहले नवीकरणीय-अनवीकरणीय का भेद और बिजली कम्पनियाँ आती हैं। फिर स्थापित क्षमता, संयुक्त जल विद्युत परियोजनाएँ, सुपर थर्मल व सुपर क्रिटिकल की परिभाषा और कोयला व लिग्नाइट आधारित बिजलीघर क्रमवार हैं।
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1. ऊर्जा के स्रोत
खाना पकाने से लेकर रेल, बस, गाड़ी, हवाई जहाज़ जैसे यातायात, और पंखा, फ़्रिज, रेडियो, टीवी जैसे साधनों तक — उद्योग, पर्यटन, कृषि सबमें ऊर्जा चाहिए। आज का युग औद्योगिक युग है और उसकी नींव शक्ति के संसाधन हैं।
| अनवीकरणीय | नवीकरणीय | |
|---|---|---|
| पहचान | एक बार इस्तेमाल के बाद दोबारा काम नहीं आते; भंडार सीमित | बार-बार इस्तेमाल हो सकते हैं; भंडार असीमित |
| उदाहरण | ताप विद्युत (कोयला, गैस, तेल), परमाणु (यूरेनियम, थोरियम) | जल विद्युत, सौर, पवन, ज्वारीय, बायोगैस, बायोमास, भू-तापीय |
ध्यान दें: जल विद्युत परम्परागत स्रोत है, फिर भी नवीकरणीय श्रेणी में आता है।
| ऊर्जा | किससे |
|---|---|
| सौर | सूर्य के प्रकाश से |
| पवन | तेज़ चलती हवाओं से |
| बायोगैस | पशुओं के मल-मूत्र के वायुरहित अपघटन से जीवाणुओं द्वारा बनी ज्वलनशील गैस — सबसे ज़्यादा मीथेन |
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| राज्य में सबसे ज़्यादा संभावना | |
|---|---|
| कुल मिलाकर | सौर, पवन, बायोगैस |
| ग्रामीण क्षेत्र | बायोगैस |
| पश्चिमी राजस्थान | सौर ऊर्जा |
| सबसे ज़्यादा उत्पादन | कहाँ |
|---|---|
| सौर | जोधपुर |
| पवन | जैसलमेर |
| बायोगैस | उदयपुर |
2. बिजली तंत्र व कम्पनियाँ
| काल / क्रम | घटना | विवरण |
|---|---|---|
| 1948 | विद्युत आपूर्ति अधिनियम | बिजली उत्पादन-आपूर्ति के नियमन के लिए; बिजली समवर्ती सूची में |
| 1957 | राजस्थान राज्य विद्युत मंडल (RSEB) | 1 जुलाई |
| 1999 | राजस्थान विद्युत क्षेत्र सुधार अधिनियम | 1 जून 2000 से लागू |
| 2000 | विद्युत नियामक आयोग | 2 जनवरी; पहले अध्यक्ष अरुण कुमार |
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विद्युत नियामक आयोग — उत्पादन, प्रसारण और वितरण कम्पनियों को लाइसेंस देता है और बिजली की दरें तय करता है।
| कम्पनी | काम |
|---|---|
| राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम (RVUN), जयपुर | राज्य की सभी बिजली उत्पादन परियोजनाएँ |
| राजस्थान राज्य विद्युत प्रसारण निगम (RVPN), जयपुर | 765, 400, 220 और 132 kV लाइनें व सब-स्टेशन बनाना-चलाना |
| जयपुर विद्युत वितरण निगम | 12 ज़िलों में वितरण |
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- आज़ादी के समय राज्य में 15 बिजलीघर थे — कुल 13.27 MW; केवल 26 शहरों और 16 गाँवों में बिजली।
- 11वीं और 12वीं पंचवर्षीय योजना में ऊर्जा को सर्वोच्च प्राथमिकता।
- दिसम्बर 2024 तक 43,965 गाँवों और 1.14 लाख ढाणियों का विद्युतीकरण — शत-प्रतिशत ग्रामीण विद्युतीकरण की ओर।
याद रखें: जूनियर इंस्ट्रक्टर 2025 — “ऊर्जा के कुशल उपयोग और संरक्षण” वाला क़ानून: ऊर्जा संरक्षण अधिनियम 2001।
3. स्थापित क्षमता व देश में स्थान
- स्थापित क्षमता — मार्च 2024 ➜ 24,783.64 MW
- स्थापित क्षमता — दिसम्बर 2024 ➜ 26,325.19 MW
- ऊर्जा उपलब्धता — मार्च 2017 ➜ 6922 करोड़ यूनिट
| स्रोत | 2023–24 (MW) | 2024–25 (MW) |
|---|---|---|
| राज्य की अपनी / भागीदारी — ताप | 7830.00 | 7830.00 |
| राज्य — जल | 1017.29 | 1017.29 |
| राज्य — गैस | 600.50 | 600.50 |
| केंद्रीय परियोजनाओं से — ताप | 1916.37 | 1916.37 |
ऊँची ख़रीद लागत के कारण 2021 के विद्युत मंत्रालय के दिशा-निर्देशों पर NTPC से 221 MW गैस बिजली का आवंटन लौटा दिया गया। राज्य में सबसे ज़्यादा बिजली — 1. ताप, 2. सौर, 3. पवन से। पवन और सौर मिलकर स्थापित क्षमता का लगभग 37.59%।
| ऊर्जा का प्रकार | देश में पहला | राजस्थान का स्थान |
|---|---|---|
| कोयला ताप | महाराष्ट्र | 6वाँ |
| लिग्नाइट ताप | तमिलनाडु | दूसरा |
| गैस ताप | गुजरात | 8वाँ |
| कुल ताप | महाराष्ट्र | 7वाँ |
ये आँकड़े 28 फ़रवरी 2025 तक के हैं (अक्षय ऊर्जा पोर्टल, ऊर्जा मंत्रालय)।
4. संयुक्त जल विद्युत परियोजनाएँ
| परियोजना | बिजलीघर | राजस्थान को |
|---|---|---|
| भाखड़ा-नांगल (सतलुज) — राज्य का हिस्सा 15.22% | भाखड़ा (बिलासपुर, 222.55 मी): बायाँ किनारा 108×1 (1960–61) + 126×4 = 504; दायाँ किनारा 157×5 = 785 (1966–68) — कुल 1397 MW; नांगल (रोपड़): कोटला 77.34 MW (1956–61), गंगूवाल 76.39 MW (1955–62); कुल क्षमता 1550.73 MW | 236 MW |
| व्यास (राजस्थान, पंजाब, हरियाणा) | पंडोह बाँध — देहर बिजलीघर (1977–83) 6×165 = 990 MW (राज्य 20% = 198 MW); पौंग बाँध (1978–83) 6×66 = 396 MW (राज्य 58.5% = 231.66 MW) | 429.66 MW — बाहरी परियोजनाओं में सबसे ज़्यादा |
| माही (गुजरात 55%, राजस्थान 45%) | माही बजाज सागर, बोरखेड़ा (बाँसवाड़ा): 2×25 = 50 MW (1986), 2×45 = 90 MW (1989); कुल 140 MW | 100% बिजली |
अन्य लघु पन बिजली परियोजनाएँ — राज्य में कुल 10; इंदिरा गांधी नहर की शाखाओं पर — अनूपगढ़ (9 MW), सूरतगढ़ (4 MW), चारणवाला, पूगल (2.15 MW), बरसलपुर (0.54 MW); चम्बल और माही की दायीं नहरों पर भी बिजली बनती है।
राहूघाट परियोजना — चम्बल पर करौली क्षेत्र में चार बाँध बनाकर लगभग 270 MW बिजली; राजस्थान-मध्य प्रदेश 50 : 50 (प्रस्तावित)।
5. दूसरे राज्यों की जल परियोजनाओं में हिस्सा
| परियोजना | राज्य / नदी | कुल क्षमता | राजस्थान का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| उरी-I (NHPC) | जम्मू-कश्मीर / झेलम | 480 MW | 43.008 MW (8.96%) |
| उरी-II (NHPC) | जम्मू-कश्मीर / झेलम | 240 MW | 27.37 MW (11.40%) |
| सलाल (NHPC) | जम्मू-कश्मीर / चिनाब | 345 + 345 MW | 20.35 MW (2.95%) |
| दुलहस्ती (NHPC) | जम्मू-कश्मीर / चिनाब | 390 MW | 42.42 MW (10.88%) |
- ताला ➜ राजस्थान और भूटान की संयुक्त परियोजना; वांगचू नदी पर; 6×170 = 1020 MW; राज्य की एकमात्र अंतर्राष्ट्रीय परियोजना; इसके बदले राज्य को कहलगाँव से बिजली मिलती है।
- रतले (जम्मू-कश्मीर) — चिनाब पर निर्माणाधीन 850 MW; बिजली ख़रीदने का समझौता जनवरी 2024।
6. सुपर थर्मल और सुपर क्रिटिकल
- देश में कोयला ऊर्जा का मुख्य संसाधन है; राज्य में ज़्यादातर लिग्नाइट — इसलिए यहाँ की कोयला परियोजनाएँ “लिग्नाइट परियोजनाएँ” भी कहलाती हैं; सबसे अच्छा लिग्नाइट पलाना (बीकानेर); पूरे लिग्नाइट से 25 साल तक 25,000 MW बिजली बन सकती है।
- ताप बिजली बढ़ाने के लिए केंद्र ने 1975 में NTPC बनाया — कोयला और गैस/तेल आधारित परियोजनाएँ।
| श्रेणी | परिभाषा | राज्य में |
|---|---|---|
| सुपर थर्मल पावर प्लांट | कुल क्षमता 1000 MW या ज़्यादा | 6 — सूरतगढ़ (2002), कोटा (2004), कवाई (2013), भादरेस (2013), छबड़ा (2014), कालीसिंध (2015) |
| सुपर क्रिटिकल पावर प्लांट | किसी एक इकाई की क्षमता 500 MW या ज़्यादा | 4 — कवाई (2013), कालीसिंध (2014), छबड़ा (2017), सूरतगढ़ (2020) |
| अल्ट्रा मेगा पावर प्लांट | 4000 MW से ज़्यादा | राज्य में एक भी नहीं |
7. कोयला आधारित बिजलीघर
| बिजलीघर | ब्योरा |
|---|---|
| कोटा सुपर थर्मल — कोटा | राज्य की पहली ताप परियोजना और दूसरा सुपर थर्मल; चम्बल पर कोटा बैराज के बाएँ किनारे; 1978 में स्थापित; पहला कोयला आधारित; राज्य की एकमात्र बिटुमिनस कोयला परियोजना; 7 इकाइयाँ — 2×110 (1983), 2×210 (1988–89), 1×210 (1994), 1×195 (2003), 7वीं 195 MW (30 मई 2009); कुल 1240 MW, 100% राज्य को; 2000–2004 में भारत सरकार से गोल्ड शील्ड |
| सूरतगढ़ सुपर थर्मल — ठुकराना (सूरतगढ़, गंगानगर) | राज्य का पहला सुपर थर्मल; “राजस्थान का आधुनिक विकास तीर्थ”; तीसरी-चौथी इकाई में तरल ईंधन भी; पानी इंदिरा गांधी नहर से; 250×6 = 1500 MW (इकाइयाँ मई 1998, मार्च 2000, अक्टूबर 2001, मार्च 2002, जून 2003, मार्च 2009); RVUN; सुपर क्रिटिकल — 7वीं (660 MW) 1 दिसम्बर 2020, 8वीं (660 MW) 7 अक्टूबर 2021 → कुल 2820 MW — अभी राज्य का सबसे ज़्यादा बिजली बनाने वाला संयंत्र |
| छबड़ा सुपर थर्मल — मोतीपुरा (छबड़ा, बाराँ) | राज्य का तीसरा सुपर थर्मल; 8 दिसम्बर 2005 से; कोयला छत्तीसगढ़ से; 250×4 = 1000 MW (2010, 2011, 2013, 2014); पानी पार्वती, बैंथली, हिंगलोट बाँध से; सुपर क्रिटिकल — 5वीं (660) 9 अगस्त 2018, 6वीं (660) 2 अप्रैल 2019 (पानी परवन व ल्हासी बाँध) → कुल 2320 MW — दूसरा सबसे ज़्यादा उत्पादन; अल्ट्रा सुपर क्रिटिकल 660-660 MW की 2 इकाइयाँ प्रस्तावित (बजट 2022) |
बाँसवाड़ा सुपर क्रिटिकल (प्रस्तावित) — फेफर, दानपुर (बाँसवाड़ा); कोयला आधारित, 2×660 MW; पानी माही बाँध से; अनुमानित लागत ₹3920 करोड़; ज़मीन अधिग्रहण पूरा, आगे का काम बंद; 1320 MW की जगह 1600 MW अल्ट्रा सुपर क्रिटिकल संयंत्र लगाने की योजना।
8. लिग्नाइट आधारित बिजलीघर
| परियोजना | ब्योरा |
|---|---|
| गिरल लिग्नाइट — थुम्बली गाँव (शिव, बाड़मेर) | राज्य की पहली लिग्नाइट परियोजना; RVUN, जर्मनी की KLF के आर्थिक सहयोग से; लिग्नाइट गिरल की सोनड़ी खानों से, चूना पत्थर सोनू (जैसलमेर) से, पानी इंदिरा गांधी नहर (मोहनगढ़) से; 125×2 = 250 MW (फ़रवरी 2007, दिसम्बर 2008); लिग्नाइट में गंधक ज़्यादा होने से तकनीकी दिक़्क़तें — पहली इकाई जुलाई 2014 और दूसरी जनवरी 2016 से बंद; दोबारा बोली पर विचार |
| बरसिंहसर — बीकानेर | राज्य सरकार और NLC इंडिया का; 125×2 = 250 MW; पहली इकाई 5 जून 2010 को लोकार्पित, दूसरी जनवरी 2012 में; 100% राज्य को |
| बीठनोक — बीकानेर | NLC का 250 MW संयंत्र 2010 से निर्माणाधीन; लागत बढ़ने और देरी से राज्य ने काम रोका; 2022 में नई DPR बनाने के निर्देश |
बजट 2023–24 — बाड़मेर में लगभग ₹7,700 करोड़ से 1100 MW का लिग्नाइट बिजलीघर।
9. दूसरे राज्यों के ताप बिजलीघरों में हिस्सा
| परियोजना | राज्य | क्षमता | राजस्थान का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| सिंगरौली (NTPC) | उत्तर प्रदेश | 2000 MW | 300 MW (15%) |
| रिहंद-I (NTPC) | उत्तर प्रदेश | 2×500 | 95 MW (9.5%) |
| रिहंद-II | उत्तर प्रदेश | 2×500 | 100 MW (10%) |
| रिहंद-III | उत्तर प्रदेश | 2×500 | 115.24 MW (11.52%) |
ऊँचाहार के पहले चरण में राज्य का हिस्सा नहीं है।
रिवीजन पॉइंटर्स
- जल विद्युत परम्परागत साधन होकर भी नवीकरणीय श्रेणी में गिनी जाती है।
- पश्चिमी राजस्थान में सबसे ज़्यादा संभावना सौर ऊर्जा की है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में बायोगैस की।
- राजस्थान राज्य विद्युत मंडल (RSEB) 1 जुलाई 1957 को बना; विद्युत नियामक आयोग 2 जनवरी 2000 को, पहले अध्यक्ष अरुण कुमार।
- उत्पादन का काम RVUN और प्रसारण का काम RVPN के पास है; दोनों का मुख्यालय जयपुर।
- भाखड़ा-नांगल में राजस्थान का हिस्सा 15.22% है; बाहरी परियोजनाओं में सबसे ज़्यादा बिजली व्यास परियोजना से (429.66 MW)।
- माही परियोजना (बाँसवाड़ा) की 100% बिजली राजस्थान को मिलती है; ताला (भूटान) राज्य की एकमात्र अंतर्राष्ट्रीय परियोजना है।
- सुपर थर्मल यानी कुल 1000 MW या ज़्यादा — राज्य में 6; सुपर क्रिटिकल यानी एक इकाई 500 MW या ज़्यादा — राज्य में 4।
- कोटा सुपर थर्मल राज्य की पहली ताप परियोजना (1978) है; सूरतगढ़ पहला सुपर थर्मल है और अभी सबसे ज़्यादा बिजली (2820 MW) बनाता है।
- गिरल (शिव, बाड़मेर) राज्य की पहली लिग्नाइट परियोजना है, जो तकनीकी दिक़्क़तों के कारण बंद पड़ी है।
अगले भाग में गैस आधारित बिजलीघर, रावतभाटा का परमाणु बिजलीघर, सौर ऊर्जा की स्थिति, सोलर पार्क और नई योजनाएँ।
पिछला भाग: राजस्थान के खनिज संसाधन: खनिज तेल व प्राकृतिक गैस एवं खनिज नीतियाँ व योजनाएँ
अगला भाग: राजस्थान में ऊर्जा संसाधन: गैस व परमाणु बिजली एवं सौर ऊर्जा
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