राजस्थान के खनिज संसाधन: खनिज — परिचय व वर्गीकरण एवं धात्विक खनिज – Rajasthan Geography Chapter 43

राज्य की खनिज संपदा, खनन संस्थाएँ, खनिजों का वर्गीकरण और लोहा, ताँबा, सीसा-जस्ता, सोना जैसे धात्विक खनिज।

11 min read Updated Notes in Hindi
In this chapter (10 sections)
  1. राज्य की खनिज संपदा
  2. खनन संस्थाएँ
  3. खनिजों का वर्गीकरण
  4. सीसा-जस्ता
  5. ताँबा
  6. चाँदी व टंगस्टन
  7. लौह अयस्क
  8. मैंगनीज़ व दुर्लभ धातुएँ
  9. सोना
  10. रिवीजन पॉइंटर्स

राजस्थान को खनिजों का अजायबघर इसलिए कहा जाता है कि यहाँ विविधता भी भरपूर है और कई खनिजों में अकेले इसी राज्य का नाम आता है। इस भाग में राज्य की खनिज संपदा, खनन संस्थाएँ और धात्विक-अधात्विक का भेद पहले आते हैं। फिर सीसा-जस्ता, ताँबा, चाँदी व टंगस्टन, लौह अयस्क, मैंगनीज़ व दुर्लभ धातुएँ और सोना क्रम से दिए गए हैं।

इस विषय का इंटरैक्टिव माइंड मैप — राजस्थान के खनिज संसाधन, 1 चॉक-बोर्ड चित्र, 20 नक्शे, 1 चार्ट, 28 फ्लैशकार्ड और 25 अभ्यास-प्रश्न के साथ। यहाँ हर खंड के चुने हुए बिंदु हैं; पूरी तालिकाएँ, शेष तथ्य और रटने की ट्रिक माइंड मैप में हैं।
माइंड मैप खोलें ➜

1. राज्य की खनिज संपदा

खनिजों की भरमार और विविधता के कारण राजस्थान को “खनिजों का अजायबघर / संग्रहालय” कहते हैं। ज़्यादातर खनिज अरावली और पठारी भागों से निकलते हैं। राज्य में 81 प्रकार के खनिज मिलते हैं, जिनमें से 58 का खनन हो रहा है; खनन पट्टे अब ई-नीलामी से मिलते हैं।

  • प्रधान खनिजों के खनन पट्टे ➜ 145
  • अप्रधान खनिजों के खनन पट्टे ➜ 16,962
  • खदान अनुज्ञापत्र ➜ 17,185

… शेष 2 बिंदु — पूरी सूची माइंड मैप में देखें

राज्य की स्थितिखनिज
एकमात्र उत्पादकसीसा-जस्ता अयस्क, सेलेनाइट, वोलस्टोनाइट, जैस्पर, गार्नेट (तामड़ा)
अग्रणी उत्पादकचाँदी, कैल्साइट, जिप्सम
प्रमुख स्थानसंगमरमर, बलुआ पत्थर, ग्रेनाइट, सीमेंट व स्टील ग्रेड चूना पत्थर

प्रधान और अप्रधान खनिज

नियमरॉयल्टी व नियम कौन तय करता है
प्रधान खनिजMCR 1960केंद्र सरकार
अप्रधान खनिजMMCRराज्य सरकार (आवंटन और रॉयल्टी)

ध्यान दें: 2015 में केंद्र ने जिप्सम, बेराइट्स, डोलोमाइट, क्वार्ट्ज़, फ़ेल्सपार, अभ्रक, चाइना क्ले समेत 31 प्रधान खनिजों को अप्रधान सूची में डाल दिया — अब इन पर राज्य के नियम लागू होते हैं।

2. खनन संस्थाएँ

संस्थाकब / कहाँख़ास बात
खान एवं भू-विज्ञान विभाग1949मुख्यालय उदयपुर, पंजीकृत कार्यालय जयपुर; निदेशालय उदयपुर
राजस्थान राज्य खनिज अन्वेषण ट्रस्टजयपुर—
RSMDC (राजस्थान राज्य खनिज विकास निगम)27 सितम्बर 197920 फ़रवरी 2003 को RSMML में विलय

RSMML का उद्देश्य — किफ़ायती तकनीक से खनिजों का दोहन और खनिज परियोजनाओं को बढ़ावा।

RSMML की व्यावसायिक इकाई (SBU)कहाँ
रॉक फ़ॉस्फ़ेटझामरकोटड़ा (उदयपुर)
जिप्समबीकानेर
चूना पत्थरजोधपुर

बजट 2025–26

  • सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस फ़ॉर माइंस एंड मिनरल्स ➜ जयपुर
  • इंस्टीट्यूट ऑफ़ माइंस ➜ उदयपुर
  • राजस्थान मिनरल एक्सप्लोरेशन लिमिटेड ➜ RSMML की सहायक, खनिजों की खोज के लिए

… शेष 2 बिंदु — पूरी सूची माइंड मैप में देखें

3. खनिजों का वर्गीकरण

धात्विक खनिजअधात्विक खनिज
कैसे मिलते हैंअयस्क के रूप में; रासायनिक क्रिया से धातु अलग करनी पड़ती हैप्राकृतिक रूप में ही काम आते हैं, शोधन नहीं
उपयोगबार-बार इस्तेमाल हो सकते हैंऔद्योगिक खनिज; पत्थर-मिट्टी के रूप में
चट्टानेंआग्नेय, धारवाड़ और गोंडवानाअवसादी

याद रखें: REET (L-2) 2025 — धात्विक खनिजों का सही समूह: लोहा, ताँबा, सीसा (अभ्रक और पोटाश अधात्विक हैं)।

4. सीसा-जस्ता

  • देश में सीसा-जस्ता का सांद्र केवल राजस्थान में बनता है; दोनों साथ-साथ मिलते हैं — इसलिए “जुड़वाँ खनिज”; अयस्क गैलेना; साथ में चाँदी भी।
  • भंडार में राज्य पहला (~89%); सबसे ज़्यादा उदयपुर, फिर राजसमंद, भीलवाड़ा।
सीसाजस्ता
पहचानलोहे के बाद सबसे ज़्यादा इस्तेमाल; 621°F पर पिघलता है; मुलायम, भारी, विद्युत का कुचालक; परतदार चट्टानों में; दूसरी धातुओं से आसानी से मिश्रधातुअवसादी चट्टानों में; अयस्क कैलेमाइन, ज़िंकाइट, विलेमाइट, ज़िंक सल्फ़ाइड
उपयोगबैटरी, रेल इंजन, कारतूस, हवाई जहाज़, टाइपराइटर, वाद्य यंत्र, रंग-रोगनजस्तीकरण (गैल्वनाइज़िंग), पेंट, मीटर के पुर्ज़े, सेल, स्याही, माचिस, दवाएँ, फ़ोटो एनग्रेविंग, बैटरी

जस्ते को गलाने में सह-उत्पाद — सल्फ़्यूरिक एसिड, कैडमियम, कोबाल्ट।

प्रमुख क्षेत्र

ज़िलाक्षेत्र
उदयपुर / सलूम्बर — जावर क्षेत्रजावरमाला, बरोई मगरा (उदयपुर), मोचिया मगरा, बलारिया (सलूम्बर) — भूमिगत खानें; अयस्क से 5% तक सीसा, 7% तक जस्ता; विश्व की सबसे पुरानी सीसा-जस्ता खान
भीलवाड़ारामपुरा-आगूचा-गुलाबपुरा, तिरंगा, समोड़ी, देवास दक्षिण, देवपुरा, पुर, बनेड़ा
राजसमंदराजपुरा-दरीबा-बेथूमी, सिंदेसर कलां-सिंदेसर खुर्द, मोखमपुरा पूर्वी ब्लॉक, बामनिया
अजमेरकायड़, घुघरा, तीखी, सावर

… शेष 3 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें

  • रामपुरा आगूचा ➜ 1977 के सर्वे में खोज, 1982 से खनन; सबसे उत्तम सीसा-जस्ता।
  • सिंदेसर खुर्द ➜ मिश्रित सांद्र से सीसा-जस्ता के साथ चाँदी और ताँबा भी; सबसे ज़्यादा उत्पादन क्षमता वाली खान।
  • इंडस्ट्रियल ज़िंक पार्क ➜ हिंदुस्तान ज़िंक, चंदेरिया (चित्तौड़गढ़) में बनेगा।

हिंदुस्तान ज़िंक लिमिटेड (HZL)

देबारी (उदयपुर), 10 जनवरी 1966; मुख्यालय उदयपुर; पुराना नाम मेटल कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया; देश की सबसे बड़ी सीसा-जस्ता-चाँदी खनन कम्पनी और सबसे बड़ी सल्फ़्यूरिक एसिड उत्पादक; अब वेदांता समूह के पास।

स्मेल्टरकहाँवर्ष
ज़िंक स्मेल्टरदेबारी (उदयपुर)1968
सीसा-जस्ता स्मेल्टर — एशिया का सबसे बड़ा ज़िंक स्मेल्टर, ब्रिटेन के सहयोग सेचंदेरिया (चित्तौड़गढ़)1991
दरीबा स्मेल्टिंग कॉम्प्लेक्स (सीसा व जस्ता)दरीबा (राजसमंद)2010

HZL की 8 खानें — रामपुरा आगूचा (भीलवाड़ा), कायड़ (अजमेर), राजपुरा दरीबा व सिंदेसर खुर्द (राजसमंद), जावरमाला व बरोई (उदयपुर), मोचिया व बलारिया (सलूम्बर)।

5. ताँबा

  • लाल-भूरे रंग की, खिंचने वाली (तन्य), विद्युत की सुचालक धातु; अयस्क में केवल 1–3% धातु; आग्नेय, अवसादी और कायांतरित चट्टानों में।
  • उपयोग ➜ बिजली के उपकरण, तार, बल्ब, मोटर-इंजन, बर्तन, ताले, घड़ियाँ।
  • अयस्क ➜ सल्फ़ाइड, ऑक्साइड, कार्बोनेट; सह-उत्पाद सल्फ़्यूरिक एसिड से सुपर फ़ॉस्फ़ेट खाद।
ज़िलाक्षेत्र
झुंझुनूँबनवास, ढोलामाला, चिनवोरी, बरखेड़ा, सतकुई, सुरहरी, टुंडा, करमारी, अकवाली, कोलिहान, मदान-कुदान (खेतड़ी-सिंघाना), बबाई, बोकरी, मालवाली; खेतड़ी-सिंघाना पट्टी — सिंघाना (झुंझुनूँ) से रघुनाथगढ़ (सीकर) तक
अलवरखो-दरीबा, भगोनी, थानागाजी, कुशलगढ़, सेनपुरी, भगत का बास, मुंडियावास, खेड़ा — सांद्र गलाने को खेतड़ी भेजा जाता है
भीलवाड़ापुर-दरीबा, देवपुरा-बनेड़ा ब्लॉक, देवतलाई, बनेड़ा; चाँदगढ़ (कोटड़ी) में लौह खोज के दौरान ताँबे के संकेत

हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड — खेतड़ी, 9 नवम्बर 1967; मुख्यालय कोलकाता; अमेरिका की वेस्टर्न नैप इंजीनियरिंग के सहयोग से; इकाई खेतड़ी कॉपर कॉम्प्लेक्स — 5 फ़रवरी 1975 से स्मेल्टर, 2008 में बंद; अब अयस्क दूसरी रिफ़ाइनरियों में भेजा जाता है। मई 2024 में कोलिहान खान में दुर्घटना।

याद रखें: स्कूल व्याख्याता 2024 — कुशलगढ़, सेनपुरी और भगत का बास की ताँबा खानें — अलवर।

6. चाँदी व टंगस्टन

चाँदी

  • सीसा-जस्ता या ताँबे के साथ मिलती है; सफ़ेद चमकीली, सुचालक, तन्य और आघातवर्धनीय; बहुमूल्य धातु।
  • उपयोग ➜ आभूषण, सिक्के, रासायनिक फ़ोटोग्राफ़ी, दवाएँ।
  • मुख्य अयस्क अर्जेंटाइट (87% धातु); अन्य — पाइराजिराइट (60%), स्टेफ़ेनाइट (70%), हॉर्न सिल्वर (75%)।

टंगस्टन (वुलफ़्रेम)

  • सामरिक धातु; भारी, कठोर, बहुत ऊँचा गलनांक; हीरे के बाद दूसरी सबसे कठोर।
  • उपयोग ➜ बल्ब, इस्पात को कठोर बनाना, काटने के औज़ार, पारा दिष्टकारी, एक्स-रे ट्यूब।
  • अयस्क ➜ वुलफ़्रेमाइट और शीलाइट (ग्रेनाइट के पास क्वार्ट्ज़ शिराओं में); अन्य — ह्यूबनेराइट, फ़ेरबेराइट।
  • भंडार ➜ कर्नाटक 41%, राजस्थान 27%, आंध्र प्रदेश 17%; उत्पादन — राजस्थान और पश्चिम बंगाल; कभी देश का 75% राजस्थान से, अब खनन बंद।

याद रखें: जूनियर इंस्ट्रक्टर 2024–25 — डेगाना खानें नागौर ज़िले में।

7. लौह अयस्क

  • लोहा शुद्ध रूप में नहीं मिलता ➜ अयस्क/यौगिक में; उद्योगों का मूल खनिज और रीढ़।
  • भारत के दो अयस्क ➜ मैग्नेटाइट (70% लोहा) और हेमेटाइट (50–60%); देश और राज्य दोनों में ज़्यादातर हेमेटाइट।
  • देश के प्रसिद्ध क्षेत्र ➜ सिंहभूम (झारखंड), मयूरभंज, क्योंझर (ओडिशा), बैलाडीला (छत्तीसगढ़); सबसे ज़्यादा ओडिशा (54.44%)।
ज़िलाक्षेत्र
जयपुरमोरीजा-बानोल (चौमूँ-सामोद), रावसोला, बोमनी टाटेरी, बगावास, भट्टों की गली
दौसानीमला-राइसेला, लालसोट
सीकरराजपुर-नानावास-टोडा-चिपलाटा, थोई, बनिया का बास, रामपुरा, डाबला
झुंझुनूँडाबला-सिंघाना, बगोली, सराय पंचलगी
  • पहला लौह-अयस्क बेनिफ़िसिएशन संयंत्र — पुर की पहाड़ियाँ (भीलवाड़ा), जिंदल सॉ, शिलान्यास 2011, निर्माणाधीन।
  • बागावास ब्लॉक ➜ विराटनगर (कोटपूतली-बहरोड़) के पास बागावास आयरन ओर माइनिंग ब्लॉक की ई-नीलामी में 452% प्रीमियम — देश के खनन नीलामी इतिहास में सबसे ज़्यादा।

8. मैंगनीज़ व दुर्लभ धातुएँ

मैंगनीज़

  • अवसादी चट्टानों में; राज्य में कम; धातु अंश 45–62%; अयस्क — साइलोमेलीन, पायरोलुसाइट, ब्राउनाइट।
  • उपयोग ➜ इस्पात, रसायन, शुष्क सेल, हवाई जहाज़, पोटैशियम परमैंगनेट, ऑक्सीजन, क्लोरीन, ब्लीचिंग, उर्वरक, रंग, काँच।
  • भंडार में देश में पहला ओडिशा (44%); उत्पादन में पहला मध्य प्रदेश (33%); राजस्थान छठा।
ज़िलाक्षेत्र
बाँसवाड़ागरड़िया से रातीमौरी पट्टी — लीलवानी, नरड़िया, कांसला, तलवाड़ा, कालाखूंटा, सागवा, तिम्मा मोरी, सिवनिया, खेड़िया-बोहदिया, सींग लकाई, गोडक-बारीखूंटा, घटिया, इटाला, काछला; नए — घाटोल के कालाखूंटा, ताम्बेसरा, रूपाखेड़ा (~24 वर्ग किमी पट्टी; रूपाखेड़ा व ताम्बेसरा ब्लॉक की ई-नीलामी)
उदयपुरदेबारी, सरूपसर, रामोसेन, बड़ी सर, छोटी सर
राजसमंदनाथद्वारा, नेगड़िया

बेरीलियम

एल्युमिनियम से भी हल्की धातु; बेरिल से मिलती है (हल्का हरा, हरा, पीला, सफ़ेद; टूटने पर पारदर्शी); परमाणु भट्टियों में मंदक और रासायनिक उद्योग में; ख़रीदने का एकाधिकार भारतीय सेना को। राज्य में 11–14% वाला उत्तम बेरिल; उत्पादक राज्य — राजस्थान और बिहार। खानें — शिकारबाड़ी, सिलेका (उदयपुर), आमेट (राजसमंद), गुजरवाड़ा, बुचारा (जयपुर), चम्पागुड़ा (सीकर), तिलोली, देवड़ा, भूणास (भीलवाड़ा), चुरला, लोहागल, मकरेरा, बांदर सिंदरी (अजमेर)।

रेयर अर्थ तत्व

  • इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑयल रिफ़ाइनरी, काँच, स्मार्टफ़ोन, टीवी, कैमरे, बल्ब में।
  • देवड़ा पहाड़ियाँ ➜ रेडाना (बाड़मेर) और सिवाना (बालोतरा) में विशाल भंडार; भीलवाड़ा की गुरला पहाड़ियों (फूलिया, उम्मेदपुरा, भीमपुरा) में संकेत।
  • गुड़ामालानी (बाड़मेर) ➜ दुनिया के 17 रेयर अर्थ तत्वों में से लैंथेनम और सीरियम — LCD-प्लाज़्मा पैनल, एक्स-रे फ़िल्म, हैलोजन लैम्प।

निकिल-क्रोमियम — डूँगरपुर के रोहनवाड़ा, खानमीन क्षेत्र में; GSI ने निकिल-क्रोमियम के 4 और फ़्लोराइट का 1 ब्लॉक चिह्नित किया।

9. सोना

  • कभी मुक्त रूप में नहीं, चाँदी आदि के साथ; सबसे ज़्यादा तन्य धातु; आभूषण, इलेक्ट्रॉनिक्स, दवाएँ।
  • भंडार में देश में पहला बिहार (44%), दूसरा राजस्थान (25%); उत्पादन लगभग पूरा कर्नाटक (कोलार, हट्टी); भारत दुनिया का सबसे बड़ा उपभोक्ता।
  • राज्य में अभी खनन शुरू नहीं हुआ; कुल 118.88 मिलियन टन स्वर्ण अयस्क में से 105.81 मिलियन टन भूकिया-जगपुरा-देलवाड़ा पट्टी (बाँसवाड़ा) में।
  • आनंदपुर भूकिया और जगपुरा भूकिया की खोज ऑस्ट्रेलियाई कम्पनी इंडो गोल्ड ने की।
  • 2006 के सर्वे में छछुंदरा, जोरावरपुरा (भिनाय, अजमेर) में सोना-चाँदी की संभावना।

रिवीजन पॉइंटर्स

  1. राज्य में 81 प्रकार के खनिज मिलते हैं, जिनमें से 58 का खनन हो रहा है।
  2. सीसा-जस्ता अयस्क, सेलेनाइट, वोलस्टोनाइट, जैस्पर और गार्नेट (तामड़ा) का एकमात्र उत्पादक राजस्थान है।
  3. प्रधान खनिजों पर MCR 1960 लागू है और रॉयल्टी केंद्र तय करता है; अप्रधान खनिज MMCR के तहत राज्य सरकार के अधीन हैं।
  4. 2015 में केंद्र ने जिप्सम, बेराइट्स, डोलोमाइट जैसे 31 प्रधान खनिज अप्रधान सूची में डाल दिए।
  5. RSMDC की स्थापना 27 सितम्बर 1979 को हुई और 20 फ़रवरी 2003 को वह RSMML में मिल गया।
  6. सीसा-जस्ता के भंडार में राज्य पहला (लगभग 89%) है; सबसे ज़्यादा उदयपुर में, फिर राजसमंद और भीलवाड़ा में।
  7. हिंदुस्तान ज़िंक की शुरुआत देबारी (उदयपुर) में 10 जनवरी 1966 को हुई; चंदेरिया (चित्तौड़गढ़) का स्मेल्टर 1991 का है।
  8. खेतड़ी कॉपर कॉम्प्लेक्स का स्मेल्टर 5 फ़रवरी 1975 से चला और 2008 में बंद हो गया।
  9. सोने के भंडार में दूसरा स्थान राजस्थान का (25%) है, पहला बिहार का (44%); सबसे बड़ा भंडार भूकिया-जगपुरा-देलवाड़ा पट्टी (बाँसवाड़ा) में है और खनन अभी शुरू नहीं हुआ।

अगले भाग में अभ्रक, एस्बेस्टॉस, फ़ेल्सपार जैसे अधात्विक खनिज, उद्योगों में काम आने वाली मिट्टियाँ और पन्ना, तामड़ा, हीरा, जैस्पर व सुलेमानी पत्थर।

पिछला भाग: राजस्थान में कृषि एवं प्रमुख फसलें: राज्य की योजनाएँ

अगला भाग: राजस्थान के खनिज संसाधन: अधात्विक खनिज एवं मिट्टियाँ व औद्योगिक बालू

इन्हें भी पढ़ें: राजस्थान में उद्योग · राजस्थान में ऊर्जा संसाधन

पूरी श्रृंखला: राजस्थान का भूगोल — सभी अध्याय · राजस्थान जी.के. नोट्स — सभी विषय

इस अध्याय की पूरी तैयारी चाहिए? ऊपर दिए नोट्स हर खंड का चुना हुआ हिस्सा हैं। पूरी तालिकाएँ, बाक़ी बिंदु, याद रखने की ट्रिक, नक्शे-चित्र और अभ्यास-प्रश्न राजस्थान के खनिज संसाधन के माइंड मैप में हैं। राजस्थान जी.के. के सभी विषय एक ही पास में उपलब्ध हैं।
इस विषय का माइंड मैप ➜Complete Rajasthan GK पास देखें

Useful for these exams