राजस्थान में उद्योग: खनिज-आधारित उद्योग (भाग 2) एवं हथकरघा, हस्तशिल्प व GI – Rajasthan Geography Chapter 52

सीमेंट, काँच और ग्रेनाइट से पचपदरा रिफ़ाइनरी, खाद-रसायन, हथकरघा, हस्तशिल्प, पंच गौरव और एक ज़िला-एक उत्पाद तक।

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In this chapter (12 sections)
  1. काँच, सिरेमिक, मार्बल व अन्य
  2. पचपदरा रिफ़ाइनरी
  3. खाद व रसायन उद्योग
  4. छोटे-मोटे उद्योगों के केंद्र
  5. हथकरघा उद्योग
  6. हस्तशिल्प व उनके केंद्र
  7. भौगोलिक संकेतक (GI)
  8. पंच गौरव
  9. एक ज़िला-एक उत्पाद (ODOP)
  10. RIICO व RFC
  11. RAJSICO
  12. रैपिड फायर तथ्य

किसी राज्य के उद्योग समझने का आसान तरीका है यह देखना कि कच्चा माल कहाँ मिलता है और कारख़ाना वहीं क्यों लगा। राजस्थान में धौलपुर का काँच, जालौर का ग्रेनाइट और कोटा की खाद इसी तर्क से जुड़े हैं। इस भाग में काँच-सिरेमिक-मार्बल, पचपदरा रिफ़ाइनरी, खाद-रसायन, हथकरघा-हस्तशिल्प, GI, पंच गौरव, ODOP, RIICO-RFC और RAJSICO क्रम से दिए गए हैं।

इस विषय का इंटरैक्टिव माइंड मैप — राजस्थान में उद्योग, 1 चॉक-बोर्ड चित्र, 17 नक्शे, 4 चार्ट, 30 फ्लैशकार्ड और 25 अभ्यास-प्रश्न के साथ। यहाँ हर खंड के चुने हुए बिंदु हैं; पूरी तालिकाएँ, शेष तथ्य और रटने की ट्रिक माइंड मैप में हैं।
माइंड मैप खोलें ➜

1. काँच, सिरेमिक, मार्बल व अन्य

काँच उद्योग

कच्चा माल — काँच बालुका (सिलिका सैंड), सोडा ऐश / सोडा सल्फ़ेट, शोरा; 1600–1650° पर पिघलाते हैं। काँच-बालुका वाले ज़िले — जयपुर, सवाई माधोपुर, बूँदी, बीकानेर। कच्चा माल आसानी से मिलता है, इसलिए राज्य में इसकी सबसे ज़्यादा संभावना; काँच का सबसे ज़्यादा विकास — धौलपुर।

कारख़ानाकहाँख़ास बात
धौलपुर ग्लास वर्क्सधौलपुर1000 टन/वर्ष; गंगानगर शुगर मिल्स ने लिया; उसी के लिए काँच की बोतलें
हाई-टेक प्रिसिज़न ग्लास वर्क्सधौलपुरसार्वजनिक, गंगानगर शुगर मिल्स के अधीन; अब बंद
सेमकोर ग्लास इंडस्ट्रीज़कोटाटीवी पिक्चर ट्यूब (बंद)

सिरेमिक

  • सिरेमिक्स कॉम्प्लेक्स ➜ खारा (बीकानेर), निजी कम्पनी ववासी टेलीजेंस लिमिटेड; सिरेमिक मिट्टी परीक्षण प्रयोगशाला और प्रस्तावित सिलिकॉन सेज़ — बीकानेर।
  • घिलोठ औद्योगिक क्षेत्र (नीमराणा, कोटपूतली-बहरोड़) — काँच-सिरेमिक हब; राज्य का पहला सिरेमिक औद्योगिक ज़ोन।
  • CERAD (सिरेमिक इलेक्ट्रिकल अनुसंधान एवं विकास केंद्र) — बीकानेर, 2007; सिरेमिक सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस — बीकानेर (बजट 2024–25)।
सिरेमिक कम्पनीकहाँ
बीकानेर सिरेमिक्सबीकानेर
कजारिया सिरेमिक्सगैलपुर (खैरथल-तिजारा)
कजारिया सिरेमिक्समालूताना (अलवर)

… शेष 2 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें

ग्रेनाइट व संगमरमर

सबसे बड़ा ग्रेनाइट प्रसंस्करण केंद्र — जालौर (गुलाबी ग्रेनाइट); इकाइयाँ जालौर, बाड़मेर, पाली, सिरोही, जोधपुर में। भारत की सबसे बड़ी ग्रेनाइट मंडी और सबसे बड़ा संगमरमर प्रसंस्करण केंद्र — किशनगढ़।

टायर व इंजीनियरिंग

इकाईकहाँख़ास बात
JK टायरकांकरोली (राजसमंद)सबसे बड़ा टायर कारख़ाना
श्रीराम रेयॉन्स व टायरकोटा—
नेशनल इंजीनियरिंग इंडस्ट्रीज़ (NEI)जयपुरबॉल बेयरिंग — एशिया में सबसे बड़ी; पुराना नाम नेशनल बेयरिंग कम्पनी (NBC)
जयपुर मेटल्स एंड इलेक्ट्रिकल्सजयपुर, 30 अगस्त 1943बिजली के मीटर; बंद

… शेष 12 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें

फ़्लोरस्पार संयंत्र — डूँगरपुर; एलॉय स्टील — जयपुर, उदयपुर; सबसे बड़ा थ्रेशर केंद्र — अजीतगढ़ (सीकर); टीवी — J&K इलेक्ट्रॉनिक्स (कोटा), राजस्थान इलेक्ट्रॉनिक कॉर्पोरेशन (जयपुर)।

2. पचपदरा रिफ़ाइनरी

  • कम्पनी ➜ HPCL राजस्थान रिफ़ाइनरी लिमिटेड — 18 सितम्बर 2013
  • शिलान्यास ➜ 16 जनवरी 2018 — प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
  • हिस्सेदारी ➜ राज्य 26% (₹6321 करोड़), HPCL 74% (₹17,991 करोड़)

… शेष 3 बिंदु — पूरी सूची माइंड मैप में देखें

  • राज्य की पहली और देश की 26वीं रिफ़ाइनरी; देश की पहली पर्यावरण-हितैषी (BS-6) रिफ़ाइनरी; रिफ़ाइनरी और पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स एक साथ होने वाली देश की पहली परियोजना।
  • अभी 200 कुओं से 1.15 लाख बैरल; इसे 5 लाख बैरल प्रतिदिन तक ले जाना है; लगभग 84% काम पूरा; चारदीवारी, सड़कें, जलाशय, बिजली का काम हो चुका।
  • पानी इंदिरा गांधी नहर से, नाचना (जैसलमेर) के जलाशय के रास्ते।

3. खाद व रसायन उद्योग

खाद उत्पादन में विश्व में चीन पहला, भारत तीसरा; भारत में सबसे ज़्यादा गुजरात; राज्य में कोटा पहला, चित्तौड़गढ़ दूसरा।

कारख़ानाकहाँख़ास बात
राष्ट्रीय केमिकल्स एंड फ़र्टिलाइज़र्सचंदेरिया (चित्तौड़गढ़)उत्तर भारत का पहला DAP कारख़ाना
चम्बल फ़र्टिलाइज़र्स एंड केमिकल्सगढ़ेपान (कोटा), 2 इकाइयाँनिजी क्षेत्र में देश का सबसे बड़ा यूरिया संयंत्र; के.के. बिड़ला; गैस-आधारित
श्रीराम केमिकल्स एंड फ़र्टिलाइज़र्सश्रीरामनगर (कोटा)राज्य का सबसे बड़ा खाद कारख़ाना; यूरिया, कास्टिक सोडा, ब्लीचिंग पाउडर, हाइड्रोक्लोरिक एसिड
DCM श्रीराम इंडस्ट्रीज़कोटासोडियम सल्फ़ेट व रेयॉन

4. छोटे-मोटे उद्योगों के केंद्र

उद्योगकेंद्र
केबलओरिएंटल पावर केबल्स (कोटा), विमल केबल्स (जयपुर), किंग्स केबल्स (नोखा, बीकानेर), केबल्स इंडस्ट्रीज़ (कोटा व पिपलिया, पाली)
हैवेल्स केबलअलवर — देश का सबसे बड़ा एकीकृत केबल कारख़ाना
हैवेल्स वॉटर हीटरनीमराणा
माचिसअजमेर, अलवर

“राजस्थान का स्कॉटलैंड” — अलवर (शराब उत्पादन के लिए)।

5. हथकरघा उद्योग

  • असंगठित क्षेत्र, जो खेती के बाद सबसे ज़्यादा रोज़गार देता है।
  • चौथी अखिल भारतीय हथकरघा गणना 2019–20 — राज्य में 8770 बुनकर; लगभग दो-तिहाई ग्रामीण।
  • ज़्यादातर बुनकर अनुसूचित जाति और मुस्लिम वर्ग से — दोनों आर्थिक-सामाजिक रूप से पिछड़े।

प्रमुख उत्पाद — कोटा डोरिया साड़ी, पट्टू, खेस, रेजा, लट्ठा, बरड़ी, कम्बल, लोई, शॉल, बगरू व सांगानेरी छपी चादरें, तौलिये, टेरीकॉट, गॉज़, बैंडेज, दरियाँ, जाजम।

संस्थाकहाँ / कबकाम
राजस्थान राज्य बुनकर सहकारी संघजयपुर, 26 अगस्त 1957500 से ज़्यादा प्राथमिक सहकारी समितियाँ सदस्य; सहकारिता से हथकरघा की प्रगति और बुनकरों की समस्याओं का हल
राजस्थान राज्य हथकरघा विकास निगमजयपुर, अप्रैल 19846 क्षेत्रीय कार्यालय (जयपुर, बीकानेर, जोधपुर, अजमेर, कोटा, उदयपुर) और 16 विपणन इकाइयाँ; प्रशिक्षण, कच्चा माल, मदद
बुनकर सेवा केंद्रजयपुरविकास आयुक्त (हथकरघा) के अधीन; डिज़ाइन, रँगाई-छपाई के नमूने, तकनीक सुधार, प्रदर्शनियाँ-सेमिनार

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस — 7 अगस्त; राष्ट्रीय लघु उद्योग दिवस — 30 अगस्त।

6. हस्तशिल्प व उनके केंद्र

हस्तकलाकेंद्र
अजरख प्रिंट, मलीर प्रिंटबालोतरा
मीनाकारीजयपुर, नाथद्वारा, अलवर
उस्ता कला (मुनव्वती)बीकानेर
दाबू प्रिंट, आजम प्रिंटआकोला (चित्तौड़गढ़)

7. भौगोलिक संकेतक (GI)

  • संसद ने 1999 में भौगोलिक संकेतक (पंजीकरण एवं संरक्षण) अधिनियम बनाया — किसी क्षेत्र की ख़ास वस्तु पर उसका क़ानूनी अधिकार; जैसे बनारसी साड़ी, मैसूर सिल्क, कोल्हापुरी चप्पल, दार्जिलिंग चाय।
  • GI मिलने के बाद उस क्षेत्र से बाहर का कोई व्यक्ति या कम्पनी पैकिंग पर उस नाम का इस्तेमाल नहीं कर सकता — दूसरी जगहों पर ग़ैर-क़ानूनी इस्तेमाल रुकता है।
  • टैग 10 साल तक मान्य, फिर नवीनीकरण; भारत का पहला GI — दार्जिलिंग चाय (2004); सूची हर दो साल में अद्यतन।
GI वस्तुक्षेत्रश्रेणी
बीकानेरी भुजिया (2011)बीकानेरविनिर्मित (खाद्य)
मकराना मार्बल (2015)मकराना (डीडवाना-कुचामन)प्राकृतिक वस्तु
सोजत मेहंदी (सितम्बर 2021)सोजत (पाली)कृषि उत्पाद
कोटा डोरिया + लोगोकोटाहस्तशिल्प

जिनके लिए उद्योग विभाग ने आवेदन किया

ज़िलाउत्पाद
चित्तौड़गढ़आकोला दाबू प्रिंट
भरतपुरभुसावर आचार-मुरब्बा
अलवरकलाकंद
उदयपुरग्रीन मार्बल

8. पंच गौरव

17 दिसम्बर 2024 को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने शुरू किया — हर ज़िले में एक उपज, एक वनस्पति प्रजाति, एक उत्पाद, एक पर्यटन स्थल और एक खेल की पहचान और प्रचार; अगले वर्ष ₹550 करोड़ (बजट 2025–26)।

गौरवनोडल विभाग
एक उपजकृषि
एक वनस्पतिवन
एक उत्पादउद्योग
ज़िलाउपजवनस्पतिउत्पादपर्यटन स्थलखेल
अजमेरगुलाबनीमग्रेनाइट-मार्बल उत्पादपुष्कर तीर्थहॉकी
अलवरप्याज़अर्जुनऑटोमोबाइल पार्ट्ससरिस्का टाइगर रिज़र्वकुश्ती
बालोतराअनाररोहिड़ाटेक्सटाइल उत्पादनाकोड़ा जैन मंदिरक्रिकेट
बाँसवाड़ाआममहुआग्रेनाइट उत्पादत्रिपुरा सुंदरी मंदिरफ़ुटबॉल

ट्रिक: जिन ज़िलों का पंच गौरव खेल कुश्ती है — अलवर, भरतपुर, डीग, खैरथल-तिजारा, कोटा, कोटपूतली-बहरोड़ (सब पूर्वी राजस्थान)।

9. एक ज़िला-एक उत्पाद (ODOP)

  • उद्देश्य ➜ हर ज़िले में निर्यात क्षमता वाले उत्पाद-सेवाएँ पहचानकर ज़िले को उत्पाद केंद्र बनाना; यह योजना केंद्र के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत।
  • राजस्थान ODOP नीति 2024 ➜ 8 दिसम्बर 2024 को घोषित; हर ज़िले को निर्यात हब बनाना, अनोखे उत्पाद और विरासत को दुनिया तक ले जाना; हर साल ₹100 करोड़ (बजट 2024–25)।
  • नई दिल्ली के “आत्मनिर्भर भारत उत्सव 2024” में ODOP के लिए राजस्थान को कांस्य (दूसरा रनर-अप) पुरस्कार।
ज़िलाउत्पाद
अजमेरग्रेनाइट
अलवरऑटोमोबाइल पार्ट्स
बाँसवाड़ासिंथेटिक यार्न
बाराँसोयाबीन

10. RIICO व RFC

RIICO — राजस्थान राज्य औद्योगिक विकास एवं विनियोजन निगम

काल / क्रमघटनाविवरण
28 मार्च 1969शुरुआत“राजस्थान राज्य उद्योग एवं खनिज विकास निगम” (RIMDC)
नवम्बर 1979खनिज अलग“राजस्थान राज्य खनिज विकास निगम” (RSMDC) बना
जनवरी 1980RIICOस्वतंत्र कम्पनी के रूप में; मुख्यालय जयपुर

काम — बड़े, मध्यम और छोटे उद्योगों को लम्बी अवधि का ऋण और संसाधन, औद्योगिक क्षेत्र और ढाँचा बनाना, ज़मीन आवंटन, आयात-निर्यात, प्रवासी भारतीयों को सुविधा, निवेश लाना। राज्य में औद्योगिक विकास की शीर्ष संस्था; राज्य में सेज़ विकास की प्रमुख एजेंसी भी।

RFC — राजस्थान वित्त निगम

राज्य वित्त निगम अधिनियम 1951 के तहत 17 जनवरी 1955; मुख्यालय जयपुर। नई सूक्ष्म-लघु-मध्यम इकाइयों की स्थापना, विस्तार और आधुनिकीकरण के लिए ₹20 करोड़ तक ऋण।

RFC की ऋण योजनाकिसके लिए
सेमफ़ेक्सभूतपूर्व सैनिकों को स्वरोज़गार
शिल्पबाड़ी (1987–88)शहरी-ग्रामीण दस्तकार और शिल्पकार
टेक्नोक्रेट योजनातकनीकी रूप से प्रशिक्षित युवाओं को ₹20 लाख तक
सिंगल विंडो (2000)₹200 लाख तक लागत वाली लघु इकाइयाँ

11. RAJSICO

3 जून 1961, मुख्यालय जयपुर; 1975 में सार्वजनिक लिमिटेड कम्पनी। लघु और हस्तशिल्प इकाइयों को वित्तीय मदद व प्रोत्साहन, कच्चा माल, विपणन, सेमिनार, प्रदर्शनियाँ, व्यापार मेले, गलीचा प्रशिक्षण। SAIL से लोहा, इस्पात, कोयला लेकर 50 लघु इकाइयों में बाँटता है।

  • राजस्थली एम्पोरियम ➜ RAJSICO का शोरूम; केंद्रीय भंडार से सीधे शिल्पियों से माल ख़रीदकर जयपुर, दिल्ली, उदयपुर, माउंट आबू, आगरा, मुम्बई, कोलकाता के विक्रय केंद्रों से बेचता है; राजस्थली कॉम्प्लेक्स, आमेर — मार्च 2007।
  • एयर कार्गो कॉम्प्लेक्स ➜ सांगानेर (जयपुर), 1979; केंद्र की व्यापार अवसंरचना योजना से ICD मानसरोवर में नया एयर कार्गो भवन।
  • मयूर बीड़ी (टोंक) और हस्तशिल्प डिज़ाइन व शोध संस्थान (जयपुर) — RAJSICO के।

इनलैंड कंटेनर डिपो (शुष्क बंदरगाह) — कुल 8

RAJSICO के 4वर्षCONCOR के 4
मानसरोवर (जयपुर) — पहला1989जोधपुर
बासनी (जोधपुर)1995जयपुर
भिवाड़ी1999रावठा रोड (कोटा)

अब आयात-निर्यात सिर्फ़ जयपुर और जोधपुर से; भिवाड़ी और भीलवाड़ा के ICD 2009–10 में बंद हुए; भीलवाड़ा में नया कंटेनर डिपो बन रहा है।

RAJSICO के प्रशिक्षण केंद्र

केंद्रकहाँ
मुनव्वती (उस्ता) कलाबीकानेर
फड़ चित्रकलाशाहपुरा (भीलवाड़ा)
कोटा-बूँदी चित्रकलाकोटा

12. रैपिड फायर तथ्य

  • सबसे बड़ा ग्रेनाइट प्रसंस्करण केंद्र ➜ जालौर (गुलाबी ग्रेनाइट)
  • भारत की सबसे बड़ी ग्रेनाइट मंडी व संगमरमर केंद्र ➜ किशनगढ़
  • काँच का सबसे ज़्यादा विकास ➜ धौलपुर
  • पचपदरा रिफ़ाइनरी की हिस्सेदारी ➜ राज्य 26%, HPCL 74%
  • उत्तर भारत का पहला DAP कारख़ाना ➜ चंदेरिया (चित्तौड़गढ़)
  • राज्य का सबसे बड़ा खाद कारख़ाना ➜ श्रीराम केमिकल्स एंड फ़र्टिलाइज़र्स, श्रीरामनगर (कोटा)
  • पंच गौरव की शुरुआत ➜ 17 दिसम्बर 2024, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा
  • राजस्थान ODOP नीति ➜ 8 दिसम्बर 2024 को घोषित
  • RIICO स्वतंत्र कम्पनी बना ➜ जनवरी 1980; RFC की स्थापना 17 जनवरी 1955

अगले भाग में RUDA, खादी बोर्ड और अन्य संस्थाएँ, फिर RIICO के औद्योगिक क्षेत्र, ख़ास पार्क और ज़ोन, सेज़, EPIP और दिल्ली-मुम्बई औद्योगिक गलियारा।

पिछला भाग: राजस्थान में उद्योग: कृषि-आधारित उद्योग (भाग 2) एवं खनिज-आधारित उद्योग (भाग 1)

अगला भाग: राजस्थान में उद्योग: औद्योगिक संस्थाएँ (भाग 2) एवं औद्योगिक क्षेत्र, पार्क, सेज़ व DMIC

इन्हें भी पढ़ें: राजस्थान के खनिज संसाधन · राजस्थान में परिवहन के साधन

पूरी श्रृंखला: राजस्थान का भूगोल — सभी अध्याय · राजस्थान जी.के. नोट्स — सभी विषय

इस अध्याय की पूरी तैयारी चाहिए? ऊपर दिए नोट्स हर खंड का चुना हुआ हिस्सा हैं। पूरी तालिकाएँ, बाक़ी बिंदु, याद रखने की ट्रिक, नक्शे-चित्र और अभ्यास-प्रश्न राजस्थान में उद्योग के माइंड मैप में हैं। राजस्थान जी.के. के सभी विषय एक ही पास में उपलब्ध हैं।
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