राजस्थान की झीलें: उदयपुर संभाग की झीलें (भाग 2) एवं अजमेर संभाग — पुष्कर व आनासागर – Rajasthan Geography Chapter 33

फतेहसागर, राजसमंद, पुष्कर, आनासागर समेत उदयपुर, अजमेर, कोटा, भरतपुर और जयपुर संभाग की झीलें।

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In this chapter (11 sections)
  1. फतेहसागर झील
  2. उदयसागर, स्वरूपसागर, बड़ी
  3. राजसमंद झील
  4. चित्तौड़, डूँगरपुर, बाँसवाड़ा
  5. पुष्कर झील
  6. पुष्कर — मंदिर व कथाएँ
  7. आनासागर, वरुणसागर, बीसलसर
  8. कोटा संभाग
  9. भरतपुर संभाग
  10. जयपुर संभाग
  11. रिवीजन पॉइंटर्स

झील के सवाल ज़्यादातर तीन बातों पर टिकते हैं — किसने बनवाई, कब बनी और उसका दूसरा नाम क्या है। इसलिए हर झील के साथ शासक, साल और उपनाम जोड़कर याद कीजिए। इस भाग में फतेहसागर, उदयसागर, राजसमंद, पुष्कर, अजमेर की झीलें, और कोटा, भरतपुर व जयपुर संभाग की झीलें क्रमवार दी गई हैं।

इस विषय का इंटरैक्टिव माइंड मैप — राजस्थान की झीलें, 5 चॉक-बोर्ड चित्र, 17 नक्शे, 27 फ्लैशकार्ड और 22 अभ्यास-प्रश्न के साथ। यहाँ हर खंड के चुने हुए बिंदु हैं; पूरी तालिकाएँ, शेष तथ्य और रटने की ट्रिक माइंड मैप में हैं।
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1. फतेहसागर झील

  • उपनाम ➜ देवाली तालाब, कनॉट बाँध।
  • 1688 में महाराणा जयसिंह ने देवाली गाँव के पास बनवाई — इसलिए “देवाली तालाब”।
  • नए बाँध की नींव ड्यूक ऑफ़ कनॉट ने रखी — “कनॉट बाँध”; 1888 में महाराणा फतेहसिंह के समय फिर बनी — “फतेहसागर”। झीलों को आपस में जोड़ने का श्रेय फतेहसिंह को।
  • बड़े टापू पर नेहरू उद्यान; पाल पर मछली घर।

… शेष 3 बिंदु — पूरी सूची माइंड मैप में देखें

सौर वेधशाला

  • एक टापू पर भारत की पहली सौर वेधशाला (1975–76); राज्य की सबसे बड़ी।
  • अमेरिका (कैलिफ़ोर्निया) की बिग बियर झील वाली वेधशाला की तर्ज़ पर; 1976 में डॉ. अरविंद भटनागर ने स्थापित की।
  • संचालन ➜ भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला (PRL), अहमदाबाद; 1981 में भारतीय अंतरिक्ष विभाग से जोड़ी गई।

2. उदयसागर, स्वरूपसागर, बड़ी

झीलनिर्माणख़ास बात
उदयसागरमहाराणा उदयसिंह, 1559–1565उदयपुर के पास आयड़ नदी रोककर; झील से आगे आयड़ बेड़च कहलाती है; पास में मोती महल; आयड़ किनारे आहड़ सभ्यता। कर्नल टॉड के अनुसार प्रताप ने मानसिंह को यहीं भोज दिया और यहीं अपमान वाली घटना हुई
स्वरूपसागरमहाराणा स्वरूप सिंह, 1857नहर जैसी संकरी झील — पिछोला को फतेहसागर से जोड़ती है
बड़ी झीलमहाराणा राजसिंहबड़ी गाँव में माँ जना कँवर की याद में; पुराना नाम “जियान सागर / जनासागर”; राज्य का पहला मत्स्य अभयारण्य

उदयपुर ज़िले में गोवर्धन सागर भी है।

3. राजसमंद झील

  • उपनाम ➜ राजसमुद्र, नौचौकी झील
  • निर्माता ➜ महाराणा राजसिंह
  • काल ➜ 1662–1676

… शेष 2 बिंदु — पूरी सूची माइंड मैप में देखें

  • अकाल राहत कार्य के रूप में बनी — लगभग 60,000 लोगों ने काम किया।
  • पाल का पहला पत्थर घेवर बाई ने रखा — राजसिंह के प्रमुख प्रबंधक दयालशाह की पत्नी; पाल पर घेवर माता का मंदिर — मान्यता है कि वे पति के बिना सती होने वाली अकेली माता थीं।
  • पास की पहाड़ी पर “दयालशाह का क़िला” — असल में जैन मंदिर।
  • उत्तरी किनारा ➜ नौचौकी पाल, संगमरमर की कलात्मक पाल।

… शेष 4 बिंदु — पूरी सूची माइंड मैप में देखें

राजप्रशस्ति

  • नौचौकी पाल पर 25 काले संगमरमर की शिलाओं पर 1916 संस्कृत श्लोक।
  • राजसिंह तक मेवाड़ का इतिहास ➜ “अमरकाव्य वंशावली” पर आधारित; इसमें मीणा जाति का भी उल्लेख।
  • विश्व का सबसे बड़ा संस्कृत शिलालेख; रचयिता रणछोड़ भट्ट तैलंग; राजसिंह को “विजयकटकातु” की उपाधि।

ध्यान दें: राजप्रशस्ति — राजसमंद (मेवाड़); रायसिंह प्रशस्ति — जूनागढ़, बीकानेर। दोनों अलग।

नंदसमंद (राजसमंद) — “राजसमंद की जीवनरेखा”।

4. चित्तौड़, डूँगरपुर, बाँसवाड़ा

झीलज़िलाख़ास बात
भूपालसागरचित्तौड़गढ़ (भूपालसागर क़स्बा)महाराणा भूपालसिंह; बनास पर बने मातृकुंडिया बाँध से पानी
गैबसागरडूँगरपुरउपनाम “एडवर्ड सागर बाँध”; महारावल गोपीनाथ; किनारे बादल महल (महारावल पुंजराज), कई मंदिर, विजय राजराजेश्वर शिवालय (महारावल विजयसिंह व पुत्र लक्ष्मणसिंह), कालीबाई स्मारक और विवेकानंद स्मारक
पुंजेला तालाबडूँगरपुर—

5. पुष्कर झील

पुष्कर झील ज्वालामुखी के लावे से बने गड्ढे में भरी है — कालाडेरा (क्रेटर) झील का प्रमुख उदाहरण। आकार अर्धचन्द्राकार।

  • राज्य की सबसे पुरानी प्राकृतिक मीठी झील, और मीठे पानी की सबसे बड़ी प्राकृतिक झील; सबसे पवित्र — और सबसे प्रदूषित भी।
  • पास से NH 58 (नया क्रमांक) गुज़रता है।
  • 52 घाट ➜ मान्यता है कि मंडोर के प्रतिहार शासक नाहरराव परिहार ने 944 ई. में बनवाए।

घाट

  • जनाना घाट / क्वीन मैरी घाट ➜ 1911 में क्वीन मैरी की भारत यात्रा की याद में; 1948 में गांधीजी की अस्थियाँ यहाँ विसर्जित हुईं, तब से गांधी घाट — 52 में सबसे बड़ा।
  • अन्य घाट ➜ वराह, गौ, ब्रह्म, वल्लभ।

मेला

कार्तिक पूर्णिमा का पुष्कर मेला — राज्य का सबसे सुंदर और रंगीन मेला; सबसे ज़्यादा विदेशी सैलानी; बड़ा पशु मेला; दीपदान की परम्परा।

ट्रिक: तीर्थों का मामा — पुष्कर; तीर्थों का भाँजा — मचकुंड (धौलपुर); तीर्थों की नानी — देवयानी (सांभर)।

6. पुष्कर — मंदिर व कथाएँ

मंदिर / भवनपहचान
ब्रह्मा मंदिरझील के किनारे; मूर्ति-स्थापना आदि गुरु शंकराचार्य; वर्तमान रूप गोकुलचंद पारीक; 2006 में राष्ट्रीय स्मारक
वराह मंदिरचौहान शासक अर्णोराज ने बनवाया
रंगनाथ जी मंदिरद्रविड़ शैली
वैकुंठ जी मंदिरडीडवाना के सेठ मगनीराम बांगड़

राज्य में अन्य ब्रह्मा मंदिर — छींछ (बाँसवाड़ा) और आसोतरा (बालोतरा)।

मान्यताएँ व इतिहास

  • मान्यता ➜ झील ब्रह्माजी के फूल से बनी; एक मत इसे पुष्करणा ब्राह्मणों की बनाई मानता है।
  • कहा जाता है कि विश्व का पहला यज्ञ इसी झील के किनारे हुआ।
  • मेनका ने विश्वामित्र की तपस्या यहीं भंग की; पास में भर्तृहरि की गुफ़ा और कण्व ऋषि का आश्रम।
  • मान्यता ➜ महाभारत युद्ध के बाद कौरवों-पांडवों का दिव्य मिलन यहीं हुआ।
  • कालिदास ने “अभिज्ञान शाकुन्तलम्” यहीं लिखा।

7. आनासागर, वरुणसागर, बीसलसर

आनासागर

  • पृथ्वीराज चौहान के दादा अर्णोराज (आनाजी) ने 1135–1137 में बनवाई।
  • तुर्क सेना को हराने के बाद ख़ून से सनी धरती को धोने के लिए तारागढ़ और नाग पहाड़ के बीच लूनी / चंद्रा नदी का पानी रोका; बांडी नदी का पानी भी आता है।
  • दौलत बाग़ ➜ जहाँगीर ने बनवाया, अब “सुभाष उद्यान”; यहीं जहाँगीर सर टॉमस रो से मिला; यहीं नूरजहाँ की माँ अस्मत बेगम ने गुलाब का इत्र बनाया।

वरुणसागर (फॉयसागर)

  • 1891–92 में अजमेर नगर परिषद ने अकाल राहत में बनवाया; अभियंता फॉय के नाम पर “फॉयसागर”; लागत ₹2 लाख 69 हज़ार।
  • उद्देश्य ➜ अजमेर को बांडी नदी की बाढ़ से बचाना; बांडी का पानी इसमें आता है और भरने पर अतिरिक्त पानी आनासागर में जाता है।
  • फ़रवरी 2025 में नया नाम “वरुणसागर”।

बीसलसर

चौहान शासक बीसलदेव (1152–1162) ने बनवाई; 2 टापू जिन पर “राजप्रासाद”; जहाँगीर ने किनारे महल बनवाया; अब वहाँ एक चर्च है। अजमेर की अन्य झीलें — जैनसागर, फूलसागर।

8. कोटा संभाग

झीलज़िलाख़ास बात
किशोर सागरकोटा1346 में बूँदी के राजकुमार धीरदेह ने बनवाई; बीच में जगमंदिर महल
दुगारी झीलबूँदीदुगारी गाँव के पास; “कनक सागर” कहलाती है
नवलसागरबूँदीगढ़ पैलेस के पास; “नवलखा झील”
जैतसागरबूँदीतारागढ़ के पास; पहले बूँदी शासक जैता मीणा ने बनवाई; 1588 में राव राजा सुर्जन सिंह की माँ रानी जयवंती ने जीर्णोद्धार करवाया; किनारे सुखमहल — राजा विष्णुसिंह ने बनवाया; रुडयार्ड किपलिंग यहीं ठहरे

9. भरतपुर संभाग

झीलज़िलाख़ास बात
मोती झीलभरतपुरमहाराजा सूरजमल; रूपारेल-बाणगंगा संगम पर बाँध बनाकर; “भरतपुर की लाइफ़ लाइन”; हरित शैवाल (नील-हरित शैवाल) से नाइट्रोजन युक्त खाद बनती है; किनारे कारगिल पार्क
सुजानगंगाभरतपुरअसल में झील नहीं, मोती झील से निकली नहर — लोहागढ़ दुर्ग की खाई भरती है; सूरजमल ने बनवाई
झील का बाड़ाबयाना (भरतपुर)—
रामसागरधौलपुरचारों ओर रामसागर अभयारण्य

10. जयपुर संभाग

झीलज़िलाख़ास बात
सिलीसेढ़अलवरपहाड़ियों से घिरी सुंदर झील — “राजस्थान का नंदनकानन”; जयपुर-अलवर मार्ग पर सरिस्का के पास; रूपारेल की एक सहायक नदी पर; महाराजा विनयसिंह ने पत्नी शीला की याद में बनवाई; 1845 का छह मंज़िला महल — आज RTDC का “होटल लेक पैलेस”; RTDC नौकायन कराता है; किनारे नाथ पंथ का भर्तृहरि मंदिर और गुफ़ा
धेला झीलअलवर—
मानसागर (जलमहल)जयपुरपहले मानसिंह प्रथम ने गर्भावती नदी पर बाँध बनवाया, बाद में सवाई जयसिंह ने मरम्मत करवाई; बीच में जलमहल — सवाई जयसिंह ने अश्वमेध यज्ञ के पंडितों के लिए बनवाया
मावठाआमेर (जयपुर)आमेर दुर्ग के पास

रिवीजन पॉइंटर्स

  1. फतेहसागर के उपनाम देवाली तालाब और कनॉट बाँध हैं; 1688 में महाराणा जयसिंह ने बनवाई और 1888 में फतेहसिंह के समय फिर बनी।
  2. भारत की पहली सौर वेधशाला फतेहसागर के टापू पर है (1975–76); संचालन भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला (PRL), अहमदाबाद करती है।
  3. उदयसागर महाराणा उदयसिंह ने 1559–1565 में आयड़ नदी रोककर बनवाया; बड़ी झील राज्य का पहला मत्स्य अभयारण्य है।
  4. राजसमंद झील महाराणा राजसिंह ने 1662–1676 में अकाल राहत कार्य के रूप में बनवाई; नौचौकी पाल पर राजप्रशस्ति है — विश्व का सबसे बड़ा संस्कृत शिलालेख।
  5. राजप्रशस्ति राजसमंद (मेवाड़) की है, जबकि रायसिंह प्रशस्ति जूनागढ़, बीकानेर की — दोनों अलग हैं।
  6. पुष्कर कालाडेरा (क्रेटर) झील का उदाहरण और राज्य की सबसे पुरानी प्राकृतिक मीठी झील है; 52 घाट हैं और कार्तिक पूर्णिमा को मेला भरता है।
  7. तीर्थों का मामा — पुष्कर; तीर्थों का भाँजा — मचकुंड (धौलपुर); तीर्थों की नानी — देवयानी (सांभर)।
  8. आनासागर अर्णोराज ने 1135–1137 में बनवाई; फॉयसागर को फ़रवरी 2025 में नया नाम «वरुणसागर» मिला।
  9. मोती झील को «भरतपुर की लाइफ़ लाइन» कहते हैं (महाराजा सूरजमल); सिलीसेढ़ (अलवर) «राजस्थान का नंदनकानन» कहलाती है।

अगले भाग में आबू की नक्की झील से लेकर कोलायत, गजनेर और घग्घर की झीलें, फिर मरुस्थल के कुएँ, कुंड, बावड़ियाँ और टाँके तथा झील संरक्षण व जल विरासत की सूची।

पिछला भाग: राजस्थान की झीलें: झीलें — मूल बातें एवं खारे पानी की झीलें

अगला भाग: राजस्थान की झीलें: जोधपुर व बीकानेर संभाग एवं बावड़ियाँ व जल स्थापत्य

इन्हें भी पढ़ें: राजस्थान का अपवाह तंत्र परिचय एवं वर्गीकरण · प्रमुख बाँध, सिंचाई परियोजनाएँ व जल संसाधन योजनाएँ

पूरी श्रृंखला: राजस्थान का भूगोल — सभी अध्याय · राजस्थान जी.के. नोट्स — सभी विषय

इस अध्याय की पूरी तैयारी चाहिए? ऊपर दिए नोट्स हर खंड का चुना हुआ हिस्सा हैं। पूरी तालिकाएँ, बाक़ी बिंदु, याद रखने की ट्रिक, नक्शे-चित्र और अभ्यास-प्रश्न राजस्थान की झीलें के माइंड मैप में हैं। राजस्थान जी.के. के सभी विषय एक ही पास में उपलब्ध हैं।
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