प्रमुख बाँध, सिंचाई परियोजनाएँ व जल संसाधन योजनाएँ: भरतपुर, जयपुर, अजमेर, जोधपुर संभाग – Rajasthan Geography Chapter 36

उदयपुर संभाग की सिंचाई परियोजनाएँ, राम जल सेतु लिंक परियोजना और बाक़ी संभागों के प्रमुख बाँध।

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In this chapter (14 sections)
  1. उच्च स्तरीय नहरें
  2. जाखम व डूँगरपुर-प्रतापगढ़ की परियोजनाएँ
  3. देवास व मानसी-वाकल
  4. उदयपुर संभाग की अन्य परियोजनाएँ
  5. राम जल सेतु लिंक परियोजना
  6. राम जल सेतु — चरण व लागत
  7. कोटा, बूँदी व बाराँ
  8. झालावाड़ की परियोजनाएँ
  9. भरतपुर व जयपुर संभाग
  10. अजमेर संभाग
  11. जोधपुर संभाग
  12. ज़िलेवार प्रमुख बाँध व तालाब
  13. बाँधों के “सबसे”
  14. रैपिड फायर तथ्य

बाँधों के अध्याय में सबसे ज़्यादा मेहनत एक तिकड़ी याद रखने में लगती है — कौन-सा बाँध, किस नदी पर और किस ज़िले में। इसीलिए यहाँ परियोजनाएँ संभाग के क्रम से रखी गई हैं। इस भाग में उच्च स्तरीय नहरें, जाखम, देवास सुरंगें, राम जल सेतु लिंक परियोजना, कोटा-झालावाड़ से जोधपुर संभाग तक की योजनाएँ, ज़िलेवार बाँध और बाँधों के «सबसे» वाले तथ्य दिए गए हैं।

इस विषय का इंटरैक्टिव माइंड मैप — प्रमुख बाँध, सिंचाई परियोजनाएँ व जल संसाधन योजनाएँ, 3 चॉक-बोर्ड चित्र, 18 नक्शे, 8 चार्ट, 26 फ्लैशकार्ड और 24 अभ्यास-प्रश्न के साथ। यहाँ हर खंड के चुने हुए बिंदु हैं; पूरी तालिकाएँ, शेष तथ्य और रटने की ट्रिक माइंड मैप में हैं।
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1. उच्च स्तरीय नहरें

पीपलखूँट हाई-लेवल कैनालमाही ऊपरी उच्च स्तरीय नहर
ज़िलाप्रतापगढ़बाँसवाड़ा
क्योंमाही बेसिन के अधिशेष पानी से पीपलखूँट तहसील के 16 गाँवों की 5000 हेक्टेयर बिना-कमांड ज़मीन में फव्वारा सिंचाई; साथ ही माही बाँध से 3.72 TMC पानी जाखम बाँध में डालनामाही की बायीं मुख्य नहर का तल 228.80 मी है, इसलिए 6 आदिवासी तहसीलों (बाँसवाड़ा, बागीदौरा, आनंदपुरी, कुशलगढ़, सज्जनगढ़, गांगड़ तलाई) के 338 गाँवों की ऊँची ज़मीन सिंचाई से वंचित थी
कैसे—माही बाँध नम्बर 1 से 105 किमी मुख्य नहर और वितरण प्रणाली, माइक्रो (फव्वारा) सिंचाई से 41,903 हेक्टेयर

… शेष 2 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें

2. जाखम व डूँगरपुर-प्रतापगढ़ की परियोजनाएँ

जाखम परियोजना — अनूपपुरा (प्रतापगढ़)

  • राज्य का सबसे ऊँचा बाँध — 81 मी ऊँचा, 253 मी लम्बा; शिलान्यास मोहनलाल सुखाड़िया ने किया।
  • जनजाति उपयोजना (TSP) के तहत बना — सबसे ज़्यादा लाभ आदिवासियों को; दो लघु पन बिजली इकाइयाँ (कुल 5.5 MW)।
  • नागरिया पिकअप बाँध ➜ नागरिया गाँव (प्रतापगढ़), जाखम बाँध से 13 किमी नीचे; दो नहरों से प्रतापगढ़ और सलूम्बर में सिंचाई।
परियोजनाख़ास बात
सोम कमला अम्बाकमला अम्बा गाँव (डूँगरपुर), सोम पर; आसपुर (डूँगरपुर) और सलूम्बर में सिंचाई
ढोलिया ग्राम सिंचाई परियोजनाराजस्थान जल क्षेत्र पुनर्संरचना परियोजना से — प्रतापगढ़ में करमोई नदी पर ढोलिया, और डूँगरपुर में सोम पर भभराना व वनवासा परियोजनाओं के लिए ₹101.12 करोड़
सोम कागदरखेरवाड़ा (उदयपुर), सोम पर

3. देवास व मानसी-वाकल

मोहनलाल सुखाड़िया देवास जल परियोजना

  • साबरमती का पानी उदयपुर की झीलों तक पहुँचाने के लिए।
  • पहला चरण ➜ अलसीगढ़ बाँध (गिर्वा, उदयपुर)।
  • दूसरा चरण ➜ आकोदड़ा बाँध (302 mcft); आकोदड़ा से बुझड़ा तक 11.05 किमी जल सुरंग — राज्य की सबसे लम्बी जल सुरंग; पानी बुझड़ा के पास अमरझोक नदी में, फिर सीसारमा नदी से पिछोला में।

… शेष 2 बिंदु — पूरी सूची माइंड मैप में देखें

मानसी-वाकल परियोजना

मानसी-वाकल नदियों का पानी पिछोला तक लाने के लिए; मानसी-वाकल बाँध — गोराण, झाड़ोल (उदयपुर); सहयोग — राज्य सरकार 70%, हिंदुस्तान ज़िंक 30%; अलसीगढ़ से उदरा घाटी तक 4.6 किमी सुरंग।

नदियों को जोड़ने की शुरुआत — मेवाड़

राजस्थान में नदियाँ जोड़ने की पहल 19वीं सदी के उत्तरार्ध में मेवाड़ में हुई — महाराणा फतेहसिंह ने 1890 में उदयपुर से 6 किमी दूर चिकलवास गाँव के पास आहड़ नदी पर बाँध बनवाकर चिकलवास नहर से पानी फतेहसागर तक पहुँचाया। उससे पहले महाराणा राजसिंह प्रथम ने उबेश्वर नदी को मोड़कर मोरवानी नदी में मिला दिया था।

4. उदयपुर संभाग की अन्य परियोजनाएँ

परियोजनाकहाँख़ास बात
बाघेरी का नाकाराजसमंद, बनास परइसी से बिनोल जलप्रदाय योजना
नंदसमंदनिचली ओडन (राजसमंद), बनास परराजसमंद को पेयजल और सिंचाई
गम्भीरी योजनानिम्बाहेड़ा (चित्तौड़गढ़)गम्भीरी पर मोथा व अनिया गाँवों के पास बाँध
औराई परियोजनाभोपालपुरा (चित्तौड़गढ़), औराई पर1967 में पूरी; चित्तौड़गढ़ और भीलवाड़ा में सिंचाई

… शेष 3 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें

5. राम जल सेतु लिंक परियोजना

  • पुराना नाम पार्वती-कालीसिंध-चम्बल लिंक परियोजना (PKC-ERCP)।
  • 28 जनवरी 2024 को नई दिल्ली में राजस्थान, मध्य प्रदेश और केंद्र सरकार के बीच MoU — केंद्रीय जल शक्ति मंत्री, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव की मौजूदगी में।
  • विचार ➜ कुनू, कूल, पार्वती, कालीसिंध और मेज उप-बेसिनों का अतिरिक्त मानसूनी पानी बनास, मोरेल, बाणगंगा, गम्भीर और पार्वती उप-बेसिनों में ले जाना।

पानी कहाँ से कहाँ

  1. कुनू · कूल · पार्वती · कालीसिंध · मेज
  2. बैराज और नहरें
  3. बनास · मोरेल · बाणगंगा · गम्भीर · पार्वती
  • पेयजल ➜ 17 ज़िले
  • नई सिंचाई ➜ 2,51,000 हेक्टेयर
  • अतिरिक्त पानी (पहले से सिंचित) ➜ 1,52,000 हेक्टेयर

5 बैराज और 1 बाँध

बैराज मुख्य रूप से पानी मोड़ने के लिए, बाँध पानी जमा करने के लिए।

क्रमसंरचनाज़िला / तहसीलनदी
1रामगढ़ बैराजबाराँ — किशनगंजकूल
2महलपुर बैराजबाराँ — मांगरोलपार्वती
3नवनेरा बैराजकोटा — दीगोदकालीसिंध — सबसे ज़्यादा भराव क्षमता; पानी मोड़ने में सबसे अहम

6. राम जल सेतु — चरण व लागत

चरण 1A

  • नवनेरा बैराज पूरा हो चुका; ईसरदा बाँध जून 2025 तक पूरा करने का प्रस्ताव।
  • पेयजल के लिए नवनेरा–गलवा–बीसलपुर–ईसरदा लिंक — अनुमानित लागत ₹14,200 करोड़ की DPR बनी।
  • इसमें रामगढ़ और महलपुर बैराज, रामगढ़ से महलपुर, नवनेरा से गलवा बाँध, बीसलपुर और ईसरदा तक पानी पहुँचाने की नहरें, पम्पिंग स्टेशन और पाइपलाइन।

चरण 1B — बजट 2024–25

  • मेज बैराज ➜ बूँदी
  • जवानपुरा धाबाई बाँध ➜ शाहपुरा (भीलवाड़ा)
  • डूँगरी बाँध और राठौड़ बैराज — सवाई माधोपुर

बजट 2025–26 में इसके तहत ₹9,300 करोड़ से ज़्यादा के काम घोषित हुए।

नवनेरा बैराज

कालीसिंध पर ऐबरा गाँव (दीगोद, कोटा); पहले चरण के लिए ₹1316.32 करोड़ की संशोधित स्वीकृति; निर्माण पूरा; लम्बाई 1410 मी।

याद रखें: जुलाई 2023 में पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा देने का प्रश्न पशु परिचर (2024) परीक्षा में आया।

7. कोटा, बूँदी व बाराँ

परियोजनाकहाँ / नदीख़ास बात
तकली सिंचाईढाकिया गाँव (रामगंज मंडी, कोटा) — तकली7800 हेक्टेयर सिंचाई और उद्योगों को पानी; बाँध जून 2023 में पूरा
सावन भादोकनवास, सांगोद (कोटा) — अरू—
चाकण सिंचाईकेशवरायपाटन (बूँदी) — चाकण1958 में गुढ़ा गाँव में मिट्टी का बाँध
गरड़दा सिंचाईहोलासपुरा (बूँदी) — मेज की सहायक मांगली, डूँगरी और गणेशी नालाबूँदी के 44 गाँवों की 9161 हेक्टेयर में सिंचाई, 111 गाँवों को पेयजल; मिट्टी के बाँधों में राज्य का सबसे ऊँचा (31 मी)

8. झालावाड़ की परियोजनाएँ

परवन वृहद् सिंचाई परियोजना — अकावदा कलां (झालावाड़)

  • शिलान्यास 15 दिसम्बर 2017 — वसुंधरा राजे; 2024–25 में पूरा होने का प्रस्ताव।
  • 1402 गाँवों को पेयजल, और 3 ज़िलों (झालावाड़, कोटा, बाराँ) के 637 गाँवों की 2.01 लाख हेक्टेयर में सिंचाई।
  • संशोधित स्वीकृति ₹7,355.23 करोड़; छबड़ा और कवाई बिजली परियोजनाओं को पानी।
परियोजनाकहाँ / नदीख़ास बात
हरिश्चंद्र सागरजैतपुर (झालावाड़) — कालीसिंध33 फाटक; कालीसिंध बाँध परियोजना का नया नाम
भीमसागरमऊबोरदा (झालावाड़) — उजाड़—
गागरिन सिंचाईकालापीपल गाँव (पिड़ावा/पंचपहाड़) — आहूनिर्माणाधीन
चंवली / चौलीहिम्मतगढ़ (झालावाड़) — चंवली (कालीसिंध की सहायक)—

9. भरतपुर व जयपुर संभाग

बाँध / परियोजनाकहाँ / नदीख़ास बात
मोरेल बाँधपीलूखेड़ा गाँव के पास (सवाई माधोपुर), 1952 — मोरेल (बनास की सहायक)दौसा-सवाई माधोपुर सीमा पर; पेटा दौसा में — जल संसाधन विभाग की रिपोर्ट में दौसा में दर्ज; मिट्टी का बाँध
मोरासागर बाँधसवाई माधोपुरपान की खेती के लिए सिंचाई
बंध बारेठाभरतपुर — कुकुंद1897 में महाराजा रामसिंह के समय; आकृति जहाज़ जैसी; भरतपुर ज़िले का सबसे बड़ा बाँध; पेयजल और सिंचाई
अजान बाँधभरतपुर — गम्भीरमहाराजा सूरजमल; घना पक्षी विहार को पानी

10. अजमेर संभाग

बीसलपुर परियोजना — बीसलपुर गाँव (टोंक)

  • राज्य की सबसे बड़ी पेयजल परियोजना; बनास पर राजमहल (टोंक) के त्रिवेणी संगम के पास।
  • 574 मी लम्बा, 39 मी ऊँचा, कंक्रीट का बाँध।
  • पेयजल ➜ जयपुर, अजमेर, केकड़ी, ब्यावर, नसीराबाद, किशनगढ़, सरवाड़, चाकसू, दूदू, फागी शहर और 450 गाँव; सिंचाई केवल टोंक में — बायीं और दायीं दो नहरें।

सोहेला गोलीकांड (टोंक), 2004 — बनास (बीसलपुर) के पानी को लेकर आंदोलन कर रहे किसानों पर गोली चली और कई किसान मारे गए।

बाँध / परियोजनाकहाँ / नदीख़ास बात
नारायण सागरजालिया द्वितीय गाँव (ब्यावर) — खारी“ब्यावर की जीवनरेखा”; नींव 31 अक्टूबर 1955 — डॉ. राजेंद्र प्रसाद; 1962 में पूरा
मुंडोती सिंचाईकिशनगढ़ (अजमेर)—
टोरडी सागरमालपुरा (टोंक) — सहोदरासारी मोरियाँ (फाटक) खोलने पर बाँध में पानी नहीं बचता
ईसरदा बाँधबनेठा गाँव (उनियारा, टोंक) — बनासबीसलपुर के नीचे टोंक-सवाई माधोपुर सीमा पर, दो चरणों में निर्माणाधीन; दौसा और सवाई माधोपुर को पेयजल

ध्यान दें: मेजा बाँध कोठारी नदी पर है, मेज नदी पर नहीं — यह जोड़ी परीक्षा में ग़लत मिलान के रूप में पूछी गई है।

11. जोधपुर संभाग

जवाई बाँध परियोजना — सुमेरपुर (पाली)

  • जवाई नदी पर; जोधपुर महाराजा उम्मेद सिंह ने 1946 में शुरू करवाया; शुरू में इंजीनियर एडगर और फर्ग्यूसन।
  • आज़ादी के बाद 1956 में इंजीनियर मोतीसिंह की देखरेख में पूरा।
  • जोधपुर और पाली को पेयजल; 22 किमी मुख्य नहर जिसकी 4 शाखाएँ; पाली की 26 हज़ार और जालौर की 15 हज़ार हेक्टेयर ज़मीन में सिंचाई।
बाँध / परियोजनाकहाँख़ास बात
जसवंत सागर (पिचियाक)पिचियाक गाँव, बिलाड़ा के पास (जोधपुर) — लूनीजोधपुर ज़िले का सबसे बड़ा बाँध
पश्चिमी बनास बाँधस्वरूपगंज (सिरोही)सिरोही की सबसे बड़ी सिंचाई परियोजना; 1958–59 में पूरा
बनास नाला सिंचाईसिरोहीनिर्माणाधीन
सुकली-सेलवाड़ारेवदर (सिरोही) — सुकली—

12. ज़िलेवार प्रमुख बाँध व तालाब

ज़िलाप्रमुख बाँध व तालाब
उदयपुरवाकल, मानसी वाकल, ओगणा, आकोदड़ा, जोगीवड़, मदार बड़ा, मदार छोटा, गोवर्धन विलास
सलूम्बरजयसमंद, केजड़, डाया
राजसमंदराजसमंद, नंदसमंद, लाखेला तालाब (कुम्भलगढ़), चिकलियावास, कुंडली
चित्तौड़गढ़गम्भीरी, औराई, वागन, बस्सी, भूपालसागर (बेड़च), सोनियाना, मातृकुंडिया, घोसुंडा

13. बाँधों के “सबसे”

प्रश्नउत्तर
सबसे लम्बा बाँधमाही बजाज सागर (3109 मी)
सबसे ऊँचा बाँधजाखम (81 मी)
सबसे ज़्यादा जल भंडारण क्षमताराणा प्रताप सागर
सबसे ज़्यादा फाटकमातृकुंडिया (52 फाटक)

परीक्षा में पूछे गए मिलान

प्रश्नसही उत्तर
कौन-सा बाँध मध्य प्रदेश में है?गाँधी सागर (REET 2025)
दांतीवाड़ा बाँध किस नदी पर?पश्चिमी बनास — बनासकांठा (गुजरात)
सिंचाई प्रबंध एवं प्रशिक्षण संस्थानकोटा
पाँचना बाँध किसके पास?करौली

14. रैपिड फायर तथ्य

  • राज्य का सबसे ऊँचा बाँध ➜ जाखम (अनूपपुरा, प्रतापगढ़) — 81 मी
  • सबसे लम्बा बाँध ➜ माही बजाज सागर (3109 मी)
  • सबसे ज़्यादा जल भंडारण क्षमता ➜ राणा प्रताप सागर
  • सबसे ज़्यादा फाटक ➜ मातृकुंडिया (52 फाटक)
  • राज्य की सबसे लम्बी जल सुरंग ➜ देवास परियोजना में आकोदड़ा से बुझड़ा तक, 11.05 किमी
  • राज्य की सबसे बड़ी पेयजल परियोजना ➜ बीसलपुर (टोंक), बनास नदी पर
  • मिट्टी के बाँधों में सबसे ऊँचा ➜ गरड़दा (बूँदी), 31 मी
  • राम जल सेतु का पुराना नाम ➜ पार्वती-कालीसिंध-चम्बल लिंक परियोजना; MoU 28 जनवरी 2024 को
  • नदियाँ जोड़ने की शुरुआत ➜ मेवाड़ में — महाराणा फतेहसिंह ने 1890 में चिकलवास के पास आहड़ पर बाँध बनवाया

अगले भाग में सिंचाई, पेयजल और जल संरक्षण की केंद्रीय व राज्य योजनाएँ, भूजल आकलन रिपोर्ट 2024, डार्क ज़ोन और खारे ब्लॉक।

पिछला भाग: प्रमुख बाँध, सिंचाई परियोजनाएँ व जल संसाधन योजनाएँ: चम्बल परियोजना

अगला भाग: प्रमुख बाँध, सिंचाई परियोजनाएँ व जल संसाधन योजनाएँ: जल संसाधन योजनाएँ

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