राजस्थान का तेल-गैस सफ़र बहुत पुराना नहीं है, फिर भी परीक्षा में उसके नाम और तारीख़ें ख़ूब पूछी जाती हैं — कौन-सा क्षेत्र किस कम्पनी का, कौन-सी पाइपलाइन कितनी लम्बी। इस भाग में पेट्रोलियम का परिचय व बेसिन, तेल क्षेत्र, प्राकृतिक गैस और तेल-गैस पाइपलाइनें क्रम से दी गई हैं। आख़िर में खनिज नीतियाँ व योजनाएँ हैं, जिनमें एम-सैंड, सिलिकोसिस और DMFT जैसे विषय भी शामिल हैं।
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1. पेट्रोलियम — परिचय व बेसिन
- टर्शियरी युग की परतदार अवसादी चट्टानों में; हाइड्रोकार्बन यौगिकों का मिश्रण; “काला सोना”; पेट्रोल, डीज़ल, केरोसीन, डामर।
- पश्चिमी ज़िलों (जैसलमेर, बीकानेर, गंगानगर, बाड़मेर) में अवसादी चट्टानें — इसलिए तेल-गैस का अनुमान।
- 1932 ➜ GSI प्रमुख ए.एम. हेरॉन ने नागौर के जायल क़स्बे के पास चूना पत्थर में पहली बार तेल के संकेत खोजे।
- 1954 ➜ ONGC ने पश्चिमी राजस्थान में खोज शुरू की; 1983 — ऑयल इंडिया ने।
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| बेसिन | ज़िले |
|---|---|
| बाड़मेर-सांचौर | बाड़मेर, जालौर, सांचौर |
| जैसलमेर | जैसलमेर |
| बीकानेर-नागौर | बीकानेर, चूरू, हनुमानगढ़, गंगानगर, नागौर |
4 पेट्रोलीफ़ेरस बेसिन 14 ज़िलों के 1,50,000 वर्ग किमी में फैले हैं।
| संस्था | कब | काम |
|---|---|---|
| पेट्रोलियम निदेशालय | 1997, जयपुर | खोज-उत्पादन में तेज़ी |
| राजस्थान स्टेट पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन | 10 जुलाई 2008 | RSMML की सहयोगी; खोज, उत्पादन, वितरण, परिवहन |
2. तेल क्षेत्र
मंगला
- जोगासर गाँव (बालोतरा) ➜ NB-1 कुएँ में 2004 में विशाल भंडार; पिछले तीन दशकों की देश की सबसे बड़ी भू-भागीय खोज; केयर्न एनर्जी ने खोजा।
- 10 फ़रवरी 2004 को वसुंधरा राजे और राम नाईक ने नाम “मंगला” रखा; 29 अगस्त 2009 को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने वाल्व घुमाकर व्यावसायिक उत्पादन शुरू किया।
- राज्य में सबसे ज़्यादा तेल उत्पादन वाला क्षेत्र। मंगला, भाग्यम और ऐश्वर्या मिलकर “MBA”।
| क्षेत्र | कहाँ | ख़ास बात |
|---|---|---|
| ऐश्वर्या | बायतू (बालोतरा) | केयर्न; उत्पादन मार्च 2013 |
| सरस्वती | कोसलू (बालोतरा) | केयर्न; उत्पादन जुलाई 2011 |
| रागेश्वरी | अडेल (बाड़मेर) | केयर्न; गैस उत्पादन 2012 |
| कामेश्वरी | अडेल (बाड़मेर) | तेल उत्पादन अप्रैल 2017 |
… शेष 5 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें
अन्य छोटे क्षेत्र — रागेश्वरी डीप गैस, बाड़मेर हिल, GSV, NC-वेस्ट, NI, भाग्यम साउथ, NI नॉर्थ, NE, NP, KW, तुकाराम, ABH, Y2Y, गुढ़ा S-7, NR-3, SL, NL, DP-1।
अन्य तेल क्षेत्र
- बाड़मेर ➜ कवास, गुढ़ामालानी; बालोतरा — कोसलू, बायतू, नगाणा; जैसलमेर — सादेवाला, तनोट, बाघेवाला से टावरीवाला, चिन्नेवाला टिब्बा; गंगानगर — बीजबायला, रावला मंडी, नानूवाला।
- बाघेवाला से टावरीवाला (जैसलमेर) ➜ भारी तेल; वेनेज़ुएला की PDVSA और ऑयल इंडिया; 2024–25 में 1,55,713 बैरल; अभी 580 बैरल प्रतिदिन।
- गुढ़ामालानी ➜ दुनिया में सबसे कम गहराई पर उत्तम पेट्रोल; बायतू — गैसोलीन ज़्यादा, इसलिए वायुयान ईंधन।
| पेट्रोलियम खनन पट्टा | कम्पनी |
|---|---|
| मनहेरा टिब्बा, घोटारू विस्तार, चिन्नेवाला-टीबा, दक्षिण खारातार, चिन्नेवाला (जैसलमेर) | ONGC |
| तनोट-डांडेवाला, बाघेवाला, बाखरी टिब्बा (जैसलमेर) | ऑयल इंडिया |
| मंगला क्षेत्र, भाग्यम-शक्ति (बालोतरा), कामेश्वरी-वेस्ट | ONGC / केयर्न वेदांता |
नए आवंटन — बाड़मेर बेसिन में GAIL को एक नया ब्लॉक (30 नवम्बर 2022); जैसलमेर बेसिन में ONGC को घोटारू विस्तार PML फिर से; ऑयल इंडिया और मेघा इंजीनियरिंग को दो नए ब्लॉक; ऑयल इंडिया के 3 PEL का विस्तार।
- स्ट्रैटेजिक ऑयल रिज़र्व ➜ बीकानेर में देश का सबसे बड़ा; ISPRL, क्षमता 5.6 MMT।
- पचपदरा रिफ़ाइनरी (बालोतरा) — शिलान्यास 16 जनवरी 2018 (विस्तार “उद्योग” अध्याय में)।
- प्रोजेक्ट सरस्वती ➜ ONGC जैसलमेर में मीठे भूजल की खोज के लिए ₹1000 करोड़ से कुएँ खोदेगी।
3. प्राकृतिक गैस
- देश में सबसे ज़्यादा भंडार पूर्वी अपतटीय क्षेत्र में; राजस्थान (59.06 BCM) भंडार में छठा।
- देश में उत्पादन सबसे ज़्यादा अपतटीय क्षेत्र (64%); राज्यों में पहला असम (10%), राजस्थान तीसरा (7%)।
- राज्य में भंडार और उत्पादन सबसे ज़्यादा बाड़मेर-सांचौर बेसिन; जैसलमेर से गैस उत्पादन 1994 से; रागेश्वरी से व्यावसायिक उत्पादन 23 मार्च 2013 से।
| उत्पादन (प्रतिदिन) | मात्रा |
|---|---|
| राज्य कुल | 3.50–3.70 MMSCM |
| बाड़मेर | 2.70–2.80 MMSCM |
| जैसलमेर | 0.81–0.87 MMSCM |
… शेष 3 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें
ऑयल इंडिया और फ़ोकस एनर्जी की गैस GAIL और राजस्थान विद्युत उत्पादन निगम के समझौते से रामगढ़ बिजलीघर को जाती है। 2024–25 में जैसलमेर और बाड़मेर-सांचौर बेसिन से लगभग 935.83 MMSCM गैस निकली।
- जैसलमेर गैस क्षेत्र ➜ शाहगढ़, लंगतला, तनोट, डांडेवाला, मनहेरा टिब्बा, घोटारू, सादेवाला, चिन्नेवाला टिब्बा, हांसुवाला तला, भाखरी टिब्बा, बागी टिब्बा, बाकरीवाला, दक्षिण खारातार; बाड़मेर — रागेश्वरी।
- जैसलमेर बेसिन में ~5270 मिलियन घन मी गैस प्रमाणित (मनहेरा टिब्बा, तनोट-डांडेवाला, SGL फ़ील्ड शाहगढ़)।
- कमलीताल (मनहेरा टिब्बा) — 20 करोड़ घन मी गैस; लंगतला (शाहगढ़) — फ़ोकस एनर्जी को अथाह भंडार; बायतू-कवास ब्लॉक सबसे बड़ी खोजों में।
याद रखें: REET (L-2) 2025 — कमलीताल और रागेश्वरी — खनिज तेल व प्राकृतिक गैस से संबंधित।
4. तेल व गैस पाइपलाइनें
मंगला–भोगट पाइपलाइन
दुनिया की सबसे लम्बी गर्म (हीटेड) पाइपलाइन — नगाणा (बालोतरा) से भोगट (गुजरात); उद्घाटन 4 फ़रवरी 2009; कुल 680 किमी (मंगला प्रोसेसिंग टर्मिनल से सलाया 614 किमी + सलाया से भोगट 66 किमी); राज्य में 154 किमी (बाड़मेर, जालौर) + गुजरात के 8 ज़िले; L&T ने पूरी तरह ऊष्मा-रोधी बनाई।
| पाइपलाइन | ख़ास बात |
|---|---|
| हज़ीरा–बीजापुर–जगदीशपुर (HBJ) | 4659 किमी — देश की सबसे लम्बी गैस पाइपलाइन; GAIL; इसी से अंता गैस बिजलीघर (बाराँ), गढ़ेपान खाद संयंत्र (कोटा), सेमकोर ग्लास (कोटा) और धौलपुर बिजलीघर को गैस |
| जामनगर–लोनी (LPG) | देश की सबसे लम्बी LPG लाइन — 1414 किमी, राज्य में 686 किमी; बूस्टर आबू रोड (सिरोही), गादेरी गाँव नसीराबाद (अजमेर; यहीं संयंत्र) और जयपुर के पास |
| सलाया–मथुरा (कच्चा तेल) | IOC; सलाया बंदरगाह (गुजरात) से मथुरा रिफ़ाइनरी — 2660 किमी; अजमेर, आबू रोड से |
| कांडला–भटिंडा (पेट्रोलियम) | जयपुर, जोधपुर को पेट्रोल-डीज़ल |
बजट 2024–25 — 8 शहरों (जयपुर, कोटा, अलवर, जोधपुर, उदयपुर, बूँदी, अजमेर, पाली) में पाइपलाइन से 1 लाख से ज़्यादा गैस कनेक्शन।
5. खनिज नीतियाँ व योजनाएँ
| काल / क्रम | घटना | विवरण |
|---|---|---|
| 1978 | पहली खनिज नीति | भैरोंसिंह शेखावत |
| 16 अगस्त 1994 | पहली खनन नीति | भैरोंसिंह शेखावत के समय |
| 15 अगस्त 1999 | विज़न 2020 | खनिजों का वैज्ञानिक दोहन, राजस्व बढ़ाना, आधारभूत सुविधाएँ |
खनिज नीति 2024 के लक्ष्य
| लक्ष्य | ब्योरा |
|---|---|
| GSDP में खनन का हिस्सा | 3.4% (2023–24) → 5% (2029–30) → 8% (2046–47) |
| रोज़गार | 2029–30 तक 50 लाख; 2047 तक प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष 1 करोड़ से ज़्यादा |
| खनन होने वाले खनिज | 58 → 70 (2047 तक) |
याद रखें: RAS प्रारम्भिक 2025 — खनिज नीति 2024 के तीनों लक्ष्य (रोज़गार, GSDP हिस्सा, 58 से 70 खनिज) सही थे।
एम-सैंड नीति
- एम-सैंड नीति 2020 ➜ 25 जनवरी 2021 को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जारी की; बजरी का स्थायी विकल्प; खानों के ओवरबर्डन (मलबे) का उपयोग; इकाइयों को उद्योग का दर्जा; सरकारी निर्माण में कम से कम 25% एम-सैंड (50% तक बढ़ाने का प्रस्ताव)।
- एम-सैंड ➜ किसी खनिज या ओवरबर्डन को पीसकर तय मानकों पर बनी रेत।
- एम-सैंड नीति 2024 ➜ नदी की बजरी की जगह निर्मित रेत; रॉयल्टी में 50% छूट, ओवरबर्डन डंप शुल्क में राहत, 10 साल 75% राज्य कर प्रतिपूर्ति, 7 साल 100% बिजली शुल्क छूट, 75% स्टाम्प छूट, स्थानीय कर्मचारियों के EPF-ESI में नियोक्ता अंशदान का 50%; BIS प्रमाणन; शून्य-निर्वहन जल पुनर्चक्रण; खान विभाग में एम-सैंड सेल; सरकारी परियोजनाओं में 2028–29 तक 50% एम-सैंड।
सिलिकोसिस
- सिलिकोसिस नीति ➜ 3 अक्टूबर 2019; खदान, कारख़ाने, पत्थर तोड़ने-घिसने-पीसने, गिट्टी, मूर्ति बनाने में धूल से होने वाला लाइलाज रोग।
- प्रमाणित होने पर पुनर्वास के लिए ₹3 लाख; पीड़ित को ₹1500 मासिक पेंशन; मृत्यु पर आश्रित को ₹2 लाख, अंत्येष्टि को ₹10,000; विधवा को आयु के अनुसार ₹1150–1500 पेंशन; पालनहार योजना में ₹750–1500 मासिक + ₹2000 सालाना।
- सिलिकोसिस पोर्टल 2022 ➜ सामाजिक न्याय विभाग, मई 2022; न्यूमोकोनियोसिस नीति के तहत ऑटो-अप्रूवल से सीधी मदद।
अन्य तथ्य
- खान ब्लॉकों की ई-नीलामी करने वाला देश का पहला राज्य — पहली बार जनवरी 2016 में चित्तौड़गढ़ और नागौर के सीमेंट ब्लॉक।
- DMFT (ज़िला खनिज फ़ाउंडेशन ट्रस्ट) ➜ खनन प्रभावित लोगों-क्षेत्रों के हित में ग़ैर-लाभकारी ट्रस्ट; DMFT नियम 2016 — 31 मई 2016 से; 33 ज़िलों में।
- ई-रवन्ना ➜ खान एवं भू-विज्ञान विभाग का सॉफ़्टवेयर।
ध्यान दें: एम-सैंड नीति 2024 की अवधि पर RAS 2025 के उत्तर में “31 मार्च 2032 या नई नीति तक” दिया गया।
6. रैपिड फायर तथ्य
- तेल के पहले संकेत ➜ 1932, जायल (नागौर), GSI के ए.एम. हेरॉन ने खोजे
- पेट्रोलीफ़ेरस बेसिन ➜ 4 बेसिन, 14 ज़िलों में
- सबसे ज़्यादा तेल उत्पादन वाला क्षेत्र ➜ मंगला (जोगासर, बालोतरा)
- मंगला–भोगट पाइपलाइन ➜ दुनिया की सबसे लम्बी गर्म पाइपलाइन, कुल 680 किमी
- देश की सबसे लम्बी गैस पाइपलाइन ➜ हज़ीरा–बीजापुर–जगदीशपुर (HBJ), 4659 किमी
- देश की सबसे लम्बी LPG लाइन ➜ जामनगर–लोनी, 1414 किमी
- राज्य में गैस भंडार और उत्पादन सबसे ज़्यादा ➜ बाड़मेर-सांचौर बेसिन
- पहली खनिज नीति ➜ 1978; पहली खनन नीति 16 अगस्त 1994
- सिलिकोसिस नीति ➜ 3 अक्टूबर 2019
अगले भाग में ऊर्जा का परिचय, राज्य की बिजली कम्पनियाँ, स्थापित क्षमता, जल विद्युत परियोजनाएँ और कोयला-लिग्नाइट से चलने वाले बिजलीघर।
पिछला भाग: राजस्थान के खनिज संसाधन: उर्वरक खनिज एवं भवन निर्माण पत्थर व चूना पत्थर
अगला भाग: राजस्थान में ऊर्जा संसाधन: ऊर्जा — परिचय व बिजली तंत्र एवं जल विद्युत परियोजनाएँ
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