इंदिरा गांधी नहर की उलझन एक सीधे नियम से सुलझ जाती है — शाखाएँ दायीं ओर निकलती हैं और लिफ्ट नहरें बायीं ओर, क्योंकि बायीं तरफ़ की ज़मीन ऊँची है। इस भाग में नहर का परिचय, इतिहास, दो चरण, नौ शाखाएँ, सात लिफ्ट नहरें और पेयजल की बड़ी योजनाएँ हैं। उसके बाद गंग नहर, नर्मदा नहर, भरतपुर व गुड़गाँव नहर और राजीव गांधी सिद्धमुख-नोहर नहर आती हैं।
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1. नाम, उद्देश्य व उद्गम
यह एशिया की सबसे बड़ी मानव-निर्मित नहर परियोजना है।
- उद्गम ➜ हरिके बैराज — सतलुज-व्यास संगम, फिरोजपुर (पंजाब); बैराज 1952 में बना
- राजस्थान में प्रवेश ➜ खारा खेड़ा, टिब्बी तहसील (हनुमानगढ़)
- प्रवेश पर ➜ राजस्थान-हरियाणा सीमा पर बनी
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उद्देश्य
- रावी-व्यास के पानी में राज्य के 8.6 MAF हिस्से में से 7.59 MAF से मरुस्थल को पीने और सिंचाई का पानी देना।
- सूखे से राहत, पर्यावरण सुधार और वृक्षारोपण।
- रोज़गार और लोगों का पुनर्वास।
लम्बाई का हिसाब
| हिस्सा | लम्बाई |
|---|---|
| फीडर | 204 किमी — पंजाब 150, हरियाणा 19, राजस्थान 35 |
| मुख्य नहर | 445 किमी |
| वितरिकाएँ | 9413 किमी (सुजस, मई 2022) |
ध्यान दें: फीडर नहर का वह हिस्सा है जिसका पानी रास्ते में काम नहीं आता — वह सिर्फ़ मुख्य नहर तक पानी पहुँचाता है। फीडर जून 1964 में पूरा हुआ।
मुख्य नहर को मोहनगढ़ से आगे गडरा रोड (बाड़मेर) तक 165 किमी बढ़ाने का प्रस्ताव है; लगभग 83 किमी बनी भी, पर राष्ट्रीय मरु उद्यान के कारण काम रुक गया — इसलिए पानी अभी गडरा रोड तक नहीं पहुँचता।
2. इतिहास
- विचार ➜ महाराजा गंगासिंह का; पहला ठोस क़दम महाराजा सादुल सिंह ने उठाया, जिन्होंने पंजाब के इंजीनियर कंवर सेन को बीकानेर का मुख्य सिंचाई अभियंता बनाया।
- कंवर सेन ने “बीकानेर राज्य में पानी की आवश्यकता” रिपोर्ट 29 अक्टूबर 1948 को भारत सरकार को भेजी।
- विश्व बैंक दल और भारत सरकार की मंज़ूरी के बाद 31 मार्च 1958 को केंद्रीय गृहमंत्री गोविंद वल्लभ पंत ने नींव रखी।
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- रायबहादुर कंवर सेन गुप्ता ➜ जन्म 1899, टोहाना (हिसार, हरियाणा)
- सम्मान ➜ 1956 — पद्म भूषण पाने वाले पहले व्यक्ति
| काल / क्रम | घटना | विवरण |
|---|---|---|
| 1948 | कंवर सेन की रिपोर्ट | 29 अक्टूबर |
| 1952 | हरिके बैराज | सतलुज-व्यास संगम पर |
| 1958 | नींव | 31 मार्च — गोविंद वल्लभ पंत |
| 1958 | राजस्थान नहर बोर्ड | 19 दिसम्बर |
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3. दो चरण
| पहला चरण | दूसरा चरण | |
|---|---|---|
| कहाँ से कहाँ | हरिके → सत्तासर (बीकानेर) | सत्तासर → मोहनगढ़ (जैसलमेर) |
| लम्बाई | 393 किमी = फीडर 204 + मुख्य नहर 189 | मुख्य नहर 256 किमी |
| वितरिकाएँ / शाखाएँ | 3075 किमी वितरिकाएँ; शाखाएँ सूरतगढ़, अनूपगढ़, पूगल | 6 शाखाएँ |
पूरी होने पर लगभग 19.65 लाख हेक्टेयर में सिंचाई का अनुमान था। 2005 में राज्य ने तय किया कि नहर 16.17 लाख हेक्टेयर कृषि-योग्य कमांड क्षेत्र (पहला चरण 5.46 + दूसरा चरण 10.71) पर ही पूरी मानी जाए।
भारत सरकार ने दूसरे चरण की 6 लिफ्ट योजनाओं में सूक्ष्म (फव्वारा) सिंचाई मंज़ूर की; मार्च 2019 तक 25,721 हेक्टेयर पर फव्वारा सिंचाई शुरू हो चुकी थी।
4. नौ शाखाएँ
नहर के दायीं ओर की ज़मीन नहर के जल-स्तर से नीची है, इसलिए शाखाएँ दायीं ओर निकाली गईं।
| क्रम | शाखा | ज़िले | ख़ास बात |
|---|---|---|---|
| 1 | रावतसर | हनुमानगढ़ | पहली शाखा और इकलौती बायीं ओर वाली |
| 2 | सूरतगढ़ | हनुमानगढ़, गंगानगर | लघु पन बिजलीघर |
| 3 | अनूपगढ़ | गंगानगर, बीकानेर | लघु पन बिजलीघर |
| 4 | पूगल | बीकानेर | लघु पन बिजलीघर |
अंतिम छोर मोहनगढ़ से दो बड़ी उपशाखाएँ — लीलवा और दीघा — निकलती हैं, जो लाठी सीरीज़ क्षेत्र को पानी देती हैं।
ट्रिक: शाखाएँ दायीं ओर (एक रावतसर छोड़कर), लिफ्ट नहरें बायीं ओर — क्योंकि बायीं ओर की ज़मीन ऊँची है और पानी उठाकर (लिफ्ट करके) देना पड़ता है।
5. सात लिफ्ट नहरें
| पुराना नाम | नया नाम | ज़िले | ख़ास बात |
|---|---|---|---|
| नोहर-साहवा लिफ्ट | चौधरी कुम्भाराम लिफ्ट | हनुमानगढ़, चूरू, बीकानेर, झुंझुनूँ | झुंझुनूँ को सिर्फ़ पेयजल; सहायक नहरों समेत 666 किमी — सहायक नहरें जोड़कर सबसे लम्बी |
| बीकानेर-लूणकरणसर लिफ्ट | कंवरसेन लिफ्ट | गंगानगर, बीकानेर | पहली बनी; सातों में सबसे लम्बी (151.64 किमी); “बीकानेर की जीवनरेखा” |
| गजनेर लिफ्ट | पन्नालाल बारूपाल लिफ्ट | बीकानेर, नागौर | नागौर को सिर्फ़ पेयजल; इसकी कानासर वितरिका नागौर के गाँवों और बीकानेर की कोलायत व नोखा तहसील को पानी देती है |
| बांगड़सर लिफ्ट | वीर तेजाजी (भैरूदान छालानी) लिफ्ट | बीकानेर | सबसे छोटी लिफ्ट नहर |
कंवरसेन लिफ्ट — ख़ास बातें
- निर्माण जुलाई 1968 में शुरू; नींव 5 जुलाई 1968 को मोहनलाल सुखाड़िया ने रखी; 1976 में पूरी; 1989 में नाम कंवरसेन लिफ्ट।
- गंगानगर के बिरधवाल हैड से निकलती है।
- बीकानेर के पास बीछवाल और शोभासर जलाशयों को भरती है — इन्हीं से बीकानेर शहर को पानी मिलता है।
ट्रिक: सबसे लम्बी — कंवरसेन (सातों में); सहायक नहरें जोड़कर — कुम्भाराम (666 किमी); सबसे छोटी — बांगड़सर (वीर तेजाजी)।
6. पेयजल की बड़ी योजनाएँ
राजीव गांधी लिफ्ट नहर
- पहले नाम जोधपुर लिफ्ट योजना; मुख्य नहर के RD 1109, मदासर से निकलती है।
- “जोधपुर नगर की जीवनरेखा” ➜ जोधपुर और बाड़मेर को पीने का पानी; लम्बाई 176 किमी — इंदिरा गांधी नहर से निकली सबसे लम्बी लिफ्ट नहर।
- पानी जोधपुर की कायलाना झील में डालती है।
| योजना | ख़ास बात |
|---|---|
| आपणी योजना (गंधेली-साहवा परियोजना) | जर्मनी (KfW) की मदद; हनुमानगढ़-चूरू के 370 गाँवों को पानी; दूसरे चरण में झुंझुनूँ और सीकर के गाँव |
| बाड़मेर लिफ्ट पेयजल परियोजना | बाड़मेर के 529 और जैसलमेर के 162 गाँव |
| नागौर लिफ्ट पेयजल परियोजना | पन्नालाल बारूपाल लिफ्ट के अंतिम छोर से 200 क्यूसेक; नागौर के 494 गाँव और 5 शहर (नागौर, बासनी, मेड़ता, मूंडवा, कुचेरा) |
कहाँ-कहाँ पानी
कुल 12 ज़िलों को लाभ — 6 को सिंचाई और पेयजल दोनों, 6 को केवल पेयजल।
7. लाभ व प्रबंधन
- बड़े उद्योगों को पानी ➜ सूरतगढ़ बिजलीघर, बरसिंहसर बिजलीघर, पचपदरा रिफ़ाइनरी।
- 1974 में कमांड क्षेत्र विकास प्राधिकरण बना; सबसे ज़्यादा लाभ उत्तर-पश्चिमी राजस्थान को।
- सबसे ज़्यादा कमांड क्षेत्र ➜ गंगानगर, बीकानेर, हनुमानगढ़ (राजस्थान कृषि सांख्यिकी 2022–23)।
SCADA
सुपरवाइज़री कंट्रोल एंड डेटा एक्विज़िशन — नहर में पानी के बहाव को नापने और नियंत्रित करने की इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली। इंदिरा गांधी नहर के अलावा भाखड़ा, गंग नहर और नर्मदा नहर पर भी लगी है।
8. मरम्मत व नई परियोजनाएँ
फीडरों की रिलाइनिंग — 23 जनवरी 2019
राजस्थान, भारत सरकार और पंजाब के बीच समझौता — इंदिरा गांधी फीडर (पंजाब वाला भाग) और सरहिंद फीडर की रिलाइनिंग; लागत ₹1976 करोड़। इंदिरा गांधी फीडर (पंजाब भाग) के 97 किमी और सरहिंद फीडर के 100 किमी की रिलाइनिंग हुई।
| फीडर | ख़र्च का बँटवारा |
|---|---|
| इंदिरा गांधी फीडर | केंद्र 60%, राज्य 40% |
| सरहिंद फीडर | पंजाब 54.15%, राजस्थान 45.85% — राजस्थान के हिस्से का 60% केंद्र देगा |
एस्केप जलाशय — जल जीवन मिशन
₹1274.26 करोड़ से मुख्य नहर के पास 4 एस्केप जलाशय — इनका अतिरिक्त पानी 43 बड़ी पेयजल परियोजनाओं को मिलेगा।
| जलाशय (RD) | ज़िला |
|---|---|
| 507 RD | बीकानेर |
| 750 RD | बीकानेर |
| 1121 RD | जोधपुर |
9. गंग नहर — परिचय
- पहचान ➜ राजस्थान की पहली नहर परियोजना; पुराना नाम “बीकानेर नहर”; चूने से बनी
- निर्माता ➜ महाराजा गंगासिंह, 1921–1927
- उद्गम ➜ सतलुज — हुसैनीवाला (फिरोजपुर, पंजाब)
- राजस्थान में प्रवेश ➜ खक्खा गाँव (गंगानगर)
| काल / क्रम | घटना | विवरण |
|---|---|---|
| 1885 | पहला विचार | पंजाब के इंजीनियर कर्नल डॉयस — सूखे बीकानेर में नहर |
| 1920 | सतलुज घाटी समझौता | 4 सितम्बर — बीकानेर रियासत, पंजाब और बहावलपुर |
| 1921 | नींव | 5 सितम्बर — गंगासिंह, हुसैनीवाला; ख़ाका कंवर सेन ने बनाया |
- 4 शाखाएँ ➜ करणीजी, लालगढ़, समीजा, लक्ष्मीनारायणजी।
- नाम गंगासिंह पर; नेहरू ने उन्हें “आधुनिक भारत का भगीरथ” कहा।
- सिंचाई केवल गंगानगर ज़िले में — “गंगानगर ज़िले की जीवनरेखा”।
पहले कैसे सिंचाई होती थी?
गंग नहर से पहले, अंग्रेज़ी काल में बीकानेर रियासत के कुछ हिस्से पश्चिमी यमुना नहर से और गंगानगर की मिर्ज़ावाली तहसील सरहिंद नहर से सींची जाती थी — दोनों मौसमी नहरें थीं।
याद रखें: विभाजन से पहले रावी-व्यास से इस क्षेत्र का हिस्सा 1.11 MAF था; विभाजन के बाद राजस्थान के हिस्से से 0.33 MAF और जुड़ा — कुल 1.44 MAF।
10. गंग नहर लिंक चैनल
- गंग नहर पुरानी और जर्जर हो गई थी ➜ उसकी मरम्मत के लिए बाइपास विकल्प; काम 1984 में शुरू।
- लोहगढ़ (हरियाणा) से साधुवाली (गंगानगर) तक — वहीं गंग नहर से मिलती है; इसमें इंदिरा गांधी नहर का पानी आता है।
- लम्बाई 76 किमी — हरियाणा 6, राजस्थान 70; प्रवेश पर राजस्थान-पंजाब सीमा पर बनी।
11. नर्मदा नहर
- राज्य ➜ गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश
- नाम ➜ सरदार सरोवर परियोजना; “मारवाड़ की जीवनरेखा”
- उद्गम ➜ सरदार सरोवर बाँध (गुजरात)
- ज़िले ➜ जालौर, बाड़मेर (सबसे ज़्यादा जालौर)
- पहली परियोजना जिसमें पूरी सिंचाई फव्वारा पद्धति से ही होती है।
- 3 लिफ्ट नहरें ➜ सांचौर, भादरेड़ा, पनोरिया — तीनों दायीं ओर।
- वितरिकाएँ ➜ वांक, जैसला भाटकी, बालेरा, इसरोल, रतौड़ा, केरिया, गांधव, मोनकी, भीमगुड़ा — सब बायीं ओर।
12. भरतपुर व गुड़गाँव नहर
| भरतपुर नहर | गुड़गाँव नहर | |
|---|---|---|
| साझेदार | राजस्थान + उत्तर प्रदेश | राजस्थान + हरियाणा |
| नया नाम | — | पश्चिमी यमुना लिंक नहर |
| उद्गम | यमुना से निकली आगरा नहर (पश्चिमी यमुना नहर) | यमुना — ओखला हैड (दिल्ली) |
| निर्माण | 1960–1964 | 1966–1985 |
1994 के यमुना जल बँटवारे में राजस्थान का हिस्सा 11.9 करोड़ घन मीटर तय हुआ।
13. राजीव गांधी सिद्धमुख-नोहर नहर
- 1981 के पंजाब-हरियाणा-राजस्थान समझौते से।
- नींव 5 अक्टूबर 1989 — राजीव गांधी, भिरानी (हनुमानगढ़); 2002 में सोनिया गांधी ने भिरानी में राष्ट्र को समर्पित की।
- पानी भाखड़ा-नांगल हैडवर्क्स से — रावी-व्यास का अतिरिक्त जल।
14. रैपिड फायर तथ्य
- उद्गम ➜ हरिके बैराज (सतलुज-व्यास संगम, फिरोजपुर); राजस्थान में प्रवेश खारा खेड़ा, टिब्बी (हनुमानगढ़) से
- लम्बाई ➜ फीडर 204 किमी और मुख्य नहर 445 किमी
- नींव ➜ 31 मार्च 1958 को गोविंद वल्लभ पंत ने रखी
- पहली शाखा ➜ रावतसर — इकलौती बायीं ओर वाली
- सबसे लम्बी लिफ्ट नहर ➜ कंवरसेन लिफ्ट (151.64 किमी), «बीकानेर की जीवनरेखा»
- सबसे छोटी लिफ्ट नहर ➜ बांगड़सर (वीर तेजाजी लिफ्ट)
- राजीव गांधी लिफ्ट नहर ➜ «जोधपुर नगर की जीवनरेखा», 176 किमी; पानी कायलाना झील में
- गंग नहर ➜ राजस्थान की पहली नहर परियोजना, महाराजा गंगासिंह ने 1921–1927 में बनवाई
- नर्मदा नहर ➜ «मारवाड़ की जीवनरेखा»; जालौर व बाड़मेर में, पूरी सिंचाई फव्वारा पद्धति से
अगले भाग में कृषि की विशेषताएँ, नवीनतम आँकड़े, भू-उपयोग, जोतें, फसल ऋतुएँ और राज्य के 10 कृषि जलवायु खंड।
पिछला भाग: प्रमुख बाँध, सिंचाई परियोजनाएँ व जल संसाधन योजनाएँ: जल संसाधन योजनाएँ
अगला भाग: राजस्थान में कृषि एवं प्रमुख फसलें: कृषि — परिचय व आँकड़े एवं कृषि जलवायु खंड
इन्हें भी पढ़ें: प्रमुख बाँध, सिंचाई परियोजनाएँ व जल संसाधन योजनाएँ · राजस्थान में कृषि एवं प्रमुख फसलें
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