राजस्थान में जनजातियाँ: मीणा जनजाति – Rajasthan Geography Chapter 61

राजस्थान की जनजातियों का क्षेत्र व जनसंख्या, मीणा, भील, गरासिया, सहरिया आदि का परिचय और विकास संस्थाएँ।

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In this chapter (17 sections)
  1. कहाँ और कौन
  2. जनसंख्या व राष्ट्रीय स्थान
  3. ज़िलेवार — सबसे ज़्यादा व सबसे कम
  4. संख्या और क्षेत्र
  5. नाम, उत्पत्ति और इतिहास
  6. गोत्र और उपवर्ग
  7. नाम और भील शासक
  8. क्षेत्र और संख्या
  9. उत्पत्ति के मत
  10. गरासिया जनजाति
  11. सहरिया
  12. डामोर
  13. कथौड़ी
  14. सांसी
  15. कंजर
  16. जनजाति विकास — संस्थाएँ व योजनाएँ
  17. रिवीजन पॉइंटर्स

जनजातियाँ राजस्थान के दक्षिणी और दक्षिण-पूर्वी हिस्से की पहचान हैं, और इन्हें संख्या के क्रम तथा क्षेत्र से जोड़कर पढ़ना सबसे आसान रहता है। इस भाग में पहले जनजातियों की जनसंख्या और ज़िलेवार स्थिति दी गई है, फिर मीणा और भील का नाम, उत्पत्ति और इतिहास। उसके बाद गरासिया, सहरिया, डामोर, कथौड़ी, सांसी और कंजर आते हैं, और अंत में जनजाति विकास की संस्थाएँ व योजनाएँ क्रम से रखी गई हैं।

इस विषय का इंटरैक्टिव माइंड मैप — राजस्थान में जनजातियाँ, 3 चॉक-बोर्ड चित्र, 15 नक्शे, 7 चार्ट, 24 फ्लैशकार्ड और 14 अभ्यास-प्रश्न के साथ। यहाँ हर खंड के चुने हुए बिंदु हैं; पूरी तालिकाएँ, शेष तथ्य और रटने की ट्रिक माइंड मैप में हैं।
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1. कहाँ और कौन

  • राज्य का दक्षिणी और दक्षिण-पूर्वी भाग जनजातियों की घनी बसावट वाला क्षेत्र है।
  • मुख्य जनजातियाँ ➜ मीणा, भील, गरासिया, सहरिया, कथौड़ी और डामोर।
  • जनजाति बहुल गिने जाने वाले देश के 4 बड़े राज्यों में एक राजस्थान भी है।

ट्रिक: संख्या का क्रम — “मी-भी-ग-स-डा”: मीणा > भील > गरासिया > सहरिया > डामोर।

2. जनसंख्या व राष्ट्रीय स्थान

  • जनजाति जनसंख्या (2011) ➜ 92,38,534
  • राज्य की जनसंख्या में हिस्सा ➜ 13.48%
  • देश में स्थान — संख्या से ➜ चौथा

… शेष 2 बिंदु — पूरी सूची माइंड मैप में देखें

60 साल में बदलाव

  1. 1951 — 3.36 लाख (कुल आबादी का 2.04%)
  2. 2011 — 92.38 लाख (13.48%)
देश में सबसे ज़्यादाराज्य
जनजाति प्रतिशतमिज़ोरम (94.4%)
जनजाति संख्यामध्य प्रदेश (153.1 लाख)

याद रखें: मीणा और भील मिलकर राज्य की जनजातियों का 90% से ज़्यादा।

3. ज़िलेवार — सबसे ज़्यादा व सबसे कम

आधारसबसे ज़्यादासबसे कम
संख्याउदयपुर (15.25 लाख), बाँसवाड़ा (13.73 लाख)बीकानेर (7,779), नागौर (10,412)
प्रतिशतबाँसवाड़ा (76.4%), डूँगरपुर (70.8%)नागौर (0.3%), बीकानेर (0.3%)

ट्रिक: बाँसवाड़ा दोनों सूचियों में ऊपर — संख्या में दूसरा, प्रतिशत में पहला। संख्या में पहला उदयपुर, पर प्रतिशत में डूँगरपुर दूसरा।

ध्यान दें: सबसे कम वाले दोनों ज़िले वही — बीकानेर और नागौर; संख्या में बीकानेर सबसे नीचे, प्रतिशत में दोनों 0.3%।

4. संख्या और क्षेत्र

  • संख्या में राज्य की सबसे बड़ी जनजाति।
  • 2011 में आबादी लगभग 43,45,528 — यानी राज्य की हर 100 जनजातीय व्यक्तियों में लगभग 47 मीणा।
  • मुख्य बसावट ➜ उदयपुर, सलूम्बर, जयपुर, प्रतापगढ़, दौसा, सवाई माधोपुर और करौली ज़िले।

5. नाम, उत्पत्ति और इतिहास

  • मीणा शब्द का अर्थ — मत्स्य (मछली)।
  • मान्यता है कि यह जाति भगवान विष्णु के मत्स्यावतार से उत्पन्न हुई; इसलिए मीणा समाज में मछली का माँस खाना वर्जित है।
  • मुनि मगन सागर ने अपने ग्रंथ मीणा पुराण में इन्हें भगवान मीन का वंशज कहा है।

आमेर और मीणा

  • कछवाहों का राज शुरू होने से पहले आमेर के इलाक़े पर मीणाओं का शासन था।
  • आमेर रियासत में नए राजा के राजतिलक की रस्म मीणा सरदार ही निभाता था।

कर्नल जेम्स टॉड ने मीणाओं का मूल निवास “कालीखोह पर्वतमाला” माना — जो अजमेर और आगरा के बीच है।

6. गोत्र और उपवर्ग

  • पाल ➜ 13
  • तड़ ➜ 32
  • गोत्र ➜ 5200

यह गिनती मीणा जनजाति के भाटों (वंशावली रखने वालों) के अनुसार है।

नामपहचान
रावत मीणासबसे ज़्यादा अजमेर ज़िले में
सुरतेवाल मीणामीणा पुरुष और दूसरी जाति की स्त्री के विवाह से जन्मी संतान

7. नाम और भील शासक

  • संख्या में राज्य की दूसरी सबसे बड़ी जनजाति, पर सबसे प्राचीन।
  • “भील” शब्द द्रविड़ भाषा के “बील” से बिगड़कर बना — अर्थ तीर-कमान।
  • धनुष-बाण चलाने में माहिर होने के कारण ही शायद इन्हें “भील” कहा गया।
स्थानभील शासक
कुशलगढ़कुशला भील
डूँगरपुरडूँगरिया भील
बाँसवाड़ाबाँसिया भील

8. क्षेत्र और संख्या

  • भील आबादी राज्य के दक्षिणी और दक्षिण-पश्चिमी क्षेत्र में सबसे घनी।
  • सबसे ज़्यादा ➜ बाँसवाड़ा, डूँगरपुर, उदयपुर, सलूम्बर, भीलवाड़ा और सिरोही ज़िलों में।
  • भीलों की कुल गिनती लगभग 41,00,264 — जनजाति आबादी में हिस्सा लगभग 44.3%।

9. उत्पत्ति के मत

विद्वानमत
कर्नल टॉडभीलों को “वनपुत्र” (जंगल की संतान) कहा
रिज़ले और क्रुकद्रविड़ों से उत्पत्ति
थॉमसनगुजराती मूल

जी. एस. थॉमसन ने भीली व्याकरण नाम की रचना लिखी।

10. गरासिया जनजाति

  • राज्य में स्थान ➜ तीसरा
  • कुल आबादी ➜ 3,14,194
  • कुल जनजातियों में हिस्सा ➜ लगभग 3.4%
ज़िलागरासियामुख्य इलाक़ा
सिरोही1,52,575 — सबसे ज़्यादाआबू और पिंडवाड़ा
उदयपुर1 लाख से कुछ अधिक — दूसराकोटड़ा, गोगुंदा
पाली49,465बाली क्षेत्र

कर्नल टॉड के अनुसार “गरासिया” शब्द “गवास” (सर्वेंट — सेवक) से बना।

गरासिया के दो वर्ग

वर्गपहचान
भील गरासियाभीलों से अपना रिश्ता मानते हैं; गोत्र भी भीलों जैसे
राजपूत गरासियाख़ुद को राजपूतों का वंशज बताते हैं; गोत्र भी राजपूती — परमार, सोलंकी, चौहान आदि

सामाजिक हैसियत के तीन वर्ग

11. सहरिया

  • कुछ विद्वानों के अनुसार “सहरिया” फ़ारसी शब्द “सहर” से बना — अर्थ जंगल।
  • राज्य की जनजातियों में भारत सरकार की आदिम जनजाति समूह (Primitive Tribal Group) सूची में अकेली सहरिया है।
  • राज्य में कुल सहरिया 1,11,377।

12. डामोर

  • असल में गुजरात से जुड़ी जनजाति — इसीलिए बोली पर गुजराती का असर।
  • राज्य में कुल डामोर 91,463।
  • सबसे ज़्यादा डूँगरपुर की सीमलवाड़ा पंचायत समिति में।

13. कथौड़ी

  • मूल रूप से महाराष्ट्र से आई जनजाति।
  • कत्था बनाने में कुशल होने के कारण नाम पड़ा कथौड़ी।
  • आज खैर के पेड़ काटने पर रोक है, इसलिए इन्होंने अपना पुराना काम छोड़कर छोटी वनोपज इकट्ठा करके और दूसरे कामों से गुज़ारा शुरू किया।

… शेष 2 बिंदु — पूरी सूची माइंड मैप में देखें

14. सांसी

  • उत्पत्ति सांसमल नाम के व्यक्ति से मानी जाती है।
  • सबसे ज़्यादा भरतपुर, डीग और झुंझुनूँ में।
  • अनुसूचित जाति (SC) वर्ग में।

15. कंजर

  • यह जाति भी अनुसूचित जाति (SC) वर्ग में।
  • 2011 की जनगणना में राज्य में कुल कंजर केवल 53,816।
  • नाम “काननचार” से माना जाता है — जंगल में घूमने वाला।

16. जनजाति विकास — संस्थाएँ व योजनाएँ

काल / क्रमघटनाविवरण
2 जनवरी 1964माणिक्यलाल वर्मा आदिम जाति शोध संस्थानउदयपुर — आदिवासी समाज को आगे बढ़ाने हेतु
27 मार्च 1976राजस संघराजस्थान जनजाति क्षेत्रीय विकास सहकारी संघ, उदयपुर
1979बिखरी जातियों के लिए विकास कार्यक्रमजनजाति क्षेत्र विकास (TADA) चलाता है
  • राजस संघ ➜ आदिवासियों को उनकी खेती की उपज का सही दाम दिलाना और शोषण से छुटकारा।
  • वनवासी कल्याण परिषद ➜ उदयपुर में बनी; आजकल “वनवासी को गले लगाओ” अभियान चला रही है।
  • मारवाड़ जनजाति विकास बोर्ड ➜ जोधपुर संभाग की जनजातियों के चौतरफ़ा विकास हेतु गठित।

जनजाति उप योजना (TSP)

जनजाति लोगों की आर्थिक हालत सुधारने और क्षेत्र के विकास के काम इसी योजना के तहत होते हैं।

रिवीजन पॉइंटर्स

  1. राज्य की मुख्य जनजातियाँ मीणा, भील, गरासिया, सहरिया, कथौड़ी और डामोर हैं; संख्या का क्रम «मी-भी-ग-स-डा» से याद रखें।
  2. जनजाति जनसंख्या (2011) 92,38,534 है — राज्य की जनसंख्या का 13.48%, और संख्या के हिसाब से देश में चौथा स्थान।
  3. जनजाति प्रतिशत में बाँसवाड़ा (76.4%) पहले और डूँगरपुर (70.8%) दूसरे स्थान पर है, जबकि संख्या में उदयपुर (15.25 लाख) सबसे आगे।
  4. मीणा संख्या में सबसे बड़ी जनजाति है; भील संख्या में दूसरी, पर सबसे प्राचीन जनजाति है।
  5. मीणा शब्द का अर्थ मत्स्य (मछली) है, और कर्नल टॉड ने इनका मूल निवास कालीखोह पर्वतमाला माना।
  6. भील शब्द द्रविड़ भाषा के «बील» से बना है, जिसका अर्थ तीर-कमान है; कर्नल टॉड ने भीलों को «वनपुत्र» कहा।
  7. गरासिया राज्य में तीसरी जनजाति है और सबसे ज़्यादा सिरोही (1,52,575) में बसी है।
  8. सहरिया राज्य की एकमात्र आदिम जनजाति है, जबकि सांसी और कंजर अनुसूचित जाति (SC) वर्ग में गिने जाते हैं।
  9. माणिक्यलाल वर्मा आदिम जाति शोध संस्थान (उदयपुर) 2 जनवरी 1964 को बना और राजस संघ 27 मार्च 1976 को।

अगले भाग में पर्यटन का परिचय और आँकड़े, उद्योग का दर्जा, लोगो-नारे और राज्य के पर्यटन परिपथ।

पिछला भाग: राजस्थान की जनगणना-2011: अनुसूचित जाति व जनजाति एवं लिंगानुपात

अगला भाग: राजस्थान में पर्यटन: पर्यटन — परिचय व आँकड़े एवं पर्यटन परिपथ (सर्किट)

इन्हें भी पढ़ें: राजस्थान की जनगणना-2011 · राजस्थान की जनजातियाँ

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