उद्योग किसी इलाक़े के विकास का पैमाना माने जाते हैं, पर राजस्थान में बड़े क्षेत्रफल और भरपूर खनिज के बावजूद उद्योग देर से और कम पनपे — यही बात इस अध्याय की पृष्ठभूमि है। इस भाग में औद्योगिक परिदृश्य, अर्थव्यवस्था में उद्योगों का हिस्सा, ज़िलों की श्रेणियाँ व वर्गीकरण, औद्योगिक नीतियाँ और सार्वजनिक उपक्रम आते हैं। अंत में सूती वस्त्र उद्योग और उसकी सहकारी मिलें व सुविधाएँ हैं।
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1. राज्य का औद्योगिक चित्र
आज उद्योग किसी क्षेत्र के समग्र विकास और जीवन स्तर का पैमाना माने जाते हैं। इनकी नींव प्राकृतिक संसाधन, ऊर्जा, मानव संसाधन और तकनीक पर टिकी होती है। क्षेत्रफल बड़ा और खनिज भरपूर होने के बावजूद राजस्थान में उद्योग उतने नहीं पनप पाए; आज़ादी के समय यहाँ बड़े उद्योग नाममात्र के थे, बाद में पंचवर्षीय योजनाओं के ज़रिए केंद्र और राज्य ने औद्योगिक विकास शुरू किया। राज्य की गिनती औद्योगिक रूप से पिछड़े राज्यों में होती है और उद्योगों में देश में इसका 10वाँ स्थान है।
| पैमाना | उत्तर |
|---|---|
| सबसे ज़्यादा औद्योगिक इकाइयों वाला ज़िला | जयपुर |
| सबसे कम औद्योगिक इकाइयों वाला ज़िला | जैसलमेर |
| सबसे ज़्यादा मध्यम व वृहद् इकाइयाँ | ज़िला — अलवर; स्थान — भिवाड़ी |
| सबसे ज़्यादा लघु इकाइयाँ | जयपुर व अलवर |
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भारत की औद्योगिक नगरी — कानपुर।
वृहद् उद्योग — 31 मार्च 2023
राज्य में 238 वृहद् उद्योग और 452 मध्यम औद्योगिक इकाइयाँ (आँकड़े 33 ज़िलों के आधार पर)।
सबसे ज़्यादा मध्यम उद्योग — भिवाड़ी, फिर भीलवाड़ा, फिर कोटा।
2. अर्थव्यवस्था में उद्योग
उद्योग क्षेत्र में चार उप-क्षेत्र आते हैं — खनन व उत्खनन, विनिर्माण, बिजली-गैस-जलापूर्ति व अन्य उपयोगी सेवाएँ, और निर्माण।
| GSVA में उद्योगों का हिस्सा | 2021–22 | 2022–23 | 2023–24 | 2024–25 |
|---|---|---|---|---|
| स्थिर कीमतें (2011–12) | 26.34% | 27.76% | 28.53% | 28.39% |
| प्रचलित कीमतें | 24.67% | 27.31% | 27.90% | 27.16% |
| उद्योग क्षेत्र का GVA | 2011–12 | 2024–25 | चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि |
|---|---|---|---|
| स्थिर कीमतें | ₹1.36 लाख करोड़ | ₹2.33 लाख करोड़ | 4.22% |
| प्रचलित कीमतें | ₹1.36 लाख करोड़ | ₹4.26 लाख करोड़ | 9.71% |
12वीं पंचवर्षीय योजना (2012–17) में उद्योगों की वृद्धि दर का लक्ष्य 8.0% था। राज्य में औद्योगिक विकास को सबसे पहले सर्वोच्च प्राथमिकता दूसरी पंचवर्षीय योजना में मिली।
निर्यात 2023–24 — कुल ₹83,704.24 करोड़
शीर्ष 5 — इंजीनियरिंग, रत्न-आभूषण, धातु, वस्त्र और हस्तशिल्प — मिलकर निर्यात का 65% से ज़्यादा।
सूचकांक व व्यापार सुगमता
- निर्यात तैयारी सूचकांक 2022 (नीति आयोग) — कुल मिलाकर पहला तमिलनाडु; राजस्थान कुल में 13वाँ, भू-आबद्ध (लैंडलॉक्ड) राज्यों में छठा (54.80 अंक)।
- राज्य खाद्य सुरक्षा सूचकांक ➜ 7 जून 2023 (विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस) को FSSAI के छठे सूचकांक में राजस्थान 8वें स्थान पर (45 अंक)।
- व्यापार सुगमता (EoDB) ➜ केंद्र का DPIIT हर साल बिज़नेस रिफ़ॉर्म एक्शन प्लान (BRAP) और रैंकिंग जारी करता है। BRAP 2020 में राजस्थान “एस्पायर” श्रेणी में। BRAP 2024 में 344 सुधार बिंदु — भाग A में 57 (11 केंद्रीय मंत्रालयों से जुड़े), भाग B में 287 (राज्यों से जुड़े व्यवसाय-केंद्रित)।
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3. श्रेणियाँ व वर्गीकरण
1972 में सार्वजनिक वित्तीय संस्थाओं के सर्वेक्षण के आधार पर ज़िलों को औद्योगिक संभावना के अनुसार 4 श्रेणियों में बाँटा गया।
| श्रेणी | ज़िले |
|---|---|
| विशिष्ट | जयपुर |
| A | अलवर, दौसा, अजमेर, भीलवाड़ा, पाली, जोधपुर, राजसमंद, उदयपुर, कोटा, बाराँ |
| B | बीकानेर, हनुमानगढ़, गंगानगर, सीकर, झुंझुनूँ, नागौर, टोंक, भरतपुर, चित्तौड़गढ़, बाँसवाड़ा, सवाई माधोपुर, करौली |
MSME की परिभाषा (1 जुलाई 2020 से)
| उद्यम | निवेश (अधिकतम) | कारोबार (अधिकतम) |
|---|---|---|
| सूक्ष्म | ₹1 करोड़ | ₹5 करोड़ |
| लघु | ₹10 करोड़ | ₹50 करोड़ |
| मध्यम | ₹50 करोड़ | ₹250 करोड़ |
कुटीर, लघु और ग्रामोद्योग
| प्रकार | पहचान |
|---|---|
| कुटीर उद्योग | एक परिवार के सदस्य अंशकालिक या पूर्णकालिक चलाते हैं; निवेश नाममात्र |
| लघु उद्योग | पूँजी निवेश होता है; आधुनिक ढंग से उत्पादन, श्रमिकों की प्रधानता |
| ग्रामोद्योग | 10 हज़ार से कम आबादी वाले गाँवों में; ज़मीन-भवन-मशीन में प्रति कारीगर स्थिर पूँजी ₹15 हज़ार से कम |
ग्रामोद्योग और हथकरघा से जुड़ी मीरा सेठ समिति — 21 जनवरी 1997।
4. औद्योगिक नीतियाँ
| काल / क्रम | घटना | विवरण |
|---|---|---|
| 1978 | पहली नीति | 24 जून — कुटीर उद्योग बढ़ाना, बेरोज़गारी का असंतुलन घटाना (भैरोंसिंह शेखावत के समय) |
| 1990–91 | दूसरी नीति | दिसम्बर 1990 में घोषित, अप्रैल 1991 से लागू — रोज़गार, खनन, कृषि वित्त |
| 1994 | तीसरी नीति | 15 जून — तेज़ विकास के लिए निजीकरण |
| 1998 | चौथी नीति | 4 जून |
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औद्योगिक विकास नीति 2019 — सतत और पर्यावरण-हितैषी विकास, रोज़गार, औद्योगिक ढाँचा और संतुलित विकास; राज्य को निवेश का सबसे पसंदीदा गंतव्य बनाना। इसमें — अनुबंध खेती, अजमेर, बीकानेर, बाड़मेर में सिरेमिक हब, समर्पित हीरा क्लस्टर, हर ज़िले में शिल्पग्राम।
- उद्यमशीलता व नवाचार
- पर्यावरण संरक्षण व सतत औद्योगिक विकास
- उद्योग 4.0 — तकनीक अपनाना, कौशल, अनुसंधान व विकास
औद्योगिक नीति 2024 — व्यापार सुगमता और स्थिरता पर आधारित; थीम-आधारित औद्योगिक पार्क, माल ढुलाई आसान, अनुसंधान व हरित तकनीक (बजट 2024–25)।
4 दिसम्बर 2024 — 9 नई नीतियाँ
मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और उद्योग मंत्री ने निवेश से जुड़ी 9 नीतियाँ जारी कीं —
5. सार्वजनिक उपक्रम
| उपक्रम | कहाँ / कब | ख़ास बात |
|---|---|---|
| हिंदुस्तान ज़िंक लिमिटेड | देबारी (उदयपुर), 10 जनवरी 1966; मुख्यालय उदयपुर | पुराना नाम मेटल कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया; देश की सबसे बड़ी सीसा-जस्ता-चाँदी खनन कम्पनी और सबसे बड़ी सल्फ़्यूरिक एसिड उत्पादक; अब वेदांता के पास |
| हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड | खेतड़ी (झुंझुनूँ), 9 नवम्बर 1967; मुख्यालय कोलकाता | अमेरिका की वेस्टर्न नैप इंजीनियरिंग के सहयोग से; इकाई “खेतड़ी कॉपर कॉम्प्लेक्स”; ताँबा उत्पादन 5 फ़रवरी 1975 से (इंदिरा गांधी ने समर्पित किया); स्मेल्टर 23 नवम्बर 2008 को बंद; जनवरी 2018 से बनवास खान से फिर अयस्क निकल रहा है |
| हिंदुस्तान मशीन टूल्स (HMT) | अजमेर, 1967 | चेकोस्लोवाकिया की मदद; मशीनें और घड़ियाँ; अब बंद; तब HMT को “ज्वेल ऑफ़ नेशन” कहा जाता था; देश में HMT की 13 इकाइयाँ |
| सांभर साल्ट्स लिमिटेड | जयपुर, 30 सितम्बर 1964 | केंद्र-राज्य 60 : 40; हिंदुस्तान साल्ट्स की सहायक; डीडवाना-कुचामन, अजमेर, जयपुर में नमक; सांभर से सोडियम क्लोराइड, सल्फ़ेट, कार्बोनेट, बाइकार्बोनेट |
हिंदुस्तान ज़िंक के संयंत्र — ज़िंक स्मेल्टर देबारी (1968), सीसा-जस्ता स्मेल्टर चंदेरिया (1991), दरीबा स्मेल्टिंग कॉम्प्लेक्स (राजसमंद, 2010)। हिंदुस्तान कॉपर की परियोजनाएँ — खेतड़ी कॉपर कॉम्प्लेक्स, खो-दरीबा (अलवर), चाँदमारी (झुंझुनूँ)।
राज्य के 6 वैधानिक बोर्ड
| बोर्ड / निगम | वर्ष |
|---|---|
| राजस्थान वित्त निगम (RFC) | 1955 |
| कृषि भंडारण निगम | 1957 |
| राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम | 1964 |
6. सूती वस्त्र उद्योग
- राज्य का सबसे पुराना और संगठित उद्योग; सबसे ज़्यादा लोगों को रोज़गार।
- 1951 में 7 मिलें; 1956 में अजमेर के विलय के बाद 11; अब लगभग 23 — निजी, सार्वजनिक और सहकारी तीनों क्षेत्रों में (सहकारी मिलें छोटी)।
- कच्चा माल (कपास) देने वाले ज़िले ➜ हनुमानगढ़, गंगानगर।
| उपनाम | शहर |
|---|---|
| सूती वस्त्र की राजधानी | मुम्बई |
| पूर्व का लंकाशायर / भारत का बोस्टन / भारत का मैनचेस्टर | अहमदाबाद |
| उत्तर का मैनचेस्टर | कानपुर |
| दक्षिण का मैनचेस्टर | कोयम्बटूर |
वस्त्र उद्योग के प्रमुख केंद्र — भीलवाड़ा, पाली, ब्यावर।
कपास से कपड़ा
- ओटाई (जिनिंग) — रुई से बीज-पत्ते अलग
- कताई (स्पिनिंग) — रेशे से धागा
- बुनाई (वीविंग) — ताना-बाना मिलाकर कपड़ा
प्रमुख मिलें
| मिल | कहाँ | ख़ास बात |
|---|---|---|
| द कृष्णा मिल्स | ब्यावर, 1889 | पहली सूती मिल (निजी); सेठ दामोदर दास राठी के पिता खींवराज राठी ने लगाई; सबसे ज़्यादा चालू करघे |
| एडवर्ड मिल्स | ब्यावर, 1906 | — |
| महाराजा उम्मेद सिंह मिल्स | पाली, 1918 | राज्य की सबसे बड़ी और सबसे ज़्यादा उत्पादन वाली; 12 अगस्त 1939 को सार्वजनिक कम्पनी बनी; 10 मई 2009 को आग |
| महालक्ष्मी मिल्स | ब्यावर, 1925 | — |
अन्य — आधुनिक पॉलिटेक्स (आबू रोड), मॉडर्न ग्रुप मिल्स (भीलवाड़ा), मॉडर्न थ्रेड्स (रायला, भीलवाड़ा), गोपाल इंडस्ट्रीज़ (कोटा), सुदर्शन टेक्सटाइल्स (कोटा), पोद्दार स्पिनिंग (जयपुर), एस.वी.पी. ग्लोबल वेंचर्स (धनौदी, झालावाड़), विजय कॉटन मिल्स (विजयनगर, ब्यावर); माणिक्यलाल वर्मा टेक्सटाइल इंस्टीट्यूट — भीलवाड़ा।
7. वस्त्र — सहकारी मिलें व सुविधाएँ
सहकारी कताई मिलें
| मिल | कहाँ | वर्ष |
|---|---|---|
| राजस्थान राज्य सहकारी कताई मिल | गुलाबपुरा (भीलवाड़ा) | 1965 |
| श्रीगंगानगर सहकारी कताई मिल | हनुमानगढ़ | 1978 |
| गंगापुर सहकारी कताई मिल | गंगापुर (भीलवाड़ा) | 1981 |
1 अप्रैल 1993 को इन तीनों और गुलाबपुरा की सहकारी जिनिंग मिल को मिलाकर राजस्थान राज्य सहकारी स्पिनिंग व जिनिंग मिल्स संघ (स्पिनफ़ेड) बना।
राष्ट्रीय वस्त्र निगम (NTC) ने 1974 में तीन निजी मिलें लीं — एडवर्ड मिल्स (ब्यावर), महालक्ष्मी मिल्स (ब्यावर), विजयनगर कॉटन मिल्स (विजयनगर, 1932); तीनों अब बंद।
सुविधाएँ और “सबसे”
- नई मिलें RIICO की मदद से लगीं; ब्यावर पुराना केंद्र।
- वस्त्र के लिए पहला कम्प्यूटर एडेड डिज़ाइन सेंटर — भीलवाड़ा; कम्प्यूटर एडेड कारपेट डिज़ाइन सेंटर — जयपुर।
- पहला हाई-टेक टेक्सटाइल पार्क — सिलोरा (किशनगढ़)।
टेक्सटाइल पार्क (कार्यरत)
| पार्क | कहाँ |
|---|---|
| जयपुर इंटीग्रेटेड टेक्सक्राफ़्ट पार्क | बगरू (जयपुर) |
| किशनगढ़ हाई-टेक टेक्स पार्क | किशनगढ़ (अजमेर) |
| नेक्सजेन टेक्सटाइल पार्क | पाली |
केंद्र के वस्त्र मंत्रालय की दो योजनाएँ (31 मार्च 2020 तक) — एकीकृत प्रसंस्करण विकास योजना (वस्त्र प्रदूषण नियंत्रण; केंद्र 50%, राज्य 25%, SPV/बैंक 25%) और SITP (साझा ढाँचे, CETP, कैप्टिव पावर के लिए 40% या ₹40 करोड़)।
8. रैपिड फायर तथ्य
- सबसे ज़्यादा औद्योगिक इकाइयों वाला ज़िला ➜ जयपुर; सबसे कम जैसलमेर
- सबसे ज़्यादा मध्यम व वृहद् इकाइयाँ ➜ अलवर (स्थान भिवाड़ी)
- उद्योगों में राज्य का स्थान ➜ देश में 10वाँ
- विशिष्ट श्रेणी का ज़िला (1972 का वर्गीकरण) ➜ जयपुर
- MSME की परिभाषा (1 जुलाई 2020 से) ➜ निवेश सीमा — सूक्ष्म 1 करोड़ रुपये, लघु 10 करोड़, मध्यम 50 करोड़
- पहली औद्योगिक नीति ➜ 1978 (24 जून); तीसरी नीति 1994 (15 जून)
- हिंदुस्तान ज़िंक ➜ देबारी (उदयपुर), 10 जनवरी 1966
- हिंदुस्तान कॉपर ➜ खेतड़ी (झुंझुनूँ), 9 नवम्बर 1967
- पहली निजी सूती मिल ➜ द कृष्णा मिल्स, ब्यावर, 1889
अगले भाग में कृषि-आधारित उद्योगों की बाक़ी कड़ियाँ — चीनी, ऊन, रेशम, काग़ज़, नमक, घी-तेल-डेयरी — और सीमेंट उद्योग की शुरुआत।
पिछला भाग: राजस्थान में ऊर्जा संसाधन: पवन व बायोमास ऊर्जा एवं ऊर्जा नीतियाँ व संस्थाएँ
अगला भाग: राजस्थान में उद्योग: कृषि-आधारित उद्योग (भाग 2) एवं खनिज-आधारित उद्योग (भाग 1)
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