राजस्थान में कृषि एवं प्रमुख फसलें: कृषि — परिचय व आँकड़े एवं कृषि जलवायु खंड – Rajasthan Geography Chapter 39

कृषि की विशेषताएँ और आँकड़े, फसल ऋतुएँ, दस कृषि जलवायु खंड तथा बाजरा व गेहूँ की पूरी जानकारी।

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In this chapter (11 sections)
  1. कृषि की विशेषताएँ
  2. नवीनतम आँकड़े
  3. भू-उपयोग व जोतें
  4. कृषि पद्धतियाँ व विशेष प्रकार
  5. फसल ऋतुएँ
  6. कृषि जलवायु खंड
  7. दस खंड — ज़िले, वर्षा, फसलें
  8. ग्राह्य परीक्षण केंद्र (ATC)
  9. बाजरा
  10. गेहूँ
  11. रिवीजन पॉइंटर्स

राजस्थान की खेती को एक वाक्य में कहना हो तो वह मानसून के भरोसे चलने वाली, खाद्यान्न-प्रधान खेती है — इसी कारण उसे «मानसून का जुआ» कहा जाता है। इस भाग में कृषि की विशेषताएँ, नवीनतम आँकड़े, भू-उपयोग व जोतें, कृषि पद्धतियाँ, फसल ऋतुएँ, कृषि जलवायु खंड, ग्राह्य परीक्षण केंद्र और बाजरा व गेहूँ क्रम से दिए गए हैं।

इस विषय का इंटरैक्टिव माइंड मैप — राजस्थान में कृषि एवं प्रमुख फसलें, 1 चॉक-बोर्ड चित्र, 30 नक्शे, 2 चार्ट, 30 फ्लैशकार्ड और 25 अभ्यास-प्रश्न के साथ। यहाँ हर खंड के चुने हुए बिंदु हैं; पूरी तालिकाएँ, शेष तथ्य और रटने की ट्रिक माइंड मैप में हैं।
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1. कृषि की विशेषताएँ

अंग्रेज़ी शब्द “एग्रीकल्चर” लैटिन के दो शब्दों से बना है — “एग्री” (मिट्टी) और “कल्चर” (जुताई); यानी फसल उगाने के लिए मिट्टी को जोतना। कृषि राज्य की अर्थव्यवस्था का मेरुदंड है — देश के कुल कृषि क्षेत्र का 14.15% राजस्थान में, और लगभग 75% लोग खेती-पशुपालन पर निर्भर। मानसून की अनियमितता, असमानता और अधूरापन यहाँ की खेती को हमेशा प्रभावित करते रहे हैं।

विशेषताब्योरा
मानसून पर निर्भर — “मानसून का जुआ”औसत वार्षिक वर्षा 57.5 सेमी — पूर्वी राजस्थान 70.4 सेमी, पश्चिमी 31.0 सेमी
जीविका का मुख्य आधार75% आबादी खेती व पशुपालन पर
खाद्यान्न फसलों की प्रधानताकिसान खाद्यान्न पर ज़्यादा, व्यापारिक फसलों पर कम ध्यान देते हैं; अनाज का क्षेत्रफल 2008–09 में 95.68 लाख हे. था, 2023–24 में 93.39 लाख हे.
तिलहन का बढ़ता क्षेत्र46.62 लाख हे. (2008–09) → 66.46 लाख हे. (2023–24)

… शेष 7 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें

2. नवीनतम आँकड़े

फसल वर्ग2023–24 (अंतिम)2024–25 (अग्रिम अनुमान)
अनाज — क्षेत्रफल / उत्पादन93.39 लाख हे. / 208.52 लाख टन98.89 लाख हे. / 219.83 लाख टन
दलहन — क्षेत्रफल / उत्पादन54.63 लाख हे. / 33.34 लाख टन58.00 लाख हे. / 47.84 लाख टन
खाद्यान्न — क्षेत्रफल / उत्पादन148.02 लाख हे. / 241.86 लाख टन156.89 लाख हे. / 267.67 लाख टन

2024–25 में खाद्यान्न उत्पादन पिछले वर्ष से 10.67% ज़्यादा रहने का अनुमान। (खाद्यान्न = अनाज + दालें)

  • शुद्ध बोया गया क्षेत्र ➜ 184.23 लाख हे. (53.74%)
  • कुल बुवाई क्षेत्र 2022–23 ➜ 284.67 लाख हे.
  • ख़रीफ़ बुवाई 2022–23 ➜ 165.60 लाख हे.

… शेष 2 बिंदु — पूरी सूची माइंड मैप में देखें

GSVA में कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र

2023–242024–25
स्थिर कीमतें (2011–12)26.85%26.54%
प्रचलित कीमतें26.78%26.92%

कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र में फसल, पशुधन, वानिकी, मत्स्य और लॉगिंग आते हैं। 2024–25 में इस क्षेत्र के भीतर फसलों का हिस्सा 46.17% और वानिकी का 6.56%।

उप-क्षेत्र (कुल GSVA में, 2024–25)स्थिर कीमतेंप्रचलित कीमतें
फसल11.98%12.43%
पशुधन11.86%12.59%
वानिकी2.54%1.77%

ज़िलों के “सबसे” (2021–22)

पैमानासबसे ज़्यादासबसे कम
शुद्ध बोया गया क्षेत्रबाड़मेर (16,50,058 हे.), फिर बीकानेरराजसमंद (1,01,528 हे.), फिर डूँगरपुर
सिंचित क्षेत्रगंगानगर (11,21,407 हे.)राजसमंद (47,460 हे.)
सिंचित % (कृषि क्षेत्र का)गंगानगर (84%)चूरू (18%)

… शेष 3 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें

फसलों में सबसे ज़्यादा सिंचित क्षेत्र — 1. राई-सरसों, 2. गेहूँ, 3. कपास, 4. चना, 5. मूँगफली, 6. जीरा।

उत्पादन में पहला ज़िला
सभी फलझालावाड़ (फलों का उद्यान/टोकरी — गंगानगर)
फूलअजमेर
अनाजअलवर
दालेंनागौर

मसालों में राजस्थान देश में दूसरा (पहला मध्य प्रदेश); सुगंधित पुष्प व औषधीय मसालों में पहला।

3. भू-उपयोग व जोतें

भू-उपयोग सांख्यिकी 2023–24 के अनुसार राज्य का कुल प्रतिवेदित क्षेत्रफल 342.74 लाख हेक्टेयर।

10वीं कृषि गणना (2015–16)

कृषि गणना हर 5 साल में कृषि व सहकारिता विभाग करता है; भारत में पहली 1970–71 में।

पैमाना2010–112015–16बदलाव
क्रियाशील जोतें68.88 लाख76.55 लाख+11.14%
जोतों का कुल क्षेत्रफल211.36 लाख हे.208.73 लाख हे.−1.24%
महिला-संचालित जोतें5.46 लाख7.75 लाख+41.94%
  • पुरुष-संचालित जोतें 68.66 लाख (191.08 लाख हे.); संस्थागत जोतों का क्षेत्रफल 1.10 लाख हे.।
  • सीमांत, लघु और अर्द्ध-मध्यम जोतें बढ़ीं; बड़ी जोतें 11.44% घटीं।
  • सबसे बड़ी औसत जोत ➜ बाड़मेर; सबसे छोटी — डूँगरपुर।

4. कृषि पद्धतियाँ व विशेष प्रकार

पद्धतिपहचानप्रमुख फसलें
शुष्क (बारानी) कृषिकम पानी, बरसात के भरोसे; 50 सेमी से कम वर्षा वाले मरुस्थलीय ज़िलों मेंबाजरा, ज्वार, ग्वार, मोठ
सिंचित कृषिनहर, तालाब, कुएँ, बाँध से सिंचाईगन्ना, कपास, गेहूँ, सरसों
आर्द्र कृषिउपजाऊ व काली मिट्टी, 100 सेमी से ज़्यादा वर्षाचाय, कॉफ़ी, काजू, नारियल, रबर

स्थानांतरित (चलायमान) कृषि

  • आदिवासी जंगल जलाकर या काटकर ज़मीन साफ़ करते हैं और कुछ साल खेती करके आगे बढ़ जाते हैं — “स्लैश एंड बर्न”।
  • राज्य के दक्षिणी आदिवासी इलाक़ों में; सबसे ज़्यादा भील जनजाति करती है।
  • इसे “वालरा” कहते हैं — गरासिया जनजाति की ऐसी खेती भी वालरा कहलाती है।

कृषि के विशेष प्रकार

शब्दअर्थ
विटीकल्चरअंगूर का व्यावसायिक उत्पादन
पिसीकल्चरव्यावसायिक मछली पालन
एपीकल्चरशहद के लिए मधुमक्खी पालन
मेरीकल्चरसमुद्री जीवों का व्यावसायिक उत्पादन

5. फसल ऋतुएँ

ऋतुबुवाई / कटाईफसलें
ख़रीफ़ (स्यालू / सावणू) — वर्षा ऋतुजून-जुलाई / सितम्बर-अक्टूबर (दीपावली पर)चावल, ज्वार, बाजरा, मक्का, कपास, गन्ना, मूँगफली, सोयाबीन, अरंडी, तिल, अरहर, उड़द, मूँग, मोठ, चँवला, ग्वार, चारा
रबी (उनालू)अक्टूबर-नवम्बर / मार्च-अप्रैल (होली पर)गेहूँ, जौ, चना, मसूर, मटर, अलसी, सरसों, तारामीरा, सूरजमुखी, राई, जीरा, मेथी, धनिया, सौंफ, ईसबगोल
ज़ायद (चौमासा)मार्च से जूनतरबूज़, ख़रबूज़ा, ककड़ी, कंद, सब्ज़ियाँ
  • ख़रीफ़ ➜ लगभग 150–165 लाख हे.; इसमें 60–65% खाद्यान्न, 10–15% तिलहन, 4% कपास-गन्ना, 20–25% अन्य; 80–90% क्षेत्र बारानी।
  • रबी ➜ लगभग 100–120 लाख हे., जिसमें लगभग 90 लाख हे. सिंचित।
  • तिलहन ➜ ख़रीफ़ में मूँगफली, तिल, सोयाबीन, अरंडी; रबी में राई, सरसों, तारामीरा, अलसी।

फसलों के “सबसे”

वर्गसबसे ज़्यादा क्षेत्रफलसबसे ज़्यादा उत्पादन
खाद्यान्नबाजरागेहूँ
दलहनमूँगचना
तिलहनसरसोंसरसों

उत्पादन में राज्य देश में पहला — अलसी, तारामीरा, ग्वार, मोठ, मेथी, बाजरा, ईसबगोल, सरसों, मेहंदी, मूँग, सोनामुखी, जैतून। 2022–23 में पोषक (मोटे) अनाज में भी पहला (15.66%), दूसरा कर्नाटक।

6. कृषि जलवायु खंड

  • जलवायु के हिसाब से राज्य की खेती 10 कृषि जलवायु खंडों में बँटी है।
  • सबसे बड़ा ➜ IC अति शुष्क एवं आंशिक सिंचित पश्चिमी मैदानी क्षेत्र; सबसे छोटा — IVB आर्द्र दक्षिणी मैदानी क्षेत्र।
  • योजना आयोग (1989) ने भारत को 15 कृषि जलवायु प्रदेशों में बाँटा — राजस्थान का ज़्यादातर भाग (14) पश्चिमी शुष्क प्रदेश में, बाक़ी (8) मध्य पठारी व पहाड़ी क्षेत्र में, और उत्तर का कुछ हिस्सा (6) ट्रांस-गंगा मैदानी क्षेत्र में।

7. दस खंड — ज़िले, वर्षा, फसलें

खंडज़िलेवर्षा (सेमी)क्षेत्र (लाख हे.)प्रमुख फसलेंअनुसंधान केंद्र
IA शुष्क पश्चिमी मैदानजोधपुर, फलौदी, बाड़मेर, बालोतरा20–3747.4बाजरा, मोठ, तिल, गेहूँ, सरसों, जीरामंडोर (जोधपुर)
IB उत्तर-पश्चिमी सिंचित मैदानगंगानगर, हनुमानगढ़10–3521.0कपास, ग्वार, गेहूँ, सरसों, चनागंगानगर
IC अति शुष्क आंशिक सिंचित पश्चिमी मैदानबीकानेर, जैसलमेर, चूरू (रतनगढ़, सरदारशहर, बीदासर, सुजानगढ़)10–3577.0 (सबसे बड़ा)बाजरा, मोठ, ग्वार, गेहूँ, सरसों, चनाबीछवाल (बीकानेर)
IIA अंतःस्थलीय जलोत्सरण का अंतर्वर्ती मैदानसीकर, बाक़ी चूरू, झुंझुनूँ, नागौर, डीडवाना-कुचामन30–5036.9बाजरा, ग्वार, दालें, सरसों, चनाफतेहपुर (सीकर)

राज्य में कुल 11 कृषि अनुसंधान केंद्र (ARS) हैं (आर्थिक समीक्षा 2024–25)।

8. ग्राह्य परीक्षण केंद्र (ATC)

कृषि विश्वविद्यालयों के अनुसंधान केंद्रों की नई तकनीकों को पहले ग्राह्य परीक्षण केंद्रों (ATC) पर परखा जाता है — स्थानीय हालात और कृषि विस्तार कार्यकर्ताओं की प्रतिक्रिया के आधार पर ट्रायल करके उनमें सुधार किया जाता है। निजी कम्पनियों के संकर व उन्नत बीजों की उपयोगिता भी यहीं जाँची जाती है।

खंडATC
IAरामपुरा (जोधपुर)
IBश्रीकरणपुर व हनुमानगढ़
ICलूणकरणसर
IIAआबूसर (झुंझुनूँ)

बागवानी फसलों के शोध के लिए बाक़ी 9 खंडों में अगले 3 सालों में चरणबद्ध रूप से बागवानी ATC बनेंगे। राज्य निधि से जैविक खेती अपनाने वाले 3 किसानों को हर साल ₹1 लाख की मदद।

9. बाजरा

  • वानस्पतिक नाम ➜ पेनिसेटम ग्लूकम
  • उपनाम ➜ ग़रीब का भोजन; मूलतः अफ़्रीकी पौधा
  • मिट्टी ➜ रेतीली बलुई
  • राज्य में सबसे ज़्यादा क्षेत्रफल में बोई जाने वाली और सबसे ज़्यादा सूखा सहने वाली फसल।
  • रोग ➜ ग्रीन ईयर (हरित बाली); पकी फसल पर बरसात से कंडुआ; अरगट — ज़हरीली फफूँद से बाजरा ज़हरीला हो जाता है।
  • बाजरे से बना चारा ➜ कड़बी।
  • किस्में — RCB-2, RHB-30, RCB-911, राज 171, राज बाजरा चरी-2।

श्रीअन्न

प्रधानमंत्री ने मिलेट्स को “श्रीअन्न” नाम दिया। बाजरा उत्पादन में राजस्थान देश में पहला है; मिड-डे-मील और माँ-बाड़ी केंद्रों में पायलट रूप से श्रीअन्न उत्पाद शुरू होंगे और हर ज़िले में मिलेट्स आउटलेट खुलेंगे।

10. गेहूँ

  • मूल ➜ फ़िलिस्तीनी पौधा
  • वर्षा ➜ 50–70 सेमी
  • तापमान ➜ 10–20°C
  • रोग ➜ करजवा, चेंपा, रतुआ, टुंडू, काला कीट, स्मट।
  • किस्में — सोना कल्याण, मैक्सिकन सोना, शरबती, सोनालिका, कोहिनूर, राज 1482, राज 3077, राज 3765, दुर्गापुरा 65, चम्बल 65, मंगला, लाल बहादुर, सोना 227, सोनेरा, हीरा, शेरा, सारण, चम्पारण, गंगा सुनहरी।
  • कृषि अनुसंधान केंद्र दुर्गापुरा की किस्में — राज 3077, राज 1482, राज 3765, राज 1972, दुर्गापुरा 65।

दो प्रजातियाँ

प्रजातिपहचान
ट्रिटिकम एस्टीवमचपाती गेहूँ
ट्रिटिकम ड्यूरम — काठिया (मैकरोनी) गेहूँपानी कम चाहिए; प्रोटीन ज़्यादा, स्टार्च कम — ताक़तवर और जल्दी पचने वाला; दाना मोटा व कड़ा; बाज़ार में दाम ज़्यादा; कोटा व उदयपुर संभाग के लिए उपयुक्त

याद रखें: सोनालिका, गंगा सुनहरी, चम्बल 65 — गेहूँ की उच्च उत्पादक किस्में (लाइब्रेरियन ग्रेड II, 2025)।

रिवीजन पॉइंटर्स

  1. औसत वार्षिक वर्षा 57.5 सेमी है — पूर्वी राजस्थान में 70.4 सेमी और पश्चिमी में 31.0 सेमी; इसीलिए खेती मानसून पर टिकी है।
  2. देश के कुल कृषि क्षेत्र का 14.15% राजस्थान में है और लगभग 75% लोग खेती-पशुपालन पर निर्भर हैं।
  3. 2023–24 में अनाज का क्षेत्रफल 93.39 लाख हे. और तिलहन का 66.46 लाख हे. रहा — तिलहन का क्षेत्र लगातार बढ़ा है।
  4. सिंचित क्षेत्र का सबसे बड़ा हिस्सा गंगानगर में (84%) और सबसे छोटा चूरू में (18%) है।
  5. सबसे ज़्यादा क्षेत्रफल खाद्यान्न में बाजरा, दलहन में मूँग और तिलहन में सरसों का है; उत्पादन में क्रमशः गेहूँ, चना और सरसों आगे हैं।
  6. ख़रीफ़ (स्यालू) की बुवाई जून-जुलाई में, रबी (उनालू) की अक्टूबर-नवम्बर में और ज़ायद (चौमासा) की मार्च से जून के बीच होती है।
  7. राज्य 10 कृषि जलवायु खंडों में बँटा है — सबसे बड़ा IC (77.0 लाख हे.) और सबसे छोटा IVB।
  8. स्थानांतरित खेती को «वालरा» कहते हैं; दक्षिणी आदिवासी इलाक़ों में इसे सबसे ज़्यादा भील जनजाति करती है।
  9. बाजरा राज्य में सबसे ज़्यादा क्षेत्रफल में बोई जाने वाली और सबसे ज़्यादा सूखा सहने वाली फसल है; इसका चारा कड़बी कहलाता है।

अगले भाग में मक्का, चावल, ज्वार-जौ जैसी अनाज फसलें, दलहन में राज्य का तीसरा स्थान और तिलहन व व्यापारिक फसलें।

पिछला भाग: राजस्थान की नहरें: इंदिरा गांधी नहर — परिचय एवं शाखाएँ, लिफ्ट व पेयजल योजनाएँ

अगला भाग: राजस्थान में कृषि एवं प्रमुख फसलें: खाद्यान्न फसलें एवं तिलहन फसलें

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पूरी श्रृंखला: राजस्थान का भूगोल — सभी अध्याय · राजस्थान जी.के. नोट्स — सभी विषय

इस अध्याय की पूरी तैयारी चाहिए? ऊपर दिए नोट्स हर खंड का चुना हुआ हिस्सा हैं। पूरी तालिकाएँ, बाक़ी बिंदु, याद रखने की ट्रिक, नक्शे-चित्र और अभ्यास-प्रश्न राजस्थान में कृषि एवं प्रमुख फसलें के माइंड मैप में हैं। राजस्थान जी.के. के सभी विषय एक ही पास में उपलब्ध हैं।
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