राजस्थान की खेती को एक वाक्य में कहना हो तो वह मानसून के भरोसे चलने वाली, खाद्यान्न-प्रधान खेती है — इसी कारण उसे «मानसून का जुआ» कहा जाता है। इस भाग में कृषि की विशेषताएँ, नवीनतम आँकड़े, भू-उपयोग व जोतें, कृषि पद्धतियाँ, फसल ऋतुएँ, कृषि जलवायु खंड, ग्राह्य परीक्षण केंद्र और बाजरा व गेहूँ क्रम से दिए गए हैं।
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1. कृषि की विशेषताएँ
अंग्रेज़ी शब्द “एग्रीकल्चर” लैटिन के दो शब्दों से बना है — “एग्री” (मिट्टी) और “कल्चर” (जुताई); यानी फसल उगाने के लिए मिट्टी को जोतना। कृषि राज्य की अर्थव्यवस्था का मेरुदंड है — देश के कुल कृषि क्षेत्र का 14.15% राजस्थान में, और लगभग 75% लोग खेती-पशुपालन पर निर्भर। मानसून की अनियमितता, असमानता और अधूरापन यहाँ की खेती को हमेशा प्रभावित करते रहे हैं।
| विशेषता | ब्योरा |
|---|---|
| मानसून पर निर्भर — “मानसून का जुआ” | औसत वार्षिक वर्षा 57.5 सेमी — पूर्वी राजस्थान 70.4 सेमी, पश्चिमी 31.0 सेमी |
| जीविका का मुख्य आधार | 75% आबादी खेती व पशुपालन पर |
| खाद्यान्न फसलों की प्रधानता | किसान खाद्यान्न पर ज़्यादा, व्यापारिक फसलों पर कम ध्यान देते हैं; अनाज का क्षेत्रफल 2008–09 में 95.68 लाख हे. था, 2023–24 में 93.39 लाख हे. |
| तिलहन का बढ़ता क्षेत्र | 46.62 लाख हे. (2008–09) → 66.46 लाख हे. (2023–24) |
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2. नवीनतम आँकड़े
| फसल वर्ग | 2023–24 (अंतिम) | 2024–25 (अग्रिम अनुमान) |
|---|---|---|
| अनाज — क्षेत्रफल / उत्पादन | 93.39 लाख हे. / 208.52 लाख टन | 98.89 लाख हे. / 219.83 लाख टन |
| दलहन — क्षेत्रफल / उत्पादन | 54.63 लाख हे. / 33.34 लाख टन | 58.00 लाख हे. / 47.84 लाख टन |
| खाद्यान्न — क्षेत्रफल / उत्पादन | 148.02 लाख हे. / 241.86 लाख टन | 156.89 लाख हे. / 267.67 लाख टन |
2024–25 में खाद्यान्न उत्पादन पिछले वर्ष से 10.67% ज़्यादा रहने का अनुमान। (खाद्यान्न = अनाज + दालें)
- शुद्ध बोया गया क्षेत्र ➜ 184.23 लाख हे. (53.74%)
- कुल बुवाई क्षेत्र 2022–23 ➜ 284.67 लाख हे.
- ख़रीफ़ बुवाई 2022–23 ➜ 165.60 लाख हे.
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GSVA में कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र
| 2023–24 | 2024–25 | |
|---|---|---|
| स्थिर कीमतें (2011–12) | 26.85% | 26.54% |
| प्रचलित कीमतें | 26.78% | 26.92% |
कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र में फसल, पशुधन, वानिकी, मत्स्य और लॉगिंग आते हैं। 2024–25 में इस क्षेत्र के भीतर फसलों का हिस्सा 46.17% और वानिकी का 6.56%।
| उप-क्षेत्र (कुल GSVA में, 2024–25) | स्थिर कीमतें | प्रचलित कीमतें |
|---|---|---|
| फसल | 11.98% | 12.43% |
| पशुधन | 11.86% | 12.59% |
| वानिकी | 2.54% | 1.77% |
ज़िलों के “सबसे” (2021–22)
| पैमाना | सबसे ज़्यादा | सबसे कम |
|---|---|---|
| शुद्ध बोया गया क्षेत्र | बाड़मेर (16,50,058 हे.), फिर बीकानेर | राजसमंद (1,01,528 हे.), फिर डूँगरपुर |
| सिंचित क्षेत्र | गंगानगर (11,21,407 हे.) | राजसमंद (47,460 हे.) |
| सिंचित % (कृषि क्षेत्र का) | गंगानगर (84%) | चूरू (18%) |
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फसलों में सबसे ज़्यादा सिंचित क्षेत्र — 1. राई-सरसों, 2. गेहूँ, 3. कपास, 4. चना, 5. मूँगफली, 6. जीरा।
| उत्पादन में पहला ज़िला | |
|---|---|
| सभी फल | झालावाड़ (फलों का उद्यान/टोकरी — गंगानगर) |
| फूल | अजमेर |
| अनाज | अलवर |
| दालें | नागौर |
मसालों में राजस्थान देश में दूसरा (पहला मध्य प्रदेश); सुगंधित पुष्प व औषधीय मसालों में पहला।
3. भू-उपयोग व जोतें
भू-उपयोग सांख्यिकी 2023–24 के अनुसार राज्य का कुल प्रतिवेदित क्षेत्रफल 342.74 लाख हेक्टेयर।
10वीं कृषि गणना (2015–16)
कृषि गणना हर 5 साल में कृषि व सहकारिता विभाग करता है; भारत में पहली 1970–71 में।
| पैमाना | 2010–11 | 2015–16 | बदलाव |
|---|---|---|---|
| क्रियाशील जोतें | 68.88 लाख | 76.55 लाख | +11.14% |
| जोतों का कुल क्षेत्रफल | 211.36 लाख हे. | 208.73 लाख हे. | −1.24% |
| महिला-संचालित जोतें | 5.46 लाख | 7.75 लाख | +41.94% |
- पुरुष-संचालित जोतें 68.66 लाख (191.08 लाख हे.); संस्थागत जोतों का क्षेत्रफल 1.10 लाख हे.।
- सीमांत, लघु और अर्द्ध-मध्यम जोतें बढ़ीं; बड़ी जोतें 11.44% घटीं।
- सबसे बड़ी औसत जोत ➜ बाड़मेर; सबसे छोटी — डूँगरपुर।
4. कृषि पद्धतियाँ व विशेष प्रकार
| पद्धति | पहचान | प्रमुख फसलें |
|---|---|---|
| शुष्क (बारानी) कृषि | कम पानी, बरसात के भरोसे; 50 सेमी से कम वर्षा वाले मरुस्थलीय ज़िलों में | बाजरा, ज्वार, ग्वार, मोठ |
| सिंचित कृषि | नहर, तालाब, कुएँ, बाँध से सिंचाई | गन्ना, कपास, गेहूँ, सरसों |
| आर्द्र कृषि | उपजाऊ व काली मिट्टी, 100 सेमी से ज़्यादा वर्षा | चाय, कॉफ़ी, काजू, नारियल, रबर |
स्थानांतरित (चलायमान) कृषि
- आदिवासी जंगल जलाकर या काटकर ज़मीन साफ़ करते हैं और कुछ साल खेती करके आगे बढ़ जाते हैं — “स्लैश एंड बर्न”।
- राज्य के दक्षिणी आदिवासी इलाक़ों में; सबसे ज़्यादा भील जनजाति करती है।
- इसे “वालरा” कहते हैं — गरासिया जनजाति की ऐसी खेती भी वालरा कहलाती है।
कृषि के विशेष प्रकार
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| विटीकल्चर | अंगूर का व्यावसायिक उत्पादन |
| पिसीकल्चर | व्यावसायिक मछली पालन |
| एपीकल्चर | शहद के लिए मधुमक्खी पालन |
| मेरीकल्चर | समुद्री जीवों का व्यावसायिक उत्पादन |
5. फसल ऋतुएँ
| ऋतु | बुवाई / कटाई | फसलें |
|---|---|---|
| ख़रीफ़ (स्यालू / सावणू) — वर्षा ऋतु | जून-जुलाई / सितम्बर-अक्टूबर (दीपावली पर) | चावल, ज्वार, बाजरा, मक्का, कपास, गन्ना, मूँगफली, सोयाबीन, अरंडी, तिल, अरहर, उड़द, मूँग, मोठ, चँवला, ग्वार, चारा |
| रबी (उनालू) | अक्टूबर-नवम्बर / मार्च-अप्रैल (होली पर) | गेहूँ, जौ, चना, मसूर, मटर, अलसी, सरसों, तारामीरा, सूरजमुखी, राई, जीरा, मेथी, धनिया, सौंफ, ईसबगोल |
| ज़ायद (चौमासा) | मार्च से जून | तरबूज़, ख़रबूज़ा, ककड़ी, कंद, सब्ज़ियाँ |
- ख़रीफ़ ➜ लगभग 150–165 लाख हे.; इसमें 60–65% खाद्यान्न, 10–15% तिलहन, 4% कपास-गन्ना, 20–25% अन्य; 80–90% क्षेत्र बारानी।
- रबी ➜ लगभग 100–120 लाख हे., जिसमें लगभग 90 लाख हे. सिंचित।
- तिलहन ➜ ख़रीफ़ में मूँगफली, तिल, सोयाबीन, अरंडी; रबी में राई, सरसों, तारामीरा, अलसी।
फसलों के “सबसे”
| वर्ग | सबसे ज़्यादा क्षेत्रफल | सबसे ज़्यादा उत्पादन |
|---|---|---|
| खाद्यान्न | बाजरा | गेहूँ |
| दलहन | मूँग | चना |
| तिलहन | सरसों | सरसों |
उत्पादन में राज्य देश में पहला — अलसी, तारामीरा, ग्वार, मोठ, मेथी, बाजरा, ईसबगोल, सरसों, मेहंदी, मूँग, सोनामुखी, जैतून। 2022–23 में पोषक (मोटे) अनाज में भी पहला (15.66%), दूसरा कर्नाटक।
6. कृषि जलवायु खंड
- जलवायु के हिसाब से राज्य की खेती 10 कृषि जलवायु खंडों में बँटी है।
- सबसे बड़ा ➜ IC अति शुष्क एवं आंशिक सिंचित पश्चिमी मैदानी क्षेत्र; सबसे छोटा — IVB आर्द्र दक्षिणी मैदानी क्षेत्र।
- योजना आयोग (1989) ने भारत को 15 कृषि जलवायु प्रदेशों में बाँटा — राजस्थान का ज़्यादातर भाग (14) पश्चिमी शुष्क प्रदेश में, बाक़ी (8) मध्य पठारी व पहाड़ी क्षेत्र में, और उत्तर का कुछ हिस्सा (6) ट्रांस-गंगा मैदानी क्षेत्र में।
7. दस खंड — ज़िले, वर्षा, फसलें
| खंड | ज़िले | वर्षा (सेमी) | क्षेत्र (लाख हे.) | प्रमुख फसलें | अनुसंधान केंद्र |
|---|---|---|---|---|---|
| IA शुष्क पश्चिमी मैदान | जोधपुर, फलौदी, बाड़मेर, बालोतरा | 20–37 | 47.4 | बाजरा, मोठ, तिल, गेहूँ, सरसों, जीरा | मंडोर (जोधपुर) |
| IB उत्तर-पश्चिमी सिंचित मैदान | गंगानगर, हनुमानगढ़ | 10–35 | 21.0 | कपास, ग्वार, गेहूँ, सरसों, चना | गंगानगर |
| IC अति शुष्क आंशिक सिंचित पश्चिमी मैदान | बीकानेर, जैसलमेर, चूरू (रतनगढ़, सरदारशहर, बीदासर, सुजानगढ़) | 10–35 | 77.0 (सबसे बड़ा) | बाजरा, मोठ, ग्वार, गेहूँ, सरसों, चना | बीछवाल (बीकानेर) |
| IIA अंतःस्थलीय जलोत्सरण का अंतर्वर्ती मैदान | सीकर, बाक़ी चूरू, झुंझुनूँ, नागौर, डीडवाना-कुचामन | 30–50 | 36.9 | बाजरा, ग्वार, दालें, सरसों, चना | फतेहपुर (सीकर) |
राज्य में कुल 11 कृषि अनुसंधान केंद्र (ARS) हैं (आर्थिक समीक्षा 2024–25)।
8. ग्राह्य परीक्षण केंद्र (ATC)
कृषि विश्वविद्यालयों के अनुसंधान केंद्रों की नई तकनीकों को पहले ग्राह्य परीक्षण केंद्रों (ATC) पर परखा जाता है — स्थानीय हालात और कृषि विस्तार कार्यकर्ताओं की प्रतिक्रिया के आधार पर ट्रायल करके उनमें सुधार किया जाता है। निजी कम्पनियों के संकर व उन्नत बीजों की उपयोगिता भी यहीं जाँची जाती है।
| खंड | ATC |
|---|---|
| IA | रामपुरा (जोधपुर) |
| IB | श्रीकरणपुर व हनुमानगढ़ |
| IC | लूणकरणसर |
| IIA | आबूसर (झुंझुनूँ) |
बागवानी फसलों के शोध के लिए बाक़ी 9 खंडों में अगले 3 सालों में चरणबद्ध रूप से बागवानी ATC बनेंगे। राज्य निधि से जैविक खेती अपनाने वाले 3 किसानों को हर साल ₹1 लाख की मदद।
9. बाजरा
- वानस्पतिक नाम ➜ पेनिसेटम ग्लूकम
- उपनाम ➜ ग़रीब का भोजन; मूलतः अफ़्रीकी पौधा
- मिट्टी ➜ रेतीली बलुई
- राज्य में सबसे ज़्यादा क्षेत्रफल में बोई जाने वाली और सबसे ज़्यादा सूखा सहने वाली फसल।
- रोग ➜ ग्रीन ईयर (हरित बाली); पकी फसल पर बरसात से कंडुआ; अरगट — ज़हरीली फफूँद से बाजरा ज़हरीला हो जाता है।
- बाजरे से बना चारा ➜ कड़बी।
- किस्में — RCB-2, RHB-30, RCB-911, राज 171, राज बाजरा चरी-2।
श्रीअन्न
प्रधानमंत्री ने मिलेट्स को “श्रीअन्न” नाम दिया। बाजरा उत्पादन में राजस्थान देश में पहला है; मिड-डे-मील और माँ-बाड़ी केंद्रों में पायलट रूप से श्रीअन्न उत्पाद शुरू होंगे और हर ज़िले में मिलेट्स आउटलेट खुलेंगे।
10. गेहूँ
- मूल ➜ फ़िलिस्तीनी पौधा
- वर्षा ➜ 50–70 सेमी
- तापमान ➜ 10–20°C
- रोग ➜ करजवा, चेंपा, रतुआ, टुंडू, काला कीट, स्मट।
- किस्में — सोना कल्याण, मैक्सिकन सोना, शरबती, सोनालिका, कोहिनूर, राज 1482, राज 3077, राज 3765, दुर्गापुरा 65, चम्बल 65, मंगला, लाल बहादुर, सोना 227, सोनेरा, हीरा, शेरा, सारण, चम्पारण, गंगा सुनहरी।
- कृषि अनुसंधान केंद्र दुर्गापुरा की किस्में — राज 3077, राज 1482, राज 3765, राज 1972, दुर्गापुरा 65।
दो प्रजातियाँ
| प्रजाति | पहचान |
|---|---|
| ट्रिटिकम एस्टीवम | चपाती गेहूँ |
| ट्रिटिकम ड्यूरम — काठिया (मैकरोनी) गेहूँ | पानी कम चाहिए; प्रोटीन ज़्यादा, स्टार्च कम — ताक़तवर और जल्दी पचने वाला; दाना मोटा व कड़ा; बाज़ार में दाम ज़्यादा; कोटा व उदयपुर संभाग के लिए उपयुक्त |
याद रखें: सोनालिका, गंगा सुनहरी, चम्बल 65 — गेहूँ की उच्च उत्पादक किस्में (लाइब्रेरियन ग्रेड II, 2025)।
रिवीजन पॉइंटर्स
- औसत वार्षिक वर्षा 57.5 सेमी है — पूर्वी राजस्थान में 70.4 सेमी और पश्चिमी में 31.0 सेमी; इसीलिए खेती मानसून पर टिकी है।
- देश के कुल कृषि क्षेत्र का 14.15% राजस्थान में है और लगभग 75% लोग खेती-पशुपालन पर निर्भर हैं।
- 2023–24 में अनाज का क्षेत्रफल 93.39 लाख हे. और तिलहन का 66.46 लाख हे. रहा — तिलहन का क्षेत्र लगातार बढ़ा है।
- सिंचित क्षेत्र का सबसे बड़ा हिस्सा गंगानगर में (84%) और सबसे छोटा चूरू में (18%) है।
- सबसे ज़्यादा क्षेत्रफल खाद्यान्न में बाजरा, दलहन में मूँग और तिलहन में सरसों का है; उत्पादन में क्रमशः गेहूँ, चना और सरसों आगे हैं।
- ख़रीफ़ (स्यालू) की बुवाई जून-जुलाई में, रबी (उनालू) की अक्टूबर-नवम्बर में और ज़ायद (चौमासा) की मार्च से जून के बीच होती है।
- राज्य 10 कृषि जलवायु खंडों में बँटा है — सबसे बड़ा IC (77.0 लाख हे.) और सबसे छोटा IVB।
- स्थानांतरित खेती को «वालरा» कहते हैं; दक्षिणी आदिवासी इलाक़ों में इसे सबसे ज़्यादा भील जनजाति करती है।
- बाजरा राज्य में सबसे ज़्यादा क्षेत्रफल में बोई जाने वाली और सबसे ज़्यादा सूखा सहने वाली फसल है; इसका चारा कड़बी कहलाता है।
अगले भाग में मक्का, चावल, ज्वार-जौ जैसी अनाज फसलें, दलहन में राज्य का तीसरा स्थान और तिलहन व व्यापारिक फसलें।
पिछला भाग: राजस्थान की नहरें: इंदिरा गांधी नहर — परिचय एवं शाखाएँ, लिफ्ट व पेयजल योजनाएँ
अगला भाग: राजस्थान में कृषि एवं प्रमुख फसलें: खाद्यान्न फसलें एवं तिलहन फसलें
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