अधात्विक खनिजों की सूची लम्बी है, इसलिए रटने से पहले यह देखिए कि कौन-सा खनिज किस उद्योग में लगता है और राज्य में किस ज़िले में सबसे ज़्यादा मिलता है। परीक्षा में यही जोड़ी बार-बार पूछी जाती है। इस भाग में अभ्रक व परमाणु खनिज, एस्बेस्टॉस-फ़ेल्सपार-वोलस्टोनाइट, क्वार्ट्ज़-बेराइट्स-कैल्साइट, मिट्टी के खनिज, सिलिका सैंड-डोलोमाइट और बहुमूल्य पत्थर क्रमवार दिए गए हैं।
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1. अभ्रक व परमाणु खनिज
अभ्रक
- आग्नेय और कायांतरित चट्टानों में सफ़ेद या काली परतों में; ज्वलनशील नहीं; विद्युत का कुचालक — ताप, बिजली और ध्वनि रोधी; 2015 में अप्रधान खनिज घोषित।
- उपयोग ➜ दवाएँ, सजावटी सामान, वायुयान, भट्टियाँ, इलेक्ट्रॉनिक्स; बिजली उद्योग के लिए ज़रूरी; अभ्रक के चूरे से चादरें — “माइकेनाइट उद्योग”।
- भंडार और उत्पादन में आंध्र प्रदेश पहला (41%), राजस्थान दूसरा (28%); राज्य में सबसे ज़्यादा भीलवाड़ा, फिर अजमेर, उदयपुर।
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यूरेनियम
- गहरा काला, रेडियोधर्मी; नाभिकीय विखंडन से बिजली; अयस्क — पिचब्लेंड, समरस्काइट; देश की पहली यूरेनियम खान — जादूगुड़ा (झारखंड)।
- राज्य में भंडार ➜ भूणास, कुराड़िया (भीलवाड़ा), उमरा (उदयपुर), रोयल, सुहागपुरा, खंडेला (सीकर), किशनगढ़ (अजमेर), रामगढ़ (बाराँ), डूँगरपुर, बाँसवाड़ा।
- कुराड़िया (जहाज़पुर, भीलवाड़ा) — हाल की खोज।
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| खनिज | पहचान |
|---|---|
| ग्रेफ़ाइट | “काला सीसा / प्लम्बेगो / खनिज कार्बन”; अधातु होकर भी मुलायम और सुचालक; RSMML खनन करता है; परमाणु संयंत्रों में मंदक, स्नेहक, पेंसिल; देश में पहला ओडिशा, राज्य में नगण्य; अरावली की ग्रेफ़ाइटिक फ़िलाइट-शिस्ट में — घाटोल से खांदू (बाँसवाड़ा), डूमड़ा, आम्बा (अजमेर), अलवर, जोधपुर |
| थोरियम | ज़्यादातर समुद्र तटों पर; राज्य में नगण्य; मुख्य बाँसवाड़ा, अन्य पाली, भीलवाड़ा, डूँगरपुर, चित्तौड़, प्रतापगढ़ |
| लिथियम | अजमेर क्षेत्र; हाल में रेवत पहाड़ी (डेगाना, नागौर) में भंडार पुष्ट |
2. एस्बेस्टॉस, फ़ेल्सपार, वोलस्टोनाइट
एस्बेस्टॉस
- “खनिज रेशम / रॉक वूल”; रेशेदार — मैग्नीशियम, सिलिका और पानी से बना; रुई की तरह काता जा सकता है; अग्निरोधी।
- उपयोग ➜ रेल डिब्बे, जहाज़, सीमेंट शीट, टाइलें, फ़िल्टर, बॉयलर; चादरें इंजन-बॉयलर ढकने में।
- प्रकार ➜ एम्फ़िबोल, क्राइसोटाइल (सबसे अच्छा), एंथोफ़िलाइट; राज्य में ज़्यादातर एम्फ़िबोल।
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याद रखें: RAS प्रारम्भिक 2025 — एस्बेस्टॉस खदानें: अर्जुनपुरा और पीपरदा।
फ़ेल्सपार
- मुक्त रूप में नहीं, मिश्रित ➜ पोटाश और सोडा के साथ; अभ्रक खानों का सह-उत्पाद।
- उपयोग ➜ चीनी मिट्टी के बर्तन, मीनाकारी, सिरेमिक; रत्न किस्म “मूनस्टोन”।
- देश के 90% भंडार राजस्थान में; उत्पादन भी सबसे ज़्यादा; राज्य में सबसे ज़्यादा अजमेर।
वोलस्टोनाइट
- सिरेमिक, काग़ज़, पेंट, रबर उद्योग; दुनिया में भंडार-उत्पादन में पहला चीन, दूसरा भारत।
- देश के 88% भंडार राजस्थान में; उत्पादन में राज्य का 100% एकाधिकार; पहली बार 1969 में सिरोही से; सबसे ज़्यादा उदयपुर।
- क्षेत्र ➜ उदयपुर (बड़ा उपरला, खेड़ा, कोटड़ा), सलूम्बर (सराड़ा), अजमेर (कोटड़ा, रूपनगढ़, पीसांगन), ब्यावर (रामावास, रामपुरा), सिरोही (बेलका पहाड़ व खिल्ला खानें), डूँगरपुर (बड़वासा-डाड-नांदली), पाली (खेड़ा उपरला)।
3. क्वार्ट्ज़, बेराइट्स, कैल्साइट व अन्य
| खनिज | पहचान | राज्य में सबसे ज़्यादा |
|---|---|---|
| क्वार्ट्ज़ व क्वार्ट्ज़ाइट | इलेक्ट्रॉनिक्स व चीनी मिट्टी उद्योग; क्वार्ट्ज़ाइट भंडार हरियाणा 53%, उत्पादन आंध्र, राजस्थान तीसरा (भरतपुर व सवाई माधोपुर); क्वार्ट्ज़ भंडार हरियाणा 42%, उत्पादन में राजस्थान पहला; क्षेत्र — मांगलियावास, सरवाड़ (अजमेर), जवाजा, जैतपुरा, रायपुर (ब्यावर), बांकलिया, दौलतगढ़, गणेशपुरा (भीलवाड़ा), बरसेतरा (पाली), बाड़ला, भीमाना (सिरोही), देवली, मालपुरा (टोंक), भुसावर, रूपवास (भरतपुर), पहाड़ी, नगर (डीग) | क्वार्ट्ज़ — अजमेर |
| बेराइट्स | “भारी पत्थर”; सफ़ेद, गुलाबी, भूरा, मरून; अच्छी किस्म में 98% बेरियम सल्फ़ेट; तेल कुओं की खुदाई का मड, रंग, ब्लीचिंग पाउडर, काग़ज़, दवा; देश में पहला आंध्र, राजस्थान दूसरा; बड़े भंडार — रेलपातलिया (उदयपुर), भानखेड़ा (अलवर); अन्य — केवड़ा, जगत, बाबरमल (उदयपुर), देलवाड़ा, केसुली (राजसमंद), नारोदा (भीलवाड़ा), सैनपुरी, जमरोली, उमरैण (अलवर), रामसिंहपुरा (कोटपूतली), उमर (बूँदी) | उदयपुर |
| कैल्साइट | काँच, सिरेमिक, काग़ज़, चीनी मिट्टी, वस्त्र; देश के 53% भंडार राज्य में, उत्पादन भी सबसे ज़्यादा; क्षेत्र — गोगुंदा, कोटड़ा, झाड़ोल, सायरा (उदयपुर), बेलका पहाड़, कंबोई (सिरोही), रायपुर, मावंडा (सीकर), सिरियारी, लीलवा (पाली), पाटन (ब्यावर), तासकोला (कोटपूतली), पीसांगन (अजमेर), कुम्भलगढ़ (राजसमंद), घाटोल (बाँसवाड़ा) | उदयपुर, फिर सिरोही |
| डायटोमाइट | देश के 72% भंडार राज्य में; 1991–92 से उत्पादन बंद | — |
4. मिट्टी के खनिज
| खनिज | पहचान | राज्य में सबसे ज़्यादा |
|---|---|---|
| चाइना क्ले (केओलिन) | राज्य की सबसे महत्त्वपूर्ण मिट्टी; सीमेंट, सिरेमिक, बर्तन, विद्युत रोधक, सिलिकेट उद्योग; भंडार केरल 23%, राजस्थान 19%; उत्पादन में राजस्थान पहला; धुलाई कारख़ाना — नीम का थाना (सीकर); क्षेत्र — फतेहपुरा, जोनपुरा (जयपुर), बुचारा, टोरड़ा, मावंडा (सीकर), बासवा (अलवर), खारा (उदयपुर), काकरोलिया, मंगरोप (भीलवाड़ा), पाल (जालौर) | बसु रायसीना (सवाई माधोपुर) |
| बॉल क्ले (“बीकानेर क्ले”) | ज़्यादातर सिरेमिक; भंडार राजस्थान 57%, आंध्र 42%; उत्पादन में राजस्थान पहला; क्षेत्र — नाल, गजनेर, मूंढ, टेचरी, कोलायत, कोटड़ी, गुढ़ा, खारी चारणान, हदलान (बीकानेर), मांडा, कीता, देवीकोट (जैसलमेर), इंदावर, खजवाना, मूंडवा (नागौर), खारड़िया (पाली); अब तक का सबसे बड़ा भंडार — फ़िरोज़पुर खालसा (राजगढ़, अलवर); हदला-बरसिंहसर (बीकानेर) में बजरी, सिलिका सैंड व बॉल क्ले की नीलामी मंज़ूर | बीकानेर |
| फ़ायर क्ले | आग झेलने वाली ईंटें-ब्लॉक; भंडार ओडिशा 24%, उत्पादन गुजरात; क्षेत्र — गढ़, कोटरी, रानेरी (बीकानेर), मंगरोप (भीलवाड़ा), एराल (चित्तौड़) | बीकानेर |
याद रखें: वरिष्ठ अध्यापक 2024 — गढ़, कोटरी तथा मंगरोप खनन क्षेत्र: फ़ायर क्ले।
5. सिलिका सैंड व डोलोमाइट
सिलिका सैंड (काँच बालुका)
- काँच और धातु गलाने में; बलुआ चट्टानों से; देश में पहला गुजरात, राजस्थान तीसरा; राज्य में सबसे ज़्यादा जयपुर।
- क्षेत्र ➜ जयपुर (झिर, खोरी, नीमोदा, सांगोद, चितोड़ी, बांसखो, कुंडल, कानोता, धूलाधोपुर), बूँदी (बड़ोदिया, टीकरदा), सवाई माधोपुर (आलमपुर, धोलेरा, करौली, नारायणपुर, टाटवाड़ा), कोटा (कुंडी, कानपुर, खीमाज), अन्य — छबड़ा (बाराँ), मूंढ, गुढ़ा (बीकानेर), जगजीवनपुरा, हथौड़ी (भरतपुर), शिव (बाड़मेर)।
- धौलपुर के काँच उद्योग में काम आती है; बाक़ी निर्यात।
डोलोमाइट
- कैल्शियम और मैग्नीशियम का दोहरा कार्बोनेट; लोहा-इस्पात उद्योग में; सबसे बड़ा उपभोक्ता SAIL।
- भंडार में मध्य प्रदेश पहला (27%), राजस्थान 7%; उत्पादन में आंध्र प्रदेश पहला, राजस्थान छठा; राज्य में सबसे ज़्यादा उदयपुर व राजसमंद।
- मातकेश्वर (राजसमंद) में फ़ॉस्फ़ेट युक्त डोलोमाइट की नई खोज।
6. बहुमूल्य पत्थर
पन्ना (एमरल्ड)
- मख़मली हरा सुंदर रत्न ➜ “हरी अग्नि”; संस्कृत में मरकत; बेरिल (बेरीलियम + एल्युमिनियम) की किस्म; आभूषणों में।
- पन्ने की मंडी और पन्ना नगरी ➜ जयपुर (पॉलिश और प्रसंस्करण)।
- भंडार ➜ कालागुमान (राजसमंद) — 1943 में पहली बार मिला; गोगुंदा, टिक्की (उदयपुर); राजगढ़, गुडास, बुबानी (अजमेर); देश में अभी खनन बंद।
तामड़ा (गार्नेट)
- लाल-मरून पारदर्शी पत्थर; लोहा और एल्युमिनियम से बना; दो प्रकार — अपघर्षक और रत्न।
- रत्न किस्म केवल राजस्थान में (2018–19 से बंद) — पहला टोंक; अपघर्षक किस्म में भी राज्य पहला — 2019–20 और 2020–21 में 100% अपघर्षक तामड़ा राजस्थान से; 5 चालू खानें — अजमेर 2, भीलवाड़ा 2, टोंक 1; अपघर्षक में पहला भीलवाड़ा।
- क्षेत्र ➜ टोंक (राजमहल, जानकपुरा, कुशलपुरा, कल्याणपुरा, गाँवड़ी, देवखेड़ा), अजमेर (सरवाड़, खरखरी, बदनवाड़ा), भीलवाड़ा (दलिया, देवरी, गोकुलपुरा, कमलपुरा, बलिया खेड़ा), चित्तौड़ (केसरपुरा), सीकर (बागेश्वर, महवा), झुंझुनूँ।
| रत्न | पहचान |
|---|---|
| हीरा | दुनिया में सबसे ज़्यादा रूस; भारत कटाई-पॉलिश में पहला; देश का 100% उत्पादन पन्ना-सतना (MP); मंडी मुम्बई, कटाई केंद्र सूरत; राज्य की हीरे-जवाहरात नगरी जयपुर; केसरपुरा, मानपुरा (प्रतापगढ़) में नगण्य संकेत; बाड़मेर की “मालानी रायोलाइट” चट्टानों में संभावना |
| जैस्पर | देश में केवल जोधपुर — मथानिया, रूंडिया, सोपड़ा, ओसियाँ |
| सुलेमानी पत्थर (अकीक / गोमेद) | अर्द्ध-कीमती; राज्य का एकाधिकार; झालावाड़, कोटा, चित्तौड़, बाँसवाड़ा |
7. रैपिड फायर तथ्य
- अभ्रक में राजस्थान का स्थान ➜ दूसरा (28%); पहला आंध्र प्रदेश (41%)
- राज्य में सबसे ज़्यादा अभ्रक ➜ भीलवाड़ा
- वोलस्टोनाइट ➜ देश के 88% भंडार राजस्थान में; सबसे ज़्यादा उदयपुर
- फ़ेल्सपार ➜ देश के 90% भंडार राजस्थान में; सबसे ज़्यादा अजमेर
- बॉल क्ले ➜ उत्पादन में राजस्थान पहला; राज्य में सबसे ज़्यादा बीकानेर
- चाइना क्ले सबसे ज़्यादा ➜ बसु रायसीना (सवाई माधोपुर)
- सिलिका सैंड सबसे ज़्यादा ➜ जयपुर
- जैस्पर ➜ देश में केवल जोधपुर में
- पन्ना पहली बार मिला ➜ कालागुमान (राजसमंद), 1943 में
अगले भाग में खेती में काम आने वाले उर्वरक खनिज, संगमरमर-ग्रेनाइट-बलुआ पत्थर जैसे भवन निर्माण पत्थर, चूना पत्थर और कोयले-लिग्नाइट की जानकारी।
पिछला भाग: राजस्थान के खनिज संसाधन: खनिज — परिचय व वर्गीकरण एवं धात्विक खनिज
अगला भाग: राजस्थान के खनिज संसाधन: उर्वरक खनिज एवं भवन निर्माण पत्थर व चूना पत्थर
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