राजमार्गों के नाम और नंबर अलग-अलग रटने से ज़्यादा काम आता है उन्हें गलियारों और योजनाओं से जोड़कर याद करना — जैसे स्वर्णिम चतुर्भुज के साथ NH 48 और पूर्व-पश्चिम गलियारे के साथ NH 27। इस भाग में मध्य राजस्थान-मेवाड़ और हाड़ौती-दक्षिण के NH, एक्सप्रेस-वे, केंद्र की ग्रामीण सड़क योजनाएँ, राष्ट्रीय परियोजनाएँ-गलियारे और राज्य की सड़क योजनाएँ आती हैं। हर राजमार्ग के साथ उसका मार्ग, ज़िले और लंबाई भी जुड़ी है।
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1. मध्य राजस्थान व मेवाड़ के NH
| NH (पुराना नं.) | मार्ग | राज्य के ज़िले | लंबाई किमी (राज्य में / कुल) · राज्य |
|---|---|---|---|
| 48 (स्वर्णिम चतुर्भुज) (76, 79, 8, 79A) | दिल्ली → हरियाणा सीमा → बहरोड़ → कोटपूतली → जयपुर → किशनगढ़ → नसीराबाद → गुलाबपुरा → भीलवाड़ा → चित्तौड़गढ़ → उदयपुर → खेरवाड़ा → गुजरात सीमा → अहमदाबाद → मुम्बई → चेन्नई | 8 — कोटपूतली-बहरोड़, जयपुर, अजमेर, ब्यावर, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, उदयपुर, डूंगरपुर | 709.91 / 2628.5 · दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु |
| 448 (79) | किशनगढ़ → अजमेर → नसीराबाद — NH 48 से निकलकर फिर NH 48 में | 1 — अजमेर | 50 / 50 · राजस्थान |
| 58 (8, 65, 89) | फतेहपुर (सीकर, NH 52) → सालासर → लाडनूं → नागौर → मेड़ता → अजमेर → ब्यावर → भीम → देवगढ़ → राजनगर → उदयपुर (NH 27) | 8 — सीकर, चूरू, डीडवाना-कुचामन, नागौर, अजमेर, ब्यावर, राजसमंद, उदयपुर | 538.47 / 678.7 · राजस्थान (विस्तार गुजरात तक) |
| 58 (विस्तार) | उदयपुर → झाड़ोल → ईडर → पालनपुर (गुजरात, NH 27) | 1 — उदयपुर | 108.00 / 678.7 · राजस्थान, गुजरात |
… शेष 7 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें
- NH 48 ➜ स्वर्णिम चतुर्भुज का हिस्सा। ई-टोल वसूली राज्य में सबसे पहले इसके जयपुर–किशनगढ़ खंड पर शुरू हुई, और देश का पहला छह लेन एक्सप्रेस हाईवे भी यही खंड है।
- NH 58 का मूल रास्ता फतेहपुर–उदयपुर था; विस्तार ने इसे पालनपुर (गुजरात) तक पहुँचा दिया। चीरवा घाट सुरंग (उदयपुर) इसी राजमार्ग पर है।
- NH 162 देसूरी की नाल (पाली) से होकर जाता है।
2. हाड़ौती व दक्षिण के NH
| NH (पुराना नं.) | मार्ग | राज्य के ज़िले | लंबाई किमी (राज्य में / कुल) · राज्य |
|---|---|---|---|
| 27 (पूर्व-पश्चिम गलियारा) (76, 14) | पोरबंदर (गुजरात) → गुजरात सीमा → आबू रोड → स्वरूपगंज → पिंडवाड़ा → उदयपुर → चित्तौड़गढ़ → लाडपुरा (भीलवाड़ा) → कोटा → बारां → MP सीमा → … → सिलचर (असम) | 7 — सिरोही, उदयपुर, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा, बूंदी, कोटा, बारां | 412.41 / — · गुजरात, राजस्थान, MP, UP, बिहार, पश्चिम बंगाल, असम |
| 927A | स्वरूपगंज (सिरोही) → कोटड़ा → खेरवाड़ा → डूंगरपुर → सागवाड़ा → बांसवाड़ा → रतलाम (MP) | 4 — सिरोही, उदयपुर, डूंगरपुर, बांसवाड़ा | 313 / 350 · राजस्थान, MP |
| 52 (65, 11, 12) | संगरूर (पंजाब) → हिसार → राजगढ़ → रतनपुरा → चूरू → फतेहपुर → सीकर → रींगस → जयपुर → टोंक → देवली → बूंदी → कोटा → झालावाड़ → अकलेरा → राजगढ़ → इंदौर → औरंगाबाद → बीजापुर → हुबली → अंकोला (कर्नाटक) | 8 — चूरू, सीकर, जयपुर, टोंक, भीलवाड़ा, बूंदी, कोटा, झालावाड़ | 793.55 / 2125.7 · पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, MP, महाराष्ट्र, कर्नाटक |
| 552 (116) | टोंक → उनियारा → सवाई माधोपुर | 2 — टोंक, सवाई माधोपुर | 74.30 / 483.5 · राजस्थान |
… शेष 5 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें
- NH 27 ➜ पूर्व-पश्चिम गलियारे का हिस्सा।
- NH 552 का मूल हिस्सा टोंक–सवाई माधोपुर है; विस्तार के बाद यह MP पार करके चिरगाँव (UP) तक जाता है।
- NH 52 राज्य की ज़मीन पर सबसे लंबा (793.55 किमी) राष्ट्रीय राजमार्ग है।
3. एक्सप्रेस-वे
1. दिल्ली–मुम्बई ग्रीनफ़ील्ड एक्सप्रेस-वे (NH 148N / NE-4)
- NE यानी National Expressway — इसलिए इसे NE-4 भी कहते हैं। कुल लंबाई 1386 किमी; राज्य में 373.63 किमी।
- राज्य में अलवर, दौसा, सवाई माधोपुर, बूंदी, कोटा — 5 ज़िले; अनुमानित लागत ₹18,332.43 करोड़।
- अभी 8 लेन, आगे चलकर 12 लेन तक बढ़ाने की योजना; निर्माण भारतमाला के तहत, और राज्य वाले हिस्से का काम शुरू हो चुका है।
… शेष 2 बिंदु — पूरी सूची माइंड मैप में देखें
| NH (पुराना नं.) | मार्ग | राज्य के ज़िले | लंबाई किमी (राज्य में / कुल) · राज्य |
|---|---|---|---|
| 148N (NE-4) | धोडका (गुजरात, NH 48) → दाहोद → रतलाम → लाडपुरा → कापरेन → लाखेरी → कुस्थला → भाड़ौती → बोरली → दौसा → फ़िरोज़पुर झिरका → सोहना (हरियाणा, NH 248A) | 5 — कोटा, बूंदी, सवाई माधोपुर, दौसा, अलवर | 373.63 / 1386 · महाराष्ट्र, गुजरात, MP, राजस्थान, हरियाणा |
2. अमृतसर–जामनगर एक्सप्रेस-वे (NH 754K)
- इसके तहत संगरिया–सांचौर–संतालपुर ग्रीनफ़ील्ड एक्सप्रेस-वे बना; राज्य में लगभग 633.20 किमी — हनुमानगढ़, गंगानगर, बीकानेर, फलोदी, जोधपुर, बालोतरा, जालोर।
- 6 लेन; तीन रिफ़ाइनरी शहरों — अमृतसर, पचपदरा, जामनगर — को एक साथ जोड़ने वाला देश का पहला एक्सप्रेस-वे; भारतमाला के तहत बना।
3–5. अन्य एक्सप्रेस-वे
| एक्सप्रेस-वे | स्थिति |
|---|---|
| जयपुर–बांदीकुई (NE-4C) | श्यामसिंहपुरा (बांदीकुई) को बगराना (जयपुर) से जोड़ेगा |
| चम्बल एक्सप्रेस-वे (अटल प्रगति पथ) | प्रस्तावित |
| भटिंडा–अजमेर ग्रीनफ़ील्ड एक्सप्रेस-वे | प्रस्तावित |
बजट 2024–25: 9 ग्रीनफ़ील्ड एक्सप्रेस-वे (2750 किमी से ज़्यादा)
- इन पर लगभग ₹60 हज़ार करोड़ ख़र्च होंगे; काम हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (HAM) / BOT पर कराया जाएगा।
- टास्क फ़ोर्स ➜ 5 फ़रवरी को गठित; नए एक्सप्रेस-वे के मार्गों का आकलन करेगी और निर्माण की कार्ययोजना बनाएगी (आर्थिक समीक्षा 2023–24)।
याद रखें: सबसे लंबा घोषित ग्रीनफ़ील्ड — जालोर–झालावाड़ (402), सबसे छोटा — कोटपूतली–किशनगढ़ (181)।
4. केंद्र की ग्रामीण सड़क योजनाएँ
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY)
- शुरुआत 25 दिसम्बर 2000 — अटल बिहारी वाजपेयी सरकार।
- किन गाँवों तक सड़क ➜ सामान्य इलाक़ों में 500+ आबादी वाले, और मरुस्थल व जनजातीय इलाक़ों में 250+ आबादी वाले (आधार: जनगणना 2001); इन्हें ज़िला या मुख्य सड़क तक पहुँच।
- पहले पूरा पैसा केंद्र देता था; 2015–16 से केंद्र : राज्य = 60 : 40।
| योजना | कब / किसने | क्या |
|---|---|---|
| चेतक परियोजना | 1962, सीमा सड़क संगठन (BRO); मुख्यालय बीछवाल (बीकानेर) | राजस्थान (साथ में पंजाब, गुजरात) के सीमावर्ती ज़िलों — गंगानगर, बीकानेर, जैसलमेर, फलोदी, बाड़मेर — में सामरिक सड़कें बनाना और सँभालना |
| नाबार्ड RIDF (Rural Infrastructure Development Fund) | 1995–96, नाबार्ड | गाँव और ज़िले की सड़कें (MDR, ODR, ग्रामीण) बेहतर बनाने के लिए; 2024–25 के लिए ₹1200 करोड़ |
| केंद्रीय सड़क निधि → केंद्रीय सड़क आधारभूत संरचना निधि | 2000–01, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय; 2019–20 से नया नाम | SH और MDR को चौड़ा, मज़बूत और नया करने के लिए पैसा |
5. राष्ट्रीय परियोजनाएँ व गलियारे
| परियोजना | जोड़ती है / लंबाई | राजस्थान में |
|---|---|---|
| स्वर्णिम चतुर्भुज (1999) | दिल्ली, मुम्बई, चेन्नई, कोलकाता — 5,846 किमी | NH 48 — जयपुर, किशनगढ़, नसीराबाद, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, उदयपुर |
| उत्तर-दक्षिण गलियारा | श्रीनगर (J&K) → कन्याकुमारी (तमिलनाडु) — 4,000 किमी; विश्व बैंक की आर्थिक मदद | NH 44 — केवल धौलपुर |
| पूर्व-पश्चिम गलियारा | सिलचर (असम) → पोरबंदर (गुजरात) — 3,142 किमी | NH 27 — आबू रोड, पिंडवाड़ा, उदयपुर, चित्तौड़गढ़, कोटा, बारां |
ट्रिक: गलियारा और NH का नंबर जोड़े में: चतुर्भुज = 48, उत्तर-दक्षिण = 44, पूर्व-पश्चिम = 27।
| काल / क्रम | घटना | विवरण |
|---|---|---|
| 2004 | प्रधानमंत्री भारत जोड़ो सड़क परियोजना | 14 जनवरी — प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने पुणे से शुरू की; राजधानी-से-राजधानी वाले NH चौड़े होकर 4 लेन बनें |
| 2015 | भारतमाला परियोजना | 31 जुलाई से; 17 राज्य और 7 तटीय प्रदेश इससे जुड़ रहे हैं; इसकी सड़कें 10 मीटर चौड़ी |
| 2016 | सेतु भारतम् | 4 मार्च — NH के सभी रेलवे लेवल क्रॉसिंग पर रेलवे ओवर ब्रिज (ROB), ताकि सफ़र सुरक्षित और बिना रुकावट हो; राज्य में NH पर 9 ROB चुने गए |
6. राज्य की सड़क योजनाएँ
मेगा हाईवे परियोजना (प्रथम) व RIDCOR
अक्टूबर 2004 में राज्य सरकार और IL&FS ने 50 : 50 की साझेदारी से रोड इन्फ्रास्ट्रक्चर डवलपमेंट कम्पनी ऑफ़ राजस्थान लिमिटेड (RIDCOR) बनाई; इसके अध्यक्ष मुख्य सचिव होते हैं। पहले चरण के 5 मेगा हाईवे पूरे हो चुके हैं — इनमें फलोदी से रामजी का गोल (बाड़मेर) राज्य का पहला मेगा हाईवे है।
राज्य सड़क निधि
- 2004 में बनी; राजस्थान राज्य सड़क विकास निधि अधिनियम 10 अगस्त 2004 को पारित।
- 15 जनवरी 2016 से हर लीटर पेट्रोल पर ₹1.50 और डीज़ल पर ₹1.75 का उपकर (सेस) लगता है; यही पैसा जमा होकर स्थायी सड़क कोष बनता है।
- इस पैसे से ROB, ODR, MDR, मिसिंग लिंक बनते हैं, राज्य राजमार्गों व मुख्य ज़िला सड़कों की चौड़ाई-मज़बूती बढ़ती है और गाँवों को जोड़ने वाली सड़कें भी बनती हैं।
| योजना | कब | उद्देश्य |
|---|---|---|
| राजस्थान रोड विज़न 2025 | — | PWD की बनाई सड़क तंत्र के विकास की दीर्घकालीन योजना |
| सड़क अपग्रेडेशन प्रोजेक्ट | जनवरी 2002 | नाबार्ड की मदद से सड़कों की मरम्मत |
| मुख्यमंत्री सड़क योजना | 7 अक्टूबर 2005 | प्रमुख पर्यटन और धार्मिक स्थलों को सड़क से जोड़ना |
| देवनारायण योजना | — | अलवर, धौलपुर, झालावाड़, करौली, सवाई माधोपुर के पिछड़े गुर्जर-बहुल इलाक़ों के गाँवों को सड़क से जोड़ना |
याद रखें: पशु परिचर 2024 — रोड विज़न 2025 के बारे में: इसे PWD ने बनाया; पहले 15 वर्षों में सभी गाँवों को सड़क से जोड़ना और उसके बाद के 10 वर्षों में फ़्लाईओवर व चार लेन राज्य राजमार्ग बनाना इसके लक्ष्य थे। “सभी गाँवों को बाज़ार अर्थव्यवस्था में लाना” वाला कथन ग़लत माना गया।
7. रैपिड फायर तथ्य
- राज्य की ज़मीन पर सबसे लंबा NH ➜ NH 52 — 793.55 किमी
- स्वर्णिम चतुर्भुज ➜ NH 48 (राज्य में 709.91 किमी, 8 ज़िले)
- उत्तर-दक्षिण गलियारा ➜ NH 44, राज्य में केवल धौलपुर से
- पूर्व-पश्चिम गलियारा ➜ NH 27
- दिल्ली–मुम्बई ग्रीनफ़ील्ड एक्सप्रेस-वे ➜ कुल 1386 किमी, राज्य में 373.63 किमी; 5 ज़िले
- अमृतसर–जामनगर एक्सप्रेस-वे (NH 754K) ➜ तीन रिफ़ाइनरी शहरों को जोड़ने वाला देश का पहला एक्सप्रेस-वे
- PMGSY की शुरुआत ➜ 25 दिसम्बर 2000; 2015–16 से केंद्र : राज्य = 60 : 40
- चेतक परियोजना ➜ 1962, BRO; मुख्यालय बीछवाल (बीकानेर)
- राज्य का पहला मेगा हाईवे ➜ फलोदी से रामजी का गोल (बाड़मेर)
अगले भाग में विदेशी सहायता वाली परियोजनाएँ, सड़क व वाहन नीतियाँ, बजट घोषणाएँ, सड़क सुरक्षा के उपाय, सड़क संस्थाएँ और राज्य के ‘प्रथम’ तथ्य।
पिछला भाग: राजस्थान में परिवहन के साधन: राष्ट्रीय राजमार्ग व एक्सप्रेस-वे (भाग 1)
अगला भाग: राजस्थान में परिवहन के साधन: सड़क सुरक्षा व परिवहन संस्थाएँ
इन्हें भी पढ़ें: राजस्थान में उद्योग · राजस्थान में पर्यटन
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