जल योजनाओं में तीन बातें बार-बार काम आती हैं — योजना कब शुरू हुई, पैसा किसने दिया और अनुपात क्या रहा। इसलिए हर योजना के साथ यही बातें जोड़कर रखी गई हैं। इस भाग का क्रम है: सिंचाई की पुरानी योजनाएँ, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, विदेशी सहायता वाली परियोजनाएँ, बाँध सुरक्षा व भूजल योजनाएँ, पेयजल योजनाएँ, जल संरक्षण अभियान, संस्थाएँ-नीतियाँ-दिवस, ब्लॉकों की श्रेणियाँ और फ्लोराइड-क्लोराइड।
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1. सिंचाई की पुरानी योजनाएँ
| योजना | शुरुआत | ख़ास बात |
|---|---|---|
| सिंचित क्षेत्र विकास कार्यक्रम | 1974–75, भारत सरकार | विश्व बैंक की मदद; अब प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत |
| जीवनधारा योजना | 1988–89 | BPL, छोटे-सीमांत, SC-ST किसानों के लिए मुफ़्त सिंचाई कुएँ; अब जवाहर रोज़गार योजना के तहत |
| RIDF | पहला चरण 1995–96 | नाबार्ड राज्य की सिंचाई परियोजनाओं को पैसा देता है; 2024–25 में 30वाँ चरण |
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2. प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना
- शुरुआत 1 जुलाई 2015 (2015–16); नोडल विभाग — उद्यानिकी; कृषि व उद्यानिकी विभाग फ़ार्म पॉन्ड बनवाते हैं; केंद्र-राज्य 60 : 40।
- PMKSY 2.0 ➜ 2021–22 से ₹1,858.85 करोड़ से 30 ज़िलों में 7.50 लाख हेक्टेयर के उपचार के लिए 149 परियोजनाएँ मंज़ूर।
सूक्ष्म सिंचाई (PMKSY-MI)
केंद्र-राज्य 60 : 40; किसानों को ड्रिप और फव्वारा सेट पर अनुदान, ऊपर से राज्य का अतिरिक्त अनुदान। उद्देश्य — हर खेत तक सिंचाई, नए जलस्रोत, और ड्रिप-फव्वारा से “प्रति बूँद अधिक फ़सल”।
| किसान | कुल अनुदान | बँटवारा |
|---|---|---|
| सामान्य | 70% | केंद्र 27 + राज्य 18 + अतिरिक्त राज्य 25 |
| SC/ST/महिला/लघु-सीमांत | 75% | केंद्र 22–23 + राज्य 18–22 + अतिरिक्त राज्य 20–30 |
वाटरशेड घटक
| घटक | ख़ास बात |
|---|---|
| PMKSY-WC / IWMP | जलग्रहण विकास से भूमि उपचार; 2009–10 में शुरू; 2015–16 से PMKSY के तहत; 31 मार्च 2022 को पूरी |
| PMKSY-WC 2.0 | 1 अप्रैल 2022 से; अब तक 2280 हेक्टेयर पड़त/बारानी भूमि विकसित, 52 हेक्टेयर में मृदा-नमी संरक्षण, 2300 हेक्टेयर में पौधारोपण, 62 जल संरचनाएँ |
RRR — मरम्मत, नवीनीकरण, पुनर्स्थापन
छोटी जल संरचनाओं की मरम्मत के लिए जनवरी 2005 में शुरू; 2017–18 में PMKSY के “हर खेत को पानी” में शामिल; केंद्र-राज्य 60 : 40; राज्य की 37 परियोजनाएँ, लागत ₹124.71 करोड़; 84 नए प्रस्ताव मंज़ूर — कोटा, बूँदी, टोंक में।
नीरांचल योजना (2016–17)
भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय की, विश्व बैंक से वित्त पोषित; 9 राज्यों के 18 ज़िलों में — राजस्थान से जोधपुर और उदयपुर; PMKSY के नतीजों में तकनीकी सुधार और क्षमता विकास; केंद्र-राज्य 60 : 40।
3. विदेशी सहायता वाली परियोजनाएँ
राष्ट्रीय जल विज्ञान परियोजना (2016–17)
- केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय (विश्व बैंक परियोजना) से 100% पैसा; पूरे राज्य में; लागत ₹134 करोड़; अवधि 2016 से सितम्बर 2025 (9 वर्ष)।
- नोडल ➜ जल संसाधन विभाग; सहयोगी — भूजल विभाग।
- वास्तविक समय के मौसम और पानी के आँकड़े — 169 स्वचालित वर्षामापी, 150 स्वचालित जलस्तर मापी, 25 स्वचालित मौसम केंद्र; आँकड़े W.R.I.S. डैशबोर्ड पर 15 मार्च 2024 से जनता के लिए।
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RWSLIP — राजस्थान जल क्षेत्र आजीविका सुधार परियोजना
- 26 अक्टूबर 2017 से; JICA — 85%, राज्य 15%; लागत ₹2,294.30 करोड़; अवधि 11 वर्ष (1 अप्रैल 2017 – 31 मार्च 2028)।
- 137 सिंचाई परियोजनाओं का नवीनीकरण, 3 चरणों में — भाखड़ा नहर प्रणाली, गुड़गाँव नहर प्रणाली और 27 ज़िलों की मध्यम-लघु परियोजनाएँ; 4.70 लाख हेक्टेयर को लाभ।
- ऋण अनुबंध ➜ पहला चरण ₹827.20 करोड़ (31 मार्च 2017), दूसरा चरण ₹1055.50 करोड़ (20 मार्च 2023)।
RWSRPD — मरु क्षेत्र जल पुनर्गठन परियोजना
- इंदिरा गांधी नहर के पहले चरण का पुनर्वास — रिसाव रोकना और क्षमता बढ़ाना; 70% ऋण न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB), बाक़ी राज्य; NDB ने 20 नवम्बर 2017 को मंज़ूर किया; फ़रवरी 2018 से; लागत ₹3291.63 करोड़; 7 वर्ष, 2 चरण।
- काम ➜ इंदिरा गांधी फीडर RD 496–555 (हरियाणा भाग) और RD 555–671 (राजस्थान भाग) की रिलाइनिंग; मुख्य नहर RD 0–620 (179.53 किमी) की रिलाइनिंग; 2498.69 किमी वितरण प्रणाली का जीर्णोद्धार; 33,312 हेक्टेयर सेम (जलभराव) क्षेत्र का विकास।
- चरण 1 ➜ फीडर, मुख्य नहर और वितरण प्रणाली का काम पूरा; चरण 2 — 29 जुलाई 2022 को NDB से ₹2254.38 करोड़ का ऋण समझौता।
4. बाँध सुरक्षा व भूजल योजनाएँ
DRIP — बाँध पुनरुद्धार एवं सुधार परियोजना
- 1 अप्रैल 2020 से; मुख्यमंत्री ने बजट 2020 में ₹965 करोड़ की घोषणा की।
- उद्देश्य ➜ चुने हुए बाँधों की सुरक्षा बढ़ाना, जोखिम-आधारित बाँध सुरक्षा प्रबंधन, बाँध सुरक्षा के लिए स्थायी वित्त व्यवस्था और संस्थागत ढाँचा मज़बूत करना।
- DRIP-II और III ➜ विश्व बैंक और एशियन इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक (AIIB); अवधि 10 वर्ष (1 अप्रैल 2021 – मार्च 2031); हर चरण 6 वर्ष का, 2 वर्ष आपस में मिले हुए।
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अटल भूजल योजना
- भारत सरकार और विश्व बैंक (50 : 50); 1 अप्रैल 2020 से 5 वर्ष (मार्च 2025 तक); बजट ₹1189.65 करोड़।
- 7 राज्यों (राजस्थान, गुजरात, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र, कर्नाटक) के 78 ज़िले; राजस्थान के 17 ज़िलों की 38 पंचायत समितियों की 1132 ग्राम पंचायतें।
- उद्देश्य ➜ ग्राम पंचायत स्तर पर भूजल प्रबंधन और समुदाय के व्यवहार में बदलाव से भूजल का गिरना रोकना।
हैली-बोर्न सर्वेक्षण — केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने 5 अक्टूबर 2021 को भूजल प्रबंधन के लिए यह तकनीक शुरू की; पहले चरण में राजस्थान, पंजाब, गुजरात, हरियाणा; राजस्थान में जोधपुर से 5 अक्टूबर को।
5. पेयजल योजनाएँ
पिछले दो दशकों में भूजल के बहुत ज़्यादा दोहन से राज्य में भूजल की हालत बेहद चिंताजनक है। शहरों-गाँवों को साफ़ पानी देने के लिए 130 बड़ी पेयजल परियोजनाएँ मंज़ूर हुईं, जिनमें से 81 पूरी हो चुकी हैं।
जल जीवन मिशन (2019–20)
- प्रधानमंत्री ने 15 अगस्त 2019 को घोषणा की — 2024 तक 100 से ज़्यादा आबादी वाले गाँवों में घर-घर नल से 55 लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन साफ़ पानी।
- ₹93,427 करोड़ की स्वीकृति; 31 जनवरी 2025 तक ₹25,856 करोड़ ख़र्च — इसमें 11,159 एकल ग्राम योजनाएँ और 139 बड़ी पेयजल परियोजनाएँ।
- केंद्र-राज्य 50 : 50; राज्य स्तर पर SWSM, ज़िला स्तर पर DWSM, गाँव स्तर पर ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियाँ (VWSC)।
याद रखें: मांडल (भीलवाड़ा) — राज्य का पहला ब्लॉक जहाँ जल जीवन मिशन में 100% घरों में नल कनेक्शन।
| योजना | ख़ास बात |
|---|---|
| प्रोजेक्ट जलधारा — राजगढ़ (चूरू) | ख़र्च लक्ष्मीनिवास मित्तल ने उठाया; राजगढ़ और आसपास के 168 गाँवों के लिए इंदिरा गांधी नहर से 20 क्यूसेक पानी |
| सुजलम परियोजना — बाड़मेर | मुख्य रूप से सेना के लिए; खारे पानी को मीठा करना; भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) के सहयोग से; एपीजे अब्दुल कलाम ने बाड़मेर के अराबा दुदावता और चौहान गाँवों से शुरू की; बाड़मेर के 37 गाँवों में ED (इलेक्ट्रो-डायलिसिस) संयंत्र |
| ग्रामीण जलप्रदाय एवं फ्लोरोसिस निवारण परियोजना — नागौर | JICA ऋण, जनवरी 2013 से; नागौर के 968 गाँवों और 7 क़स्बों को इंदिरा गांधी नहर का पानी; काम 10 पैकेजों में, पैकेज 10 प्रगति पर |
| राजस्थान फ्लोरोसिस नियंत्रण कार्यक्रम | यूनिसेफ़ की मदद; फ्लोराइड वाले गाँवों में हैंडपम्प और घरेलू डी-फ्लोरिडेशन संयंत्र; 30 ज़िलों में; दिसम्बर 2024 तक 2288 गाँव फ्लोराइड-प्रभावित चिह्नित |
6. जल संरक्षण अभियान
| अभियान / योजना | शुरुआत | ख़ास बात |
|---|---|---|
| मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन अभियान | पहला चरण 27 जनवरी 2016 | विभागों के तालमेल, जनभागीदारी और दानदाताओं से अगले 4–5 वर्षों में लगभग 21,000 गाँवों को जल-आत्मनिर्भर बनाना; सभी ज़िलों में; केंद्र-राज्य 50 : 50 |
| MJSA 2.0 | फ़रवरी 2024 | नए एनीकट, खेत तालाब, मिनी परकोलेशन टैंक, सब-सरफ़ेस बैरियर, पुरानी संरचनाओं की मरम्मत; अगले 4 वर्षों में 20,000 गाँवों में 5 लाख संरचनाएँ; बजट 2025–26 — 4,700 से ज़्यादा गाँवों में 1.10 लाख काम, ₹2,700 करोड़ |
| राजीव गांधी जल संचय योजना | 20 अगस्त 2019 | प्रशासनिक विभाग — ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज; नोडल — जलग्रहण विकास एवं भू-संरक्षण विभाग; पहला चरण — 33 ज़िलों की 295 पंचायत समितियों के 3931 गाँव (2 वर्ष); दूसरा चरण 1 सितम्बर 2022 — 352 पंचायत समितियों के लगभग 4500 गाँव (2 वर्ष) |
| मिशन अमृत सरोवर | — | हर ज़िले में कम से कम 75 अमृत सरोवर; राज्य का लक्ष्य 2475; हर सरोवर लगभग 10,000 घन मी क्षमता और कम से कम 1 एकड़ (0.4 हेक्टेयर) |
7. संस्थाएँ, नीतियाँ, दिवस व पुरस्कार
| संस्था | कहाँ / कब | ख़ास बात |
|---|---|---|
| राजस्थान भूमिगत जल बोर्ड | जोधपुर, 1950 | भारत सरकार ने बनाया; 1955 में राज्य को सौंपा; 1978 में नाम “राजस्थान भू-जल विभाग”; मुख्यालय जोधपुर |
| हाइड्रोलॉजी एंड वाटर मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट | बीकानेर | IMTI कोटा द्वारा |
| सिंचाई प्रबंधन व प्रशिक्षण संस्थान (IMTI) | कोटा, 1984 | अमेरिका की अंतर्राष्ट्रीय विकास एजेंसी के सहयोग से |
| राजस्थान जल विकास निगम लिमिटेड | 25 जनवरी 1984 | मुख्यालय जयपुर |
क़ानून, नीतियाँ और समझौते
- राजस्थान नदी बेसिन व जल संसाधन योजना विधेयक 2015 ➜ 8 अप्रैल 2015 को पारित; नदियों को जोड़ने का क़ानून बनाने वाला राजस्थान देश का पहला राज्य।
- राज्य जल नीति ➜ 19 सितम्बर 1999; नवीनतम भू-जल नीति — 18 फ़रवरी 2010।
- सिंगापुर ➜ अक्टूबर 2014 में सिंगापुर कॉर्पोरेशन एंटरप्राइज़ेज़ से पेयजल प्रबंधन, अपशिष्ट जल के पुनर्चक्रण और अधिकारियों की दक्षता पर समझौता।
दिवस और पुरस्कार
| विश्व जल दिवस | 22 मार्च — 2025 की थीम “ग्लेशियर संरक्षण”; UN ने 2025 को “ग्लेशियरों के संरक्षण का अंतर्राष्ट्रीय वर्ष” घोषित किया |
| राष्ट्रीय जल दिवस | 14 अप्रैल |
| जल महोत्सव | जलझूलनी एकादशी, 14 सितम्बर 2024 — पूरे भरे जलाशयों और 385 बाँधों पर |
8. ब्लॉकों की श्रेणियाँ
रिपोर्ट 2024 में 295 पंचायत समितियों (ब्लॉक) और 7 शहरी क्षेत्रों — कुल 302 इकाइयों — का आकलन हुआ।
- जहाँ भूजल का स्तर सामान्य पैमाने से नीचे चला जाए, वह “डार्क ज़ोन” — राज्य के 302 में से 214 ब्लॉक डार्क ज़ोन में।
- पूरी तरह खारे 3 ब्लॉक — तारानगर (चूरू), खाजूवाला (बीकानेर), रावतसर (हनुमानगढ़)।
- भूजल निकासी दर 149.86% — यानी जितना पानी भरता है उससे लगभग डेढ़ गुना निकाला जा रहा है।
9. फ्लोराइड व क्लोराइड
इनके बाद — जैसलमेर, चूरू, बाड़मेर, बीकानेर, टोंक और नागौर।
| सबसे ज़्यादा | सबसे कम | |
|---|---|---|
| फ्लोराइड — स्थान | धावा (जोधपुर) व सुजानगढ़ (चूरू) | भोजासर (चूरू) व अजीतगढ़ (सीकर) |
| क्लोराइड — ज़िले | चूरू, जोधपुर, नागौर | — |
| क्लोराइड — स्थान | कुकुंडा (जोधपुर) | राखो (बाँसवाड़ा) |
रिवीजन पॉइंटर्स
- प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 1 जुलाई 2015 से शुरू हुई और इसमें केंद्र-राज्य का अनुपात 60 : 40 है।
- सूक्ष्म सिंचाई में सामान्य किसान को कुल 70% और SC/ST/महिला/लघु-सीमांत किसान को 75% अनुदान मिलता है।
- अटल भूजल योजना केंद्र और विश्व बैंक की 50 : 50 साझेदारी है — 1 अप्रैल 2020 से 5 वर्ष, राजस्थान के 17 ज़िलों की 38 पंचायत समितियों में।
- जल जीवन मिशन की घोषणा 15 अगस्त 2019 को हुई — 2024 तक घर-घर नल, 55 लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन; मांडल (भीलवाड़ा) पहला ब्लॉक जहाँ 100% घरों में नल लगे।
- नदियों को जोड़ने का क़ानून बनाने वाला राजस्थान देश का पहला राज्य है — विधेयक 8 अप्रैल 2015 को पारित हुआ।
- राज्य जल नीति 19 सितम्बर 1999 की है, जबकि नवीनतम भू-जल नीति 18 फ़रवरी 2010 की।
- मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन अभियान का पहला चरण 27 जनवरी 2016 को शुरू हुआ; लक्ष्य लगभग 21,000 गाँवों को जल-आत्मनिर्भर बनाना था।
- रिपोर्ट 2024 में 302 में से 214 ब्लॉक डार्क ज़ोन में आए; पूरी तरह खारे 3 ब्लॉक हैं — तारानगर, खाजूवाला और रावतसर।
- फ्लोराइड सबसे ज़्यादा धावा (जोधपुर) व सुजानगढ़ (चूरू) में मिलता है; क्लोराइड वाले मुख्य ज़िले चूरू, जोधपुर और नागौर हैं।
अगले भाग में इंदिरा गांधी नहर — नाम, उद्देश्य, उद्गम, इतिहास, दो चरण, शाखाएँ, लिफ्ट नहरें और पेयजल योजनाएँ।
पिछला भाग: प्रमुख बाँध, सिंचाई परियोजनाएँ व जल संसाधन योजनाएँ: भरतपुर, जयपुर, अजमेर, जोधपुर संभाग
अगला भाग: राजस्थान की नहरें: इंदिरा गांधी नहर — परिचय एवं शाखाएँ, लिफ्ट व पेयजल योजनाएँ
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