सौर ऊर्जा में राजस्थान की पहचान उसकी तेज़ धूप और खुली ज़मीन से बनी है, इसलिए इस हिस्से से «पहला» और «सबसे बड़ा» वाले सवाल सबसे ज़्यादा बनते हैं। इस भाग में गैस आधारित बिजलीघर, परमाणु बिजली, सौर ऊर्जा की स्थिति और सौर ऊर्जा के «पहले» दिए गए हैं। इसके बाद सोलर पार्क व परियोजनाएँ तथा बजट और समझौतों से आई नई योजनाएँ हैं।
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1. गैस आधारित बिजलीघर
देश का पहला भूमिगत गैस बिजलीघर — मेड़ता रोड (नागौर)।
| बिजलीघर | ब्योरा |
|---|---|
| अंता गैस — बाराँ | NTPC; 9 राज्यों की संयुक्त; 1989 में शुरू; गैस HBJ पाइपलाइन से; राज्य की पहली गैस परियोजना और राज्य में केंद्र की पहली गैस परियोजना; 3×88.71 MW (जनवरी 1989) + 1×153.2 MW (मार्च 1990) = 419.33 MW; राज्य का हिस्सा 19.81% (83.07 MW); पानी चम्बल की दायीं नहर से; अन्य लाभार्थी — जम्मू-कश्मीर, UP, हिमाचल, उत्तराखंड, चंडीगढ़, हरियाणा, पंजाब, दिल्ली; ऊँची लागत के कारण राज्य ने आवंटन लौटा दिया |
| रामगढ़ गैस — रामगढ़ (जैसलमेर) | राज्य की दूसरी गैस परियोजना; 1996 में शुरू; पहला चरण — 1×3 MW (बंद) व 1×35.5 MW गैस टरबाइन; दूसरा — 37.5 MW गैस + 37.5 MW भाप; तीसरा — 110 MW गैस + 50 MW भाप; तीसरे चरण तक 273.5 MW; ONGC की गैस तनोट, डांडेवाला, मनिहारी टिब्बा से GAIL के ज़रिए; पानी इंदिरा गांधी नहर से; चौथे चरण में 110 MW गैस व 50 MW भाप इकाई प्रस्तावित |
| धौलपुर गैस कम्बाइंड साइकिल | RVUN; चम्बल किनारे; राज्य की तीसरी गैस परियोजना; 2007 में शुरू; 110×3 = 330 MW; गैस GAIL देता है; पहला चरण नेफ़्था आधारित (110×2), दूसरा “द्रवीकृत गैस” (110×1); तीनों इकाइयों में व्यावसायिक उत्पादन 1 मार्च 2008 से |
| केशवरायपाटन गैस — बूँदी | 1000 MW; निजी क्षेत्र का पहला गैस बिजलीघर |
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8 अगस्त 2024 — RVUN और GAIL के बीच MoU (राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर, जयपुर): धौलपुर (330 MW) और रामगढ़ (270.5 MW) गैस बिजलीघरों को उचित दर पर गैस; साथ ही ₹4200 करोड़ से 1,000 MW का सोलर प्लांट।
2. परमाणु बिजली
राजस्थान परमाणु शक्ति गृह — रावतभाटा (चित्तौड़गढ़)
- राणाप्रताप सागर बाँध के किनारे; नाभिकीय ऊर्जा निगम (NPCIL) चलाता है; कनाडा की सहायता से; 1965 में शुरू, उत्पादन 16 दिसम्बर 1973 से; यूरेनियम-235 आधारित।
- देश का दूसरा (पहला तारापुर, महाराष्ट्र) और राज्य का पहला परमाणु बिजलीघर।
- रिएक्टरों की संख्या (6) के हिसाब से देश का सबसे बड़ा परमाणु बिजलीघर; दाबित भारी पानी (PHWR) शृंखला का देश का पहला।
| काल / क्रम | घटना | विवरण |
|---|---|---|
| 16 दिसम्बर 1973 | इकाई I | 100 MW (बंद) |
| 1 अप्रैल 1981 | इकाई II | 200 MW |
| 1 जून 2000 | इकाई III | 220 MW |
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- न्यूक्लियर फ़्यूल कॉम्प्लेक्स ➜ देश का दूसरा, रावतभाटा, 9 सितम्बर 2017; हर साल 500 टन यूरेनियम ईंधन बंडल; देश का पहला हैदराबाद में; एशिया का सबसे बड़ा यूरेनियम ईंधन कॉम्प्लेक्स होगा — 700 MW रिएक्टरों के लिए 50 साल तक ईंधन बंडल।
- पिंक हाइड्रोजन संयंत्र ➜ रावतभाटा में; स्वच्छ परमाणु ऊर्जा से ग्रीनहाउस गैस घटाने के लिए; परमाणु क्षेत्र का पहला पायलट प्रोजेक्ट।
| बिजलीघर | ब्योरा |
|---|---|
| नरौरा (बुलंदशहर, UP) | 1980; 220×2 = 440 MW; राज्य का हिस्सा 10% (44 MW); देश का चौथा परमाणु बिजलीघर |
| माही-बाँसवाड़ा परमाणु बिजलीघर | 700-700 MW की 4 इकाइयाँ; पानी माही बाँध से; राज्य का दूसरा परमाणु बिजलीघर; बाँसवाड़ा-रतलाम मार्ग पर बारी, आडीभीत, रेल कटुम्बी, सजवानिया, खंडियादेव गाँवों की ज़मीन; स्थान नापला (बाँसवाड़ा), माही किनारे |
याद रखें: पशु परिचर 2024 — राजस्थान में नाभिकीय ऊर्जा संयंत्र: रावतभाटा।
3. सौर ऊर्जा की स्थिति
- देश में सौर ऊर्जा की सबसे ज़्यादा संभावना वाला राज्य — राजस्थान; राज्य में सबसे ज़्यादा संभावना — जोधपुर।
- अधिकतम सौर विकिरण 6–7 किलोवाट घंटा/वर्ग मी/दिन; साल में 325 से ज़्यादा सौर दिवस; कम औसत वर्षा भी अनुकूल।
- MNRE के आकलन से राज्य में सौर ऊर्जा से 142 गीगावाट तक क्षमता संभव; सौर ऊर्जा में सालाना वृद्धि दर 20.57%।
- सौर क्षमता — दिसम्बर 2024 (कुसुम सहित, राज्य आँकड़े) ➜ 5482.66 MW
- दिसम्बर 2024 तक रूफ़टॉप-ऑफ़ग्रिड छोड़कर संयंत्र ➜ 22,667 MW
- देश की सौर क्षमता (फ़रवरी 2025) ➜ 1,02,566 MW
| श्रेणी (राजस्थान) | क्षमता |
|---|---|
| ग्राउंड-माउंटेड | 23,347 MW |
| ऑफ़-ग्रिड / कुसुम | 805.45 MW |
| रूफ़टॉप | 1504.30 MW — देश में तीसरा (गुजरात 5041.50, महाराष्ट्र 3139.10) |
ग्लोबल रिन्यूएबल एनर्जी इन्वेस्टमेंट एक्सपो 2024 (गांधीनगर) — 16 सितम्बर 2024 को केंद्रीय मंत्री ने राजस्थान को कुल सौर ऊर्जा में पहला (“हाइएस्ट अचीवर”) और कुल अक्षय ऊर्जा में दूसरा पुरस्कार दिया।
SEEZ — पश्चिमी ज़िलों की अपार सौर संभावना देखते हुए जैसलमेर-बाड़मेर-जोधपुर को “सोलर एनर्जी एंटरप्राइज़ेज़ ज़ोन” घोषित किया गया।
4. सौर ऊर्जा के “पहले”
| पहला / सबसे बड़ा | कहाँ |
|---|---|
| पहला सौर विद्युतीकृत गाँव | नयागाँव (जयपुर) |
| पहला गाँव जहाँ सौर ऊर्जा का उपयोग हुआ | नोख (फलौदी) |
| पूर्णतया सौर ऊर्जा गाँव | लुम्बासर (बीकानेर) |
| पहला सौर फ़्रिज | बालेसर (जोधपुर) |
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सौर ऊर्जा के शोध-विकास के लिए जोधपुर सबसे अच्छा माना गया — इसलिए जोधपुर के ITI को फ़्रांस के सहयोग से “सौर ऊर्जा शोध केंद्र” बनाया जाएगा। सोलर सिस्टम प्रशिक्षण केंद्र — बीकानेर; सोलर स्किल डेवलपमेंट सेंटर — भड़ला (फलौदी)।
5. सोलर पार्क व परियोजनाएँ
निजी भागीदारी से सोलर पार्क बनाने के लिए राज्य ने 3 कम्पनियाँ बनाईं — सौर्य ऊर्जा कम्पनी ऑफ़ राजस्थान (2014) (राज्य + एस्सेल इन्फ़्रा), एस्सेल सौर्य ऊर्जा कम्पनी ऑफ़ राजस्थान (2014), अडानी रिन्यूएबल एनर्जी पार्क राजस्थान (2015)।
भड़ला सोलर पार्क — बाप (फलौदी)
राज्य का पहला सोलर पार्क; 2245 MW; 4 चरणों में; दुनिया का सबसे बड़ा सोलर पार्क। पहला चरण RRECL ने ख़ुद बनाया, बाक़ी तीन MNRE की सोलर पार्क योजना में।
निर्माणाधीन सोलर पार्क (MNRE योजना)
| पार्क | क्षमता | कम्पनी / स्थिति |
|---|---|---|
| फलौदी-पोकरण | 750 MW | एस्सेल सौर्य ऊर्जा (ESUCRL); 450 MW लगे |
| फतेहगढ़ फ़ेज़ I-B (जैसलमेर) | 1500 MW | अडानी (AREPRL); 421 MW भारत सरकार लगाएगी; 896 MW लगे |
| नोख (फलौदी) | 925 MW | RSDCL; 190 MW चालू; NTPC और RSDCL का समझौता 20 फ़रवरी 2020 |
अन्य सौर परियोजनाएँ
| परियोजना | ब्योरा |
|---|---|
| खींवसर (नागौर) | जुलाई 2010; तब राज्य की सबसे बड़ी निजी सौर परियोजना (5 MW); रिलायंस इंडस्ट्रीज़ |
| मथानिया इंटीग्रेटेड सोलर कम्बाइंड साइकिल (जोधपुर) | जर्मनी, विश्व बैंक और भारत सरकार के सहयोग से; 140 MW; 9% बिजली सौर से, 91% नेफ़्था से |
| मोकला (जैसलमेर) | 50 MW |
| धूनिया (जोधपुर) | 5 MW |
6. नई योजनाएँ — बजट व समझौते
| बजट | घोषणा |
|---|---|
| 2023–24 | अक्षय ऊर्जा की निकासी के लिए भड़ला–बीकानेर बल्क पावर कॉरिडोर; पहले चरण में भड़ला और बीकानेर में 400-400 kV सब-स्टेशन |
| 2024–25 | विकसित राजस्थान @2047 के लिए अगले 10 साल की बढ़ती माँग के हिसाब से उत्पादन योजना; 2031–32 तक परम्परागत 20,500 MW और अक्षय 33,600 MW (सौर 22,200, पवन 8,100, जल 3,300); निजी क्षेत्र से 50 हज़ार MW से ज़्यादा के लिए 3 सोलर पार्क — पूगल (बीकानेर), छत्तरगढ़ (बीकानेर), बोडाना (जैसलमेर) |
| 2025–26 | आत्मनिर्भर और “सरप्लस स्टेट” बनाने के लिए अगले साल 6,400 MW से ज़्यादा अतिरिक्त उत्पादन; 5,700 MW के उत्पादन कार्य; निजी क्षेत्र से 10 GW उत्पादन शुरू और 10 GW के संयंत्र लगाना; “सोलर दीदी” — नया मानदेय कैडर, पहले चरण में स्वयं सहायता समूहों की 25 हज़ार महिलाएँ प्रशिक्षित; वन क्षेत्र के बाहर हरियाली के लिए ToFR नीति |
पुष्कर को सोलर सिटी मॉडल पर बनाना स्वीकृत — जैसलमेर के बाद राज्य का पहला छोटा सोलर शहर।
10 मार्च 2024 — केंद्रीय उपक्रमों से समझौते
- मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की मौजूदगी में राज्य और केंद्रीय उपक्रमों के MoU; संयुक्त उपक्रम कम्पनियाँ — राज्य 26%, केंद्रीय उपक्रम 74%।
- RVUN के साथ NTPC, कोल इंडिया और NLC इंडिया के संयुक्त उपक्रमों से 3325 MW कोयला-लिग्नाइट परियोजनाएँ।
- कोल इंडिया ➜ 2 JV: ताप के लिए कालीसिंध (झालावाड़) में 800 MW इकाई; अक्षय ऊर्जा के लिए लगभग 2500 MW सौर, पम्प स्टोरेज व पवन परियोजनाएँ।
| समझौता | ब्योरा |
|---|---|
| UAE से MoU — 22 अक्टूबर 2024 | अक्षय ऊर्जा में ₹3 लाख करोड़ का निवेश — पश्चिमी ज़िलों में 60 GW सौर, पवन व हाइब्रिड परियोजनाएँ |
| तेलंगाना सरकार से MoU — 4 मार्च 2025 | RVUN और सिंगरेनी कोलियरीज़ (SCCL) — तेलंगाना में ताप इकाइयाँ; उनमें से 800-800 MW बिजली तेलंगाना और राजस्थान को |
| RVUN का सोलर पार्क | 1500 MW — ज़मीन चिह्नित |
याद रखें: लाइब्रेरियन ग्रेड II 2025 — अक्षय ऊर्जा में ₹3 लाख करोड़ के निवेश का MoU (22 अक्टूबर 2024) — UAE के साथ। पशु परिचर 2024 — NLC इंडिया ने अक्टूबर 2023 में 810 MW की ग्रिड-संबद्ध फ़ोटोवोल्टिक परियोजना राजस्थान में हासिल की।
7. रैपिड फायर तथ्य
- देश का पहला भूमिगत गैस बिजलीघर ➜ मेड़ता रोड (नागौर)
- राज्य की पहली गैस परियोजना ➜ अंता (बाराँ)
- राज्य का पहला परमाणु बिजलीघर ➜ रावतभाटा (चित्तौड़गढ़)
- रावतभाटा ➜ देश का दूसरा परमाणु बिजलीघर; पहला तारापुर
- माही-बाँसवाड़ा परमाणु बिजलीघर ➜ 700-700 MW की 4 इकाइयाँ
- सौर ऊर्जा की सबसे ज़्यादा संभावना (राज्य में) ➜ जोधपुर
- पहला सौर विद्युतीकृत गाँव ➜ नयागाँव (जयपुर)
- पहला सौर फ़्रिज ➜ बालेसर (जोधपुर)
- भड़ला सोलर पार्क ➜ राज्य का पहला, 2245 MW, बाप (फलौदी) में
अगले भाग में पवन व बायोमास ऊर्जा, अक्षय ऊर्जा संस्थाएँ और नीतियाँ तथा बिजली पहुँचाने, बचाने और सौर ऊर्जा देने की योजनाएँ।
पिछला भाग: राजस्थान में ऊर्जा संसाधन: ऊर्जा — परिचय व बिजली तंत्र एवं जल विद्युत परियोजनाएँ
अगला भाग: राजस्थान में ऊर्जा संसाधन: पवन व बायोमास ऊर्जा एवं ऊर्जा नीतियाँ व संस्थाएँ
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