बीहड़, पहाड़, रेत-सीमा और जनजातीय बस्तियाँ — राज्य के हर इलाक़े की मुश्किल अलग है, इसलिए हर इलाक़े का अपना कार्यक्रम बना। इस भाग में पहले कार्यक्रम, ज़िले और शुरुआत के वर्ष एक नज़र में हैं, फिर डांग, मेवात, मगरा, अरावली, सीमांत और जनजाति क्षेत्र के कार्यक्रम। अंत में मुख्यमंत्री क्षेत्रीय विकास योजना, बीस सूत्री कार्यक्रम, सम्बल ग्राम, आकांक्षी ब्लॉक और विधायक-सांसद निधि क्रम से दिए गए हैं।
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1. एक नज़र में
राज्य का हर हिस्सा एक जैसा विकसित नहीं है — कहीं बीहड़ और डाकू, कहीं पहाड़, कहीं रेत और सीमा, कहीं जनजातीय बस्तियाँ। इन क्षेत्रीय असमानताओं को घटाने के लिए हर क्षेत्र की ज़रूरत के हिसाब से अलग कार्यक्रम चलाए जाते हैं।
2. कौन-सा कार्यक्रम कहाँ
| कार्यक्रम | ज़िले | संख्या |
|---|---|---|
| डांग क्षेत्रीय विकास | सवाई माधोपुर, करौली, धौलपुर, कोटा, बूँदी, बाराँ, झालावाड़, भरतपुर | 8 |
| कंदरा सुधार | कोटा, बूँदी, बाराँ, झालावाड़, सवाई माधोपुर, करौली, भरतपुर, धौलपुर | 8 |
| मगरा क्षेत्र विकास | ब्यावर, भीलवाड़ा, पाली, चित्तौड़गढ़, राजसमंद | 5 |
| मेवात क्षेत्र विकास | अलवर, खैरथल-तिजारा, डीग | 3 |
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3. शुरुआत के वर्ष
| काल / क्रम | घटना | विवरण |
|---|---|---|
| 1974-75 | अरावली विकास · जनजाति उपयोजना (TSP) | दोनों एक ही वर्ष |
| 1975 | बीस सूत्री कार्यक्रम | बाद में 1982, 1986 और 2006 में नया रूप |
| 1977-78 | सहरिया विकास कार्यक्रम | राज्य सरकार |
| 1978-79 | माडा (MADA) | 18 ज़िले, 44 लघु खंड |
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ट्रिक: 1974-75 के जुड़वाँ — अरावली विकास और TSP; 2005-06 के जुड़वाँ — मगरा शुरू और डांग दोबारा शुरू।
4. पैसा व बजट 2025-26
| कार्यक्रम | बजट 2025-26 की घोषणा |
|---|---|
| डांग क्षेत्रीय विकास | 50 करोड़ → 100 करोड़ (आगामी वर्ष) |
| मगरा क्षेत्र विकास | 50 करोड़ → 100 करोड़ |
| मेवात क्षेत्र विकास | 50 करोड़ → 100 करोड़ |
| बृज क्षेत्रीय विकास | 50 करोड़ → 100 करोड़ |
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- मुख्यमंत्री क्षेत्रीय विकास योजना ➜ कुल 100 करोड़
- गुरु गोविन्द जनजातीय योजना (2024-25) ➜ 75 करोड़
- MLA निधि ➜ 5 करोड़ / वर्ष
ट्रिक: चार “क्षेत्र” कार्यक्रम — डांग, मगरा, मेवात, बृज — सबकी राशि बजट 2025-26 में 50 से दोगुनी होकर 100 करोड़।
5. डांग क्षेत्रीय विकास कार्यक्रम
डांग क्षेत्र — बीहड़ (गहरे खड्ड) और संकरी घाटियों वाला वह इलाक़ा जो लंबे समय तक डाकुओं (दस्युओं) से प्रभावित रहा।
| चरण | ब्योरा |
|---|---|
| पहली शुरुआत — 1994-95 | 8 ज़िले, 21 पंचायत समितियाँ, 357 ग्राम पंचायतें |
| दोबारा शुरुआत — 2005-06 (राज्य सरकार) | आज का दायरा — 8 ज़िले, 26 पंचायत समितियाँ, 2192 गाँव |
| बजट 2025-26 | आगामी वर्ष की राशि 50 करोड़ से बढ़ाकर 100 करोड़ |
- उद्देश्य ➜ क्षेत्र का आर्थिक-सामाजिक विकास, लोगों को डाकुओं से मुक्ति और पर्यावरण सुधार (आर्थिक समीक्षा 2023-24)।
याद रखें: संख्याएँ: पहली बार 21 समितियाँ / 357 ग्राम पंचायतें → अब 26 समितियाँ / 2192 गाँव — ज़िले दोनों बार 8।
6. कंदरा सुधार कार्यक्रम
- शुरुआत ➜ 1987-88
- प्रभावित ज़िले ➜ 8
कार्यक्रम का तर्क
- कंदराएँ-बीहड़ फैलते हैं
- ज़मीन की उपज घटती है
- फैलाव पर रोक
7. मेवात क्षेत्र विकास कार्यक्रम
जिन इलाक़ों में मेव समुदाय की बहुलता है, उन्हें मेवात क्षेत्र कहा जाता है। यह आबादी मुख्य रूप से अलवर, खैरथल-तिजारा और डीग ज़िलों के 14 खंडों में बसी है।
- शुरुआत ➜ 1986-87 (राज्य सरकार)
- ख़र्च ➜ 100% राज्य सरकार
- गाँव ➜ 807
- उद्देश्य ➜ मेवात के लोगों के लिए ज़रूरी बुनियादी सुविधाएँ और रोज़गार के अतिरिक्त मौक़े बनाना, आर्थिक विकास को बढ़ावा देना और जीवन-स्तर में गुणात्मक सुधार।
8. बृज क्षेत्रीय विकास योजना
- बजट 2024-25 में घोषणा — पूर्वी राजस्थान के दूर-दराज़ इलाक़ों का क्षेत्रीय विकास।
- बजट 2025-26 ➜ आगामी वर्ष की राशि 50 करोड़ से बढ़ाकर 100 करोड़।
9. मगरा क्षेत्र विकास कार्यक्रम
दक्षिण-मध्य राजस्थान का पहाड़ियों से घिरा भाग — ख़ासकर ब्यावर, भीलवाड़ा, पाली, चित्तौड़गढ़ और राजसमंद — जो जनजाति क्षेत्रीय विकास में शामिल नहीं है, वहाँ स्थानीय बोली में “मगरा क्षेत्र” कहलाता है।
- शुरुआत ➜ 2005-06
- ज़िले ➜ 5
- गाँव ➜ 1746
- उद्देश्य ➜ मगरा के निवासियों का आर्थिक और सामाजिक स्तर ऊँचा उठाना।
10. अरावली विकास कार्यक्रम
- शुरुआत ➜ 1974-75
- ज़िले ➜ 16
- विकास खंड ➜ 120
पैसा जापान के OECF (ओवरसीज़ इकोनॉमिक कॉर्पोरेशन फ़ंड) से आता है।
- पर्यावरण की रक्षा और पारिस्थितिक संतुलन।
- मरुस्थल को पूर्व की ओर फैलने से रोकना।
- पेड़ों की कटाई पर रोक और पशुचारण पर नियंत्रण।
याद रखें: विदेशी मदद वाला कार्यक्रम — अरावली = जापान (OECF)।
11. अरावली को हरा रखने की परियोजनाएँ
| अरावली ग्रीन वॉल | हरित अरावली विकास परियोजना | |
|---|---|---|
| किसकी | केंद्र — पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव | राज्य — बजट 2025-26 की घोषणा |
| शुरुआत | 25 मार्च 2023, टिकली गाँव (हरियाणा) | 2025-26 |
| क्षेत्र | 4 राज्य — गुजरात, राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली; लगभग 1400 किमी; पर्वतमाला के आसपास 5 किमी का बफ़र क्षेत्र | राज्य की अरावली पर्वतमाला |
12. सीमांत क्षेत्रीय विकास कार्यक्रम (BADP)
- शुरू किया ➜ भारत सरकार — 7वीं पंचवर्षीय योजना में विशेष कार्यक्रम
- वर्ष ➜ 1993-94
- पैसा — पहले ➜ 100% केंद्र
| ज़िला | विकास खंड |
|---|---|
| बाड़मेर (5) | रामसर, गडरा रोड, सेड़वा, चौहटन, धनाऊ |
| जैसलमेर (2) | जैसलमेर, सम |
| बीकानेर (2) | कोलायत, खाजूवाला |
- उद्देश्य ➜ बुनियादी ढाँचा बनाना और सीमा पर रहने वालों में सुरक्षा की भावना जगाना, ताकि सीमावर्ती क्षेत्रों का विकास संतुलित हो।
13. मुख्यमंत्री थार सीमा क्षेत्र विकास
- घोषणा बजट 2025-26 में — अगले वर्ष से शुरुआत।
- लक्ष्य ➜ राज्य की अंतर्राष्ट्रीय सीमा के पास बसे परिवारों की सुविधाएँ बेहतर करना।
- इसके लिए 150 करोड़ रुपये का फ़ंड बनाने का प्रस्ताव।
14. जनजाति क्षेत्र कार्यक्रम
राज्य के जनजाति क्षेत्रों के लिए अलग-अलग क्षेत्रीय कार्यक्रम चल रहे हैं — पुराने (TSP, माडा, सहरिया) और नए (पीएम जनमन, उन्नत ग्राम, गुरु गोविन्द योजना)।
15. जनजाति उपयोजना (TSP)
- अंग्रेज़ी नाम ➜ Tribal Sub Plan
- शुरुआत ➜ 1974-75
| शामिल | ज़िले |
|---|---|
| सभी तहसीलें | बाँसवाड़ा, डूँगरपुर, प्रतापगढ़ |
| कुछ भाग | उदयपुर, सिरोही |
ऊपर के सभी काम जनजातीय लोगों के आर्थिक विकास के लिए उपयोजना में रखे गए हैं।
16. माडा (MADA) कार्यक्रम
- पूरा नाम ➜ परिवर्तित क्षेत्र विकास उपागम (Modified Area Development Approach)
- शुरुआत ➜ 1978-79
- ज़िले ➜ 18
आँकड़े राजस्थान जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग की वेबसाइट के अनुसार।
माडा क्षेत्रों में होने वाले काम
- लघु सिंचाई और सामुदायिक पम्प सेट
- दुकानों के लिए अनुदान
- ग्रामीण गृह निर्माण योजना
17. सहरिया विकास कार्यक्रम
- जनजाति ➜ सहरिया — राज्य की एकमात्र आदिम जनजाति
- शुरुआत ➜ 1977-78 (राज्य सरकार)
इन कार्यक्रमों के ज़रिये सहरिया जनजाति की आर्थिक दशा सुधारी जाती है।
18. केंद्र के नए जनजातीय अभियान
प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महा अभियान (पीएम जनमन)
- लक्ष्य ➜ विशेष रूप से कमज़ोर जनजातीय समूहों (PVTG) की सामाजिक-आर्थिक स्थिति सुधारना; देश के 75 PVTG का विकास।
- राज्य में बाराँ ज़िले की सभी 8 पंचायत समितियों के आवासहीन PVTG परिवारों को मदद (आर्थिक समीक्षा 2024-25)।
एक परिवार को कुल सहायता
- आवास 2 लाख
- + शौचालय 12 हज़ार
- + मनरेगा अकुशल मज़दूरी 23,940
प्रधानमंत्री जनजातीय उन्नत ग्राम अभियान
- मंज़ूरी ➜ सितम्बर 2024 — केंद्रीय मंत्रिमंडल
- राजस्थान में ज़िले ➜ 30
- ब्लॉक ➜ 208
19. गुरु गोविन्द जनजातीय क्षेत्रीय विकास
- बजट 2024-25 में प्रावधान — 75 करोड़ रुपये।
- किसके लिए ➜ अनुसूचित क्षेत्र (TSP) में रहने वाले जनजातीय परिवारों का समग्र विकास।
- योजना ठीक से लागू हो, इसलिए 18 ज़िलों में राज्य व ज़िला स्तर पर वनाधिकार प्रकोष्ठ (Forest Rights Cell) गठित होंगे।
20. मुख्यमंत्री क्षेत्रीय विकास योजना
- शुरुआत ➜ 2022-23
- कुल बजट ➜ 100 करोड़ रुपये
- निगरानी ➜ ज़िला कलेक्टर की अध्यक्षता में ज़िला स्तरीय समितियाँ
दुर्गम, दूर-दराज़ और पिछड़े इलाक़ों समेत पूरे राज्य में व्यवस्थित बुनियादी ढाँचा और ग्रामीण विकास — हर क्षेत्र की भौगोलिक, आर्थिक और सामाजिक भिन्नता, ज़रूरत और संभावना को देखकर।
21. बीस सूत्री कार्यक्रम 2006
| काल / क्रम | घटना | विवरण |
|---|---|---|
| 1975 | शुरुआत | |
| 1982 | नया रूप | |
| 1986 | नया रूप |
मूल उद्देश्य — पिछड़े और ग़रीब लोगों का जीवन-स्तर ऊपर उठाना।
कार्यक्रम के मुख्य बिंदु
22. सम्बल ग्राम विकास योजना
- शुरुआत ➜ 1997-98
- सम्बल ग्राम ➜ जहाँ कुल आबादी में SC 40% से ज़्यादा
- घोषित गाँव (2001 जनगणना के आधार पर) ➜ 4948
23. राष्ट्रीय ग्रामीण आर्थिक परिवर्तन परियोजना
- संक्षिप्त नाम ➜ NRETP
- क्षेत्र ➜ 9 ज़िलों के 36 ब्लॉक
- हिस्सा ➜ भारत सरकार 60 : राज्य 40
24. गुरु गोलवलकर आकांक्षी ब्लॉक विकास
- प्रधानमंत्री की “Aspirational Districts” (आकांक्षी ज़िले) योजना की तर्ज़ पर बनी।
- राज्य के 35 सबसे पिछड़े ब्लॉक चुने गए; घोषणा बजट 2025-26 में।
- आगामी वर्ष के लिए 75 करोड़ रुपये का प्रावधान।
25. विधायक व सांसद निधि
| MLALAD | MPLAD | |
|---|---|---|
| किसकी निधि | विधायक | सांसद |
| राशि | 5 करोड़ / विधानसभा क्षेत्र / वर्ष | 5 करोड़ / वर्ष (लोकसभा सांसद, अपने संसदीय क्षेत्र में) |
| ख़ास शर्त | कम से कम 20% SC/ST के विकास पर | गंभीर आपदा में क्षेत्र/राज्य के बाहर भी — हर आपदा पर अधिकतम 1 करोड़ |
26. विधायक स्थानीय क्षेत्र विकास (MLALAD)
- शुरुआत ➜ 1999-2000 (राज्य सरकार)
- क्षेत्र ➜ शहरी और ग्रामीण दोनों
- राशि ➜ हर वर्ष 5 करोड़ रुपये प्रति विधानसभा क्षेत्र
- उद्देश्य ➜ इलाक़े की ज़रूरत के मुताबिक़ बुनियादी ढाँचा और जनता के काम आने वाली स्थायी संपत्तियाँ बनाना, ताकि क्षेत्रों के बीच विकास की खाई कम हो।
27. सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास (MPLAD)
- लोकसभा सांसद ➜ हर वर्ष 5 करोड़ रुपये तक के कामों की सिफ़ारिश करता है; सिफ़ारिश ज़िला कलेक्टर को जाती है और काम उसके अपने संसदीय क्षेत्र में होते हैं।
- राज्यसभा सांसद ➜ पूरे राज्य का प्रतिनिधि, इसलिए राज्य के किसी भी ज़िले में काम सुझा सकता है।
- गंभीर प्राकृतिक आपदा में सांसद अपने क्षेत्र/राज्य से बाहर भी पुनर्वास के लिए हर आपदा पर अधिकतम 1 करोड़ तक की स्थायी संपत्ति बनवा सकता है।
28. सांसद आदर्श ग्राम योजना
- शुरुआत ➜ 11 अक्टूबर 2014
- ग्राम पंचायत कौन चुनता है ➜ सांसद
- मुख्य उद्देश्य ➜ चुनी गई ग्राम पंचायतों के समग्र विकास की रफ़्तार बढ़ाना।
- साथ ही ➜ सभी वर्गों के निवासियों का जीवन-स्तर और जीवन की गुणवत्ता काफ़ी बेहतर करना।
29. रैपिड फायर तथ्य
- डांग क्षेत्रीय विकास ➜ 8 ज़िले; पहली शुरुआत 1994-95 में, दोबारा 2005-06 में (अब 26 पंचायत समितियाँ, 2192 गाँव)
- कंदरा सुधार कार्यक्रम ➜ 1987-88 से, 8 ज़िले
- मेवात क्षेत्र विकास ➜ 1986-87; अलवर, खैरथल-तिजारा और डीग के 807 गाँव
- मगरा क्षेत्र विकास ➜ 2005-06; 5 ज़िले, 1746 गाँव
- अरावली विकास कार्यक्रम ➜ 1974-75; 16 ज़िले, 120 विकास खंड, जापान के OECF की मदद
- सीमांत क्षेत्रीय विकास (BADP) ➜ 1993-94; बाड़मेर, जैसलमेर और बीकानेर के सीमावर्ती खंड
- TSP और माडा ➜ जनजाति उपयोजना 1974-75 से, माडा 1978-79 से (18 ज़िले)
- सहरिया विकास कार्यक्रम ➜ 1977-78, राज्य की एकमात्र आदिम जनजाति के लिए
- डांग, मगरा, मेवात और बृज — चारों की राशि बजट 2025-26 में 50 से बढ़ाकर 100 करोड़ की गई।
अगले भाग में राजस्थान के प्रमुख अनुसंधान केन्द्र — ज़िलेवार शोध संस्थान, अनाज-तिलहन-बागवानी के शोध केंद्र और बड़े कृषि फ़ार्म व संस्थान।
पिछला भाग: राजस्थान में सहकारिता: प्रमुख सहकारी संस्थाएँ एवं प्रमुख सहकारी योजनाएँ
अगला भाग: राजस्थान के प्रमुख अनुसंधान केन्द्र: फ़सल, बागवानी व कृषि संस्थान
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