राजस्थान का धरातल एक जैसा नहीं है — कहीं रेत के टीले, कहीं करोड़ों वर्ष पुराने पहाड़, कहीं नदियों से बने उपजाऊ मैदान और कहीं लावा से बना पठार। इस विविधता को समझने के लिए भूगोलवेत्ताओं ने राज्य को भौतिक प्रदेशों में बाँटा। इस भाग में हम पहले इस विभाजन का वैज्ञानिक आधार देखेंगे, फिर विभाजन के प्रयास और अंत में चारों प्रदेशों की तुलनात्मक तस्वीर।
1. वैज्ञानिक आधार — महाद्वीपीय विस्थापन सिद्धांत
- प्रतिपादक ➜ प्रो. अल्फ्रेड वैगनर (जर्मनी)
- वर्ष ➜ 1912
- मूल विचार ➜ प्राग-ऐतिहासिक काल में सम्पूर्ण विश्व एक ही विशाल पिण्ड के रूप में था, जिसे पेंजिया कहा गया
- चारों ओर फैला सागर ➜ पेंथालासा
- विभाजन कब ➜ कार्बोनिफेरस युग में पेंजिया दो भागों में बँट गया
पेंजिया के दो भाग
- उत्तरी भाग ➜ अंगारा लैण्ड (लॉरेशिया)
- दक्षिणी भाग ➜ गौंडवाना लैण्ड
- दोनों के बीच बना महासागर ➜ टेथिस महासागर
भौगोलिक परिवर्तनों के चलते अंगारा लैण्ड और गौंडवाना लैण्ड में टकराव हुआ। इससे स्थल भाग टूटे — जहाँ-जहाँ स्थल ऊपर आया वहाँ महाद्वीप बने और जहाँ-जहाँ जल भरा वहाँ महासागर बने। पृथ्वी की घूर्णन गति पश्चिम से पूर्व की ओर होती है, इसीलिए जल पूर्व की ओर खिसकता गया। यही कारण है कि विश्व के अधिकांश मरुस्थल महाद्वीपों के पश्चिमी तट पर मिलते हैं।
2. राजस्थान में किसके अवशेष कहाँ
भारत में गौंडवाना लैण्ड और टेथिस सागर — दोनों के अवशेष मिलते हैं। राजस्थान भी इसका अपवाद नहीं है। चारों भौतिक प्रदेशों की उत्पत्ति इसी आधार पर बँटती है।
| भौतिक प्रदेश | किसका अवशेष |
|---|---|
| मरुस्थल | टेथिस सागर |
| अरावली | गौंडवाना लैण्ड |
| पूर्वी मैदान | टेथिस सागर |
| पठारी प्रदेश | गौंडवाना लैण्ड |
ट्रिक: ऊँचाई वाले दोनों भाग (अरावली और पठार) गौंडवाना के हैं; समतल/रेतीले दोनों भाग (मरुस्थल और मैदान) टेथिस के हैं।
3. विभाजन के प्रयास — कौन, कब, कितने भाग
- सर्वप्रथम प्रयास ➜ प्रो. वी.सी. मिश्रा। इन्होंने अपनी पुस्तक ‘राजस्थान का भूगोल’ में राज्य को 7 भागों में बाँटा। पुस्तक का प्रकाशन 1968 में नेशनल बुक ट्रस्ट द्वारा हुआ।
- दूसरा प्रयास ➜ ए.के. सेन, 1968 में, जलवायु को आधार बनाकर
- तीसरा प्रयास ➜ रामलोचन सिंह, 1971 में
- सर्वमान्य विभाजन ➜ हरिमोहन सक्सेना की पुस्तक ‘राजस्थान का भूगोल’ के अनुसार धरातलीय दृष्टि से चार प्रदेश
वी.सी. मिश्रा के 7 भौगोलिक प्रदेश
- पश्चिमी शुष्क प्रदेश
- अर्द्धशुष्क प्रदेश
- नहरी प्रदेश
- अरावली प्रदेश
- पूर्वी कृषि औद्योगिक प्रदेश
- दक्षिणी पूर्वी कृषि प्रदेश
- चम्बल बीहड़ प्रदेश
4. सर्वमान्य चार भौतिक प्रदेश
- पश्चिमी मरुस्थलीय प्रदेश
- अरावली पर्वतीय प्रदेश
- पूर्वी मैदानी प्रदेश
- दक्षिणी पूर्वी पठारी प्रदेश
उप-विभाजन का मानचित्र (मानसिक ढाँचा)
- पश्चिमी मरुस्थलीय प्रदेश
- शुष्क मरुस्थलीय प्रदेश ➜ बालूका स्तूप युक्त प्रदेश तथा बालूका स्तूप मुक्त प्रदेश
- अर्द्धशुष्क मरुस्थलीय प्रदेश ➜ घग्घर का मैदान, शेखावाटी प्रदेश, नागौरी उच्च भूमि, गौडवाड़ प्रदेश
- अरावली पर्वतीय प्रदेश ➜ उत्तरी अरावली, मध्य अरावली, दक्षिणी अरावली
- पूर्वी मैदानी प्रदेश ➜ चम्बल बेसिन, माही बेसिन, बाणगंगा बेसिन, बनास बेसिन (बनास के अंतर्गत मालपुरा-करौली का मैदान तथा मेवाड़ का मैदान)
- दक्षिणी पूर्वी पठारी प्रदेश ➜ विंध्यन कगार भूमि तथा दक्कन लावा पठार
5. उद्भव का क्रम — कौन पहले बना
चारों भौतिक भागों में सबसे पहले अरावली पर्वतमाला अस्तित्व में आई। उसके बाद दक्षिणी पूर्वी पठारी भाग, फिर पूर्वी मैदानी प्रदेश और सबसे अंत में पश्चिमी मरुस्थल का उद्भव हुआ। यही कारण है कि थार को ‘युवा मरुस्थल’ कहा जाता है।
6. चारों प्रदेशों की तुलनात्मक तालिका
| भौतिक भाग | क्षेत्रफल | जनसंख्या | अवशेष | बनने का क्रम | ऊँचाई के अनुसार क्रम |
|---|---|---|---|---|---|
| पश्चिमी मरुस्थलीय प्रदेश | 61.11% | 40% | टेथिस सागर | चौथा | चौथा |
| अरावली पर्वतीय प्रदेश | 9.0% | 10% | गौंडवाना लैण्ड | प्रथम | प्रथम |
| पूर्वी मैदानी प्रदेश | 23% | 39% | टेथिस सागर | तृतीय | तृतीय |
| दक्षिणी पूर्वी पठारी प्रदेश | 6.89% | 11% | गौंडवाना लैण्ड | द्वितीय | द्वितीय |
ध्यान देने योग्य: बनने का क्रम और ऊँचाई का क्रम — दोनों एक जैसे हैं। जो सबसे पहले बना (अरावली), वही सबसे ऊँचा है; जो सबसे बाद में बना (मरुस्थल), वही सबसे नीचा है। एक ही तर्क से दो अलग-अलग प्रश्न हल हो जाते हैं।
7. अरावली की धुरी — पूरा नक्शा एक सूत्र में
- अरावली पर्वतमाला सम्पूर्ण राजस्थान को दो विशिष्ट भौतिक भागों में बाँट देती है
- अरावली के पश्चिम में ➜ मरुस्थलीय प्रदेश, 16+1 (सिरोही) = 17 जिले; क्षेत्रफल 60%, जनसंख्या 40%
- अरावली सहित एवं उसके पूर्व में ➜ गैर-मरुस्थलीय प्रदेश, 25 जिले; क्षेत्रफल 40%, जनसंख्या 60%
नोट: सिरोही भौगोलिक रूप से अरावली के पश्चिम में पड़ता है, फिर भी इसे मरुस्थलीय जिला नहीं माना जाता। परीक्षा में यह अपवाद बार-बार पूछा जाता है।
रिवीजन पॉइंटर्स
- पेंजिया ➜ पेंथालासा ➜ अंगारा + गौंडवाना ➜ टेथिस — यह क्रम रटा हुआ होना चाहिए।
- सर्वप्रथम विभाजन वी.सी. मिश्रा (7 भाग), सर्वमान्य विभाजन हरिमोहन सक्सेना (4 भाग)।
- सर्वाधिक क्षेत्रफल मरुस्थल का (61.11%), सर्वाधिक जनसंख्या भी मरुस्थल की (40%)।
- न्यूनतम क्षेत्रफल पठारी प्रदेश (6.89%), न्यूनतम जनसंख्या अरावली (10%)।
- ए.के. सेन ने जलवायु के आधार पर, रामलोचन सिंह ने 1971 में विभाजन किया।
अगले भाग में पश्चिमी मरुस्थलीय प्रदेश का विस्तृत अध्ययन — थार की उत्पत्ति, उसकी विशेषताएँ और शुष्क मरुस्थलीय उपप्रदेश।