आंतरिक अपवाह की नदियाँ – Rajasthan Geography Chapter 28
राजस्थान के लगभग 60% क्षेत्र में आंतरिक अपवाह प्रणाली पाई जाती है — यानी वे नदियाँ जो किसी सागर तक पहुँचने से पहले ही रेत या भूमि में समा जाती हैं। इस अंतिम भाग में आंतरिक प्रवाह की सभी प्रमुख नदियाँ, फिर पूरे अध्याय की रिवीजन तालिकाएँ और अंत में प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्न दिए गए हैं।
1. आंतरिक प्रवाह — मूल बात
वे नदियाँ जो अपना जल किसी सागर या समुद्र में डालने से पहले ही विलुप्त हो जाती हैं, आंतरिक जल प्रवाह प्रणाली में सम्मिलित की जाती हैं
राजस्थान के बहुत बड़े भू-भाग का पानी किसी समुद्र तक नहीं पहुँचता; यही अन्तःस्थलीय प्रवाह प्रणाली बनाता है। ये छोटी-छोटी बरसाती नदियाँ हैं, जिनका पानी मरुस्थल में लुप्त हो जाता है।
अरावली के उत्तर-पश्चिमी भाग में अधिकांशतः यही प्रणाली पाई जाती है; राजस्थान के 60% क्षेत्र में आंतरिक जल प्रवाह प्रणाली है
प्रमुख अन्तःप्रवाह की नदियाँ ➜ घग्घर, कांतली, काकनी, साबी, रूपारेल, रूपनगढ़, मेंढ़ा, कुकुन्द, रेवा नदी (बाड़मेर), कोटड़ी नदी (सीकर), कावंट नदी (सीकर), पनरोही डूंगर नदी (जैसलमेर), रोहिली नदी, निमड़ा नदी
2. घग्घर नदी
उद्गम ➜ शिवालिक पर्वत श्रेणी (कालका माता का मंदिर, शिमला, हिमाचल प्रदेश)
उपनाम ➜ प्राचीन सरस्वती, दृषद्वती, मृत नदी, नट नदी, सोतर, वाहिनी, राजस्थान का शोक
हनुमानगढ़ में घग्घर के प्रवाह को नाली कहते हैं; पाकिस्तान में यह हाकरा / हाकरा पाट कहलाती है
प्रवाह ➜ हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान; राजस्थान में हनुमानगढ़ व गंगानगर में
राजस्थान में प्रवेश ➜ तलवाड़ा (टिब्बी तहसील, हनुमानगढ़) से। तलवाड़ा झील (हनुमानगढ़) इसी नदी द्वारा निर्मित है, जो लगभग 7 किमी लम्बी झील है।
घग्घर राजस्थान की एकमात्र नदी है जो उत्तर दिशा में प्रवाह करती है
यह राजस्थान की अन्तःप्रवाह की सबसे लम्बी नदी है
कुल लम्बाई ➜ 465 किमी; राजस्थान में 100 किमी
कम वर्षा की स्थिति में यह नदी भटनेर के मैदान (हनुमानगढ़) में लुप्त हो जाती है; अधिक वर्षा होने पर सूरतगढ़, अनूपगढ़ तक व इससे भी ज़्यादा वर्षा होने पर इसका जल पाकिस्तान के बहावलपुर में फोर्ट अब्बास तक पहुँच जाता है
किनारे के शहर ➜ हनुमानगढ़, सूरतगढ़, अनूपगढ़
सभ्यता ➜ कालीबंगा (हनुमानगढ़) तथा रंगमहल सभ्यता (हनुमानगढ़) घग्घर नदी किनारे स्थित हैं
3. कांतली / काँटली नदी
उद्गम ➜ खण्डेला की पहाड़ियाँ (सीकर)
प्रवाह ➜ सीकर व झुंझुनूं; समापन ➜ चूरू–झुंझुनूं सीमा पर
कांतली का प्रवाह क्षेत्र ‘तोरावाटी’ कहलाता है
यह नदी झुंझुनूं जिले को समान दो भागों में बाँटती है
सहायक नदी ➜ साप व मावत; लम्बाई ➜ 100 किमी
राजस्थान में पूर्णतः बहाव की दृष्टि से यह राजस्थान की आंतरिक प्रवाह की सबसे लम्बी नदी है
गणेश्वर सभ्यता (सीकर) — ताम्रयुगीन सभ्यता, कांतली नदी किनारे; सुनारी सभ्यता (झुंझुनूं) भी कांतली किनारे [परीक्षा: पशु परिचर S-4, 2024 — कान्तली नदी अंतःस्थलीय अपवाह तंत्र से संबंधित][परीक्षा: रसायनज्ञ विज्ञान 2024 — डाई नदी शेखावटी प्रदेश से संबंधित नहीं]
4. काकनी / काकनेय नदी
उद्गम ➜ जैसलमेर के दक्षिण में स्थित कोटरी गाँव की पहाड़ियाँ
यह राजस्थान की सर्वाधिक मार्ग बदलने वाली नदी मानी जाती है
उपनाम ➜ काकनेय, मसूरड़ी
इस नदी ने बूझ झील (रूपसी गाँव के पास, जैसलमेर) का निर्माण किया है
अधिक वर्षा में यह नदी मीठा खाड़ी में विलुप्त हो जाती है
यह राजस्थान की आंतरिक जल प्रवाह की सबसे छोटी नदी है
5. साबी / साहिबी नदी
उद्गम ➜ सेवर पहाड़ियाँ (शाहपुरा, जयपुर)
जयपुर, कोटपूतली-बहरोड़ व खैरथल-तिजारा जिलों में बहती हुई हरियाणा में प्रवेश कर पटौदी (हरियाणा) में विलीन हो जाती है
कुल लम्बाई ➜ 185 किमी
बोचपुरा सभ्यता स्थल (कोटपूतली-बहरोड़) साबी किनारे; सहायक नदी — सोटा
मुगलकाल में इसका पाट काफी चौड़ा हो जाता था और यह नदी अपनी विनाश लीला के लिए प्रसिद्ध थी। अकबर ने कई बार इस पर पुल बनाने का प्रयास किया, पर असफल रहा। इस बारे में एक दोहा प्रसिद्ध है — “अकबर बाँधी ना बंधू ना रेवाड़ी जाऊँ। कोट तळा कर निकलूं साबी नाम कहाऊँ।”
6. रूपारेल, रूपनगढ़, मेंढ़ा व अन्य
रूपारेल नदी ➜ उद्गम उदयनाथ पहाड़ी (थानागाजी, अलवर); उपनाम — लसवाड़ी, वाराह (स्थानीय लोग)। अलवर व भरतपुर दो जिलों में बहती है, आगे चलकर कुशलपुर गाँव (भरतपुर) में विलीन हो जाती है। सीकरी बाँध (भरतपुर) — रूपारेल नदी पर निर्मित; इससे मोती झील (भरतपुर) को जलापूर्ति होती है, जो सुजानगंगा नहर से लोहागढ़ दुर्ग (भरतपुर) की खाई को भरती है। मोती झील को भरतपुर की जीवन रेखा कहते हैं। [परीक्षा: CET Graduation S-2, 2024 — ‘वराह’ या ‘लासवारी’ के नाम से भी जानी जाने वाली: रूपारेल]
रूपनगढ़ नदी ➜ उद्गम किशनगढ़ की पहाड़ियाँ (अजमेर); अजमेर व जयपुर में बहती हुई दक्षिण दिशा की ओर से सांभर झील में गिर जाती है। निम्बार्क सम्प्रदाय की पीठ ‘सलेमाबाद’ (अजमेर) इसी नदी किनारे स्थित है।
मेंढ़ा / मेंड़ा नदी ➜ उद्गम मनोहरपुरा (जयपुर); मनोहरपुरा से डीडवाना-कुचामन जिले में, इसके बाद पुनः जयपुर जिले में प्रवेश कर सांभर झील में उत्तर दिशा से गिरती है। प्रसिद्ध जैन तीर्थ लूणवां (डीडवाना) मेंढ़ा नदी किनारे है।
कुकुन्द नदी ➜ इस नदी का पानी रोककर भरतपुर में बारेठा बाँध (बयाना) बनाया गया है; आकार कटोरेनुमा; निर्माण 1897 में महाराजा रामसिंह के समय; आसपास बन्ध बारेठा अभयारण्य भी बनाया गया
रोहिली नदी ➜ जैसलमेर | निमड़ा नदी ➜ बाड़मेर; इन नदियों के कारण ही 2006 में कवास (बाड़मेर) में बाढ़ आई थी
बुझड़ा व सिसारमा नदी ➜ पिछोला झील को भरती हैं
7. रिवीजन तालिकाएँ
राजस्थान में त्रिवेणी संगम
जिला
नदियाँ
डूँगरपुर
माही, सोम, जाखम
भीलवाड़ा
बनास, बेड़च, मेनाल
टोंक
बनास, खारी, डाई
टोंक
बनास, बांडी, माशी
सवाईमाधोपुर
बनास, चम्बल, सीप
बजट घोषणा 2025-26: बेणेश्वर धाम, रामेश्वर घाट एवं बीगोद संगम को ‘त्रिवेणी संगम’ के रूप में विकसित किया जाएगा।
नदियों किनारे सभ्यता-स्थल
सभ्यता
नदी
तिलवाड़ा सभ्यता, बालोतरा
लूनी
गणेश्वर सभ्यता, सीकर
कांतली
सुनारी सभ्यता, झुंझुनूं
कांतली
बागोर सभ्यता, भीलवाड़ा
कोठारी
आहड़ सभ्यता, उदयपुर
आयड़
बालाथल सभ्यता, उदयपुर
बेड़च
नगरी सभ्यता, चित्तौड़
बेड़च
कालीबंगा सभ्यता, हनुमानगढ़
घग्घर
रंगमहल सभ्यता, गंगानगर
घग्घर
बैराठ सभ्यता, कोटपूतली-बहरोड़
बाणगंगा
बोचपुरा सभ्यता, कोटपूतली-बहरोड़
साबी
गिलूण्ड सभ्यता, राजसमंद
बनास
नोह सभ्यता, भरतपुर
रूपारेल
नदियों किनारे दुर्ग
दुर्ग
जिला
नदियाँ
भैंसरोड़गढ़ दुर्ग
चित्तौड़गढ़
चम्बल व बामनी
कोटा दुर्ग
कोटा
चम्बल किनारे
शेरगढ़ दुर्ग
धौलपुर
चम्बल किनारे
चित्तौड़गढ़ दुर्ग
चित्तौड़गढ़
बेड़च व गम्भीरी
मनोहरथाना दुर्ग
झालावाड़
कालीखाड़ व परवन
शेरगढ़ दुर्ग
बारां
परवन किनारे
सुवर्णगिरी दुर्ग
जालौर
जवाई नदी के कुछ फासले पर
भटनेर दुर्ग
हनुमानगढ़
घग्घर
गागरोन दुर्ग
झालावाड़
आहू व कालीसिन्ध
अभयारण्यों से गुजरने वाली नदियाँ
अभयारण्य
नदी
राष्ट्रीय चम्बल घड़ियाल अभयारण्य
चम्बल
जवाहर सागर अभयारण्य, कोटा
चम्बल
शेरगढ़ अभयारण्य, बारां
परवन
बस्सी अभयारण्य, चित्तौड़गढ़
औराई व बामनी का उद्गम
भैंसरोड़गढ़ अभयारण्य, चित्तौड़गढ़
चम्बल व बामनी का संगम
केवलादेव अभयारण्य, भरतपुर
बाणगंगा
दर्रा / मुकुन्दरा हिल्स, कोटा
आहू व कालीसिंध का संगम
8. प्रतियोगी परीक्षाओं में आए प्रश्न
लूनी बेसिन में सम्मिलित जिले ➜ जोधपुर, सिरोही व पाली — तीनों (कनिष्ठ अनुदेशक सोलर, 2025)
माही की बायें किनारे वाली सहायक ➜ अनास (कनिष्ठ अनुदेशक ड्राफ्टमैन सिविल, 2025)
अनास एवं चाप ➜ माही की सहायक नदियाँ (कनिष्ठ अनुदेशक मेंटनेंस, 2025)
लूनी का उद्गम ➜ अजमेर के नाग पहाड़ (पशु परिचर S-4, 2024)
राजस्थान में न बहने वाली नदी ➜ स्वर्ण रेखा / सुवर्णरिखा (पशु परिचर S-5, 2024)
बंगाल की खाड़ी अपवाह तंत्र से संबंधित ➜ चम्बल (पशु परिचर S-5, 2024)
चूलिया जल प्रपात ➜ चित्तौड़गढ़ (पशु परिचर S-4, 2024)
अंतःस्थलीय अपवाह तंत्र से संबंधित ➜ कान्तली (पशु परिचर S-4, 2024)
बीसलपुर बाँध ➜ बनास नदी पर (पशु परिचर S-4, 2024)
बनास का उद्गम स्थल ➜ भेरोंका मठ (पशु परिचर S-3, 2024)
विंध्याचल के मिण्डा स्थान से निकलने वाली ➜ माही (पशु परिचर S-3, 2024)
बंगाल की खाड़ी अपवाह क्षेत्र से संबंधित नहीं ➜ लूनी (पशु परिचर S-2, 2024)
गांधी सागर बाँध ➜ चम्बल (पशु परिचर S-2, 2024; Raj. Police K-2, 2024; CET Graduation S-3, 2024)
वर्ष में बारहों महीने बहने वाली ➜ चम्बल (पशु परिचर S-1, 2024)
गागरोन दुर्ग किन नदियों के संगम पर ➜ आहू व कालीसिंध (Jr. Instructor Workshop, 2024)
गागरोन किले के पास बहने वाली ➜ कालीसिंध (Junior Instructor Electrician, 2024)
बाणगंगा की सहायक ➜ सांवन (Jr. Instructor ESR, 2024)
चम्बल की सहायक नदियाँ ➜ केवल शिप्रा, काकनेय व कालीसिंध वाला विकल्प (Jr. Instructor RAT05, 2024)
राजस्थान की सबसे लम्बी नदी ➜ चम्बल (CET Graduation S-3, 2024; CET 10+2 S-5, 2024)
‘वराह’ या ‘लासवारी’ नाम से जानी जाने वाली ➜ रूपारेल (CET Graduation S-2, 2024)
अरब सागर में गिरने वाली ➜ माही (CET 10+2 S-4, 2024)
चूलिया जल प्रपात किस क्षेत्र में ➜ दक्षिण-पूर्वी पठारी क्षेत्र (CET 10+2 S-2, 2024)
भारत की एकमात्र खारी नदी लूनी, कच्छ के रन में समाप्त ➜ दोनों कथन सही (महिला पर्यवेक्षक, 2024)
लूनी के विषय में असत्य कथन ➜ यह राजस्थान के कुल अपवाह क्षेत्र के 5.6% भाग पर प्रवाहित होती है (सहायक सांख्यिकी अधिकारी, 2024)
शेखावटी प्रदेश से संबंधित नहीं ➜ डाई (रसायनज्ञ विज्ञान, 2024)
आन्तरिक अपवाह का भाग नहीं ➜ खारी (अनुसंधान अधिकारी, 2024)
हरिपुरा गाँव की पहाड़ियों से निकलकर भैंसरोड़गढ़ के पास मिलने वाली ➜ बामनी (वरिष्ठ अध्यापक संस्कृत, 2024)
लूनी नदी तंत्र, खारी–बनास की सहायक, बनास खमनौर से ➜ (A), (B) व (C) तीनों सही (वरिष्ठ अध्यापक संस्कृत, 2024)
सुमेलित नहीं ➜ मानसी और खारी — कालीसिन्ध (स्कूल व्याख्याता संस्कृत, 2024)