राजस्थान का अपवाह तंत्र

राजस्थान का अपवाह तंत्र परिचय एवं वर्गीकरण – Rajasthan Geography Chapter 22

राजस्थान की गिनती भारत के शुष्क प्रदेशों में होती है, इसलिए यहाँ जल राशियों का महत्त्व और भी बढ़ जाता है। दुर्भाग्य यह है कि नदियाँ कम तो हैं ही, वर्षभर बहने वाली नदियों का भी लगभग अभाव है। इस भाग में अपवाह तंत्र की मूल अवधारणाएँ, तीन प्रवाह प्रणालियाँ और जलग्रहण से जुड़े आँकड़े दिए गए हैं — जिन पर आगे का पूरा अध्याय टिका है।

1. मूल परिभाषाएँ

  • नदी ➜ धरातल पर प्राकृतिक रूप से एक धारा के रूप में बहने वाला जल, जो सदैव ढाल के अनुसार ऊपर से नीचे की ओर बहता है
  • सहायक नदियाँ ➜ वे छोटी नदियाँ जो अपने क्षेत्र का जल आगे ले जाकर बड़ी नदियों में उड़ेलती हैं
  • अपवाह ➜ निश्चित वाहिकाओं के माध्यम से हो रहे जल प्रवाह को अपवाह कहते हैं
  • अपवाह तंत्र ➜ नदियों एवं उनकी सहायक नदियों से बनने वाला तंत्र या प्रारूप
  • जल संसाधन ➜ जल के वे स्रोत जो मानव के लिए उपयोगी हों या जिनके उपयोग की संभावना हो
  • जलग्रहण ➜ नदी एक विशिष्ट क्षेत्र से अपना जल बहाकर लाती है, उसे जलग्रहण कहते हैं

2. राजस्थान के अपवाह तंत्र की विशेषताएँ

  • केवल चम्बल ही एक ऐसी नदी है जो वर्षभर बहती है [परीक्षा: पशु परिचर S-1, 2024 — वर्ष में बारहों महीने बहने वाली एकमात्र नदी: चम्बल]
  • माही मूलतः राजस्थान की नदी नहीं कही जा सकती
  • पश्चिमी राजस्थान में केवल लूनी और उसकी सहायक नदियाँ एक सीमित क्षेत्र में हैं
  • घग्घर केवल वर्षाकाल में बहती है
  • अपवाह प्रणाली यहाँ की भूगर्भिक संरचना, धरातल (विशेषकर अरावली पर्वत श्रृंखला) एवं जलवायु द्वारा नियंत्रित है
  • प्रमुख विशेषता ➜ यहाँ आंतरिक जल प्रवाह प्रणाली पाई जाती है, जिसमें नदियाँ कुछ दूरी तक प्रवाहित होकर रेत अथवा भूमि में समाहित हो जाती हैं
  • जल की दृष्टि से प्रदेश में देश के जल का केवल 1.16% सतही जल उपलब्ध है

3. प्रवाह के आधार पर तीन भाग

प्रणालीहिस्सा
बंगाल की खाड़ी की ओर जाने वाली नदियाँ24%
अरब सागर की ओर जाने वाली नदियाँ16%
आंतरिक जल प्रवाह की नदियाँ60%

नोट: राजस्थान का 60.02% भाग आंतरिक प्रवाह प्रणाली के अंतर्गत आता है।

बंगाल की खाड़ी की ओर जाने वाली नदियाँ

  • इसके अंतर्गत चम्बल, बनास, बाणगंगा, गम्भीर और इनकी सहायक नदियाँ सम्मिलित हैं [परीक्षा: पशु परिचर S-2, 2024 — बंगाल की खाड़ी अपवाह तंत्र से संबंधित नहीं: लूनी]
  • राजस्थान के पूर्वी भाग से बाहर निकलकर यमुना में सीधा अपना जल ले जाने वाली नदियाँ ➜ चम्बल व गम्भीर
  • [परीक्षा: पशु परिचर S-5, 2024 — बंगाल की खाड़ी अपवाह तंत्र से संबंधित: चम्बल]

4. अरावली — भारत की महान जल विभाजक रेखा

अरावली को ‘भारत की महान जल विभाजक रेखा’ कहा जाता है, क्योंकि इस रेखा के पश्चिम व दक्षिण-पश्चिमी भाग की नदियाँ अपना जल अरब सागर में ले जाती हैं तथा इसके पूर्वी भाग की नदियाँ बंगाल की खाड़ी में गिरती हैं। यह जल विभाजक रेखा उत्तर में अरावली के साथ-साथ सांभर झील होते हुए ब्यावर, देवगढ़, कुम्भलगढ़, जयसमंद (उदयपुर) से निकलती हुई दक्षिण-पूर्व में बड़ी सादड़ी व छोटी सादड़ी (प्रतापगढ़) तक चली जाती है।

5. अध्यारोपित नदी

नदी घाटी का विकास पहले ऊपरी आवरण शैल पर होता है। नदी निम्नवर्ती अपरदन द्वारा ऊपरी आवरण शैल को काटकर निचली शैल पर पहुँच जाती है और अपनी घाटी का विकास करती है। इस प्रकार ऊपरी आवरण पर निर्मित घाटी का अध्यारोपण निचली शैल संरचना पर होने से जो घाटी बनती है, उसमें प्रवाहित नदी ‘अध्यारोपित नदी या पूर्वारोपित नदी’ कहलाती है। राजस्थान में चम्बल व बनास इसके उदाहरण हैं।

6. प्रमुख नदी प्रणालियाँ और जलग्रहण क्षेत्र

नदी प्रणालीजलग्रहण क्षेत्र (वर्ग किमी)प्रतिशत
बनास46,57027.48%
लूनी34,25020.21%
चम्बल29,11017.18%
माही16,0309.46%
बाणगंगा एवं गंभीर14,3608.47%
मेंढा, रूपनगढ़6,9404.10%
साबी एवं सोटा4,4802.64%
बर4,5202.67%
साबरमती (वाकल)4,3002.53%
पश्चिम बनास3,0001.77%
कांतली2,5701.52%
सुकल1,9401.14%
दोहन1,4000.83%
योग1,69,470100%

स्रोत — राजस्थान का भूगोल, हिन्दी ग्रंथ अकादमी

7. नदी बेसिनों में उपलब्ध सतही जल

नदी बेसिनउपलब्ध जल (मिलियन क्यूबिक मीटर)
चम्बल5203
बनास4039.3
माही3149
लूनी1451.8
साबरमती799.9
बाणगंगा449.5
पश्चिम बनास406.1
गंभीर353.3
रूपारेल179.5
साबी168.3
पार्वती138.1
सुकली111.7
शेखावाटी104.7
जालौर के नाले31.6
बेसिन के अतिरिक्त क्षेत्र468

8. प्रमुख नदियों की लम्बाई

नदीकुल लम्बाईराजस्थान में लम्बाई
चम्बल1051 किमी322 किमी
माही576 किमी171 किमी
बनास512 किमीसम्पूर्ण राजस्थान में
लूनी495 किमी330 किमी
घग्घर465 किमी100 किमी
साबरमती416 किमी45 किमी
कालीसिंध278 किमी145 किमी
पश्चिम बनास260 किमी
बाणगंगा240 किमी

[परीक्षा: CET Graduation S-3, 2024 — राजस्थान की सबसे लम्बी नदी: चंबल] [परीक्षा: CET 10+2 S-5, 2024 — सबसे लम्बी नदी: चम्बल]

9. रैपिड फायर तथ्य

  • राजस्थान में अधिकांश नदियाँ बरसाती होने के कारण वर्षा ऋतु के बाद जल नहीं रहता
  • एकमात्र बारहमासी नदी ➜ चम्बल
  • वे जिले जहाँ कोई भी नदी नहीं है ➜ बीकानेर, चूरू, फलौदी, डीग
  • बीकानेर संभाग की एकमात्र नदी ➜ घग्घर
  • सर्वाधिक नदियों के उद्गम वाला जिला ➜ उदयपुर
  • सर्वाधिक नदियों के बहाव वाला जिला ➜ चित्तौड़गढ़
  • सर्वाधिक नदियों वाला संभाग ➜ कोटा
  • श्रीगंगानगर, झुंझुनूं व हनुमानगढ़ में मात्र 1-1 नदी है
  • चारों ओर से नदियों से घिरे जिले ➜ कोटा व बाँसवाड़ा
  • अरावली पर्वतमाला को मध्य से काटने वाली नदियाँ ➜ लूनी व बनास

अगले भाग में चम्बल नदी — उसका पूरा प्रवाह, विशेषताएँ, घड़ियाल अभयारण्य और चम्बल पर बने चारों बाँध।

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