राजस्थान की गिनती भारत के शुष्क प्रदेशों में होती है, इसलिए यहाँ जल राशियों का महत्त्व और भी बढ़ जाता है। दुर्भाग्य यह है कि नदियाँ कम तो हैं ही, वर्षभर बहने वाली नदियों का भी लगभग अभाव है। इस भाग में अपवाह तंत्र की मूल अवधारणाएँ, तीन प्रवाह प्रणालियाँ और जलग्रहण से जुड़े आँकड़े दिए गए हैं — जिन पर आगे का पूरा अध्याय टिका है।
1. मूल परिभाषाएँ
- नदी ➜ धरातल पर प्राकृतिक रूप से एक धारा के रूप में बहने वाला जल, जो सदैव ढाल के अनुसार ऊपर से नीचे की ओर बहता है
- सहायक नदियाँ ➜ वे छोटी नदियाँ जो अपने क्षेत्र का जल आगे ले जाकर बड़ी नदियों में उड़ेलती हैं
- अपवाह ➜ निश्चित वाहिकाओं के माध्यम से हो रहे जल प्रवाह को अपवाह कहते हैं
- अपवाह तंत्र ➜ नदियों एवं उनकी सहायक नदियों से बनने वाला तंत्र या प्रारूप
- जल संसाधन ➜ जल के वे स्रोत जो मानव के लिए उपयोगी हों या जिनके उपयोग की संभावना हो
- जलग्रहण ➜ नदी एक विशिष्ट क्षेत्र से अपना जल बहाकर लाती है, उसे जलग्रहण कहते हैं
2. राजस्थान के अपवाह तंत्र की विशेषताएँ
- केवल चम्बल ही एक ऐसी नदी है जो वर्षभर बहती है [परीक्षा: पशु परिचर S-1, 2024 — वर्ष में बारहों महीने बहने वाली एकमात्र नदी: चम्बल]
- माही मूलतः राजस्थान की नदी नहीं कही जा सकती
- पश्चिमी राजस्थान में केवल लूनी और उसकी सहायक नदियाँ एक सीमित क्षेत्र में हैं
- घग्घर केवल वर्षाकाल में बहती है
- अपवाह प्रणाली यहाँ की भूगर्भिक संरचना, धरातल (विशेषकर अरावली पर्वत श्रृंखला) एवं जलवायु द्वारा नियंत्रित है
- प्रमुख विशेषता ➜ यहाँ आंतरिक जल प्रवाह प्रणाली पाई जाती है, जिसमें नदियाँ कुछ दूरी तक प्रवाहित होकर रेत अथवा भूमि में समाहित हो जाती हैं
- जल की दृष्टि से प्रदेश में देश के जल का केवल 1.16% सतही जल उपलब्ध है
3. प्रवाह के आधार पर तीन भाग
| प्रणाली | हिस्सा |
|---|---|
| बंगाल की खाड़ी की ओर जाने वाली नदियाँ | 24% |
| अरब सागर की ओर जाने वाली नदियाँ | 16% |
| आंतरिक जल प्रवाह की नदियाँ | 60% |
नोट: राजस्थान का 60.02% भाग आंतरिक प्रवाह प्रणाली के अंतर्गत आता है।
बंगाल की खाड़ी की ओर जाने वाली नदियाँ
- इसके अंतर्गत चम्बल, बनास, बाणगंगा, गम्भीर और इनकी सहायक नदियाँ सम्मिलित हैं [परीक्षा: पशु परिचर S-2, 2024 — बंगाल की खाड़ी अपवाह तंत्र से संबंधित नहीं: लूनी]
- राजस्थान के पूर्वी भाग से बाहर निकलकर यमुना में सीधा अपना जल ले जाने वाली नदियाँ ➜ चम्बल व गम्भीर
- [परीक्षा: पशु परिचर S-5, 2024 — बंगाल की खाड़ी अपवाह तंत्र से संबंधित: चम्बल]
4. अरावली — भारत की महान जल विभाजक रेखा
अरावली को ‘भारत की महान जल विभाजक रेखा’ कहा जाता है, क्योंकि इस रेखा के पश्चिम व दक्षिण-पश्चिमी भाग की नदियाँ अपना जल अरब सागर में ले जाती हैं तथा इसके पूर्वी भाग की नदियाँ बंगाल की खाड़ी में गिरती हैं। यह जल विभाजक रेखा उत्तर में अरावली के साथ-साथ सांभर झील होते हुए ब्यावर, देवगढ़, कुम्भलगढ़, जयसमंद (उदयपुर) से निकलती हुई दक्षिण-पूर्व में बड़ी सादड़ी व छोटी सादड़ी (प्रतापगढ़) तक चली जाती है।
5. अध्यारोपित नदी
नदी घाटी का विकास पहले ऊपरी आवरण शैल पर होता है। नदी निम्नवर्ती अपरदन द्वारा ऊपरी आवरण शैल को काटकर निचली शैल पर पहुँच जाती है और अपनी घाटी का विकास करती है। इस प्रकार ऊपरी आवरण पर निर्मित घाटी का अध्यारोपण निचली शैल संरचना पर होने से जो घाटी बनती है, उसमें प्रवाहित नदी ‘अध्यारोपित नदी या पूर्वारोपित नदी’ कहलाती है। राजस्थान में चम्बल व बनास इसके उदाहरण हैं।
6. प्रमुख नदी प्रणालियाँ और जलग्रहण क्षेत्र
| नदी प्रणाली | जलग्रहण क्षेत्र (वर्ग किमी) | प्रतिशत |
|---|---|---|
| बनास | 46,570 | 27.48% |
| लूनी | 34,250 | 20.21% |
| चम्बल | 29,110 | 17.18% |
| माही | 16,030 | 9.46% |
| बाणगंगा एवं गंभीर | 14,360 | 8.47% |
| मेंढा, रूपनगढ़ | 6,940 | 4.10% |
| साबी एवं सोटा | 4,480 | 2.64% |
| बर | 4,520 | 2.67% |
| साबरमती (वाकल) | 4,300 | 2.53% |
| पश्चिम बनास | 3,000 | 1.77% |
| कांतली | 2,570 | 1.52% |
| सुकल | 1,940 | 1.14% |
| दोहन | 1,400 | 0.83% |
| योग | 1,69,470 | 100% |
स्रोत — राजस्थान का भूगोल, हिन्दी ग्रंथ अकादमी
7. नदी बेसिनों में उपलब्ध सतही जल
| नदी बेसिन | उपलब्ध जल (मिलियन क्यूबिक मीटर) |
|---|---|
| चम्बल | 5203 |
| बनास | 4039.3 |
| माही | 3149 |
| लूनी | 1451.8 |
| साबरमती | 799.9 |
| बाणगंगा | 449.5 |
| पश्चिम बनास | 406.1 |
| गंभीर | 353.3 |
| रूपारेल | 179.5 |
| साबी | 168.3 |
| पार्वती | 138.1 |
| सुकली | 111.7 |
| शेखावाटी | 104.7 |
| जालौर के नाले | 31.6 |
| बेसिन के अतिरिक्त क्षेत्र | 468 |
8. प्रमुख नदियों की लम्बाई
| नदी | कुल लम्बाई | राजस्थान में लम्बाई |
|---|---|---|
| चम्बल | 1051 किमी | 322 किमी |
| माही | 576 किमी | 171 किमी |
| बनास | 512 किमी | सम्पूर्ण राजस्थान में |
| लूनी | 495 किमी | 330 किमी |
| घग्घर | 465 किमी | 100 किमी |
| साबरमती | 416 किमी | 45 किमी |
| कालीसिंध | 278 किमी | 145 किमी |
| पश्चिम बनास | 260 किमी | — |
| बाणगंगा | 240 किमी | — |
[परीक्षा: CET Graduation S-3, 2024 — राजस्थान की सबसे लम्बी नदी: चंबल] [परीक्षा: CET 10+2 S-5, 2024 — सबसे लम्बी नदी: चम्बल]
9. रैपिड फायर तथ्य
- राजस्थान में अधिकांश नदियाँ बरसाती होने के कारण वर्षा ऋतु के बाद जल नहीं रहता
- एकमात्र बारहमासी नदी ➜ चम्बल
- वे जिले जहाँ कोई भी नदी नहीं है ➜ बीकानेर, चूरू, फलौदी, डीग
- बीकानेर संभाग की एकमात्र नदी ➜ घग्घर
- सर्वाधिक नदियों के उद्गम वाला जिला ➜ उदयपुर
- सर्वाधिक नदियों के बहाव वाला जिला ➜ चित्तौड़गढ़
- सर्वाधिक नदियों वाला संभाग ➜ कोटा
- श्रीगंगानगर, झुंझुनूं व हनुमानगढ़ में मात्र 1-1 नदी है
- चारों ओर से नदियों से घिरे जिले ➜ कोटा व बाँसवाड़ा
- अरावली पर्वतमाला को मध्य से काटने वाली नदियाँ ➜ लूनी व बनास
अगले भाग में चम्बल नदी — उसका पूरा प्रवाह, विशेषताएँ, घड़ियाल अभयारण्य और चम्बल पर बने चारों बाँध।
