चम्बल राजस्थान की सबसे लम्बी और एकमात्र बारहमासी नदी है। यह दक्षिण से उत्तर की ओर बहने वाली राज्य की अकेली नदी भी है और इसी पर राज्य के चार बड़े बाँध बने हैं। इस भाग में चम्बल का पूरा प्रवाह, विशेषताएँ, घड़ियाल अभयारण्य और चारों बाँध क्रमवार दिए गए हैं।
1. मूल परिचय
- उपनाम ➜ कामधेनु, चर्मवती, चर्मण्वती, नित्यवाही, मालवगंगा
- उद्गम ➜ जानापाव की पहाड़ियाँ (महू के निकट, मध्यप्रदेश), विंध्याचल पर्वत श्रेणियों से [परीक्षा: पशु परिचर S-2, 2024 — गांधी सागर बाँध चम्बल पर स्थित है]
- राजस्थान में प्रवेश ➜ चौरासीगढ़ (चित्तौड़गढ़) के पास
- प्रवाह क्षेत्र ➜ राजस्थान के 6 जिलों में क्रमशः — चित्तौड़गढ़, कोटा, बूँदी, सवाईमाधोपुर, करौली, धौलपुर
- राज्य ➜ मध्यप्रदेश, राजस्थान व उत्तरप्रदेश
- समापन ➜ मुरादगंज (जिला इटावा, उत्तरप्रदेश) नामक स्थान के पास यमुना में
लम्बाई का बँटवारा
| क्षेत्र | लम्बाई |
|---|---|
| कुल लम्बाई | 1051 किमी |
| मध्यप्रदेश में | 320 किमी |
| राजस्थान में | 322 किमी |
| राजस्थान व मध्यप्रदेश सीमा पर | 252 किमी |
| उत्तरप्रदेश में | 157 किमी |
यह आँकड़े वाटर रिसोर्सेज रिपोर्ट 2017 के अनुसार हैं। इससे पूर्व चम्बल की लम्बाई 965 किमी मानी जाती थी; ‘राजस्थान का भूगोल’ (डॉ. हरिमोहन सक्सेना) में भी 965 किमी बताई गई है।
2. चम्बल बेसिन
- विस्तार ➜ 11 जिलों में — बारां (6994 वर्ग किमी), झालावाड़ (6315 वर्ग किमी), बूँदी (5610 वर्ग किमी), भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, कोटा, धौलपुर, करौली, सवाईमाधोपुर, प्रतापगढ़, टोंक
- स्रोत — Hydrogeological Atlas of Rajasthan, Chambal Basin
3. चम्बल की विशेषताएँ
- यह सबसे लम्बी अंतर्राज्यीय सीमा (जल सीमा) बनाने वाली नदी है
- पाली घाट (सवाईमाधोपुर) से पिनाहट (उत्तरप्रदेश) तक राजस्थान व मध्यप्रदेश सीमा पर 252 किमी लम्बाई में बहती है
- बहाव की दृष्टि से यह राजस्थान की सबसे बड़ी नदी है
- यह राजस्थान की एकमात्र बारहमासी नदी है
- यह कोटा-बूँदी की सीमा बनाती है, कोटा की पश्चिमी सीमा व बूँदी जिले की पूर्वी सीमा का निर्धारण करती है; आगे चलकर सीमित दूरी में कोटा-सवाईमाधोपुर की सीमा भी बनाती है
- राजस्थान में प्रवेश के बाद इसमें सबसे पहले गुंजाली नदी मिलती है
- यह राजस्थान की एकमात्र नदी है जो दक्षिण से उत्तर की ओर बहती है; कोटा के बाद इसकी दिशा उत्तर-पूर्व हो जाती है
- पानी की उपलब्धता (सर्वाधिक सतही जल) के आधार पर यह राजस्थान की दूसरी सबसे बड़ी नदी है (प्रथम स्थान — माही)
- भैंसरोड़गढ़ से कोटा तक यह नदी एक संकीर्ण घाटी (गार्ज) से बहती है
- बूँदी के केशवरायपाटन में इसका पाट अधिकतम एवं गहराई भी अधिक होती है
चूलिया जल प्रपात
- ऊँचाई 18 मीटर; भैंसरोड़गढ़ से 5 किमी आगे चित्तौड़गढ़ जिले में स्थित
- यह राजस्थान का सबसे ऊँचा जलप्रपात है [परीक्षा: CET 10+2 S-2, 2024 — चूलिया जल प्रपात दक्षिण-पूर्वी पठारी क्षेत्र में] [परीक्षा: पशु परिचर S-4, 2024 — चूलिया जल प्रपात चित्तौड़गढ़ में]
4. घड़ियाल, डॉल्फिन एवं अभयारण्य
- महाकवि कालिदास ने मेघदूत में चम्बल नदी का वर्णन किया है
- घड़ियालों की अधिकता के कारण चम्बल नदी ‘घड़ियालों की शरणस्थली’ कहलाती है
- राष्ट्रीय चम्बल घड़ियाल अभयारण्य ➜ यह देश का पहला नदी अभयारण्य है। मध्यप्रदेश, राजस्थान व उत्तरप्रदेश के संयुक्त प्रयासों से घड़ियालों व मगरमच्छों के संरक्षण हेतु स्थापित। जवाहर सागर बाँध से यमुना-चम्बल संगम तक फैला अंतर्राज्यीय अभयारण्य है। नदी के तट के दोनों ओर 1000 मीटर चौड़े व लगभग 600 किमी लम्बे क्षेत्र को राज्य सरकार ने 1979 में अधिसूचना जारी कर अभयारण्य घोषित किया।
- गांगेय सूंस ➜ चम्बल में पाया जाने वाला स्तनपायी जीव। गंगा में रहने वाली डॉल्फिन को सूंस भी कहा जाता है; यह एक नेत्रहीन स्तनपायी जीव है। इनकी संख्या तेज़ी से घट रही है। 5 अक्टूबर 2009 को भारत सरकार ने गंगा की डॉल्फिन को राष्ट्रीय जलीय जीव घोषित किया। इसे ‘गंगा का टाइगर’ भी कहा जाता है।
5. हैंगिंग ब्रिज व रिवर फ्रन्ट
- हैंगिंग ब्रिज ➜ देश का चौथा एवं राज्य का पहला हैंगिंग ब्रिज, कोटा में चम्बल नदी पर। 6 लेन का, 1.40 किमी लम्बा। उद्घाटन 29 अगस्त 2017 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उदयपुर से किया। इस ब्रिज से राष्ट्रीय राजमार्ग 76 (नया NH 27) गुजरता है।
- यह हैंगिंग ब्रिज ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर का भाग है, जो भारत के 7 राज्यों से गुजरता है और पोरबंदर (गुजरात) से सिलचर (असम) तक है
- चम्बल रिवर फ्रन्ट ➜ कोटा में चम्बल नदी के किनारे कोटा बैराज से नयापुरा उच्चस्तरीय पुल के बीच विकसित। शुभंकर (लोगो) — घड़ियाल। उद्घाटन 12 सितम्बर 2023।
- नमामि गंगे प्रोजेक्ट ➜ केंद्र सरकार ने इस प्रोजेक्ट के तीसरे चरण में चम्बल नदी को शामिल किया है
6. चम्बल पर बने चार बाँध
चम्बल परियोजना की शुरुआत 1953-54 में हुई; इस परियोजना में राजस्थान व मध्यप्रदेश का 50:50 हिस्सा है। उद्गम से यमुना में समापन तक बाँधों का क्रम इस प्रकार है — गाँधी सागर, राणा प्रताप सागर, जवाहर सागर, कोटा बैराज।
(1) गाँधी सागर बाँध
- वर्ष ➜ 1959; रामपुरा व भानपुरा पठारों के मध्य (मंदसौर, मध्यप्रदेश)
- यह चम्बल पर निर्मित सबसे बड़ा बाँध तथा चम्बल पर बना प्रथम बाँध है
- विद्युत उत्पादन ➜ 23 × 5 = 115 मेगावाट
- उद्घाटन पं. नेहरू जी ने 1960 में किया [परीक्षा: Raj. Police K-2, 2024 व CET Graduation S-3, 2024 — गांधी सागर बाँध चम्बल पर]
(2) राणा प्रताप सागर
- वर्ष ➜ फरवरी 1970; रावतभाटा (चित्तौड़गढ़)
- भराव क्षमता की दृष्टि से यह राजस्थान का सबसे बड़ा बाँध है
- विद्युत उत्पादन ➜ 43 × 4 = 172 मेगावाट
- इस बाँध के किनारे राजस्थान एटोमिक पॉवर स्टेशन, रावतभाटा बना है (कनाडा के सहयोग से, 6 इकाईयाँ, कुल उत्पादन 1180 मेगावाट, 1965 में स्थापना), जो देश का दूसरा परमाणु विद्युत गृह है
- ध्यान रहे ➜ देश के 17 बाँधों को आइकॉनिक और फेमस बाँध माना गया है, इनमें राजस्थान का एकमात्र बाँध ‘राणा प्रताप सागर’ शामिल है
(3) जवाहर सागर बाँध
- वर्ष ➜ 1972; बोरावास (कोटा)
- यह कोटा व बूँदी जिलों की सीमा पर बना है
- विद्युत उत्पादन ➜ 33 × 3 = 99 मेगावाट
- [परीक्षा: Stenographer 2024 — कथन (I) व कथन (II) दोनों सत्य हैं]
(4) कोटा बैराज / कोटा सिंचाई बाँध
- वर्ष ➜ 1960; कोटा शहर के समीप स्थित; उद्घाटन नेहरू जी द्वारा
- इससे केवल सिंचाई होती है; यह जवाहर सागर से 16 किमी आगे स्थित है
- बांयी नहर ➜ कोटा व बूँदी में सिंचाई (178 किमी)
- दांयी नहर ➜ कोटा, बारां व मध्यप्रदेश में सिंचाई; राजस्थान में 124 किमी तथा कुल लम्बाई 248 किमी। इस दांयी नहर पर कुल 8 लिफ्ट नहरें बनी हैं।
लिफ्ट नहरें
- चम्बल नदी पर सर्वाधिक 10 लिफ्ट नहरें हैं, जिनमें से 8 कोटा बैराज की दांयी नहर पर बनी हैं
- वितरण ➜ 6 लिफ्ट नहरें बारां में, 2 कोटा में, 1 करौली में तथा 1 सवाईमाधोपुर में
रिवीजन पॉइंटर्स
- बाँधों का क्रम उद्गम से समापन तक: गाँधी सागर → राणा प्रताप सागर → जवाहर सागर → कोटा बैराज।
- चम्बल पर सबसे बड़ा बाँध गाँधी सागर, पर भराव क्षमता में राजस्थान का सबसे बड़ा राणा प्रताप सागर।
- दक्षिण से उत्तर बहने वाली एकमात्र नदी; प्रवेश के बाद पहली सहायक गुंजाली।
- सतही जल में प्रथम माही, द्वितीय चम्बल; लम्बाई में प्रथम चम्बल।
- चूलिया जलप्रपात 18 मीटर — राज्य का सबसे ऊँचा, चित्तौड़गढ़ में।
