संभागीय व्यवस्था एवं उपखण्ड से गाँव तक – Rajasthan Polity Chapter 12

संभाग से पटवारी तक प्रशासन की सीढ़ी — 7 संभाग, संभागीय आयुक्त और जिला कलेक्टर की चार भूमिकाएँ।

12 min read Updated Notes in Hindi
In this chapter (30 sections)
  1. एक नज़र में
  2. प्रशासन की इकाइयाँ
  3. जिला प्रशासन का ढाँचा
  4. संभागीय व्यवस्था
  5. संभाग — अर्थ
  6. संभागीय व्यवस्था का सफ़र
  7. आज के 7 संभाग
  8. निरस्त 3 संभाग
  9. संभागीय आयुक्त
  10. पद और नियुक्ति
  11. संभागीय आयुक्त के काम
  12. आयुक्त कार्यालय का संगठन
  13. जिला प्रशासन
  14. “जिला” और कलेक्टर का जन्म
  15. जिले के पुराने नाम
  16. विशेषताएँ और लक्ष्य
  17. जिला कलेक्टर
  18. कलेक्टर — पहचान
  19. 1. जिला मजिस्ट्रेट
  20. 2. कलेक्टर / जिलाधीश
  21. 3. विकास अधिकारी
  22. 4. प्रशासनिक अधिकारी
  23. उपखण्ड से गाँव तक
  24. उपखण्ड अधिकारी (SDO/SDM)
  25. तहसीलदार
  26. उप तहसील व कानूनगो
  27. पटवारी
  28. ग्राम विकास अधिकारी (VDO)
  29. राजस्थान राजस्व मण्डल
  30. रैपिड फायर तथ्य

नीतियाँ जयपुर के सचिवालय में बनती हैं, पर उन्हें गाँव तक पहुँचाने का काम सीढ़ीनुमा इकाइयाँ करती हैं — सबसे ऊपर संभाग, सबसे नीचे पटवारी। जिसे यह सीढ़ी और हर पायदान का अधिकारी याद है, उसके लिए आधे प्रश्न आसान हो जाते हैं। इस भाग में संभागीय व्यवस्था व संभागीय आयुक्त, जिला प्रशासन, जिला कलेक्टर, उपखण्ड से गाँव तक के अधिकारी और राजस्थान राजस्व मण्डल क्रमवार दिए गए हैं।

इस विषय का इंटरैक्टिव माइंड मैप — संभाग व जिला प्रशासन, 2 चॉक-बोर्ड चित्र, 11 नक्शे, 1 चार्ट, 23 फ्लैशकार्ड और 12 अभ्यास-प्रश्न के साथ। यहाँ हर खंड के चुने हुए बिंदु हैं; पूरी तालिकाएँ, शेष तथ्य और रटने की ट्रिक माइंड मैप में हैं।
माइंड मैप खोलें ➜

1. एक नज़र में

राज्य की नीतियाँ जयपुर के सचिवालय में बनती हैं, पर उन्हें ज़मीन तक पहुँचाने का काम क्षेत्रीय प्रशासन करता है। इसकी सबसे ऊपरी कड़ी संभाग है, फिर जिला, फिर उपखण्ड, तहसील, उप तहसील और सबसे नीचे पटवार सर्किल (गाँव)।

  • संभाग आज ➜ 7
  • जिले आज ➜ 41
  • संभाग का मुखिया ➜ संभागीय आयुक्त (IAS)

… शेष 3 बिंदु — पूरी सूची माइंड मैप में देखें

2. प्रशासन की इकाइयाँ

इतने बड़े देश का शासन एक जगह से नहीं चल सकता, इसलिए उसे सीढ़ीनुमा इकाइयों में बाँटा गया है — हर इकाई अपने से ऊपर वाली के प्रति जवाबदेह।

प्रशासनिक विभाजन

  1. देश
  2. प्रांत (राज्य)
  3. जिला
  4. तहसील

… शेष 3 बिंदु — पूरी सूची माइंड मैप में देखें

ध्यान दें: राजस्व की सीढ़ी (संभाग → जिला → उपखण्ड → तहसील → उप तहसील → पटवार सर्किल) और पंचायती राज की सीढ़ी (जिला परिषद → पंचायत समिति → ग्राम पंचायत) अलग-अलग हैं; जिला दोनों में साझा है।

3. जिला प्रशासन का ढाँचा

याद रखें: जेल, पुलिस और राजस्व — ये तीनों धाराएँ अतिरिक्त जिला कलेक्टर (प्रशासन) के नीचे दिखाई जाती हैं; विकास के कामों के लिए अलग अतिरिक्त जिला कलेक्टर (विकास) होता है।

4. संभागीय व्यवस्था

संभाग कई जिलों को जोड़ने वाली ऊपरी प्रशासनिक इकाई है। आज राजस्थान में 7 संभाग और 41 जिले हैं — यह स्थिति 29 दिसम्बर 2024 की अधिसूचना से बनी।

5. संभाग — अर्थ

संभाग को बीच की कड़ी समझिए — एक तरफ़ यह अपने अधीन कई जिलों का कामकाज देखता है, दूसरी तरफ़ उन जिलों की बात राज्य सचिवालय तक पहुँचाता है।

  • कई जिलों को मिलाकर बनी प्रशासनिक इकाई।
  • नीचे जिलों पर नियंत्रण, ऊपर सचिवालय से तालमेल।
  • मुखिया: संभागीय आयुक्त।

जुड़ाव

  1. राज्य सचिवालय
  2. संभाग
  3. जिले

6. संभागीय व्यवस्था का सफ़र

काल / क्रमघटनाविवरण
30 मार्च 1949शुरुआतमुख्यमंत्री हीरालाल शास्त्री के समय 5 संभाग बने — जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, बीकानेर, कोटा।
1 नवम्बर 1956अजमेर संभागअजमेर राजस्थान में जुड़ा और जयपुर संभाग की जगह अजमेर संभाग बना — संख्या 5 ही रही।
24 अप्रैल 1962बंदमोहनलाल सुखाड़िया ने संभागीय व्यवस्था समाप्त कर दी।
26 जनवरी 1987वापसीहरिदेव जोशी ने व्यवस्था फिर लागू की; जयपुर फिर संभाग बना — कुल 6।

… शेष 3 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें

ट्रिक: शास्त्री ने शुरू किया, सुखाड़िया ने समाप्त, जोशी ने जोड़ा — 1949, 1962, 1987।

7. आज के 7 संभाग

दिसम्बर 2024 (29 तारीख़) की अधिसूचना से राज्य 7 संभागों में बँटा है: अजमेर, उदयपुर, कोटा, जयपुर, जोधपुर, बीकानेर, भरतपुर। हर संभाग का मुख्यालय उसी नाम के शहर में है।

संभागजिलेसंख्या
जयपुरजयपुर, दौसा, अलवर, सीकर, झुंझुनूँ, खैरथल-तिजारा, कोटपूतली-बहरोड़7
जोधपुरजोधपुर, फलौदी, जैसलमेर, बाड़मेर, बालोतरा, पाली, जालौर, सिरोही8
अजमेरअजमेर, ब्यावर, टोंक, नागौर, भीलवाड़ा, डीडवाना-कुचामन6
उदयपुरउदयपुर, सलूम्बर, राजसमंद, चित्तौड़गढ़, बाँसवाड़ा, डूँगरपुर, प्रतापगढ़7

जयपुर संभाग

  • जिले (7): जयपुर, दौसा, अलवर, सीकर, झुंझुनूँ, खैरथल-तिजारा, कोटपूतली-बहरोड़।
  • सीकर और झुंझुनूँ 2023–24 में थोड़े समय के लिए नए सीकर संभाग में गए थे।
  • खैरथल-तिजारा और कोटपूतली-बहरोड़ 2023 में बने और आज भी क़ायम हैं।

जोधपुर संभाग

  • जिले (8): जोधपुर, फलौदी, जैसलमेर, बाड़मेर, बालोतरा, पाली, जालौर, सिरोही।
  • जिलों की संख्या में सबसे बड़ा (8)।
  • पाली, जालौर, सिरोही 2023–24 में नए पाली संभाग में रहे, फिर लौट आए।

अजमेर संभाग

  • जिले (6): अजमेर, ब्यावर, टोंक, नागौर, भीलवाड़ा, डीडवाना-कुचामन।
  • ब्यावर और डीडवाना-कुचामन 2023 में बने नए जिले हैं।
  • राजस्थान राजस्व मण्डल का मुख्यालय अजमेर में है।

उदयपुर संभाग

  • जिले (7): उदयपुर, सलूम्बर, राजसमंद, चित्तौड़गढ़, बाँसवाड़ा, डूँगरपुर, प्रतापगढ़।
  • बाँसवाड़ा, डूँगरपुर, प्रतापगढ़ 2023–24 में नए बाँसवाड़ा संभाग में रहे, फिर लौट आए।
  • सलूम्बर 2023 में बना नया जिला है।

कोटा संभाग

  • जिले (4): कोटा, बूँदी, बारां, झालावाड़।
  • 1949 के पहले 5 संभागों में से एक।
  • जिले सबसे कम (4) ➜ बीकानेर के बराबर।

बीकानेर संभाग

  • जिले (4): बीकानेर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, चूरू।
  • 1949 के पहले 5 संभागों में से एक।
  • चूरू 2023–24 में सीकर संभाग में चला गया था, फिर लौटा।

भरतपुर संभाग

  • जिले (5): भरतपुर, धौलपुर, करौली, डीग, सवाई माधोपुर।
  • डीग 2023 में भरतपुर से अलग होकर बना नया जिला है।
  • बाकी जिले: भरतपुर, धौलपुर, करौली, सवाई माधोपुर।

8. निरस्त 3 संभाग

7 अगस्त 2023 को राज्य में तीन नए संभाग जुड़े और संख्या 10 हो गई। लगभग डेढ़ साल बाद, 29 दिसम्बर 2024 की अधिसूचना से ये तीनों हटा दिए गए और उनके जिले पुराने संभागों में लौट गए।

निरस्त संभागबनायाहटाया
पालीअशोक गहलोत सरकार, 7 अगस्त 2023भजनलाल सरकार, 29 दिसम्बर 2024
सीकरअशोक गहलोत सरकार, 7 अगस्त 2023भजनलाल सरकार, 29 दिसम्बर 2024
बाँसवाड़ाअशोक गहलोत सरकार, 7 अगस्त 2023भजनलाल सरकार, 29 दिसम्बर 2024

ट्रिक: तीनों के नाम का पहला अक्षर: पा-सी-बाँ — “पास बाँध लो”।

9. संभागीय आयुक्त

  • पद बना ➜ 1829
  • किसने बनाया ➜ लॉर्ड विलियम बैंटिक
  • सेवा ➜ IAS

10. पद और नियुक्ति

अंग्रेज़ी शासन में जिलों के कलेक्टरों पर नज़र रखने के लिए एक ऊपरी अधिकारी की ज़रूरत पड़ी। इसीलिए बंगाल के गवर्नर जनरल लॉर्ड विलियम बैंटिक ने 1829 में संभागीय आयुक्त (Divisional Commissioner) का पद बनाया।

  • संभाग का प्रशासनिक प्रमुख।
  • नियुक्ति राज्य सरकार करती है; कार्यकाल निश्चित नहीं।
  • भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) का अधिकारी।

जवाबदेही की कड़ी

  1. जिला कलेक्टर
  2. संभागीय आयुक्त
  3. मुख्य सचिव

11. संभागीय आयुक्त के काम

  • भू-राजस्व के मुकदमे सुनना।
  • संभाग में चल रही योजनाएँ लागू करवाना।
  • सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) पर नियंत्रण।

12. आयुक्त कार्यालय का संगठन

राजस्व लेखा निरीक्षक के नीचे दफ़्तर का बाकी अमला काम करता है:

13. जिला प्रशासन

जिला वह धुरी है जहाँ राज्य की नीतियाँ सीधे जनता से मिलती हैं। इसका ढाँचा भारत में बहुत पुराना है, पर आज का “कलेक्टर” वाला रूप ईस्ट इंडिया कंपनी के समय गढ़ा गया।

14. “जिला” और कलेक्टर का जन्म

  • अंग्रेज़ी District शब्द लैटिन के Districtus से निकला माना जाता है — अर्थ: न्यायिक प्रशासन (का क्षेत्र)।
  • आधुनिक दौर में “जिला” शब्द ईस्ट इंडिया कंपनी लाई — कलकत्ता की दीवानी के सिलसिले में।
  • संविधान में “जिला” शब्द अनुच्छेद 233 में आता है — जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति के प्रसंग में।
काल / क्रमघटनाविवरण
1772पद बनागवर्नर जनरल वारेन हेस्टिंग्स के समय भारत में पहली बार कलेक्टर का पद।
1773हटाएक ही साल बाद पद समाप्त।
1781लौटापद दोबारा बनाया गया।

15. जिले के पुराने नाम

कालजिले के लिए शब्दप्रमुख का नाम
वैदिक कालविशविशपति
मौर्य कालजनपदराजुका
गुप्त कालविषयविषयपति
खिज्र खाँ (सैयद वंश)शिक—

16. विशेषताएँ और लक्ष्य

पहचान

  • स्थानीय प्रशासन और राज्य प्रशासन को जोड़ने वाली अहम कड़ी।
  • मुखिया जिला कलेक्टर — जिले के सभी विभागों का मुख्य नियंत्रक और समन्वयक।
  • इसके अधीन राजस्व, कानून-व्यवस्था और विकास का काम करने वाली कई इकाइयाँ।

भूमिका, लक्ष्य, उद्देश्य

  1. जिले की जनता का अधिक से अधिक कल्याण।
  2. सरकार के लिए भू-राजस्व इकट्ठा करना।
  3. सरकार के कानून और आदेश अपने इलाक़े में लागू करना।

17. जिला कलेक्टर

कलेक्टर एक ही व्यक्ति है, पर जिले में वह चार अलग “टोपियाँ” पहनता है — मजिस्ट्रेट, राजस्व अधिकारी (जिलाधीश), विकास अधिकारी और प्रशासनिक अधिकारी।

18. कलेक्टर — पहचान

  • जिले का सर्वोच्च अधिकारी — मुख्य कार्यकारी, प्रशासनिक और राजस्व अधिकारी, तीनों।
  • संभागीय आयुक्त के निर्देशन में काम; सेवा IAS।
  • जिले के पुलिस प्रशासन का भी सर्वोच्च नियंत्रक।
उपमाकिसके लिए
जिले के प्रशासन के आँख, कान और हाथजिला कलेक्टर
जिले में लघु राज्य सरकारजिला कलेक्टर
संस्थागत करिश्मा (रजनी कोठारी)जिला कलेक्टर

19. 1. जिला मजिस्ट्रेट

इस भूमिका का केंद्र है लोगों की सुरक्षा — कानून-व्यवस्था बनाए रखना, अपराध पर लगाम और न्याय करना।

  • पुलिस प्रशासन पर नियंत्रण; जिला पुलिस अधीक्षक (SP) कलेक्टर के अधीन।
  • पुलिस और जेलों का निरीक्षण।
  • अधीनस्थ न्यायालयों का निरीक्षण।

20. 2. कलेक्टर / जिलाधीश

  • भूमि का मूल्यांकन और अधिग्रहण।
  • भू-राजस्व की वसूली, भू-अभिलेखों की देखभाल, भू-सुधार और जोतों की चकबंदी (एकीकरण)।
  • कृषि ऋण बाँटना; बकाया सरकारी देय और सिंचाई शुल्क वसूलना।

21. 3. विकास अधिकारी

  • जिले का मुख्य जन सम्पर्क अधिकारी।
  • सरकारी अधिकारियों के कामकाज का निरीक्षण और उनके प्रशिक्षण का इंतज़ाम।
  • लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण की नीति को असरदार बनाना।

22. 4. प्रशासनिक अधिकारी

  • जिला निर्वाचन अधिकारी ➜ जिले के हर तरह के चुनाव करवाना, उन पर नियंत्रण और निरीक्षण।
  • जनगणना का मुख्य अधिकारी।
  • आपदा निवारण अधिकारी।

जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण

आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 के तहत राज्य सरकार ने प्रत्येक जिले के लिए जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण गठित किया है, जिसकी अध्यक्षता जिला कलेक्टर करता है।

23. उपखण्ड से गाँव तक

इकाईअधिकारीकिसके निर्देशन मेंख़ास बात
उपखण्डSDO / SDMजिला कलेक्टरप्रथम श्रेणी कार्यपालक मजिस्ट्रेट; प्रायः RAS
तहसीलतहसीलदारउपखण्ड अधिकारीद्वितीय श्रेणी कार्यपालक मजिस्ट्रेट; नियुक्ति राजस्व मण्डल
उप तहसीलनायब तहसीलदारतहसीलदारनियुक्ति राजस्व मण्डल

24. उपखण्ड अधिकारी (SDO/SDM)

  • हर जिला कई उपखण्डों में बँटा है; इनका मुखिया SDO / SDM कहलाता है।
  • एक साथ दो हैसियत ➜ उपखण्ड में भू-राजस्व का मुख्य अधिकारी और प्रथम श्रेणी कार्यपालक मजिस्ट्रेट।
  • जिला कलेक्टर के निर्देशन में; सामान्यतः राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS) से।
भूमिकाकाम
उपखण्ड मजिस्ट्रेट (दण्डनायक)कानून और शांति बनाए रखना · थानों-चौकियों का निरीक्षण · साल भर के अपराधों की रिपोर्ट कलेक्टर को सौंपना
भू-राजस्व अधिकारीसरकारी ज़मीन पर अतिक्रमण रोकना · भू-राजस्व पर निर्देश · मातहतों पर नियंत्रण-निरीक्षण · भू-अभिलेख और गिरदावरी रिपोर्ट तैयार करवाना
भू-न्यायिक अधिकारीभूमि, सीमा, भू-अभिलेख, भू-राजस्व संपत्ति और चारागाह के विवाद निपटवाना

25. तहसीलदार

  • उपखण्ड तहसीलों में बँटा है।
  • सेवा: राजस्थान तहसील सेवा; पद तक पहुँच नायब तहसीलदार से पदोन्नति द्वारा।
  • नियुक्ति राजस्व मण्डल करता है; काम उपखण्ड अधिकारी के निर्देशन में।

तहसीलदार के काम

  • भू-राजस्व वसूलना।
  • तहसील की ज़मीनों के अभिलेख — उनका निरूपण, सर्वे और मूल्यांकन।
  • काश्तकारी, चारागाह भूमि, सीमा विवाद और सरकारी ज़मीन पर अतिक्रमण के मामलों की सुनवाई।
  • राजस्व वसूली कानून तोड़ने वालों को दण्ड।

26. उप तहसील व कानूनगो

उप तहसील

  • तहसील उप तहसीलों में बँटी है — यह राजस्व प्रशासन की इकाई है।
  • प्रमुख अधिकारी नायब तहसीलदार; नियुक्ति राजस्व मण्डल से।
  • तहसीलदार के निर्देशन में काम।

कानूनगो / गिरदावर

  • नायब तहसीलदार के निर्देशन में काम।
  • पटवार सर्किल में राजस्व का मुखिया।
  • नायब तहसीलदार और पटवारी के बीच की कड़ी।

ऊपर से नीचे

  1. तहसीलदार
  2. नायब तहसीलदार
  3. कानूनगो / गिरदावर

27. पटवारी

  • ग्राम स्तर का प्रमुख राजस्व अधिकारी।
  • नियुक्ति राजस्व मण्डल द्वारा।
  • कानूनगो के अधीन काम।

पटवारी के मुख्य काम

  • भू-राजस्व इकट्ठा करना।
  • गिरदावरी रिपोर्ट बनाना।
  • जन्म-मृत्यु का हिसाब रखना।

28. ग्राम विकास अधिकारी (VDO)

  • ग्राम पंचायत के सचिव की कुर्सी पर ग्राम विकास अधिकारी बैठता है।
  • आधार: राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994, जो प्रत्येक पंचायत में एक सचिव अनिवार्य करता है।

VDO के प्रमुख काम

  • पंचायत की बैठकों के नोटिस, एजेंडा और उनके फ़ैसलों की अनुपालना।
  • कर और फ़ीस से जुड़ी कार्यवाही।
  • बजट और लेखा का काम।

29. राजस्थान राजस्व मण्डल

  • मुख्यालय ➜ अजमेर
  • स्थापना ➜ 1 नवम्बर 1949
  • नियुक्ति करता है ➜ तहसीलदार, नायब तहसीलदार, पटवारी

राजस्व से जुड़े मुकदमों पर सबसे ऊँचे स्तर पर फ़ैसला देना इसका मुख्य काम है — वह भी बिना डर और बिना पक्षपात के।

30. रैपिड फायर तथ्य

  • आज के संभाग व जिले ➜ 7 संभाग, 41 जिले
  • सबसे ज़्यादा जिलों वाला संभाग ➜ जोधपुर (8)
  • सबसे कम जिलों वाले संभाग ➜ कोटा और बीकानेर (4-4)
  • संभागीय व्यवस्था का क्रम ➜ शुरू 1949 (शास्त्री), बंद 1962 (सुखाड़िया), वापसी 1987 (जोशी)
  • निरस्त तीन संभाग ➜ पाली, सीकर, बाँसवाड़ा — 29 दिसम्बर 2024 की अधिसूचना से हटे
  • संभागीय आयुक्त का पद ➜ 1829, लॉर्ड विलियम बैंटिक ने बनाया
  • भारत में पहली बार कलेक्टर का पद ➜ 1772, वारेन हेस्टिंग्स के समय
  • राजस्थान राजस्व मण्डल ➜ मुख्यालय अजमेर, स्थापना 1 नवम्बर 1949
  • कलेक्टर जिले में चार भूमिकाओं में दिखता है — मजिस्ट्रेट, जिलाधीश, विकास अधिकारी और प्रशासनिक अधिकारी।

अगले भाग में स्थानीय स्वशासन की अवधारणा, 2 अक्टूबर 1959 को नागौर में पंचायती राज की शुरुआत, प्रमुख समितियाँ और 73वें संशोधन की शुरुआती बातें।

पिछला भाग: राज्य सचिवालय एवं मुख्य सचिव: मुख्य सचिव के कार्य एवं राज्य सचिवालय

अगला भाग: पंचायती राज: स्थानीय स्वशासन व इतिहास एवं प्रमुख समितियाँ

इन्हें भी पढ़ें: पंचायती राज · राज्य सचिवालय एवं मुख्य सचिव

पूरी श्रृंखला: राजस्थान की राजव्यवस्था — सभी अध्याय · राजस्थान जी.के. नोट्स — सभी विषय

इस अध्याय की पूरी तैयारी चाहिए? ऊपर दिए नोट्स हर खंड का चुना हुआ हिस्सा हैं। पूरी तालिकाएँ, बाक़ी बिंदु, याद रखने की ट्रिक, नक्शे-चित्र और अभ्यास-प्रश्न संभाग व जिला प्रशासन के माइंड मैप में हैं। राजस्थान जी.के. के सभी विषय एक ही पास में उपलब्ध हैं।
इस विषय का माइंड मैप ➜Complete Rajasthan GK पास देखें

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