राजस्थान विधानसभा की प्रक्रिया एवं नियम: विधानसभा की समितियाँ – Rajasthan Polity Chapter 10

विधानसभा की 22 स्थायी समितियाँ — वित्तीय, जाँच, संवीक्षा व अन्य समितियों का गठन और नियम, PYQ सहित।

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In this chapter (9 sections)
  1. विधानसभा की समितियाँ
  2. तदर्थ और स्थायी
  3. वित्तीय समितियाँ (4)
  4. जाँच करने वाली समितियाँ (4)
  5. संवीक्षा, कार्य व सुविधा समितियाँ
  6. अन्य समितियाँ
  7. समितियों के सामान्य नियम
  8. समितियाँ 2024-25 (सभापति)
  9. रैपिड फायर तथ्य

सदन का बारीक काम समितियाँ सँभालती हैं, इसीलिए उन्हें «लघु विधानमंडल» कहा जाता है। यह भाग तदर्थ और स्थायी समितियों के फ़र्क़ से शुरू होकर चार वित्तीय और चार जाँच करने वाली समितियों तक जाता है। आगे संवीक्षा, कार्य व सुविधा समितियाँ, अन्य समितियाँ, समितियों के सामान्य नियम और 2024-25 के सभापति दिए हैं। जिन तथ्यों पर पहले की परीक्षाओं में प्रश्न पूछा जा चुका है, उनके पास परीक्षा का नाम दर्ज है।

इस विषय का इंटरैक्टिव माइंड मैप — राजस्थान विधानसभा की प्रक्रिया एवं नियम, 1 चॉक-बोर्ड चित्र, 27 फ्लैशकार्ड और 12 अभ्यास-प्रश्न के साथ। यहाँ हर खंड के चुने हुए बिंदु हैं; पूरी तालिकाएँ, शेष तथ्य और रटने की ट्रिक माइंड मैप में हैं।
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1. विधानसभा की समितियाँ

पूरा सदन हर विभाग का हिसाब बारीकी से नहीं देख सकता, इसलिए यह काम समितियों में बँटा है — इन्हें “लघु विधानमंडल” समझें। राजस्थान विधानसभा में ऐसी 22 स्थायी समितियाँ हैं, जिनमें 4 वित्तीय हैं।

ट्रिक: 4 + 4 + 2 + 2 + 2 + 8 = 22 — “चार-चार, दो-दो-दो, आठ”।

2. तदर्थ और स्थायी

तदर्थ समितियाँस्थायी समितियाँ
कब बनतीकिसी एक काम के लिएसभी विधानमंडलों में नियमित रूप से
उदाहरणकिसी विधेयक की बारीक जाँच वाली प्रवर समिति; किसी प्रकरण पर सदन की जाँच समितिलोक लेखा, प्राक्कलन, याचिका, विशेषाधिकार…
राजस्थान में—22 (इनमें 4 वित्तीय)

3. वित्तीय समितियाँ (4)

समितिगठनसदस्य (अधिकतम)मुख्य काम
लोक/जन लेखामार्च 195315 · कार्यकाल 1 वर्षविनियोग लेखे, वार्षिक वित्त लेखे, उन पर CAG का प्रतिवेदन; अनुदान से अधिक ख़र्च के मामले
प्राक्कलन “क”मार्च 1953 (1981 से अलग)15 · कार्यकाल 1 वर्ष17 विभागों के अनुमानों की जाँच
प्राक्कलन “ख”मार्च 1953 (1981 से अलग)1516 विभागों के अनुमानों की जाँच

लोक लेखा समिति (PAC)

  • सभापति विपक्ष का सदस्य होता है।
  • सदन के दिए अनुदान का पैसा सचमुच उसी काम पर लगा या नहीं — यह विनियोग लेखों से परखती है; राज्य के वार्षिक वित्त लेखे और सदन के सामने रखे दूसरे लेखे भी देख सकती है।
  • किसी सेवा पर सदन की दी राशि से ज़्यादा ख़र्च हुआ हो, तो उसकी जाँच भी यही करती है।

प्राक्कलन समितियाँ “क” और “ख”

  • 1 सितम्बर 1981 को एक प्राक्कलन समिति को तोड़कर “क” और “ख” दो समितियाँ बनाई गईं।
  • “क” के 17 विभागों में — उद्योग एवं खनन, सार्वजनिक निर्माण, शिक्षा, विधि एवं न्याय, आबकारी एवं कर, वन, ऊर्जा आदि।
  • “ख” के 16 विभागों में — राजस्व, सहकारिता, पशुपालन, सिंचाई, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, जन-स्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी आदि।

ट्रिक: “क” = कारखाने-खदान, सड़क-भवन, कक्षा (शिक्षा), कचहरी (न्याय), कर, कानन (वन) — 17। “ख” = खेत-खलिहान: राजस्व, सहकारिता, पशु, सिंचाई, खाद्य, जल — 16।

4. जाँच करने वाली समितियाँ (4)

समितिगठनसदस्य (अधिकतम)काम
प्रश्न एवं संदर्भअप्रैल 199115 (सभापति सहित) · 1 वर्षजिन प्रश्नों का उत्तर समय पर न आए या संतोषजनक न हो, उनकी जाँच
याचिका195215 · 1 वर्षजनता की शिकायतों वाली याचिकाओं की जाँच
सदाचारअप्रैल 20159सदस्यों के अनैतिक आचरण की जाँच

प्रश्न एवं संदर्भ समिति

तारांकित, अतारांकित, अल्पसूचना प्रश्न, ध्यानाकर्षण या नियम 295 के तहत दिए प्रश्न का जवाब पर्याप्त समय देने पर भी सरकार से न आए, या आया जवाब अध्यक्ष को ठीक न लगे — तब अध्यक्ष वह मामला इस समिति को भेज सकता है। समिति जाँचकर अपनी रिपोर्ट देती है।

याचिका समिति

आम लोग अपनी शिकायतें (अभाव-अभियोग) सदस्यों के ज़रिए सदन या अध्यक्ष तक याचिका के रूप में भेजते हैं; उन याचिकाओं की जाँच यह समिति करती है।

सदाचार समिति

  • हर वित्तीय वर्ष में अध्यक्ष इसका गठन करता है।
  • उपाध्यक्ष इसका पदेन सभापति होता है।
  • अध्यक्ष या सदन के भेजे मामले में, या ख़ुद संज्ञान लेकर, किसी सदस्य के अनैतिक व्यवहार की जाँच कर सकती है।

याद रखें: सदाचार समिति के तीन “अलग” तथ्य — सबसे नई (2015), सबसे छोटी (9 सदस्य), सभापति उपाध्यक्ष।

5. संवीक्षा, कार्य व सुविधा समितियाँ

समितिवर्गगठनसदस्य (अधिकतम)
सरकारी आश्वासनसंवीक्षादिसम्बर 195515
अधीनस्थ विधानसंवीक्षामई 198915
कार्य सलाहकारसभा का कार्य195215 (सभापति सहित)

… शेष 3 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें

  • सरकारी आश्वासन समिति ➜ मंत्री सदन में जो आश्वासन, वचन, अभिवचन देते हैं, वे पूरे हुए या नहीं, यह देखती है।
  • अधीनस्थ विधान समिति ➜ संविधान या विधानसभा से मिली नियम-विनियम-उपनियम बनाने की शक्ति का प्रयोग सरकार सही उद्देश्य के भीतर कर रही है या नहीं, यह जाँचती है; नियमों के नियम 241 में गिनाए विषय भी देखती है।
  • कार्य सलाहकार समिति ➜ विधेयकों के अलग-अलग चरणों और सरकारी या दूसरे कामों पर बहस का समय कितना-कितना हो, इसकी सिफ़ारिश करती है। अध्यक्ष पदेन सभापति।

… शेष 2 बिंदु — पूरी सूची माइंड मैप में देखें

याद रखें: जिन समितियों का पदेन सभापति अध्यक्ष है — कार्य सलाहकार, नियम, सामान्य प्रयोजन। (कार्य सलाहकार को “कार्यमंत्रणा समिति” भी कहते हैं।)

6. अन्य समितियाँ

समितिगठनसदस्य (अधिकतम, सभापति सहित)
अनुसूचित जाति कल्याणमई 197215
अनुसूचित जनजाति कल्याणअप्रैल 197415
पिछड़ा वर्ग कल्याणमई 200115
अल्पसंख्यकों के कल्याणअप्रैल 201215

… शेष 4 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें

  • 1974 से पहले SC और ST के लिए एक ही “अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण समिति” थी।
  • इन सबके सदस्य अध्यक्ष मनोनीत करता है।

सामान्य प्रयोजन समिति

  • इसमें बैठते हैं ➜ अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सभापति-तालिका के सदस्य, सभी स्थायी समितियों के सभापति (परामर्शदात्री समितियों को छोड़कर), मान्यता प्राप्त दलों व ग्रुपों के नेता, और अध्यक्ष के मनोनीत अन्य सदस्य।
  • अध्यक्ष इसका पदेन सभापति; अध्यक्ष जो सदन-संबंधी विषय भेजे, उन पर यह सलाह देती है।

संसदीय परामर्शदात्री समितियाँ

  • अध्यक्ष सदन के नेता से सलाह करके किसी विभाग या विभाग-समूह के लिए जितनी उचित समझे, उतनी बनाता है; सदस्य केवल विधायक।
  • सभापति कोई मंत्री या स्वतंत्र प्रभार वाला राज्यमंत्री — अध्यक्ष मनोनीत करता है।
  • कार्यकाल विधानसभा के पूरे कार्यकाल तक; अध्यक्ष चाहे तो बीच में पुनर्गठन कर सकता है।

विधेयकों पर प्रवर समितियाँ

  • जब सदन यह प्रस्ताव मान ले कि विधेयक प्रवर समिति को भेजा जाए, तभी सदन उसके सदस्य नियुक्त करता है।
  • जो मंत्री उस समिति का सदस्य नहीं, वह भी सभापति की अनुमति से समिति को संबोधित कर सकता है।
  • समिति का हर प्रतिवेदन सचिव छपवाता है, हर सदस्य को प्रति मिलती है; प्रतिवेदन और समिति द्वारा सुधरा विधेयक राजपत्र में छपता है।

7. समितियों के सामान्य नियम

सदस्य और सभापति

  • सदस्य या तो सदन नियुक्त करता है या अध्यक्ष मनोनीत करता है।
  • सदस्य अध्यक्ष को लिखकर समिति से इस्तीफ़ा दे सकता है।
  • सभापति समिति के सदस्यों में से अध्यक्ष चुनता है; पर उपाध्यक्ष उस समिति में हो तो सभापति वही बनता है।

बैठक और फ़ैसले

  • गणपूर्ति (कोरम) ➜ कुल सदस्यों का एक-तिहाई (1/3)।
  • कोरम न हो तो सभापति बैठक को कोरम पूरा होने तक रोक देता है या किसी आगे के दिन तक स्थगित कर देता है।
  • एक कैलेण्डर माह में किसी समिति की अधिकतम 15 बैठकें।

शक्तियाँ और प्रतिवेदन

  • समिति शासन सचिवों, विभागीय प्रतिनिधियों और दूसरों को गवाही के लिए बुला सकती है और काग़ज़-अभिलेख मँगा सकती है।
  • प्रतिवेदन सदन में सभापति रखता है; वह न हो तो समिति का कोई सदस्य।
  • रिपोर्ट बन चुकी हो और सदन उस समय सत्र में न हो — तब रिपोर्ट अध्यक्ष को दी जा सकती है।
  • कोरम ➜ 1/3
  • माह में बैठकें ➜ अधिकतम 15
  • लगातार अनुपस्थिति ➜ 2+ बैठक → हटाने का प्रस्ताव

8. समितियाँ 2024-25 (सभापति)

समितिपहला गठनसदस्यसभापति (2024-25)
जन लेखामार्च 195315टीकाराम जूली
राजकीय उपक्रमअप्रैल 196815कालीचरण सर्राफ
प्राक्कलन “क”मार्च 1953 (1981)15अर्जुनलाल जीनगर
प्राक्कलन “ख”मार्च 1953 (1981)15श्रीचंद कृपलानी
  • वासुदेव देवनानी (विधानसभा अध्यक्ष) तीन समितियों के पदेन सभापति — कार्य सलाहकार, नियम, सामान्य प्रयोजन। [परीक्षा: वरिष्ठ अध्यापक ग्रुप-D, 2023 — राजस्थान विधानसभा की कार्यमंत्रणा (कार्य सलाहकार) समिति का सभापति कौन होता है? ➜ विधानसभा अध्यक्ष]
  • जन लेखा समिति के सभापति टीकाराम जूली — विपक्ष के नेता; यह परंपरा कि PAC विपक्ष के पास रहे।

9. रैपिड फायर तथ्य

  • स्थायी समितियाँ ➜ 22, जिनमें 4 वित्तीय हैं
  • लोक/जन लेखा समिति ➜ गठन मार्च 1953; सभापति विपक्ष का सदस्य
  • प्राक्कलन समितियाँ ➜ 1 सितम्बर 1981 को «क» (17 विभाग) और «ख» (16 विभाग) में बँटीं
  • सदाचार समिति ➜ अप्रैल 2015 में बनी, 9 सदस्य, उपाध्यक्ष पदेन सभापति
  • प्रश्न एवं संदर्भ समिति ➜ अप्रैल 1991 में गठित
  • अध्यक्ष पदेन सभापति ➜ कार्य सलाहकार, नियम और सामान्य प्रयोजन समिति (कार्य सलाहकार का सभापति — वरिष्ठ अध्यापक ग्रुप-D, 2023 में पूछा गया)
  • समितियों का कोरम ➜ कुल सदस्यों का 1/3; महीने में अधिकतम 15 बैठकें
  • अनुसूचित जाति कल्याण समिति ➜ मई 1972; अनुसूचित जनजाति कल्याण समिति ➜ अप्रैल 1974
  • जन लेखा समिति के सभापति (2024-25) ➜ टीकाराम जूली, विपक्ष के नेता

अगले भाग में राज्य सचिवालय और मुख्य सचिव — मुख्य सचिव का पद, उसके कार्य, सचिवालय की बनावट और मुख्यमंत्री कार्यालय।

पिछला भाग: राजस्थान विधानसभा की प्रक्रिया एवं नियम: विधेयक, संकल्प व प्रस्ताव

अगला भाग: राज्य सचिवालय एवं मुख्य सचिव: मुख्य सचिव के कार्य एवं राज्य सचिवालय

इन्हें भी पढ़ें: राज्य विधानमण्डल · संसद में राजस्थान

पूरी श्रृंखला: राजस्थान की राजव्यवस्था — सभी अध्याय · राजस्थान जी.के. नोट्स — सभी विषय

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