शहरी निकायों की पूरी कहानी दो पड़ावों पर टिकी है — 1864 में राजस्थान की पहली नगरपालिका और 1992 का 74वाँ संशोधन, जिसने इन्हें संवैधानिक दर्जा दिया। इन दोनों के बीच के क्रम को पकड़ लें तो बाक़ी अनुच्छेद आसानी से बैठ जाते हैं। इस भाग में राजस्थान में शुरुआत, संवैधानिक स्थिति व आधार, गठन, संरचना व चुनाव तथा शक्तियाँ, वित्त व योजना क्रम से दिए गए हैं।
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1. एक नज़र में
गाँवों के लिए जैसे पंचायती राज है, वैसे ही शहरों और कस्बों के अपने चुने हुए निकाय हैं — इसी व्यवस्था को नगरीय स्वशासन (शहरी स्थानीय शासन) कहते हैं; इसका दूसरा नाम नगरीय शासन भी है।
- पहली नगरपालिका ➜ माउंट आबू (1864)
- एकीकरण के समय नगर निगम ➜ केवल उदयपुर
- स्थानीय निकाय विभाग ➜ 1950
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2. राजस्थान में शुरुआत
| काल / क्रम | घटना | विवरण |
|---|---|---|
| 1864 | माउंट आबू | राजस्थान की सबसे पहली नगरपालिका। |
| 1866 | अजमेर | दूसरी नगरपालिका। |
| 1867 | ब्यावर | तीसरी नगरपालिका। |
| 1869 | जयपुर | राजधानी शहर में नगरपालिका बनी। |
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ट्रिक: क्रम याद करने की ट्रिक — “आ-अ-ब्या-ज”: आबू 1864 → अजमेर 1866 → ब्यावर 1867 → जयपुर 1869।
3. संवैधानिक स्थिति
- शहरी स्थानीय शासन राज्य सूची में है — यानी नगर निकायों पर क़ानून राज्य विधानमण्डल बनाता है।
- इसे प्रांतों का विषय बनाने की व्यवस्था भारत सरकार अधिनियम 1935 से चली आ रही है।
- संविधान (भाग 9क) केवल ढाँचा तय करता है — कितने स्तर, आरक्षण, अवधि, चुनाव, योजना; ब्योरा राज्य का अधिनियम भरता है।
याद रखें: राजस्थान में सारे नगर निकाय आज राजस्थान नगरपालिका अधिनियम 2009 से चलते हैं — छावनी क्षेत्र इसके बाहर हैं।
4. संवैधानिक आधार
संवैधानिक दर्जे तक का सफ़र
- 1989: 65वाँ संशोधन विधेयक (राजीव गांधी) — राज्यसभा में अटका
- 1992: 74वाँ संशोधन (पी.वी. नरसिम्हा राव)
- 1 जून 1993: पूरे देश में लागू
- नया भाग ➜ भाग 9क
- अनुच्छेद ➜ 243P से 243ZG (18)
- नई अनुसूची ➜ 12वीं (18 विषय)
5. 65वाँ व 74वाँ संशोधन
| 65वाँ संशोधन विधेयक | 74वाँ संविधान संशोधन | |
|---|---|---|
| वर्ष | 1989 | 1992 |
| सरकार | प्रधानमंत्री राजीव गांधी | प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव |
| नतीजा | राज्यसभा में पास नहीं हो सका | नगर निकायों को संवैधानिक दर्जा मिला |
- 74वें संशोधन ने संविधान में भाग 9क जोड़ा — इसमें अनुच्छेद 243P से 243ZG तक, कुल 18 अनुच्छेद हैं।
- साथ में 12वीं अनुसूची जुड़ी, जिसमें नगर निकायों के 18 विषय गिनाए गए हैं।
6. भाग 9क के 18 अनुच्छेद
| अनुच्छेद | विषय |
|---|---|
| 243P (त) | परिभाषाएँ |
| 243Q (थ) | नगरपालिकाओं का गठन |
| 243R (द) | नगरपालिकाओं की संरचना |
| 243S (ध) | वार्ड समितियों आदि का गठन व संरचना |
… शेष 14 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें
ट्रिक: अंग्रेज़ी में P से Z, फिर ZA से ZG = 11 + 7 = 18 अनुच्छेद। हिंदी में “त” से शुरू होकर “य” के बाद “यक … यछ”।
7. 12वीं अनुसूची — 18 विषय
- नगरीय योजना, शहर नियोजन सहित
- भूमि-उपयोग का नियमन और भवन निर्माण
- आर्थिक व सामाजिक विकास की योजना
- सड़कें और पुल
- अग्निशमन सेवाएँ
- घरेलू, औद्योगिक व व्यापारिक उपयोग के लिए जल व्यवस्था
- जन स्वास्थ्य, स्वच्छता, सफ़ाई और ठोस कचरा प्रबन्धन
याद रखें: पहला विषय नगर नियोजन, आख़िरी वधशाला व चमड़ा उद्योग। 11वीं अनुसूची (पंचायत) में 29 विषय, 12वीं (नगर) में 18।
8. गठन, संरचना व चुनाव
| विषय | अनुच्छेद | एक पंक्ति में |
|---|---|---|
| गठन | 243Q | तीन तरह के निकाय; दर्जा राज्यपाल की अधिसूचना से |
| संरचना | 243R | सीटें वार्डों से सीधे चुनाव द्वारा |
| वार्ड समिति | 243S | 3 लाख+ आबादी वाले निकायों में |
| आरक्षण | 243T | SC/ST अनुपात में; महिलाएँ कम से कम 1/3 |
9. परिभाषाएँ व गठन
अनुच्छेद 243P — परिभाषाएँ
यहाँ समिति, ज़िला, महानगर क्षेत्र, नगरपालिका क्षेत्र, जनसंख्या जैसे शब्दों के अर्थ तय किए गए हैं।
- महानगर क्षेत्र = 10 लाख या अधिक आबादी वाला इलाक़ा,
- जो एक या अधिक ज़िलों में फैला हो और दो या अधिक नगरपालिकाओं/पंचायतों/आसपास के क्षेत्रों को जोड़कर बनता हो,
- और जिसे राज्यपाल सार्वजनिक अधिसूचना निकालकर महानगर क्षेत्र घोषित करे।
अनुच्छेद 243Q — तीन तरह के निकाय
| निकाय | किस क्षेत्र के लिए |
|---|---|
| नगर पंचायत (नाम कुछ भी हो) | संक्रमणशील क्षेत्र — जो गाँव से शहर बन रहा है |
| नगरपालिका परिषद् | छोटा (लघुत्तर) नगरीय क्षेत्र |
| नगर निगम | बड़ा (वृहत्तर) नगरीय क्षेत्र |
- अपवाद: जिस क्षेत्र को राज्यपाल ने औद्योगिक नगरी (औद्योगिक बस्ती) घोषित किया हो, वहाँ नगरपालिका नहीं बनाई जा सकती।
- 243Q(2): कोई इलाक़ा पालिका बनेगा, परिषद् या निगम — यह राज्यपाल की अधिसूचना से तय होता है।
10. संरचना व वार्ड समिति
अनुच्छेद 243R — संरचना
हर नगर क्षेत्र को छोटे प्रादेशिक हिस्सों — वार्डों — में बाँटा जाता है; हर वार्ड से जनता सीधे चुनाव से सदस्य चुनती है। निकाय की सारी सीटें इसी तरह भरती हैं।
243R(2)(क) — राज्य क़ानून बनाकर इन्हें भी जोड़ सकता है
| कौन | शर्त | मत का अधिकार |
|---|---|---|
| नगर प्रशासन के विशेष जानकार/अनुभवी | — | नहीं |
| लोकसभा व विधानसभा सदस्य | उनके क्षेत्र में नगर क्षेत्र पूरा या कुछ हिस्सा आता हो | राज्य क़ानून तय करे |
| राज्यसभा व विधान परिषद् सदस्य | उस नगर क्षेत्र की मतदाता सूची में नाम हो | राज्य क़ानून तय करे |
- 243R(2)(ख): नगरपालिका के अध्यक्ष का चुनाव किस तरह हो, यह भी राज्य विधानमण्डल तय करता है।
अनुच्छेद 243S — वार्ड समितियाँ
- 3 लाख या अधिक आबादी वाले नगर निकाय में एक या कई वार्डों को मिलाकर वार्ड समिति बनती है।
- जब समिति में एक ही वार्ड हो, तो उस वार्ड का निर्वाचित सदस्य ही समिति का अध्यक्ष होता है।
11. स्थानों का आरक्षण
| खण्ड | किसके लिए | कितना |
|---|---|---|
| 243T(1) | अनुसूचित जाति व जनजाति | हर निकाय में उनकी जनसंख्या के अनुपात में |
| 243T(2) | SC/ST की महिलाएँ | SC/ST की आरक्षित सीटों में से कम से कम 1/3 |
| 243T(3) | महिलाएँ (कुल) | सीधे चुनाव वाली कुल सीटों में से कम से कम 1/3 |
12. अवधि व निरर्हता
अनुच्छेद 243U — अवधि
- पहले भंग न किया जाए तो निकाय अपनी पहली बैठक की तारीख से 5 वर्ष चलता है।
- भंग होने पर नया चुनाव 6 माह के भीतर कराना ज़रूरी है।
- पर अगर बचा हुआ कार्यकाल 6 माह से कम हो, तो उस बचे समय के लिए चुनाव ज़रूरी नहीं।
अनुच्छेद 243V — सदस्यता के लिए अयोग्यता
- (क) जो व्यक्ति राज्य विधानमण्डल के चुनाव के लिए किसी क़ानून से अयोग्य है, वह नगर निकाय का सदस्य भी नहीं बन सकता और न बना रह सकता है।
- छूट: विधानमण्डल के लिए 25 वर्ष चाहिए, पर नगर निकाय में 21 वर्ष पूरे होना काफ़ी है — 25 से कम होने भर से कोई अयोग्य नहीं होगा।
- (ख) जिसे राज्य विधानमण्डल का बनाया कोई क़ानून अयोग्य ठहराए।
13. चुनाव व अदालत की सीमा
अनुच्छेद 243ZA — निर्वाचन
- मतदाता सूची बनवाना और सारे नगर चुनाव कराना — इनकी देखरेख, निर्देशन और नियंत्रण उसी राज्य निर्वाचन आयोग के पास है जो अनुच्छेद 243K में बना है।
- संविधान की सीमा में रहकर नगर चुनाव से जुड़े बाक़ी सब विषयों पर क़ानून राज्य विधानमण्डल बनाता है।
अनुच्छेद 243ZG — अदालत के दख़ल पर रोक
- 243ZA के तहत बना वह क़ानून जो वार्डों के परिसीमन या वार्डों में सीटों के बँटवारे से जुड़ा है, उसे किसी अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकती।
14. शक्तियाँ, वित्त व योजना
- शक्तियाँ ➜ 243W
- कर व निधि ➜ 243X
- वित्त आयोग ➜ 243Y
15. शक्तियाँ व उत्तरदायित्व
- संविधान की सीमा में, राज्य विधानमण्डल क़ानून बनाकर नगर निकायों को उतनी शक्ति और अधिकार दे सकता है जितने उन्हें स्वायत्त शासन की संस्था की तरह काम करने के लिए चाहिए।
- निकाय आर्थिक विकास और सामाजिक न्याय की योजनाएँ बनाते हैं।
- उन्हें सौंपे जा सकने वाले कामों की सूची 12वीं अनुसूची के 18 विषय हैं।
16. कर, वित्त आयोग व अंकेक्षण
| अनुच्छेद | क्या कहता है |
|---|---|
| 243X — कर व निधियाँ | राज्य क़ानून बनाकर निकायों को कर, शुल्क, पथकर (टोल) और फ़ीस लगाने, वसूलने व ख़र्च करने का अधिकार दे सकता है; साथ ही राज्य की संचित निधि से सहायता-अनुदान का प्रावधान कर सकता है। |
| 243Y — वित्त आयोग | 243I के तहत बना राज्य वित्त आयोग नगर निकायों की वित्तीय स्थिति की समीक्षा भी करेगा। |
| 243Z — अंकेक्षण | निकाय अपने लेखे कैसे रखें और उनकी संपरीक्षा (ऑडिट) कैसे हो, यह राज्य विधानमण्डल क़ानून से तय करता है। |
17. जिला योजना समिति
संविधान — अनुच्छेद 243ZD
- हर राज्य में ज़िला स्तर पर एक जिला योजना समिति बनेगी — काम: पंचायतों व नगर निकायों की योजनाएँ एक साथ जोड़कर पूरे ज़िले की विकास योजना का प्रारूप बनाना।
- समिति की बनावट, सीटें भरने का तरीक़ा और अध्यक्ष के चुनाव की रीति राज्य विधानमण्डल तय करता है।
- शर्त: कुल सदस्यों में से कम से कम 4/5 ऐसे हों जिन्हें ज़िला पंचायत और नगर निकायों के निर्वाचित सदस्य आपस में से, गाँव-शहर की आबादी के अनुपात में चुनें।
राजस्थान की जिला आयोजन समिति
राजस्थान में अलग समिति नहीं बनी — पंचायती राज अधिनियम 1994 (धारा 121) वाली जिला योजना समिति को ही अनुच्छेद 243ZD की समिति मान लिया गया है।
| भाग | संख्या | कौन |
|---|---|---|
| अध्यक्ष | — | जिला प्रमुख (जिला परिषद् का प्रमुख) |
| निर्वाचित | 20 | जिला परिषद् और नगर निकायों के चुने हुए प्रतिनिधियों द्वारा, गाँव-शहर की आबादी के अनुपात में |
| पदेन | 3 | ज़िला कलेक्टर, जिला परिषद् का मुख्य कार्यकारी अधिकारी और अतिरिक्त कार्यकारी अधिकारी |
18. रैपिड फायर तथ्य
- पहली नगरपालिका ➜ माउंट आबू (1864)
- नगरपालिकाओं का क्रम ➜ आबू 1864, अजमेर 1866, ब्यावर 1867, जयपुर 1869
- एकीकरण के समय नगर निगम ➜ केवल उदयपुर
- 74वाँ संशोधन ➜ 1992, प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव; लागू 1 जून 1993
- 65वाँ संशोधन विधेयक ➜ 1989, राजीव गांधी; राज्यसभा में पास नहीं हो सका
- नया भाग व अनुसूची ➜ भाग 9क (243P से 243ZG, कुल 18 अनुच्छेद) और 12वीं अनुसूची (18 विषय)
- वार्ड समिति ➜ 3 लाख या अधिक आबादी वाले निकायों में (243S)
- महिला आरक्षण ➜ सीधे चुनाव वाली कुल सीटों में कम से कम 1/3 (243T(3))
- निकाय की अवधि ➜ 5 वर्ष; भंग होने पर 6 माह में चुनाव
अगले भाग में शक्तियाँ, वित्त व योजना का शेष हिस्सा — महानगर योजना समिति — और राजस्थान नगरपालिका अधिनियम 2009, निकायों की तुलना व नगर निगमों की कहानी।
पिछला भाग: पंचायती राज: तीन स्तर एवं पेसा और अनुसूचित क्षेत्र
अगला भाग: नगरीय स्वशासन: नगरपालिका अधिनियम 2009
इन्हें भी पढ़ें: पंचायती राज · प्रमुख अधिनियम
पूरी श्रृंखला: राजस्थान की राजव्यवस्था — सभी अध्याय · राजस्थान जी.के. नोट्स — सभी विषय
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