नगरीय स्वशासन: नगरपालिका अधिनियम 2009 – Rajasthan Polity Chapter 17

महानगर योजना समिति, राजस्थान नगरपालिका अधिनियम 2009 की धाराएँ और तीनों नगर निकायों की तुलना।

10 min read Updated Notes in Hindi
In this chapter (13 sections)
  1. महानगर योजना समिति
  2. लागू होना व पुराने क़ानून
  3. नगरपालिका अधिनियम 2009
  4. क़ानून व स्थापना
  5. संरचना
  6. चुनाव, अयोग्यता व याचिका
  7. शपथ, त्यागपत्र व हटाना
  8. अध्यक्ष व उपाध्यक्ष
  9. बैठकें व अविश्वास
  10. समितियाँ व अन्य धाराएँ
  11. शहरी स्वशासन व्यवस्था
  12. राजस्थान के नगर निगम
  13. रिवीजन पॉइंटर्स

नगरपालिका अधिनियम 2009 में अंकों की भरमार है — 13 वार्ड, 6-8-12 मनोनीत सदस्य, 3/4 का कोरम — और यही अंक सबसे ज़्यादा उलझाते हैं। संविधान के अनुच्छेद और राजस्थान की धाराओं को अलग-अलग रखकर पढ़ें तो घालमेल नहीं होता। इस भाग में महानगर योजना समिति, लागू होने की बातें, अधिनियम की संरचना, चुनाव, अध्यक्ष, बैठकें व अविश्वास, समितियाँ, शहरी व्यवस्था की तुलना और राजस्थान के नगर निगम आए हैं।

इस विषय का इंटरैक्टिव माइंड मैप — नगरीय स्वशासन, 2 चॉक-बोर्ड चित्र, 2 नक्शे, 3 चार्ट, 30 फ्लैशकार्ड और 12 अभ्यास-प्रश्न के साथ। यहाँ हर खंड के चुने हुए बिंदु हैं; पूरी तालिकाएँ, शेष तथ्य और रटने की ट्रिक माइंड मैप में हैं।
माइंड मैप खोलें ➜

1. महानगर योजना समिति

  • 243ZE(1): हर महानगर क्षेत्र (10 लाख+) में महानगर योजना समिति गठित होगी, जिसका काम वहाँ की विकास योजना का मसौदा बनाना है।
  • 243ZE(3): यही समिति विकास योजना का प्रारूप तैयार करती है; 243ZE(4): उसका अध्यक्ष इसे राज्य सरकार को भेजता है।

243ZE(2) — राज्य विधानमण्डल क़ानून से तय करेगा

  1. (क) समिति की बनावट
  2. (ख) सीटें किस तरह भरें
  3. (ग) केंद्र सरकार, राज्य सरकार और उन संगठनों/संस्थाओं का प्रतिनिधित्व जिन्हें समिति के काम पूरे करने के लिए ज़रूरी समझा जाए

… शेष 2 बिंदु — पूरी सूची माइंड मैप में देखें

  • शर्त: कम से कम 2/3 सदस्य वे हों जिन्हें महानगर क्षेत्र के नगर निकायों के निर्वाचित सदस्य और पंचायतों के अध्यक्ष आपस में से, नगर-पंचायत आबादी के अनुपात में चुनें।
जिला योजना समितिमहानगर योजना समिति
अनुच्छेद243ZD243ZE
क्षेत्रहर ज़िलामहानगर क्षेत्र (10 लाख+)
न्यूनतम निर्वाचित भाग4/52/3

ट्रिक: ज़िला → 4/5 (बड़ा अंश), महानगर → 2/3 — महानगर समिति में केंद्र-राज्य व संस्थाओं के लिए ज़्यादा जगह छोड़ी गई है।

2. लागू होना व पुराने क़ानून

अनुच्छेदप्रावधान
243ZBयह भाग संघ राज्य क्षेत्रों पर भी लागू होता है (अनुच्छेद 239 के अधीन)।
243ZCअनुच्छेद 244(1) के अनुसूचित क्षेत्रों और 244(2) के जनजाति क्षेत्रों पर यह भाग लागू नहीं होता।
243ZF74वें संशोधन के ठीक पहले लागू नगर-क़ानून का जो हिस्सा भाग 9क से मेल न खाए, वह तब तक चलता रहेगा जब तक विधानमण्डल या सक्षम अधिकारी उसे बदल या हटा न दे।

3. नगरपालिका अधिनियम 2009

धाराविषय
3नगरपालिका घोषित करना
5स्थापना (तीन प्रकार)
6संरचना
11निर्वाचन

… शेष 8 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें

4. क़ानून व स्थापना

नगर निकायों के क़ानूनों का क्रम

  1. नगरपालिका अधिनियम 1951
  2. अधिनियम 1959
  3. अधिनियम 1994

… शेष 2 बिंदु — पूरी सूची माइंड मैप में देखें

  • 2009 का अधिनियम छावनी क्षेत्रों को छोड़कर पूरे राजस्थान पर लागू है।
  • धारा 3 — परिसीमन: जो स्थानीय क्षेत्र किसी नगरपालिका की सीमा में नहीं है, उसे राज्य सरकार राजपत्र में अधिसूचना छापकर नगरपालिका घोषित कर सकती है।

धारा 5 — स्थापना और निगमन

क्षेत्रनिकाय
संक्रमणशील क्षेत्रनगरपालिका बोर्ड
लघुत्तर (छोटा) नगरीय क्षेत्रनगर परिषद्
वृहत्तर (बड़ा) नगरीय क्षेत्रनगर निगम

ध्यान दें: संविधान (243Q) में संक्रमणशील क्षेत्र के लिए “नगर पंचायत” शब्द है; राजस्थान का अधिनियम उसे नगरपालिका बोर्ड कहता है।

5. संरचना

  • सारी सीटें वार्डों से सीधे चुनाव द्वारा भरती हैं।
  • वार्डों की संख्या राज्य सरकार अधिसूचना से समय-समय पर तय करती है, पर यह 13 से कम नहीं हो सकती।
सदस्यनगरपालिका बोर्डनगर परिषद्नगर निगममत
विधायक (जिसके क्षेत्र में निकाय पूरा/आंशिक आता हो)हाँहाँहाँहाँ
लोकसभा सांसद (जिसके क्षेत्र में निकाय पूरा/आंशिक आता हो)—हाँहाँहाँ
नगर प्रशासन के जानकार — राज्य सरकार द्वारा मनोनीत6812नहीं
  • मनोनीत सदस्यों को राज्य सरकार कभी भी हटा सकती है।
  • हर निकाय के मनोनीत सदस्यों में एक दिव्यांग व्यक्ति ज़रूर होगा।

ट्रिक: मनोनीत संख्या 6 → 8 → 12 (बोर्ड → परिषद् → निगम)। सांसद केवल परिषद् और निगम में बैठते हैं, बोर्ड में नहीं।

6. चुनाव, अयोग्यता व याचिका

धारा 11 व 22 — चुनाव

  • धारा 11: मतदाता सूची और सारे नगर चुनावों की देखरेख, निर्देशन व नियंत्रण राज्य निर्वाचन आयोग के हाथ में।
  • धारा 22: कोई भी उम्मीदवार एक से ज़्यादा वार्ड से चुनाव नहीं लड़ सकता।
  • एक उम्मीदवार एक वार्ड के लिए अधिकतम 4 नामांकन पत्र भर सकता है।

धारा 24 — सामान्य निरर्हताएँ

बाक़ी योग्यता होने पर भी इन हालात में व्यक्ति सदस्य चुने जाने या बने रहने के योग्य नहीं:

  1. किसी सक्षम अदालत ने अपराध में दोषी ठहराकर 6 माह या अधिक की क़ैद दी हो।
  2. इसी अधिनियम की धारा 245 के तहत किसी अपराध में दोषी हो।
  3. जिस अपराध की सज़ा 5 वर्ष या अधिक क़ैद हो सकती है, उसका आरोप अदालत में उसके विरुद्ध विचाराधीन हो।

चुनाव को चुनौती का रास्ता

  1. उम्मीदवार या मतदाता
  2. धारा 31: 1 माह के भीतर ज़िला न्यायाधीश के पास याचिका
  3. धारा 32: ज़िला न्यायाधीश के आदेश पर उच्च न्यायालय में अपील
  • याचिका उसी ज़िला न्यायाधीश के सामने जाती है जिसके क्षेत्राधिकार में वह नगर क्षेत्र है; अवधि चुनाव की तारीख से एक माह।
  • धारा 34: अपील पर उच्च न्यायालय का फ़ैसला, और उसके अधीन रहते हुए ज़िला न्यायाधीश का आदेश — अंतिम और निर्णायक।

याद रखें: धारा 31 वाला याचिका-प्रावधान राजस्थान नगरपालिका (संशोधन) अधिनियम 2021 से जुड़ा।

7. शपथ, त्यागपत्र व हटाना

धाराविषयनियम
37शपथअध्यक्ष और हर सदस्य पद सँभालने से पहले, राज्य सरकार द्वारा अधिकृत अधिकारी के सामने तय प्रारूप में शपथ या प्रतिज्ञान करता है।
38त्यागपत्रसदस्य कार्यपालक मजिस्ट्रेट से सत्यापित लिखित सूचना अध्यक्ष को देता है; यह 15 दिन पूरे होने पर या अध्यक्ष के स्वीकार करने पर — जो पहले हो — प्रभावी।

धारा 39 — राज्य सरकार इन आधारों पर सदस्य को हटा सकती है

  1. निकाय की अनुमति के बिना लगातार 3 से अधिक साधारण बैठकों से ग़ैरहाज़िर।
  2. धारा 37 (शपथ) का पालन नहीं किया।
  3. कर्तव्य निभाने में अवचार (दुराचरण) का दोषी।

8. अध्यक्ष व उपाध्यक्ष

निकायप्रमुखउप-प्रमुख
नगर निगममहापौरउप-महापौर
नगर परिषद्सभापतिउप-सभापति
नगरपालिका बोर्डअध्यक्षउपाध्यक्ष
  • धारा 43: अध्यक्षों के पद SC, ST, पिछड़े वर्गों और महिलाओं के लिए विहित रीति से आरक्षित।
  • SC/ST/पिछड़े वर्ग का यह आरक्षण संविधान के अनुच्छेद 334 में दी गई अवधि ख़त्म होते ही समाप्त हो जाएगा।
  • धारा 44: अध्यक्ष/उपाध्यक्ष के चुनाव को सिर्फ़ ज़िला न्यायाधीश के सामने चुनाव याचिका से ही चुनौती दी जा सकती है, और किसी तरीक़े से नहीं।

धारा 48 — कर्तव्य

अध्यक्षउपाध्यक्ष
निकाय की नियमित बैठकें बुलानाअध्यक्ष न हो तो बैठकों की अध्यक्षता
वित्तीय और कार्यपालक प्रशासन पर नज़र रखनाअध्यक्ष न हो तो उसकी शक्तियों और कर्तव्यों का पालन
सौंपे गए दूसरे कार्यपालक काम करनाअध्यक्ष समय-समय पर जो शक्तियाँ/कर्तव्य सौंपे, उन्हें निभाना

9. बैठकें व अविश्वास

धारा 51 — बैठकें

  • साधारण बैठक ➜ हर 60 दिन में कम से कम एक
  • साल में ➜ कम से कम 6 बैठकें
  • विशेष बैठक की माँग ➜ 1/3 सदस्य

धारा 53 — अध्यक्ष/उपाध्यक्ष के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव

  • प्रस्ताव विहित रीति से लाया और उस पर विचार किया जाता है।
  • पद सँभालने के 2 वर्ष तक अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया जा सकता।

अविश्वास प्रस्ताव के तीन पड़ाव

  1. लाने के लिए 1/3 सदस्यों के हस्ताक्षर
  2. बैठक का कोरम 3/4
  3. पारित होने को 3/4 बहुमत

10. समितियाँ व अन्य धाराएँ

धारा 54 — वार्ड समिति

  • जिन निकायों की आबादी 3 लाख या अधिक है, वहाँ वार्ड (एक या कई) जोड़कर वार्ड समितियाँ गठित होती हैं।
  • सदस्य: (1) समिति क्षेत्र के वार्ड का निर्वाचित सदस्य; (2) नगर प्रशासन के जानकार, 25 वर्ष से ऊपर के, 5 से कम अन्य सदस्य — जिन्हें निकाय मनोनीत करे।
  • समिति में एक वार्ड → उसी वार्ड का सदस्य अध्यक्ष; 2 या अधिक वार्ड → उन वार्डों के सदस्य आपस में से अध्यक्ष चुनते हैं।

धारा 55 — कार्यपालक समिति

  1. अध्यक्ष
  2. उपाध्यक्ष
  3. विपक्ष का नेता
  • इस समिति के पदेन सचिव की भूमिका मुख्य नगरपालिका अधिकारी निभाता है।

धारा 57 — समिति का अध्यक्ष

  • निकाय का अध्यक्ष जिस समिति का सदस्य हो, उसका वह पदेन अध्यक्ष होता है।
  • जिस समिति में अध्यक्ष नहीं पर उपाध्यक्ष सदस्य है, उसका पदेन अध्यक्ष उपाध्यक्ष होता है।

धारा 76 व 100

  • धारा 76: राज्य वित्त आयोग नगर निकायों की वित्तीय हालत की समीक्षा करता है।
  • धारा 100: साल भर के कामकाज की प्रशासनिक रिपोर्ट हर निकाय प्रतिवर्ष राज्य सरकार को सौंपता है।

11. शहरी स्वशासन व्यवस्था

आधारनगरपालिकानगर परिषद्नगर निगम
संख्या (दिसम्बर 2024)1943613
आबादी20 हज़ार से 1 लाख1 से 5 लाख5 लाख से 1 करोड़
राजनीतिक प्रमुखअध्यक्ष (चेयरमैन)सभापतिमहापौर (मेयर)
प्रमुख का चुनावअप्रत्यक्षअप्रत्यक्षअप्रत्यक्ष

नगरपालिकाओं की श्रेणियाँ (आबादी से)

  • चतुर्थ श्रेणी ➜ 25 हज़ार से कम आबादी
  • तृतीय श्रेणी ➜ 25 हज़ार से 49,999
  • द्वितीय श्रेणी ➜ 50 हज़ार से 99,999

12. राजस्थान के नगर निगम

काल / क्रमघटनाविवरण
एकीकरण के समयउदयपुरराज्य का इकलौता नगर निगम।
17 दिसम्बर 1992जयपुर व जोधपुरदोनों शहरों में नगर निगम बने।
दिसम्बर 202413 नगर निगमअजमेर, बीकानेर, जयपुर ग्रेटर, जयपुर हैरिटेज, जोधपुर उत्तर, जोधपुर दक्षिण, कोटा उत्तर, कोटा दक्षिण, उदयपुर, भरतपुर, अलवर, भीलवाड़ा व पाली।

रिवीजन पॉइंटर्स

  1. महानगर क्षेत्र यानी 10 लाख या अधिक आबादी; महानगर योजना समिति (243ZE) में कम से कम 2/3 सदस्य निर्वाचित, जबकि जिला योजना समिति में 4/5।
  2. 2009 का अधिनियम छावनी क्षेत्रों को छोड़कर पूरे राजस्थान पर लागू है; इससे पहले 1951, 1959 और 1994 के अधिनियम रहे।
  3. संक्रमणशील क्षेत्र ➜ नगरपालिका बोर्ड, लघुत्तर ➜ नगर परिषद्, वृहत्तर ➜ नगर निगम; संविधान का «नगर पंचायत» यहाँ नगरपालिका बोर्ड कहलाता है।
  4. वार्डों की संख्या 13 से कम नहीं हो सकती; मनोनीत जानकार बोर्ड में 6, परिषद् में 8 और निगम में 12 होते हैं।
  5. सांसद केवल नगर परिषद् और नगर निगम के सदस्य बनते हैं, नगरपालिका बोर्ड के नहीं।
  6. उम्मीदवार एक ही वार्ड से लड़ सकता है और अधिकतम 4 नामांकन पत्र भर सकता है (धारा 22)।
  7. चुनाव याचिका 1 माह के भीतर ज़िला न्यायाधीश के पास जाती है (धारा 31); उसके आदेश पर अपील उच्च न्यायालय में (धारा 32)।
  8. साधारण बैठक हर 60 दिन में और साल में कम से कम 6; अविश्वास पद सँभालने के 2 वर्ष बाद ही आ सकता है और पास होने को 3/4 बहुमत चाहिए।
  9. दिसम्बर 2024 की संख्या ➜ 194 नगरपालिकाएँ, 36 नगर परिषदें, 13 नगर निगम।

अगले भाग में राज्य स्तर की न्याय व्यवस्था — उच्च न्यायालय का गठन, न्यायाधीशों की नियुक्ति व हटाना, क्षेत्राधिकार और रिट।

पिछला भाग: नगरीय स्वशासन: गठन, संरचना व चुनाव एवं शक्तियाँ, वित्त व योजना

अगला भाग: उच्च न्यायालय व न्यायाधीश एवं क्षेत्राधिकार व शक्तियाँ

इन्हें भी पढ़ें: पंचायती राज · प्रमुख अधिनियम

पूरी श्रृंखला: राजस्थान की राजव्यवस्था — सभी अध्याय · राजस्थान जी.के. नोट्स — सभी विषय

इस अध्याय की पूरी तैयारी चाहिए? ऊपर दिए नोट्स हर खंड का चुना हुआ हिस्सा हैं। पूरी तालिकाएँ, बाक़ी बिंदु, याद रखने की ट्रिक, नक्शे-चित्र और अभ्यास-प्रश्न नगरीय स्वशासन के माइंड मैप में हैं। राजस्थान जी.के. के सभी विषय एक ही पास में उपलब्ध हैं।
इस विषय का माइंड मैप ➜Complete Rajasthan GK पास देखें

Useful for these exams