नगरपालिका अधिनियम 2009 में अंकों की भरमार है — 13 वार्ड, 6-8-12 मनोनीत सदस्य, 3/4 का कोरम — और यही अंक सबसे ज़्यादा उलझाते हैं। संविधान के अनुच्छेद और राजस्थान की धाराओं को अलग-अलग रखकर पढ़ें तो घालमेल नहीं होता। इस भाग में महानगर योजना समिति, लागू होने की बातें, अधिनियम की संरचना, चुनाव, अध्यक्ष, बैठकें व अविश्वास, समितियाँ, शहरी व्यवस्था की तुलना और राजस्थान के नगर निगम आए हैं।
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1. महानगर योजना समिति
- 243ZE(1): हर महानगर क्षेत्र (10 लाख+) में महानगर योजना समिति गठित होगी, जिसका काम वहाँ की विकास योजना का मसौदा बनाना है।
- 243ZE(3): यही समिति विकास योजना का प्रारूप तैयार करती है; 243ZE(4): उसका अध्यक्ष इसे राज्य सरकार को भेजता है।
243ZE(2) — राज्य विधानमण्डल क़ानून से तय करेगा
- (क) समिति की बनावट
- (ख) सीटें किस तरह भरें
- (ग) केंद्र सरकार, राज्य सरकार और उन संगठनों/संस्थाओं का प्रतिनिधित्व जिन्हें समिति के काम पूरे करने के लिए ज़रूरी समझा जाए
… शेष 2 बिंदु — पूरी सूची माइंड मैप में देखें
- शर्त: कम से कम 2/3 सदस्य वे हों जिन्हें महानगर क्षेत्र के नगर निकायों के निर्वाचित सदस्य और पंचायतों के अध्यक्ष आपस में से, नगर-पंचायत आबादी के अनुपात में चुनें।
| जिला योजना समिति | महानगर योजना समिति | |
|---|---|---|
| अनुच्छेद | 243ZD | 243ZE |
| क्षेत्र | हर ज़िला | महानगर क्षेत्र (10 लाख+) |
| न्यूनतम निर्वाचित भाग | 4/5 | 2/3 |
ट्रिक: ज़िला → 4/5 (बड़ा अंश), महानगर → 2/3 — महानगर समिति में केंद्र-राज्य व संस्थाओं के लिए ज़्यादा जगह छोड़ी गई है।
2. लागू होना व पुराने क़ानून
| अनुच्छेद | प्रावधान |
|---|---|
| 243ZB | यह भाग संघ राज्य क्षेत्रों पर भी लागू होता है (अनुच्छेद 239 के अधीन)। |
| 243ZC | अनुच्छेद 244(1) के अनुसूचित क्षेत्रों और 244(2) के जनजाति क्षेत्रों पर यह भाग लागू नहीं होता। |
| 243ZF | 74वें संशोधन के ठीक पहले लागू नगर-क़ानून का जो हिस्सा भाग 9क से मेल न खाए, वह तब तक चलता रहेगा जब तक विधानमण्डल या सक्षम अधिकारी उसे बदल या हटा न दे। |
3. नगरपालिका अधिनियम 2009
| धारा | विषय |
|---|---|
| 3 | नगरपालिका घोषित करना |
| 5 | स्थापना (तीन प्रकार) |
| 6 | संरचना |
| 11 | निर्वाचन |
… शेष 8 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें
4. क़ानून व स्थापना
नगर निकायों के क़ानूनों का क्रम
- नगरपालिका अधिनियम 1951
- अधिनियम 1959
- अधिनियम 1994
… शेष 2 बिंदु — पूरी सूची माइंड मैप में देखें
- 2009 का अधिनियम छावनी क्षेत्रों को छोड़कर पूरे राजस्थान पर लागू है।
- धारा 3 — परिसीमन: जो स्थानीय क्षेत्र किसी नगरपालिका की सीमा में नहीं है, उसे राज्य सरकार राजपत्र में अधिसूचना छापकर नगरपालिका घोषित कर सकती है।
धारा 5 — स्थापना और निगमन
| क्षेत्र | निकाय |
|---|---|
| संक्रमणशील क्षेत्र | नगरपालिका बोर्ड |
| लघुत्तर (छोटा) नगरीय क्षेत्र | नगर परिषद् |
| वृहत्तर (बड़ा) नगरीय क्षेत्र | नगर निगम |
ध्यान दें: संविधान (243Q) में संक्रमणशील क्षेत्र के लिए “नगर पंचायत” शब्द है; राजस्थान का अधिनियम उसे नगरपालिका बोर्ड कहता है।
5. संरचना
- सारी सीटें वार्डों से सीधे चुनाव द्वारा भरती हैं।
- वार्डों की संख्या राज्य सरकार अधिसूचना से समय-समय पर तय करती है, पर यह 13 से कम नहीं हो सकती।
| सदस्य | नगरपालिका बोर्ड | नगर परिषद् | नगर निगम | मत |
|---|---|---|---|---|
| विधायक (जिसके क्षेत्र में निकाय पूरा/आंशिक आता हो) | हाँ | हाँ | हाँ | हाँ |
| लोकसभा सांसद (जिसके क्षेत्र में निकाय पूरा/आंशिक आता हो) | — | हाँ | हाँ | हाँ |
| नगर प्रशासन के जानकार — राज्य सरकार द्वारा मनोनीत | 6 | 8 | 12 | नहीं |
- मनोनीत सदस्यों को राज्य सरकार कभी भी हटा सकती है।
- हर निकाय के मनोनीत सदस्यों में एक दिव्यांग व्यक्ति ज़रूर होगा।
ट्रिक: मनोनीत संख्या 6 → 8 → 12 (बोर्ड → परिषद् → निगम)। सांसद केवल परिषद् और निगम में बैठते हैं, बोर्ड में नहीं।
6. चुनाव, अयोग्यता व याचिका
धारा 11 व 22 — चुनाव
- धारा 11: मतदाता सूची और सारे नगर चुनावों की देखरेख, निर्देशन व नियंत्रण राज्य निर्वाचन आयोग के हाथ में।
- धारा 22: कोई भी उम्मीदवार एक से ज़्यादा वार्ड से चुनाव नहीं लड़ सकता।
- एक उम्मीदवार एक वार्ड के लिए अधिकतम 4 नामांकन पत्र भर सकता है।
धारा 24 — सामान्य निरर्हताएँ
बाक़ी योग्यता होने पर भी इन हालात में व्यक्ति सदस्य चुने जाने या बने रहने के योग्य नहीं:
- किसी सक्षम अदालत ने अपराध में दोषी ठहराकर 6 माह या अधिक की क़ैद दी हो।
- इसी अधिनियम की धारा 245 के तहत किसी अपराध में दोषी हो।
- जिस अपराध की सज़ा 5 वर्ष या अधिक क़ैद हो सकती है, उसका आरोप अदालत में उसके विरुद्ध विचाराधीन हो।
चुनाव को चुनौती का रास्ता
- उम्मीदवार या मतदाता
- धारा 31: 1 माह के भीतर ज़िला न्यायाधीश के पास याचिका
- धारा 32: ज़िला न्यायाधीश के आदेश पर उच्च न्यायालय में अपील
- याचिका उसी ज़िला न्यायाधीश के सामने जाती है जिसके क्षेत्राधिकार में वह नगर क्षेत्र है; अवधि चुनाव की तारीख से एक माह।
- धारा 34: अपील पर उच्च न्यायालय का फ़ैसला, और उसके अधीन रहते हुए ज़िला न्यायाधीश का आदेश — अंतिम और निर्णायक।
याद रखें: धारा 31 वाला याचिका-प्रावधान राजस्थान नगरपालिका (संशोधन) अधिनियम 2021 से जुड़ा।
7. शपथ, त्यागपत्र व हटाना
| धारा | विषय | नियम |
|---|---|---|
| 37 | शपथ | अध्यक्ष और हर सदस्य पद सँभालने से पहले, राज्य सरकार द्वारा अधिकृत अधिकारी के सामने तय प्रारूप में शपथ या प्रतिज्ञान करता है। |
| 38 | त्यागपत्र | सदस्य कार्यपालक मजिस्ट्रेट से सत्यापित लिखित सूचना अध्यक्ष को देता है; यह 15 दिन पूरे होने पर या अध्यक्ष के स्वीकार करने पर — जो पहले हो — प्रभावी। |
धारा 39 — राज्य सरकार इन आधारों पर सदस्य को हटा सकती है
- निकाय की अनुमति के बिना लगातार 3 से अधिक साधारण बैठकों से ग़ैरहाज़िर।
- धारा 37 (शपथ) का पालन नहीं किया।
- कर्तव्य निभाने में अवचार (दुराचरण) का दोषी।
8. अध्यक्ष व उपाध्यक्ष
| निकाय | प्रमुख | उप-प्रमुख |
|---|---|---|
| नगर निगम | महापौर | उप-महापौर |
| नगर परिषद् | सभापति | उप-सभापति |
| नगरपालिका बोर्ड | अध्यक्ष | उपाध्यक्ष |
- धारा 43: अध्यक्षों के पद SC, ST, पिछड़े वर्गों और महिलाओं के लिए विहित रीति से आरक्षित।
- SC/ST/पिछड़े वर्ग का यह आरक्षण संविधान के अनुच्छेद 334 में दी गई अवधि ख़त्म होते ही समाप्त हो जाएगा।
- धारा 44: अध्यक्ष/उपाध्यक्ष के चुनाव को सिर्फ़ ज़िला न्यायाधीश के सामने चुनाव याचिका से ही चुनौती दी जा सकती है, और किसी तरीक़े से नहीं।
धारा 48 — कर्तव्य
| अध्यक्ष | उपाध्यक्ष |
|---|---|
| निकाय की नियमित बैठकें बुलाना | अध्यक्ष न हो तो बैठकों की अध्यक्षता |
| वित्तीय और कार्यपालक प्रशासन पर नज़र रखना | अध्यक्ष न हो तो उसकी शक्तियों और कर्तव्यों का पालन |
| सौंपे गए दूसरे कार्यपालक काम करना | अध्यक्ष समय-समय पर जो शक्तियाँ/कर्तव्य सौंपे, उन्हें निभाना |
9. बैठकें व अविश्वास
धारा 51 — बैठकें
- साधारण बैठक ➜ हर 60 दिन में कम से कम एक
- साल में ➜ कम से कम 6 बैठकें
- विशेष बैठक की माँग ➜ 1/3 सदस्य
धारा 53 — अध्यक्ष/उपाध्यक्ष के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव
- प्रस्ताव विहित रीति से लाया और उस पर विचार किया जाता है।
- पद सँभालने के 2 वर्ष तक अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया जा सकता।
अविश्वास प्रस्ताव के तीन पड़ाव
- लाने के लिए 1/3 सदस्यों के हस्ताक्षर
- बैठक का कोरम 3/4
- पारित होने को 3/4 बहुमत
10. समितियाँ व अन्य धाराएँ
धारा 54 — वार्ड समिति
- जिन निकायों की आबादी 3 लाख या अधिक है, वहाँ वार्ड (एक या कई) जोड़कर वार्ड समितियाँ गठित होती हैं।
- सदस्य: (1) समिति क्षेत्र के वार्ड का निर्वाचित सदस्य; (2) नगर प्रशासन के जानकार, 25 वर्ष से ऊपर के, 5 से कम अन्य सदस्य — जिन्हें निकाय मनोनीत करे।
- समिति में एक वार्ड → उसी वार्ड का सदस्य अध्यक्ष; 2 या अधिक वार्ड → उन वार्डों के सदस्य आपस में से अध्यक्ष चुनते हैं।
धारा 55 — कार्यपालक समिति
- अध्यक्ष
- उपाध्यक्ष
- विपक्ष का नेता
- इस समिति के पदेन सचिव की भूमिका मुख्य नगरपालिका अधिकारी निभाता है।
धारा 57 — समिति का अध्यक्ष
- निकाय का अध्यक्ष जिस समिति का सदस्य हो, उसका वह पदेन अध्यक्ष होता है।
- जिस समिति में अध्यक्ष नहीं पर उपाध्यक्ष सदस्य है, उसका पदेन अध्यक्ष उपाध्यक्ष होता है।
धारा 76 व 100
- धारा 76: राज्य वित्त आयोग नगर निकायों की वित्तीय हालत की समीक्षा करता है।
- धारा 100: साल भर के कामकाज की प्रशासनिक रिपोर्ट हर निकाय प्रतिवर्ष राज्य सरकार को सौंपता है।
11. शहरी स्वशासन व्यवस्था
| आधार | नगरपालिका | नगर परिषद् | नगर निगम |
|---|---|---|---|
| संख्या (दिसम्बर 2024) | 194 | 36 | 13 |
| आबादी | 20 हज़ार से 1 लाख | 1 से 5 लाख | 5 लाख से 1 करोड़ |
| राजनीतिक प्रमुख | अध्यक्ष (चेयरमैन) | सभापति | महापौर (मेयर) |
| प्रमुख का चुनाव | अप्रत्यक्ष | अप्रत्यक्ष | अप्रत्यक्ष |
नगरपालिकाओं की श्रेणियाँ (आबादी से)
- चतुर्थ श्रेणी ➜ 25 हज़ार से कम आबादी
- तृतीय श्रेणी ➜ 25 हज़ार से 49,999
- द्वितीय श्रेणी ➜ 50 हज़ार से 99,999
12. राजस्थान के नगर निगम
| काल / क्रम | घटना | विवरण |
|---|---|---|
| एकीकरण के समय | उदयपुर | राज्य का इकलौता नगर निगम। |
| 17 दिसम्बर 1992 | जयपुर व जोधपुर | दोनों शहरों में नगर निगम बने। |
| दिसम्बर 2024 | 13 नगर निगम | अजमेर, बीकानेर, जयपुर ग्रेटर, जयपुर हैरिटेज, जोधपुर उत्तर, जोधपुर दक्षिण, कोटा उत्तर, कोटा दक्षिण, उदयपुर, भरतपुर, अलवर, भीलवाड़ा व पाली। |
रिवीजन पॉइंटर्स
- महानगर क्षेत्र यानी 10 लाख या अधिक आबादी; महानगर योजना समिति (243ZE) में कम से कम 2/3 सदस्य निर्वाचित, जबकि जिला योजना समिति में 4/5।
- 2009 का अधिनियम छावनी क्षेत्रों को छोड़कर पूरे राजस्थान पर लागू है; इससे पहले 1951, 1959 और 1994 के अधिनियम रहे।
- संक्रमणशील क्षेत्र ➜ नगरपालिका बोर्ड, लघुत्तर ➜ नगर परिषद्, वृहत्तर ➜ नगर निगम; संविधान का «नगर पंचायत» यहाँ नगरपालिका बोर्ड कहलाता है।
- वार्डों की संख्या 13 से कम नहीं हो सकती; मनोनीत जानकार बोर्ड में 6, परिषद् में 8 और निगम में 12 होते हैं।
- सांसद केवल नगर परिषद् और नगर निगम के सदस्य बनते हैं, नगरपालिका बोर्ड के नहीं।
- उम्मीदवार एक ही वार्ड से लड़ सकता है और अधिकतम 4 नामांकन पत्र भर सकता है (धारा 22)।
- चुनाव याचिका 1 माह के भीतर ज़िला न्यायाधीश के पास जाती है (धारा 31); उसके आदेश पर अपील उच्च न्यायालय में (धारा 32)।
- साधारण बैठक हर 60 दिन में और साल में कम से कम 6; अविश्वास पद सँभालने के 2 वर्ष बाद ही आ सकता है और पास होने को 3/4 बहुमत चाहिए।
- दिसम्बर 2024 की संख्या ➜ 194 नगरपालिकाएँ, 36 नगर परिषदें, 13 नगर निगम।
अगले भाग में राज्य स्तर की न्याय व्यवस्था — उच्च न्यायालय का गठन, न्यायाधीशों की नियुक्ति व हटाना, क्षेत्राधिकार और रिट।
पिछला भाग: नगरीय स्वशासन: गठन, संरचना व चुनाव एवं शक्तियाँ, वित्त व योजना
अगला भाग: उच्च न्यायालय व न्यायाधीश एवं क्षेत्राधिकार व शक्तियाँ
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