राजस्थान उच्च न्यायालय से तीन बातें बार-बार पूछी जाती हैं — कब बना, मुख्य पीठ कहाँ है और पहले मुख्य न्यायाधीश कौन थे। इन्हीं के आसपास बाक़ी तथ्य जुड़ते हैं। इस भाग में स्थापना की कहानी, पीठें व ज़िला न्यायालय, न्यायाधीश, दो प्रमुख अंग और मुख्य न्यायाधीशों का क्रम है, फिर अधीनस्थ न्यायालय, ग्राम न्यायालय और लोक अदालत। पिछली परीक्षाओं में जो तथ्य पूछे जा चुके हैं, उनके पास परीक्षा का नाम जोड़ दिया गया है।
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1. राजस्थान उच्च न्यायालय
- स्थापना ➜ 29 अगस्त 1949
- मुख्य पीठ ➜ जोधपुर
- जयपुर पीठ ➜ 1958 में बंद, 1976-77 में फिर
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2. स्थापना की कहानी
एकीकरण से पहले और उस समय
- 30 मार्च 1949 को जब राजस्थान बना, उस समय पाँच बड़ी रियासतें — जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, बीकानेर और कोटा — अपना-अपना उच्च न्यायालय चला रही थीं। [परीक्षा: CET Graduation 2024 — किस वर्ष राजस्थान को अपना उच्च न्यायालय मिला? ➜ 1949]
- राजधानी और उच्च न्यायालय कहाँ हों, यह तय करने को बी.आर. पटेल की अध्यक्षता में समिति बनी; सदस्य — कर्नल टी.सी. पुरी और एस.पी. सिन्हा।
- 27 मार्च 1949 की रिपोर्ट में समिति का सुझाव: राजधानी जयपुर बने और उच्च न्यायालय जोधपुर में। [परीक्षा: CET Graduation 2024 — राजस्थान उच्च न्यायालय की मुख्य (प्रिंसिपल) सीट कहाँ है? ➜ जोधपुर]
| काल / क्रम | घटना | विवरण |
|---|---|---|
| 25 अगस्त 1949 | अधिसूचना | जोधपुर में उच्च न्यायालय खोलने का आदेश — जारीकर्ता राजप्रमुख महाराजा सवाई मानसिंह द्वितीय। [परीक्षा: असि. प्रोफ़ेसर 2024 — जोधपुर में 29 अगस्त 1949 के उद्घाटन समारोह के अध्यक्ष कौन थे? ➜ राजप्रमुख महाराजा सवाई मानसिंह] |
| 29 अगस्त 1949 | उद्घाटन, जोधपुर | राजप्रमुख सवाई मानसिंह की अध्यक्षता में समारोह; कमलकांत वर्मा (पहले मुख्य न्यायाधीश) और 11 अन्य न्यायाधीशों ने शपथ ली। |
| 26 जनवरी 1950 | “बी” श्रेणी राज्य | संविधान लागू हुआ; अब न्यायाधीशों की योग्यता संविधान के अनुसार ज़रूरी — इसी कारण कमलकांत वर्मा समेत कुछ न्यायाधीशों को पद छोड़ना पड़ा। |
| 8 मई 1950 | राजप्रमुख की अधिसूचना | 22 मई 1950 से उच्च न्यायालय बीकानेर, कोटा, उदयपुर में नहीं बैठेगा। |
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ट्रिक: तीन समितियाँ अलग रखें: बी.आर. पटेल (1949 — राजधानी जयपुर, HC जोधपुर) · सत्यनारायण राव (1957 — जयपुर पीठ हटाओ)। जयपुर पीठ लौटी समिति से नहीं, राष्ट्रपति के आदेश 1976 से।
3. पीठें व ज़िला न्यायालय
राज्य में कुल 36 ज़िला न्यायालय हैं — जोधपुर में 2 (ज़िला + महानगर) और जयपुर में 3 (ज़िला + महानगर I + महानगर II)। इनमें से 19 जोधपुर की मुख्य पीठ के और 17 जयपुर की खंड पीठ के क्षेत्र में आते हैं।
| पीठ | ज़िला न्यायालय |
|---|---|
| जोधपुर (मुख्य पीठ) — 19 | जोधपुर ज़िला, जोधपुर महानगर, बालोतरा, जैसलमेर, जालौर, सिरोही, पाली, बीकानेर, चूरू, हनुमानगढ़, गंगानगर, मेड़ता, भीलवाड़ा, राजसमंद, उदयपुर, चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़, डूंगरपुर, बाँसवाड़ा |
| जयपुर (खंड पीठ) — 17 | जयपुर ज़िला, जयपुर महानगर I, जयपुर महानगर II, दौसा, अलवर, सीकर, झुंझुनूँ, भरतपुर, धौलपुर, करौली, सवाई माधोपुर, अजमेर, टोंक, कोटा, बूँदी, बारां, झालावाड़ |
रोचक तथ्य: नागौर का ज़िला न्यायालय ज़िला मुख्यालय पर नहीं, तहसील स्तर पर मेड़ता में है।
राजस्थान सिविल सेवा अपील अधिकरण
| पीठ | संभाग |
|---|---|
| जयपुर पीठ — 4 संभाग | जयपुर, भरतपुर, कोटा, अजमेर |
| जोधपुर स्थायी पीठ — 3 संभाग | जोधपुर, बीकानेर, उदयपुर |
4. न्यायाधीश: पहले व ख़ास
स्वीकृत पद: 50 (मुख्य न्यायाधीश को जोड़कर) — यह संख्या जनवरी 2015 से लागू है।
- पहले मुख्य न्यायाधीश ➜ कमलकांत वर्मा
- पहले कार्यवाहक CJ ➜ जे.एम. पांचाल
- सबसे लंबा कार्यकाल ➜ कैलाशनाथ वांचू
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महिला न्यायाधीश
- कांता भटनागर
- मोहिनी कपूर
- जी.एस. मिश्रा
- मीना वी. गोम्बर
- निशा गुप्ता
- बेला एम. त्रिवेदी
इनमें से हाल में कार्यरत तीन: रेखा बोराना, शुभा मेहता, डॉ. नुपुर भाटी।
पति-पत्नी न्यायाधीश
- जस्टिस महेन्द्र गोयल और शुभा मेहता
- जस्टिस पुष्पेन्द्र भाटी और डॉ. नुपुर भाटी
यहाँ से भारत के मुख्य न्यायाधीश तक
- राजस्थान के मुख्य न्यायाधीश रहकर आगे भारत के मुख्य न्यायाधीश बने: कैलाशनाथ वांचू (10वें) और जे.एस. वर्मा (27वें)।
- राजस्थान उच्च न्यायालय के न्यायाधीश रहे आर.एम. लोढ़ा भी आगे भारत के मुख्य न्यायाधीश बने।
रोचक तथ्य: फ़ारुख़ हसन न्यायाधीश बनने के अलावा हरिदेव जोशी की सरकार में राज्यमंत्री का पद भी सँभाल चुके थे।
5. दो प्रमुख अंग
| राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण | राज्य न्यायिक अकादमी | |
|---|---|---|
| मुख्यालय | जयपुर | जोधपुर |
| शुरुआत | राज्य सरकार की अधिसूचना, 7 जुलाई 1998 | 16 नवम्बर 2001 — “न्यायिक प्रशासन स्कूल और राजस्थान न्यायिक अकादमी” (S.J.A.R.J.A.) |
| नाम बदला | — | 24 जनवरी 2007 — “राजस्थान राज्य न्यायिक अकादमी” |
प्राधिकरण में मुख्य संरक्षक मनिन्द्र मोहन श्रीवास्तव और कार्यकारी अध्यक्ष पंकज भण्डारी रहे।
6. क्रम 1–21 (1949–2000)
| क्र. | नाम | पदावधि | ख़ास बात |
|---|---|---|---|
| 1 | के.के. वर्मा | 29.08.1949 – 24.01.1950 | पूरा नाम कमलकांत वर्मा; 1946–47 में इलाहाबाद HC के मुख्य न्यायाधीश |
| 2 | कैलाशनाथ वांचू | 02.01.1951 – 10.08.1958 | राजस्थान में सबसे लंबा कार्यकाल; बाद में भारत के 10वें मुख्य न्यायाधीश |
| 3 | सरजू प्रसाद | 28.02.1959 – 10.10.1961 | |
| 4 | जे.एस. राणावत | 11.10.1961 – 31.05.1963 |
7. क्रम 22–42 (2000 से)
| क्र. | नाम | पदावधि | ख़ास बात |
|---|---|---|---|
| 22 | डॉ. ए.आर. लक्ष्मणन | 29.05.2000 – 25.11.2001 | |
| 23 | अरुण कुमार | 02.12.2001 – 02.10.2002 | |
| 24 | अनिल देव सिंह | 24.12.2002 – 22.10.2004 | |
| 25 | एस.एन. झा | 12.10.2005 – 15.06.2007 | पूरा नाम सच्चिदानंद झा |
याद रखें: राजस्थान के मुख्य न्यायाधीशों में उच्चतम न्यायालय पहुँचने वाले पहले — कैलाशनाथ वांचू; सबसे नए — ऑगस्टाइन जॉर्ज मसीह।
8. अधीनस्थ न्यायालय
| अनुच्छेद | विषय |
|---|---|
| 233 | ज़िला न्यायाधीशों की नियुक्ति |
| 233(क) | कुछ ज़िला न्यायाधीशों की नियुक्ति और उनके निर्णयों का विधिमान्यकरण |
| 234 | ज़िला न्यायाधीशों के अलावा अन्य लोगों की न्यायिक सेवा में भर्ती |
ये सब संविधान के भाग-6 में हैं। ज़िले और नीचे के हर न्यायालय की लगाम उच्च न्यायालय के हाथ में रहती है।
9. ज़िला न्यायालय की बनावट
- ज़िला स्तर पर सबसे ऊँचा न्यायालय ज़िला न्यायालय है।
- इसके दो मुख्य भाग: दीवानी (Civil Court) और आपराधिक / फ़ौजदारी (Criminal Court)।
- ज़मीन और भू-राजस्व के झगड़े अलग से राजस्व न्यायालय निपटाता है।
| स्तर | दीवानी | फ़ौजदारी | राजस्व |
|---|---|---|---|
| 1 | ज़िला न्यायाधीश | सेशन (सत्र) न्यायाधीश | ज़िलाधीश |
| 2 | अपर ज़िला न्यायाधीश | अपर सत्र न्यायाधीश | अपर ज़िलाधीश |
| 3 | सिविल जज (सीनियर डिवीज़न) | मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) | तहसीलदार |
10. ज़िला न्यायाधीश: अनु. 233–236
| अनुच्छेद | क्या कहता है |
|---|---|
| 233(1) | ज़िला न्यायाधीश की नियुक्ति राज्यपाल, उच्च न्यायालय से परामर्श करके |
| 233(2) | बाहर से (सरकारी सेवा के बाहर से) आने वाले के लिए दो शर्तें: 7 वर्ष या अधिक की वकालत, और उच्च न्यायालय की सिफ़ारिश |
| 234 | ज़िला न्यायाधीश से नीचे की न्यायिक सेवा में भर्ती राज्यपाल, राज्य लोक सेवा आयोग और उच्च न्यायालय से परामर्श के बाद |
अनु. 236(क) — “ज़िला न्यायाधीश” में शामिल पद
- त्यागपत्र ➜ राज्यपाल को
- हटाना ➜ राज्यपाल — HC मुख्य न्यायाधीश से परामर्श कर
- न्यूनतम वकालत ➜ 7 वर्ष
11. ग्राम न्यायालय
- क़ानून ➜ ग्राम न्यायालय अधिनियम, 2008
- देश में शुरुआत ➜ 2 अक्टूबर 2009
- राजस्थान में पहला ➜ बस्सी (जयपुर), 27 नवम्बर 2010
- ग्राम न्यायालय के न्यायाधीश को न्यायाधिकारी कहते हैं — वह प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट के बराबर है।
- न्यायाधिकारी को राज्यपाल नियुक्त करते हैं; इससे पहले HC के मुख्य न्यायाधीश की सलाह ली जाती है।
- फ़ैसले से असंतुष्ट व्यक्ति 30 दिन के भीतर ज़िला एवं सत्र न्यायालय में अपील कर सकता है; वहाँ अपील 6 माह में निपटानी होती है।
12. लोक अदालत
भाग-4 के नीति-निर्देशक तत्वों में अनु. 39(क) राज्य पर ज़िम्मेदारी डालता है कि सबको समान न्याय और निःशुल्क क़ानूनी सहायता मिले। यह अनुच्छेद 42वें संविधान संशोधन, 1976 से जुड़ा, और इसी लक्ष्य के लिए लोक अदालतें लगती हैं।
- लोक अदालतें विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 के तहत उच्चतम न्यायालय, उच्च न्यायालय और ज़िला न्यायालय स्तर पर लगाई जाती हैं।
- राज्य स्तर पर इनका आयोजन राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण कराता है।
- इनमें दीवानी और आपराधिक दोनों तरह के मामले सुने जाते हैं।
| लोक अदालत के सदस्य | |
|---|---|
| 1 (न्यायाधीश) | उच्चतम या उच्च न्यायालय का वर्तमान या सेवानिवृत्त न्यायाधीश |
| 2 | एक प्रसिद्ध वकील |
| 3 | एक सामाजिक कार्यकर्ता |
- राजस्थान में पहली लोक अदालत ➜ कोटा
- पहली ऑनलाइन लोक अदालत ➜ 22 अगस्त 2020
रिवीजन पॉइंटर्स
- राजस्थान उच्च न्यायालय की स्थापना 29 अगस्त 1949 को जोधपुर में हुई; उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता राजप्रमुख सवाई मानसिंह ने की।
- पहले मुख्य न्यायाधीश कमलकांत वर्मा थे; सबसे लंबा कार्यकाल कैलाशनाथ वांचू का रहा, जो आगे भारत के 10वें मुख्य न्यायाधीश बने।
- जे.एस. वर्मा राजस्थान के मुख्य न्यायाधीश रहकर भारत के 27वें मुख्य न्यायाधीश बने।
- बी.आर. पटेल समिति (1949) ने राजधानी जयपुर और उच्च न्यायालय जोधपुर में रखने का सुझाव दिया; जयपुर पीठ 1958 में बंद हुई और 1976-77 में फिर चालू।
- राज्य में कुल 36 ज़िला न्यायालय हैं — 19 जोधपुर की मुख्य पीठ के और 17 जयपुर की खंड पीठ के क्षेत्र में।
- नागौर का ज़िला न्यायालय जिला मुख्यालय पर नहीं, तहसील स्तर पर मेड़ता में है।
- स्वीकृत न्यायाधीश पद 50 हैं (मुख्य न्यायाधीश सहित), यह संख्या जनवरी 2015 से लागू है।
- ज़िला न्यायाधीश की नियुक्ति राज्यपाल उच्च न्यायालय से परामर्श करके करते हैं; बाहर से आने वाले के लिए 7 वर्ष की वकालत ज़रूरी है।
- ग्राम न्यायालय — अधिनियम 2008, देश में शुरुआत 2 अक्टूबर 2009, राजस्थान में पहला बस्सी (जयपुर) 27 नवम्बर 2010; पहली लोक अदालत कोटा में लगी।
अगले भाग में राजस्थान लोक सेवा आयोग और राज्य मानवाधिकार आयोग — इतिहास, अनुच्छेद 315 से 323, सचिवालय, अध्यक्षों की सूची, बनावट, नियुक्ति, हटाना, कार्य और शक्तियाँ।
पिछला भाग: उच्च न्यायालय व न्यायाधीश एवं क्षेत्राधिकार व शक्तियाँ
अगला भाग: प्रमुख आयोग: राजस्थान लोक सेवा आयोग एवं राज्य मानवाधिकार आयोग
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