राजस्थान विधानसभा का इतिहास असल में सीटों की संख्या, राष्ट्रपति शासनों और «पहली बार» वाली घटनाओं का इतिहास है — इन्हें क्रम से जोड़ लें तो आधा अध्याय अपने-आप बैठ जाता है। यहाँ सीटें व रिकॉर्ड, विश्वास-अविश्वास प्रस्ताव और भवन-म्यूज़ियम से शुरू करके पहली से आठवीं और नौवीं से पंद्रहवीं विधानसभा तक का सफ़र दिया गया है। उसके बाद 16वीं विधानसभा, उसके उपचुनाव और आज के पदाधिकारी हैं।
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1. राजस्थान विधानसभा
राजस्थान में एकसदनीय विधानमण्डल है — राज्यपाल + विधानसभा। विधानसभा के उपनाम — निम्न सदन, लोकप्रिय सदन, सुदृढ़ सदन, अस्थायी सदन। इसके सदस्य हर पाँच वर्ष में (या भंग होने पर पहले) जनता वयस्क मताधिकार से सीधे चुनती है।
| काल / क्रम | घटना | विवरण |
|---|---|---|
| 1952 | पहली विधानसभा | 160 सदस्य, 140 क्षेत्र |
| 1956 | अजमेर-मेरवाड़ा का विलय | सदस्य संख्या 190 |
| 1957 | दूसरी विधानसभा | 176 सीटें |
| 1967 | चौथी विधानसभा | 184 सीटें · पहला राष्ट्रपति शासन |
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2. सीटें व रिकॉर्ड
- 1952 के पहले चुनाव में 140 निर्वाचन क्षेत्रों से 160 सदस्य चुने गए (कुछ क्षेत्रों से दो-दो सदस्य)।
- छठी विधानसभा (1977) से सीटें बढ़कर 200 हो गईं — आज भी 200।
- 200 में से 59 आरक्षित — 34 अनुसूचित जाति, 25 अनुसूचित जनजाति। 2026 तक संख्या 200 ही रहेगी।
- सारी सीटें ST के लिए आरक्षित वाले ज़िले — बाँसवाड़ा (5), डूँगरपुर (4), प्रतापगढ़ (2)।
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ट्रिक: सादुलशहर से मनोहर थाना — उत्तर के सबसे ऊपर से दक्षिण-पूर्व के सबसे नीचे तक: क्रमांक 1 → 200।
3. विश्वास-अविश्वास प्रस्ताव
| प्रस्ताव | कितनी बार | पहली बार | अंतिम बार | नतीजा |
|---|---|---|---|---|
| अविश्वास (सरकार के विरुद्ध) | 13 | 1952 — टीकाराम पालीवाल (पहली विधानसभा) | 1985 — हरिदेव जोशी | एक भी पारित नहीं |
| विश्वास (सरकार द्वारा) | 5 | 1990 — भैरोंसिंह शेखावत (2 बार) | 2020 — अशोक गहलोत | कभी सरकार नहीं गिरी |
| अविश्वास (अध्यक्ष के विरुद्ध) | — | 1952 — नरोत्तमलाल जोशी (2 बार) | 1997 — शांतिलाल चपलोत (2 बार) | — |
- एक विधानसभा में सबसे अधिक 5 अविश्वास प्रस्ताव — तीसरी विधानसभा में मोहनलाल सुखाड़िया सरकार के विरुद्ध; कोई पारित नहीं हुआ।
याद रखें: अविश्वास 13 बार, सफल 0; विश्वास 5 बार, सरकार गिरी 0 — राजस्थान में कोई सरकार सदन के मत से नहीं गिरी।
4. भवन, म्यूज़ियम, सम्मेलन
- सदन पहली बार जयपुर के सवाई मानसिंह टाउन हॉल में 29 मार्च 1952 को बैठा; यही इमारत विधानसभा बनी और 2001 तक काम आई।
- नया भवन लालकोठी, जयपुर में 2001 में बना; इसमें करौली और जोधपुर के इमारती पत्थर लगे हैं।
- तत्कालीन राष्ट्रपति के.आर. नारायणन ने 6 नवंबर 2001 को इसे राष्ट्र को सौंपा।
| प्रवेश द्वार | स्थापत्य शैली |
|---|---|
| उत्तरी (मुख्य द्वार) | जयपुर शैली |
| दक्षिणी | मारवाड़ शैली |
| पूर्वी | शेखावाटी शैली |
ट्रिक: मुख्य द्वार उत्तर में और शैली जयपुर की — भवन भी जयपुर में है। बाक़ी: दक्षिण-मारवाड़, पूर्व-शेखावाटी, पश्चिम-मेवाड़।
म्यूज़ियम व सम्मेलन
- देश का पहला डिजिटल म्यूज़ियम राजस्थान विधानसभा में — उद्घाटन 16 जुलाई 2022, तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश एन.वी. रमना द्वारा; नाम “राजनीतिक आख्यान संग्रहालय” (Political Narrative Museum)।
- 83वाँ अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन ➜ जनवरी 2023, राजस्थान विधानसभा, जयपुर; उद्घाटन उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने किया।
- 9वाँ राष्ट्रमण्डल संसदीय संघ (CPA) सम्मेलन ➜ 21–23 अगस्त 2023, उदयपुर।
- सर्वश्रेष्ठ विधायक 2023 ➜ अनिता भदेल
- सर्वश्रेष्ठ विधायक 2022 ➜ अमीन खान
5. पहली से आठवीं
पहली विधानसभा (1952–57) · 160 सीटें
- चुनाव 4–24 जनवरी 1952; गठन 23 फ़रवरी 1952; पहली बैठक 29 मार्च 1952; विघटन 23 मार्च 1957।
- कांग्रेस ने 153 सीटों पर लड़कर 82 जीतीं; रामराज्य परिषद् 24, भारतीय जनसंघ 8, कृषिकार लोक पार्टी 7, हिंदू महासभा 2, निर्दलीय 35।
- पहले प्रोटेम स्पीकर महाराव संग्राम सिंह, पहले अध्यक्ष नरोत्तमलाल जोशी, पहले उपाध्यक्ष लालसिंह शक्तावत, पहले नेता प्रतिपक्ष जसवंत सिंह।
- इस दौरान तीन मुख्यमंत्री ➜ टीकाराम पालीवाल, जयनारायण व्यास, मोहनलाल सुखाड़िया।
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अजमेर-मेरवाड़ा का विलय (1956)
- अजमेर-मेरवाड़ा की अपनी 30 सदस्यों की विधानसभा (धारा सभा) थी — इनमें 20 कांग्रेस के; मुख्यमंत्री हरिभाऊ उपाध्याय, मंत्री बालकृष्ण कौल व बृजमोहन शर्मा।
- 1 नवंबर 1956 को विलय के साथ यह सदन भी राजस्थान विधानसभा में मिल गया — दूसरी विधानसभा के चुनाव तक सदस्य संख्या 190 रही।
दूसरी (1957–62) व तीसरी (1962–67) · 176 सीटें
- दूसरी विधानसभा ➜ रामनिवास मिर्धा स्पीकर बने और 1957 से 1967 तक रहे (सबसे लंबा कार्यकाल); कुल 306 बैठकें — अब तक की सबसे ज़्यादा; कोई नेता प्रतिपक्ष नहीं।
- तीसरी विधानसभा की पहली बैठक 13 मार्च 1962।
चौथी (1967–72) · 184 सीटें
- कांग्रेस 89, स्वतंत्र पार्टी 48, भारतीय जनसंघ 22; कांग्रेस के दामोदर व्यास टोंक और मालपुरा दोनों से जीते, इसलिए व्यवहार में कांग्रेस के 88।
- राज्यपाल सम्पूर्णानन्द ने 4 मार्च 1967 को सबसे बड़े दल के नेता मोहनलाल सुखाड़िया को बुलाया; ग़ैर-कांग्रेसी दलों के संयुक्त विधायक दल का दावा उन्होंने नहीं माना।
- 13 मार्च 1967 को केंद्र ने अस्पष्ट बहुमत और अशांति के कारण विधानसभा निलंबित कर पहला राष्ट्रपति शासन लगाया — 26 अप्रैल 1967 तक।
पाँचवीं (1972–77) · 184 सीटें
- आपातकाल के कारण सबसे लंबा कार्यकाल वाली विधानसभा; सबसे अधिक 13 सत्र।
- केवल एक मिनट की बैठक — राजस्थान विधानसभा की सबसे छोटी बैठक।
- आपातकाल हटने पर फ़रवरी 1977 में केंद्र में जनता पार्टी आई; उसने हरिदेव जोशी सरकार को बर्ख़ास्त कर (29 अप्रैल 1977) विधानसभा भंग की — दूसरा राष्ट्रपति शासन (30 अप्रैल – 21 जून 1977)।
छठी (1977–80) · 200 सीटें
- जनता पार्टी 152, कांग्रेस 41 — राज्य की पहली ग़ैर-कांग्रेसी सरकार; पहले ग़ैर-कांग्रेसी मुख्यमंत्री भैरोंसिंह शेखावत।
- पहली बार विधानसभा 5 वर्ष से पहले भंग हुई और मध्यावधि चुनाव कराने पड़े।
- जनवरी 1980 के लोकसभा मध्यावधि चुनाव के बाद लौटी इंदिरा गांधी सरकार ने जनता पार्टी सरकार हटाई — तीसरा राष्ट्रपति शासन (17 फ़रवरी – 5 जून 1980)।
सातवीं (1980–85) व आठवीं (1985–90)
- सातवीं ➜ मध्यावधि चुनाव से बनी पहली विधानसभा व सरकार।
- डीग गोलीकांड (1985) — पुलिस की गोली से राजा मानसिंह की मौत हुई; इसके बाद शिवचरण माथुर ने 23 फ़रवरी 1985 को इस्तीफ़ा दिया; फिर हीरालाल देवपुरा केवल 16 दिन के लिए मुख्यमंत्री बने — सबसे छोटा कार्यकाल।
6. नौवीं से पंद्रहवीं
| विधानसभा | ख़ास बातें |
|---|---|
| नौवीं (1990–92) | किसी को स्पष्ट बहुमत नहीं — भाजपा + जनता दल की सरकार; दूसरी बार समय से पहले भंग; अयोध्या की घटना के बाद भैरोंसिंह शेखावत सरकार बर्ख़ास्त — 15.12.1992 से 03.12.1993 तक चौथी बार राष्ट्रपति शासन; सबसे कम 95 बैठकें |
| दसवीं (1993–98) | भैरोंसिंह शेखावत ने निर्दलीयों के साथ सरकार बनाई; दूसरी बार मध्यावधि चुनाव से बनी सरकार; पहली महिला उपाध्यक्ष तारा भंडारी |
| ग्यारहवीं (1998–2003) | राज्य में पहली बार EVM का प्रयोग; कांग्रेस ने 153 सीटें जीतीं |
| बारहवीं (2003–08) | भाजपा को पहली बार पूर्ण बहुमत — नेता वसुंधरा राजे; पहली बार पूरे राज्य में EVM; पहली महिला अध्यक्ष सुमित्रा सिंह, पहली महिला मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, पहली महिला राज्यपाल प्रतिभा पाटिल |
याद रखें: चार राष्ट्रपति शासन — 1967, 1977, 1980, 1992।
7. 16वीं विधानसभा
- मतदान (199 सीट) ➜ 25 नवं. 2023
- मतगणना ➜ 3 दिसं. 2023
- गठन ➜ 4 दिसं. 2023
| दल | सीटें (दिसंबर 2024) |
|---|---|
| भारतीय जनता पार्टी | 119 |
| भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस | 66 |
| भारत आदिवासी पार्टी | 4 |
| बहुजन समाज पार्टी | 2 |
2023 का चुनाव
- 199 सीटों पर चुनाव 25 नवंबर 2023; करणपुर (श्रीगंगानगर) में चुनाव टला क्योंकि गुरमीत सिंह कुन्नर (कांग्रेस उम्मीदवार) का निधन हो गया — मतदान 5 जनवरी 2024, गिनती 8 जनवरी 2024, विजेता रुपिंदर सिंह कुन्नर (कांग्रेस)।
- पहली बार 80+ आयु के बुज़ुर्गों और 40% से अधिक दिव्यांगता वाले मतदाताओं को घर से मतदान (होम वोटिंग) की सुविधा।
- मतदाता सूचना पर्चियों पर पहली बार QR कोड छपा और साथ में वोटर गाइड भी दी गई।
| रिकॉर्ड | क्षेत्र / व्यक्ति |
|---|---|
| सर्वाधिक मतदान | कुशलगढ़ (88.13%), पोकरण (87.79%), तिजारा (86.11%) |
| न्यूनतम मतदान | आहोर (61.24%), सुमेरपुर (61.44%), मारवाड़ जंक्शन (61.59%) |
| सबसे बड़ी जीत | दीया कुमारी — विद्याधर नगर (71,368 मत) |
| सबसे छोटी जीत | हंसराज पटेल — कोटपूतली (321 मत) |
महिला विधायक (उपचुनावों के बाद, 23 नवंबर 2024)
- कुल 21 — भाजपा 10, कांग्रेस 9, निर्दलीय 2; इनमें SC 7, ST 3।
16वीं के उपचुनाव
| सीट (ज़िला) | रिक्त होने का कारण | मतदान | विजेता |
|---|---|---|---|
| बागीदौरा (बाँसवाड़ा) | महेंद्रजीत सिंह मालवीय का इस्तीफ़ा | 26 अप्रैल 2024 | जयकृष्ण पटेल (BAP) |
| खींवसर (नागौर) | हनुमान बेनीवाल लोकसभा सदस्य बने | 13 नवंबर 2024 | रेवंतराम डांगा (भाजपा) |
| चौरासी (डूँगरपुर) | राजकुमार रोत लोकसभा सदस्य बने | 13 नवंबर 2024 | अनिल कुमार कटारा (BAP) |
| झुंझुनूँ | बृजेंद्र सिंह ओला लोकसभा सदस्य बने | 13 नवंबर 2024 | राजेंद्र भांबू (भाजपा) |
8. विधानसभाएँ एक नज़र में
| विधानसभा | अध्यक्ष | उपाध्यक्ष | प्रोटेम स्पीकर | सीट · महिला · सत्र |
|---|---|---|---|---|
| 1. 1952–57 | नरोत्तमलाल जोशी | लालसिंह शक्तावत | महाराव संग्राम सिंह | 160 · 2 · 12 |
| 2. 1957–62 | रामनिवास मिर्धा | निरंजन नाथ आचार्य | नारायण सिंह मसूदा | 176 · 9 · 11 |
| 3. 1962–67 | रामनिवास मिर्धा | नारायण सिंह मसूदा | नारायण सिंह मसूदा | 176 · 8 · 10 |
| 4. 1967–72 | निरंजन नाथ आचार्य | पूनमचंद बिश्नोई, रामनारायण चौधरी | पूनमचंद बिश्नोई | 184 · 7 · 11 |
9. पदाधिकारी व रिकॉर्ड
| पद | व्यक्ति (क्षेत्र) |
|---|---|
| राज्यपाल | हरिभाऊ किसनराव बागडे (31 जुलाई 2024 से) |
| विधानसभा अध्यक्ष | वासुदेव देवनानी (अजमेर उत्तर) |
| विधानसभा उपाध्यक्ष | रिक्त |
| प्रोटेम स्पीकर (2023) | कालीचरण सराफ (मालवीय नगर) — आठ बार के विधायक |
अध्यक्ष-उपाध्यक्ष के रिकॉर्ड
| रिकॉर्ड | व्यक्ति |
|---|---|
| पहले अध्यक्ष / उपाध्यक्ष | नरोत्तमलाल जोशी / लालसिंह शक्तावत |
| पहली महिला अध्यक्ष / उपाध्यक्ष | सुमित्रा सिंह / तारा भंडारी |
| सबसे लंबा कार्यकाल (अध्यक्ष) | रामनिवास मिर्धा (1957–67) |
| सबसे छोटा कार्यकाल (अध्यक्ष) | समरथलाल मीणा (लगभग 5 माह) |
रिवीजन पॉइंटर्स
- 1952 की पहली विधानसभा 160 सदस्यों की थी; छठी विधानसभा (1977) से सीटें 200 हैं।
- 200 में से 59 आरक्षित हैं — 34 अनुसूचित जाति और 25 अनुसूचित जनजाति के लिए।
- अविश्वास प्रस्ताव 13 बार आए और एक भी पारित नहीं हुआ; विश्वास प्रस्ताव 5 बार आए और कभी सरकार नहीं गिरी।
- राष्ट्रपति शासन चार बार लगा — 1967, 1977, 1980 और 1992 में।
- नया विधानसभा भवन लालकोठी, जयपुर में 2001 में बना; उसका उत्तरी मुख्य द्वार जयपुर शैली का है।
- देश का पहला डिजिटल म्यूज़ियम राजस्थान विधानसभा में है — उद्घाटन 16 जुलाई 2022।
- पहले अध्यक्ष नरोत्तमलाल जोशी और पहले उपाध्यक्ष लालसिंह शक्तावत; पहली महिला अध्यक्ष सुमित्रा सिंह और पहली महिला उपाध्यक्ष तारा भंडारी।
- अध्यक्ष का सबसे लंबा कार्यकाल रामनिवास मिर्धा (1957–67) का; सबसे छोटा समरथलाल मीणा (लगभग 5 माह) का।
- 16वीं विधानसभा के लिए 199 सीटों पर 25 नवंबर 2023 को मतदान और 3 दिसम्बर 2023 को मतगणना हुई।
अगले भाग में विधानसभा के प्रक्रिया व कार्य संचालन नियम — सत्र कैसे बुलाया जाता है, शपथ, अध्यक्ष-उपाध्यक्ष का चुनाव और सदन का रोज़ का काम।
पिछला भाग: राज्य विधानमण्डल: सत्र व कार्यवाही एवं विधेयक व बजट
अगला भाग: राजस्थान विधानसभा की प्रक्रिया एवं नियम: सदन का संचालन एवं प्रश्न व चर्चाएँ
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