राज्य विधानमण्डल: राजस्थान विधानसभा – Rajasthan Polity Chapter 7

राजस्थान विधानसभा की सीटें, रिकॉर्ड, भवन, 16 विधानसभाओं का इतिहास और मौजूदा पदाधिकारी।

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In this chapter (10 sections)
  1. राजस्थान विधानसभा
  2. सीटें व रिकॉर्ड
  3. विश्वास-अविश्वास प्रस्ताव
  4. भवन, म्यूज़ियम, सम्मेलन
  5. पहली से आठवीं
  6. नौवीं से पंद्रहवीं
  7. 16वीं विधानसभा
  8. विधानसभाएँ एक नज़र में
  9. पदाधिकारी व रिकॉर्ड
  10. रिवीजन पॉइंटर्स

राजस्थान विधानसभा का इतिहास असल में सीटों की संख्या, राष्ट्रपति शासनों और «पहली बार» वाली घटनाओं का इतिहास है — इन्हें क्रम से जोड़ लें तो आधा अध्याय अपने-आप बैठ जाता है। यहाँ सीटें व रिकॉर्ड, विश्वास-अविश्वास प्रस्ताव और भवन-म्यूज़ियम से शुरू करके पहली से आठवीं और नौवीं से पंद्रहवीं विधानसभा तक का सफ़र दिया गया है। उसके बाद 16वीं विधानसभा, उसके उपचुनाव और आज के पदाधिकारी हैं।

इस विषय का इंटरैक्टिव माइंड मैप — राज्य विधानमण्डल, 3 चॉक-बोर्ड चित्र, 3 नक्शे, 4 चार्ट, 28 फ्लैशकार्ड और 12 अभ्यास-प्रश्न के साथ। यहाँ हर खंड के चुने हुए बिंदु हैं; पूरी तालिकाएँ, शेष तथ्य और रटने की ट्रिक माइंड मैप में हैं।
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1. राजस्थान विधानसभा

राजस्थान में एकसदनीय विधानमण्डल है — राज्यपाल + विधानसभा। विधानसभा के उपनाम — निम्न सदन, लोकप्रिय सदन, सुदृढ़ सदन, अस्थायी सदन। इसके सदस्य हर पाँच वर्ष में (या भंग होने पर पहले) जनता वयस्क मताधिकार से सीधे चुनती है।

काल / क्रमघटनाविवरण
1952पहली विधानसभा160 सदस्य, 140 क्षेत्र
1956अजमेर-मेरवाड़ा का विलयसदस्य संख्या 190
1957दूसरी विधानसभा176 सीटें
1967चौथी विधानसभा184 सीटें · पहला राष्ट्रपति शासन

… शेष 3 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें

2. सीटें व रिकॉर्ड

  • 1952 के पहले चुनाव में 140 निर्वाचन क्षेत्रों से 160 सदस्य चुने गए (कुछ क्षेत्रों से दो-दो सदस्य)।
  • छठी विधानसभा (1977) से सीटें बढ़कर 200 हो गईं — आज भी 200।
  • 200 में से 59 आरक्षित — 34 अनुसूचित जाति, 25 अनुसूचित जनजाति। 2026 तक संख्या 200 ही रहेगी।
  • सारी सीटें ST के लिए आरक्षित वाले ज़िले — बाँसवाड़ा (5), डूँगरपुर (4), प्रतापगढ़ (2)।

… शेष 4 बिंदु — पूरी सूची माइंड मैप में देखें

ट्रिक: सादुलशहर से मनोहर थाना — उत्तर के सबसे ऊपर से दक्षिण-पूर्व के सबसे नीचे तक: क्रमांक 1 → 200।

3. विश्वास-अविश्वास प्रस्ताव

प्रस्तावकितनी बारपहली बारअंतिम बारनतीजा
अविश्वास (सरकार के विरुद्ध)131952 — टीकाराम पालीवाल (पहली विधानसभा)1985 — हरिदेव जोशीएक भी पारित नहीं
विश्वास (सरकार द्वारा)51990 — भैरोंसिंह शेखावत (2 बार)2020 — अशोक गहलोतकभी सरकार नहीं गिरी
अविश्वास (अध्यक्ष के विरुद्ध)—1952 — नरोत्तमलाल जोशी (2 बार)1997 — शांतिलाल चपलोत (2 बार)—
  • एक विधानसभा में सबसे अधिक 5 अविश्वास प्रस्ताव — तीसरी विधानसभा में मोहनलाल सुखाड़िया सरकार के विरुद्ध; कोई पारित नहीं हुआ।

याद रखें: अविश्वास 13 बार, सफल 0; विश्वास 5 बार, सरकार गिरी 0 — राजस्थान में कोई सरकार सदन के मत से नहीं गिरी।

4. भवन, म्यूज़ियम, सम्मेलन

  • सदन पहली बार जयपुर के सवाई मानसिंह टाउन हॉल में 29 मार्च 1952 को बैठा; यही इमारत विधानसभा बनी और 2001 तक काम आई।
  • नया भवन लालकोठी, जयपुर में 2001 में बना; इसमें करौली और जोधपुर के इमारती पत्थर लगे हैं।
  • तत्कालीन राष्ट्रपति के.आर. नारायणन ने 6 नवंबर 2001 को इसे राष्ट्र को सौंपा।
प्रवेश द्वारस्थापत्य शैली
उत्तरी (मुख्य द्वार)जयपुर शैली
दक्षिणीमारवाड़ शैली
पूर्वीशेखावाटी शैली

ट्रिक: मुख्य द्वार उत्तर में और शैली जयपुर की — भवन भी जयपुर में है। बाक़ी: दक्षिण-मारवाड़, पूर्व-शेखावाटी, पश्चिम-मेवाड़।

म्यूज़ियम व सम्मेलन

  • देश का पहला डिजिटल म्यूज़ियम राजस्थान विधानसभा में — उद्घाटन 16 जुलाई 2022, तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश एन.वी. रमना द्वारा; नाम “राजनीतिक आख्यान संग्रहालय” (Political Narrative Museum)।
  • 83वाँ अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन ➜ जनवरी 2023, राजस्थान विधानसभा, जयपुर; उद्घाटन उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने किया।
  • 9वाँ राष्ट्रमण्डल संसदीय संघ (CPA) सम्मेलन ➜ 21–23 अगस्त 2023, उदयपुर।
  • सर्वश्रेष्ठ विधायक 2023 ➜ अनिता भदेल
  • सर्वश्रेष्ठ विधायक 2022 ➜ अमीन खान

5. पहली से आठवीं

पहली विधानसभा (1952–57) · 160 सीटें

  • चुनाव 4–24 जनवरी 1952; गठन 23 फ़रवरी 1952; पहली बैठक 29 मार्च 1952; विघटन 23 मार्च 1957।
  • कांग्रेस ने 153 सीटों पर लड़कर 82 जीतीं; रामराज्य परिषद् 24, भारतीय जनसंघ 8, कृषिकार लोक पार्टी 7, हिंदू महासभा 2, निर्दलीय 35।
  • पहले प्रोटेम स्पीकर महाराव संग्राम सिंह, पहले अध्यक्ष नरोत्तमलाल जोशी, पहले उपाध्यक्ष लालसिंह शक्तावत, पहले नेता प्रतिपक्ष जसवंत सिंह।
  • इस दौरान तीन मुख्यमंत्री ➜ टीकाराम पालीवाल, जयनारायण व्यास, मोहनलाल सुखाड़िया।

… शेष 3 बिंदु — पूरी सूची माइंड मैप में देखें

अजमेर-मेरवाड़ा का विलय (1956)

  • अजमेर-मेरवाड़ा की अपनी 30 सदस्यों की विधानसभा (धारा सभा) थी — इनमें 20 कांग्रेस के; मुख्यमंत्री हरिभाऊ उपाध्याय, मंत्री बालकृष्ण कौल व बृजमोहन शर्मा।
  • 1 नवंबर 1956 को विलय के साथ यह सदन भी राजस्थान विधानसभा में मिल गया — दूसरी विधानसभा के चुनाव तक सदस्य संख्या 190 रही।

दूसरी (1957–62) व तीसरी (1962–67) · 176 सीटें

  • दूसरी विधानसभा ➜ रामनिवास मिर्धा स्पीकर बने और 1957 से 1967 तक रहे (सबसे लंबा कार्यकाल); कुल 306 बैठकें — अब तक की सबसे ज़्यादा; कोई नेता प्रतिपक्ष नहीं।
  • तीसरी विधानसभा की पहली बैठक 13 मार्च 1962।

चौथी (1967–72) · 184 सीटें

  • कांग्रेस 89, स्वतंत्र पार्टी 48, भारतीय जनसंघ 22; कांग्रेस के दामोदर व्यास टोंक और मालपुरा दोनों से जीते, इसलिए व्यवहार में कांग्रेस के 88।
  • राज्यपाल सम्पूर्णानन्द ने 4 मार्च 1967 को सबसे बड़े दल के नेता मोहनलाल सुखाड़िया को बुलाया; ग़ैर-कांग्रेसी दलों के संयुक्त विधायक दल का दावा उन्होंने नहीं माना।
  • 13 मार्च 1967 को केंद्र ने अस्पष्ट बहुमत और अशांति के कारण विधानसभा निलंबित कर पहला राष्ट्रपति शासन लगाया — 26 अप्रैल 1967 तक।

पाँचवीं (1972–77) · 184 सीटें

  • आपातकाल के कारण सबसे लंबा कार्यकाल वाली विधानसभा; सबसे अधिक 13 सत्र।
  • केवल एक मिनट की बैठक — राजस्थान विधानसभा की सबसे छोटी बैठक।
  • आपातकाल हटने पर फ़रवरी 1977 में केंद्र में जनता पार्टी आई; उसने हरिदेव जोशी सरकार को बर्ख़ास्त कर (29 अप्रैल 1977) विधानसभा भंग की — दूसरा राष्ट्रपति शासन (30 अप्रैल – 21 जून 1977)।

छठी (1977–80) · 200 सीटें

  • जनता पार्टी 152, कांग्रेस 41 — राज्य की पहली ग़ैर-कांग्रेसी सरकार; पहले ग़ैर-कांग्रेसी मुख्यमंत्री भैरोंसिंह शेखावत।
  • पहली बार विधानसभा 5 वर्ष से पहले भंग हुई और मध्यावधि चुनाव कराने पड़े।
  • जनवरी 1980 के लोकसभा मध्यावधि चुनाव के बाद लौटी इंदिरा गांधी सरकार ने जनता पार्टी सरकार हटाई — तीसरा राष्ट्रपति शासन (17 फ़रवरी – 5 जून 1980)।

सातवीं (1980–85) व आठवीं (1985–90)

  • सातवीं ➜ मध्यावधि चुनाव से बनी पहली विधानसभा व सरकार।
  • डीग गोलीकांड (1985) — पुलिस की गोली से राजा मानसिंह की मौत हुई; इसके बाद शिवचरण माथुर ने 23 फ़रवरी 1985 को इस्तीफ़ा दिया; फिर हीरालाल देवपुरा केवल 16 दिन के लिए मुख्यमंत्री बने — सबसे छोटा कार्यकाल।

6. नौवीं से पंद्रहवीं

विधानसभाख़ास बातें
नौवीं (1990–92)किसी को स्पष्ट बहुमत नहीं — भाजपा + जनता दल की सरकार; दूसरी बार समय से पहले भंग; अयोध्या की घटना के बाद भैरोंसिंह शेखावत सरकार बर्ख़ास्त — 15.12.1992 से 03.12.1993 तक चौथी बार राष्ट्रपति शासन; सबसे कम 95 बैठकें
दसवीं (1993–98)भैरोंसिंह शेखावत ने निर्दलीयों के साथ सरकार बनाई; दूसरी बार मध्यावधि चुनाव से बनी सरकार; पहली महिला उपाध्यक्ष तारा भंडारी
ग्यारहवीं (1998–2003)राज्य में पहली बार EVM का प्रयोग; कांग्रेस ने 153 सीटें जीतीं
बारहवीं (2003–08)भाजपा को पहली बार पूर्ण बहुमत — नेता वसुंधरा राजे; पहली बार पूरे राज्य में EVM; पहली महिला अध्यक्ष सुमित्रा सिंह, पहली महिला मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, पहली महिला राज्यपाल प्रतिभा पाटिल

याद रखें: चार राष्ट्रपति शासन — 1967, 1977, 1980, 1992।

7. 16वीं विधानसभा

  • मतदान (199 सीट) ➜ 25 नवं. 2023
  • मतगणना ➜ 3 दिसं. 2023
  • गठन ➜ 4 दिसं. 2023
दलसीटें (दिसंबर 2024)
भारतीय जनता पार्टी119
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस66
भारत आदिवासी पार्टी4
बहुजन समाज पार्टी2

2023 का चुनाव

  • 199 सीटों पर चुनाव 25 नवंबर 2023; करणपुर (श्रीगंगानगर) में चुनाव टला क्योंकि गुरमीत सिंह कुन्नर (कांग्रेस उम्मीदवार) का निधन हो गया — मतदान 5 जनवरी 2024, गिनती 8 जनवरी 2024, विजेता रुपिंदर सिंह कुन्नर (कांग्रेस)।
  • पहली बार 80+ आयु के बुज़ुर्गों और 40% से अधिक दिव्यांगता वाले मतदाताओं को घर से मतदान (होम वोटिंग) की सुविधा।
  • मतदाता सूचना पर्चियों पर पहली बार QR कोड छपा और साथ में वोटर गाइड भी दी गई।
रिकॉर्डक्षेत्र / व्यक्ति
सर्वाधिक मतदानकुशलगढ़ (88.13%), पोकरण (87.79%), तिजारा (86.11%)
न्यूनतम मतदानआहोर (61.24%), सुमेरपुर (61.44%), मारवाड़ जंक्शन (61.59%)
सबसे बड़ी जीतदीया कुमारी — विद्याधर नगर (71,368 मत)
सबसे छोटी जीतहंसराज पटेल — कोटपूतली (321 मत)

महिला विधायक (उपचुनावों के बाद, 23 नवंबर 2024)

  • कुल 21 — भाजपा 10, कांग्रेस 9, निर्दलीय 2; इनमें SC 7, ST 3।

16वीं के उपचुनाव

सीट (ज़िला)रिक्त होने का कारणमतदानविजेता
बागीदौरा (बाँसवाड़ा)महेंद्रजीत सिंह मालवीय का इस्तीफ़ा26 अप्रैल 2024जयकृष्ण पटेल (BAP)
खींवसर (नागौर)हनुमान बेनीवाल लोकसभा सदस्य बने13 नवंबर 2024रेवंतराम डांगा (भाजपा)
चौरासी (डूँगरपुर)राजकुमार रोत लोकसभा सदस्य बने13 नवंबर 2024अनिल कुमार कटारा (BAP)
झुंझुनूँबृजेंद्र सिंह ओला लोकसभा सदस्य बने13 नवंबर 2024राजेंद्र भांबू (भाजपा)

8. विधानसभाएँ एक नज़र में

विधानसभाअध्यक्षउपाध्यक्षप्रोटेम स्पीकरसीट · महिला · सत्र
1. 1952–57नरोत्तमलाल जोशीलालसिंह शक्तावतमहाराव संग्राम सिंह160 · 2 · 12
2. 1957–62रामनिवास मिर्धानिरंजन नाथ आचार्यनारायण सिंह मसूदा176 · 9 · 11
3. 1962–67रामनिवास मिर्धानारायण सिंह मसूदानारायण सिंह मसूदा176 · 8 · 10
4. 1967–72निरंजन नाथ आचार्यपूनमचंद बिश्नोई, रामनारायण चौधरीपूनमचंद बिश्नोई184 · 7 · 11

9. पदाधिकारी व रिकॉर्ड

पदव्यक्ति (क्षेत्र)
राज्यपालहरिभाऊ किसनराव बागडे (31 जुलाई 2024 से)
विधानसभा अध्यक्षवासुदेव देवनानी (अजमेर उत्तर)
विधानसभा उपाध्यक्षरिक्त
प्रोटेम स्पीकर (2023)कालीचरण सराफ (मालवीय नगर) — आठ बार के विधायक

अध्यक्ष-उपाध्यक्ष के रिकॉर्ड

रिकॉर्डव्यक्ति
पहले अध्यक्ष / उपाध्यक्षनरोत्तमलाल जोशी / लालसिंह शक्तावत
पहली महिला अध्यक्ष / उपाध्यक्षसुमित्रा सिंह / तारा भंडारी
सबसे लंबा कार्यकाल (अध्यक्ष)रामनिवास मिर्धा (1957–67)
सबसे छोटा कार्यकाल (अध्यक्ष)समरथलाल मीणा (लगभग 5 माह)

रिवीजन पॉइंटर्स

  1. 1952 की पहली विधानसभा 160 सदस्यों की थी; छठी विधानसभा (1977) से सीटें 200 हैं।
  2. 200 में से 59 आरक्षित हैं — 34 अनुसूचित जाति और 25 अनुसूचित जनजाति के लिए।
  3. अविश्वास प्रस्ताव 13 बार आए और एक भी पारित नहीं हुआ; विश्वास प्रस्ताव 5 बार आए और कभी सरकार नहीं गिरी।
  4. राष्ट्रपति शासन चार बार लगा — 1967, 1977, 1980 और 1992 में।
  5. नया विधानसभा भवन लालकोठी, जयपुर में 2001 में बना; उसका उत्तरी मुख्य द्वार जयपुर शैली का है।
  6. देश का पहला डिजिटल म्यूज़ियम राजस्थान विधानसभा में है — उद्घाटन 16 जुलाई 2022।
  7. पहले अध्यक्ष नरोत्तमलाल जोशी और पहले उपाध्यक्ष लालसिंह शक्तावत; पहली महिला अध्यक्ष सुमित्रा सिंह और पहली महिला उपाध्यक्ष तारा भंडारी।
  8. अध्यक्ष का सबसे लंबा कार्यकाल रामनिवास मिर्धा (1957–67) का; सबसे छोटा समरथलाल मीणा (लगभग 5 माह) का।
  9. 16वीं विधानसभा के लिए 199 सीटों पर 25 नवंबर 2023 को मतदान और 3 दिसम्बर 2023 को मतगणना हुई।

अगले भाग में विधानसभा के प्रक्रिया व कार्य संचालन नियम — सत्र कैसे बुलाया जाता है, शपथ, अध्यक्ष-उपाध्यक्ष का चुनाव और सदन का रोज़ का काम।

पिछला भाग: राज्य विधानमण्डल: सत्र व कार्यवाही एवं विधेयक व बजट

अगला भाग: राजस्थान विधानसभा की प्रक्रिया एवं नियम: सदन का संचालन एवं प्रश्न व चर्चाएँ

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