पंचायती राज: स्थानीय स्वशासन व इतिहास एवं प्रमुख समितियाँ – Rajasthan Polity Chapter 13

स्थानीय स्वशासन का इतिहास, नागौर में पंचायती राज की शुरुआत, प्रमुख समितियाँ और 73वाँ संशोधन।

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In this chapter (17 sections)
  1. स्थानीय स्वशासन व इतिहास
  2. स्थानीय स्वशासन के दो रूप
  3. भारत में विकास
  4. राजस्थान में आरंभ
  5. नागौर, 2 अक्टूबर 1959
  6. प्रमुख समितियाँ
  7. बलवंत राय मेहता समिति
  8. अशोक मेहता समिति
  9. GVK राव समिति
  10. एल.एम. सिंघवी समिति
  11. पी.के. थुंगन समिति
  12. वी.एन. गाडगिल समिति
  13. राजस्थान सरकार की समितियाँ
  14. 73वाँ संविधान संशोधन
  15. संशोधन की यात्रा
  16. अनुच्छेद 243–243ण
  17. रिवीजन पॉइंटर्स

पंचायती राज को क्रम से पढ़ना ही उसकी असली कुंजी है — पहले स्वशासन का विचार, फिर नागौर का पहला प्रयोग, फिर समितियों की लंबी बहस और आख़िर में संवैधानिक दर्जा। जो क्रम पकड़ लेता है, उसे समितियों की सिफ़ारिशें अलग-अलग रटनी नहीं पड़तीं। इस भाग में स्थानीय स्वशासन व इतिहास, बलवंत राय मेहता से गाडगिल तक की समितियाँ, राजस्थान सरकार की समितियाँ और 73वाँ संविधान संशोधन आया है।

इस विषय का इंटरैक्टिव माइंड मैप — पंचायती राज, 2 चॉक-बोर्ड चित्र, 3 नक्शे, 1 चार्ट, 28 फ्लैशकार्ड और 12 अभ्यास-प्रश्न के साथ। यहाँ हर खंड के चुने हुए बिंदु हैं; पूरी तालिकाएँ, शेष तथ्य और रटने की ट्रिक माइंड मैप में हैं।
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1. स्थानीय स्वशासन व इतिहास

जब किसी गाँव या शहर के लोग अपने इलाक़े का काम ख़ुद चुने हुए प्रतिनिधियों से चलाते हैं, तो उसे स्थानीय स्वायत्त शासन कहते हैं। गाँवों के लिए यही व्यवस्था पंचायती राज कहलाती है।

काल / क्रमघटनाविवरण
1870लॉर्ड मेयोस्थानीय स्वशासन की ओर पहला क़दम।
1882लॉर्ड रिपन का प्रस्तावस्थानीय स्वशासन का “मैग्नाकार्टा”।
1928बीकानेर रियासतराजस्थान का पहला ग्राम पंचायत अधिनियम।
1935भारत शासन अधिनियमस्थानीय स्वशासन प्रांतीय (राज्य) सूची में।

… शेष 6 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें

2. स्थानीय स्वशासन के दो रूप

  • गाँवों की तीन संस्थाएँ ऊपर से नीचे ➜ जिला परिषद् → पंचायत समिति → ग्राम पंचायत।
  • शहरों में आकार के हिसाब से — नगर निगम (बड़े), नगर परिषद् (मध्यम), नगर पालिका (छोटे)।
  • इस मानचित्र का विषय ग्रामीण स्वशासन यानी पंचायती राज है।

ट्रिक: ग्रामीण में “जिला-पंचायत-ग्राम”, नगरीय में “निगम-परिषद्-पालिका” — दोनों तरफ़ तीन-तीन नाम।

3. भारत में विकास

  • 1870 ➜ लॉर्ड मेयो के समय स्थानीय स्वशासन की पहली कोशिश।
  • लॉर्ड रिपन का 1882 का प्रस्ताव इस दिशा का सबसे बड़ा क़दम था। इसलिए भारत के स्थानीय स्वशासन का जनक रिपन को कहा जाता है और उनके प्रस्ताव को इस विषय का “मैग्नाकार्टा” कहा जाता है।
  • 1935 के अधिनियम ने इसे प्रांतीय सूची में डाला; आज भी यह राज्य सूची का विषय है।
  • अनुच्छेद-40 (संविधान का भाग-4, यानी नीति-निदेशक तत्त्व) राज्य से ग्राम पंचायतें गठित करने को कहता है।

… शेष 3 बिंदु — पूरी सूची माइंड मैप में देखें

असफल कार्यक्रम से समिति तक

  1. 1952 सामुदायिक विकास
  2. 1953 राष्ट्रीय विस्तार सेवा
  3. नतीजे कमज़ोर
  • जनक (स्थानीय स्वशासन) ➜ लॉर्ड रिपन
  • मैग्नाकार्टा ➜ रिपन प्रस्ताव 1882
  • अनुच्छेद ➜ 40 (भाग-4)

4. राजस्थान में आरंभ

  • आज़ादी से पहले सबसे पहले बीकानेर रियासत ने 1928 में ग्राम पंचायत अधिनियम बनाया।
  • बाद में जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, सिरोही, भरतपुर और करौली रियासतों में भी पंचायत अधिनियम आए।
  • 1949 ➜ राज्य में पंचायती राज विभाग बना।

… शेष 2 बिंदु — पूरी सूची माइंड मैप में देखें

5. नागौर, 2 अक्टूबर 1959

मेहता समिति की सिफ़ारिशें मानकर 2 अक्टूबर 1959 (गांधी जयंती) को नागौर ज़िले के बगदरी गाँव में देश की पहली पंचायत की नींव रखी गई। इस तरह राजस्थान पंचायती राज अपनाने वाला पहला राज्य बना।

  • उद्घाटन ➜ प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू
  • मुख्यमंत्री ➜ मोहनलाल सुखाड़िया
  • राज्यपाल ➜ गुरुमुख निहाल सिंह

याद रखें: नेहरू – सुखाड़िया – गुरुमुख निहाल सिंह: “PM, CM, राज्यपाल” — तीनों पद एक साथ पूछे जाते हैं।

6. प्रमुख समितियाँ

समितिवर्षएक पंक्ति में पहचान
बलवंत राय मेहता1957त्रिस्तरीय ढाँचा; पहली समिति
अशोक मेहता1977द्विस्तरीय; मण्डल पंचायत; कार्यकाल 4 वर्ष
GVK राव (कार्ड)1985“बिना जड़ की घास“; 4 स्तर

ट्रिक: क्रम याद करें — “बल अशोक गया, सिंघ थुंगा गाड़ी” : बलवंत → अशोक → GVK → सिंघवी → थुंगन → गाडगिल।

7. बलवंत राय मेहता समिति

  • गठन ➜ जनवरी 1957, योजना आयोग
  • प्रधानमंत्री ➜ जवाहरलाल नेहरू
  • रिपोर्ट ➜ 24 नवम्बर 1957
  • काम ➜ 1952 के सामुदायिक विकास कार्यक्रम और 1953 की राष्ट्रीय विस्तार सेवा की जाँच कर बेहतर नतीजों के सुझाव देना।
  • अध्यक्ष बलवंत राय मेहता — लोकतांत्रिक विकेन्द्रीकरण के जनक और पंचायती राज के वास्तुकार (शिल्पी) कहलाते हैं; समिति ने इसी विकेन्द्रीकरण पर ज़ोर दिया।

सिफ़ारिशें

  • तीन स्तर ➜ गाँव में ग्राम पंचायत, खण्ड (ब्लॉक) में पंचायत समिति, ज़िले में जिला परिषद्।
  • ग्राम पंचायत के सदस्य सीधे चुने जाएँ; पंचायत समिति व जिला परिषद् के सदस्य अप्रत्यक्ष रूप से।
  • पंचायत समिति कार्यकारी इकाई हो; जिला परिषद् केवल सलाह, समन्वय और निगरानी करे।

8. अशोक मेहता समिति

गठन 1977, रिपोर्ट 1978। इसकी पहचान है — द्विस्तरीय ढाँचा: (1) जिला स्तर, (2) मण्डल स्तर — यानी ग्राम पंचायतों की जगह मण्डल पंचायतें।

  • जिला परिषद् ही कार्यकारी इकाई बने और राज्य स्तर के नीचे योजना व विकास की ज़िम्मेदारी उसी पर हो।
  • ज़िले के अफ़सर ➜ कलेक्टर भी — परिषद् के नियंत्रण में काम करें।
  • चुनाव दलगत आधार पर हों; राज्य का मुख्य चुनाव अधिकारी, मुख्य चुनाव आयुक्त की सलाह से इन्हें कराए।
  • संस्थाओं के आर्थिक स्रोत बढ़ें और कर लगाने की शक्ति अनिवार्य रूप से मिले।

याद रखें: 1959–1969 का दशक पंचायती राज का उत्थान काल माना जाता है, और राजीव गांधी सरकार का समय इसका स्वर्ण युग।

9. GVK राव समिति

1985 में योजना आयोग ने ग्रामीण विकास व गरीबी उन्मूलन कार्यक्रमों को परखने के लिए GVK राव समिति (कार्ड समिति) बनाई। समिति की नज़र में तब की संस्थाएँ “बिना जड़ की घास” जैसी थीं।

  • ग्राम पंचायतों को ज़्यादा वित्तीय शक्तियाँ; राज्य वित्त आयोग बने।
  • संस्थाओं का कार्यकाल 5 वर्ष; चुनाव नियमित हों।
  • ढाँचा 4 स्तरों का — राज्य, जिला, खण्ड, ग्राम।

10. एल.एम. सिंघवी समिति

  • पंचायती राज को संवैधानिक मान्यता और पर्याप्त वित्तीय साधन मिलें।
  • राज्य वित्त आयोग बने।
  • ग्रामसभा को प्रत्यक्ष लोकतंत्र की सबसे अहम इकाई का दर्जा मिले।

सिफ़ारिश का नतीजा

  1. सिंघवी समिति 1986
  2. राजीव गांधी सरकार
  3. 64वाँ संशोधन विधेयक 1989

11. पी.के. थुंगन समिति

  • जिला परिषद् को शक्तिशाली बनाया जाए; इसका मुख्य कार्यकारी अधिकारी जिला कलेक्टर हो।
  • पंचायती राज को संवैधानिक दर्जा; कार्यकाल 5 वर्ष।
  • संस्थाओं में महिलाओं को आरक्षण; राज्य वित्त आयोग का गठन।

12. वी.एन. गाडगिल समिति

  • पंचायती राज को संवैधानिक दर्जा और त्रिस्तरीय ढाँचा।
  • ग्राम, खण्ड, ज़िला ➜ हर स्तर के सदस्य जनता सीधे चुने।
  • चुनाव के लिए राज्य निर्वाचन आयोग; कार्यकाल 5 वर्ष तय।

13. राजस्थान सरकार की समितियाँ

समितिवर्षमुख्य बात
सादिक अली1964प्रधान व जिला प्रमुख का चुनाव बड़े निर्वाचक मण्डल से — जिसमें ग्राम पंचायतों के अध्यक्ष और सभी सदस्य हों
गिरधारी लाल व्यास1973ग्राम सेवक / सचिव / ग्राम विकास अधिकारी के पद बनें; पर्याप्त वित्तीय साधन
हरलाल सिंह खर्रा1988इसकी अनुशंसा पर DRDA (जिला ग्रामीण विकास प्राधिकरण) जिला परिषद् में मिलाया गया

14. 73वाँ संविधान संशोधन

  • नया भाग ➜ भाग-9
  • अनुच्छेद ➜ 243 से 243ण (16)
  • नई अनुसूची ➜ 11वीं (29 विषय)

इस संशोधन ने पंचायतों को संवैधानिक दर्जा दिया। इससे भाग-9 में अनुच्छेद 243 से 243ण तक कुल 16 अनुच्छेद और 11वीं अनुसूची (29 विषय) जुड़ी, जिन विषयों पर पंचायतें काम करती हैं।

15. संशोधन की यात्रा

काल / क्रमघटनाविवरण
22 दिसम्बर 1992लोकसभानरसिम्हा राव सरकार के 73वें-74वें विधेयक पास।
23 दिसम्बर 1992राज्यसभादूसरे सदन की मंज़ूरी।
—17 राज्यविधानसभाओं का अनुमोदन।
20 अप्रैल 1993राष्ट्रपतिस्वीकृति मिली।

16. अनुच्छेद 243–243ण

अनुच्छेदविषय
243परिभाषाएँ
243क (A)ग्राम सभा
243ख (B)पंचायतों का गठन
243ग (C)पंचायतों की संरचना

अनुच्छेद 243 में जिन शब्दों के अर्थ दिए गए हैं — जिला, ग्राम सभा, मध्यवर्ती स्तर, पंचायत, पंचायत क्षेत्र, जनसंख्या, ग्राम आदि।

रिवीजन पॉइंटर्स

  1. भारत में स्थानीय स्वशासन के जनक लॉर्ड रिपन हैं और उनका 1882 का प्रस्ताव इस विषय का «मैग्नाकार्टा» कहलाता है।
  2. राजस्थान में सबसे पहले बीकानेर रियासत ने 1928 में ग्राम पंचायत अधिनियम बनाया।
  3. 2 अक्टूबर 1959 को नागौर के बगदरी गाँव में पंचायती राज शुरू हुआ और राजस्थान इसे अपनाने वाला पहला राज्य बना।
  4. उद्घाटन नेहरू ने किया, मुख्यमंत्री सुखाड़िया और राज्यपाल गुरुमुख निहाल सिंह थे — तीनों नाम साथ याद रखें।
  5. बलवंत राय मेहता समिति (1957) ने त्रिस्तरीय ढाँचा सुझाया — ग्राम पंचायत, पंचायत समिति, जिला परिषद्।
  6. अशोक मेहता समिति (1977) की पहचान द्विस्तरीय ढाँचा है — जिला स्तर और मण्डल स्तर।
  7. GVK राव समिति (1985) ने तब की संस्थाओं को «बिना जड़ की घास» कहा और 4 स्तरों का ढाँचा सुझाया।
  8. समितियों का क्रम: बलवंत → अशोक → GVK → सिंघवी → थुंगन → गाडगिल।
  9. 73वें संशोधन से भाग-9, अनुच्छेद 243 से 243ण (16 अनुच्छेद) और 11वीं अनुसूची (29 विषय) जुड़े।

अगले भाग में 73वें संशोधन के शेष प्रावधान — ग्राम सभा, आरक्षण, अवधि, 11वीं अनुसूची — और राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994।

पिछला भाग: संभागीय व्यवस्था एवं उपखण्ड से गाँव तक

अगला भाग: 73वाँ संविधान संशोधन एवं राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994

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