मुख्यमंत्री का पद एवं मुख्यमंत्री के कार्य व शक्तियाँ – Rajasthan Polity Chapter 3

मुख्यमंत्री का पद, नियुक्ति, कार्य व शक्तियाँ, उपमुख्यमंत्री और राज्य मंत्रिपरिषद् का आकार व उत्तरदायित्व।

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In this chapter (24 sections)
  1. मुख्यमंत्री का पद
  2. परिचय व अनुच्छेद
  3. नियुक्ति — अनु. 164(1)
  4. योग्यता, शपथ, वेतन
  5. कार्यकाल व पद से हटना
  6. अनु. 167 — कर्तव्य
  7. मुख्यमंत्री के कार्य व शक्तियाँ
  8. राज्यपाल के संबंध में
  9. मंत्रिपरिषद् के संबंध में
  10. विधानमण्डल के संबंध में
  11. अन्य शक्तियाँ
  12. रीति व सलाहकार समिति
  13. उपमुख्यमंत्री व अन्य पद
  14. उपमुख्यमंत्रियों की सूची
  15. उपमुख्यमंत्री — तथ्य
  16. संसदीय सचिव
  17. किचन व छाया कैबिनेट
  18. राज्य मंत्रिपरिषद्
  19. आकार — अनु. 164(1क)
  20. मंत्रिमण्डल बनाम मंत्रिपरिषद्
  21. उत्तरदायित्व व सदन में अधिकार
  22. कार्यकाल व भंग होना
  23. मंत्रिपरिषद् के कार्य
  24. रिवीजन पॉइंटर्स

राज्य में असली सत्ता मुख्यमंत्री के हाथ में रहती है, जबकि राज्यपाल संवैधानिक मुखिया भर है; ठीक वैसे जैसे केन्द्र में प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति का रिश्ता है। इस भाग में मुख्यमंत्री की नियुक्ति, योग्यता, कार्यकाल, कर्तव्य और शक्तियाँ दी गई हैं, फिर उपमुख्यमंत्री व अन्य पद, और अंत में राज्य मंत्रिपरिषद् का आकार, उत्तरदायित्व, कार्यकाल व कार्य।

इस विषय का इंटरैक्टिव माइंड मैप — मुख्यमंत्री एवं राज्य मंत्रिपरिषद्, 2 चॉक-बोर्ड चित्र, 2 नक्शे, 28 फ्लैशकार्ड और 12 अभ्यास-प्रश्न के साथ। यहाँ हर खंड के चुने हुए बिंदु हैं; पूरी तालिकाएँ, शेष तथ्य और रटने की ट्रिक माइंड मैप में हैं।
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1. मुख्यमंत्री का पद

संसदीय शासन में राज्य के पास दो प्रधान होते हैं: नाम का प्रधान राज्यपाल और काम का प्रधान मुख्यमंत्री। केन्द्र में जो जगह प्रधानमंत्री की है, राज्य में वही मुख्यमंत्री की।

  • भाग ➜ 6
  • सामान्य कार्यकाल ➜ 5 वर्ष
  • न्यूनतम आयु ➜ 25 वर्ष

… शेष 3 बिंदु — पूरी सूची माइंड मैप में देखें

2. परिचय व अनुच्छेद

शासन के दो स्तर

संघ वाली व्यवस्था में सरकार दो स्तरों पर चलती है — केन्द्र और राज्य। राज्य स्तर पर कार्यपालिका के भी दो रूप हैं:

कार्यपालिकाकौनभूमिका
औपचारिक (नाममात्र)राज्यपालराज्य का संवैधानिक प्रमुख
वास्तविकमुख्यमंत्रीसरकार और मंत्रिपरिषद् का प्रमुख; राज्य का सर्वोच्च नेता
  • मंत्रिपरिषद् मुख्यमंत्री की अगुवाई में काम करती है।
  • मुख्यमंत्री से जुड़े प्रावधान संविधान के भाग 6 में हैं।

मुख्य अनुच्छेद

अनुच्छेदविषय
163राज्यपाल को सहायता व सलाह देने हेतु मंत्रिपरिषद्
164मंत्रियों से जुड़े अन्य प्रावधान
166राज्य सरकार के कार्य का संचालन

3. नियुक्ति — अनु. 164(1)

  • अनु. 163(1): राज्यपाल अपने विवेक वाले कामों को छोड़कर बाकी सभी कामों में एक मंत्रिपरिषद् की सलाह लेगा; उसका मुखिया मुख्यमंत्री होगा।
  • अनु. 164(1): मुख्यमंत्री को राज्यपाल नियुक्त करता है; बाकी मंत्रियों को राज्यपाल मुख्यमंत्री की सलाह पर नियुक्त करता है।
  • सभी मंत्री राज्यपाल के प्रसादपर्यन्त पद पर रहते हैं।

राज्यपाल का विवेक कब काम आता है

  1. नतीजों में कोई भी दल आधे से ज़्यादा सीटें न जीत पाए (त्रिशंकु सदन)।
  2. मुख्यमंत्री की कुर्सी के दो या ज़्यादा दावेदार दल सामने हों।
  3. सदन में ऐसा कोई नेता न दिखे जिसे सब स्वीकार करें।

याद रखें: इन हालात में चुनाव राज्यपाल के विवेक पर है; पर नया मुख्यमंत्री राज्यपाल की तय समय-सीमा में सदन का विश्वास मत जीतकर अपना बहुमत साबित करता है।

4. योग्यता, शपथ, वेतन

योग्यता — अनु. 164(4)

  • संविधान में मुख्यमंत्री के लिए अलग योग्यता नहीं लिखी; जो विधानसभा सदस्य बन सकता है, वही मुख्यमंत्री बन सकता है (जैसे न्यूनतम आयु 25 वर्ष)।
  • प्रायः मुख्यमंत्री पहले से विधायक होता है। बाहर से आया व्यक्ति भी बन सकता है, बशर्ते छह महीने के अंदर विधानमण्डल के किसी एक सदन में पहुँच जाए।

विधानपरिषद् वाला मुख्यमंत्री

  • वह राष्ट्रपति चुनाव में वोट नहीं डाल सकता — अनु. 54 के अनुसार निर्वाचक मण्डल में केवल लोकसभा, राज्यसभा और विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य आते हैं। मनोनीत मुख्यमंत्री भी वोट नहीं डालता।
  • वह विधानसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान नहीं कर सकता।

शपथ — अनु. 164(3)

पद सँभालने से पहले मुख्यमंत्री और हर मंत्री राज्यपाल के सामने पद और गोपनीयता की शपथ लेते हैं। शपथ की इबारत तीसरी अनुसूची में है।

वेतन-भत्ते — अनु. 164(5)

वेतन व भत्ते राज्य विधानमण्डल कानून बनाकर तय करता है। आज मुख्यमंत्री को हर माह 75,000 रुपये वेतन मिलता है।

5. कार्यकाल व पद से हटना

  • सामान्य अवधि 5 वर्ष, पर तय नहीं — वह राज्यपाल के प्रसादपर्यन्त पद पर है।
  • “प्रसादपर्यन्त” का व्यवहार में अर्थ है — जब तक विधानसभा में बहुमत साथ है। बहुमत खोते ही समय से पहले इस्तीफ़ा देना पड़ता है।
  • त्यागपत्र राज्यपाल को सौंपा जाता है।

मुख्यमंत्री का इस्तीफ़ा

  1. मुख्यमंत्री त्यागपत्र देता है
  2. पूरी मंत्रिपरिषद् का त्यागपत्र माना जाता है
  3. मंत्रिपरिषद् समाप्त

6. अनु. 167 — कर्तव्य

खण्डमुख्यमंत्री का कर्तव्य
167(क)राज्य के प्रशासन और प्रस्तावित कानूनों पर मंत्रिपरिषद् के सभी निर्णय राज्यपाल तक पहुँचाना
167(ख)प्रशासन या विधायन से जुड़ी जो जानकारी राज्यपाल माँगे, वह देना
167(ग)किसी मंत्री के अकेले लिए गए निर्णय को, जिस पर मंत्रिपरिषद् ने विचार नहीं किया, राज्यपाल के कहने पर मंत्रिपरिषद् के सामने रखना

याद रखें: राज्यपाल किसी विषय पर सूचना माँगे तो मुख्यमंत्री उसे देने के लिए बाध्य है — यही कर्तव्य उसे राज्यपाल और मंत्रिपरिषद् के बीच की कड़ी बनाता है।

7. मुख्यमंत्री के कार्य व शक्तियाँ

ट्रिक: चारों खानों को “रा-मं-वि-अ” (राज्यपाल, मंत्रिपरिषद्, विधानमण्डल, अन्य) से याद रखें।

8. राज्यपाल के संबंध में

  • प्रशासन और कानून बनाने के प्रस्तावों पर कैबिनेट के फ़ैसले समय-समय पर राज्यपाल को बताता है।
  • राज्यपाल को विधानसभा भंग करने की सिफ़ारिश कर सकता है।
  • सदन का सत्र बुलाने और सत्रावसान के बारे में राज्यपाल को सलाह देता है।

… शेष 2 बिंदु — पूरी सूची माइंड मैप में देखें

9. मंत्रिपरिषद् के संबंध में

मुख्यमंत्री सरकार का वास्तविक प्रधान है — राज्य में उसकी भूमिका वैसी ही है जैसी केन्द्र में प्रधानमंत्री की।

  • अपनी पसंद से मंत्रिपरिषद् बनाता है और मंत्रियों में विभाग बाँटता है।
  • मंत्रियों की नियुक्ति, विभागों में फेरबदल, इस्तीफ़ा मानने या न मानने तथा बर्ख़ास्तगी के लिए राज्यपाल को सलाह देता है।
  • सभी विभागों के बीच तालमेल बिठाता है।

… शेष 3 बिंदु — पूरी सूची माइंड मैप में देखें

10. विधानमण्डल के संबंध में

  • विधानसभा में बहुमत पक्ष की अगुवाई करते हुए वह सदन का नेता कहलाता है।
  • सारे सरकारी विधेयक उसके निर्देशन और सलाह से तैयार होते हैं।
  • सरकार की नीतियों की घोषणा सदन में वही करता है।

11. अन्य शक्तियाँ

  • राज्य सरकार का मुख्य प्रवक्ता।
  • अपने क्षेत्र की क्षेत्रीय परिषद् का उपाध्यक्ष — यह पद राज्यों के मुख्यमंत्रियों में बारी-बारी से एक-एक वर्ष के लिए आता है।
  • तीन राष्ट्रीय मंचों पर राज्य का प्रतिनिधि — अंतर्राज्यीय परिषद्, राष्ट्रीय विकास परिषद् और नीति आयोग की शासी परिषद्।
परिषद्अध्यक्षराजस्थान / मुख्यमंत्री
क्षेत्रीय परिषदें (देश में 5)केन्द्रीय गृह मंत्रीराजस्थान उत्तरी क्षेत्रीय परिषद् में; मुख्यमंत्री बारी से उपाध्यक्ष
अंतर्राज्यीय परिषद्प्रधानमंत्रीसदस्य
राष्ट्रीय विकास परिषद्प्रधानमंत्रीसदस्य

12. रीति व सलाहकार समिति

रीति (RITI)

पूरा नाम: राजस्थान इंस्टीट्यूट फॉर ट्रांसफॉर्मेशन एण्ड इनोवेशन। पहले की आर्थिक सुधार सलाहकार परिषद् (मुख्यमंत्री राजस्थान) को हटाकर यह संस्था लाई गई।

  • अध्यक्ष ➜ मुख्यमंत्री
  • उपाध्यक्ष व पूर्णकालिक सदस्य ➜ मुख्यमंत्री चुनते हैं
  • लक्ष्य ➜ विकसित राजस्थान 2047
  • काम: विकसित राजस्थान 2047 का खाका और नीति-निर्धारण।
  • अलग-अलग क्षेत्रों के विकास के लिए नीति बनाकर सरकार को सुझाव देना।

पृष्ठभूमि: जिस परिषद् की जगह रीति आई, वह बजट घोषणा 180 (2019-20) में घोषित हुई थी और 7 मार्च 2020 को बनी; उस समय इसके अध्यक्ष अशोक गहलोत थे और यह सरकार के थिंक टैंक का काम करती थी।

मुख्यमंत्री सलाहकार समिति

  • गठन ➜ 21 मई 2022
  • अध्यक्ष ➜ मुख्यमंत्री
  • सदस्य ➜ 6 सलाहकार सदस्य + 1 सदस्य सचिव

13. उपमुख्यमंत्री व अन्य पद

संविधान में उपमुख्यमंत्री पद का कोई उल्लेख नहीं है; यह राजनीतिक व्यवस्था से बना पद है। राजस्थान में अब तक 7 उपमुख्यमंत्री हुए हैं।

14. उपमुख्यमंत्रियों की सूची

क्र.उपमुख्यमंत्रीवर्ष · अवधिमुख्यमंत्रीदल / ख़ास बात
1टीकाराम पालीवाल1952–54 · 2 वर्ष 13 दिनजयनारायण व्यासकांग्रेस · पहले उपमुख्यमंत्री
2हरिशंकर भाभड़ा1993–98 · 4 वर्ष 11 माह 28 दिनभैरोंसिंह शेखावतभाजपा · विधानसभा अध्यक्ष भी रहे
3बनवारीलाल बैरवा2002–03 · 1 वर्ष 6 माह 17 दिनअशोक गहलोतकांग्रेस
4कमला बेनीवाल2003 (10 माह 24 दिन)अशोक गहलोतकांग्रेस · पहली महिला उपमुख्यमंत्री

15. उपमुख्यमंत्री — तथ्य

  • पहले उपमुख्यमंत्री ➜ टीकाराम पालीवाल
  • पहली महिला ➜ कमला बेनीवाल
  • पहले ग़ैर-कांग्रेसी ➜ हरिशंकर भाभड़ा

एक साथ दो उपमुख्यमंत्री

16वीं विधानसभा में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के साथ 15 दिसम्बर 2023 को दो उपमुख्यमंत्रियों ने शपथ ली:

उपमुख्यमंत्रीविधानसभा क्षेत्र
दिया कुमारीविद्याधरनगर (जयपुर)
प्रेमचंद बैरवादूदू

16. संसदीय सचिव

  • राजस्थान में राज्यमंत्री और संसदीय सचिव पद की व्यवस्था मोहनलाल सुखाड़िया के मुख्यमंत्री काल में शुरू हुई।
  • नियुक्ति मुख्यमंत्री करता है और शपथ भी मुख्यमंत्री ही दिलाता है।
  • उद्देश्य: मंत्रियों के काम में सहायता।

17. किचन व छाया कैबिनेट

नामकौन बनाता हैमतलब
किचन कैबिनेट (अनौपचारिक मंत्रिमण्डल)मुख्यमंत्री के आसपासमुख्यमंत्री के 2–4 भरोसेमंद मंत्रियों का छोटा घेरा
छाया मंत्रिमण्डल (शैडो कैबिनेट)विधानसभा का मुख्य विपक्षी दलसरकार के अलग-अलग विभागों पर नज़र रखना

18. राज्य मंत्रिपरिषद्

अनु. 163(1): राज्यपाल के विवेक वाले कामों को अलग रख दें, तो बाकी हर काम में उसे राय देने वाली संस्था मंत्रिपरिषद् है, और इसकी अगुवाई मुख्यमंत्री करता है।

19. आकार — अनु. 164(1क)

  • मुख्यमंत्री समेत कुल मंत्री विधानसभा की कुल सदस्य संख्या के 15% से ज़्यादा नहीं हो सकते।
  • पर किसी भी राज्य में मुख्यमंत्री समेत मंत्री 12 (11+1) से कम नहीं होंगे।
  • यह सीमा 91वें संविधान संशोधन, 2003 ने अनु. 164(1) में खण्ड “क” जोड़कर लागू की — 1 जनवरी 2004 से प्रभावी।

राजस्थान का हिसाब

  1. विधानसभा = 200 सदस्य
  2. 200 का 15% = 30
  3. मंत्री: न्यूनतम 12, अधिकतम 30

20. मंत्रिमण्डल बनाम मंत्रिपरिषद्

आधारमंत्रिमण्डल (कैबिनेट)मंत्रिपरिषद्
संविधान मेंमूल संविधान में नहीं; 44वें संशोधन, 1978 से अनु. 352 में जुड़ाकेन्द्र — अनु. 74, राज्य — अनु. 163
आकारछोटाबड़ा
शक्तिअधिककम

21. उत्तरदायित्व व सदन में अधिकार

सामूहिक उत्तरदायित्व — अनु. 164(2)

  • मंत्रिपरिषद् मिलकर विधानसभा के प्रति जवाबदेह है।
  • एक मंत्री के विरुद्ध भी अविश्वास प्रस्ताव पास हो जाए तो पूरी मंत्रिपरिषद् को जाना पड़ता है।
  • परिषद् का फ़ैसला हर मंत्री का फ़ैसला है; जो मंत्री असहमत हो, उसे पद छोड़ना पड़ता है।

व्यक्तिगत उत्तरदायित्व

मंत्री राज्यपाल के प्रसादपर्यन्त पद पर हैं — राज्यपाल मुख्यमंत्री की सलाह पर किसी मंत्री को नियुक्त भी कर सकता है और बर्ख़ास्त भी।

सदन में मंत्री — अनु. 177

हर मंत्री विधानसभा में, विधानपरिषद् हो तो दोनों सदनों में, और जिस समिति में वह सदस्य है उसमें बोल सकता है और कार्यवाही में भाग ले सकता है; पर इस अनुच्छेद के बल पर उसे वोट देने का अधिकार नहीं मिलता।

अयोग्यता व सदस्यता

अनुच्छेदप्रावधान
164(1ख)दल-बदल (दसवीं अनुसूची, पैरा 2) में सदस्यता गँवाने वाला व्यक्ति मंत्री पद भी नहीं पा सकता
164(3)पद ग्रहण से पहले राज्यपाल के सामने तीसरी अनुसूची की शपथ
164(4)लगातार 6 माह तक विधानमण्डल का सदस्य न रहने वाला मंत्री उस अवधि के बाद मंत्री नहीं रहेगा

22. कार्यकाल व भंग होना

  • मंत्रिपरिषद् का सामान्य कार्यकाल 5 वर्ष।
  • विधानसभा में बहुमत न रहे तो उसे भंग किया जा सकता है।
  • मुख्यमंत्री के इस्तीफ़े से मंत्रिपरिषद् अपने-आप समाप्त।

मंत्री पर मुकदमे की अनुमति

5 नवम्बर 2004 को उच्चतम न्यायालय ने कहा: पहली नज़र में (प्रथम दृष्टया) केस बनता दिखे तो मंत्री पर अभियोजन की हरी झंडी राज्यपाल खुद दे सकता है — मंत्रिपरिषद् के इनकार के बावजूद।

23. मंत्रिपरिषद् के कार्य

  • नीति तय करना।
  • कानून और नियम बनाना।
  • राज्यपाल का अभिभाषण तैयार करना।
  • बजट तैयार करना।

रिवीजन पॉइंटर्स

  1. मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल अनु. 164(1) में करता है; बाकी मंत्री मुख्यमंत्री की सलाह पर नियुक्त होते हैं।
  2. मुख्यमंत्री बनने की न्यूनतम आयु 25 वर्ष; विधानमण्डल का सदस्य न हो तो छह महीने के भीतर किसी एक सदन में पहुँचना ज़रूरी है।
  3. शपथ अनु. 164(3) में तीसरी अनुसूची की इबारत से होती है; वेतन-भत्ते विधानमण्डल क़ानून बनाकर तय करता है (अनु. 164(5))।
  4. अनु. 167 के तीन कर्तव्य — परिषद् के फ़ैसले राज्यपाल तक पहुँचाना, माँगी गई जानकारी देना और अकेले मंत्री का निर्णय परिषद् के सामने रखना।
  5. मुख्यमंत्री के इस्तीफ़े का मतलब पूरी मंत्रिपरिषद् का इस्तीफ़ा और परिषद् का अपने-आप समाप्त होना।
  6. पहले उपमुख्यमंत्री टीकाराम पालीवाल, पहली महिला कमला बेनीवाल और पहले ग़ैर-कांग्रेसी हरिशंकर भाभड़ा।
  7. मंत्रिपरिषद् का आकार विधानसभा के 15% तक सीमित है (अनु. 164(1क), 91वाँ संशोधन); राजस्थान में न्यूनतम 12 और अधिकतम 30 मंत्री।
  8. सामूहिक उत्तरदायित्व अनु. 164(2) में है — एक मंत्री के विरुद्ध भी अविश्वास पास हो तो पूरी मंत्रिपरिषद् को जाना पड़ता है।
  9. 16वीं विधानसभा में 15 दिसम्बर 2023 को दिया कुमारी और प्रेमचंद बैरवा ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली।

अगले भाग में भजनलाल शर्मा सरकार की वर्तमान मंत्रिपरिषद् और विभागों का बँटवारा, 1949 से अब तक के मुख्यमंत्रियों की सूची तथा मुख्यमंत्री-रिकॉर्ड।

पिछला भाग: राज्यपाल: वित्तीय, आपात व न्यायिक एवं विवेकीय शक्तियाँ व आयोग

अगला भाग: मुख्यमंत्री एवं राज्य मंत्रिपरिषद्: वर्तमान मंत्रिपरिषद् एवं राजस्थान के मुख्यमंत्री

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इस अध्याय की पूरी तैयारी चाहिए? ऊपर दिए नोट्स हर खंड का चुना हुआ हिस्सा हैं। पूरी तालिकाएँ, बाक़ी बिंदु, याद रखने की ट्रिक, नक्शे-चित्र और अभ्यास-प्रश्न मुख्यमंत्री एवं राज्य मंत्रिपरिषद् के माइंड मैप में हैं। राजस्थान जी.के. के सभी विषय एक ही पास में उपलब्ध हैं।
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