प्रमुख आयोग: राज्य निर्वाचन आयोग एवं राज्य वित्त आयोग – Rajasthan Polity Chapter 21

राज्य मानवाधिकार आयोग का शेष भाग, राज्य निर्वाचन आयोग, राज्य वित्त आयोग और राज्य महिला आयोग।

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In this chapter (16 sections)
  1. सीमाएँ व शिकायत
  2. अध्यक्ष व तथ्य
  3. राज्य निर्वाचन आयोग
  4. गठन व बनावट
  5. राज्य निर्वाचन आयुक्त
  6. सचिवालय व कार्य
  7. आयुक्तों की सूची व तथ्य
  8. राज्य वित्त आयोग
  9. संवैधानिक प्रावधान
  10. बनावट व कार्यकाल
  11. छठा आयोग व सूची
  12. राज्य महिला आयोग
  13. गठन व कार्यकाल
  14. हटाना, कार्य, शक्तियाँ
  15. अध्यक्ष व तथ्य
  16. रिवीजन पॉइंटर्स

चुनाव कराना, कर-राजस्व का बँटवारा सुझाना और महिलाओं की शिकायत सुनना — इन तीनों काम के लिए राज्य में अलग-अलग आयोग हैं, और हर एक की नियुक्ति व हटाने की व्यवस्था अलग है। विद्यार्थी सबसे ज़्यादा यहीं उलझते हैं। इस भाग में मानवाधिकार आयोग की सीमाएँ व अध्यक्ष दिए गए हैं। फिर राज्य निर्वाचन आयोग, राज्य वित्त आयोग और राज्य महिला आयोग के गठन, कार्य और सूचियाँ क्रम से आती हैं।

इस विषय का इंटरैक्टिव माइंड मैप — प्रमुख आयोग, 2 चॉक-बोर्ड चित्र, 2 नक्शे, 2 चार्ट, 30 फ्लैशकार्ड और 12 अभ्यास-प्रश्न के साथ। यहाँ हर खंड के चुने हुए बिंदु हैं; पूरी तालिकाएँ, शेष तथ्य और रटने की ट्रिक माइंड मैप में हैं।
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1. सीमाएँ व शिकायत

आयोग इन मामलों की जाँच नहीं करता

  • अदालत में लंबित मामला ➜ अदालत की अनुमति के बिना नहीं।
  • सेना, श्रम या औद्योगिक विवाद के मामले।
  • जो मामला किसी दूसरे आयोग में लंबित हो।

… शेष 2 बिंदु — पूरी सूची माइंड मैप में देखें

पंजीयन, सुनवाई और शिकायत

  • बैठक का समय-स्थान अध्यक्ष तय करते हैं; कार्य-पद्धति आयोग खुद तय करता है।
  • कामकाज के लिए राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग विनियम 2001 लागू।
  • शिकायत किसी भी माध्यम से — फ़ोन, स्वयं आकर, पत्र, फ़ैक्स, तार आदि।

जाँच के दौरान/बाद

  • पीड़ित को तुरंत अंतरिम सहायता देने की सिफ़ारिश सरकार/प्राधिकारी से।
  • सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट से निर्देश, आदेश या रिट के लिए अनुरोध।

2. अध्यक्ष व तथ्य

क्र.अध्यक्षकार्यकालविशेष
1कांता कुमारी भटनागर23.03.2000 – 11.08.2000पहली व अकेली महिला अध्यक्ष · सबसे छोटा कार्यकाल
2सैय्यद सगीर अहमद16.02.2001 – 03.06.2004सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश रहे
3अमरसिंह गोदारा04.06.2004 – 08.07.2006पहले कार्यवाहक अध्यक्ष
4नगेन्द्र कुमार जैन16.07.2006 – 15.07.2010सबसे लंबा कार्यकाल

… शेष 7 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें

  • सदस्य — सबसे लंबा कार्यकाल ➜ पुखराज सीरवी
  • सदस्य — सबसे छोटा कार्यकाल ➜ नमोनारायण मीणा
  • सदस्य जो लोकसभा सांसद रहे ➜ नमोनारायण मीणा

3. राज्य निर्वाचन आयोग

  • स्थापना आदेश ➜ 17 जून 1994 (राज्यपाल)
  • काम शुरू ➜ 1 जुलाई 1994
  • आधार ➜ राज. पंचायती राज अधि. 1994, धारा 120

… शेष 3 बिंदु — पूरी सूची माइंड मैप में देखें

ध्यान दें: सांसद और विधायक के चुनाव भारत निर्वाचन आयोग कराता है; पंचायत व नगरीय निकाय के चुनाव राज्य निर्वाचन आयोग।

4. गठन व बनावट

  • राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा 120 के तहत राज्यपाल ने 17 जून 1994 को आयोग बनाने का आदेश दिया; आयोग 1 जुलाई 1994 से काम में आया।
  • संविधान में दो जगह उल्लेख ➜ पंचायतों के लिए भाग 9, अनु. 243ट (243K) और नगरीय निकायों के लिए भाग 9क, अनु. 243यक (243ZA)।
  • इन अनुच्छेदों में आयोग का अर्थ ही एक राज्य निर्वाचन आयुक्त है — इसलिए यह एक-सदस्यीय निकाय है।

5. राज्य निर्वाचन आयुक्त

  • 243ट(1) ➜ नियुक्ति राज्यपाल करते हैं; राजस्थान में आयुक्त IAS अधिकारी रहे हैं।
  • पद पर 5 वर्ष; 65 की उम्र पहले आ जाए तो उसी दिन तक।
  • 243ट(2) ➜ विधानमंडल के कानून के अधीन, सेवा-शर्तें और कार्यकाल राज्यपाल नियम बनाकर तय करते हैं।

कार्यकाल का बदलाव

  1. गठन के समय: 6 वर्ष या 62 वर्ष
  2. दूसरे आयुक्त नेकराम भसीन का प्रस्ताव: 5 वर्ष या 65 वर्ष
  3. तीसरे आयुक्त इन्द्रजीत खन्ना की नियुक्ति इसी नई शर्त पर

6. सचिवालय व कार्य

सचिवालय

  • आयुक्त के काम में हाथ बँटाने को सचिवालय का मुखिया — सचिव, जिसे मुख्य निर्वाचन अधिकारी भी कहते हैं।
  • पंचायती राज अधि. 1994 की धारा 119 के तहत बी.बी. मोहंती पहले मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सचिव) बने।
  • एक उपसचिव और एक सहायक सचिव का पद भी।

आयोग के काम

  • पंचायती राज संस्थाओं व नगरीय निकायों के चुनाव कराना।
  • चुनाव ठीक से हों, इसके लिए चुनाव अधिकारियों की नियुक्ति।
  • परिसीमन और आरक्षण का काम।
  • राज्यपाल को वार्षिक प्रतिवेदन।
  • चुनाव पर संदेह या विवाद हो तो जाँच हेतु अधिकारी नियुक्त करना; चुनाव चिह्नों का आवंटन और उनके विवाद सुलझाना।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी

  • राज्य सरकार का अधिकारी, जिसे आयोग राज्य सरकार की सलाह से नियुक्त करता है।
  • काम: राज्य स्तर की सभी मतदाता सूचियों की तैयारी, पुनरीक्षण और सुधार की देखरेख; सभी चुनावों के संचालन की देखरेख; आयोग जो और शक्तियाँ दे, उनका प्रयोग।

ज़िला निर्वाचन अधिकारी

  • हर ज़िले के लिए आयोग, राज्य सरकार से सलाह कर, राज्य का एक अधिकारी नामित करता है; ज़रूरत हो तो एक ज़िले में एक से अधिक।
  • मुख्य निर्वाचन अधिकारी के नियंत्रण में ज़िले की मतदाता सूची बनाने व सुधारने के कामों में समन्वय और देखरेख।
  • राजस्थान में ज़िला कलेक्टर ही ज़िला निर्वाचन अधिकारी।

7. आयुक्तों की सूची व तथ्य

क्र.आयुक्तकार्यकालविशेष
1अमरसिंह राठौड़01.07.1994 – 30.03.2000पहले आयुक्त · सबसे लंबा कार्यकाल
2नेकराम भसीन01.07.2000 – 10.08.2002सबसे छोटा कार्यकाल
3इन्द्रजीत खन्ना26.12.2002 – 26.12.2007पहले जिन्हें 5 वर्ष/65 वर्ष की शर्त पर नियुक्ति
4अशोक कुमार पाण्डे01.10.2008 – 30.09.2013
  • आयोग ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन का पहला प्रयोग नगरपालिका चुनाव में किया।
  • 2024–25 में आयोग के सचिव (CEO) — IAS नवीन महाजन।

8. राज्य वित्त आयोग

उद्देश्य — पंचायतों (और नगर निकायों) की वित्तीय स्थिति की समीक्षा, राज्य की संचित निधि से उन्हें अनुदान की सिफ़ारिश, करों का बँटवारा, और राज्यपाल के सौंपे दूसरे काम।

  • प्रकृति ➜ संवैधानिक
  • पंचायतों हेतु ➜ भाग 9 · अनु. 243झ (243I)
  • नगरों हेतु ➜ भाग 9क · अनु. 243म (243Y)

9. संवैधानिक प्रावधान

  • 243झ(1) ➜ हर पाँच साल बीतने पर राज्यपाल नया वित्त आयोग बनाते हैं; उसका काम पंचायतों के धन की हालत परखना है।
  • 243म(1) ➜ वही आयोग नगरपालिकाओं की वित्तीय स्थिति की भी समीक्षा करता है।

सिफ़ारिशें किन बातों पर (पंचायत और नगरपालिका दोनों के लिए)

  1. राज्य जो कर, शुल्क, पथकर और फ़ीस वसूलता है, उनकी शुद्ध आय का राज्य और स्थानीय निकायों में बँटवारा।
  2. कौन-से कर, शुल्क, पथकर, फ़ीस स्थानीय निकाय स्वयं लगाएँ और रखें।
  3. राज्य की संचित निधि से सहायता-अनुदान के सिद्धांत।

243झ(4) और 243म(2) — राज्यपाल आयोग की हर सिफ़ारिश, उस पर हुई कार्यवाही के स्पष्टीकरण ज्ञापन के साथ, विधानमंडल के सामने रखवाते हैं।

10. बनावट व कार्यकाल

  • 5 सदस्यीय निकाय — 1 अध्यक्ष + 4 सदस्य।
  • नियुक्ति राज्यपाल करते हैं; पर अध्यक्ष-सदस्यों की योग्यता और चयन का तरीका राज्य विधानमंडल तय करता है।
  • कार्यकाल 5 वर्ष; अध्यक्ष-सदस्यों की न्यूनतम या अधिकतम आयु का कोई उल्लेख नहीं।

11. छठा आयोग व सूची

  • छठा राज्य वित्त आयोग — गठन 12 अप्रैल 2021; अवधि 2020-21 से 2024-25।
  • अध्यक्ष प्रद्युम्न सिंह; सदस्य लक्ष्मण सिंह रावत और अशोक लोहाटी।

छठे आयोग की सिफ़ारिशें

  • राज्य के अपने शुद्ध कर राजस्व का 6.75% स्थानीय निकायों को।
  • इसका 75.10% पंचायती राज संस्थाओं को और 24.90% नगरीय निकायों को — आधार जनगणना 2011।
  • पंचायती राज के भीतर बँटवारा 5 : 20 : 75 — ज़िला परिषद् : पंचायत समिति : ग्राम पंचायत।
आयोगअध्यक्षगठनअवधि
पहलाकृष्ण कुमार गोयल24.04.199401.04.1995 – 31.03.2000
दूसराहीरालाल देवपुरा07.05.199901.04.2000 – 31.03.2005
तीसरामाणिकचंद सुराणामई 200401.04.2005 – 31.03.2010

12. राज्य महिला आयोग

  • विधेयक पेश ➜ 23 अप्रैल 1999
  • गठन ➜ 15 मई 1999 (अधि. 1999, धारा 3)
  • प्रकृति ➜ गैर-संवैधानिक / सांविधिक · परामर्शकारी

13. गठन व कार्यकाल

  • राज्य सरकार ने 23 अप्रैल 1999 को विधानसभा में विधेयक रखा; पारित होने पर 15 मई 1999 की अधिसूचना से राजस्थान राज्य महिला आयोग अधिनियम 1999 की धारा 3 के तहत आयोग बना।
  • धारा 3 ➜ 1 अध्यक्ष + 3 सदस्य, जिनमें 1 सदस्य सचिव; सभी को राज्य सरकार नियुक्त करती है।
  • धारा 3(2) ➜ सदस्य सचिव समेत अधिकतम 4 सदस्य; इनमें एक SC/ST की और एक OBC की महिला होगी।
  • धारा 3(5) ➜ सचिव राज्य सरकार नियुक्त करती है; वह आयोग से सौंपी गई शक्तियाँ और काम संभालता है।

बैठक (धारा 5)

  • सामान्य नियम ➜ दो महीने में न्यूनतम एक बैठक; दिन व समय अध्यक्ष चुनते हैं।
  • अध्यक्षता अध्यक्ष करते हैं; वे न हों तो उपस्थित सदस्यों में से कोई एक।
  • गणपूर्ति ➜ अध्यक्ष सहित 3 सदस्य।

14. हटाना, कार्य, शक्तियाँ

धारा 8 — राज्य सरकार इन दशाओं में हटा सकती है

  1. दिवालिया घोषित होना।
  2. किसी अपराध में दोषी ठहराया जाना।
  3. काम करने से मना करना या काम करने में असमर्थ होना।
  • धारा 10 ➜ जाँच करते हुए आयोग सिविल न्यायालय जैसी शक्तियों का प्रयोग करता है।
  • धारा 11 (कार्य) ➜ महिला के साथ हुए ग़लत बर्ताव की पड़ताल, निर्णय और सरकार को कार्यवाही का सुझाव; राज्य भर की पीड़ित महिलाओं की शिकायतों का निवारण; उनके हितों की रक्षा और न्याय दिलाना।
  • धारा 12 ➜ महिला के विरुद्ध हर तरह के अनुचित व्यवहार की जाँच कर निर्णय और सरकार को सिफ़ारिश; सरकार सिफ़ारिश मिलने के 3 माह में फ़ैसला कर आयोग को बताती है।

ट्रिक: महिला आयोग में नियुक्ति, त्यागपत्र, हटाना — तीनों राज्य सरकार के पास; राज्यपाल या राष्ट्रपति की भूमिका नहीं।

15. अध्यक्ष व तथ्य

क्र.अध्यक्षकार्यकाल
1कांता कथूरिया25.05.1999 – 24.05.2002
2प्रो. पवन सुराना28.01.2003 – 27.01.2006
3तारा भंडारी15.04.2006 – 14.04.2009
  • मुख्यमंत्री महिला हेल्पलाइन — 181 (टोल-फ़्री), अगस्त 2012 से; महिला आयोग परिसर में।
  • गरिमा हेल्पलाइन — 1090।
  • राज्य की पहली महिला नीति — 8 मार्च 2000।

रिवीजन पॉइंटर्स

  1. राज्य निर्वाचन आयोग का गठन आदेश 17 जून 1994 को हुआ और काम 1 जुलाई 1994 से शुरू; यह एक-सदस्यीय निकाय है।
  2. निर्वाचन आयुक्त का कार्यकाल अब 5 वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक है; गठन के समय यह 6 वर्ष या 62 वर्ष था।
  3. पहले आयुक्त अमरसिंह राठौड़ का कार्यकाल सबसे लंबा रहा, जबकि सबसे छोटा कार्यकाल नेकराम भसीन का।
  4. राजस्थान में ज़िला कलेक्टर ही ज़िला निर्वाचन अधिकारी होता है।
  5. राज्य वित्त आयोग संवैधानिक है — पंचायतों के लिए अनु. 243झ, नगरों के लिए अनु. 243म; 1 अध्यक्ष + 4 सदस्य और कार्यकाल 5 वर्ष।
  6. छठे वित्त आयोग का गठन 12 अप्रैल 2021 को हुआ, अध्यक्ष प्रद्युम्न सिंह; शुद्ध कर राजस्व का 6.75% स्थानीय निकायों को और पंचायती राज में बँटवारा 5 : 20 : 75।
  7. राज्य महिला आयोग सांविधिक और परामर्शकारी है; गठन 15 मई 1999 को, 1 अध्यक्ष + 3 सदस्य।
  8. महिला आयोग में नियुक्ति, त्यागपत्र और हटाना — तीनों राज्य सरकार के पास हैं।
  9. मानवाधिकार आयोग की पहली और अकेली महिला अध्यक्ष कांता कुमारी भटनागर रहीं, जिनका कार्यकाल सबसे छोटा था।

अगले भाग में राज्य सूचना आयोग और लोकायुक्त की बनावट, नियुक्ति, हटाना व शक्तियाँ, साथ में महाधिवक्ता और महालेखाकार कार्यालय।

पिछला भाग: प्रमुख आयोग: राजस्थान लोक सेवा आयोग एवं राज्य मानवाधिकार आयोग

अगला भाग: प्रमुख आयोग: राज्य सूचना आयोग एवं लोकायुक्त

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