चुनाव कराना, कर-राजस्व का बँटवारा सुझाना और महिलाओं की शिकायत सुनना — इन तीनों काम के लिए राज्य में अलग-अलग आयोग हैं, और हर एक की नियुक्ति व हटाने की व्यवस्था अलग है। विद्यार्थी सबसे ज़्यादा यहीं उलझते हैं। इस भाग में मानवाधिकार आयोग की सीमाएँ व अध्यक्ष दिए गए हैं। फिर राज्य निर्वाचन आयोग, राज्य वित्त आयोग और राज्य महिला आयोग के गठन, कार्य और सूचियाँ क्रम से आती हैं।
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1. सीमाएँ व शिकायत
आयोग इन मामलों की जाँच नहीं करता
- अदालत में लंबित मामला ➜ अदालत की अनुमति के बिना नहीं।
- सेना, श्रम या औद्योगिक विवाद के मामले।
- जो मामला किसी दूसरे आयोग में लंबित हो।
… शेष 2 बिंदु — पूरी सूची माइंड मैप में देखें
पंजीयन, सुनवाई और शिकायत
- बैठक का समय-स्थान अध्यक्ष तय करते हैं; कार्य-पद्धति आयोग खुद तय करता है।
- कामकाज के लिए राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग विनियम 2001 लागू।
- शिकायत किसी भी माध्यम से — फ़ोन, स्वयं आकर, पत्र, फ़ैक्स, तार आदि।
जाँच के दौरान/बाद
- पीड़ित को तुरंत अंतरिम सहायता देने की सिफ़ारिश सरकार/प्राधिकारी से।
- सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट से निर्देश, आदेश या रिट के लिए अनुरोध।
2. अध्यक्ष व तथ्य
| क्र. | अध्यक्ष | कार्यकाल | विशेष |
|---|---|---|---|
| 1 | कांता कुमारी भटनागर | 23.03.2000 – 11.08.2000 | पहली व अकेली महिला अध्यक्ष · सबसे छोटा कार्यकाल |
| 2 | सैय्यद सगीर अहमद | 16.02.2001 – 03.06.2004 | सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश रहे |
| 3 | अमरसिंह गोदारा | 04.06.2004 – 08.07.2006 | पहले कार्यवाहक अध्यक्ष |
| 4 | नगेन्द्र कुमार जैन | 16.07.2006 – 15.07.2010 | सबसे लंबा कार्यकाल |
… शेष 7 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें
- सदस्य — सबसे लंबा कार्यकाल ➜ पुखराज सीरवी
- सदस्य — सबसे छोटा कार्यकाल ➜ नमोनारायण मीणा
- सदस्य जो लोकसभा सांसद रहे ➜ नमोनारायण मीणा
3. राज्य निर्वाचन आयोग
- स्थापना आदेश ➜ 17 जून 1994 (राज्यपाल)
- काम शुरू ➜ 1 जुलाई 1994
- आधार ➜ राज. पंचायती राज अधि. 1994, धारा 120
… शेष 3 बिंदु — पूरी सूची माइंड मैप में देखें
ध्यान दें: सांसद और विधायक के चुनाव भारत निर्वाचन आयोग कराता है; पंचायत व नगरीय निकाय के चुनाव राज्य निर्वाचन आयोग।
4. गठन व बनावट
- राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा 120 के तहत राज्यपाल ने 17 जून 1994 को आयोग बनाने का आदेश दिया; आयोग 1 जुलाई 1994 से काम में आया।
- संविधान में दो जगह उल्लेख ➜ पंचायतों के लिए भाग 9, अनु. 243ट (243K) और नगरीय निकायों के लिए भाग 9क, अनु. 243यक (243ZA)।
- इन अनुच्छेदों में आयोग का अर्थ ही एक राज्य निर्वाचन आयुक्त है — इसलिए यह एक-सदस्यीय निकाय है।
5. राज्य निर्वाचन आयुक्त
- 243ट(1) ➜ नियुक्ति राज्यपाल करते हैं; राजस्थान में आयुक्त IAS अधिकारी रहे हैं।
- पद पर 5 वर्ष; 65 की उम्र पहले आ जाए तो उसी दिन तक।
- 243ट(2) ➜ विधानमंडल के कानून के अधीन, सेवा-शर्तें और कार्यकाल राज्यपाल नियम बनाकर तय करते हैं।
कार्यकाल का बदलाव
- गठन के समय: 6 वर्ष या 62 वर्ष
- दूसरे आयुक्त नेकराम भसीन का प्रस्ताव: 5 वर्ष या 65 वर्ष
- तीसरे आयुक्त इन्द्रजीत खन्ना की नियुक्ति इसी नई शर्त पर
6. सचिवालय व कार्य
सचिवालय
- आयुक्त के काम में हाथ बँटाने को सचिवालय का मुखिया — सचिव, जिसे मुख्य निर्वाचन अधिकारी भी कहते हैं।
- पंचायती राज अधि. 1994 की धारा 119 के तहत बी.बी. मोहंती पहले मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सचिव) बने।
- एक उपसचिव और एक सहायक सचिव का पद भी।
आयोग के काम
- पंचायती राज संस्थाओं व नगरीय निकायों के चुनाव कराना।
- चुनाव ठीक से हों, इसके लिए चुनाव अधिकारियों की नियुक्ति।
- परिसीमन और आरक्षण का काम।
- राज्यपाल को वार्षिक प्रतिवेदन।
- चुनाव पर संदेह या विवाद हो तो जाँच हेतु अधिकारी नियुक्त करना; चुनाव चिह्नों का आवंटन और उनके विवाद सुलझाना।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी
- राज्य सरकार का अधिकारी, जिसे आयोग राज्य सरकार की सलाह से नियुक्त करता है।
- काम: राज्य स्तर की सभी मतदाता सूचियों की तैयारी, पुनरीक्षण और सुधार की देखरेख; सभी चुनावों के संचालन की देखरेख; आयोग जो और शक्तियाँ दे, उनका प्रयोग।
ज़िला निर्वाचन अधिकारी
- हर ज़िले के लिए आयोग, राज्य सरकार से सलाह कर, राज्य का एक अधिकारी नामित करता है; ज़रूरत हो तो एक ज़िले में एक से अधिक।
- मुख्य निर्वाचन अधिकारी के नियंत्रण में ज़िले की मतदाता सूची बनाने व सुधारने के कामों में समन्वय और देखरेख।
- राजस्थान में ज़िला कलेक्टर ही ज़िला निर्वाचन अधिकारी।
7. आयुक्तों की सूची व तथ्य
| क्र. | आयुक्त | कार्यकाल | विशेष |
|---|---|---|---|
| 1 | अमरसिंह राठौड़ | 01.07.1994 – 30.03.2000 | पहले आयुक्त · सबसे लंबा कार्यकाल |
| 2 | नेकराम भसीन | 01.07.2000 – 10.08.2002 | सबसे छोटा कार्यकाल |
| 3 | इन्द्रजीत खन्ना | 26.12.2002 – 26.12.2007 | पहले जिन्हें 5 वर्ष/65 वर्ष की शर्त पर नियुक्ति |
| 4 | अशोक कुमार पाण्डे | 01.10.2008 – 30.09.2013 |
- आयोग ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन का पहला प्रयोग नगरपालिका चुनाव में किया।
- 2024–25 में आयोग के सचिव (CEO) — IAS नवीन महाजन।
8. राज्य वित्त आयोग
उद्देश्य — पंचायतों (और नगर निकायों) की वित्तीय स्थिति की समीक्षा, राज्य की संचित निधि से उन्हें अनुदान की सिफ़ारिश, करों का बँटवारा, और राज्यपाल के सौंपे दूसरे काम।
- प्रकृति ➜ संवैधानिक
- पंचायतों हेतु ➜ भाग 9 · अनु. 243झ (243I)
- नगरों हेतु ➜ भाग 9क · अनु. 243म (243Y)
9. संवैधानिक प्रावधान
- 243झ(1) ➜ हर पाँच साल बीतने पर राज्यपाल नया वित्त आयोग बनाते हैं; उसका काम पंचायतों के धन की हालत परखना है।
- 243म(1) ➜ वही आयोग नगरपालिकाओं की वित्तीय स्थिति की भी समीक्षा करता है।
सिफ़ारिशें किन बातों पर (पंचायत और नगरपालिका दोनों के लिए)
- राज्य जो कर, शुल्क, पथकर और फ़ीस वसूलता है, उनकी शुद्ध आय का राज्य और स्थानीय निकायों में बँटवारा।
- कौन-से कर, शुल्क, पथकर, फ़ीस स्थानीय निकाय स्वयं लगाएँ और रखें।
- राज्य की संचित निधि से सहायता-अनुदान के सिद्धांत।
243झ(4) और 243म(2) — राज्यपाल आयोग की हर सिफ़ारिश, उस पर हुई कार्यवाही के स्पष्टीकरण ज्ञापन के साथ, विधानमंडल के सामने रखवाते हैं।
10. बनावट व कार्यकाल
- 5 सदस्यीय निकाय — 1 अध्यक्ष + 4 सदस्य।
- नियुक्ति राज्यपाल करते हैं; पर अध्यक्ष-सदस्यों की योग्यता और चयन का तरीका राज्य विधानमंडल तय करता है।
- कार्यकाल 5 वर्ष; अध्यक्ष-सदस्यों की न्यूनतम या अधिकतम आयु का कोई उल्लेख नहीं।
11. छठा आयोग व सूची
- छठा राज्य वित्त आयोग — गठन 12 अप्रैल 2021; अवधि 2020-21 से 2024-25।
- अध्यक्ष प्रद्युम्न सिंह; सदस्य लक्ष्मण सिंह रावत और अशोक लोहाटी।
छठे आयोग की सिफ़ारिशें
- राज्य के अपने शुद्ध कर राजस्व का 6.75% स्थानीय निकायों को।
- इसका 75.10% पंचायती राज संस्थाओं को और 24.90% नगरीय निकायों को — आधार जनगणना 2011।
- पंचायती राज के भीतर बँटवारा 5 : 20 : 75 — ज़िला परिषद् : पंचायत समिति : ग्राम पंचायत।
| आयोग | अध्यक्ष | गठन | अवधि |
|---|---|---|---|
| पहला | कृष्ण कुमार गोयल | 24.04.1994 | 01.04.1995 – 31.03.2000 |
| दूसरा | हीरालाल देवपुरा | 07.05.1999 | 01.04.2000 – 31.03.2005 |
| तीसरा | माणिकचंद सुराणा | मई 2004 | 01.04.2005 – 31.03.2010 |
12. राज्य महिला आयोग
- विधेयक पेश ➜ 23 अप्रैल 1999
- गठन ➜ 15 मई 1999 (अधि. 1999, धारा 3)
- प्रकृति ➜ गैर-संवैधानिक / सांविधिक · परामर्शकारी
13. गठन व कार्यकाल
- राज्य सरकार ने 23 अप्रैल 1999 को विधानसभा में विधेयक रखा; पारित होने पर 15 मई 1999 की अधिसूचना से राजस्थान राज्य महिला आयोग अधिनियम 1999 की धारा 3 के तहत आयोग बना।
- धारा 3 ➜ 1 अध्यक्ष + 3 सदस्य, जिनमें 1 सदस्य सचिव; सभी को राज्य सरकार नियुक्त करती है।
- धारा 3(2) ➜ सदस्य सचिव समेत अधिकतम 4 सदस्य; इनमें एक SC/ST की और एक OBC की महिला होगी।
- धारा 3(5) ➜ सचिव राज्य सरकार नियुक्त करती है; वह आयोग से सौंपी गई शक्तियाँ और काम संभालता है।
बैठक (धारा 5)
- सामान्य नियम ➜ दो महीने में न्यूनतम एक बैठक; दिन व समय अध्यक्ष चुनते हैं।
- अध्यक्षता अध्यक्ष करते हैं; वे न हों तो उपस्थित सदस्यों में से कोई एक।
- गणपूर्ति ➜ अध्यक्ष सहित 3 सदस्य।
14. हटाना, कार्य, शक्तियाँ
धारा 8 — राज्य सरकार इन दशाओं में हटा सकती है
- दिवालिया घोषित होना।
- किसी अपराध में दोषी ठहराया जाना।
- काम करने से मना करना या काम करने में असमर्थ होना।
- धारा 10 ➜ जाँच करते हुए आयोग सिविल न्यायालय जैसी शक्तियों का प्रयोग करता है।
- धारा 11 (कार्य) ➜ महिला के साथ हुए ग़लत बर्ताव की पड़ताल, निर्णय और सरकार को कार्यवाही का सुझाव; राज्य भर की पीड़ित महिलाओं की शिकायतों का निवारण; उनके हितों की रक्षा और न्याय दिलाना।
- धारा 12 ➜ महिला के विरुद्ध हर तरह के अनुचित व्यवहार की जाँच कर निर्णय और सरकार को सिफ़ारिश; सरकार सिफ़ारिश मिलने के 3 माह में फ़ैसला कर आयोग को बताती है।
ट्रिक: महिला आयोग में नियुक्ति, त्यागपत्र, हटाना — तीनों राज्य सरकार के पास; राज्यपाल या राष्ट्रपति की भूमिका नहीं।
15. अध्यक्ष व तथ्य
| क्र. | अध्यक्ष | कार्यकाल |
|---|---|---|
| 1 | कांता कथूरिया | 25.05.1999 – 24.05.2002 |
| 2 | प्रो. पवन सुराना | 28.01.2003 – 27.01.2006 |
| 3 | तारा भंडारी | 15.04.2006 – 14.04.2009 |
- मुख्यमंत्री महिला हेल्पलाइन — 181 (टोल-फ़्री), अगस्त 2012 से; महिला आयोग परिसर में।
- गरिमा हेल्पलाइन — 1090।
- राज्य की पहली महिला नीति — 8 मार्च 2000।
रिवीजन पॉइंटर्स
- राज्य निर्वाचन आयोग का गठन आदेश 17 जून 1994 को हुआ और काम 1 जुलाई 1994 से शुरू; यह एक-सदस्यीय निकाय है।
- निर्वाचन आयुक्त का कार्यकाल अब 5 वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक है; गठन के समय यह 6 वर्ष या 62 वर्ष था।
- पहले आयुक्त अमरसिंह राठौड़ का कार्यकाल सबसे लंबा रहा, जबकि सबसे छोटा कार्यकाल नेकराम भसीन का।
- राजस्थान में ज़िला कलेक्टर ही ज़िला निर्वाचन अधिकारी होता है।
- राज्य वित्त आयोग संवैधानिक है — पंचायतों के लिए अनु. 243झ, नगरों के लिए अनु. 243म; 1 अध्यक्ष + 4 सदस्य और कार्यकाल 5 वर्ष।
- छठे वित्त आयोग का गठन 12 अप्रैल 2021 को हुआ, अध्यक्ष प्रद्युम्न सिंह; शुद्ध कर राजस्व का 6.75% स्थानीय निकायों को और पंचायती राज में बँटवारा 5 : 20 : 75।
- राज्य महिला आयोग सांविधिक और परामर्शकारी है; गठन 15 मई 1999 को, 1 अध्यक्ष + 3 सदस्य।
- महिला आयोग में नियुक्ति, त्यागपत्र और हटाना — तीनों राज्य सरकार के पास हैं।
- मानवाधिकार आयोग की पहली और अकेली महिला अध्यक्ष कांता कुमारी भटनागर रहीं, जिनका कार्यकाल सबसे छोटा था।
अगले भाग में राज्य सूचना आयोग और लोकायुक्त की बनावट, नियुक्ति, हटाना व शक्तियाँ, साथ में महाधिवक्ता और महालेखाकार कार्यालय।
पिछला भाग: प्रमुख आयोग: राजस्थान लोक सेवा आयोग एवं राज्य मानवाधिकार आयोग
अगला भाग: प्रमुख आयोग: राज्य सूचना आयोग एवं लोकायुक्त
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