पंचायती राज: तीन स्तर एवं पेसा और अनुसूचित क्षेत्र – Rajasthan Polity Chapter 15

तीन स्तरों की तुलना, पेसा, अनुसूचित क्षेत्र, चुनाव और पंचायती राज के प्रथम तथ्य एक जगह।

10 min read Updated Notes in Hindi
In this chapter (14 sections)
  1. तीन स्तर
  2. ग्राम पंचायत
  3. स्थायी समितियाँ, कर, सचिव
  4. पंचायत समिति
  5. जिला परिषद्
  6. तीनों की तुलना
  7. पेसा और अनुसूचित क्षेत्र
  8. पेसा अधिनियम 1996
  9. राजस्थान का पेसा अधिनियम 1999
  10. अनुसूचित क्षेत्र नियम 2011
  11. प्रशिक्षण संस्थाएँ
  12. चुनाव
  13. प्रथम व अन्य तथ्य
  14. रिवीजन पॉइंटर्स

तीन स्तरों का ढाँचा देखने में सीधा लगता है, पर उसमें धाराओं और बैठकों के इतने अंक हैं कि विद्यार्थी अक्सर आपस में मिला देते हैं। इन्हें एक साथ रखकर तुलना करते हुए पढ़ना सबसे सुरक्षित तरीका है। इस भाग में तीन स्तर, तीनों की तुलना, पेसा अधिनियम 1996, राजस्थान का 1999 अधिनियम, अनुसूचित क्षेत्र नियम 2011, प्रशिक्षण संस्थाएँ, चुनाव और प्रथम व अन्य तथ्य क्रम से दिए गए हैं।

इस विषय का इंटरैक्टिव माइंड मैप — पंचायती राज, 2 चॉक-बोर्ड चित्र, 3 नक्शे, 1 चार्ट, 28 फ्लैशकार्ड और 12 अभ्यास-प्रश्न के साथ। यहाँ हर खंड के चुने हुए बिंदु हैं; पूरी तालिकाएँ, शेष तथ्य और रटने की ट्रिक माइंड मैप में हैं।
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1. तीन स्तर

  • ग्राम पंचायत ➜ धारा-9
  • पंचायत समिति ➜ धारा-10
  • जिला परिषद् ➜ धारा-11

ट्रिक: तीनों संस्थाएँ अधिनियम के अध्याय-3 में — धारा 9, 10, 11 क्रम से नीचे से ऊपर।

2. ग्राम पंचायत

  • धारा-9 ➜ राज्य सरकार राजपत्र में अधिसूचना से किसी गाँव या गाँवों के समूह को पंचायत क्षेत्र घोषित करती है (नगर पालिका या छावनी बोर्ड वाले गाँव छोड़कर)।
  • धारा-12 ➜ पंचायत = एक सरपंच + वार्ड पंच; हर पंचायत क्षेत्र में कम से कम 5 वार्ड।
  • धारा-26 ➜ सरपंच वही बन सकता है जो पंच बनने योग्य हो; उसे पूरे पंचायत क्षेत्र के मतदाता चुनते हैं।

धारा-32 : सरपंच और उप सरपंच

  1. ग्राम सभा की बैठक बुलाना और उसकी अध्यक्षता।
  2. ग्राम पंचायत की बैठक बुलाना और उसकी अध्यक्षता।
  3. पंचायत के अभिलेख सुरक्षित रखने की ज़िम्मेदारी।
  • सरपंच अपनी कुछ शक्तियाँ और काम राज्य के नियमों के भीतर लिखित में उप सरपंच को सौंप सकता है।
  • सरपंच के न होने या पद ख़ाली होने पर उप सरपंच सरपंच की सारी शक्तियाँ और काम संभालता है।

धारा-45 : बैठकें

  • कम से कम हर 15 दिन में एक बैठक, सरपंच द्वारा तय जगह पर।
  • 1/3 सदस्यों के कहने पर सरपंच विशेष बैठक बुला सकता है।
  • सूचना कितने दिन पहले ➜ साधारण: 7, विशेष: 3।

3. स्थायी समितियाँ, कर, सचिव

धारा-55क : स्थायी समितियाँ

  1. प्रशासन एवं स्थापना समिति
  2. वित्त एवं कराधान समिति
  3. विकास एवं उत्पादन कार्यक्रम समिति

… शेष 2 बिंदु — पूरी सूची माइंड मैप में देखें

  • इनके अलावा महिला एवं बाल विकास, पर्यावरण विकास या कोई अन्य समिति भी बन सकती है।
  • सदस्य वार्ड पंच ही होते हैं — हर समिति में 5 पंच ज़रूरी।
  • प्रशासन एवं स्थापना समिति का पदेन सदस्य और अध्यक्ष सरपंच होता है।

… शेष 2 बिंदु — पूरी सूची माइंड मैप में देखें

धारा-78 : सचिव

  • हर पंचायत का एक सचिव होगा [78(1)] — यह पद पहले ग्राम सेवक कहलाता था [धारा-89(2) में यही नाम था]।
  • सरपंच के नियंत्रण में सचिव [78(2)]: अभिलेख व रजिस्टर अपनी अभिरक्षा में रखता है; पंचायत को मिली रक़म की रसीद अपने हस्ताक्षर से देता है; पंचायत निधि का हिसाब और सुरक्षा देखता है; सारे विवरण व रिपोर्ट तैयार करता है।

4. पंचायत समिति

  • धारा-10 ➜ राज्य सरकार राजपत्र में अधिसूचना से एक ही ज़िले के किसी स्थानीय क्षेत्र को खण्ड घोषित कर उसके लिए पंचायत समिति बनाती है (नगर पालिका/छावनी बोर्ड वाले क्षेत्र छोड़कर)।
  • धारा-13 ➜ सदस्य: सीधे चुने गए सदस्य, क्षेत्र के विधायक और समिति क्षेत्र की सभी पंचायतों के सरपंच; चुनाव क्षेत्र कम से कम 15।
  • धारा-28 ➜ प्रधान और उप प्रधान को समिति के चुने हुए सदस्य अपने में से चुनते हैं।

… शेष 2 बिंदु — पूरी सूची माइंड मैप में देखें

विकास अधिकारी (BDO)

  • धारा-79(1) ➜ हर पंचायत समिति को राज्य सरकार एक विकास अधिकारी (BDO) देती है, साथ में ज़रूरत भर प्रसार अधिकारी, लेखाकार व कनिष्ठ लेखाकार लगाती है।
  • धारा-81 ➜ BDO के काम: समिति व स्थायी समितियों की बैठक का नोटिस निकालना; बैठकों में रहकर कार्यवृत्त बनाता है; चर्चा में भाग लेता है; समिति की निधि से पैसा निकालने और हस्तांतरण का अधिकार रखता है।

5. जिला परिषद्

  • धारा-11 ➜ राजपत्र में अधिसूचना से हर ज़िले के लिए एक जिला परिषद् (नगर पालिका/छावनी बोर्ड वाले क्षेत्र छोड़कर)।
  • धारा-14 ➜ सदस्य: प्रमुख, उप प्रमुख, चुने हुए सदस्य, लोकसभा व राज्यसभा सदस्य, विधायक और सभी पंचायत समितियों के प्रधान; चुने हुए सदस्य कम से कम 17।
  • धारा-29 ➜ प्रमुख और उप प्रमुख को परिषद् के चुने हुए सदस्य अपने में से चुनते हैं।

धारा-69 : जिला परिषद् के कर

धारा-82 में मुख्य कार्यकारी अधिकारी और दूसरे अधिकारियों का प्रावधान है। 82(1) — राज्य सरकार IAS या RAS के किसी अधिकारी को परिषद् का मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) बनाती है।

ट्रिक: बैठक का अंतर: ग्राम पंचायत 15 दिन → पंचायत समिति 1 माह → जिला परिषद् 45 दिन — ऊपर जाते-जाते अंतर बढ़ता है।

6. तीनों की तुलना

बिंदुग्राम पंचायत (निम्न)पंचायत समिति (मध्य)जिला परिषद् (शीर्ष)
कुल संख्या (पुराना आँकड़ा)11,21436533
राजनैतिक प्रमुखसरपंचप्रधानजिला प्रमुख
प्रशासनिक प्रमुखग्राम विकास अधिकारी (VDO)खण्ड विकास अधिकारी (BDO)मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO)
न्यूनतम आयु21 वर्ष21 वर्ष21 वर्ष

7. पेसा और अनुसूचित क्षेत्र

अनुच्छेद 243ड के कारण भाग-9 अनुसूचित क्षेत्रों पर अपने-आप लागू नहीं होता। इन क्षेत्रों के लिए संसद ने पेसा 1996 बनाया और राजस्थान ने 1999 में अपना अधिनियम।

8. पेसा अधिनियम 1996

  • उद्देश्य ➜ जनजातीय समुदायों के रीति-रिवाज़ और परम्पराओं की रक्षा और उन्हें स्वशासन देना।
  • दिलीप सिंह भूरिया समिति (1995) की रिपोर्ट पर आधारित; 24 दिसम्बर 1996 से लागू।
  • पाँचवीं अनुसूची वाले 9 राज्यों में लागू हुआ — आंध्रप्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, झारखण्ड, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, राजस्थान।
  • पूरा नाम ➜ पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) अधिनियम
  • लागू ➜ 24 दिसम्बर 1996
  • आधार ➜ भूरिया समिति 1995

9. राजस्थान का पेसा अधिनियम 1999

  • इसे 26 जून 1999 से लागू माना गया; राज्यपाल की स्वीकृति 30 सितम्बर 1999 को मिली।
  • यह अनुच्छेद 244 में बताए राजस्थान के अनुसूचित क्षेत्रों पर लागू है — नगर पालिका वाले क्षेत्र इससे बाहर।
  • पूरे ज़िले: बाँसवाड़ा, डूँगरपुर, प्रतापगढ़; कुछ तहसीलें: उदयपुर, सिरोही, राजसमंद, चित्तौड़गढ़, पाली।

10. अनुसूचित क्षेत्र नियम 2011

ये नियम अनुच्छेद 244(1) में बताए राजस्थान के अनुसूचित क्षेत्रों में लागू हैं (नगर पालिका क्षेत्र छोड़कर)।

विषयनियम
सचिवजो ग्राम पंचायत का सचिव, वही उसकी हर ग्राम सभा का सचिव (सभाएँ कई हों तब भी)। सचिव न हो तो BDO किसी सरकारी कर्मचारी को यह ज़िम्मा देता है।
पीठासीनसरपंच, फिर उप सरपंच; दोनों न हों तो सदस्य अध्यक्ष तय करें।
बैठक कौन बुलाएसरपंच; उसके न होने पर ग्राम सभा का सचिव।

विशेष बैठक कब

  1. साधारण बैठक में ऐसा तय हुआ हो।
  2. पंचायत के पास ऐसा प्रस्ताव हो जिस पर ग्राम सभा का विचार ज़रूरी है।
  3. कुल सदस्यों के 5% या 25 (जो अधिक हो) सचिव को लिखित सूचना दें।

ग्राम सभाओं की संयुक्त बैठक

  • हर ग्राम सभा अपने क्षेत्र का काम ख़ुद कर सकती है; पर संसाधन प्रबंधन, सड़क निर्माण जैसे साझा मामलों में पंचायत की सभी ग्राम सभाओं की संयुक्त बैठक हो सकती है।
  • अध्यक्षता ➜ सरपंच।
  • हर ग्राम सभा से कम से कम 5% या 10 सदस्य (जो कम हो) उपस्थित हों।

11. प्रशिक्षण संस्थाएँ

संस्थास्थापनाबात
हरिश्चन्द्र माथुर राजस्थान राज्य लोक प्रशासन संस्थान (HCM RIPA)14 नवम्बर 1957, जोधपुर1963 में जयपुर लाया गया
इन्दिरा गांधी पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास संस्थान1984, जयपुरपंचायती राज व ग्रामीण विकास के अधिकारियों-जनप्रतिनिधियों का प्रशिक्षण

ग्राम सेवक / पंचायत प्रशिक्षण केंद्र (6)

  1. मण्डोर (जोधपुर) ➜ पहला, 15 अगस्त 1960
  2. डूँगरपुर
  3. अजमेर

12. चुनाव

राज्य में पंचायती राज के पहले चुनाव 1960 में हुए। 2020 तक कुल 11 बार चुनाव हो चुके हैं।

किसने कराएवर्ष
राज्य निर्वाचन आयोग बनने से पहले (पंचायती राज/निर्वाचन विभाग)1960, 1965, 1978, 1981, 1988
राज्य निर्वाचन आयोग1995, 2000, 2005, 2010, 2015, 2020

13. प्रथम व अन्य तथ्य

  • पहली महिला सरपंच ➜ छगन बहन गोलछा (खींचन, फलौदी)
  • पहली महिला जिला प्रमुख ➜ नगेन्द्र बाला (कोटा)
  • जनसुनवाई अधिकारी (ग्राम पंचायत) ➜ ग्राम सेवक

राज ई-पंचायत

  • मिशन मोड परियोजना के तहत बना सॉफ़्टवेयर।
  • लक्ष्य ➜ पंचायती राज संस्थाओं को सशक्त और पारदर्शी बनाना, साथ ही ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की अंदरूनी प्रक्रियाएँ सुव्यवस्थित करना।
  • इससे संस्थाओं के काम-काज, योजना निर्माण, बजट आवंटन, लेखा-संधारण और योजनाओं की निगरानी होती है।

रिवीजन पॉइंटर्स

  1. तीनों संस्थाओं की धाराएँ नीचे से ऊपर 9, 10, 11 हैं — ग्राम पंचायत, पंचायत समिति, जिला परिषद्।
  2. पंचायत में एक सरपंच और वार्ड पंच होते हैं; हर पंचायत क्षेत्र में कम से कम 5 वार्ड ज़रूरी हैं।
  3. बैठकों का अंतर याद रखें ➜ ग्राम पंचायत 15 दिन, पंचायत समिति 1 माह, जिला परिषद् 45 दिन।
  4. प्रशासनिक प्रमुख क्रम से VDO, BDO और CEO हैं; राजनैतिक प्रमुख सरपंच, प्रधान और जिला प्रमुख।
  5. तीनों स्तरों पर सदस्य बनने की न्यूनतम आयु 21 वर्ष है।
  6. पेसा 1996 पाँचवीं अनुसूची वाले 9 राज्यों में लागू हुआ; इसका आधार दिलीप सिंह भूरिया समिति (1995) है।
  7. राजस्थान का 1999 अधिनियम पूरे जिलों बाँसवाड़ा, डूँगरपुर, प्रतापगढ़ और उदयपुर, सिरोही, राजसमंद, चित्तौड़गढ़, पाली की कुछ तहसीलों पर लागू है।
  8. पंचायती राज के पहले चुनाव 1960 में हुए; 2020 तक कुल 11 बार चुनाव हो चुके हैं।
  9. पहली महिला सरपंच छगन बहन गोलछा (खींचन, फलौदी) और पहली महिला जिला प्रमुख नगेन्द्र बाला (कोटा) रहीं।

अगले भाग में नगरीय स्वशासन — राजस्थान में शहरी शासन की शुरुआत, संविधान में नगर निकायों की जगह और उनका गठन, संरचना, आरक्षण व चुनाव।

पिछला भाग: 73वाँ संविधान संशोधन एवं राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994

अगला भाग: नगरीय स्वशासन: गठन, संरचना व चुनाव एवं शक्तियाँ, वित्त व योजना

इन्हें भी पढ़ें: नगरीय स्वशासन · संभाग व जिला प्रशासन

पूरी श्रृंखला: राजस्थान की राजव्यवस्था — सभी अध्याय · राजस्थान जी.के. नोट्स — सभी विषय

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