अध्यादेश, बजट, राष्ट्रपति शासन और क्षमादान — इन चार शक्तियों से दिखता है कि राज्यपाल कहाँ राष्ट्रपति जैसा है और कहाँ बिल्कुल अलग। इस भाग में इनके बाद विवेकीय शक्तियाँ, राज्यपाल पद पर बने आयोग, राजस्थान के राज्यपालों की सूची, रिकॉर्ड व पहले और राजस्थान में राष्ट्रपति शासन दिए गए हैं। सूची वाले हिस्से में कार्यकाल और मुख्यमंत्री को साथ मिलाकर पढ़ना काम आता है।
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1. अध्यादेश
अध्यादेश राज्यपाल की विधायी शक्ति है, जो तभी काम आती है जब विधानमंडल सत्र में न हो।
- 213(1) ➜ सत्र न चल रहा हो और राज्यपाल संतुष्ट हो कि तुरंत क़दम उठाना ज़रूरी है, तो अध्यादेश जारी कर सकता है।
- अध्यादेश उन्हीं विषयों पर, जिन पर विधानमंडल क़ानून बना सकता है — राज्य सूची व समवर्ती सूची।
- यह शक्ति मंत्रिपरिषद् की सलाह से चलती है; अदालत में इस शक्ति को चुनौती नहीं दी जा सकती।
- 213(2) ➜ अध्यादेश का असर विधानमंडल के उस अधिनियम जैसा, जिस पर राज्यपाल ने अनुमति दी हो।
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राष्ट्रपति के निर्देश बिना अध्यादेश नहीं — 3 हालात
- ऐसा विषय जिसका विधेयक सदन में लाने से पहले राष्ट्रपति की मंज़ूरी चाहिए।
- ऐसा विषय जिसका विधेयक राष्ट्रपति के लिए आरक्षित करना ज़रूरी होता।
- ऐसा विषय जिस पर विधानमंडल का अधिनियम राष्ट्रपति की अनुमति के बिना अवैध होता।
अध्यादेश की अधिकतम आयु
- सत्रों के बीच अधिकतम अंतर 6 माह
- + सदन बैठने के बाद 6 सप्ताह
- = 6 माह 6 सप्ताह
ध्यान दें: दो सदन अलग-अलग तारीख़ों को बैठें तो 6 सप्ताह की गिनती बाद वाली तारीख़ से।
2. वित्तीय शक्तियाँ
| अनुच्छेद | शक्ति |
|---|---|
| 202(1) | हर वित्त वर्ष की शुरुआत में वार्षिक वित्तीय विवरण (बजट) वित्त मंत्री के ज़रिए सदन/सदनों के सामने रखवाता है |
| 267(2) | विधानमंडल क़ानून से आकस्मिकता निधि बनाता है; यह राज्यपाल के नियंत्रण में — अचानक ख़र्च के लिए सरकार को अग्रिम देता है |
| 151(2) | CAG राज्य के लेखों की रिपोर्ट राज्यपाल को देता है; वह उसे विधानमंडल के सामने रखवाता है (फिर लोक लेखा समिति जाँचती है) |
- धन/वित्त विधेयक पेश करने से पहले राज्यपाल की अनुमति लेनी पड़ती है।
- उसकी सिफ़ारिश पर ही पूरक, अतिरिक्त और अधिक अनुदानों की माँग रखी जाती है — बिना सहमति कोई अनुदान माँग नहीं।
3. आपातकालीन भूमिका
- 356(1) ➜ राज्यपाल की रिपोर्ट से या दूसरे तरीक़े से राष्ट्रपति मान ले कि संविधान के मुताबिक़ राज्य चलाना संभव नहीं रहा, तो वह उद्घोषणा से राष्ट्रपति शासन लगाता है।
- इस अनुच्छेद से राष्ट्रपति उच्च न्यायालय की शक्तियाँ न अपने हाथ में ले सकता है, न रोक सकता है।
- 356(3) ➜ उद्घोषणा संसद के दोनों सदनों के सामने; 2 माह में अनुमोदन न मिले तो ख़त्म।
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- राष्ट्रपति शासन में राज्य सरकार की शक्तियाँ राष्ट्रपति ख़ुद लेता है या राज्यपाल को सौंपता है।
- घोषणा पर विधानसभा केवल निलंबित होती है; संसद के अनुमोदन के बाद ही भंग होती है।
- राष्ट्रपति शासन की न्यायिक समीक्षा हो सकती है।
राष्ट्रपति शासन की समय-सीमा
- 2 माह में संसद की मंज़ूरी
- 6-6 माह की अवधि
- अधिकतम 3 वर्ष
4. न्यायिक शक्ति — क्षमादान
अनु. 161 — कुछ दण्डों को क्षमा, निलम्बित या बदलने की शक्ति राज्यपाल को; मृत्युदण्ड और कोर्ट मार्शल इसमें नहीं आते।
| बिंदु | राज्यपाल (अनु. 161) | राष्ट्रपति (अनु. 72) |
|---|---|---|
| मृत्युदण्ड | माफ़ी नहीं दे सकता; दण्ड को स्थगित या लघुकृत भर कर सकता है | क्षमा कर सकता है; स्थगित या कम भी |
| किन अपराधों पर | राज्य सूची व समवर्ती सूची वाले क़ानूनों के विरुद्ध | संघ सूची व समवर्ती सूची वाले क़ानूनों के विरुद्ध |
| कोर्ट मार्शल | अधिकार क्षेत्र से बाहर (संघ सूची का विषय) | दण्ड कम या माफ़ कर सकता है |
- क्षमा ➜ Pardon
- प्रविलम्ब ➜ Reprieve
- विराम ➜ Respite
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5. विवेकीय शक्तियाँ व आयोग
163(1) — जिन कामों में राज्यपाल से विवेक की अपेक्षा है, उन्हें छोड़कर बाक़ी में सलाह-सहायता के लिए मुख्यमंत्री की अगुवाई वाली मंत्रिपरिषद् होगी। 163(2) — कौन-सा मामला विवेक का है, यह फ़ैसला भी राज्यपाल का।
6. संविधान प्रदत्त विवेक
- मुख्यमंत्री से सूचना माँगना — सूचना देना मुख्यमंत्री का कर्तव्य (अनु. 167)।
- विधेयक राष्ट्रपति के विचार हेतु रोक लेना (अनु. 200)।
- विधेयक को पुनर्विचार के लिए लौटाना (अनु. 200)।
7. परिस्थितिजन्य विवेक
मुख्यमंत्री चुनना
- कार्यकाल के बीच मुख्यमंत्री की अचानक मृत्यु और कोई तय उत्तराधिकारी नहीं — राज्यपाल अपने विवेक से मुख्यमंत्री नियुक्त करता है।
- किसी दल या चुनाव-पूर्व गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं — राज्यपाल किसी को भी मुख्यमंत्री पद के लिए बुला सकता है।
मंत्रिपरिषद् बर्ख़ास्त करना
- विधानसभा में अविश्वास प्रस्ताव पास होने के बाद भी त्यागपत्र न दे।
- राज्यपाल को लगे कि बहुमत नहीं रहा ➜ मुख्यमंत्री से सत्र बुलाकर बहुमत सिद्ध करने को कहे; न करे तो बर्ख़ास्त।
- मंत्रिपरिषद् संविधान के विरुद्ध काम करे या मुख्यमंत्री भ्रष्टाचार/गंभीर अपराध में दोषी पाए जाने पर भी इस्तीफ़ा न दे।
8. राज्यपाल बनाम राष्ट्रपति — शक्तियाँ
| शक्ति | राष्ट्रपति | राज्यपाल |
|---|---|---|
| अध्यादेश | अनु. 123 | अनु. 213 |
| वीटो | अनु. 111 | अनु. 200 |
| संवैधानिक विवेक | नहीं | अनु. 163(2) |
| संयुक्त बैठक बुलाना | अनु. 108 | नहीं |
ध्यान दें: संविधान में लिखा विवेक राज्यपाल के पास है, राष्ट्रपति के पास नहीं — उल्टा सोचकर फँसें नहीं।
9. राज्यपाल पद पर आयोग
| आयोग | गठन | अध्यक्ष | ख़ास बात |
|---|---|---|---|
| राजमन्नार | 1969 | पी.वी. राजमन्नार | — |
| सरकारिया | 9 जून 1983 | रणजीत सिंह सरकारिया | सदस्य — बी. शिवरमन, एस.आर. सेन; रिपोर्ट 1987 में सौंपी, जनवरी 1988 में सामने आई; 247 सिफ़ारिशें |
| पूंछी | 27 अप्रैल 2007 | मदन मोहन पूंछी (पूर्व मुख्य न्यायाधीश) | सदस्य — धीरेन्द्र सिंह, विनोद कुमार, एन.आर. माधव, विजयशंकर; रिपोर्ट 30 मार्च 2010; 273 सिफ़ारिशें |
सरकारिया आयोग — राज्यपाल पर
- राज्यपाल राज्य के बाहर का व्यक्ति हो।
- अल्पसंख्यक समुदाय के व्यक्ति को भी यह पद देने की मज़बूत परंपरा बनी रहे।
- राजनीतिक कारणों से 5 वर्ष से पहले न हटाया जाए।
- नियुक्ति से पहले राज्य के मुख्यमंत्री से परामर्श हो — इसके लिए अनु. 155 में संशोधन।
पूंछी आयोग — राज्यपाल पर
- राष्ट्रपति की तरह राज्यपाल को भी विधानमंडल महाभियोग से हटाए।
- कार्यकाल निश्चित 5 वर्ष हो; हटाना केन्द्र की मर्ज़ी पर न टिका हो।
- पारित विधेयक पर राज्यपाल 6 माह में फ़ैसला करे।
ट्रिक: संख्याएँ: सरकारिया 247, पूंछी 273 — “247 से 273 तक बढ़ीं सिफ़ारिशें”।
10. राजस्थान के राज्यपाल
- पहले राजप्रमुख ➜ सवाई मानसिंह (1949)
- पहले राज्यपाल ➜ गुरुमुख निहालसिंह (1956)
- पहली महिला ➜ प्रतिभा पाटिल
11. सूची — 1949 से 1992
| क्र. | राज्यपाल | कार्यकाल | मुख्यमंत्री | ख़ास बात |
|---|---|---|---|---|
| 1 | सवाई मानसिंह (राजप्रमुख) | 30.03.1949 – 31.10.1956 | हीरालाल शास्त्री, सी.एस. वेंकटाचारी, जयनारायण व्यास, टीकाराम पालीवाल, जयनारायण व्यास, मोहनलाल सुखाड़िया | राजप्रमुख — राज्यपाल पद का पुराना रूप; इण्डियन पोलो एसोसिएशन की अध्यक्षता भी की |
| 2 | गुरुमुख निहालसिंह (प्रथम राज्यपाल) | 01.11.1956 – 15.04.1962 | मोहनलाल सुखाड़िया | नियुक्ति 25 अक्टूबर 1956; राज्य में सबसे लंबा कार्यकाल |
| 3 | सम्पूर्णानन्द | 16.04.1962 – 15.04.1967 | मोहनलाल सुखाड़िया | 13 मार्च 1967 — राज्य का पहला राष्ट्रपति शासन इन्हीं के समय |
| 4 | सरदार हुकुम सिंह | 16.04.1967 – 19.11.1970 | मोहनलाल सुखाड़िया | पहले लोकसभा के उपाध्यक्ष व अध्यक्ष |
12. सूची — 1992 से अब तक
| क्र. | राज्यपाल | कार्यकाल | मुख्यमंत्री | ख़ास बात |
|---|---|---|---|---|
| 23 | एम. चेन्ना रेड्डी | 05.02.1992 – 30.05.1993 | भैरोसिंह शेखावत | चौथा राष्ट्रपति शासन लगा |
| 24 | धनिक लाल मण्डल (अतिरिक्त प्रभार) | 31.05.1993 – 29.06.1993 | भैरोसिंह शेखावत | — |
| 25 | बलिराम भगत | 30.06.1993 – 30.04.1998 | भैरोसिंह शेखावत | चौथा राष्ट्रपति शासन हटा; पहले लोकसभा अध्यक्ष |
| 26 | दरबारा सिंह | 01.05.1998 – 23.05.1998 | भैरोसिंह शेखावत | पद पर रहते निधन; पंजाब विधानसभा अध्यक्ष, लोकसभा सदस्य, पंजाब के मुख्यमंत्री रहे |
13. रिकॉर्ड व पहले
महिला राज्यपाल — 3
| नाम | ख़ास बात |
|---|---|
| प्रतिभा पाटिल | पहली महिला राज्यपाल (बाद में देश की पहली महिला राष्ट्रपति); पद पर रहते त्यागपत्र देने वाली राज्य की पहली महिला |
| प्रभा राव | पद पर रहते निधन वाली राज्य की पहली व अकेली महिला राज्यपाल |
| मारग्रेट अल्वा | — |
| श्रेणी | नाम |
|---|---|
| पद पर रहते निधन (4) | दरबारा सिंह (1998), निर्मलचन्द जैन (2003), शैलेन्द्र कुमार सिंह (2009), प्रभा राव (2010) |
| त्यागपत्र देने वाले | जोगिंदर सिंह, बसंतराव पाटिल, देवीप्रसाद चट्टोपाध्याय, मदनलाल खुराना, प्रतिभा पाटिल |
| विधानसभा में अभिभाषण नहीं दिया | दरबारा सिंह, निर्मल चन्द जैन |
| पहले बर्ख़ास्त | रघुकुल तिलक (1981) |
- कार्यवाहक राज्यपाल (अब तक) ➜ 9 बार
- अतिरिक्त प्रभार (अब तक) ➜ 9 बार
ट्रिक: पद पर निधन वाले चार — “द-नि-शै-प्र” (दरबारा, निर्मल, शैलेन्द्र, प्रभा) — 1998 से 2010 के बीच।
14. राजभवन व अन्य तथ्य
- राज्यपाल सचिवालय ➜ राज्यपाल को प्रशासनिक मदद देता है; इसका मुखिया राज्यपाल का सचिव होता है, जो IAS अधिकारी होता है।
- राज्यपाल राहत कोष ➜ 14 मार्च 1973 को राज्यपाल जोगिन्दर सिंह के समय बना।
- संबोधन ➜ हिन्दी में “माननीय राज्यपाल” या “राज्यपाल महोदय”, अंग्रेज़ी में “Honourable Governor”।
15. राजस्थान में राष्ट्रपति शासन
| क्र. | अवधि | राज्यपाल | मुख्यमंत्री / राष्ट्रपति | कारण |
|---|---|---|---|---|
| 1 | 13.03.1967 – 26.04.1967 (44 दिन) | सम्पूर्णानन्द, हुकुम सिंह | मोहनलाल सुखाड़िया / डॉ. राधाकृष्णन् | अस्पष्ट बहुमत — सबसे छोटा राष्ट्रपति शासन |
| 2 | 30.04.1977 – 21.06.1977 (53 दिन) | वेदपाल त्यागी, रघुकुल तिलक | हरिदेव जोशी / बी.डी. जत्ती | 1975 के राष्ट्रीय आपातकाल के बाद |
| 3 | 17.02.1980 – 05.06.1980 (110 दिन) | रघुकुल तिलक | भैरोसिंह शेखावत / नीलम संजीव रेड्डी | ग़ैर-कांग्रेसी (जनता पार्टी) सरकार |
16. रैपिड फायर तथ्य
- अध्यादेश ➜ अनु. 213; सत्र न चल रहा हो तब; अधिकतम आयु 6 माह 6 सप्ताह
- आकस्मिकता निधि ➜ अनु. 267(2), राज्यपाल के नियंत्रण में
- राष्ट्रपति शासन ➜ अनु. 356; 2 माह में संसद की मंज़ूरी, अधिकतम 3 वर्ष
- क्षमादान (राज्यपाल) ➜ अनु. 161; मृत्युदण्ड माफ़ नहीं कर सकता, केवल स्थगित या लघुकृत
- आयोग ➜ सरकारिया की 247 सिफ़ारिशें, पूंछी की 273
- पहले राज्यपाल ➜ गुरुमुख निहालसिंह (1956); पहली महिला प्रतिभा पाटिल
- पद पर रहते निधन ➜ दरबारा सिंह, निर्मलचन्द जैन, शैलेन्द्र कुमार सिंह, प्रभा राव
- पहले बर्ख़ास्त ➜ रघुकुल तिलक (1981)
- पहला राष्ट्रपति शासन ➜ 13 मार्च 1967 से, 44 दिन का — सबसे छोटा
अगले भाग में मुख्यमंत्री का पद — नियुक्ति, योग्यता, कार्यकाल — और मुख्यमंत्री के कार्य व शक्तियाँ, उपमुख्यमंत्री व संसदीय सचिव तथा मंत्रिपरिषद्।
पिछला भाग: राज्यपाल: नियुक्ति, योग्यता व पद एवं विधायी शक्तियाँ
अगला भाग: मुख्यमंत्री का पद एवं मुख्यमंत्री के कार्य व शक्तियाँ
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