उच्च न्यायालय व न्यायाधीश एवं क्षेत्राधिकार व शक्तियाँ – Rajasthan Polity Chapter 18

उच्च न्यायालय का गठन, न्यायाधीशों की नियुक्ति-पदावधि-हटाना और क्षेत्राधिकार व रिट, अनुच्छेद 214–231।

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In this chapter (15 sections)
  1. एक नज़र में
  2. उच्च न्यायालय व न्यायाधीश
  3. अनुच्छेद 214–231 सूची
  4. स्थापना व गठन
  5. नियुक्ति, योग्यता, शपथ
  6. पदावधि व त्यागपत्र
  7. महाभियोग से हटाना
  8. वेतन, वकालत, स्वतंत्रता
  9. तबादला व अस्थायी न्यायाधीश
  10. क्षेत्राधिकार व शक्तियाँ
  11. पाँच तरह का क्षेत्राधिकार
  12. रिट — अनुच्छेद 226
  13. अधीक्षण, अंतरण, कर्मचारी
  14. न्यायिक पुनर्विलोकन
  15. रैपिड फायर तथ्य

उच्च न्यायालय को पढ़ने का सबसे आसान तरीका एक न्यायाधीश का सफ़र पकड़ लेना है — न्यायालय का बनना, नियुक्ति, शपथ, सेवा की शर्तें और विदाई। उसके बाद यह जोड़ दीजिए कि वही न्यायालय अपने क्षेत्राधिकार में क्या-क्या सुन सकता है। इस भाग में अनुच्छेद 214–231 की सूची, स्थापना व गठन, नियुक्ति, पदावधि, महाभियोग, वेतन, तबादला, पाँच तरह का क्षेत्राधिकार, रिट और न्यायिक पुनर्विलोकन दिए गए हैं।

इस विषय का इंटरैक्टिव माइंड मैप — उच्च न्यायालय एवं अधीनस्थ न्यायालय, 3 चॉक-बोर्ड चित्र, 4 नक्शे, 2 चार्ट, 29 फ्लैशकार्ड और 12 अभ्यास-प्रश्न के साथ। यहाँ हर खंड के चुने हुए बिंदु हैं; पूरी तालिकाएँ, शेष तथ्य और रटने की ट्रिक माइंड मैप में हैं।
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1. एक नज़र में

संविधान का भाग-6 राज्यों की व्यवस्था बताता है। उच्च न्यायालय की बनावट और काम इसी भाग के अध्याय-5 के अनुच्छेद 214–231 में दर्ज हैं, और आगे अनुच्छेद 233 से 237 ज़िला व उससे नीचे के (अधीनस्थ) न्यायालयों की बात करते हैं।

  • उच्च न्यायालय ➜ अनु. 214–231
  • अधीनस्थ न्यायालय ➜ अनु. 233–237
  • राजस्थान HC स्थापना ➜ 29 अगस्त 1949
  • मुख्य पीठ ➜ जोधपुर

… शेष 4 बिंदु — पूरी सूची माइंड मैप में देखें

ट्रिक: संख्या याद रखने की ट्रिक: 214 से उच्च न्यायालय शुरू, 231 पर ख़त्म (साझा HC); 233 से ज़िला न्यायाधीश शुरू, 237 पर मजिस्ट्रेटों तक बात पूरी।

2. उच्च न्यायालय व न्यायाधीश

इस शाखा को उसी क्रम में पढ़ें जिसमें एक न्यायाधीश का सफ़र चलता है: न्यायालय बनना → नियुक्ति → शपथ → सेवा की शर्तें → विदाई।

3. अनुच्छेद 214–231 सूची

अनुच्छेदविषय
214हर राज्य के लिए उच्च न्यायालय
215उच्च न्यायालय — अभिलेख न्यायालय
216उच्च न्यायालय का गठन
217न्यायाधीश की नियुक्ति और पद की शर्तें

… शेष 15 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें

4. स्थापना व गठन

  • अनु. 214 ➜ नियम यह है कि हर राज्य को एक उच्च न्यायालय मिलेगा।
  • अनु. 231 ➜ अपवाद: संसद चाहे तो कई राज्यों (साथ में किसी संघ राज्य क्षेत्र) का एक ही साझा उच्च न्यायालय बना सकती है। यह व्यवस्था 7वें संविधान संशोधन से आई।
  • अनु. 215 ➜ उच्च न्यायालय अभिलेख न्यायालय (Court of Record) है; अपनी अवमानना करने वाले को वह साधारण कारावास या जुर्माना दे सकता है।

याद रखें: संविधान में उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की कोई तय संख्या नहीं लिखी — यह संख्या राष्ट्रपति समय-समय पर तय करते हैं।

5. नियुक्ति, योग्यता, शपथ

नियुक्ति — अनु. 217(1)

पदनियुक्त करते हैंकिनसे परामर्श
मुख्य न्यायाधीशराष्ट्रपति — अपने हस्ताक्षर व मुद्रा वाले अधिपत्र (वारंट) सेभारत के मुख्य न्यायमूर्ति + संबंधित राज्य के राज्यपाल
अन्य न्यायाधीशराष्ट्रपतिभारत के मुख्य न्यायमूर्ति + राज्यपाल + उस उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायमूर्ति
साझा HC के न्यायाधीशराष्ट्रपतिऊपर वालों के साथ सभी संबंधित राज्यों के राज्यपाल

योग्यता — अनु. 217(2)

  • पहली शर्त: व्यक्ति भारत का नागरिक हो, और साथ में —
  • (क) देश में कहीं 10 वर्ष या उससे अधिक समय तक न्यायिक पद सँभाल चुका हो, या
  • (ख) एक या एक से अधिक उच्च न्यायालयों में बिना रुके 10 वर्ष या ज़्यादा अधिवक्ता के रूप में काम किया हो।

ध्यान दें: अनु. 217(3) — किसी न्यायाधीश की उम्र पर विवाद हो तो फ़ैसला राष्ट्रपति करते हैं, भारत के मुख्य न्यायमूर्ति से सलाह लेकर; राष्ट्रपति का निर्णय अंतिम होता है।

शपथ — अनु. 219

  • पद सँभालने से पहले न्यायाधीश राज्यपाल या राज्यपाल के चुने किसी व्यक्ति के सामने शपथ लेते हैं।
  • शपथ का प्रारूप तीसरी अनुसूची में है; इसमें संविधान के प्रति निष्ठा की बात है।
  • साझा उच्च न्यायालय हो तो शपथ उस राज्य के राज्यपाल दिलाते हैं जहाँ न्यायालय का मुख्यालय है।

6. पदावधि व त्यागपत्र

उच्च न्यायालय का न्यायाधीश 62 वर्ष की आयु पूरी होने तक पद पर रहता है। पहले यह सीमा 60 वर्ष थी — 15वें संविधान संशोधन, 1963 (धारा 4-क) ने इसे बढ़ाकर 62 किया।

पद ख़ाली होने के रास्ते — अनु. 217(1) के परंतुक

खंडकैसे
(क)राष्ट्रपति को संबोधित, स्वयं हस्ताक्षरित पत्र देकर त्यागपत्र
(ख)उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश जैसी रीति (अनु. 124(4)) से हटाया जाना
(ग)राष्ट्रपति द्वारा उच्चतम न्यायालय या किसी दूसरे उच्च न्यायालय में न्यायाधीश बनाए जाने पर

7. महाभियोग से हटाना

उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाने का आदेश राष्ट्रपति देते हैं, पर उससे पहले संसद में महाभियोग जैसी प्रक्रिया पूरी होनी ज़रूरी है। इसका ब्यौरा न्यायाधीश जाँच अधिनियम, 1968 में है।

  • आधार 1 ➜ सिद्ध कदाचार
  • आधार 2 ➜ अक्षमता (असमर्थता)

हटाने की सीढ़ी

  1. प्रस्ताव किसी भी सदन में: लोकसभा में 100, राज्यसभा में 50 सदस्यों के हस्ताक्षर
  2. अध्यक्ष / सभापति प्रस्ताव मानें या ठुकराएँ
  3. माना तो 3 सदस्यीय जाँच समिति
  4. समिति ने दोषी पाया तो सदन में विचार

… शेष 3 बिंदु — पूरी सूची माइंड मैप में देखें

जाँच समिति के 3 सदस्य
1भारत के मुख्य न्यायाधीश अथवा उच्चतम न्यायालय का कोई न्यायाधीश
2एक उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश
3एक प्रख्यात न्यायविद

ट्रिक: हस्ताक्षर गिनती: लोकसभा 100, राज्यसभा 50 — राज्यसभा में आधे।

8. वेतन, वकालत, स्वतंत्रता

वेतन व भत्ते — अनु. 221

  • 221(1) ➜ वेतन संसद क़ानून बनाकर तय करती है; जब तक क़ानून न बने, दूसरी अनुसूची के अनुसार।
  • 221(2) ➜ भत्ते और पेंशन भी संसद क़ानून से तय करती है; इनका ज़िक्र भी दूसरी अनुसूची में है।
  • नियुक्ति के बाद न्यायाधीश के वेतन, भत्तों और पेंशन में नुकसानदेह बदलाव नहीं किया जा सकता।

वकालत पर रोक — अनु. 220

स्थायी न्यायाधीश के पद से हटने के बाद कोई भी पूर्व न्यायाधीश केवल उच्चतम न्यायालय और दूसरे उच्च न्यायालयों में ही पैरवी कर सकता है — इनके अलावा भारत के किसी न्यायालय या प्राधिकारी के सामने नहीं।

उच्च न्यायालय की स्वतंत्रता के रक्षक

  • न्यायाधीश के आचरण पर संसद या राज्य विधानमंडल में बहस नहीं हो सकती — सिवाय महाभियोग प्रस्ताव के।
  • सेवानिवृत्त न्यायाधीश पर वकालत की ऊपर वाली रोक।
  • नियुक्ति के बाद सेवा शर्तों में नुकसानदेह बदलाव पर रोक।

9. तबादला व अस्थायी न्यायाधीश

अनुच्छेदकौनकिसके द्वारा / कैसे
222(1) तबादलाकिसी भी न्यायाधीश का एक HC से दूसरे HC मेंराष्ट्रपति — पहले भारत के मुख्य न्यायमूर्ति की राय लेकर
222(2) भत्तातबादले पर गया न्यायाधीशवेतन के ऊपर प्रतिकारात्मक भत्ता (Compensatory Allowance) — संसद क़ानून से तय करे; तब तक राष्ट्रपति के आदेश से
223कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीशमुख्य न्यायाधीश का पद ख़ाली हो, वे अनुपस्थित हों या काम न कर सकें — तब राष्ट्रपति उसी न्यायालय के किसी न्यायाधीश को
224(1)अपर न्यायाधीशराष्ट्रपति; न्यायाधीश बनने लायक व्यक्ति, ज़्यादा से ज़्यादा 2 वर्ष

10. क्षेत्राधिकार व शक्तियाँ

उच्च न्यायालय का अधिकार क्षेत्र राज्य की भौगोलिक सीमाओं तक चलता है। उसका क्षेत्राधिकार और शक्तियाँ कितनी हों, यह संसद तय करती है (अनु. 225)।

11. पाँच तरह का क्षेत्राधिकार

क्षेत्राधिकारमतलब
प्रारंभिकमामला सीधे उच्च न्यायालय में शुरू हो — राजस्व व उसकी वसूली, मूल अधिकारों का उल्लंघन, सांसदों व विधायकों के चुनाव विवाद, संविधान की व्याख्या, विवाह-तलाक, कंपनी क़ानून, वसीयत, न्यायालय की अवमानना
अपीलीयनीचे के न्यायालयों व अधिकरणों के निर्णय, आदेश और डिक्री के ख़िलाफ़ अपील सुनना
रिट / लेखअनु. 226 — निर्देश, आदेश और पाँच तरह की रिट

12. रिट — अनुच्छेद 226

  • 226(1) ➜ जिन राज्य क्षेत्रों पर उच्च न्यायालय का अधिकार है, वहाँ वह किसी भी व्यक्ति, प्राधिकारी या सरकार को निर्देश, आदेश या रिट जारी कर सकता है।
  • 226(2) ➜ रिट उस व्यक्ति के विरुद्ध भी जा सकती है जो राज्य के बाहर रहता है, बशर्ते उसका ग़ैरक़ानूनी काम इसी न्यायालय के क्षेत्र में हुआ हो।
  • 226(4) ➜ इस शक्ति से अनु. 32 के तहत उच्चतम न्यायालय की शक्ति कम नहीं होती।
रिटशब्द का अर्थकब / किसके विरुद्ध
बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus)“बंदी को न्यायालय के सामने पेश करो”हिरासत में रखे व्यक्ति को पेश कर कारण बताया जाए; हिरासत अवैध निकली तो तुरंत रिहाई
परमादेश (Mandamus)“हम आदेश देते हैं”किसी व्यक्ति या लोक प्राधिकारी (सरकार, निगम भी) को उसका क़ानूनी/सार्वजनिक कर्तव्य करने या ग़लत तरीक़े से न करने का आदेश
प्रतिषेध (Prohibition)रोकनाऊपरी न्यायालय अधीनस्थ न्यायालय/अधिकरण को अपनी सीमा लाँघने या प्राकृतिक न्याय के विरुद्ध चलने से पहले ही रोके — एक न्यायिक रिट

13. अधीक्षण, अंतरण, कर्मचारी

अनु. 227 — अधीक्षण

  • 227(1) ➜ अपने क्षेत्र के सभी न्यायालयों और न्यायाधिकरणों पर देखरेख (अधीक्षण) की शक्ति।
  • 227(2)(क) ➜ अधीनस्थ न्यायालयों से विवरणी (रिटर्न) माँग सकता है।
  • 227(2)(ख) ➜ उनकी कार्य-पद्धति और कार्यवाही के लिए नियम व प्रारूप बना सकता है।

जब नीचे के मामले में संविधान की व्याख्या का प्रश्न हो

  1. अधीनस्थ न्यायालय के मामले में संविधान की व्याख्या का ठोस (सारवान) विधि प्रश्न
  2. उसका हल मामले के निपटारे के लिए ज़रूरी
  3. उच्च न्यायालय मामला अपने पास मँगाता है

अनु. 229 — अधिकारी और सेवक

  • 229(1) ➜ न्यायालय के कर्मचारियों की नियुक्ति मुख्य न्यायमूर्ति या उनके द्वारा तय कोई न्यायाधीश / अधिकारी करता है।
  • 229(2) ➜ उनकी सेवा-शर्तें मुख्य न्यायमूर्ति (या उनके अधिकृत न्यायाधीश) बनाते हैं, राज्य विधानमंडल के क़ानून के अधीन।

14. न्यायिक पुनर्विलोकन

उच्चतम न्यायालय की तरह उच्च न्यायालय भी न्यायिक पुनर्विलोकन (Judicial Review) कर सकता है — यानी संसद या राज्य विधानमंडल का कोई क़ानून संविधान के प्रावधान तोड़ता हो तो उसे असंवैधानिक घोषित कर सकता है।

15. रैपिड फायर तथ्य

  • उच्च न्यायालय के अनुच्छेद ➜ 214–231
  • अधीनस्थ न्यायालय ➜ अनुच्छेद 233–237
  • राजस्थान HC की स्थापना ➜ 29 अगस्त 1949, मुख्य पीठ जोधपुर
  • अभिलेख न्यायालय ➜ अनुच्छेद 215
  • साझा उच्च न्यायालय ➜ अनुच्छेद 231, 7वें संशोधन से आया
  • न्यायाधीश की योग्यता ➜ भारत का नागरिक + 10 वर्ष न्यायिक पद या 10 वर्ष अधिवक्ता (217(2))
  • पद पर रहने की आयु ➜ 62 वर्ष; पहले 60 थी, 15वें संशोधन 1963 ने बढ़ाई
  • महाभियोग प्रस्ताव ➜ लोकसभा में 100, राज्यसभा में 50 सदस्य; फिर 3 सदस्यीय जाँच समिति
  • रिट का अनुच्छेद ➜ 226 (उच्चतम न्यायालय के लिए अनुच्छेद 32)

अगले भाग में राजस्थान उच्च न्यायालय — रियासतों के पाँच उच्च न्यायालयों से एक राज्य-स्तरीय न्यायालय, मुख्य न्यायाधीशों की सूची और ज़िले से नीचे की न्याय व्यवस्था।

पिछला भाग: नगरीय स्वशासन: नगरपालिका अधिनियम 2009

अगला भाग: राजस्थान उच्च न्यायालय एवं अधीनस्थ न्यायालय

इन्हें भी पढ़ें: प्रमुख अधिनियम · राजस्थान में पुलिस प्रशासन

पूरी श्रृंखला: राजस्थान की राजव्यवस्था — सभी अध्याय · राजस्थान जी.के. नोट्स — सभी विषय

इस अध्याय की पूरी तैयारी चाहिए? ऊपर दिए नोट्स हर खंड का चुना हुआ हिस्सा हैं। पूरी तालिकाएँ, बाक़ी बिंदु, याद रखने की ट्रिक, नक्शे-चित्र और अभ्यास-प्रश्न उच्च न्यायालय एवं अधीनस्थ न्यायालय के माइंड मैप में हैं। राजस्थान जी.के. के सभी विषय एक ही पास में उपलब्ध हैं।
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