राज्य प्रशासन को दो चेहरों से समझें — मुख्यमंत्री दिशा तय करता है और मुख्य सचिव उसे ज़मीन पर उतरवाता है। इस भाग में मुख्य सचिव का पद, इतिहास, चयन-कार्यकाल और उसके सातों कार्य हैं। फिर राज्य सचिवालय की संरचना, सचिवालय व निदेशालय का फ़र्क़ और सुधार समितियाँ आती हैं। अंत में मुख्यमंत्री कार्यालय और राजस्थान के मुख्य सचिवों के रिकॉर्ड व पूरी सूची दी गई है।
माइंड मैप खोलें ➜
1. एक नज़र में
राज्य की नीतियाँ जिस दफ़्तर में बनती हैं, उसे राज्य सचिवालय कहते हैं। इसके दो सिरे हैं — राजनैतिक मुखिया मुख्यमंत्री और प्रशासनिक मुखिया मुख्य सचिव। मुख्यमंत्री तय करता है “क्या करना है”, मुख्य सचिव देखता है कि वह “कैसे होगा”।
- सचिवालय की स्थापना ➜ अप्रैल 1949 · जयपुर
- प्रथम मुख्य सचिव ➜ के. राधाकृष्णन (13.04.1949)
- प्रशासनिक प्रमुख ➜ मुख्य सचिव
… शेष 3 बिंदु — पूरी सूची माइंड मैप में देखें
ट्रिक: जोड़ी याद रखें — केन्द्र में कैबिनेट सचिव जो काम करता है, राज्य में वही मुख्य सचिव करता है; केन्द्र में विभागों को मंत्रालय कहते हैं, राज्य सचिवालय में प्रशासनिक विभाग।
2. मुख्य सचिव
राज्य के प्रशासन में सबसे ऊँची कुर्सी मुख्य सचिव की है — वह सर्वोच्च प्रशासनिक अधिकारी है। सचिवालय के सारे विभाग उसकी निगरानी में चलते हैं, जबकि उसके ऊपर राजनैतिक बॉस मुख्यमंत्री होता है।
- पद बना ➜ 1799 · लॉर्ड वेलेजली
- मानकीकरण ➜ 1973 · प्रशासनिक सुधार आयोग
- नियुक्ति ➜ मुख्यमंत्री द्वारा
3. पद का इतिहास
| काल / क्रम | घटना | विवरण |
|---|---|---|
| 1799 | पद की शुरुआत | गवर्नर जनरल लॉर्ड वेलेजली ने यह पद बनाया; ब्रिटिश भारत के पहले मुख्य सचिव जी.एच. बार्लो (जॉर्ज हिलेरी बार्लो) बने। |
| 13 अप्रैल 1949 | राजस्थान का पहला मुख्य सचिव | के. राधाकृष्णन — इन्हें केन्द्र सरकार ने नियुक्त किया था। |
| नवम्बर 1956 | राज्यों की श्रेणियाँ खत्म | संविधान संशोधन से A, B, C, D श्रेणियाँ हटीं; इसके बाद मुख्य सचिव को राज्य सरकार ख़ुद चुनने लगी। |
… शेष 2 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें
नियुक्ति किसके हाथ में?
- 1949–56: केन्द्र सरकार
- नवम्बर 1956: श्रेणियाँ समाप्त
- 1958 से: राज्य सरकार
याद रखें: 1799 = वेलेजली ने पद बनाया · 1973 = पद का मानकीकरण। दोनों तारीखें आमने-सामने के विकल्पों में आती हैं।
4. हैसियत व उपनाम
| उपनाम / पहचान | अर्थ |
|---|---|
| किंग पिन (धुरी) | विद्वान एस.आर. माहेश्वरी का दिया नाम — नीति बनाने, नियंत्रण, समन्वय और प्रशासनिक नेतृत्व, चारों में सबसे अहम भूमिका। |
| अवशिष्ट वसीयतदार | जो काम किसी भी सचिव को बाँटा नहीं गया, वह अपने-आप मुख्य सचिव के ज़िम्मे आता है। |
| मुख्यमंत्री के सपनों का शिल्पी | मुख्यमंत्री की घोषणाओं और सोच को ज़मीन पर उतारने वाला। |
… शेष 3 पंक्तियाँ — पूरी तालिका माइंड मैप में देखें
- उसका राजनैतिक प्रमुख मुख्यमंत्री है — मुख्य सचिव जवाब मुख्यमंत्री को देता है।
- उसके काम और अधिकार सरकारी कार्य नियमावली (रूल्स ऑफ बिज़नेस) में लिखे हैं।
ट्रिक: “अवशिष्ट” = बचा हुआ। जो काम किसी के खाते में नहीं, वह “वसीयत” की तरह मुख्य सचिव को मिलता है — इसलिए अवशिष्ट वसीयतदार।
5. चयन, कार्यकाल, हटाना
मुख्य सचिव को मुख्यमंत्री चुनता है। इसके लिए कोई लिखित परीक्षा या तय सूत्र नहीं, बल्कि ये बातें देखी जाती हैं —
- IAS (भारतीय प्रशासनिक सेवा) का वरिष्ठ अधिकारी हो
- प्रशासनिक पदों पर काम का अच्छा अनुभव हो
- मुख्यमंत्री का भरोसेमंद (विश्वासपात्र) अधिकारी हो
ध्यान दें: वरिष्ठता हमेशा अंतिम कसौटी नहीं — IAS वरीयता क्रम को सबसे पहले मीठालाल मेहता की नियुक्ति में लाँघा गया।
- कार्यकाल ➜ तय नहीं — मुख्यमंत्री की इच्छा तक
- आम तौर पर ➜ 60 वर्ष की आयु तक
- हटाता कौन ➜ मुख्यमंत्री
6. मुख्य सचिव के कार्य
मुख्य सचिव के काम को सात हिस्सों में बाँटकर पढ़ें — हर हिस्सा एक “टोपी” है जो वह अलग-अलग मौक़ों पर पहनता है।
- मुख्यमंत्री का सलाहकार
- मंत्रिपरिषद् का सचिव
- प्रशासन का प्रमुख समन्वयक
- राज्य लोक सेवा का प्रधान
7. मुख्यमंत्री का सलाहकार
- राज्य का सबसे बड़ा अफ़सर होने से वह मुख्यमंत्री का मुख्य परामर्शदाता है।
- मुख्यमंत्री और राज्य के बाक़ी सचिवों के बीच कड़ी का काम करता है।
- मंत्री जो प्रस्ताव भेजते हैं, उनमें आने वाली प्रशासनिक अड़चनें मुख्यमंत्री को बताता है।
प्रस्ताव का रास्ता
- मंत्री का प्रस्ताव
- मुख्य सचिव की जाँच
- अड़चनों की जानकारी
8. मंत्रिपरिषद् का सचिव
- वह राज्य मंत्रिपरिषद् का पदेन सचिव है और मंत्रिमण्डल सचिवालय का प्रशासनिक प्रमुख भी।
- मंत्रिमण्डल का सदस्य न होने पर भी उसकी बैठकों में बैठता है।
- कैबिनेट और उसकी उप-समितियों की बैठकों में भी शामिल रहता है।
एक कैबिनेट बैठक में मुख्य सचिव
- कार्यसूची तैयार
- बैठक में उपस्थिति
- कार्यवाही दर्ज
9. प्रमुख समन्वयक
- विभागों के आपसी विवाद सुलझाने वाली समन्वय समिति का अध्यक्ष वही है।
- सचिवों की बैठक की अध्यक्षता करके पूरे प्रशासन पर नियंत्रण और तालमेल रखता है।
- सचिवालय से नीचे के स्तर ➜ संभागीय आयुक्त, ज़िला कलेक्टर और ज़िला विभागाध्यक्षों — की बैठकें भी वही लेता है।
10. लोक सेवा व विभागों का प्रमुख
लोक सेवा का प्रधान
- राज्य लोक सेवा का मुखिया — वरिष्ठ अफ़सरों की नियुक्ति, तबादले और पदोन्नति से जुड़े मामले उसके पास।
- राज्य सरकार के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी की भूमिका भी निभाता है।
कुछ विभागों का प्रमुख
- कुछ विभागों का प्रशासनिक प्रमुख वह ख़ुद होता है।
- ज़्यादातर राज्यों में ये चार विभाग आम तौर पर उसी के प्रभार में रहते हैं —
11. संकटकालीन प्रशासक
- बाढ़, सूखा, सांप्रदायिक दंगे और दूसरी आपदाओं में राहत व नियंत्रण की कमान उसके हाथ में रहती है।
- संकट में ऊँचे स्तर के फ़ैसलों के लिए बनी समितियों का वह आम तौर पर अध्यक्ष या सदस्य होता है।
12. अन्य कार्य
| भूमिका | क्या करता है |
|---|---|
| सरकार का प्रवक्ता | राज्य सरकार की बात सामने रखता है। |
| राष्ट्रपति शासन में | केन्द्र की ओर से राज्यपाल का सलाहकार बनता है। |
| बचे हुए काम | जो काम दूसरे किसी सचिव के दायरे में नहीं, वे सब देखता है। |
| संपर्क-सूत्र | अपनी सरकार, केन्द्र सरकार और दूसरे राज्यों के बीच बातचीत का मुख्य माध्यम। |
13. मुख्य सचिव बनाम कैबिनेट सचिव
दोनों में समानता
- दोनों अपने-अपने मुख्य कार्यपालक (मुख्यमंत्री / प्रधानमंत्री) के प्रमुख सलाहकार।
- दोनों अपने मंत्रिमण्डल के सचिव।
- दोनों अपने प्रशासन के मुख्य समन्वयक।
दोनों में अंतर
| मुख्य सचिव (राज्य) | कैबिनेट सचिव (केन्द्र) |
|---|---|
| काम और अधिकार ज़्यादा | काम और अधिकार कम |
| राज्य सचिवालय का प्रशासनिक प्रमुख | पूरे केन्द्रीय सचिवालय का मुखिया वह नहीं |
| राज्य के सचिवों का प्रधान | भारत सरकार के सचिव उसके अधीन नहीं |
14. राज्य सचिवालय
“सचिवालय” शब्द ही बताता है — सचिवों का आलय (घर)। यहीं राज्य के सारे विभागों के मंत्री और अफ़सर मिलकर नीतियाँ और कानून तय करते हैं। इसीलिए इसे राज्य की सत्ता का हृदय कहा जाता है।
- स्थापना ➜ अप्रैल 1949
- जगह ➜ भगवंत दास बैरेक्स, सी-स्कीम, जयपुर
- प्रशासनिक प्रमुख ➜ मुख्य सचिव
15. परिचय और शुरुआत
| काल / क्रम | घटना | विवरण |
|---|---|---|
| ब्रिटिश काल | इम्पीरियल सेक्रेटेरिएट | सचिवालय की शुरुआत इसी नाम से हुई — आज का केन्द्रीय सचिवालय। |
| 1843 | प्रांतीय सचिवालय | प्रांतों के स्तर पर सचिवालय अस्तित्व में आया। |
| 1949 | द राजस्थान एडमिनिस्ट्रेशन ऑर्डिनेंस–1949 | राजप्रमुख ने यह अध्यादेश जारी किया, ताकि जयपुर में शासन सचिवालय बन सके। |
- हर राज्य का अपना एक सचिवालय होता है, जहाँ राज्य की नीति बनती है।
- राज्य सचिवालय के विभाग प्रशासनिक विभाग कहलाते हैं, जबकि केन्द्र में इन्हें मंत्रालय कहते हैं।
- सचिवालय में कौन-कौन से और कितने विभाग होंगे, यह राज्य का मंत्रिमण्डल तय करता है।
16. सचिवालय की संरचना
| स्तर | प्रशासनिक पद | राजनैतिक पद |
|---|---|---|
| 1 | मुख्य सचिव | मुख्यमंत्री |
| 2 | अतिरिक्त मुख्य सचिव | कैबिनेट मंत्री |
| 3 | प्रमुख शासन सचिव | राज्य मंत्री |
| 4 | सचिव | उपमंत्री |
किस स्तर पर कौन-सा काम
- शासन सचिव ➜ नीति निर्माण
- प्रयोजना अधिकारी ➜ कार्यक्रम का क्रियान्वयन
- अनुभाग अधिकारी ➜ पूरा पर्यवेक्षण व रोज़ का (नैत्यक) लिपिकीय काम
17. संगठन और कार्य
संवैधानिक आधार
अनुच्छेद 154(1) — राज्य की पूरी कार्यपालिका शक्ति राज्यपाल के पास है, जिसे वह अपने अधीन अफ़सरों के ज़रिए इस्तेमाल करता है। असल में यह शक्ति मुख्यमंत्री, मंत्रिपरिषद् और सचिवालय व दूसरे दफ़्तरों के अफ़सर चलाते हैं।
- राज्य सरकार के सभी विभागों के सबसे ऊपरी स्तर को मिलाकर जो इकाई बनती है, वही सचिवालय है।
- सचिवालय स्तर पर मंत्री और सचिव के निर्देशन में काम करने वाले विभाग = प्रशासनिक विभाग।
- अमल के स्तर पर काम करने वाले निदेशालय = कार्यकारी विभाग।
सचिवालय के प्रमुख काम
- सरकार की नीतियों व कार्यक्रमों का ख़ाका तैयार करना
- उन नीतियों-कार्यक्रमों के नतीजों की समीक्षा
- सरकारी सूचनाओं का भंडार रखना
- राज्य के विस्तार के लिए योजना और कार्यक्रम बनाने में मदद
18. सचिवालय बनाम निदेशालय
| आधार | सचिवालय | निदेशालय |
|---|---|---|
| दर्जा | शीर्ष प्रशासनिक संस्था | अधीनस्थ प्रशासनिक संस्था |
| अधिकारी | सचिव | निदेशक |
| मंत्री से संबंध | प्रत्यक्ष | अप्रत्यक्ष |
19. सुधार आयोग व समितियाँ
प्रथम प्रशासनिक सुधार आयोग (1966–70) — केन्द्र
- अध्यक्ष (पहले) ➜ मोरारजी देसाई
- अध्यक्ष (बाद में) ➜ के. हनुमन्तैया
- सिफ़ारिश: राज्य सरकार में विभाग 13 से ज़्यादा न हों।
- सिफ़ारिश: कार्मिक विभाग मुख्य सचिव के अधीन बनाया जाए।
राजस्थान की समितियाँ
| वर्ष | समिति | अध्यक्ष / टिप्पणी |
|---|---|---|
| 1960 | सचिवालय पुनर्गठन समिति | — |
| 1963 | राजस्थान की प्रथम प्रशासनिक सुधार समिति | हरिश्चन्द्र माथुर |
| 1969–70 | राजस्थान सचिवालय पुनर्गठन समिति | मोहन मुखर्जी — उद्देश्य: सचिवालय का पुनर्गठन |
20. मुख्यमंत्री कार्यालय
मुख्यमंत्री को रोज़ के प्रशासनिक और सचिवीय काम में मदद देने के लिए उसका अलग दफ़्तर होता है — मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO), जिसे मुख्यमंत्री सचिवालय भी कहते हैं।
21. स्थापना और ढाँचा
| काल / क्रम | घटना | विवरण |
|---|---|---|
| 1951 | स्थापना | राजस्थान में मुख्यमंत्री कार्यालय बना। |
| 1998 तक | एक सचिव | कार्यालय में केवल एक ही सचिव होता था। |
| दिसम्बर 1998 | विस्तार | दो सचिव — प्रथम सचिव और द्वितीय सचिव। |
- इस दफ़्तर की कमान एक सचिव के हाथ में रहती है, जिसे मुख्यमंत्री का सचिव कहते हैं।
- मुख्यमंत्री के नीचे पाँच पद: सचिव प्रथम, सचिव द्वितीय, प्रमुख निजी सचिव, प्रेस सलाहकार, पुलिस अधीक्षक (सतर्कता)।
22. CMO के काम
- मुख्यमंत्री की घोषणाओं को लागू करवाना
- मुख्यमंत्री सहायता कोष का प्रबंधन
- मुख्यमंत्री तक प्रशासन की सूचनाएँ, तथ्य और जानकारी पहुँचाना
- केन्द्र सरकार और दूसरे राज्यों से पत्र-व्यवहार
23. राजस्थान के मुख्य सचिव
- पहले (केन्द्र द्वारा) ➜ के. राधाकृष्णन
- पहले (राज्य द्वारा) ➜ भगवत सिंह मेहता
- पहली महिला ➜ कुशल सिंह
24. पहले और अकेले
| पहचान | नाम |
|---|---|
| केन्द्र द्वारा नियुक्त पहले मुख्य सचिव | के. राधाकृष्णन (13.04.1949) |
| राज्य सरकार द्वारा नियुक्त पहले मुख्य सचिव | भगवत सिंह मेहता (1958) |
| राजस्थानी मूल के पहले मुख्य सचिव | भगवत सिंह मेहता |
| पहली महिला मुख्य सचिव | कुशल सिंह (2009) |
25. रिकॉर्ड और दोहरी भूमिकाएँ
कार्यकाल के रिकॉर्ड
- सबसे लंबा कार्यकाल ➜ भगवत सिंह मेहता (1958–64 और 1965–66, दो बार)।
- सबसे छोटा ➜ एच.एम. माथुर (6 दिन: 28.01.1994 से 02.02.1994); उसके बाद आर.डी. थापर (50 दिन, 1977)।
- वी.बी.एल. माथुर (विपिन बिहारी लाल माथुर) — तीन मुख्यमंत्रियों के साथ सबसे ज़्यादा चार कार्यकाल में रहे।
वी.बी.एल. माथुर के चार दौर
- हरिदेव जोशी
- शिवचरण माथुर
- फिर हरिदेव जोशी
मुख्य सचिव जो बाद में दूसरे पद पर भी रहे
| नाम | दूसरा पद |
|---|---|
| के.पी.यू. मेनन | उपलोकायुक्त |
| टी. श्रीनिवासन | मुख्य सूचना आयुक्त |
| सांवलदान उज्ज्वल | RPSC के सदस्य |
26. सूची: 1949–1993
| क्र. | मुख्य सचिव | कार्यकाल | मुख्यमंत्री |
|---|---|---|---|
| 1 | के. राधाकृष्णन | 13.04.1949 – 02.05.1950 | हीरालाल शास्त्री |
| 2 | वी. नारायण | 02.05.1950 – 01.09.1950 | हीरालाल शास्त्री |
| 3 | के. राधाकृष्णन | 01.09.1950 – 31.01.1951 | हीरालाल शास्त्री |
| 4 | एस.डब्ल्यू. शिवेश्वरकर | 08.02.1951 – 16.02.1953 | सी.एस. वेंकटाचार, जयनारायण व्यास, टीकाराम पालीवाल |
27. सूची: 1993–2024
| क्र. | मुख्य सचिव | कार्यकाल | मुख्यमंत्री |
|---|---|---|---|
| 24 | गोविन्द जी मिश्रा | 30.08.1993 – 28.01.1994 | भैरोंसिंह शेखावत |
| 25 | एच.एम. माथुर | 28.01.1994 – 02.02.1994 | भैरोंसिंह शेखावत |
| 26 | मीठालाल मेहता | 02.02.1994 – 31.12.1997 | भैरोंसिंह शेखावत |
| 27 | अरुण कुमार | 31.12.1997 – 31.12.1999 | भैरोंसिंह शेखावत, अशोक गहलोत |
रिवीजन पॉइंटर्स
- राज्य सचिवालय की स्थापना अप्रैल 1949 में जयपुर में हुई; इसका प्रशासनिक प्रमुख मुख्य सचिव है।
- मुख्य सचिव का पद 1799 में लॉर्ड वेलेजली ने बनाया और 1973 में प्रशासनिक सुधार आयोग ने इसका मानकीकरण किया।
- राजस्थान के पहले मुख्य सचिव के. राधाकृष्णन (13.04.1949) थे; 1958 से नियुक्ति राज्य सरकार करती है, पहले राज्य-नियुक्त भगवत सिंह मेहता।
- मुख्य सचिव को मुख्यमंत्री चुनता और हटाता है; कार्यकाल तय नहीं, आम तौर पर 60 वर्ष की आयु तक।
- उपनाम — «किंग पिन» (एस.आर. माहेश्वरी का दिया) और «अवशिष्ट वसीयतदार»।
- वह मंत्रिपरिषद् का पदेन सचिव और विभागों के विवाद सुलझाने वाली समन्वय समिति का अध्यक्ष है।
- सचिवालय के विभाग प्रशासनिक विभाग कहलाते हैं (केन्द्र में मंत्रालय); सचिवालय शीर्ष संस्था है और निदेशालय अधीनस्थ।
- मुख्यमंत्री कार्यालय 1951 में बना; दिसम्बर 1998 में दो सचिव — प्रथम और द्वितीय — हो गए।
- पहली महिला मुख्य सचिव कुशल सिंह (2009); सबसे छोटा कार्यकाल एच.एम. माथुर का (6 दिन)।
अगले भाग में प्रशासन की इकाइयाँ — संभाग और संभागीय आयुक्त, फिर जिला व जिला कलेक्टर और जिले के नीचे राजस्व व ग्राम प्रशासन।
पिछला भाग: राजस्थान विधानसभा की प्रक्रिया एवं नियम: विधानसभा की समितियाँ
अगला भाग: संभागीय व्यवस्था एवं उपखण्ड से गाँव तक
इन्हें भी पढ़ें: मुख्यमंत्री एवं राज्य मंत्रिपरिषद् · संभाग व जिला प्रशासन
पूरी श्रृंखला: राजस्थान की राजव्यवस्था — सभी अध्याय · राजस्थान जी.के. नोट्स — सभी विषय
इस विषय का माइंड मैप ➜Complete Rajasthan GK पास देखें



