प्रमुख आयोग: राज्य सूचना आयोग एवं लोकायुक्त – Rajasthan Polity Chapter 22

राज्य सूचना आयोग और लोकायुक्त की बनावट, कार्यकाल, हटाने की विधि, शक्तियाँ और सूचियाँ; साथ में महाधिवक्ता व महालेखाकार।

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In this chapter (15 sections)
  1. राज्य सूचना आयोग
  2. गठन व नियुक्ति
  3. कार्यकाल व हटाना
  4. कार्य व शक्तियाँ
  5. मुख्य सूचना आयुक्त
  6. लोकायुक्त
  7. पृष्ठभूमि
  8. नियुक्ति, कार्यकाल, हटाना
  9. क्षेत्राधिकार व कार्य
  10. लोकायुक्तों की सूची
  11. महाधिवक्ता व महालेखाकार
  12. महाधिवक्ता — अनु. 165
  13. महाधिवक्ता — तथ्य
  14. महालेखाकार कार्यालय
  15. रैपिड फायर तथ्य

विभाग से सूचना न मिले तो आख़िरी दरवाज़ा सूचना आयोग है, और सरकारी पद के दुरुपयोग की शिकायत लोकायुक्त के पास जाती है। परीक्षा में इनकी धाराएँ, समय-सीमाएँ और पहले अधिकारी बार-बार पूछे जाते हैं। इस भाग में राज्य सूचना आयोग, फिर लोकायुक्त की पृष्ठभूमि, नियुक्ति, क्षेत्राधिकार और सूची को क्रम से रखा गया है। अंत में महाधिवक्ता तथा महालेखाकार कार्यालय के तथ्य दिए गए हैं।

इस विषय का इंटरैक्टिव माइंड मैप — प्रमुख आयोग, 2 चॉक-बोर्ड चित्र, 2 नक्शे, 2 चार्ट, 30 फ्लैशकार्ड और 12 अभ्यास-प्रश्न के साथ। यहाँ हर खंड के चुने हुए बिंदु हैं; पूरी तालिकाएँ, शेष तथ्य और रटने की ट्रिक माइंड मैप में हैं।
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1. राज्य सूचना आयोग

  • कानून ➜ सूचना का अधिकार अधि. 2005, धारा 15
  • गठन ➜ 13 अप्रैल 2006
  • काम शुरू ➜ 18 अप्रैल 2006

… शेष 3 बिंदु — पूरी सूची माइंड मैप में देखें

RTI से जुड़े मामलों में यह अंतिम अपीलीय प्राधिकरण है — इसके फ़ैसले अंतिम और बाध्यकारी। जो व्यक्ति लोक सूचना अधिकारी से सूचना नहीं पा सका, उसकी शिकायत भी यह सुनता और जाँचता है।

2. गठन व नियुक्ति

  • धारा 15(1) ➜ 13 अप्रैल 2006 को बना, कामकाज 18 अप्रैल 2006 को शुरू।
  • धारा 15(2) ➜ 1 मुख्य सूचना आयुक्त + ज़रूरत के अनुसार अधिकतम 10 सूचना आयुक्त।
  • राजस्थान में मुख्य सूचना आयुक्त और 4 सूचना आयुक्तों के पद सृजित।

… शेष 2 बिंदु — पूरी सूची माइंड मैप में देखें

3. कार्यकाल व हटाना

  • धारा 16 ➜ मुख्य व अन्य सूचना आयुक्त 3 वर्ष पद पर रहते हैं; 65 की उम्र पहले आए तो तभी तक।
  • पुनर्नियुक्ति नहीं; पर सूचना आयुक्त आगे मुख्य सूचना आयुक्त बन सकता है।
  • 16(3) ➜ शपथ राज्यपाल या उनके नियुक्त व्यक्ति के सामने।

… शेष 3 बिंदु — पूरी सूची माइंड मैप में देखें

धारा 17 — हटाना (राज्यपाल)

  • 17(1) ➜ कदाचार या असमर्थता पर राज्यपाल के आदेश से, पर तभी जब राज्यपाल के भेजे मामले में सुप्रीम कोर्ट जाँचकर हटाने की रिपोर्ट दे।
  • 17(2) ➜ जाँच के दौरान, आदेश होने तक, राज्यपाल निलंबित कर सकते हैं।
  • 17(3) ➜ सीधे हटाने के आधार: दिवालिया; किसी अपराध में दोषी; कार्यकाल में कोई और लाभ का पद; मानसिक या शारीरिक अक्षमता।

4. कार्य व शक्तियाँ

RTI अधिनियम की धारा 18, 19 और 20 आयोग के काम बताती हैं — शिकायतें निपटाना, अपील अधिकारी बनकर फ़ैसला देना, दोषी अधिकारी पर जुर्माना, और लोक प्राधिकरणों को निर्देश। इसके निर्देश बाध्यकारी हैं।

1. परिवाद (शिकायत) — किन बातों पर

  • लोक सूचना अधिकारी नियुक्त ही नहीं था, इसलिए आवेदन नहीं दे सका।
  • आवेदन लिया ही नहीं गया, या सूचना देने से मना कर दिया।
  • तय समय में जवाब नहीं मिला।

जाँच के समय आयोग के पास दीवानी न्यायालय जैसी शक्ति — किसी को बुलाना; शपथ पर मौखिक/लिखित साक्ष्य व दस्तावेज़ पेश करवाना; दस्तावेज़ों की तलाशी और निरीक्षण; शपथ-पत्र पर साक्ष्य; किसी अदालत/कार्यालय से सार्वजनिक अभिलेख मँगाना; गवाहों-दस्तावेज़ों की जाँच के लिए समन।

RTI अपील का रास्ता

  1. आवेदन — धारा 7 की समय-सीमा
  2. सूचना न मिले/असहमति → 30 दिन में प्रथम अपील (PIO से वरिष्ठ अधिकारी)
  3. उसके आदेश से 90 दिन में द्वितीय अपील — राज्य सूचना आयोग, धारा 19(3)

देरी का कारण संतोषजनक हो तो आयोग 90 दिन के बाद भी द्वितीय अपील सुन सकता है।

3. जुर्माना (शास्ति)

  • अपील पर फ़ैसले में यदि लगे कि अधिकारी ने बिना उचित कारण — आवेदन लेने से मना किया, समय पर सूचना नहीं दी, जानबूझकर ग़लत/अधूरी/झूठी सूचना दी, आवेदन की विषय-वस्तु नष्ट की, या सूचना देने में बाधा डाली —
  • तो आवेदन मिलने से सूचना देने तक 250 रु. प्रतिदिन, अधिकतम 25,000 रु. जुर्माना।
  • जुर्माने से पहले अधिकारी को सुनवाई का अवसर।

4. अधिनियम लागू करवाना — धारा 19(8)

  1. किसी ख़ास रूप में सूचना देने का निर्देश।
  2. PIO या सहायक PIO की नियुक्ति का निर्देश।
  3. सूचना या श्रेणीवार सूचना प्रकाशित करने का निर्देश।

5. मुख्य सूचना आयुक्त

क्र.मुख्य सूचना आयुक्तकार्यकाल
1एम.डी. कौरानी18.04.2006 – 18.04.2011
2टी. श्रीनिवासन05.09.2011 – 13.08.2015
3सुरेश कुमार चौधरी06.11.2015 – 25.12.2018
  • 9 जुलाई 2024 से मुख्य सूचना आयुक्त — पूर्व DGP मोहन लाल लाठर।
  • सूचना आयुक्त ➜ सुरेश चन्द गुप्ता, महेन्द्र कुमार पारख, टीकाराम शर्मा।
  • बजट 2023-24 में घोषणा — जोधपुर में भी आयोग की पीठ बनेगी।

6. लोकायुक्त

  • अधिनियम ➜ राज. लोकायुक्त तथा उप-लोकायुक्त अधि. 1973
  • लागू ➜ 3 फरवरी 1973
  • राष्ट्रपति की स्वीकृति ➜ 26 मार्च 1973

लोकायुक्त राज्य सरकार का विभाग नहीं है और उसके काम में सरकार दख़ल नहीं देती।

7. पृष्ठभूमि

ओम्बुड्समैन — विधायिका का नियुक्त ऐसा आयुक्त जो नौकरशाही की शक्ति के दुरुपयोग पर नागरिकों की शिकायतें जाँचे। भारत में इसी विचार के रूप लोकपाल (केंद्र) और लोकायुक्त (राज्य) हैं।

काल / क्रमघटनाविवरण
1966प्रशासनिक सुधार आयोगअध्यक्ष मोरारजी देसाई; अपनी एक ख़ास रिपोर्ट में केंद्र के लिए लोकपाल और राज्यों के लिए लोकायुक्त सुझाया
1970ओडिशालोकपाल का कानून सबसे पहले; 1995 में नया लोकपाल एवं लोकायुक्त अधिनियम
1971महाराष्ट्रलोकायुक्त संस्था
  • राजस्थान में 1973 में लोकायुक्त तथा उप-लोकायुक्त अध्यादेश आया, जो 3 फरवरी 1973 से लागू हुआ; राष्ट्रपति ने 26 मार्च 1973 को इसे मंज़ूरी दी, तभी से यह अधिनियम बनकर लागू है।
  • लोकायुक्त कानून को धार देने के लिए फरवरी 2014 में नरपतमल लोढ़ा के नेतृत्व में उच्च स्तरीय कमेटी बनी।

8. नियुक्ति, कार्यकाल, हटाना

धारा 3 — नियुक्ति

  • राज्यपाल अपने हस्ताक्षर और मुहर वाले वारंट से लोकायुक्त नियुक्त करते हैं — पर हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और विधानसभा में विपक्ष के नेता से सलाह के बाद।
  • उप-लोकायुक्त ➜ राज्यपाल, लोकायुक्त की सलाह से।
  • शपथ ➜ राज्यपाल या उनके नियुक्त व्यक्ति के सामने; शपथ का प्रारूप पहली अनुसूची में।

धारा 4 — योग्यता

  • लोकायुक्त ➜ केवल सुप्रीम कोर्ट का सेवानिवृत्त न्यायाधीश या हाईकोर्ट का सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश।
  • उप-लोकायुक्त ➜ ऐसा व्यक्ति जो पहले सतर्कता आयुक्त रह चुका हो।
  • दोनों: कोई लाभ का पद न हो, किसी राजनीतिक दल से न जुड़े हों, संसद या विधानमंडल के सदस्य न हों।

धारा 5 — कार्यकाल व सेवा-शर्तें

  • पद ग्रहण से अधिकतम 5 वर्ष।
  • त्यागपत्र ➜ राज्यपाल को, हस्ताक्षर सहित।
  • लोकायुक्त का पद खाली हो या वे असमर्थ हों और उप-लोकायुक्त का पद भी खाली हो, तो राजस्थान हाईकोर्ट का एक न्यायाधीश काम संभालता है — नाम राज्यपाल के अनुरोध पर हाईकोर्ट के मुख्य न्यायमूर्ति देते हैं।

धारा 6 — हटाना

  • कदाचार या असमर्थता पर हटाने का अधिकार राज्यपाल का — अनुच्छेद 311 की शर्तों के साथ।
  • उससे पहले जाँच ➜ लोकायुक्त के मामले में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश या किसी हाईकोर्ट के सेवारत/सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश द्वारा; उप-लोकायुक्त के मामले में सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट के सेवारत/सेवानिवृत्त न्यायाधीश द्वारा (जाँचकर्ता राज्यपाल नियुक्त करते हैं)।
  • सदन में मौजूद व वोट डालने वालों में न्यूनतम दो-तिहाई (2/3) प्रस्ताव के पक्ष में हो, तभी राज्यपाल हटाते हैं।

9. क्षेत्राधिकार व कार्य

दायरे मेंदायरे से बाहर
राज्य के सभी मंत्री, लोकसेवक, सचिव, विभागाध्यक्षराज्यपाल, मुख्यमंत्री
ज़िला प्रमुख व उप-प्रमुख, प्रधान व उप-प्रधानमहालेखाकार
स्थायी समितियों के अध्यक्ष (ज़िला परिषद, पंचायत समिति)हाईकोर्ट व ज़िला न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीश, अन्य न्यायाधीश, न्यायिक अधिकारी-कर्मचारी

लोकायुक्त के कार्य

  • सार्वजनिक क्षेत्र में भ्रष्टाचार, पद के दुरुपयोग और अकर्मण्यता की शिकायतों की स्वतंत्र व निष्पक्ष जाँच — पीड़ित को राहत और दोषी पर कार्यवाही की सिफ़ारिश।
  • जाँच के बाद मामला खारिज करता है या सक्षम अधिकारी को आगे की कार्यवाही के लिए अनुशंसा भेजता है।
  • सिविल कोर्ट जैसी शक्ति — जाँच हेतु फ़ाइलें व दस्तावेज़ मँगवा सकता है।

10. लोकायुक्तों की सूची

क्र.लोकायुक्तकार्यकाल
1न्यायमूर्ति आई.डी. दुआ28.08.1973 – 27.08.1978
2न्यायमूर्ति डी.पी. गुप्ता28.08.1978 – 05.08.1979
3न्यायमूर्ति मोहनलाल जोशी06.08.1979 – 07.08.1982
4न्यायमूर्ति के.एस. सिद्धू04.04.1984 – 03.01.1985
  • पहले लोकायुक्त ➜ आई.डी. दुआ
  • पहले उप-लोकायुक्त ➜ के.पी.यू. मेनन
  • दो बार लोकायुक्त ➜ महेन्द्र भूषण शर्मा

11. महाधिवक्ता व महालेखाकार

महाधिवक्तामहालेखाकार
कामसरकार को क़ानूनी सलाहराज्य के लेखों का संकलन, कोषागार निरीक्षण
आधारभाग 6, अनु. 165भारतीय लेखा परीक्षा व लेखा विभाग
जगहजोधपुर (पीठ जयपुर)जयपुर (शुरुआत में जोधपुर में शाखा)

12. महाधिवक्ता — अनु. 165

  • संवैधानिक पद ➜ भाग 6, अनुच्छेद 165; राज्य का सर्वोच्च विधि अधिकारी, केंद्र के महान्यायवादी के समकक्ष।
  • राजस्थान में यह पद राज्य पुनर्गठन अधिनियम 1956 के तहत बना।
  • 165(1) ➜ राज्यपाल उस व्यक्ति को नियुक्त करते हैं जो हाईकोर्ट का न्यायाधीश बनने योग्य हो।

योग्यता (हाईकोर्ट न्यायाधीश जैसी)

  1. भारत का नागरिक।
  2. भारत में 10 वर्ष या अधिक न्यायिक पद पर, या
  3. एक या अधिक हाईकोर्ट में 10 साल लगातार वकालत।
  • 165(2) ➜ सरकार को क़ानूनी विषयों पर सलाह और राज्यपाल के सौंपे दूसरे क़ानूनी काम।
  • 165(3) ➜ पद राज्यपाल के प्रसादपर्यन्त; संविधान में कोई निश्चित कार्यकाल नहीं।
  • त्यागपत्र ➜ राज्यपाल को।

13. महाधिवक्ता — तथ्य

  • कार्यालय ➜ मुख्यपीठ जोधपुर · खण्डपीठ जयपुर
  • पहले महाधिवक्ता ➜ जी.सी. कासलीवाल
  • सबसे लंबा कार्यकाल ➜ जी.सी. कासलीवाल (15 वर्ष)

14. महालेखाकार कार्यालय

  • राज्य बनने (30 मार्च 1949) के बाद पहला दफ़्तर जयपुर के सिटी पैलेस परिसर में जलेब चौक वाले भाग में खुला — 1 अक्टूबर 1949 को।
  • जोधपुर में खासजी की हवेली (“अचरौल हाउस”) किराये पर लेकर उप महालेखाकार प्रभारी के अधीन शाखा कार्यालय और आवास बनाया।
  • पहले महालेखाकार ➜ रंग बिहारी लाल।
काल / क्रमघटनाविवरण
अप्रैल 1982दो कार्यालयमहालेखाकार-I: राज्य के लेन-देन का लेखांकन व सिविल लेखा परीक्षा · महालेखाकार-II: सरकारी कंपनियों, निगमों, वाणिज्यिक उपक्रमों और प्राप्तियों (केंद्र व राज्य) की लेखा परीक्षा
मार्च 1984लेखा व हक कार्यालयलेखा परीक्षा और लेखा कार्यालयों के पुनर्गठन से महालेखाकार (लेखा व हक) अपने आज के रूप में
20.09.2002प्रधान महालेखाकार (लेखा परीक्षा)-Iकार्यालय का दर्जा बढ़ा

महालेखाकार (लेखा व हक) के मुख्य काम

  1. सिविल विभागों, सार्वजनिक निर्माण, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी, जल संसाधन विभाग और वन खण्डों के कोषागारों से आए वाउचर-चालानों से राज्य के मासिक लेखों का संकलन।
  2. राज्य के कोषागारों व उपकोषागारों का निरीक्षण।
  3. मासिक सिविल लेखे तथा वार्षिक वित्त लेखे व विनियोग लेखे तैयार करना।

कार्यालय की अध्यक्षता महालेखाकार करते हैं।

15. रैपिड फायर तथ्य

  • सूचना आयोग का गठन ➜ 13 अप्रैल 2006 (काम शुरू 18 अप्रैल 2006)
  • आयुक्तों का कार्यकाल ➜ 3 वर्ष या 65 वर्ष की आयु
  • द्वितीय अपील की अवधि ➜ 90 दिन, धारा 19(3)
  • जुर्माना ➜ 250 रु. प्रतिदिन, अधिकतम 25,000 रु.
  • लोकायुक्त अधिनियम लागू ➜ 3 फरवरी 1973
  • लोकायुक्त का कार्यकाल ➜ पद ग्रहण से अधिकतम 5 वर्ष
  • पहले लोकायुक्त ➜ आई.डी. दुआ
  • दो बार लोकायुक्त ➜ महेन्द्र भूषण शर्मा
  • महाधिवक्ता ➜ अनु. 165; पहले महाधिवक्ता जी.सी. कासलीवाल

अगले भाग में तीनों प्रमुख अधिनियम — सूचना का अधिकार 2005, लोक सेवा गारंटी और सुनवाई का अधिकार — तथा RTI में आवेदन से अपील तक का रास्ता।

पिछला भाग: प्रमुख आयोग: राज्य निर्वाचन आयोग एवं राज्य वित्त आयोग

अगला भाग: प्रमुख अधिनियम: सूचना का अधिकार 2005 एवं RTI : आवेदन से अपील तक

इन्हें भी पढ़ें: प्रमुख अधिनियम · राज्यपाल

पूरी श्रृंखला: राजस्थान की राजव्यवस्था — सभी अध्याय · राजस्थान जी.के. नोट्स — सभी विषय

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