73वाँ संविधान संशोधन एवं राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 – Rajasthan Polity Chapter 14

73वें संशोधन के शेष अनुच्छेद और राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की मुख्य धाराएँ।

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In this chapter (13 sections)
  1. ग्राम सभा, गठन, संरचना
  2. आरक्षण
  3. अवधि व अयोग्यता
  4. शक्तियाँ व 11वीं अनुसूची
  5. वित्त आयोग से 243ण तक
  6. राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994
  7. अधिनियम का क्रम
  8. वार्ड सभा
  9. ग्राम सभा
  10. आरक्षण, चुनाव, योग्यता
  11. त्यागपत्र, अविश्वास, हटाना
  12. राज्य सरकार की शक्तियाँ
  13. रैपिड फायर तथ्य

संविधान बताता है कि पंचायतें कैसी हों, पर ब्योरा हर राज्य अपने क़ानून में भरता है — इसलिए अनुच्छेद और धारा, दोनों के क्रमांक साथ-साथ याद करने पड़ते हैं। इस भाग में ग्राम सभा, गठन, संरचना, आरक्षण, अवधि व अयोग्यता, 11वीं अनुसूची और वित्त आयोग से 243ण तक की बातें हैं। उसके बाद राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की वार्ड सभा, ग्राम सभा, चुनाव, अविश्वास और राज्य सरकार की शक्तियाँ दी गई हैं।

इस विषय का इंटरैक्टिव माइंड मैप — पंचायती राज, 2 चॉक-बोर्ड चित्र, 3 नक्शे, 1 चार्ट, 28 फ्लैशकार्ड और 12 अभ्यास-प्रश्न के साथ। यहाँ हर खंड के चुने हुए बिंदु हैं; पूरी तालिकाएँ, शेष तथ्य और रटने की ट्रिक माइंड मैप में हैं।
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1. ग्राम सभा, गठन, संरचना

243क — ग्राम सभा

ग्राम स्तर पर ग्राम सभा वही शक्तियाँ और काम संभालेगी जो राज्य विधानमण्डल क़ानून बनाकर तय करे।

243ख — गठन

  • हर राज्य में ग्राम, मध्यवर्ती और जिला — तीनों स्तरों पर पंचायतें बनेंगी।
  • अपवाद: 20 लाख से कम आबादी वाले राज्य में मध्यवर्ती स्तर बनाना ज़रूरी नहीं।

243ग — संरचना

  • संरचना का प्रावधान राज्य विधानमण्डल क़ानून से करेगा।
  • पंचायत की सभी सीटें पंचायत क्षेत्र के प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्रों से सीधे चुनाव से भरेंगी; हर क्षेत्र में आबादी और सीटों का अनुपात यथासंभव बराबर रहेगा।
  • विधानमण्डल चाहे तो इनका प्रतिनिधित्व रख सकता है — (क) ग्राम पंचायत अध्यक्षों का मध्यवर्ती स्तर पर (जहाँ मध्यवर्ती स्तर न हो, वहाँ जिला स्तर पर); (ख) मध्यवर्ती अध्यक्षों का जिला स्तर पर; (ग) उस क्षेत्र के लोकसभा व विधानसभा सदस्यों का ग्राम से ऊपर के स्तरों पर; (घ) राज्यसभा व विधानपरिषद् सदस्यों का उस मध्यवर्ती या जिला पंचायत में, जहाँ वे मतदाता के रूप में दर्ज हों।

… शेष 2 बिंदु — पूरी सूची माइंड मैप में देखें

स्तरचुनी हुई संस्थाप्रमुख पदाधिकारी
ग्रामग्राम पंचायतसरपंच
खण्ड / ब्लॉकपंचायत समितिप्रधान
जिलाजिला परिषद्जिला प्रमुख

2. आरक्षण

  • 243घ(1) ➜ हर पंचायत में SC और ST के लिए सीटें आरक्षित।
  • 243घ(2) ➜ इन आरक्षित सीटों में से कम से कम 1/3 उन्हीं वर्गों (SC/ST) की महिलाओं के लिए।
  • 243घ(3) ➜ सीधे चुनाव वाली कुल सीटों में से कम से कम 1/3 महिलाओं के लिए।

… शेष 2 बिंदु — पूरी सूची माइंड मैप में देखें

ध्यान दें: महिलाओं का आरक्षण 243घ(5) की समय-सीमा से बाहर है — SC/ST आरक्षण ही 334 से बँधा है।

3. अवधि व अयोग्यता

243ङ — पंचायत की अवधि

  • पहले भंग न हो तो पंचायत अपनी पहली बैठक की तय तारीख़ से 5 वर्ष चलती है।
  • नई पंचायत का चुनाव 5 वर्ष पूरे होने से पहले कराना होगा।
  • बीच में भंग होने पर चुनाव भंग होने की तारीख़ से 6 माह के भीतर — पर यदि बची अवधि 6 माह से कम हो, तो चुनाव कराना ज़रूरी नहीं।

243च — अयोग्यताएँ

  • जो व्यक्ति राज्य विधानमण्डल के चुनाव से जुड़े किसी क़ानून के तहत अयोग्य हो, वह पंचायत सदस्य भी नहीं बन सकता।
  • छूट: केवल 25 वर्ष से कम आयु होना बाधा नहीं, यदि 21 वर्ष पूरे हो गए हों।
  • कोई सदस्य अयोग्य हुआ या नहीं ➜ इसका फ़ैसला वह प्राधिकारी करेगा जो राज्य का क़ानून तय करे।

राजस्थान के क़ानून की अतिरिक्त शर्तें

  1. तीसरी संतान (1995 के बाद जन्मी) होने पर उम्मीदवारी नहीं — दो संतान की सीमा।
  2. पंचायती राज संस्थाओं में एक साथ दो सीटों से चुनाव नहीं।
  3. उसी क्षेत्र का मतदाता होना ज़रूरी।

… शेष 3 बिंदु — पूरी सूची माइंड मैप में देखें

4. शक्तियाँ व 11वीं अनुसूची

243छ के अनुसार राज्य, पंचायतों को स्वशासन की इकाई की तरह काम करने की शक्तियाँ दे सकता है — इसके लिए 11वीं अनुसूची के 29 विषय तय हैं।

क्र.विषय
1कृषि (कृषि विस्तार सहित)
2भूमि विकास, भूमि सुधार, चकबंदी, भू-संरक्षण
3लघु सिंचाई, जल प्रबंधन, जल-विभाजक (वाटरशेड) क्षेत्र का विकास
4पशुपालन, डेयरी, कुक्कुट पालन

243ज — कर और निधियाँ

  • राज्य क़ानून बनाकर (क) पंचायत को तय प्रक्रिया व सीमाओं में कर, शुल्क, पथकर और फ़ीस लगाने-वसूलने-ख़र्च करने का अधिकार दे सकता है;
  • (ख) राज्य सरकार द्वारा वसूले गए ऐसे कर-शुल्क पंचायतों को सौंप सकता है;
  • (ग) राज्य की संचित निधि से पंचायतों को सहायता-अनुदान दे सकता है;

याद रखें: पहला विषय कृषि, आख़िरी (29वाँ) सामुदायिक संपत्तियों का रखरखाव।

5. वित्त आयोग से 243ण तक

अनुच्छेदक्या कहता है
243झराज्यपाल हर 5 वर्ष में राज्य वित्त आयोग बनाएँगे, जो पंचायतों की आर्थिक हालत की समीक्षा करेगा।
243ञपंचायतों के लेखे रखने और उनके ऑडिट के नियम राज्य विधानमण्डल बनाएगा।
243टमतदाता सूची और सभी पंचायत चुनावों का अधीक्षण, निर्देशन, नियंत्रण राज्य निर्वाचन आयोग करेगा; राज्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति राज्यपाल करते हैं।
243ठभाग-9 संघ राज्य क्षेत्रों पर भी लागू — वहाँ “राज्यपाल” का अर्थ अनुच्छेद 239 के तहत नियुक्त प्रशासक, और विधानसभा वाले क्षेत्र में “विधानमण्डल” का अर्थ वहाँ की विधानसभा।

6. राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994

काल / क्रमघटनाविवरण
1953पहला अधिनियमराजस्थान पंचायत अधिनियम बना।
1 जनवरी 1954लागू1953 का अधिनियम प्रभावी।
1994नया अधिनियम1953 वाले क़ानून को बदलकर राजस्थान पंचायती राज अधिनियम-1994।

7. अधिनियम का क्रम

  • राज्य का पहला पंचायत अधिनियम 1953 में बना और 1 जनवरी 1954 से लागू हुआ।
  • 73वें संशोधन के अनुरूप ढालने के लिए 1994 में पुराने क़ानून को संशोधित कर राजस्थान पंचायती राज अधिनियम-1994 बना।
  • राज्यपाल ने इसे 23 अप्रैल 1994 को स्वीकृति दी।
  • पहला अधिनियम ➜ 1953 (लागू 1 जनवरी 1954)
  • वर्तमान अधिनियम ➜ 1994
  • स्वीकृति ➜ 23 अप्रैल 1994

8. वार्ड सभा

मूल 1994 अधिनियम में वार्ड सभा नहीं थी; 2000 के संशोधन से यह जुड़ी। इसका मक़सद है वार्ड की समस्याओं का हल वहीं के लोगों के बीच। नियम अध्याय-2 में मिलते हैं।

धाराप्रावधान
3(1)हर वार्ड में एक वार्ड सभा; सदस्य = उस वार्ड में रहने वाले सभी वयस्क।
3(2)हर वर्ष न्यूनतम 2 बैठकें; कुल सदस्यों के 1/10 की लिखित माँग पर, या पंचायत / पंचायत समिति / जिला परिषद् / राज्य सरकार के कहने पर 15 दिन में बैठक।
4गणपूर्ति (कोरम) — कुल सदस्यों का 1/10।

9. ग्राम सभा

ग्राम सभा के प्रावधान अधिनियम के अध्याय-2क में हैं। हर पंचायत क्षेत्र की एक ग्राम सभा होती है, जिसके सदस्य उस क्षेत्र के गाँव/गाँवों की मतदाता सूची में दर्ज सभी लोग हैं।

धाराप्रावधान
8क(1)एक पंचायत क्षेत्र = एक ग्राम सभा; सदस्य = पंजीकृत मतदाता।
8क(2)हर वर्ष कम से कम 2 बैठकें — एक वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में, दूसरी अंतिम तिमाही में। कुल सदस्यों के 1/10 की लिखित माँग पर, या पंचायत समिति / जिला परिषद् / राज्य सरकार के कहने पर 15 दिन में बैठक।
8क(3)बैठक में BDO (विकास अधिकारी) या उसके द्वारा भेजा व्यक्ति शामिल होगा; कार्यवाही पंचायत सचिव (VDO) लिखेगा।

ध्यान दें: अधिनियम (धारा 8क) में ग्राम सभा की न्यूनतम 2 बैठकें हैं। 26 जनवरी, 1 मई, 15 अगस्त, 2 अक्टूबर वाली 4 बैठकें (हर तिमाही एक) अनुसूचित क्षेत्रों के 2011 के नियमों और सरकारी कार्यक्रम से आती हैं — दोनों को मिलाएँ नहीं।

10. आरक्षण, चुनाव, योग्यता

धाराविषयमुख्य बात
15आरक्षणसीधे चुनाव वाली सीटों में SC, ST, पिछड़ा वर्ग और महिलाओं के लिए आरक्षण।
17कार्यकालपंचायती राज संस्थाओं का कार्यकाल 5 वर्ष।
18मताधिकार18 वर्ष पूरे और मतदाता सूची में नाम — वोट का अधिकार [18(ग)]।

सभी पंचायत चुनावों की मतदाता सूची और संचालन पर अधीक्षण, निर्देशन व नियंत्रण राज्य निर्वाचन आयोग का है।

धारा-19 : सदस्य बनने की शर्तें

  1. आयु 21 वर्ष पूरी हो।
  2. भ्रष्ट आचरण में अदालत से दोषसिद्ध न हो।
  3. किसी पंचायती राज संस्था में लाभ का पद न रखता हो।

ट्रिक: वोट देने की आयु 18, चुनाव लड़ने की 21।

11. त्यागपत्र, अविश्वास, हटाना

  • धारा-36 (त्यागपत्र) ➜ सरपंच, उप सरपंच, पंच, प्रधान, उप प्रधान, जिला प्रमुख, उप जिला प्रमुख तथा पंचायत समिति या जिला परिषद् का सदस्य 5 वर्ष पूरे होने से पहले भी पद छोड़ सकता है।
  • धारा-37 (अविश्वास) ➜ अध्यक्षों (सरपंच, प्रधान, जिला प्रमुख) और उपाध्यक्षों (उप सरपंच, उप प्रधान, उप प्रमुख) के विरुद्ध।

धारा-38 : हटाना और निलंबन

  • काम करने में असमर्थ हो।
  • काम करने से इनकार करे।
  • किसी दुराचरण का दोषी पाया जाए।

धारा-39 : सदस्यता कब ख़त्म

  1. धारा-19 की कोई अयोग्यता लागू हो जाए।
  2. बिना लिखित सूचना लगातार 3 बैठकों से ग़ायब रहे।
  3. त्यागपत्र दे दे।
  • धारा-48 कोरम ➜ कुल सदस्यों का 1/3
  • अविश्वास लाना ➜ 1/3
  • अविश्वास पास ➜ 2/3

12. राज्य सरकार की शक्तियाँ

धाराप्रावधान
90हर ज़िले में एक जिला समिति; अध्यक्ष — जिला प्रमुख।
92किसी संस्था का संकल्प रद्द या निलंबित करने की शक्ति।
94किसी पंचायती राज संस्था को भंग (विघटित) करने की शक्ति।
101संस्था की सीमाएँ बदलने की शक्ति।

ये शक्तियाँ अधिनियम के अध्याय-4 में हैं।

13. रैपिड फायर तथ्य

  • पहला पंचायत अधिनियम ➜ 1953, लागू 1 जनवरी 1954
  • वर्तमान अधिनियम ➜ 1994, राज्यपाल की स्वीकृति 23 अप्रैल 1994
  • वार्ड सभा ➜ मूल अधिनियम में नहीं थी, 2000 के संशोधन से जुड़ी
  • ग्राम सभा की न्यूनतम बैठकें ➜ साल में 2 (धारा 8क)
  • पंचायती राज संस्थाओं का कार्यकाल ➜ 5 वर्ष (धारा 17)
  • वोट देने की आयु / सदस्य बनने की आयु ➜ 18 वर्ष / 21 वर्ष
  • महिला आरक्षण ➜ सीधे चुनाव वाली कुल सीटों में कम से कम 1/3 (243घ(3))
  • राज्य वित्त आयोग ➜ अनुच्छेद 243झ, हर 5 वर्ष में गठन
  • अविश्वास प्रस्ताव ➜ धारा 37; लाने को 1/3, पास होने को 2/3

अगले भाग में पंचायती राज के तीनों स्तर — ग्राम पंचायत, पंचायत समिति, जिला परिषद् — साथ में पेसा व अनुसूचित क्षेत्र, प्रशिक्षण संस्थाएँ और अब तक के चुनाव।

पिछला भाग: पंचायती राज: स्थानीय स्वशासन व इतिहास एवं प्रमुख समितियाँ

अगला भाग: पंचायती राज: तीन स्तर एवं पेसा और अनुसूचित क्षेत्र

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