पूर्वी राजस्थान की दो प्रमुख नदियाँ बाणगंगा और गम्भीर हैं। इनमें से गम्भीर सीधे यमुना में जाती है, जबकि बाणगंगा पहले यमुना तक जाती थी पर अब आंतरिक प्रवाह की नदी बन चुकी है। इस भाग में इन दोनों के साथ पार्वती (धौलपुर वाली), अरवरी, सरसा, जगर व भगाणी का विवरण है।
1. बाणगंगा नदी
- उपनाम ➜ अर्जुन की गंगा, ताला नदी, रुण्डित नदी
- रामगढ़ बाँध में गिरने से पहले यह नदी ताला गाँव के पास से बहती है
- कुल लम्बाई ➜ 240 किमी
- उद्गम ➜ बैराठ की पहाड़ियाँ (कोटपूतली-बहरोड़) से निकलकर पूर्व दिशा में बहती है
- प्रवाह ➜ कोटपूतली-बहरोड़, जयपुर, दौसा व भरतपुर
- समापन ➜ पूर्व में इस नदी का समापन फतेहाबाद (आगरा) में यमुना में होता था। वर्तमान समय में बाणगंगा नदी भरतपुर में ही विलीन हो जाती है, इसीलिए इसे रुण्डित नदी कहा जाता है। अब बाणगंगा भी आंतरिक जल प्रवाह की नदी बन चुकी है।
- नहरें ➜ उबैनी व पथैनी
- बैराठ सभ्यता ➜ कोटपूतली-बहरोड़; बाणगंगा नदी के किनारे
- सहायक नदियाँ ➜ गुमटीनाला (जयपुर), सूरी, पलासन नदी (दौसा), सरसा [परीक्षा: Jr. Instructor ESR, 2024 — बाणगंगा की सहायक नदी: सांवन]
- बेसिन का विस्तार ➜ 8 जिलों में — भरतपुर (2746 वर्ग किमी), अलवर (2332 वर्ग किमी), दौसा (2131 वर्ग किमी), जयपुर, डीग, करौली, सवाईमाधोपुर व सीकर (स्रोत — Hydrogeological Atlas of Rajasthan, Banganga Basin)
बाणगंगा पर बाँध
- जमुवारामगढ़ बाँध (जयपुर) ➜ पहले इस बाँध से जयपुर शहर को पेयजल आपूर्ति होती थी; निर्माण रामसिंह द्वितीय द्वारा। गुलाब की खेती होने के कारण जमवा रामगढ़ को ‘ढूंढाड़ का पुष्कर’ कहा जाता है।
- लालपुर बाँध ➜ भरतपुर। बाणगंगा नदी पर जगह-जगह एनीकट बन जाने के कारण वर्तमान में इसका पानी लालपुर बाँध तक नहीं पहुँच पाता।
2. गम्भीर नदी
- उद्गम ➜ नादौती की पहाड़ियाँ (करौली)
- प्रवाह ➜ करौली, सवाईमाधोपुर, धौलपुर व भरतपुर में बहती हुई उत्तरप्रदेश के रीठई गाँव (आगरा) में यमुना में मिल जाती है
- गम्भीर पहले भरतपुर–उत्तरप्रदेश की सीमा बनाती है, फिर उत्तरप्रदेश में बहती है, इसके बाद पुनः धौलपुर में प्रवेश करती है, फिर धौलपुर–उत्तरप्रदेश की सीमा बनाती हुई उत्तरप्रदेश में प्रवेश कर जाती है। धौलपुर में इसमें पार्वती नदी मिलती है।
- उत्तरप्रदेश में इसे ‘उटंगन नदी’ के नाम से जाना जाता है
- श्री महावीर जी मंदिर (करौली) ➜ गम्भीर नदी के किनारे स्थित
- अजान बाँध ➜ भरतपुर, गम्भीर नदी पर; यह घना पक्षी विहार को जलापूर्ति करता है
- अन्य सहायक नदियाँ ➜ सेसा, पार्वती, खेर, जगर
- यमुना में सीधा जल ले जाने वाली नदियाँ ➜ चम्बल व गम्भीर
पंचना बाँध (करौली)
- गम्भीर की पाँच सहायक नदियों — भद्रावती, भैंसावट, माची, अटा, बरखेड़ा — पर बना बाँध है
- अमेरिका के सहयोग से निर्मित; यह राजस्थान का मिट्टी से बना सबसे बड़ा बाँध है
- बाँध से निकलने के बाद इसका नाम गम्भीर नदी हो जाता है
3. पार्वती नदी (धौलपुर वाली)
- उद्गम ➜ छावर की पहाड़ियाँ (करौली)
- लम्बाई ➜ 123 किमी; प्रवाह ➜ करौली, धौलपुर
- समापन ➜ खरगपुर (धौलपुर) में गम्भीर में समा जाती है
- पार्वती बाँध ➜ अंगाई गाँव (धौलपुर), पार्वती नदी पर
- नोट ➜ राजस्थान में पार्वती नाम से दो नदियाँ हैं; एक पार्वती बारां व कोटा में भी बहती है, जो चम्बल की सहायक है
4. अरवरी नदी
- उद्गम ➜ सकरा बाँध (थानागाजी, अलवर); लम्बाई 45 किमी
- यह नदी पूर्णतया सूख गई थी, बाद में तरुण भारत संघ के प्रयासों और जागरूकता अभियान से तथा नदी किनारे के गाँवों के प्रयासों से इसे पुनर्जीवित किया गया
- इस नदी को बहते रहने देने के लिए 1999 में ‘अरवरी संसद’ बनाई गई
- समापन ➜ सरसा नदी में
5. सरसा, भगाणी व जगर
- सरसा नदी ➜ अलवर के थानागाजी तहसील से उद्गम। इसे ‘सावां’ या ‘सावांन’ नदी के नाम से भी जाना जाता है। आगे चलकर यह बाणगंगा में मिल जाती है। प्रवाह क्षेत्र — अलवर, दौसा। भानगढ़ (अलवर) सावा नदी के किनारे स्थित है। सहायक नदियाँ — अरवरी, भगाणी, तिलदह।
- भगाणी नदी ➜ यह नदी अलवर में कांकणवाड़ी किले के पास से निकलती है और मानसरोवर बाँध (अलवर) को भरती है
- जगर नदी ➜ डांग क्षेत्र की पहाड़ियों (हिंडौन, करौली) से निकलती है। जगर बाँध हिंडौन (करौली) के पास है। समापन — गम्भीर नदी में।
6. बनास तंत्र की अन्य नदियाँ
- गम्भीर की अन्य सहायक नदियाँ ➜ सेसा, पार्वती, खेर, जगर
- कूकुन्द नदी ➜ इस नदी का पानी रोककर भरतपुर में बारेठा बाँध (बयाना) बनाया गया है। इस बाँध का आकार कटोरेनुमा है। निर्माण 1897 में महाराजा रामसिंह (भरतपुर के शासक) के समय हुआ। इसके आसपास के क्षेत्र में बन्ध बारेठा अभयारण्य भी बनाया गया है।
7. पूर्वी नदियों का मानसिक नक्शा
इस पूरे तंत्र को एक सूत्र में बाँधकर देखिए। अरावली की उत्तरी-पूर्वी शाखाओं — बैराठ, नादौती, छावर, थानागाजी, डांग — से निकलने वाली ये सभी नदियाँ पूर्व की ओर बहती हैं। इनमें से जो नदी अपना जल यमुना तक पहुँचा पाती है, वह गम्भीर है; जो पहले पहुँचाती थी पर अब नहीं पहुँचा पाती, वह बाणगंगा है; और जो कभी पहुँची ही नहीं, वे सरसा, अरवरी, भगाणी जैसी छोटी नदियाँ हैं जो आपस में मिलकर बाणगंगा तंत्र का हिस्सा बन जाती हैं।
| नदी | उद्गम | समापन |
|---|---|---|
| बाणगंगा | बैराठ की पहाड़ियाँ (कोटपूतली-बहरोड़) | भरतपुर में विलीन (पहले यमुना में) |
| गम्भीर | नादौती की पहाड़ियाँ (करौली) | रीठई गाँव (आगरा) में यमुना |
| पार्वती (धौलपुर) | छावर की पहाड़ियाँ (करौली) | खरगपुर (धौलपुर) में गम्भीर |
| अरवरी | सकरा बाँध (थानागाजी, अलवर) | सरसा नदी में |
| सरसा (सावां) | थानागाजी तहसील (अलवर) | बाणगंगा में |
| जगर | डांग क्षेत्र की पहाड़ियाँ (हिंडौन, करौली) | गम्भीर नदी में |
| भगाणी | कांकणवाड़ी किले के पास (अलवर) | मानसरोवर बाँध को भरती है |
एक और तुलना याद रखें: मिट्टी से बना सबसे बड़ा बाँध पंचना (करौली, गम्भीर तंत्र में) है, जबकि राजस्थान का सबसे लम्बा बाँध माही बजाज सागर और सबसे ऊँचा बाँध जाखम है। भराव क्षमता में सबसे बड़ा राणा प्रताप सागर है। ये चारों ‘सबसे’ अलग-अलग बाँधों के हैं और अक्सर आपस में बदलकर पूछे जाते हैं।
रिवीजन पॉइंटर्स
- बाणगंगा पहले यमुना में जाती थी, अब भरतपुर में विलीन — इसीलिए ‘रुण्डित नदी’ और अब आंतरिक प्रवाह की।
- यमुना में सीधा जल: केवल चम्बल व गम्भीर।
- पंचना बाँध = 5 नदियाँ, अमेरिका सहयोग, मिट्टी का सबसे बड़ा बाँध।
- पार्वती दो हैं — करौली/धौलपुर वाली (गम्भीर की सहायक) और बारां/कोटा वाली (चम्बल की सहायक)।
- अरवरी संसद 1999, तरुण भारत संघ — पुनर्जीवित नदी का उदाहरण।
