बनास राजस्थान में पूर्णतः बहने वाली सबसे बड़ी नदी है और जलग्रहण क्षेत्र में भी सबसे आगे। इसकी सहायक नदियों की संख्या बहुत है, इसलिए इस भाग को बनास के मूल विवरण और उसकी सहायक नदियों — दोनों हिस्सों में बाँटा गया है।
1. बनास — मूल परिचय
- उपनाम ➜ वशिष्ठी, वर्णाशा (वन की आशा)
- उद्गम ➜ बेरों का मठ, खमनौर की पहाड़ियाँ (राजसमंद) [परीक्षा: पशु परिचर S-3, 2024 — बनास जहाँ से निकलती है वह स्थल: भेरोंका मठ] [परीक्षा: वरिष्ठ अध्यापक संस्कृत GK 2024 — (A), (B) व (C) तीनों सही]
- कुल लम्बाई ➜ नवीनतम आँकड़ों के अनुसार 512 किमी (इससे पहले 480 किमी मानी जाती थी)
- बनास पूर्णतः राजस्थान में बहती है; यह पूर्णतः राजस्थान में बहने वाली सबसे बड़ी नदी है
- जलग्रहण क्षेत्र ➜ 46,570 वर्ग किमी; यह राजस्थान की सर्वाधिक जलग्रहण क्षेत्र वाली नदी है
- प्रवाह ➜ 7 जिलों में — राजसमंद, उदयपुर, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा, अजमेर, टोंक, सवाई माधोपुर
- समापन ➜ रामेश्वरम (सवाई माधोपुर) में चम्बल में; यहीं चम्बल, बनास व सीप का त्रिवेणी संगम बनता है
- बनास टोंक में सर्पाकार बहती है और टोंक जिले को दो भागों में बाँटती है
- किनारे के शहर ➜ नाथद्वारा, रेलमगरा, मातृकुण्डिया, बीसलपुर, टोंक
- बेसिन का विस्तार ➜ 12 जिलों में — भीलवाड़ा, टोंक (6744 वर्ग किमी), जयपुर (6505 वर्ग किमी), अजमेर, बूँदी, चित्तौड़गढ़, दौसा, करौली, प्रतापगढ़, राजसमंद, सवाईमाधोपुर व उदयपुर
- यह चम्बल की सबसे बड़ी सहायक नदी है
सभ्यता
- आहड़ संस्कृति ➜ बनास और उसकी सहायक नदियों की घाटियों में खोजे गए प्राचीन सभ्यता स्थल ‘आहड़ संस्कृति’ कहलाते हैं
- गिलूण्ड सभ्यता ➜ राजसमंद, बनास नदी किनारे
2. बनास पर बने बाँध
| बाँध | स्थान व विशेषता |
|---|---|
| बाघेरी का नाका | राजसमंद |
| नंदसमंद बाँध | राजसमंद — राजसमंद की जीवनरेखा |
| मातृकुण्डिया बाँध | चित्तौड़गढ़ — मेवाड़ का हरिद्वार |
| बीसलपुर बाँध | देवली (टोंक) — राजस्थान की सबसे बड़ी पेयजल परियोजना; ADB (एशियन डवलपमेन्ट बैंक, मनीला) की सहायता से निर्मित [परीक्षा: पशु परिचर S-4, 2024 — बीसलपुर बाँध बनास नदी पर] |
| ईसरदा बाँध | बनेठा गाँव (टोंक) — निर्माणाधीन (स्रोत: सुजस मई 2022) |
3. त्रिवेणी संगम
बनास राजस्थान में सर्वाधिक त्रिवेणी संगम बनाने वाली नदी है।
- बीगोद (भीलवाड़ा) ➜ बनास, बेड़च, मेनाल
- राजमहल (टोंक) ➜ बनास, खारी, डाई (यहीं बीसलपुर बाँध है)
- देवधाम (टोंक) ➜ बनास, बांडी, मांसी
4. सहायक नदियाँ व मिलने का स्थान
| सहायक नदी | मिलने का स्थान |
|---|---|
| बेड़च | बिगोद (भीलवाड़ा) |
| खारी | राजमहल के निकट (टोंक) |
| बांडी | देवधाम (टोंक) |
| कोठारी | नंदराय (भीलवाड़ा) |
| माशी | देवधाम (टोंक) |
| मेनाल | बिंगोद (भीलवाड़ा) |
| मोरेल | खंडार (सवाई माधोपुर) |
| डाई | राजमहल (टोंक) |
| ढील | सवाई माधोपुर में |
| चन्द्रभागा | चित्तौड़गढ़ में |
बनास भूजल संरक्षण योजना ➜ 1999-2000 में प्रारम्भ। कृषि मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा यह योजना राजस्थान के 5 जिलों — जयपुर, टोंक, दौसा, करौली व सवाईमाधोपुर — में संचालित की गई। यह योजना राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत जयपुर, टोंक, अजमेर, भीलवाड़ा व सवाईमाधोपुर से भी संबंधित है।
5. बेड़च / आयड़ नदी
- उद्गम ➜ गोगुन्दा की पहाड़ियाँ (उदयपुर)
- समापन ➜ बीगोद (भीलवाड़ा) के समीप बनास में
- उद्गम स्थल से लेकर उदयसागर झील (उदयपुर) तक यह आयड़ नदी के नाम से जानी जाती है; उदयसागर झील से निकलने के बाद इसका नाम बेड़च हो जाता है
- प्रवाह वाले जिले ➜ उदयपुर, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा; कुल लम्बाई 190 किमी
- सभ्यताएँ ➜ आहड़ सभ्यता (उदयपुर, आयड़ के किनारे), बालाथल सभ्यता (उदयपुर, बेड़च किनारे), नगरी सभ्यता (चित्तौड़गढ़, बेड़च किनारे)
- आयड़ नदी उदयपुर शहर में से निकलती है व चित्तौड़गढ़ शहर को दो भागों में बाँटती है
- चित्तौड़गढ़ दुर्ग ➜ बेड़च व गम्भीरी के संगम के समीप स्थित
- मदार बाँध (उदयपुर) आयड़ नदी पर; घोसुण्डा बाँध (अप्यावास, चित्तौड़) बेड़च नदी पर
- सहायक नदियाँ ➜ औराई, गंभीरी, गुजरी, वाघन (ये चारों चित्तौड़गढ़ जिले में बेड़च में मिलती हैं)
6. मेनाल, कोठारी व खारी
- मेनाल / मेनाली ➜ उद्गम मेनाल (चित्तौड़गढ़) के पास से; समापन बीगोद (भीलवाड़ा) के निकट बनास में, यहीं बनास-बेड़च-मेनाल का त्रिवेणी संगम बनता है। मेनाल जलप्रपात (चित्तौड़गढ़) उद्गम स्थल के समीप ही स्थित है।
- कोठारी नदी ➜ उद्गम दिवेर की पहाड़ियाँ (राजसमंद); समापन नन्दराय नामक स्थान (कोटड़ी तहसील, भीलवाड़ा) के समीप बनास में; लम्बाई 145 किमी। प्रवाह — राजसमंद, भीलवाड़ा। मेजा बाँध (भीलवाड़ा) इसी पर है, जहाँ मेजा की पाल पर ‘ग्रीन माउन्ट’ नामक पार्क विकसित किया गया है; यह बाँध भीलवाड़ा की पेयजल समस्या के समाधान हेतु बना। बागोर सभ्यता (भीलवाड़ा) कोठारी नदी किनारे। यह नदी भीलवाड़ा शहर के पास से निकलती है।
- खारी नदी ➜ उद्गम बीजराल गाँव की पहाड़ियाँ (राजसमंद); प्रवाह वाले 5 जिले — राजसमंद, भीलवाड़ा, ब्यावर, अजमेर व टोंक। राजमहल (टोंक) के निकट बनास में मिलती है; सहायक — डाई। [परीक्षा: वरिष्ठ अध्यापक संस्कृत GK 2024 — खारी नदी, बनास की सहायक नदी है]
- डाई नदी ➜ किशनगढ़ पहाड़ी (अजमेर) से निकलती है; अजमेर व टोंक जिलों में बहती है; राजमहल (टोंक) में बनास में मिल जाती है
7. बांडी, माशी, मानसी व सहोदरा
- बांडी नदी (जयपुर वाली) ➜ सामोद व आसलपुर की पहाड़ियों (जयपुर) से निकलती है; जयपुर व टोंक जिलों में बहती है; देवधाम (टोंक) के निकट बनास में मिल जाती है। नोट — राजस्थान में बांडी नाम से 3 नदियाँ हैं; एक बांडी नदी लूनी की सहायक है जो पाली में बहती है, एक बांडी अजमेर की फॉयसागर झील (नया नाम वरुणसागर) में गिरती है।
- माशी नदी ➜ सिलोरा की पहाड़ियाँ (किशनगढ़, अजमेर) से निकलती है; देवधाम (टोंक) से थोड़ा पहले बांडी में मिल जाती है। सहायक नदी — सहोदरा। प्रवाह वाले जिले — अजमेर व टोंक।
- सहोदरा नदी ➜ उद्गम अराय गाँव की पहाड़ी (अजमेर); अजमेर व टोंक में बहती है; टोरडीसागर बाँध (टोंक) को भरती है; बुझिया गाँव (टोंक) में माशी नदी में मिलती है
- मानसी नदी ➜ करणगढ़ (मांडलगढ़, भीलवाड़ा) से निकलती है और केवल भीलवाड़ा में बहती है; समापन अजमेर की सीमा पर फूलिया कलां (भीलवाड़ा) गाँव के पास खारी नदी में। अरबड़ बाँध — आणुंचा के पास (भीलवाड़ा), मानसी नदी पर।
ध्यान रहे: माशी और मानसी दोनों अलग-अलग नदियाँ हैं। माशी नदी अजमेर व टोंक में बहती है और बनास की सहायक है; मानसी नदी भीलवाड़ा में बहती है और खारी की सहायक है।
8. मोरेल, ढूंढ, कालीसिल व अन्य
- मोरेल नदी ➜ उद्गम चैनपुरा गाँव की पहाड़ी (बस्सी, जयपुर) से; प्रवाह जयपुर, दौसा व सवाई माधोपुर; समापन खंडार (सवाई माधोपुर) में बनास में। सहायक — ढूंढ, कालीसिल। मोरेल बाँध दौसा–सवाईमाधोपुर सीमा पर बना है; जल संसाधन विभाग की रिपोर्ट में इसे दौसा में बताया गया है।
- ढूंढ नदी ➜ अचरोल (जयपुर) से उद्गम; जयपुर व दौसा में प्रवाहित होते हुए लालसोट (दौसा) के पास मोरेल में मिल जाती है
- कालीसिल नदी ➜ उद्गम कैलादेवी की पहाड़ी (करौली); समापन हड़ौती गाँव (करौली–सवाई माधोपुर सीमा पर) मोरेल में। कैलादेवी मंदिर (करौली) कालीसिल नदी के किनारे।
- द्रव्यवती नदी (अमानीशाह नाला) ➜ उद्गम नाहरगढ़ की पहाड़ियों में आथुनी कुंड से; जयपुर शहर के बीच से बहती है और जल प्रदूषण का सामना कर रही है; समापन ढूंढ नदी (जयपुर) में। द्रव्यवती नदी परियोजना — गुजरात के अहमदाबाद के साबरमती रिवर फ्रन्ट की तर्ज पर जयपुर में रिवर फ्रन्ट बनाया गया; प्रोजेक्ट टाटा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड को सौंपा गया था; उद्घाटन 2 अक्टूबर 2018। बजट घोषणा 2025-26 में इसका पर्यटन की दृष्टि से अपग्रेडेशन किया जाएगा।
- चन्द्रभागा नदी (बनास वाली) ➜ उद्गम देवड़ों का गुड़ा (आमेट, राजसमंद); राजसमंद, भीलवाड़ा व चित्तौड़गढ़ में बहती हुई मातृकुण्डिया में बनास में मिल जाती है। राजसमंद का आमेट कस्बा इसी नदी किनारे स्थित है। नोट — राजस्थान में चन्द्रभागा नाम से दो नदियाँ हैं; एक कालीसिंध की सहायक (झालावाड़ में), दूसरी बनास की सहायक (राजसमंद, भीलवाड़ा व चित्तौड़गढ़ में)।
- ढील नदी ➜ बावली गाँव (टोंक) से निकलकर सवाई माधोपुर जिले में बनास में मिल जाती है
- गम्भीरी नदी ➜ उद्गम जावद की पहाड़ियाँ (रतलाम, मध्यप्रदेश); राजस्थान में निम्बाहेड़ा (चित्तौड़) से प्रवेश करती है, वहीं गम्भीरी बाँध (निम्बाहेड़ा, चित्तौड़) बना है; यह राजस्थान में केवल चित्तौड़गढ़ जिले में बहती है। चित्तौड़गढ़ किले के पास से गुजरती हुई चित्तौड़गढ़ शहर पार करने के बाद बेड़च में मिल जाती है।
