राजस्थान के जिले व संभाग– Rajasthan Geography Chapter 4
राजस्थान का प्रशासनिक ढाँचा 1949 से अब तक कई बार बदला है। जिले कभी बढ़े, कभी निरस्त हुए; संभागीय व्यवस्था एक बार बंद भी हुई और फिर शुरू भी हुई। इस भाग में पूरा घटनाक्रम तिथिवार दिया गया है, साथ में संभागों की विशेषताएँ और जिलों की आकृति भी — ताकि परीक्षा में किसी भी कोण से प्रश्न आए, उत्तर तैयार रहे।
1. वर्तमान स्थिति
वर्तमान में ➜ राजस्थान 7 संभागों तथा 41 जिलों में विभाजित है
गठन के समय (1949) सबसे छोटा जिला ➜ डूंगरपुर
क्षेत्रफल (1.50%) व जनसंख्या (1.51%) में लगभग समान प्रतिशत वाला जिला ➜ सिरोही
2. जिलों की संख्या — विकास क्रम
1949, गठन के समय ➜ 25 जिले, 5 संभाग (जयपुर, जोधपुर, बीकानेर, कोटा, उदयपुर)
1 नवम्बर, 1956 ➜ अजमेर 26वाँ जिला बना; तत्कालीन मुख्यमंत्री मोहनलाल सुखाड़िया
6वाँ संभाग ➜ अजमेर। जयपुर के स्थान पर अजमेर को संभाग बनाया गया, नाम अजमेर संभाग रखा गया परंतु मुख्यालय जयपुर में ही रहा; इसीलिए 1 नवम्बर 1956 को संभागों की संख्या 5 ही रही
जिलों के निर्माण की तालिका
क्रम
जिला
दिनांक
किससे पृथक
मुख्यमंत्री
27वाँ
धौलपुर
15 अप्रैल, 1982
भरतपुर
शिवचरण माथुर
28वाँ
बारां
10 अप्रैल, 1991
कोटा
भैरूसिंह शेखावत
29वाँ
दौसा
10 अप्रैल, 1991
जयपुर
भैरूसिंह शेखावत
30वाँ
राजसमंद
10 अप्रैल, 1991
उदयपुर
भैरूसिंह शेखावत
31वाँ
हनुमानगढ़
12 जुलाई, 1994
गंगानगर
भैरूसिंह शेखावत
32वाँ
करौली
19 जुलाई, 1997
सवाईमाधोपुर
भैरूसिंह शेखावत
33वाँ
प्रतापगढ़
26 जनवरी, 2008
चित्तौड़गढ़, उदयपुर, बांसवाड़ा
वसुंधरा राजे
34वाँ
बालोतरा
07 अगस्त, 2023
बाड़मेर
अशोक गहलोत
35वाँ
ब्यावर
07 अगस्त, 2023
अजमेर, पाली, राजसमंद, भीलवाड़ा
अशोक गहलोत
36वाँ
डीग
07 अगस्त, 2023
भरतपुर
अशोक गहलोत
37वाँ
डीडवाना-कुचामन
07 अगस्त, 2023
नागौर
अशोक गहलोत
38वाँ
खैरथल-तिजारा
07 अगस्त, 2023
अलवर
अशोक गहलोत
39वाँ
कोटपूतली-बहरोड़
07 अगस्त, 2023
जयपुर व अलवर
अशोक गहलोत
40वाँ
फलौदी
07 अगस्त, 2023
जोधपुर
अशोक गहलोत
41वाँ
सलूम्बर
07 अगस्त, 2023
उदयपुर
अशोक गहलोत
नोट: फलौदी केवल जोधपुर से पृथक हुआ है। इसका कारण यह है कि अधिसूचना जारी होने से ठीक एक दिन पहले जैसलमेर की नोख उपतहसील को तत्कालीन जोधपुर जिले की बाप तहसील में मिला दिया गया था।
3. नए जिलों से जुड़ी कमेटियाँ
जी.एस. सन्धू कमेटी (2011) ➜ गहलोत कार्यकाल में नए जिले बनाने हेतु गठित
परमेशचन्द्र कमेटी ➜ वसुंधरा कार्यकाल (2013–18) में गठित। प्रतापगढ़ जिले का निर्माण भी इसी कमेटी की सिफारिश पर हुआ था। प्रतापगढ़ 26 जनवरी 2008 को अस्तित्व में आया और 1 अप्रैल 2008 से जिले के रूप में कार्य करने लगा (स्रोत — सुजस)
रामलुभाया कमेटी ➜ मार्च 2022 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पूर्व IAS रामलुभाया की अध्यक्षता में गठित की
2023 का पुनर्गठन
17 मार्च, 2023 ➜ रामलुभाया कमेटी की सिफारिश पर मुख्यमंत्री गहलोत ने विधानसभा में 17 नए जिले तथा 3 नए संभाग बनाने की घोषणा की
4 अगस्त, 2023 ➜ नए जिलों की अधिसूचना जारी
7 अगस्त, 2023 ➜ विधिवत उद्घाटन; इस प्रकार राज्य में 10 संभाग और 50 जिले हो गए
2024 का निरस्तीकरण
29 दिसम्बर, 2024 ➜ भजनलाल सरकार ने ललित के. पंवार कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर 9 जिले तथा 3 संभाग निरस्त कर दिए
सर्वाधिक क्षेत्रफल; सर्वाधिक दशकीय जनसंख्या वृद्धि दर; न्यूनतम जन घनत्व; न्यूनतम वर्षा व आर्द्रता; सर्वाधिक जिलों (8) वाला; सबसे लंबी अंतर्राष्ट्रीय सीमा
कोटा (दक्षिणी-पूर्वी)
4 — कोटा, बूँदी, बारां, झालावाड़
सर्वाधिक नदियाँ; सर्वाधिक वर्षा एवं आर्द्रता
बीकानेर (उत्तरी भाग)
4 — बीकानेर, गंगानगर, हनुमानगढ़, चूरू
न्यूनतम नदियाँ; अनुसूचित जाति की जनसंख्या का सर्वाधिक प्रतिशत; नहरों द्वारा सर्वाधिक सिंचाई; अनुसूचित जनजाति की न्यूनतम जनसंख्या
भरतपुर (नवीनतम संभाग)
5 — भरतपुर, धौलपुर, करौली, डीग, सवाईमाधोपुर
सबसे कम लिंगानुपात; सर्वाधिक 3 राज्यों (हरियाणा, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश) से सीमा बनाने वाला
6. जिलों की आकृति
दौसा ➜ धनुषाकार
टोंक ➜ लगभग आयताकार
भीलवाड़ा ➜ लगभग आयताकार
चित्तौड़गढ़ ➜ घोड़े की नाल या इल्ली के समान
राजसमंद ➜ तिलक के समान
सीकर ➜ प्याले के आकार का
जैसलमेर ➜ सप्तभुजाकार या अनियमित बहुभुज के समान
उदयपुर संभाग ➜ श्रीलंका के समान आकार
खण्डित जिला ➜ चित्तौड़गढ़, जो भौगोलिक रूप से दो स्थानों पर स्थित है (रावतभाटा क्षेत्र)
7. दो विशेष नोट
आकार-जनसंख्या का नियम ➜ पूर्वी राजस्थान से पश्चिमी राजस्थान की ओर बढ़ने पर जिलों का क्षेत्रफल बढ़ता जाता है, जबकि जनसंख्या घटती जाती है।
चारों ओर की भू-आकृतियाँ ➜ पूर्व में गंगा-यमुना का मैदान, दक्षिण व दक्षिण-पूर्व में मालवा का पठार, उत्तर व उत्तर-पूर्व में सतलज-व्यास नदियों का मैदान।
राजसमंद ➜ राजस्थान का एकमात्र जिला जिसका नाम एक झील के नाम पर रखा गया; इसका जिला मुख्यालय ‘राजनगर’ नाम से जाना जाता है।