पश्चिमी मरुस्थलीय प्रदेश

राजस्थान भौतिक विभाजन पश्चिमी मरुस्थलीय प्रदेश – Rajasthan Geography Chapter 6

राजस्थान का सबसे बड़ा भौतिक भाग यही है — क्षेत्रफल में भी और जनसंख्या में भी। थार का मरुस्थल केवल रेत का ढेर नहीं, बल्कि दुनिया का सबसे घना बसा और सबसे जैव-विविध मरुस्थल है। इस भाग में थार का विस्तार, उसकी विशेषताएँ, वर्षा रेखाएँ और शुष्क मरुस्थलीय उपप्रदेश का पूरा विवरण है।

1. विस्तार व मूल आँकड़े

  • स्थिति ➜ यह प्रदेश थार मरुस्थल का उत्तरी-पूर्वी हिस्सा है
  • थार का कुल विस्तार ➜ लगभग 644 किमी लम्बाई तथा 300 किमी चौड़ाई
  • राजस्थान में फैलाव ➜ लगभग 2,09,000 वर्ग किमी
  • सम्पूर्ण थार का हिस्सा राजस्थान में ➜ 62% (यानी 3/5 भाग)
  • भारत में अन्य विस्तार ➜ पंजाब, हरियाणा तथा गुजरात के मामूली भागों में
  • राजस्थान के क्षेत्रफल का ➜ 61.11% भाग मरुस्थलीय
  • जनसंख्या ➜ राज्य की 40% आबादी इसी क्षेत्र में

मरुस्थलीय जिले

  • कुल 16 जिले ➜ जैसलमेर, बाड़मेर, बालोतरा, जालौर, पाली, पश्चिमी ब्यावर, जोधपुर, फलौदी, डीडवाना-कुचामन, बीकानेर, गंगानगर, हनुमानगढ़, चूरू, झुंझुनूं, सीकर
  • अरावली के पश्चिम में स्थित जिले ➜ 17
  • अपवाद ➜ सिरोही अरावली के पश्चिम में है, फिर भी मरुस्थलीय नहीं माना जाता
  • अरावली के पश्चिम का मरुस्थलीय क्षेत्र ➜ 58%

नोट: पहले यह प्रदेश राज्य के केवल 58% भाग पर था। अरावली का उत्तरी हिस्सा अत्यधिक कटा-फटा होने के कारण मरुस्थल पश्चिम से पूर्व की ओर लगातार फैल रहा है, इसीलिए अब यह 61.11% भाग तक पहुँच चुका है।

2. भौतिक स्वरूप

  • सामान्य ढाल ➜ पूर्व से पश्चिम तथा उत्तर से दक्षिण की ओर
  • उत्तरी व पूर्वी भाग की औसत ऊँचाई ➜ लगभग 300 मीटर
  • दक्षिणी भाग की औसत ऊँचाई ➜ लगभग 150 मीटर (सबसे कम ऊँचाई वाला भाग)
  • औसत ऊँचाई ➜ 150 से 380 मीटर

सबसे बड़े — रैपिड लिस्ट

बिंदुउत्तर
सबसे बड़ी नदीलूणी
सबसे बड़ी नहरइंदिरा गाँधी नहर
सबसे बड़ा अभयारण्यराष्ट्रीय मरु उद्यान
सबसे बड़ा जिला (क्षेत्रफल)जैसलमेर
सबसे बड़ा बाँधजवाई बाँध (पाली)
सबसे बड़ा शहरजोधपुर

3. मिट्टी, वनस्पति व जलवायु

  • मिट्टी ➜ रेतीली बलुई मिट्टी (एन्टीसोल)
  • वनस्पति ➜ मरुद्भिद (जिरोफाईट)
  • प्रमुख वृक्ष ➜ रोहिड़ा, बबूल, फोग, खेजड़ी, कैर, बेर, आक, थोर, आरणा, पीलू (जाल)
  • जलवायु ➜ शुष्क व अत्यधिक विषम
  • प्रमुख फसल ➜ बाजरा, मोठ, ग्वार
  • औसत वर्षा ➜ 0 से 50 सेमी

4. थार की विश्व-स्तरीय विशेषताएँ

  • यह विश्व का सबसे घना मरुस्थल है
  • यह विश्व का सबसे नवीनतम मरुस्थल है, इसीलिए इसे ‘युवा मरुस्थल’ भी कहा जाता है
  • यह विश्व में सर्वाधिक जैव विविधता वाला मरुस्थल है
  • यह विश्व का सर्वाधिक आबादी वाला मरुस्थल है
  • अन्य मरुस्थलों की तुलना में यहाँ जनघनत्व, पशु घनत्व, वर्षा, खनिज विविधता तथा वनस्पति सर्वाधिक है — इसीलिए इसे विश्व का ‘सर्वाधिक धनी मरुस्थल’ कहा जाता है
  • यह राजस्थान का सर्वाधिक दैनिक तापान्तर वाला भौतिक प्रदेश है
  • यह राजस्थान का सर्वाधिक क्षेत्रफल व सर्वाधिक जनसंख्या वाला भौतिक भाग है
  • यह अरावली का वृष्टिछाया प्रदेश है
  • यह ग्रेट पेलियो आर्कटिक अफ्रीकी मरुस्थल का पूर्वी भाग है

भूवैज्ञानिक प्रमाण

  • थार का मरुस्थल टेथिस सागर का अवशेष है
  • पर्मियन-कार्बोनिफेरस काल में यहाँ समुद्र का विस्तार था; जुरासिक काल तथा उसके बाद के सामुद्रिक तलछटों के जमाव के प्रमाण जैसलमेर व बाड़मेर से मिलते रहे हैं
  • कालान्तर में समुद्र पीछे हटता गया और यहाँ शुष्क दशाएँ फैलती गईं
  • भूगर्भशास्त्रियों के अनुसार यह प्रदेश पहले उपजाऊ था, यहाँ बड़ी नदियाँ बहती थीं; सरस्वती नदी के अवशेष मिलना इसका प्रमाण है
  • क्षेत्र में अवसादी चट्टानों की अधिकता है, जिनमें कोयला व पेट्रोलियम मिलता है
  • तेल-गैस भंडार ➜ गुढ़ामालानी, जैसलमेर तथा बाड़मेर-सांचौर में; इसी कारण यहाँ की चट्टानें टर्शरीकाल की मानी जाती हैं

5. मानसून में थार की भूमिका

  • ग्रीष्मकाल में भारत का सबसे निम्न वायुदाब केंद्र थार का रेगिस्तान होता है
  • यहाँ तापमान अधिक और वायुदाब निम्न रहता है; यही निम्न वायुदाब मानसूनी हवाओं को अपनी ओर खींचता है
  • इस प्रकार थार का मरुस्थल पूरे भारतीय उपमहाद्वीप में मानसून को आकर्षित करता है
  • यहाँ वर्षा बहुत कम, अनिश्चित व अनियमित होती है; भूमिगत जल अधिक गहराई पर मिलता है और अधिकांशतः खारा होता है

6. तीन निर्णायक वर्षा रेखाएँ

वर्षा रेखाक्या निर्धारित करती है
10 सेमीथार की पश्चिमी सीमा; भारत-पाक सीमा के सहारे चलती है; राजस्थान में केवल जैसलमेर से गुजरती है
25 सेमीउत्तर-पश्चिमी मरुस्थल को लगभग दो बराबर भागों में बाँटती है — पश्चिम में शुष्क रेतीला, पूर्व में अर्द्धशुष्क
50 सेमीराजस्थान को लगभग दो बराबर भागों में बाँटती है; अरावली की पश्चिमी सीमा तथा मरुस्थलीय प्रदेश की पूर्वी सीमा तय करती है

7. मरुस्थलीकरण एवं उपनाम

  • रेगिस्तान का मार्च ➜ मरुस्थल के आगे बढ़ने की प्रक्रिया; इसके लिए नाचना गाँव (जैसलमेर) प्रसिद्ध है
  • थार का विस्तार दिल्ली, हरियाणा, उत्तरप्रदेश व मध्यप्रदेश की ओर लगातार हो रहा है
  • रूक्ष क्षेत्र ➜ डॉ. ईश्वरीप्रसाद ने इसे यह नाम दिया
  • गुर्जरात्रा प्रदेश ➜ चीनी यात्री ह्वेनसांग ने इस प्रदेश को यह नाम दिया
  • उत्पत्ति का सबसे प्रभावी कारण ➜ शुष्कता में वृद्धि

8. न्यूनतम जनघनत्व के कारण

चारों भौतिक भागों में सबसे कम जनघनत्व पश्चिमी मरुस्थलीय प्रदेश में मिलता है। इसके तीन मुख्य कारण हैं — जलवायु में विषमता, जल का अभाव, तथा नदी बेसिनों का अभाव।

9. दो मुख्य उपविभाग

  1. शुष्क मरुस्थलीय प्रदेश (Sandy Arid Plain)
  2. अर्द्धशुष्क मरुस्थलीय प्रदेश (Semi-arid transitional plain)

शुष्क मरुस्थलीय प्रदेश

  • विस्तार ➜ जैसलमेर, फलौदी, बीकानेर, उत्तर-पश्चिमी जोधपुर, बाड़मेर, उत्तर-पश्चिमी बालोतरा, पश्चिमी चूरू
  • अन्य नाम ➜ महान भारतीय मरुस्थल
  • औसत वर्षा ➜ 0 से 25 सेमी
  • जलवायु ➜ शुष्क
  • यहाँ सभी प्रकार के बालूका स्तूप मिलते हैं — कुछ स्थायी हैं जिन पर वनस्पति उग आई है, तो कुछ स्थानान्तरित होते रहते हैं

10. शुष्क प्रदेश के विशेष स्थल

  • सम (जैसलमेर) ➜ वनस्पति रहित टीलों का क्षेत्र; राजस्थान का न्यूनतम वर्षा वाला स्थान; डेजर्ट सफारी के लिए प्रसिद्ध
  • लाठी सीरीज ➜ जैसलमेर में पोकरण से मोहनगढ़ तक भारत-पाक सीमा के सहारे लगभग 80 किमी लम्बाई में पृथ्वी के अंदर बहती मीठे पानी की जलधारा; इसे ‘भूगर्भिक जलपट्टी’ भी कहते हैं। वैज्ञानिकों ने इसे प्राचीन सरस्वती नदी का अवशेष माना है और 2007 में काजरी के वैज्ञानिकों ने इसकी खोज की। इसी क्षेत्र में धामण, करड़, सेवण जैसी पौष्टिक घासें उगती हैं।
  • चंदन नलकूप ➜ लाठी सीरीज के पास कम गहराई पर 2.30 लाख लीटर प्रति घंटे क्षमता वाला मीठे पानी का नलकूप, जिसे ‘थार का घड़ा’ कहा जाता है
  • बालूका स्तूप मुक्त क्षेत्र ➜ जैसलमेर, फलौदी, बालोतरा व बाड़मेर के कुछ भाग; सर्वाधिक विस्तार जैसलमेर में; यह क्षेत्र फलौदी, पोकरण व बालोतरा के मध्य फैला है। यहाँ टीलों का पूर्णतः अभाव है और पूरा क्षेत्र परतदार चट्टानों से ढका है, जो टर्शियरी काल से प्लीस्टोसीन काल की हैं। इनमें चूने की चट्टानें व शैल प्रमुख हैं तथा जुरासिक और मायोसिन काल के वनस्पति एवं जीवावशेष मिलते हैं।
  • आकल वुड फॉसिल्स पार्क ➜ जैसलमेर शहर के दक्षिण में राष्ट्रीय मरु उद्यान के भीतर; यहाँ प्राचीन वनस्पति व काष्ठ जीवाश्म मौजूद हैं
  • बाप बोल्डर ➜ फलौदी के बाप स्थान पर पुराजीवी महाकल्प के पर्मियन-कार्बोनिफेरस काल के हिमानीकृत गोलाश्म (मोरेन चट्टान) के अवशेष; इन चट्टानों पर हिमानी घर्षण के निशान मिले हैं
  • क्षेत्र में छोटी-छोटी ग्रेनाइट, सेण्ड स्टोन व चूना पत्थर की एकाकी पहाड़ियाँ भी पाई जाती हैं

अगले भाग में अर्द्धशुष्क मरुस्थलीय प्रदेश यानी राजस्थान बांगर के चारों उपविभाग विस्तार से।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *