चम्बल की सहायक नदियाँ परीक्षा में सबसे ज़्यादा ‘सुमेलित कीजिए’ वाले प्रश्न देती हैं। यहाँ पहले संगम स्थलों की पूरी सूची, फिर बांये-दांये किनारे का नियम, और उसके बाद हर सहायक नदी का अलग विवरण दिया गया है।
1. सहायक नदियाँ व मिलने का स्थान
| सहायक नदी | चम्बल में मिलने का स्थान |
|---|---|
| छोटी कालीसिंध | मकेरिया गाँव (झालावाड़ व मध्यप्रदेश की सीमा पर) |
| कालीसिंध | नौनेरा / नवनेरा (कोटा) |
| सीप | रामेश्वरम (सवाई माधोपुर) में |
| मेज | बसवाड़ा गाँव (बूँदी) में |
| गुंजाली | अरनियाँ (चित्तौड़गढ़) |
| बामनी | भैंसरोड़गढ़ (चित्तौड़गढ़) |
| पार्वती | पालीघाट (सवाईमाधोपुर) के पास दाहिने किनारे पर |
| कुराल | बूँदी में, जवाहर सागर बाँध के पास |
| कूनू | मुरैना के पठार से, मध्यप्रदेश की तरफ से |
| बनास | रामेश्वरम (खंडार तहसील, सवाई माधोपुर) में |
| चाकण | करमापुर (सवाई माधोपुर) के पास |
| आलनिया | नौटना गाँव (कोटा) में |
| ईज | डाबी के पास, बूँदी की तरफ से |
नोट: गुंजाली, बामनी, ईज, कुराल, मेज, चाकण एवं बनास नदियाँ चम्बल के बांये किनारे पर मिलती हैं। शेष नदियाँ दांये किनारे पर मिलती हैं।
- त्रिवेणी संगम ➜ चम्बल–बनास–सीप नदी
- मध्यप्रदेश में चम्बल से मिलने वाली नदियाँ ➜ सीवान, रेतम, शिप्रा
- चम्बल की सबसे बड़ी सहायक नदी ➜ बनास [परीक्षा: Jr. Instructor RAT05, 2024 — चम्बल की सहायक नदियाँ: शिप्रा, काकनेय, बनास व कालीसिंध में से केवल 1, 2 व 4]
2. छोटी कालीसिंध
- उद्गम ➜ मध्यप्रदेश से; राजस्थान में प्रवेश ➜ मागसी गाँव (झालावाड़) से
- समापन ➜ मकेरिया गाँव (झालावाड़) के पास मध्यप्रदेश सीमा पर चम्बल में
- राजस्थान की नदियों में सबसे पहले चम्बल में मिलने वाली नदी छोटी कालीसिंध है
3. गुंजाली
- जाट गाँव (सिंगोली तहसील, मध्यप्रदेश) से निकलकर चित्तौड़गढ़ के दौलतपुरा से प्रवेश कर अरनियां (चित्तौड़) में चम्बल में मिल जाती है
- चम्बल के राजस्थान में प्रवेश के बाद सबसे पहले मिलने वाली नदी गुंजाली है
4. बामनी नदी (ब्राह्मणी / वापणी)
- उद्गम ➜ हरिपुरा की पहाड़ियाँ (बेगूँ, चित्तौड़गढ़) से निकलकर मध्यप्रदेश के सिंगोली (नीमच) में बहती हुई पुनः चित्तौड़गढ़ में प्रवेश कर भैंसरोड़गढ़ (चित्तौड़) में चम्बल में मिल जाती है [परीक्षा: वरिष्ठ अध्यापक (संस्कृत) सा. विज्ञान 2024 — उत्तर: बामनी]
- भैंसरोड़गढ़ दुर्ग ➜ बामनी व चम्बल नदी के किनारे स्थित है
- ब्राह्मणी बनास परियोजना ➜ बामनी नदी से पानी लाने के लिए 89 किमी लम्बी नहर बनाई जाएगी; भैंसरोड़गढ़ के पास एक बाँध बनाकर इस पानी को नहर से लिफ्ट कर बीसलपुर बाँध में डाला जाएगा। बजट घोषणा 2024-25 में ब्राह्मणी नदी के रिवर फ्रन्ट एवं सौन्दर्यकरण का कार्य करवाया जाएगा।
5. कुराल, मेज, चाकण व ईज
- कुराल नदी ➜ उद्गम ऊपरमाल के पठार से (भीलवाड़ा); प्रवाह भीलवाड़ा व बूँदी; समापन बूँदी के निकट चम्बल में
- मेज नदी ➜ उद्गम बिजोलिया (भीलवाड़ा) से; प्रवाह भीलवाड़ा व बूँदी; बसवाड़ा गाँव (बूँदी) के पास चम्बल में मिलती है। मेज की सहायक नदी — मांगली। मांगली नदी पर भीमलत जल प्रपात (बूँदी) बना है।
- चाकण ➜ उद्गम छोटे-छोटे नदी नालों से (बूँदी); प्रवाह बूँदी व सवाई माधोपुर; समापन करमापुर (सवाई माधोपुर) के पास चम्बल में। इस पर बूँदी में चाकण बाँध बना है।
- ईज ➜ भैंसरोड़गढ़ (चित्तौड़गढ़) की पहाड़ियों से निकलकर डाबी (बूँदी) के पास चम्बल में बांये किनारे पर मिल जाती है
6. कालीसिंध
- उद्गम ➜ बागली गाँव की पहाड़ियाँ (देवास जिला, मध्यप्रदेश)
- राजस्थान में प्रवेश ➜ बिन्दा गाँव, रायपुर (झालावाड़) से
- समापन ➜ नवनेरा (कोटा) के पास चम्बल में
- गागरोन दुर्ग (जलदुर्ग) ➜ आहू व कालीसिंध नदियों के संगम पर [परीक्षा: Jr. Instructor Workshop 2024 — गागरोन दुर्ग आहू व कालीसिंध के संगम पर]
- प्रवाह वाले जिले ➜ झालावाड़, कोटा, बारां, पुनः कोटा
- लम्बाई ➜ कुल 278 किमी, राजस्थान में 145 किमी
- यह नदी राजस्थान में प्रवेश के समय कुछ दूरी तक झालावाड़–मध्यप्रदेश सीमा तथा आगे चलकर कोटा–बारां की सीमा बनाती है
- कालीसिंध बाँध ➜ जैतपुर (झालावाड़) में; अब इसका नाम बदलकर ‘हरिश्चन्द्र सागर’ कर दिया गया है
- नौनेरा (नवनेरा) बैराज ➜ कालीसिन्ध नदी पर कोटा जिले के दिगोद उपखण्ड के ऐबरा गाँव के पास
- सहायक नदियाँ ➜ चन्द्रभागा, परवन, आहू, उजाड़, चौली [परीक्षा: स्कूल व्याख्याता (संस्कृत विभाग) 2024 — ‘मानसी और खारी — कालीसिन्ध’ सुमेलित नहीं है]
7. कालीसिंध की सहायक नदियाँ
चन्द्रभागा (झालावाड़ वाली)
- उद्गम ➜ सेमली (झालावाड़) से; यह नदी केवल झालावाड़ जिले में बहती है
- समापन ➜ खाड़िया गाँव (झालावाड़) में कालीसिन्ध में
- यह झालरापाटन कस्बे के पास से बहती है; इसके किनारे झालरापाटन में पशुओं का प्रसिद्ध मेला भरता है
परवन नदी
- उद्गम ➜ विंध्याचल पर्वत, मालवा के पठार (मध्यप्रदेश) से
- राजस्थान में प्रवेश ➜ खरीबोर (मनोहरथाना तहसील, झालावाड़) से
- प्रवाह वाले जिले ➜ झालावाड़, बारां, कोटा
- समापन ➜ पलायता (बारां) के निकट कालीसिंध में
- मनोहरथाना दुर्ग ➜ झालावाड़; परवन व कालीखाड़ नदी के संगम के पास
- शेरगढ़ अभयारण्य (बारां, साँपों की शरणस्थली) व शेरगढ़ दुर्ग (बारां) परवन नदी किनारे स्थित हैं
- सहायक नदियाँ ➜ कालीखाड़, नेवज, धार, छापी
आहू नदी
- उद्गम ➜ सुसनेर (मध्यप्रदेश); राजस्थान में प्रवेश ➜ नन्दपुर (झालावाड़) के पास
- समापन ➜ गागरोन (झालावाड़) में; आहू व कालीसिंध का संगम ‘सामेल’ कहलाता है
- गागरोन दुर्ग यहीं स्थित है
अन्य सहायक
- नेवज / उजाड़ ➜ राजगढ़ (मध्यप्रदेश) से राजस्थान में प्रवेश; परवन में मिलती है
- चौपला ➜ उद्गम पंचपहाड़ (झालावाड़) से; समापन चोसेरी गाँव (झालावाड़) के निकट आहू में
- मांगली नदी ➜ उद्गम भीलवाड़ा जिले से; प्रवाह भीलवाड़ा व बूँदी; समापन संगबाड़ा (बूँदी) में मेज नदी में। बूँदी में इस पर भीमलत जल प्रपात है। सहायक — घोड़ापछाड़ नदी।
- कालीखाड़ नदी ➜ झालावाड़ से निकलकर झालावाड़ में ही परवन में मिल जाती है। परवन व कालीखाड़ के संगम पर मनोहरथाना दुर्ग बना है; इस पर कालीखाड़ बाँध मनोहरथाना (झालावाड़) में बना है।
- घोड़ा पछाड़ नदी ➜ बिजौलिया नामक झील (बूँदी) से निकलकर बूँदी में ही मांगली में मिल जाती है
8. पार्वती, कूनू व आलनियां
- पार्वती नदी (बारां-कोटा वाली) ➜ उद्गम विंध्याचल पर्वत श्रेणी के सेहोर क्षेत्र (मध्यप्रदेश) से; राजस्थान में प्रवेश करीबोर (बारां) से; कुल लम्बाई लगभग 70 किमी। दाहिने किनारे पर पालीघाट (सवाईमाधोपुर) के पास कोटा की तरफ से चम्बल में मिलती है। यह राजस्थान व मध्यप्रदेश की सीमा भी बनाती है। किशनगंज (बारां) शहर इसी के किनारे स्थित है। सहायक नदियाँ — अंधेरी, रेतो, बैंसली, बिलास।
- कूनू नदी ➜ शिवपुरी के पठार (मध्यप्रदेश) से उद्गम। राजस्थान में मुंडेरी गाँव (बारां) से प्रवेश कर बारां जिले के सहरावन के पास से बहती हुई पुनः मध्यप्रदेश में प्रवेश कर मुरैना के पठार के पास चम्बल में मिल जाती है। कुल लम्बाई 180 किमी।
- आलनियां नदी ➜ मुकुन्दवाड़ा की पहाड़ियों (कोटा) से निकलकर नौटना गाँव (कोटा) के पास चम्बल में मिलती है। इसे ‘चन्द्रलोही नदी’ के नाम से भी जाना जाता है। कोटा के कैथून कस्बे के पास से बहती है। कोटा में ही इस नदी पर आलनियां बाँध बना है।
परीक्षा में पूछे गए बिंदु
- गागरोन किले के पास से बहने वाली नदी ➜ कालीसिंध (Junior Instructor Electrician, 2024)
- हरिपुरा गाँव की पहाड़ियों से निकलकर भैंसरोड़गढ़ के पास चम्बल में मिलने वाली ➜ बामनी (वरिष्ठ अध्यापक संस्कृत, 2024)
- उजाड़ और आहू ➜ कालीसिन्ध की शाखाएँ; चाप और जाखम ➜ माही की; मेज और सागी ➜ चम्बल की; मानसी और खारी ➜ यह सुमेलित नहीं (स्कूल व्याख्याता संस्कृत, 2024)
