यह वन अध्याय का अंतिम भाग है — वानिकी परियोजनाएँ, सरकारी योजनाएँ, वन से जुड़े संस्थान, पार्क-उद्यान, पुरस्कार, प्रमुख दिवस और हरित बजट। योजनाओं में वर्ष और सहयोगी एजेंसी सबसे ज़्यादा पूछी जाती है, इसलिए दोनों पर विशेष ध्यान दें। अंत में इस अध्याय के प्रतियोगी परीक्षा प्रश्न भी दिए गए हैं।
1. प्रमुख वानिकी परियोजनाएँ
| परियोजना | वर्ष व सहयोग | विवरण |
|---|---|---|
| मरु वृक्षारोपण परियोजना | 1978 | 10 मरुस्थलीय जिलों में; वित्तीय भागीदारी केंद्र 75 : राज्य 25 |
| सामाजिक वानिकी कार्यक्रम | 1985-86 (7वीं पंचवर्षीय योजना) | पूर्वी राजस्थान के 15 जिलों में प्रारम्भ; 1994-95 के बाद 19 जिलों में। 1990 तक अमेरिका के सहयोग से, 1993 तक विश्व बैंक के सहयोग से |
| इंदिरा गाँधी नहर क्षेत्र वृक्षारोपण व चारागाह विकास | 1991, J.B.I.C. जापान | 2000 तक संचालित; IGNP के किनारे वृक्षारोपण व चारागाह विकास |
| अरावली वृक्षारोपण परियोजना | 1 अप्रैल 1992, O.E.C.F./J.B.I.C. जापान | 10 गैर-मरुस्थलीय जिलों (जयपुर, अलवर, नागौर, झुंझुनूं, पाली, सिरोही, दौसा, उदयपुर, बाँसवाड़ा, चित्तौड़गढ़) में; 31 मार्च 2000 को समाप्त। उद्देश्य — अरावली को हरा-भरा रखना, एनिकट निर्माण, जल संरक्षण व अवैध खनन रोकना |
| वानिकी विकास परियोजना | 1995-96, J.B.I.C. जापान | 2000 तक; अरावली से पूर्व के 15 गैर-मरुस्थलीय जिलों में। उद्देश्य — मरुस्थल का प्रसार रोकना व जैव विविधता विकास |
राजस्थान वानिकी एवं जैव विविधता परियोजना
- फेज 1 ➜ 2003 में प्रारम्भ, 30 जून 2010 तक; 18 जिलों में संचालित
- फेज 2 ➜ अक्टूबर 2011 से प्रारम्भ, 8 वर्ष के लिए (2011-12 से 2018-19)। JICA जापान की आर्थिक सहायता से 10 मरुस्थलीय जिलों (सीकर, झुंझुनूं, चूरू, नागौर, जोधपुर, पाली, जालौर, बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर), 5 गैर-मरुस्थलीय जिलों (बाँसवाड़ा, डूँगरपुर, भीलवाड़ा, सिरोही, जयपुर) तथा 7 वन्य जीव संरक्षित क्षेत्रों (कुम्भलगढ़, फुलवारी की नाल, सीतामाता, जयसमंद, बस्सी, कैला देवी, रावली टॉडगढ़) में वृक्षारोपण
- अतिरिक्त कार्य ➜ गोडावण संरक्षण, चौसिंगा संरक्षण, माचिया बायोलॉजिकल पार्क का निर्माण, सज्जनगढ़ एवं नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्कों का निर्माण
- कुल लागत ➜ 1152.53 करोड़ रुपये
- मुख्य उद्देश्य ➜ साझा वन प्रबन्धन (JFM) की प्रक्रिया से वनाच्छादित क्षेत्र में वृद्धि, जैव विविधता संरक्षण तथा वनों पर निर्भर जन समुदाय की आजीविका के अवसर बढ़ाना
- JICA ➜ जापान इंटरनेशनल को-ऑपरेशन एजेन्सी; इसका पुराना नाम OECF था [परीक्षा: RAS Pre 2025 — फेज-2 के संदर्भ में गलत कथन: “इसमें 18 जिले एवं 8 वन्यजीव अभयारण्य सम्मिलित हैं”]
फेज-2 की दो नवीन परियोजनाएँ
- RABCP (Rajasthan Afforestation and Biodiversity Conservation Project) ➜ कुल 1803.42 करोड़ लागत; JICA जापान की सहायता से 19 जिलों में — अजमेर, बाड़मेर, बाँसवाड़ा, बीकानेर, चूरू, चित्तौड़गढ़, डूँगरपुर, जयपुर, जैसलमेर, जालौर, झुंझुनूं, जोधपुर, नागौर, पाली, प्रतापगढ़, सीकर, सिरोही, राजसमंद व उदयपुर
- RFBDP (Rajasthan Forestry and Biodiversity Development Project) ➜ AFD (Agence France Development) की वित्तीय सहायता से 13 जिलों में — अलवर, बारां, भीलवाड़ा, भरतपुर, बूँदी, दौसा, धौलपुर, जयपुर, झालावाड़, करौली, कोटा, सवाईमाधोपुर व टोंक। 2023-24 से 2030-31 तक 8 वर्ष हेतु स्वीकृत; कुल लागत 1693.91 करोड़ रुपये; AFD एवं राज्य का अनुपात 70:30
- WESCE (Wetland Ex-situ Conservation Establishment) ➜ RFBDP का हिस्सा; फ्रांस सरकार की विदेशी विकास शाखा (AFD) ने 8 वर्षों में 12 करोड़ रुपये देने की सहमति दी। मुख्य उद्देश्य — केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान की जैव विविधता को पुनर्जीवित करना।
- नाबार्ड द्वारा वित्तपोषित वृक्षारोपण परियोजना ➜ 2012-13 में प्रारम्भ; मार्च 2020 तक तीन चरण। तीसरा चरण 2016-17 के बजट में 17 जिलों में आरम्भ। चतुर्थ चरण 2020-21 से; पंचम चरण 2022-23 से 2026-27 तक। वित्तीय वर्ष 2023-24 में 21250 हैक्टेयर वन भूमि पर कार्य सम्पादित।
2. प्रमुख योजनाएँ
- घर-घर औषधी योजना ➜ 1 अगस्त 2021 से; तुलसी, गिलोय, कालमेघ व अश्वगंधा के 2-2 यानी कुल 8 पौधों की किट प्रत्येक परिवार को निःशुल्क। 2021-22 से 2025-26 तक; नोडल एजेंसी वन विभाग।
- हरित राजस्थान स्वस्थ राजस्थान ➜ घर-घर औषधी योजना का विस्तार; 2022-23 में 42 करोड़ की लागत से 5 करोड़ पौधे — 1 करोड़ ग्राम पंचायतों, 1 करोड़ नगरीय क्षेत्रों, 3 करोड़ आमजन को
- ट्री आउटसाइड फॉरेस्ट राजस्थान (T.O.F.R.) ➜ ‘राजस्थान ग्रीनिंग एण्ड रीवाईल्डिंग मिशन’ के तहत 2023-24 में प्रारम्भ; वन क्षेत्रों के बाहर प्रतिवर्ष 5 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य
- वन-धन योजना ➜ बजट 2015-16 में घोषणा, 17 अगस्त 2015 से प्रारम्भ। रणथम्भौर टाईगर रिजर्व, राष्ट्रीय मरु उद्यान जैसलमेर, माउंट आबू, कुंभलगढ़ वन्य जीव अभयारण्य व जवाई कन्जर्वेशन रिजर्व में लागू। इस योजना के लिए राजस्थान को उभरते राज्य के रूप में प्रथम पुरस्कार मिला; दूसरा चरण 2 अक्टूबर 2021 से।
- प्रोजेक्ट बोल्ड (Bamboo Oasis on Land in Drought) ➜ KVIC ने BSF के सहयोग से जुलाई 2021 में लॉन्च किया; तनोट मंदिर के पास 2.5 लाख वर्गफिट भूमि पर बाँस के पौधे। शुरुआत 4 जुलाई 2021 को उदयपुर के निचला मांडवा गाँव से।
- ग्रीन एग्रीकल्चर प्रोजेक्ट ➜ राष्ट्रीय मरु उद्यान क्षेत्र (बाड़मेर व जैसलमेर) में जैव विविधता व वन परिदृश्यों के संरक्षण हेतु; हानिकारक प्रजातियों को हटाना, ओरण व गोचर का प्रबंधन, खड़ीन व टांका जैसी जल संरचनाओं का पुनरुद्धार
- एक पेड़ माँ के नाम अभियान ➜ 5 जून 2024 (विश्व पर्यावरण दिवस) को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा शुरुआत। ‘मेरी लाइफ’ पोर्टल के अनुसार राज्य ने 3 करोड़ के लक्ष्य के विरुद्ध 5.62 करोड़ पौधारोपण किए।
- मिशन हरियाळो राजस्थान ➜ Multi Sectoral Programme के रूप में; 5 वर्षों में लगभग 4 हजार करोड़ व्यय। प्रत्येक जिले में एक ‘मातृ वन’ की स्थापना तथा One-District-One Species कार्यक्रम। वन मित्र ➜ 2 हजार स्थानीय व्यक्तियों को Incentive के आधार पर। Forest and Wildlife Training Cum Management Institute ➜ झालाना (जयपुर) में 40 करोड़ की लागत से। Forest Carbon Credits Certification Mechanism ➜ बजट घोषणा 2024-25। बजट 2025-26 में 10 करोड़ पौधे प्रस्तावित।
- बजट घोषणा 2024-25 ➜ 2028 तक वन क्षेत्र में 20 हजार हैक्टेयर की वृद्धि का लक्ष्य
- वन धन विकास केन्द्र ➜ 8 जिलों (बारां, बाँसवाड़ा, डूँगरपुर, झालावाड़, सिरोही, प्रतापगढ़, कोटा, उदयपुर) में 461 केन्द्र
अन्य योजनाएँ
- ग्रामीण वन योजना ➜ 1981
- रूंख भायला कार्यक्रम ➜ 1985 में डूँगरपुर से; राजीव गाँधी द्वारा उद्घाटन। शाब्दिक अर्थ — वृक्ष मित्र
- संयुक्त वन प्रबंधन कार्यक्रम ➜ 15 मार्च 1991; राजस्थान में 6,508 समितियाँ 14.94 लाख हैक्टेयर वन भूमि की रक्षा व प्रबंधन कर रही हैं
- समन्वित ग्रामीण वनीकरण समृद्धि योजना ➜ 2001-02 से; सभी जिलों में वन विकास अभिकरणों का गठन
- इंडो फूड फोर वर्क परियोजना ➜ आदिवासी जिलों (उदयपुर, बाँसवाड़ा, डूँगरपुर, प्रतापगढ़, चित्तौड़गढ़) में
- वृक्ष यज्ञ योजना ➜ O.E.C.F. (टोक्यो) जापान की सहायता से
- पंचवटी योजना ➜ वट, बेल, आंवला, अशोक व पीपल के पेड़ बड़े पैमाने पर लगाने की योजना
- हरित राजस्थान योजना ➜ 2009-10 से 2013-14 तक। नरेगा के सहयोग से; खेमारू गाँव (डूँगरपुर) में एक दिन में 6 लाख पौधे लगाकर विश्व कीर्तिमान बना
- नगर वन योजना ➜ भारत सरकार प्रायोजित; 200 नगर वन 5 वर्षों में
- सामुदायिक वनाधिकार विकास योजना ➜ 13 दिसम्बर 2005 से पूर्व किए गए कब्जों हेतु अधिकार पत्र; ग्राम सभाओं द्वारा ‘वन अधिकार समितियाँ’ गठित
- राजस्थान में औषधीय पौधों के संरक्षण हेतु 21 औषधीय पौध संरक्षित क्षेत्र स्थापित
3. वनों से संबंधित संस्थान
- शुष्क वन अनुसंधान संस्थान (AFRI) ➜ जोधपुर, 30 जून 1987 को स्थापना। ICFRE देहरादून द्वारा देशभर में स्थापित 9 संस्थानों में से एक। उद्देश्य — राजस्थान, गुजरात, दादर नगर हवेली व दमन दीव के गर्म शुष्क व अर्द्धशुष्क क्षेत्रों में ऐसी तकनीकें विकसित करना जिससे वनस्पति क्षेत्र बढ़े।
- प्रशिक्षण संस्थान (4) ➜ राजस्थान वानिकी एवं वन्यजीव प्रशिक्षण संस्थान (जयपुर), मरु वन प्रशिक्षण केन्द्र (जोधपुर), राजस्थान वन प्रशिक्षण केन्द्र (अलवर), वन्य जीव प्रबन्धन एवं रेगिस्तान पारितंत्र प्रशिक्षण केन्द्र (तालछापर अभयारण्य, चूरू)
- सेंटर फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचुरल रिसोर्सेज, एनवायरमेंट प्रोटेक्शन एंड क्लाइमेट चेंज ➜ जयपुर स्थित राजस्थान वानिकी एवं वन्य जीव प्रशिक्षण संस्थान में
- वनरोपण अनुसंधान केन्द्र ➜ जोधपुर | वन रोपण व भू संरक्षण केन्द्र ➜ जोधपुर
- राजस्थान का प्रथम वानिकी महाविद्यालय ➜ झालावाड़
- वन अनुसंधान फार्म ➜ गोविन्दपुरा (जयपुर) तथा बांकी, सिसारमा (उदयपुर)
- सिल्वीकल्चर वन मंडल ➜ 1956 में स्थापना
- राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ➜ जल प्रदूषण एवं नियंत्रण अधिनियम 1974 की धारा 4 के अंतर्गत 7 फरवरी 1975 को जयपुर में स्थापित
- SRSAC (स्टेट रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेन्टर) ➜ जोधपुर, स्थापना 1985; बजट 2023-24 के अनुसार उपकेन्द्र जयपुर में
- फॉरेस्ट मॉडल स्कूल ➜ उदयपुर, बाँसवाड़ा व झालावाड़
- राजस्थान राज्य वन विकास निगम (RSFDC) ➜ दिसम्बर 2020 को स्थापित; जनवरी 2023 से पूर्णतया कार्यशील
- CAMPA ➜ सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार 14 सितम्बर 2018 को गठन
- वन विकास अभिकरण ➜ राजस्थान में 33 कार्यरत; राज्य वन विकास अभिकरण की स्थापना 9 जुलाई 2010
- पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन निदेशालय ➜ सितम्बर 2019 में स्थापना
4. प्रसिद्ध पार्क व उद्यान
- इको टूरिज्म पार्क, विश्व वानिकी वृक्ष उद्यान, स्व. कर्पूरचन्द कुलिश स्मृति वन ➜ झालाना (जयपुर); कुलिश स्मृति वन राजस्थान का पहला स्मृति वन है
- सबसे बड़ा स्मृति वन ➜ सीकर (अगस्त 2016) | दूसरा स्मृति वन ➜ दीन दयाल उपाध्याय स्मृति वन, भीलवाड़ा
- नौलखा किला स्मृति वन ➜ झालरापाटन | पद्मश्री कैलाश सांखला स्मृति वन ➜ बेरीगंगा वनखण्ड (जोधपुर)
- कैक्टस गार्डन ➜ कुलधरा (जैसलमेर); उदयपुर की केवड़ा की नाल में अगस्त 2024 में उद्घाटन
- हर्बल गार्डन ➜ पुष्कर (अजमेर), 22 जून 2017 से
- पहला मरु वानस्पतिक पार्क ➜ माचिया सफारी (जोधपुर)
- मेवाड़ जैव विविधता पार्क ➜ अम्बेरी (उदयपुर); यहाँ राजस्थान का पहला बटरफ्लाई पार्क जून 2024 में उद्घाटित
- प्रथम नगर वन उद्यान ➜ चीरवा की घाटी (उदयपुर) | दूसरा ➜ महुआ बीड़, अजमेर (जून 2017)
- प्राचीनतम नर्सरी ➜ पंचकुंड नर्सरी (अजमेर, 1879)
- पहला विश्व स्तरीय बर्ड पार्क ➜ उदयपुर
- अन्य ➜ नेचर पार्क (चूरू), सिटी नेचर पार्क (फतेहपुर, सीकर), नीमड़ी माता पार्क (बाड़मेर), गंगानिवास पब्लिक पार्क (बीकानेर), रामनिवास बाग (जयपुर), गुलाब बाग (उदयपुर), बटर फ्लाई वैली (जयपुर), बोगनबेलिया पार्क (जयपुर), बागदड़ा नेचर पार्क (उदयपुर), जैव विविधता पार्क गमधर (उदयपुर), रत्नागिरी कन्या उपवन भुवाणा (उदयपुर), किशनबाग डेजर्ट पार्क (जयपुर), चम्बल उद्यान व ऑक्सी जोन पार्क (कोटा), मण्डोर गार्डन (जोधपुर), इकोलॉजी पार्क लक्ष्मणगढ़ (सीकर), इको पार्क व पक्षी विहार नानी बीड़ (सीकर), नीलकण्ठ बाँयोडायवर्स फॉरेस्ट व ईको पार्क (दौसा)
- गुरुनानक जयंती पार्क ➜ 550वीं जयंती पर 5 जिलों (हनुमानगढ़, गंगानगर, अलवर, कोटा, बूँदी) में
- अमृतादेवी विश्नोई इंडिजिनियस प्लांट म्यूजियम ➜ खेजड़ली (जोधपुर), बजट घोषणा 2024-25
- लवकुश वाटिका ➜ प्रत्येक जिले में 2 विकसित की जा रही हैं
5. प्रमुख दिवस
- वन्य जीव सप्ताह ➜ 2 से 8 अक्टूबर; 2024 में 70वाँ मनाया गया
- विश्व वानिकी दिवस ➜ 21 मार्च; 2025 की थीम — वन और भोजन (Forests and Food)
- विश्व पृथ्वी दिवस ➜ 22 अप्रैल; 2025 की थीम — हमारी शक्ति, हमारा ग्रह
- विश्व पर्यावरण दिवस ➜ 5 जून; 2025 में 52वाँ, थीम — प्लास्टिक प्रदूषण को समाप्त करना
- वन महोत्सव ➜ 7 अगस्त 2024 को 75वाँ राज्य स्तरीय वन महोत्सव (गाडोता, जयपुर); इस अवसर पर एक दिन में 2 करोड़ पौधे लगाने का कीर्तिमान
- अंतर्राष्ट्रीय वन वर्ष ➜ 2003 | विश्व ओजोन दिवस ➜ 16 सितम्बर | राष्ट्रीय प्रदूषण रोकथाम दिवस ➜ 2 दिसम्बर
6. वानिकी पुरस्कार
- अमृता देवी विश्नोई स्मृति वानिकी पुरस्कार ➜ 1994 से प्रारम्भ, प्रथम बार 1997 में; प्रथम पुरस्कार गंगाराम विश्नोई (पाली)। राशि — संस्था 1,00,000 व व्यक्ति 50,000 रुपये। यह राजस्थान का सर्वाधिक प्रतिष्ठित राज्यस्तरीय पुरस्कार है।
- वानिकी पंडित पुरस्कार ➜ 5,000 रुपये; दूसरा राज्यस्तरीय पुरस्कार
- वानिकी लेखन व अनुसंधान पुरस्कार ➜ 5,000 रुपये
- वृक्ष वर्धक पुरस्कार ➜ 6 श्रेणियों में 12 पुरस्कार; राज्य स्तर पर 2000 रुपये
- महावृक्ष पुरस्कार ➜ 1995 से; ग्रामीण क्षेत्र में प्राचीन व विशिष्ट प्रजाति के वृक्ष की देखभाल के लिए पूरे गाँव को
- वन प्रहरी पुरस्कार ➜ अवैध कटान रोकने में उल्लेखनीय कार्य करने वाली ग्राम स्तरीय समिति को
- राजीव गाँधी पर्यावरण संरक्षण पुरस्कार ➜ 2012 से, प्रतिवर्ष 5 जून को; तीन श्रेणियाँ — संगठन/संस्था (5 लाख), नगरपालिका (3 लाख), नागरिक (2 लाख)
- इंदिरा प्रियदर्शनी वृक्षमित्र पुरस्कार ➜ 1986 से, 19 नवम्बर को; राशि 2.5 लाख
- डॉ. सलीम अली राष्ट्रीय वन्य जीव फैलोशिप पुरस्कार ➜ 1995
- कैलाश सांखला राष्ट्रीय वन्य जीव फैलोशिप पुरस्कार ➜ 1996; राशि 50,000
- मेदिनी पुरस्कार ➜ 22 जुलाई 2008; केवल हिन्दी भाषा के लेखकों को; राशि 1 लाख
- इंदिरा गाँधी पर्यावरण संरक्षण पुरस्कार ➜ 2009; 5 जून को; राशि 5 लाख
- 37वाँ वृक्ष बन्धु पुरस्कार ➜ 5 जून 2024 को मेड़ता के खाखड़की निवासी रामचन्द्र पिचकिया को
राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (NGT)
- 18 अक्टूबर 2010 को गठन; मुख्यालय दिल्ली; चार क्षेत्रीय कार्यालय — भोपाल, पूणे, कोलकाता व चेन्नई
- प्रथम अध्यक्ष — लोकेश्वर सिंह पंत; कार्यकाल 5 वर्ष; 20 सदस्य (10 न्यायपालिका, 10 पर्यावरण विशेषज्ञ)
- भारत से पहले केवल ऑस्ट्रेलिया व न्यूजीलैण्ड के पास पर्यावरण संबंधी विशेष अदालत थी
7. हरित बजट व विविध
- हरित बजट (2025-26) ➜ प्रदेश का प्रथम हरित बजट; लक्ष्य 2030 तक SDG प्राप्त करना। 27,854 करोड़ का प्रावधान, जो कुल Scheme Expenditure का 11.34% तथा कुल बजट का 5.18% है।
- Centre Of Excellence For Climate Change ➜ 150 करोड़ की लागत से
- ग्रीन रेटिंग स्कीम ➜ 21 अगस्त 2024 को स्वास्थ्य सुविधाओं, होटलों व आवासीय परियोजनाओं तक विस्तार
- Oxygen Zone ➜ स्वर्ण जयंती पार्क, विद्याधर नगर (जयपुर) | Oxygen Hub ➜ रामगिरी पहाड़ी, बड़गाँव (उदयपुर)
- सिटी पार्क ➜ कुचामन सिटी | कबीर वाटिका सिटी पार्क ➜ रिड़मलसर (बीकानेर)
- अरण्यक ➜ वन विभाग की ऑनलाईन सफारी बुकिंग व परमिट सेवा
- प्लास्टिक कैरी बैग पर प्रतिबन्ध ➜ 1 अगस्त 2010 से
- राजवायु ➜ 5 जून 2016 को लॉन्च मोबाईल ऐप; जयपुर, जोधपुर, उदयपुर की वायु गुणवत्ता
- प्रदेश का पहला ऑर्किड फेस्टिवल ➜ उदयपुर, सज्जनगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में 27-29 जुलाई 2018
- ई-वेस्ट प्रबंधन नीति 2023 तथा राजस्थान जलवायु परिवर्तन नीति 2023 ➜ पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा [परीक्षा: पशु परिचर S-6, 2024 — ई-अपशिष्ट प्रबन्धन नीति 2023 में]
- राजस्थान सरकार ने IIT मुम्बई के साथ MoU कर जलवायु परिवर्तन के लिए ‘राज्य एक्शन प्लान’ का प्रारूप तैयार किया है
8. प्रतियोगी परीक्षाओं में आए प्रमुख प्रश्न
- राजस्थान का राज्य पुष्प ➜ रोहिड़ा (Reet L-1, 2025)
- वानिकी एवं जैव विविधता परियोजना फेज-2 में गलत कथन ➜ विकल्प 4 (RAS Pre, 2025)
- शुष्क सागवान वन नहीं ➜ करौली (कनिष्ठ अनुदेशक सोलर, 2025)
- बीड़ी बनाने वाले पत्ते ➜ तेंदू (कनिष्ठ अनुदेशक ड्राफ्टमैन, 2025)
- 2021 में सर्वाधिक क्षेत्र पर विस्तृत ➜ रक्षित वन (कनिष्ठ अनुदेशक मेंटनेंस, 2025)
- तेंदू वृक्ष का प्रमुख जिला ➜ झालावाड़ (कनिष्ठ अनुदेशक मेंटनेंस, 2025)
- सालर वन के जिले ➜ अलवर, चित्तौड़गढ़, उदयपुर (वरिष्ठ अध्यापक GK, 2024)
- ई-अपशिष्ट प्रबन्धन नीति ➜ 2023 (पशु परिचर S-6, 2024)
- पलाश वन का प्रकार ➜ उष्णकटिबंधीय/शुष्क पर्णपाती (पशु परिचर S-6, 2024)
- सर्वाधिक मूल्यवान वन ➜ आरक्षित वन (पशु परिचर S-2, 2024)
- थार का कल्पवृक्ष ➜ खेजड़ी (Stenographer 2024; पशु परिचर S-1, 2024)
- राज्य वृक्ष ➜ खेजड़ी (महिला पर्यवेक्षक 2024; CET 10+2 S-4, 2024)
- अभिलेखित वन क्षेत्र प्रतिशत ➜ 9.6 (Junior Instructor Workshop, 2024)
- बाँस का जंगल ➜ बाँसवाड़ा (CET 10+2 S-2, 2024)
- कत्था किस वृक्ष से ➜ खैर (CET Graduation S-1, 2024)
- सेवण, धमन और कराड ➜ घास के प्रकार (CET Graduation S-1, 2024)
- माउंट आबू में नहीं ➜ उष्णकटिबंधीय वन (Stenographer, 2024)
- कंटीले वनों की प्रमुख घास ➜ सेवाण (पशु परिचर S-3, 2024)
