वन प्रकृति का दिया हुआ ऐसा संसाधन हैं जो सभ्यता के आरंभ से ही पशु-पक्षियों और मनुष्य दोनों की शरणस्थली रहे हैं। राजस्थान में अरावली प्रदेश कभी वनों से भरा रहता था, पर औद्योगीकरण और जनसंख्या दबाव ने यह स्थिति बदल दी। इस भाग में वन संरक्षण का इतिहास, प्रमुख अधिनियम व नीतियाँ तथा वनों का प्रशासनिक वर्गीकरण क्रमवार दिया गया है। जिन बिंदुओं पर परीक्षा में प्रश्न आया है, वहाँ परीक्षा का नाम साथ में लिखा है।
1. वनों का महत्त्व
- प्राचीन काल में इन वनों में वन्यजीव स्वच्छन्द विचरण करते थे; यहीं आर्थिक, सांस्कृतिक व धार्मिक गतिविधियाँ भी होती थीं
- उस काल में वन देवता की पूजा की जाती थी
- प्रकृति का संतुलन बनाने, मृदा व जल का संरक्षण करने तथा जन्म से मृत्यु तक मनुष्य के काम आने के कारण वन प्राकृतिक संसाधनों का महत्त्वपूर्ण अंग हैं
- किसी देश की अर्थव्यवस्था, पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी संतुलन में वनों का विशेष योगदान होता है
- राजस्थान में वनों के घटने के पीछे प्राकृतिक, सरकारी व व्यक्तिगत — तीनों कारक उत्तरदायी हैं
2. वन संरक्षण का इतिहास — रियासतकालीन प्रयास
| घटना | रियासत / वर्ष |
|---|---|
| वन संरक्षण की प्रथम योजना | जोधपुर रियासत, 1910 |
| वन संरक्षण के प्रथम नियम (मारवाड़ शिकार नियम) | जोधपुर, 1921 |
| कोटा जंगलात कानून | कोटा राज्य, 1924 |
| जयपुर शिकार नियम | जयपुर, 1931 |
| शिकार पर सर्वप्रथम प्रतिबन्ध | टोंक रियासत, 1901 |
| वन अधिनियम बनाने वाली प्रथम रियासत | अलवर रियासत, 1935 |
ट्रिक: शिकार पर रोक सबसे पहले टोंक (1901) ने लगाई, संरक्षण की योजना सबसे पहले जोधपुर (1910) ने बनाई, और पूरा अधिनियम सबसे पहले अलवर (1935) ने बनाया — तीनों अलग-अलग रियासतें हैं, यही अंतर पूछा जाता है।
3. प्रमुख अधिनियम
- राष्ट्रीय वन अधिनियम 1951 ➜ यह राजस्थान में ‘राजस्थान वन अधिनियम 1953’ के नाम से लागू हुआ
- राजस्थान वन (संशोधन) अधिनियम 2014 ➜ 4 मार्च 2014 से लागू; यह नवीनतम संशोधन है
- वन संरक्षण अधिनियम 1980 ➜ 25 अक्टूबर 1980 को लागू। इसके तहत वन भूमि में किसी भी गैर-वानिकी कार्य के लिए भारत सरकार की पूर्व अनुमति आवश्यक है।
- राजस्थान तेन्दू पत्ता (व्यापार का विनियमन) अधिनियम 1974 ➜ 1974 में पारित
4. वन नीतियाँ
- प्रथम राष्ट्रीय वन नीति ➜ 12 मई 1952। इसमें कुल 33% भाग पर वनों का लक्ष्य रखा गया; पहाड़ी व पर्वतीय प्रदेशों के लिए 60% तथा मैदानी क्षेत्रों के लिए 20% का लक्ष्य तय हुआ।
- द्वितीय राष्ट्रीय वन नीति ➜ दिसम्बर 1988
- राजस्थान की प्रथम वन व पर्यावरण नीति ➜ 18 फरवरी 2010 को जारी; इसमें 20% वनों का लक्ष्य रखा गया था
- ध्यान रहे ➜ वन एवं पर्यावरण नीति घोषित करने वाला राजस्थान देश का पहला राज्य है
- राजस्थान वन नीति 2023 ➜ 5 जून 2023 को जारी। इसमें राज्य के वनस्पति आवरण को कुल भौगोलिक क्षेत्र के 20 प्रतिशत तक बढ़ाने का लक्ष्य है।
महत्वपूर्ण तथ्य: राजस्थान वन विभाग की स्थापना के समय, यानी 1949-50 में, राज्य के केवल 13% भाग पर वन थे।
5. अर्थव्यवस्था में योगदान
वर्ष 2024-25 में राजस्थान के सकल राज्य मूल्य वर्धन (GSVA) में वानिकी क्षेत्र का योगदान स्थिर मूल्यों (2011-12) पर 2.54% तथा प्रचलित मूल्यों पर 1.77% रहा है। (स्रोत — आर्थिक समीक्षा रिपोर्ट 2024-25)
6. वनों का प्रशासनिक वर्गीकरण
प्रशासनिक दृष्टि से राजस्थान के वनों को तीन भागों में बाँटा जाता है। नीचे 31 मार्च 2024 तक की स्थिति दी गई है।
| प्रकार | प्रतिशत / क्षेत्रफल | सर्वाधिक प्रसार | विवरण |
|---|---|---|---|
| आरक्षित वन (Reserved forest) | 36.95% — 12198.67 वर्ग किमी | उदयपुर, चित्तौड़गढ़, अलवर | इन पर पूर्ण सरकारी नियंत्रण रहता है; लकड़ी काटने व पशु चराई पर पूर्ण प्रतिबन्ध। ये राष्ट्रीय उद्यान व अभयारण्य के आंतरिक व बाह्य भागों में मिलते हैं। [परीक्षा: पशु परिचर S-2, 2024 — वन संरक्षण व वन्यजीव संसाधनों की दृष्टि से सबसे मूल्यवान: आरक्षित वन] |
| रक्षित / सुरक्षित वन (Protected forest) | 56.43% — 18629.80 वर्ग किमी | बारां, करौली, उदयपुर | इनमें लकड़ी काटने व पशु चराई के लिए वन विभाग से अनुमति या ठेका लिया जाता है (अभयारण्यों के बाह्य भागों में, मृगवन व आखेट निषिद्ध क्षेत्र आदि)। [परीक्षा: कनिष्ठ अनुदेशक (मेंटनेंस ट्रेड) 2025 — 2021 में सर्वाधिक क्षेत्र पर विस्तृत: रक्षित वन] |
| अवर्गीकृत वन (Unclassified forest) | 6.62% — 2185.53 वर्ग किमी | बीकानेर, गंगानगर, जैसलमेर | इनमें लकड़ी कटाई व पशु चराई पर कोई प्रतिबन्ध नहीं होता। ये पवित्र वन, ओरण, नदी, झील, तालाब व सड़कों के किनारे मिलते हैं। |
| कुल | 33014.00 वर्ग किमी | स्रोत — प्रशासनिक प्रतिवेदन, वन विभाग राजस्थान 2023-24 | |
याद रखने का सूत्र: सुरक्षा का क्रम उल्टा है — आरक्षित में सबसे ज़्यादा सख्ती पर क्षेत्रफल सबसे कम नहीं (36.95%), रक्षित में मध्यम सख्ती और क्षेत्रफल सबसे ज़्यादा (56.43%), अवर्गीकृत में कोई रोक नहीं और क्षेत्रफल सबसे कम (6.62%)।
7. प्रशासनिक ढाँचा
- वन संसाधन ➜ समवर्ती सूची का विषय है (42वें संविधान संशोधन 1976 द्वारा)
- वन मंडलों / प्रादेशिक मंडलों की संख्या ➜ 38
- प्रत्येक वन मण्डल के अधीन सामान्यतः 5 से 7 वन रेंज होती हैं; प्रत्येक रेंज का प्रभारी अधिकारी क्षेत्रीय वन अधिकारी होता है
- वन्यजीव मंडल ➜ राजस्थान में 16
- वन बन्दोबस्त ➜ वन भूमि को राजस्थान वन अधिनियम 1953 के प्रावधानों के अंतर्गत आरक्षित/रक्षित वन घोषित किए जाने की प्रक्रिया
8. दो स्थानीय अवधारणाएँ
- बीड़ ➜ राजस्थान में घास के मैदानों व पशु चारागाह के स्थानों को बीड़ कहते हैं
- ओरण ➜ हजारों वर्षों से घास के मैदानों व वृक्षों से आच्छादित क्षेत्रों तथा मन्दिरों और वीर झुंझारों के देव स्थानों के चारों तरफ की भूमि को ‘ओरण’ के नाम से सुरक्षित छोड़ने की परम्परा रही है। लोक मान्यताओं में इन ओरणों में पेड़ काटने और खेती करने पर प्रतिबन्ध रहा है।
- जैसलमेर के प्रमुख ओरण ➜ भादरिया राय ओरण, देगराय ओरण, श्री पाबूजी ओरण, मालणबाई ओरण
- राजस्थान का सबसे बड़ा ओरण ➜ देशनोक (बीकानेर)
- सर्वाधिक जैव विविधता वाला ओरण / वनखंड ➜ डाढ़ देवी वन खंड, कोटा — यहीं प्रथम सर्प उद्यान भी है
- [परीक्षा: पशु परिचर S-5, 2024 — रखत, कांकड़, डांग और रूंद क्या हैं: वनों के संरक्षण से संबंधित शब्दावली]
रिवीजन पॉइंटर्स
- 1901 टोंक → 1910 जोधपुर → 1921 जोधपुर → 1924 कोटा → 1931 जयपुर → 1935 अलवर। यह तिथि-क्रम रट लें।
- राष्ट्रीय वन नीति 1952 में 33%, राजस्थान की नीति 2010 व 2023 में 20% का लक्ष्य।
- वन एवं पर्यावरण नीति घोषित करने वाला पहला राज्य — राजस्थान।
- क्षेत्रफल क्रम: रक्षित > आरक्षित > अवर्गीकृत।
- वन समवर्ती सूची में 42वें संविधान संशोधन (1976) से आए।
अगले भाग में वन विभाग तथा ISFR 2023 के आँकड़े — वनावरण, वृक्षावरण, झाड़ी क्षेत्र और घनत्व आधारित वर्गीकरण।
