राजस्थान मृदा वर्गीकरण एन्टीसोल्स से वर्टीसोल्स

राजस्थान मृदा वर्गीकरण एन्टीसोल्स से वर्टीसोल्स – Rajasthan Geography Chapter 14

पिछले भाग में हमने रंग और गठन के आधार पर मिट्टियाँ देखीं। अब वैज्ञानिक वर्गीकरण — जो परीक्षाओं में सबसे ज़्यादा सीधा प्रश्न देता है। यहाँ दो प्रणालियाँ हैं: अमेरिकी वैज्ञानिकों वाली 5-उपभाग प्रणाली और कृषि विभाग की 14-प्रकार वाली तालिका। साथ में मिट्टी से जुड़ी प्रमुख समस्याओं की सूची भी।

1. वर्गीकरण का आधार

वर्ष 1991 में अमेरिका के कृषि वैज्ञानिकों ने विश्व की मिट्टियों को विविध गुणों व रासायनिक संरचना के आधार पर 11 प्रकारों में विभाजित किया। इसी आधार पर राजस्थान की मिट्टियों को 5 उपभागों में बाँटा गया है।

  • एन्टीसोल्स
  • एरिडीसोल्स
  • अल्फीसोल्स
  • इंसेप्टीसोल्स
  • वर्टीसोल्स

2. एन्टीसोल्स (Anti Soils)

  • पहचान ➜ पीली-भूरी मिट्टी
  • विस्तार ➜ राजस्थान के सर्वाधिक क्षेत्र में; पश्चिमी भाग के लगभग सभी जिलों में
  • दो उप-मृदाकण ➜ टोरी सोमेन्ट्स तथा डस्ट-फ्लूवेंट्स

3. एरिडीसोल्स (Aridi Soils)

  • पहचान ➜ शुष्क मिट्टी
  • जिले ➜ सीकर, चूरू, झुंझुनूं, नागौर, डीडवाना-कुचामन, जोधपुर, पाली, जालौर आदि
  • जलवायु ➜ शुष्क व अर्द्धशुष्क जलवायु प्रदेशों में
  • उप-मृदाकण ➜ ऑरथिड, जिसके अंतर्गत केम्बो ऑरथिड्स, कैल्सी ऑरथिड्स, सेलो ऑरथिड्स और पेलि ऑरथिड्स राजस्थान में पाए जाते हैं

4. अल्फीसोल्स (Alfi Soils)

  • पहचान ➜ जलोढ़ मिट्टी
  • विशेषता ➜ मटियारी मिट्टी की अधिकता होने के कारण उपजाऊ तत्व भी अधिक मात्रा में पाए जाते हैं
  • जलवायु ➜ मुख्यतः आर्द्र जलवायु प्रदेशों में
  • जिले ➜ जयपुर, दौसा, अलवर, खैरथल-तिजारा, कोटपूतली-बहरोड़, भरतपुर, डीग, सवाईमाधोपुर, करौली, धौलपुर, टोंक, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, राजसमंद, उदयपुर, सलूम्बर, बाँसवाड़ा, डूँगरपुर, कोटा, बूँदी, बारां, झालावाड़, प्रतापगढ़ [परीक्षा: RAS Pre 2025 — जयपुर, दौसा और अलवर जिलों में अल्फीसोल्स की प्रधानता]
  • उप-मृदाकण ➜ हेप्लूस्तालफस

5. इंसेप्टीसोल्स (Incepti Soils)

  • पहचान ➜ आर्द्र मिट्टी; उप-आर्द्र जलवायु में
  • जिले ➜ सिरोही, पाली, राजसमंद, उदयपुर, सलूम्बर, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़; जयपुर, दौसा, अलवर, सवाईमाधोपुर एवं झालावाड़ के मैदानों में कहीं-कहीं [परीक्षा: Assi. Pro. G.K. (संस्कृत विभाग) 2024 — सिरोही, पाली, भीलवाड़ा तथा उदयपुर में अधिकांशतः इंसेप्टिसोल्स]
  • उप-मृदाकण ➜ उस्तोक्रेप्ट्स

6. वर्टीसोल्स (Verti Soils)

  • पहचान ➜ काली मिट्टी
  • जलवायु ➜ आर्द्र व अति-आर्द्र प्रदेशों में; इसमें अत्यधिक क्ले उपस्थित होती है
  • जिले ➜ कोटा, बूँदी, बारां, झालावाड़ में अधिकांश भाग; सवाईमाधोपुर, भरतपुर, डूँगरपुर, बाँसवाड़ा व चित्तौड़गढ़ के कुछ क्षेत्रों में भी
  • उप-मृदाकण ➜ पेल्यूस्टर्टस और क्रोमस्टर्टस

7. तीन ज़रूरी नोट

  • राजस्थान में मिट्टी की उर्वरता पश्चिम से पूर्व की ओर बढ़ती है — यह एक-पंक्ति का नियम कई प्रश्नों का उत्तर दे देता है
  • राजस्थान की मिट्टियों में प्रायः नाइट्रोजन और फॉस्फोरस की कमी पाई जाती है
  • राजस्थान में सर्वाधिक पाई जाने वाली मिट्टी ➜ रेतीली बलुई मिट्टी

8. कृषि विभाग का वर्गीकरण — 14 प्रकार

राजस्थान के कृषि विभाग ने राज्य की मृदाओं को निम्न प्रकार से वर्गीकृत किया है (स्रोत — राजस्थान का भूगोल, हरिमोहन सक्सेना):

क्र.मृदा का प्रकारजिले
1साई रोजेम्स (Sie Rozems)गंगानगर
2रेवेरिना (Reverina)गंगानगर
3मरुस्थली मृदा (Desert Soils)गंगानगर, चूरू, झुंझुनूं, बीकानेर, जैसलमेर, नागौर, बाड़मेर, जोधपुर एवं सीकर
4जिप्सीफेरस (Gypsiferrous)बीकानेर [परीक्षा: अनुसंधान विज्ञान 2024 — जिप्सीफेरस मृदा के वृहत क्षेत्र बीकानेर में]
5ग्रे-ब्राउन जलोढ़ मृदा (Gray-Brown Alluvial Soils)जालौर, पाली, नागौर, अजमेर एवं सिरोही
6नान केल्सिल ब्राउन मृदा (Non Calcil Brown Soils)जयपुर, सीकर, झुंझुनूं, नागौर, अजमेर एवं अलवर
7नवीन जलोढ़ मृदा (Alluvial Soils of Recent Origin)अलवर, भरतपुर, सवाईमाधोपुर एवं जयपुर
8पीली भूरी मृदा (Yellowish brown Soils)जयपुर, टोंक, सवाईमाधोपुर, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़ एवं उदयपुर
9नवीन भूरी मृदा (Brown Soils of Recent Origin)भीलवाड़ा एवं अजमेर
10पर्वतीय मृदा (Hilly Soils)उदयपुर एवं कोटा
11लाल-लोम (Red Loam)डूँगरपुर एवं बाँसवाड़ा
12काली गहरी मध्यम मृदा (Deep Medium Black Soils)कोटा, बूँदी, भीलवाड़ा, चित्तौड़गढ़, भरतपुर एवं झालावाड़
13केल्सी ब्राउन मरुस्थली मृदा (Desert Soils Calcic Brown)जैसलमेर एवं बीकानेर
14मरुस्थल एवं बालूका स्तूप (Desert and Dunes)जोधपुर, बाड़मेर, जैसलमेर एवं बीकानेर

[परीक्षा: Ass. Archivist 2024 — “सी-रोजेम — हनुमानगढ़, चुरू” सुमेलित नहीं है; सही सुमेलन स्लेटी भूरी–जालोर/पाली, रेवेरिना–गंगानगर तथा जिप्सीफेरस–बीकानेर हैं]

9. राजस्थान में मिट्टी से सम्बन्धित प्रमुख समस्याएँ

  1. मृदा अपरदन
  2. भूमि का क्षारीय व लवणीय हो जाना
  3. सेम की समस्या
  4. भूमि की उर्वरा शक्ति का ह्रास (भूमि अवनयन)
  5. खरपतवार की समस्या
  6. मरुस्थलीकरण

मृदा अपरदन की परिभाषा: जल के तीव्र प्रवाह, वायु वेग एवं हिमपात से मिट्टी एक स्थान से हटकर दूसरे स्थान पर जाकर एकत्रित हो जाती है। मिट्टी का यही स्थानान्तरण मिट्टी का अपरदन या अपक्षरण कहलाता है।

रिवीजन पॉइंटर्स

  1. पाँच उपभाग याद रखने का क्रम: एन्टी → एरिडी → अल्फी → इंसेप्टी → वर्टी, यानी पश्चिम से पूर्व की ओर।
  2. अल्फीसोल्स = जलोढ़ = पूर्वी मैदान; वर्टीसोल्स = काली = हाड़ौती। यह दो जोड़ी सबसे ज़्यादा पूछी जाती है।
  3. उप-मृदाकण भी पूछे जाते हैं — अल्फी का हेप्लूस्तालफस, इंसेप्टी का उस्तोक्रेप्ट्स, वर्टी के पेल्यूस्टर्टस व क्रोमस्टर्टस।
  4. उर्वरता का नियम: पश्चिम से पूर्व बढ़ती है — यानी सबसे उपजाऊ पूर्वी मैदान, सबसे कम पश्चिमी मरुस्थल।
  5. कृषि विभाग की तालिका से प्रायः “सुमेलित नहीं है” वाला प्रश्न बनता है — जिप्सीफेरस (बीकानेर) और रेवेरिना (गंगानगर) खास तौर पर देख लें।

अगले भाग में मृदा अपरदन — इसके प्रकार, आँकड़े, कारण, हानियाँ, रोकथाम के उपाय तथा लवणीयता व सेम की समस्याएँ।

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