दक्षिणी पूर्वी पठारी प्रदेश

राजस्थान भौतिक विभाजन दक्षिणी पूर्वी पठारी प्रदेश – Rajasthan Geography Chapter 12

राजस्थान का सबसे छोटा भौतिक भाग यही है, लेकिन वर्षा सबसे ज़्यादा यहीं होती है और नदियाँ भी सबसे ज़्यादा यहीं बहती हैं। हाड़ौती के पठार के नाम से जाना जाने वाला यह क्षेत्र अरावली और विंध्याचल को जोड़ने वाली कड़ी है, इसीलिए इसे संक्रांति प्रदेश कहा जाता है।

1. पठार क्या होता है

कम ढाल वाले ऐसे ऊँचे एवं चौड़े भू-भाग, जो ऊपर से समतल होते हैं, पठार कहलाते हैं। इनका निर्माण किसी विस्तृत भू-भाग के किसी कारणवश ऊपर उठ जाने से होता है। कुछ पठार ज्वालामुखी लावा से भी बनते हैं।

2. सामान्य परिचय

  • नाम क्यों ➜ प्राचीन काल में हाड़ा वंशी शासकों का क्षेत्र होने के कारण इसे ‘हाड़ौती का पठार’ कहा जाता है
  • क्या ➜ यह मध्यप्रदेश के मालवा पठार का उत्तर-पश्चिमी हिस्सा है
  • विस्तार ➜ मुख्यतः दक्षिण-पूर्व के 7 जिलों में — कोटा, बूँदी, बारां, झालावाड़, रावतभाटा (चित्तौड़गढ़), भीलवाड़ा (बिजोलिया), पूर्वी बाँसवाड़ा। मुख्य विस्तार कोटा संभाग के चार जिलों में ही है।
  • यह भौतिक भाग मध्यप्रदेश से स्पर्श करता है
  • भैंसरोड़गढ़ से बिजौलिया तक विस्तृत ऊपरमाल का पठार भी हाड़ौती के पठार का ही भाग है
  • अवशेष ➜ गौंडवाना लैण्ड
  • बोली ➜ हाड़ौती

आँकड़े

बिंदुविवरण
क्षेत्रफलराज्य का 6.89%
जनसंख्याराज्य की 11%
औसत ऊँचाई500 मीटर
मिट्टीकाली / कपासी / रेगुर — अधिकांश लावा निर्मित, काफी उपजाऊ
फसलअफीम, सोयाबीन, कपास
प्रमुख नदीचम्बल (साथ में कालीसिन्ध, परवन व पार्वती)
औसत वर्षा80–120 सेमी
जलवायुअति आर्द्र
सामान्य ढालदक्षिण से उत्तर-पूर्व की ओर
सबसे ऊँची चोटीचांदखेड़ी (झालावाड़), 517 मीटर

3. विशेषताएँ

  • संक्रांति प्रदेश ➜ यह अरावली व विंध्याचल पर्वतमाला को जोड़ने वाली कड़ी है, इसीलिए हाड़ौती के पठार को संक्रांति प्रदेश कहते हैं
  • यह भू-आकृति के अस्पष्ट अधर प्रवाह का क्षेत्र है
  • यह राजस्थान का सर्वाधिक नदियों के बहाव वाला भौतिक भाग है
  • यह न्यूनतम क्षेत्रफल वाला भौतिक भाग है
  • यह राजस्थान में सर्वाधिक वर्षा वाला भौतिक भाग है

4. दो भाग

  1. विंध्यन कगार भूमि
  2. दक्कन लावा पठार

(क) विंध्यन कगार भूमि (Vindhyan Scarpland)

  • विस्तार ➜ करौली, धौलपुर, सवाईमाधोपुर जिलों में
  • यह विंध्याचल पर्वत का अंतिम भाग है
  • निर्माण ➜ बलुआ पत्थरों से
  • स्थिति ➜ चम्बल व बनास नदी के मध्य का भाग; कगारों का मुख बनास और चम्बल के बीच दक्षिण व दक्षिण-पूर्व दिशा की ओर है तथा बुंदेलखण्ड में पूर्व की ओर फैले हैं
  • उत्तर-पश्चिम में चम्बल के बाएँ किनारे पर तीव्र ढाल वाले कगार दिखाई देते हैं
  • औसत ऊँचाई ➜ 350 से 550 मीटर
पत्थरस्थान
लाल बलुआ पत्थरधौलपुर
गुलाबी बलुआ पत्थरकरौली
स्लेटी बलुआ पत्थरबूँदी
पट्टी / कातलेबिजौलिया (भीलवाड़ा)

महान सीमा भ्रंश (Great Boundary Fault)

  • राजस्थान के दक्षिणी पूर्वी भाग से यह भ्रंश गुजरता है
  • स्थिति ➜ अरावली पर्वतमाला के पूर्व में; बूँदी व सवाईमाधोपुर की पहाड़ियों के सहारे फैला हुआ
  • नाम क्यों ➜ अरावली व विंध्याचल पर्वतमाला का मिलन स्थल होने के कारण
  • कहाँ देखा जा सकता है ➜ चित्तौड़गढ़ के बेगूँ, उत्तरी कोटा, सतूर (बूँदी), सवाईमाधोपुर, सपोटरा (करौली), धौलपुर

(ख) दक्कन लावा पठार (Deccan Lava Plateau)

  • विस्तार ➜ कोटा, बूँदी, बारां, झालावाड़
  • नदी निर्मित मैदान ➜ हाड़ौती के पठार में चम्बल और उसकी सहायक नदियाँ (कालीसिन्ध, पार्वती, परवन, मेज) उपजाऊ मैदान बनाती हैं; ये कोटा में कांपीय बेसिन का निर्माण करती हैं
  • चम्बल और कालीसिन्ध, पार्वती जैसी सहायक नदियों ने कोटा में एक त्रिकोणीय कांपीय बेसिन बनाया है
  • मिट्टी ➜ काली (बैसाल्ट तत्त्वों की प्रमुखता)
  • औसत ऊँचाई ➜ 210 से 275 मीटर
  • इस क्षेत्र में दक्कन लावा की शैल पाई जाती है
  • नोट ➜ यह क्षेत्र विंध्याचल पर्वतमाला का पश्चिमी भाग है

5. अर्द्धचन्द्राकार पर्वत श्रेणियाँ

  • इस क्षेत्र में बूँदी की पहाड़ियाँ व मुकुन्दरा की पहाड़ियाँ अर्द्धचन्द्राकार रूप में फैली हैं
  • बूँदी की पहाड़ियाँ ➜ लगभग 96 किमी लम्बाई में उत्तर-पूर्व से दक्षिणी पश्चिम में फैली दोहरी पर्वतमाला; सर्वोच्च शिखर सतूर (बूँदी) 353 मीटर
  • बूँदी जिले के चार दर्रे ➜ बूँदी के निकट दर्रा, लाखेरी दर्रा, रामगढ़-खटकड़ दर्रा, जेतावास दर्रा
  • मुकन्दरा की पहाड़ियाँ ➜ विस्तार कोटा व झालावाड़ दोनों जिलों में, सर्वाधिक कोटा में; लगभग 120 किमी लम्बाई में उत्तर-पश्चिम से दक्षिण-पूर्व तक विस्तारित; ये विंध्यांचल पर्वतमाला का ही विस्तार हैं
  • शाहबाद का उच्च क्षेत्र ➜ बारां जिले के पूर्वी भाग में, समुद्रतल से लगभग 300 मीटर ऊँचाई पर; यहाँ रामगढ़ कस्बे (बारां) के पास घोड़े के नाल की आकृति (हॉर्स शू आकार) की एक पर्वत श्रेणी है, जिसके मध्य उल्का पिण्ड गिरने से एक झील बनी है
  • झालावाड़ का पठार ➜ हाड़ौती के दक्षिणी भाग में; मालवा के पठार का भाग। इसके दक्षिणी पश्चिमी भाग में डग-गंगाधार की उच्च भूमि है; औसत ऊँचाई 450 मीटर

दक्कन का पठार: संस्कृत के ‘दक्षिण’ से डेक्कन (अंग्रेजी) और फिर दक्कन बना। इसे विशाल प्रायद्वीपीय पठार भी कहा जाता है। दक्षिण भारत का मुख्य भू-भाग इसी पर स्थित है। यह पठार त्रिभुजाकार है और इसकी उत्तर सीमा सतपुड़ा तथा विंध्याचल पर्वत श्रृंखला द्वारा निर्धारित होती है।

6. राजस्थान की उच्चावचीय संरचना

वर्गऊँचाईप्रतिशत
उच्च शिखर900 मीटर से अधिक1%
पर्वत श्रृंखला600–900 मीटर6%
उच्च भूमि (पठारी क्षेत्र)300–600 मीटर31%
मैदानी क्षेत्र150–300 मीटर51%
निम्न भूमि150 मीटर से कम11%

7. राष्ट्रीय भूवैज्ञानिक स्मारक स्थल

Geo Heritage Sites

स्थानजिलावर्ष
आकल वुड फॉसिल पार्कजैसलमेर1972
झामरकोटड़ा स्ट्रोमेटोलाइट फॉसिल पार्कउदयपुर1976
भोजुंदा स्ट्रोमेटोलाइट पार्कचित्तौड़गढ़1976
किशनगढ़ नेफेलाइन साईनाइटअजमेर1976
जोधपुर वेल्डेड टफजोधपुर1976
जोधपुर ग्रुप मालानी ईग्नियस सुईट कॉन्टेक्टजोधपुर1976
ग्रेट बाउन्ड्री फाल्टसतूर (बूँदी)1976
सेन्द्रा (सेन्दड़ा) ग्रेनाईटब्यावर1977
बर कॉन्ग्लोमेराटब्यावर1977
राजपुरा दरीबा खनिज क्षेत्र गोसानराजसमंद1977

Geo Tourism Sites

  • जावर प्राचीन खनन स्थल ➜ उदयपुर (2016)
  • रामगढ़ मेटिओराईट इम्पेक्ट क्रेटर ➜ बारां
  • थार मरुस्थल ➜ जैसलमेर

8. जैसलमेर का डायनासोर अवशेष

जैसलमेर के जेठवाई क्षेत्र में सबसे प्राचीन शाकाहारी डायनासोर थारोसोरस की नई प्रजाति के अवशेष मिले हैं, जो लगभग 167 मिलियन (16.7 करोड़) वर्ष पुराने हैं। IIT रुड़की और GSI ने शाकाहारी डायक्रेओसोराइड सोरोपॉड्स डायनासोर के सबसे पुराने जीवाश्म अवशेषों की खोज की है। इसे ‘थारोसोरस इंडिकस’ नाम दिया गया है।

प्रतियोगी परीक्षाओं में आए प्रश्न

  1. अरावली पर्वतमाला की दिशा क्या है? (Reet L-2, 2025) ➜ दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व
  2. बिलाली तथा बरवाड़ा क्या हैं? (Librarian Grade II, 2025) ➜ उत्तरी अरावली की चोटियाँ
  3. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए (RAS Pre, 2025) — अ. लूणी बेसिन व शेखावाटी प्रदेश राजस्थान बांगड़ के उप-प्रदेश हैं। ब. घग्घर का मैदान अधिकांशतः हनुमानगढ़, गंगानगर जिलों में फैला है। स. नागौर उच्च भूमि में लवणीय झीलें और आन्तरिक जल प्रवाह है। द. अरावली श्रेणियाँ सभी प्रकार के खनिजों में समृद्ध है। ➜ उत्तर: अ, ब और स

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