राजस्थान का वर्तमान नाम एक ही दिन में नहीं बना। वैदिक काल से लेकर 1956 तक इस भू-भाग को अलग-अलग युगों में अलग-अलग नामों से पहचाना गया। परीक्षा की दृष्टि से यह टॉपिक सबसे ज़्यादा प्रश्न देने वाला है, क्योंकि इसमें नाम, ग्रंथ, लेखक और तिथि — चारों को जोड़कर पूछा जाता है। नीचे पूरी कहानी क्रमवार नोट्स के रूप में दी गई है।
एक नज़र में
- ऋग्वेद काल ➜ ब्रह्मावर्त
- रामायण काल (वाल्मीकि) ➜ मरुकांतार
- मरुस्थलीय पहचान ➜ मरु / मरुदेश / मरुप्रदेश / मरुवार
- शिलालेख ➜ राजस्थानीयादित्य (बसंतगढ़)
- ब्रिटिश काल ➜ राजपूताना
- टॉड के बाद ➜ राजस्थान / रजवाड़ा / रायथान
- स्वतंत्रता के बाद ➜ संवैधानिक नाम राजस्थान
1. शिलालेखीय साक्ष्य — बसंतगढ़ शिलालेख
- कहाँ ➜ बसंतगढ़ (सिरोही जिला), खीमल माता मंदिर में स्थापित
- काल ➜ 625 ई.
- शासक ➜ चावड़ा वंश का वर्मलात
- विषय ➜ तत्कालीन दास प्रथा का उल्लेख
- महत्त्व ➜ ‘राजस्थान’ से मिलता-जुलता शब्द राजस्थानीयादित्य यहीं सबसे पहले लिखित रूप में मिलता है
- विवाद ➜ यह शब्द किसी व्यक्ति की उपाधि था या किसी क्षेत्र का नाम — इस पर विद्वान एकमत नहीं हैं
याद रखने का तरीका: “सबसे प्राचीन लिखित उल्लेख” पूछा जाए तो उत्तर शिलालेख वाला होगा, और “पुस्तक में सबसे पहला उल्लेख” पूछा जाए तो उत्तर ख्यात वाला होगा। परीक्षा में यही दोनों विकल्प साथ-साथ रखकर भ्रमित किया जाता है।
2. ग्रंथों में ‘राजस्थान’ शब्द
(क) मुहणोत नैणसी री ख्यात
- क्या ➜ किसी पुस्तक में ‘राजस्थान’ शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग इसी में हुआ
- दर्जा ➜ राजस्थान का प्रथम ऐतिहासिक ग्रंथ; सभी ख्यातों में सर्वाधिक प्राचीन एवं विश्वसनीय
- रचना काल ➜ लगभग 1643 ई. से 1666 ई.
- लेखक का करियर ➜ शुरुआत में जोधपुर के महाराजा गजसिंह की सेवा, बाद में महाराजा जसवंतसिंह प्रथम के दरबारी कवि एवं दीवान
- विषय ➜ राजस्थान की विभिन्न रियासतों तथा मध्य भारत का इतिहास
- भाषा ➜ डिंगल
(ख) राजरूपक — लेखक वीरभान
- रचनाकाल ➜ 1731 ई.
- विषय ➜ जोधपुर के महाराजा अभयसिंह और गुजरात के सूबेदार सर बुलंद खाँ के बीच हुए युद्ध का वर्णन
- इसमें भी ‘राजस्थान’ शब्द आया है
ध्यान दें: इन दोनों ग्रंथों में ‘राजस्थान’ शब्द इस पूरे भू-भाग के लिए नहीं आया है। वहाँ इसका अर्थ था — राजा का स्थान, यानी राजा की राजधानी या उसका निवास-स्थल। पूरे प्रदेश के अर्थ में यह शब्द बहुत बाद में रूढ़ हुआ।
(ग) 1791 ई. का पत्र
- जोधपुर के महाराजा भीमसिंह ने जयपुर के सवाई प्रतापसिंह को जो पत्र भेजा, उसमें ‘राजस्थानां’ शब्द मिलता है।
3. ‘राजपूताना’ नाम
- सर्वप्रथम प्रयोगकर्ता ➜ जॉर्ज थॉमस, 1800 ई. में
- प्रमाण कहाँ मिलता है ➜ विलियम फ्रैंकलिन की 1805 ई. में छपी पुस्तक मिलिट्री मेमोयर्स ऑफ मिस्टर जॉर्ज थॉमस में लिखा है कि स्वतंत्र रूप से यह शब्द इस भू-भाग के लिए सबसे पहले थॉमस ने ही चलाया
- पुस्तक का प्रकाशन करवाया ➜ लॉर्ड वेलेजली ने
जॉर्ज थॉमस — संक्षिप्त परिचय
- मूल निवासी ➜ आयरलैंड
- पद ➜ ग्वालियर के मराठा शासक दौलतराव सिंधिया का अंग्रेज कमांडर
- राजस्थान में प्रवेश ➜ सबसे पहले शेखावाटी क्षेत्र में आया
- मृत्यु ➜ 1802 ई., बहरामपुर (बंगाल)
दूसरी मान्यता: मुगलकालीन साहित्यकार ‘राजपूत’ का बहुवचन ‘राजपूतां’ लिखते थे। संभवतः इसी से अंग्रेजों ने इस क्षेत्र को राजपूताना यानी राजपूतों का देश कह दिया।
4. कर्नल जेम्स टॉड — ‘राजस्थान’ नाम के जनक
- इस भू-भाग के लिए ‘राजस्थान’ शब्द का पहला प्रयोगकर्ता ➜ कर्नल जेम्स टॉड
- पुस्तक ➜ द एनाल्स एंड एंटिक्विटीज ऑफ राजस्थान, प्रकाशन 1829 ई.
- दूसरा नाम ➜ द सेंट्रल एंड वेस्टर्न राजपूत स्टेट्स ऑफ इंडिया
- खंड ➜ दो भागों में छपी (1829 तथा 1832)
- सम्पादक ➜ विलियम क्रुक
- समर्पण ➜ दोनों खंड इंग्लैंड के राजा जॉर्ज चतुर्थ एवं विलियम चतुर्थ को
- प्रथम हिंदी अनुवाद ➜ गौरीशंकर हीराचंद ओझा
- अन्य नाम जो टॉड ने दिए ➜ पुरानी बहियों के आधार पर रजवाड़ा तथा रायथान
टॉड की दूसरी पुस्तक
- नाम ➜ द ट्रेवल्स इन वेस्टर्न इंडिया
- वर्ष ➜ 1839
- प्रकाशित करवाया ➜ उनकी पत्नी जुलिया क्लटरबक ने
- समर्पित ➜ विलियम हंटर ब्लेयर को
5. आधुनिक नामकरण — तीन निर्णायक तिथियाँ
| तिथि | घटना |
|---|---|
| 25 मार्च, 1948 | एकीकरण के दूसरे चरण में पहली बार आधिकारिक रूप से ‘राजस्थान’ शब्द जुड़ा; इस इकाई का नाम पूर्व राजस्थान संघ रखा गया |
| 26 जनवरी, 1950 | ‘राजस्थान’ नाम को संवैधानिक मान्यता मिली |
| 1 नवम्बर, 1956 | राजस्थान का वर्तमान स्वरूप अस्तित्व में आया |
रिवीजन टेबल — Revision
| शब्द / नाम | स्रोत या प्रयोगकर्ता |
|---|---|
| ब्रह्मावर्त | ऋग्वेद |
| मरुकांतार | वाल्मीकि (रामायण) |
| राजस्थानीयादित्य | बसंतगढ़ शिलालेख, 625 ई. |
| राजस्थान (पुस्तक में प्रथम) | मुहणोत नैणसी री ख्यात |
| राजस्थान (शब्द, प्रदेश हेतु प्रथम) | कर्नल जेम्स टॉड |
| राजपूताना | जॉर्ज थॉमस, 1800 ई. |
| रजवाड़ा / रायथान | कर्नल जेम्स टॉड |
Important Exam Points
- प्राचीनतम लिखित उल्लेख ➜ बसंतगढ़ शिलालेख, जबकि प्राचीनतम पुस्तक उल्लेख ➜ नैणसी री ख्यात।
- ‘राजपूताना’ का श्रेय थॉमस को, ‘राजस्थान’ का टॉड को — दोनों को आपस में मत बदलिए।
- टॉड की पहली पुस्तक 1829, दूसरी 1839 — एक दशक का अंतर याद रखें।
- 1948 (नाम जुड़ा) ➜ 1950 (संवैधानिक मान्यता) ➜ 1956 (वर्तमान स्वरूप) — यह तीन-चरणीय क्रम लगभग हर परीक्षा में आता है।
- नैणसी की भाषा डिंगल थी, और वे दो शासकों — गजसिंह तथा जसवंतसिंह प्रथम — से जुड़े रहे।

