नामकरण के बाद दूसरा सबसे महत्त्वपूर्ण भाग है — राजस्थान आखिर पृथ्वी पर बैठा कहाँ है। यहाँ तीन परतों में समझना ज़रूरी है: विश्व में स्थिति, एशिया में स्थिति और भारत में स्थिति। इसके बाद अक्षांश-देशांतर की मूल अवधारणा और अंत में कर्क रेखा — क्योंकि राजस्थान की जलवायु, दिन-रात की लंबाई और सूर्य की किरणों का व्यवहार, सब इसी पर टिका है।
1. राजस्थान की स्थिति — तीन परतें
- अक्षांशीय दृष्टि से ➜ उत्तरी गोलार्द्ध में
- देशांतरीय दृष्टि से ➜ पूर्वी गोलार्द्ध में
- विश्व मानचित्र / ग्लोब पर ➜ उत्तर-पूर्व अर्थात ईशान कोण में
- एशिया महाद्वीप में ➜ दक्षिण-पश्चिम अर्थात नैऋत्य कोण में
- भारत में ➜ उत्तर-पश्चिम अर्थात वायव्य कोण में
ट्रिक: बड़े से छोटे की ओर चलिए — विश्व में ईशान, एशिया में नैऋत्य, भारत में वायव्य। तीनों कोण अलग-अलग हैं, इसी वजह से यह प्रश्न बार-बार पूछा जाता है।
2. राजस्थान का अक्षांशीय एवं देशांतरीय विस्तार
- अक्षांश ➜ 23°03′ उत्तरी से 30°12′ उत्तरी
- देशांतर ➜ 69°30′ पूर्वी से 78°17′ पूर्वी
- कुल अक्षांशीय फैलाव ➜ 7°09′
- कुल देशांतरीय फैलाव ➜ 8°47′
- 70° पूर्वी देशांतर पर स्थित जिला ➜ जैसलमेर
मध्यवर्ती रेखाएँ
- मध्यवर्ती अक्षांश रेखा ➜ 27° उत्तरी अक्षांश। यह जैसलमेर, फलौदी, नागौर, डीडवाना-कुचामन, जयपुर, दौसा तथा भरतपुर से होकर गुजरती है।
- जयपुर शहर के निकट से गुजरने वाली अक्षांश रेखा ➜ 27° उत्तरी
- मध्यवर्ती देशांतर रेखा ➜ 74° पूर्वी देशांतर। यह गंगानगर, हनुमानगढ़, बीकानेर, चूरू, नागौर, ब्यावर, राजसमंद, उदयपुर, सलूम्बर, डूंगरपुर तथा बांसवाड़ा से होकर गुजरती है।
3. अक्षांश — मूल अवधारणा
- क्या ➜ ग्लोब पर पूर्व-पश्चिम दिशा में आड़ी खींची गई काल्पनिक रेखाएँ
- भूमध्य रेखा ➜ विषुवत वृत्त या वृहद वृत्त भी कहलाती है; लंबाई लगभग 40,076 किमी; यह पृथ्वी का सबसे बड़ा वृत्त है और पृथ्वी को दो बराबर भागों में बाँटती है
- दो भाग ➜ उत्तर की ओर उत्तरी गोलार्द्ध, दक्षिण की ओर दक्षिणी गोलार्द्ध
- कुल अक्षांश रेखाएँ ➜ 179
- कुल अक्षांश ➜ 181
- दो अक्षांश रेखाओं के बीच दूरी ➜ 111.13 किमी
- 90° उत्तरी अक्षांश ➜ उत्तरी ध्रुव; 90° दक्षिणी अक्षांश ➜ दक्षिणी ध्रुव
- दो अक्षांशों के मध्य का भाग ➜ कटिबंध
- उपयोग ➜ किसी स्थान की स्थिति एवं जलवायु का निर्धारण
गणना समझिए: पृथ्वी की ध्रुवीय परिधि 40,008 किमी है, इसलिए एक गोलार्द्ध की ध्रुवीय परिधि 20,004 किमी हुई। इसका आधा भाग, यानी 0° से 90° उत्तरी ध्रुव तक की दूरी 10,002 किमी बनती है। इसे 90 से भाग देने पर एक अक्षांश की दूरी 111.13 किमी निकल आती है।
4. देशांतर — मूल अवधारणा
- क्या ➜ ग्लोब पर उत्तर से दक्षिण की ओर खींची गई काल्पनिक रेखाएँ
- कुल संख्या ➜ 360
- भूमध्य रेखा पर दो देशांतरों के बीच दूरी ➜ लगभग 111.32 किमी (40,076 ÷ 360)
- दो देशांतरों के मध्य का भाग ➜ गोरे
- उपयोग ➜ किसी स्थान की स्थिति एवं समय का निर्धारण
समय का गणित
- 1° देशांतर पार करने में सूर्य को ➜ 4 मिनट
- 15° देशांतर पार करने पर ➜ 1 घंटे का अंतर
- ग्रीनविच रेखा से पूर्व की ओर ➜ समय में वृद्धि; पश्चिम की ओर ➜ समय में कमी
- उदाहरण ➜ 0° देशांतर पर जब 10:00 AM होगा, तब 15° पूर्वी देशांतर पर 11:00 AM होगा
भारतीय मानक समय (IST)
- रेखा ➜ 82°30′ पूर्वी देशांतर
- कहाँ से गुजरती है ➜ इलाहाबाद के निकट नैनी नामक स्थान से
- GMT से अंतर ➜ IST, ग्रीनविच मीन टाइम से 5 घंटे 30 मिनट आगे
- पूरे भारत के लिए एक ही समय जोन रखा गया है
5. राजस्थान में सूर्योदय का अंतर
- राजस्थान 8°47′ देशांतरों में फैला है ➜ 8°47′ × 4 मिनट = 35 मिनट 8 सेकंड (लगभग 35 मिनट)
- अर्थात राज्य के सबसे पूर्वी और सबसे पश्चिमी छोर के सूर्योदय में लगभग 35 मिनट का अंतर रहता है
- सबसे पहले सूर्योदय व सूर्यास्त ➜ धौलपुर (सिलावट)
- सबसे बाद में सूर्योदय व सूर्यास्त ➜ जैसलमेर (कटरा)
- कारण ➜ सूर्य हमेशा पूर्वी स्थानों पर पहले और पश्चिमी स्थानों पर बाद में दिखाई देता है
6. कर्क रेखा और राजस्थान
- क्या ➜ 23°30′ उत्तरी अक्षांश रेखा को कर्क रेखा कहते हैं; यह वह उत्तरतम अक्षांश है जहाँ दोपहर में सूर्य लंबवत चमकता है
- कब सीधा चमकता है ➜ 21 जून को, इसके बाद दक्षिणायन प्रारंभ हो जाता है
- नाम क्यों ➜ जून क्रांति के समय सूर्य की स्थिति कर्क राशि में होती है, इसीलिए कर्क संक्रांति
- राजस्थान में लंबाई ➜ लगभग 26 किमी
- भारत में लंबाई ➜ लगभग 2934 किमी, कुल 8 राज्यों से गुजरती है — गुजरात, राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखण्ड, पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा, मिजोरम
राजस्थान में कर्क रेखा — केवल 2 जिले
| बिंदु | उत्तर |
|---|---|
| जिले | बांसवाड़ा तथा डूंगरपुर |
| बांसवाड़ा में | जिले के मध्य से (कुशलगढ़ तहसील) |
| डूंगरपुर में | दक्षिणी सीमा से, चिखली गाँव के पास |
| सर्वाधिक निकट शहर | कुशलगढ़ (बांसवाड़ा) |
| सर्वाधिक निकट जिला मुख्यालय | बांसवाड़ा |
| सर्वाधिक दूर जिला मुख्यालय | गंगानगर |
| दो बार काटने वाली नदी | माही |
21 जून की विशेषताएँ
- राजस्थान में सबसे लंबा दिन और सबसे छोटी रात
- कर्क रेखा पर स्थित क्षेत्रों में दोपहर के समय परछाईं नहीं बनती, इसीलिए इसे ‘नो शैडो जोन’ कहा जाता है
- यही दिन अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस है, जिसकी शुरुआत 2015 से हुई
- वर्ष 2024 में 10वाँ अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस मनाया गया
- 2024 की भारत सरकार की थीम ➜ योग, स्वयं और समाज के लिए
- 2024 की राजस्थान सरकार की थीम ➜ महिला सशक्तिकरण
7. सूर्य की किरणें — सीधापन और तिरछापन
- सर्वाधिक सीधापन ➜ बांसवाड़ा
- सर्वाधिक तिरछापन ➜ गंगानगर
- तिरछापन का आरोही क्रम ➜ दक्षिण से उत्तर की ओर (बांसवाड़ा से गंगानगर की ओर बढ़ते जाइए, तिरछापन बढ़ता जाएगा)
- सीधापन का आरोही क्रम ➜ उत्तर से दक्षिण की ओर (गंगानगर से बांसवाड़ा की ओर बढ़ने पर सीधापन बढ़ता है)
- सामान्य नियम ➜ भूमध्य रेखा से ध्रुवों की ओर जाने पर किरणों का तिरछापन बढ़ता है और तापमान घटता है
मानसिक मानचित्र: बांसवाड़ा राजस्थान का सबसे दक्षिणी छोर है — वहीं कर्क रेखा है, वहीं किरणें सबसे सीधी पड़ती हैं। गंगानगर सबसे उत्तरी छोर है — वहीं किरणें सबसे तिरछी, और कर्क रेखा से सबसे दूर मुख्यालय भी वही। यह एक ही धुरी पर टिके तीन-चार प्रश्नों का उत्तर एक साथ दे देता है।
अगले भाग में हम राजस्थान की सीमाएँ, रैडक्लिफ रेखा, पड़ोसी राज्य तथा क्षेत्रफल से जुड़े तथ्यों को इसी क्रम में देखेंगे।

