अरावली राजस्थान का सबसे पुराना भौतिक भाग है और राज्य की पूरी भूगोल-कहानी की धुरी भी। यह मरुस्थल को पूर्व की ओर बढ़ने से रोकती है, नदियों को जन्म देती है, वर्षा का बँटवारा करती है और खनिजों का भंडार है। इसी वजह से इसे ‘राजस्थान की जीवन रेखा’ कहा जाता है।
1. आँकड़े एक जगह
- राजस्थान के क्षेत्रफल का ➜ 9%
- राजस्थान की जनसंख्या का ➜ 10%
- कुल लम्बाई ➜ 692 किमी — पालनपुर (गुजरात) से रायसीना की पहाड़ी (दिल्ली) तक
- राजस्थान में लम्बाई ➜ 550 किमी (79.48% भाग)
- राजस्थान में विस्तार ➜ खेड़ब्रह्म (गुजरात सीमा) से खेतड़ी (झुंझुनूं) तक
- दिशा ➜ दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व की ओर, यानी नैऋत्य कोण से ईशान कोण की ओर
- औसत ऊँचाई ➜ 930 मीटर
- राज्यों में विस्तार ➜ 3 राज्य (गुजरात, राजस्थान, हरियाणा) व 1 केंद्रशासित प्रदेश (दिल्ली)
- राजस्थान में मुख्य विस्तार ➜ 9 जिलों में — उदयपुर, सिरोही, राजसमंद, अजमेर, सीकर, झुंझुनूं, जयपुर, दौसा, अलवर
- अक्षांशीय-देशांतरीय विस्तार ➜ 23°20′ से 28°20′ उत्तरी अक्षांश तथा 72°10′ से 77°0′ पूर्वी देशांतर
नोट: जिलों के पुनर्गठन के बाद ब्यावर, डीडवाना-कुचामन का पूर्वी भाग, कोटपूतली-बहरोड़ तथा खैरथल-तिजारा में भी अरावली का विस्तार है। शाखाओं और प्रभाव को देखते हुए डूंगरपुर, बांसवाड़ा, चित्तौड़गढ़ व भीलवाड़ा भी इसमें सम्मिलित कर लिए जाते हैं।
2. उत्पत्ति एवं संरचना
- कब बनी ➜ प्री-कैम्ब्रियन कल्प में, लगभग 65 करोड़ वर्ष पहले
- किसका अवशेष ➜ गौंडवाना लैण्ड
- कैसे बनी ➜ जब भारतीय प्लेट और यूरेशियन प्लेट समुद्र से अलग हो गई थीं
- भूगर्भिक बनावट का वर्णन करने वाले ➜ ए.एम. हेरॉन (1923 में)
- उद्गम ➜ अरब सागर के मिनिकाय द्वीप (लक्षद्वीप) से माना जाता है; मूल जड़ अरब सागर से शुरू होने के कारण अरब सागर को ‘अरावली का पिता’ कहा जाता है
ए.एम. हेरॉन: पूरा नाम अलेक्जेंडर मैकमिलन हेरॉन। ये स्कॉटलैंड के भूगोलवेत्ता थे और भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (कोलकाता) के अध्यक्ष भी रहे।
चट्टानों की बनावट
- भूगर्भिक दृष्टि से अरावली मुख्यतः अरावली सुपर ग्रुप एवं दिल्ली सुपर ग्रुप की चट्टानों से बनी है, जिसमें दिल्ली क्वार्टजाइट चट्टानें प्रमुख हैं
- उत्तरी व मध्यवर्ती भाग ➜ क्वार्टजाईट चट्टानों से (दिल्ली सुपर समूह)
- दक्षिणी भाग ➜ ग्रेनाईट चट्टानों से (अरावली सुपर ग्रुप)
- अरावली के दोनों ओर भूरी मिट्टी का प्रसार है
3. सामान्य जानकारी
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| अरावली प्रदेश की जलवायु | उपआर्द्र |
| उत्तर व मध्य अरावली | उपआर्द्र |
| दक्षिणी अरावली | आर्द्र |
| औसत वर्षा | 50 से 90 सेमी |
| मिट्टी | भूरी लाल कंकरीली |
| मुख्य फसल | मक्का, ज्वार |
| वनस्पति | उष्ण कटिबंधीय शुष्क पर्णपाती वन |
- अरावली की चौड़ाई उत्तर-पूर्व से दक्षिण-पश्चिम की ओर बढ़ती जाती है
- दक्षिणी-पश्चिमी भाग ➜ चौड़ा; उत्तर-पूर्वी भाग ➜ संकड़ा
- सर्वाधिक विस्तार वाला भाग ➜ दक्षिण-पश्चिमी; न्यूनतम विस्तार वाला ➜ मध्य भाग
- सर्वाधिक विस्तार वाला जिला ➜ उदयपुर; न्यूनतम ➜ अजमेर
- सबसे ऊँचा पॉइन्ट ➜ गुरुशिखर (सिरोही); निम्नतम पॉइन्ट ➜ पुष्कर घाटी (अजमेर)
- सबसे ऊँचा बसा शहर ➜ माउंट आबू; दूसरा ➜ प्रतापगढ़ (580 मीटर)
- अरावली का मध्य भाग ➜ अजमेर
- राजस्थान की सबसे ऊँची तीन चोटियाँ सिरोही जिले में ही हैं
- उत्तर-पूर्व में अरावली क्रमबद्ध श्रृंखला के रूप में नहीं, बल्कि टूटी-फूटी है, जिनमें वायु घाटियाँ पाई जाती हैं
- अजमेर से सिरोही एवं गुजरात तक अरावली का स्वरूप एक तानपुरे की तरह है — ऊपर से संकरा, नीचे से फैला हुआ
- समानांतर चलने वाला राष्ट्रीय राजमार्ग ➜ NH 8 (पुराना), NH 48 (नया)
4. अरावली के उपनाम
| उपनाम | स्रोत / स्थान |
|---|---|
| भारत का अप्लेशियन | अमेरिका के अप्लेशियन (प्राचीन वलित मोड़दार पर्वतमाला) से तुलना |
| परिपत्र | प्राचीन ग्रंथों में (विष्णु पुराण में) |
| मेरू | भौगोलिक भाषा में |
| आड़ावली | बूँदी में |
| आबू गुलाब | सिरोही में |
| आड़ा-वटा | उदयपुर में |
| उक्तंत की गर्दन | अबुल फजल ने कहा |
| हिन्दु ओलम्पस | कर्नल जेम्स टॉड ने आबू पर्वत को कहा, मंदिरों की अधिकता के कारण |
| राजस्थान की जीवन रेखा | खनिज, नदियों का उद्गम, वनस्पति, मरुस्थल रोकने की भूमिका के कारण |
5. अरावली की विशेषताएँ
- यह विश्व की प्राचीनतम वलित एवं अवशिष्ट (Residual Mountains) पर्वतमाला है; रचना विधि के अनुसार यह मोड़दार पर्वत है
- वलित पर्वत ➜ पृथ्वी की आंतरिक शक्तियों से धरातल की चट्टानों के मुड़ जाने से बनते हैं
- यह पश्चिमी मरुस्थल के पूर्व में विस्तार को रोकती है
- बंगाल की खाड़ी से आने वाली मानसूनी हवाओं को रोककर पूर्वी राजस्थान में वर्षा करवाती है
- यह राजस्थान का सर्वाधिक अभयारण्य वाला भौतिक भाग है
- यह सर्वाधिक नदियों के उद्गम वाला भाग है — लेकिन राजस्थान की सभी नदियों का उद्गम अरावली से नहीं होता
- यह सर्वाधिक सघन वनस्पति वाला तथा सर्वाधिक वनों के विस्तार वाला भाग है, और वन्यजीवों की शरणस्थली है
- यह राजस्थान का न्यूनतम जनसंख्या वाला भौतिक भाग है
- यह सर्वाधिक खनिज पदार्थों की बहुतायत वाला भाग है; आग्नेय चट्टानों की अधिकता से धात्विक खनिज प्राप्त होते हैं
- इसे भारत की महान जल विभाजक रेखा कहा जाता है — अरावली के दक्षिण व पश्चिम की नदियों का जल अरब सागर में तथा पूर्व व दक्षिण-पूर्व की नदियों का जल बंगाल की खाड़ी में जाता है
- यह जल विभाजक के साथ-साथ दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व तक जलवायु विभाजक का भी काम करती है
- यह आदिवासी जनजातियों की आश्रय स्थली है
- पूर्वी ढालों पर वनस्पति अधिक सघन और ऊँचाई तक विद्यमान है; पूर्वी ढाल अधिक मानसूनी वर्षा प्राप्त करते हैं तथा अधिक तीक्ष्ण ढालयुक्त एवं उच्चतर हैं
6. अरावली का नुकसान और खतरा
- नुकसान ➜ अरावली दक्षिणी पश्चिमी मानसून (अरब सागरीय) के समानान्तर होने के कारण बादलों को रोकने में असमर्थ रहती है; बादल बिना बरसे ही आगे बढ़ जाते हैं
- खतरा ➜ अवैध खनन गतिविधियों से इसके अस्तित्व पर संकट है
- फरवरी 2019 ➜ सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान के अरावली क्षेत्र में 128 में से 31 पहाड़ियाँ गायब होने पर चिंता जताते हुए 115.34 हैक्टेयर क्षेत्र में गैरकानूनी खनन बंद करने का आदेश दिया
7. रायसीना की पहाड़ी — विशेष तथ्य
- दिल्ली में स्थित राष्ट्रपति भवन रायसीना की पहाड़ी पर बना है
- करोल बाग के मध्य स्थित रायसीना व छोटी-मोटी पहाड़ियों को ‘दिल्ली रेंज’ कहते हैं, जहाँ संसद, जेएनयू व राष्ट्रपति भवन बने हैं
- राष्ट्रपति भवन का पुराना नाम ➜ वायसराय भवन
- नक्शाकार ➜ एडविन लैंडसियर लुटयन्स
- निर्माण ➜ करौली व धौलपुर के लाल पत्थरों से
- रहने वाला प्रथम व्यक्ति ➜ लॉर्ड इरविन
8. तीन भागों में विभाजन
| भाग | औसत ऊँचाई |
|---|---|
| उत्तरी अरावली | 450 मीटर |
| मध्य अरावली | 700 मीटर |
| दक्षिणी अरावली | 1000 मीटर |
तीनों भागों की चोटियाँ, दर्रे और पहाड़ियाँ अगले भाग में विस्तार से दी गई हैं।
