बालूका स्तूप एवं मरुस्थलीय शब्दावली – Rajasthan Geography Chapter 8
मरुस्थल पर पूछे जाने वाले प्रश्नों का सबसे बड़ा हिस्सा दो जगहों से आता है — बालूका स्तूपों के प्रकार और मरुस्थल की स्थानीय शब्दावली। दोनों में नाम बहुत हैं और आपस में मिलते-जुलते हैं, इसलिए इन्हें आकृति व कारण के साथ जोड़कर याद करना ही सही तरीका है।
1. मरुस्थल के तीन प्रकार (सहारा की शब्दावली)
प्रकार
पहचान
राजस्थान में
इर्ग
पूर्ण रेतीला मरुस्थल, जिसमें बालू ही बालू; ‘महान मरुस्थल’ भी कहलाता है। तुर्किस्तान में इसे ‘कोडर्म’ कहते हैं। यहाँ जलवायु अत्यधिक शुष्क और वनस्पति न्यूनतम होती है।
सर्वाधिक इर्ग जैसलमेर में
हम्मादा
पथरीला मरुस्थल; बालूका स्तूप या टीला मुक्त, कठोर चट्टानें व छोटी पहाड़ियाँ, चूने युक्त धरातल
पोकरण, फलौदी व बालोतरा के बीच का त्रिकोणीय क्षेत्र
रैग
मिश्रित मरुस्थल; बालू रेत के साथ मोटे-मोटे कंकड़
बाड़मेर, बालोतरा, जालौर, सीकर, झुंझुनूं, जैसलमेर में सर्वाधिक
2. बालूका स्तूप — आधार बातें
क्या ➜ मिट्टी के अपरदन और निक्षेपण का प्रतिफल
अन्य नाम ➜ टीले, टीबे, धोरे, धरियन
धोरे ➜ साहित्यिक भाषा में; धरियन ➜ जैसलमेर की स्थानीय भाषा में
सर्वाधिक स्थानान्तरण ➜ मार्च से जुलाई माह के मध्य
विस्तार ➜ पश्चिमी मरुस्थलीय प्रदेश के 58.50% भाग (1,28,028 वर्ग किमी) पर बालूका स्तूप; शेष 41.50% (85,660 वर्ग किमी) स्तूप रहित
सर्वाधिक बालूका स्तूप ➜ चूरू में
सभी प्रकार के स्तूप वाला जिला ➜ जोधपुर
3. पवन की गति के अनुसार प्रकार
(क) अनुदैर्ध्य / पवनानुवर्ती बालूका स्तूप
अंग्रेजी में Longitudinal or Linear Dunes; इन्हें ‘रेखीय बालूका स्तूप’ भी कहते हैं
ये पवनों की दिशा के समानान्तर या अनुदिश बनते हैं
ऊँचाई ➜ सभी प्रकारों में सबसे ऊँचे, 60 मीटर तक
सर्वाधिक ➜ जैसलमेर व बाड़मेर में; विशेष रूप से रामगढ़ (जैसलमेर) के दक्षिण-पश्चिम में तथा बाड़मेर, बालोतरा, फलौदी व जोधपुर में
ये लम्बवत समानान्तर श्रेणियों जैसे दिखते हैं; पवनों की सामान्य दिशा दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व में अधिक विकसित होते हैं
लूणी, जवाई आदि नदियों के पार्श्वों पर भी बनते हैं; उत्तरी पूर्वी थार में दृषद्वती तथा मेढ़ा नदी की शुष्क घाटी में घुमावदार पुराने स्तूप मिलते हैं (ऊँचाई 10 से 60 मीटर)
गासी / कारबा मार्ग ➜ दो पवनानुवर्ती स्तूपों के बीच की निम्न भूमि
सोर महोदय (Soar 1989) ➜ रेखीय लम्बवत स्तूपों के 3 प्रकार बताए — सीफ (Sief), वनस्पति युक्त रेखीय (Vegetated Linear), पवनविमुख रेखीय (Lee Linear)
बरखान जैसे ही, लेकिन इनमें केवल एक ही भुजा होती है
ऐसा पवनों की दिशा में परिवर्तन के कारण होता है
पैराबोलिक / परवलयाकार
हेयर पिन के आकार के; विस्तार सम्पूर्ण मरुस्थलीय क्षेत्रों में
वहाँ बनते हैं जहाँ पेड़-पौधे हवा के बहाव में बाधा डालते हैं
इनके खुले छोर का रुख हवा के रुख के विपरीत होता है; हवा टकराने से ‘U’ आकार का कटाव आ जाता है, जबकि आजू-बाजू पेड़ होते हैं — इसलिए ये आंशिक रूप से स्थिर होते हैं
ये बरखान प्रकार के ही होते हैं, किंतु निर्माण की दिशा भिन्न होती है; राजस्थान में दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व की ओर धीरे-धीरे परिवर्तन दिखता है
दक्षिण-पश्चिम में भुजाएँ औसतन 3–4 किमी लम्बी होकर तीव्र कोण पर मिलती हैं; उत्तर-पूर्व में भुजाएँ छोटी, औसतन 500 मीटर, ऊँचाई 10 से 25 मीटर
तारा बालूका स्तूप (Star Sand Dunes)
तारे के आकार का; वहाँ बनता है जहाँ हवा अपनी दिशा बार-बार बदलती है
संश्लिष्ट और अनियतवाही पवनों के क्षेत्र में प्रमुखतः निर्मित
ऊँचाई ➜ औसतन 10 से 25 मीटर
क्षेत्र ➜ मोहनगढ़ व पोकरण (जैसलमेर), सूरतगढ़ (गंगानगर); जैसलमेर के पास हम्मादा स्थलाकृति में भी
अन्य प्रकार
शब्रकाफिज ➜ छोटी झाड़ियों या ऊँचे घास के झुण्ड के चारों ओर बनने वाले; पश्चिमी राजस्थान में सभी जगह
नेबखा ➜ झाड़ियों के पीछे निर्मित; सामान्यतः खेतों की मेड़ों पर
नेटवर्क बालूका स्तूप ➜ उत्तरी पूर्वी थार में हनुमानगढ़ से हिसार-भिवानी (हरियाणा) तक विस्तृत; ये बालूका शीट, हमोक व कम संगठित स्तूपों के रूप में
5. मरुस्थल की स्थानीय शब्दावली
शब्द
अर्थ
इन्सेलबर्ग / द्वीपीय पर्वत
रेगिस्तानी क्षेत्रों में ढालनुमा खड़ी चट्टानें; चारों ओर पानी भरा हो तो द्वीपीय पर्वत। उदाहरण — सांभर झील के आसपास
गिरीपद / पेड़ीमेन्ट
पर्वत के नीचे वाला स्थान जहाँ मरुस्थल की बालू आकर इकट्ठी हो जाती है; इन्सेलबर्ग व बजादा के मध्य
बजादा
पर्वतीय क्षेत्रों के नीचे की निम्न भूमि, जहाँ पर्वतीय जल आकर समाप्त हो जाता है
प्लाया
खारे पानी की बड़ी झीलें; वायु के अपरदन से बने बड़े गर्तों में जल भरने के बाद लवणता से खारा हो जाता है। सर्वाधिक जैसलमेर में
ढाढ़
वायु द्वारा निर्मित झीलें (Aeolion or Playa Lakes)
रन / टाट
स्तूपों के मध्य छोटे गड्ढों में वर्षा जल भरने पर बने लवणीय दलदल क्षेत्र
तल्ली / पोखर / ताली
छोटे खड्डों में वर्षा का मीठा जल इकट्ठा होना; खेतों का निचला भाग जहाँ पानी बहकर जमा हो
मरहो
तल्ली/पोखर के जल सूखने के बाद बची उपजाऊ मिट्टी का क्षेत्र
बालसन
मरुस्थल का वह भाग जो पर्वतों/चट्टानों से घिरा हो और मध्य में जल जमा होने से झील बने। उदाहरण — सांभर झील
रोही मैदान
बरखान के अर्द्धचन्द्राकार निम्न भूमि क्षेत्र की उपजाऊ भूमि
लघु मरुस्थल
बीकानेर से कच्छ तक का भाग
भभुल्या
छोटे क्षेत्र में उत्पन्न वायु भंवर (चक्रवात)
थली
लूणी नदी के उत्तर में मरुस्थलीय प्रदेश का उत्तर-पूर्वी ऊँचा भाग
तली
मरुस्थलीय प्रदेश के दक्षिण-पश्चिम का नीचा भाग
मगरा
अरावली से अलग अपशिष्ट पहाड़ियाँ
प्रमुख रन
कनोड, बरमसर, भाकरी, पोकरण, लवा (जैसलमेर)
बाप (फलौदी), थोब (बालोतरा), रेड़ाना रन (बाड़मेर)
तालछापर व पड़िहारा रन (चूरू)
राजस्थान में सर्वाधिक रन ➜ जैसलमेर में
6. खड़ीन कृषि
क्या ➜ तल्ली/पोखर का जल सूखने के बाद उपजाऊ मिट्टी में की जाने वाली कृषि
संरचना ➜ एक तरह का अस्थायी तालाब, जिसमें दो तरफ मिट्टी की पाल उठाकर तीसरी तरफ पत्थर की मजबूत दीवार (बाँध) लगाई जाती है
सर्वाधिक ➜ जैसलमेर में
प्रकार ➜ सामुदायिक कृषि का उदाहरण
प्रारम्भ ➜ पालीवालों द्वारा 15वीं शताब्दी में
7. मरुस्थल का जीव जगत
पीवणा ➜ रेगिस्तानी इलाके का सर्वाधिक जहरीला साँप; यह डँसता नहीं, बल्कि सोते हुए व्यक्ति को श्वास के साथ ज़हर देकर मारता है
सर्वाधिक पीवणा ➜ जैसलमेर जिले में; राष्ट्रीय मरु उद्यान में सर्वाधिक
मरुप्रदेश में लगभग 20 सरिसृप प्रजातियाँ मिलती हैं, जिनमें पाटागोह व सेंडफिश प्रमुख हैं