अरावली को ऊँचाई और विस्तार के आधार पर तीन भागों में बाँटा जाता है। हर भाग की अपनी चोटियाँ, अपने दर्रे और अपनी पहचान है। यहाँ तीनों भागों को क्रमवार लिया गया है, साथ में राज्य की अन्य पहाड़ियाँ, पठार और किले वाली प्रसिद्ध पहाड़ियाँ भी।
1. उत्तरी अरावली
- जिले ➜ अलवर, खैरथल-तिजारा, कोटपूतली-बहरोड़, जयपुर, दौसा, डीडवाना-कुचामन का पूर्वी भाग, सीकर, झुंझुनूं का दक्षिणी पूर्वी भाग
- विस्तार ➜ सांभर से सिंघाना तथा सिंघाना (झुंझुनूं) से खैरथल-तिजारा तक
- औसत ऊँचाई ➜ 450 मीटर
- निर्माण ➜ क्वार्टजाइट एवं फाईलाईट शैलों से
- प्रमुख पहाड़ियाँ ➜ शेखावाटी की पहाड़ियाँ, तोरावाटी की पहाड़ियाँ, खण्डेला की पहाड़ी (सीकर), हर्ष की पहाड़ी (सीकर), जयपुर की पहाड़ियाँ, अलवर की पहाड़ियाँ
उत्तरी अरावली की चोटियाँ
| चोटी | जिला | ऊँचाई |
|---|---|---|
| रघुनाथगढ़ | सीकर | 1055 मीटर |
| मालखेत | सीकर | 1052 मीटर |
| लोहार्गल (लोहागढ़) | झुंझुनूं | 1051 मीटर |
| भोजगढ़ | झुंझुनूं | 979 मीटर |
| खो | जयपुर | 920 मीटर |
| भैरांच | अलवर | 792 मीटर |
| बाबाई | जयपुर | 792 मीटर |
| बरवाड़ा | जयपुर | 786 मीटर |
| बबाई | झुंझुनूं | 780 मीटर |
| बिलाली | कोटपूतली-बहरोड़ | 775 मीटर |
| मनोहरपुरा | जयपुर | 747 मीटर |
| बैराठ | कोटपूतली-बहरोड़ | 704 मीटर |
| सरिस्का | अलवर | 677 मीटर |
| सिरावास | अलवर | 651 मीटर |
| भानगढ़ | अलवर | 649 मीटर |
| जयगढ़ | जयपुर | 648 मीटर |
| नाहरगढ़ | जयपुर | 599 मीटर |
| अलवर दुर्ग | अलवर | 597 मीटर |
- नोट ➜ रणथम्भौर में अरावली व विंध्याचल दोनों पर्वतमालाएँ आपस में मिलती हैं
- सरिस्का अभयारण्य में क्रासका पठार, काली घाटी (मोर की अधिकता), कांकणवाड़ी पठार तथा कांकणवाड़ी किला (दारा शिकोह कैद रहा) स्थित हैं
- ढूंढिमल का दर्रा ➜ रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान में
- कुराली घाट ➜ सवाईमाधोपुर में
2. मध्य अरावली
- विस्तार ➜ मुख्यतः अजमेर व ब्यावर जिले में; राजसमंद का उत्तरी भाग भी शामिल। सांभर (जयपुर) से देवगढ़ (राजसमंद) तक का भाग
- औसत ऊँचाई ➜ 700 मीटर
- निर्माण ➜ संगमरमर, क्वार्टजाईट व ग्रेनाईट चट्टानों से
- विशेष ➜ सम्पूर्ण अरावली में सर्वाधिक दर्रे मध्य अरावली में ही पाए जाते हैं
| चोटी | जिला | ऊँचाई |
|---|---|---|
| मोराय जी (गोरमजी) | ब्यावर | 934 मीटर — मध्य अरावली की सबसे ऊँची चोटी |
| तारागढ़ | अजमेर | 873 मीटर |
| नाग पहाड़ | अजमेर | 795 मीटर |
नोट: गोरमजी की चोटी टॉडगढ़ पहाड़ियों का ही भाग है।
दर्रा क्या होता है
दो पर्वतों या पहाड़ों के बीच का धरातलीय संकीर्ण पथ या कटा-फटा तंग रास्ता ‘दर्रा’ कहलाता है। इसे नाल या घाट भी कहते हैं।
मध्य अरावली के दर्रे
- कच्छवाली दर्रा ➜ ब्यावर
- पीपली दर्रा ➜ ब्यावर; राजस्थान की सर्वाधिक ऊँचाई पर स्थित नाल
- उदाबारी दर्रा ➜ ब्यावर
- सरूपाघाट ➜ ब्यावर
- ये चारों दर्रे टॉडगढ़ इलाके (ब्यावर) में हैं, जो ब्यावर को पाली से जोड़ते हैं और ब्यावर जिले के दक्षिण में निकलते हैं
ब्यावर व अन्य जिलों के दर्रे
- बर दर्रा (ब्यावर) ➜ राष्ट्रीय राजमार्ग 14 (नया NH 25) इससे गुजरता है; ब्यावर को बर से जोड़ता है, जोधपुर-जयपुर मार्ग गुजरता है
- पखेरिया दर्रा (ब्यावर) ➜ ब्यावर के पूर्व में; ब्यावर से मसूदा मार्ग गुजरता है
- शिसुरा-शिवपुरा घाट (ब्यावर) ➜ ब्यावर के पूर्व में; ब्यावर से विजयनगर मार्ग
- सूरा घाट दर्रा (ब्यावर) ➜ ब्यावर के दक्षिण में; ब्यावर से भीलवाड़ा को जोड़ने वाला मार्ग
- दिवेर की नाल (राजसमंद) ➜ यहीं से कोठारी नदी का उद्गम होता है
- गोरमघाट दर्रा (राजसमंद-पाली) ➜ मारवाड़ जंक्शन (पाली) को देवगढ़, आमेट (राजसमंद) से रेलमार्ग द्वारा जोड़ता है
- कामलीघाट दर्रा (राजसमंद-पाली) ➜ जोजावर (पाली) से देवगढ़ (राजसमंद) को सड़क मार्ग से जोड़ता है
- नोट ➜ गोरमघाट रेलवे स्टेशन (पाली) राजस्थान में सौर ऊर्जा से प्रकाशित पहला रेलवे स्टेशन है
3. दक्षिणी अरावली
- विस्तार ➜ देवगढ़ (राजसमंद) से दक्षिण में उदयपुर, सिरोही तक; श्रृंखलाएँ अधिक सघन, ऊँची तथा वनाच्छादित
- जिले ➜ राजसमंद, उदयपुर, सलूम्बर, चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, सिरोही, पाली
- औसत ऊँचाई ➜ 1000 मीटर
- निर्माण ➜ ग्रेनाईट चट्टानों से
| चोटी | जिला | ऊँचाई |
|---|---|---|
| गुरुशिखर | माउंट आबू (सिरोही) | 1722 मीटर / 5650 फीट |
| सेर | माउंट आबू (सिरोही) | 1597 मीटर |
| दिलवाड़ा | माउंट आबू (सिरोही) | 1442 मीटर |
| जरगा | उदयपुर | 1431 मीटर |
| अचलगढ़ | माउंट आबू (सिरोही) | 1380 मीटर |
| आबू | सिरोही | 1295 मीटर |
| कुम्भलगढ़ | राजसमंद | 1224 मीटर |
| धोलिया | उदयपुर | 1183 मीटर |
| जयराज | सिरोही | 1090 मीटर |
| ऋषिकेश | सिरोही | 1017 मीटर |
| कमलनाथ | उदयपुर | 1001 मीटर |
| सुन्धा पर्वत | भीनमाल (जालौर) | 991 मीटर |
| माकड़मगरा | उदयपुर | 989 मीटर |
| सज्जनगढ़ | उदयपुर | 938 मीटर |
| सायरा | उदयपुर | 900 मीटर |
| लीलागढ़ | उदयपुर | 874 मीटर |
| डोरा पर्वत (जसवंतपुरा की पहाड़ियों में) | जालौर | 869 मीटर |
| नागपानी | उदयपुर | 867 मीटर |
| गोगुन्दा | उदयपुर | 840 मीटर |
| इसराना भाखर | जालौर | 839 मीटर |
| रोजा भाखर | जालौर | 730 मीटर |
| झारोला भाखर | जालौर | 588 मीटर |
| कोटड़ा | उदयपुर | 450 मीटर |
| ऋषभदेव | उदयपुर | 400 मीटर |
गुरुशिखर एवं आबू पर्वत खण्ड
- गुरुशिखर राजस्थान व अरावली की सबसे ऊँची चोटी है
- कर्नल टॉड ने इसे ‘संतों का शिखर’ कहा; इसे गुरुमाथा भी कहा जाता है
- यहीं दत्तात्रेय ऋषि का मंदिर बना है; माना जाता है कि नाम भी उन्हीं के नाम पर पड़ा
- यह हिमालय व नीलगिरी के मध्य सबसे ऊँची चोटी है
- आबू पर्वत खण्ड ➜ समुद्र तल से लगभग 1200 मीटर ऊँचा, सम्पूर्ण भाग ग्रेनाइट से निर्मित; इसे एक बैथोलिक की संज्ञा दी जाती है और स्थलाकृति की दृष्टि से विशाल इन्सेलबर्ग भी कहा जा सकता है। यह 19 किमी लम्बा व 8 किमी चौड़ा है।
दक्षिणी अरावली के नाल / दर्रे
- फुलवारी की नाल (उदयपुर) ➜ कोटड़ा से उदयपुर मार्ग गुजरता है; यहीं से मानसी-वाकल नदियों का उद्गम; क्षेत्रफल की दृष्टि से राजस्थान की सबसे बड़ी नाल
- केवड़ा की नाल (उदयपुर) ➜ उदयपुर से जयसमंद झील (सलूम्बर) की ओर जाने वाले मार्ग पर
- देबारी दर्रा (उदयपुर) ➜ NH 27 (पुराना 76) गुजरता है; चित्तौड़ से उदयपुर की ओर जाने वाले मार्ग पर
- हाथी दर्रा (उदयपुर) ➜ यहाँ भी NH 27 गुजरता है; पिंडवाड़ा (सिरोही) से उदयपुर की ओर आने वाले मार्ग पर
- ढेबर दर्रा (सलूम्बर) ➜ यहाँ से गोमती नदी निकलती है
- सोमेश्वर की नाल (पाली) ➜ पाली से रणकपुर रास्ते पर देसुरी के निकट
- देसुरी की नाल (पाली-राजसमंद) ➜ देसुरी (पाली) से चारभुजा (राजसमंद) जाने वाले मार्ग पर; इससे NH 162 गुजरता है
- हाथीगुड़ा की नाल (राजसमंद-पाली) ➜ कुम्भलगढ़ किले के पास; केलवाड़ा (राजसमंद) से घाणेराव (पाली) की तरफ निकलता है
- बोरांग दर्रा ➜ सिरोही के दक्षिणी भाग में; आबू क्षेत्र को उदयपुर से जोड़ता है
- हल्दीघाटी दर्रा ➜ राजसमंद
महत्वपूर्ण नोट: देसुरी की नाल को ही झीलवाड़ा की नाल या पगल्या की नाल कहते हैं। देसुरी स्थान पाली में है और झीलवाड़ा राजसमंद में। इसलिए परीक्षा में ‘देसुरी की नाल’ पूछे जाने पर पाली सही उत्तर होगा और ‘झीलवाड़ा की नाल’ पूछे जाने पर राजसमंद।
4. अन्य पहाड़ियाँ व पर्वतीय क्षेत्र
- मेरवाड़ा पहाड़ियाँ ➜ मध्य अरावली में टॉडगढ़ (ब्यावर) के समीप; मेवाड़-मारवाड़ को अलग करती हैं
- पीडमाट मैदान ➜ देवगढ़ (राजसमंद) के समीप की निर्जन पहाड़ियाँ (बनास नदी के बेसिन में)
- गिरवा ➜ उदयपुर शहर के चारों तरफ की तश्तरीनुमा पहाड़ियों की मेखला; इन्हीं के बेसिन में उदयपुर शहर बसा है। यहाँ के उपखण्ड, तहसील व पंचायत समिति का नाम भी गिरवा है।
- भाकर ➜ पूर्वी सिरोही की तीव्र ढाल वाली पहाड़ियाँ
- देशहरो ➜ उदयपुर में जरगा व राग पहाड़ियों के मध्य वर्षभर हराभरा रहने वाला भाग
- मगरा ➜ उदयपुर का उत्तर-पश्चिमी पर्वतीय प्रदेश
- भोमट ➜ दक्षिण राजस्थान (उदयपुर, डूंगरपुर, सलूम्बर, सिरोही) का अरावली क्षेत्र जहाँ भील जनजाति निवास करती है
- मेवल ➜ डूंगरपुर व बाँसवाड़ा के मध्य का पहाड़ी भाग
- आड़ावल पर्वत ➜ बूँदी
- रामगढ़ की गोलाकार पहाड़ियाँ ➜ रामगढ़ (बारां); इनके मध्य उल्कापिंड गिरने से एक झील भी बनी है
- हर्ष पर्वत/हर्ष पहाड़ी ➜ सीकर (820 मीटर)
- बीजासन का पहाड़ ➜ मांडलगढ़ (भीलवाड़ा)
- सारण की पहाड़ियाँ ➜ पाली; राव चन्द्रसेन की छतरी बनी है
- आर्बूद पर्वत ➜ सिरोही जिले में आबू का पर्वतीय क्षेत्र
- मुकन्दरा की पहाड़ियाँ ➜ कोटा-झालावाड़
- बरवाड़ा की पहाड़ियाँ ➜ चौथ का बरवाड़ा (सवाईमाधोपुर)
- मालानी पर्वत ➜ जालौर, बालोतरा व बाड़मेर के मध्य
- बाहुबली हिल ➜ उदयपुर | मोडा पहाड़ ➜ झुंझुनूं | स्यानण की डूंगरी ➜ चूरू
- घूघरा घाटी ➜ अजमेर | नौसर घाटी ➜ अजमेर | जिन्दोली घाटी ➜ खैरथल-तिजारा | चिरवा की घाटी ➜ उदयपुर
- कुक्कर घाटी ➜ रणथम्भौर अभयारण्य | कालीघाटी ➜ सरिस्का अभयारण्य
प्रसिद्ध पहाड़ियाँ जिन पर किले बने हैं
| पहाड़ी | किला / स्थान |
|---|---|
| त्रिकुट पहाड़ी | जैसलमेर किला (जैसलमेर) |
| त्रिकुट पर्वत | कैलादेवी मंदिर (करौली) |
| मानी/नैनी पहाड़ी | बयाना का किला (भरतपुर) |
| भामती पहाड़ी | शाहबाद का किला (बारां) |
| नानी सिरढ़ी पहाड़ी | सोजत का किला (पाली) |
| चिड़ियाटूंक/पंचेटिया पहाड़ी | मेहरानगढ़ (जोधपुर) |
| हेमकुट/गंधमादन | कुम्भलगढ़ (राजसमंद) |
| कनकाचल/सुवर्णगिरी | जालौर का किला |
| देवगिरी पहाड़ी | दौसा का किला |
| ईगल पहाड़ी | जयगढ़ |
| कालीखोह पहाड़ी | आमेर किला (जयपुर) |
| कोशवर्द्धन पहाड़ी | शेरगढ़ किला (बारां) |
| बिठली पहाड़ी | तारागढ़ दुर्ग (अजमेर) |
5. राजस्थान के प्रमुख पठार
- उड़िया का पठार ➜ सिरोही, 1360 मीटर; राजस्थान का सबसे ऊँचा पठार, आबू पर्वत पर गुरु शिखर के नीचे
- भोराठ का पठार ➜ कुम्भलगढ़ (राजसमंद) से गोगुन्दा (उदयपुर) के बीच, 1225 मीटर; दूसरा ऊँचा पठार; महाराणा प्रताप की कर्मस्थली रहा। सबसे ऊँची चोटी — जरगा (उदयपुर)
- आबू का पठार ➜ सिरोही, 1200 मीटर; तीसरा सबसे ऊँचा। इस पर माउंट आबू बसा है, जो राजस्थान का एकमात्र पर्वतीय पर्यटन स्थल है
- मेसा का पठार ➜ इस पर चित्तौड़गढ़ दुर्ग स्थित है
- लसाड़िया का पठार ➜ सलूम्बर, जयसमंद झील के पूर्वी भाग में फैला कटा-फटा पठार
- ऊपरमाल का पठार ➜ भैंसरोड़गढ़ (चित्तौड़गढ़) से बिजोलिया (भीलवाड़ा) तक; मालवा पठार का विस्तार। यहाँ एरू व ऊँली नदियाँ प्रवाहित होती हैं
- भोमट का पठार ➜ दक्षिणी उदयपुर, सलूम्बर, उत्तरी डूंगरपुर, पूर्वी सिरोही
- मानदेसरा का पठार ➜ चित्तौड़गढ़, भैंसरोड़गढ़ अभयारण्य में
- धीराजी का पठार ➜ चित्तौड़गढ़
- क्रासका व कांकणवाड़ी का पठार ➜ अलवर, सरिस्का अभयारण्य में
याद रखें: राजस्थान का दूसरा सर्वाधिक ऊँचाई पर बसा नगर प्रतापगढ़ है।
