प्राचीन काल में राजस्थान के विभिन्न नाम
1. वैदिक काल:
- इस प्रदेश को ‘ब्रह्मावर्त’ के नाम से जाना जाता था
- यह आर्यों की प्रारंभिक बसाहट का क्षेत्र था
2. भौगोलिक आधार पर नाम:
- मरुकान्तार – रेगिस्तानी क्षेत्र होने के कारण
- मरुभूमि – शुष्क भूमि के लिए
- मरुधरा – रेत के धोरों वाला प्रदेश
- रजवाड़ा – विभिन्न राजवाड़ों का क्षेत्र
3. अन्य ऐतिहासिक नाम:
- गुर्जरत्रा/गुर्जर भूमि – गुर्जर प्रतिहार शासकों के समय
- वीरभूमि – वीर योद्धाओं की भूमि
- रणभूमि – युद्धों की भूमि
‘राजस्थान’ शब्द के ऐतिहासिक प्रमाण
1. बसंतगढ़ शिलालेख (625 ई.) – प्राचीनतम उल्लेख
- स्थान: सिरोही जिले के बसंतगढ़ में जीणमाता मंदिर
- काल: 625 ई. (चावड़ा वंश के शासक वर्मलात का समय)
- महत्व: इसमें ‘राजस्थानियादित्य’ शब्द का प्रयोग मिलता है
- विवाद: यह शब्द किसी व्यक्ति विशेष के लिए था या क्षेत्र विशेष के लिए – स्पष्ट नहीं
- अन्य जानकारी: इस शिलालेख में दास प्रथा का भी वर्णन है
2. मुहणोत नैणसी री ख्यात (1643-1666 ई.)
- लेखक: मुहणोत नैणसी
- महत्व: किसी पुस्तक में सर्वप्रथम ‘राजस्थान’ शब्द का उल्लेख
- प्रसिद्धि: राजस्थान का प्रथम ऐतिहासिक ग्रंथ माना जाता है
- विशेषता: सभी ख्यातों में सबसे प्राचीन और विश्वसनीय
- भाषा: डिंगल (राजस्थानी की काव्यात्मक भाषा)
- संरक्षक: जोधपुर महाराजा जसवंत सिंह प्रथम के दरबारी कवि व दीवान
- विषय: राजस्थान के विभिन्न राज्यों व मध्य भारत का इतिहास
3. राजरूपक (1731 ई.)
- लेखक: वीरभान
- विषय: जोधपुर महाराजा अभयसिंह व गुजरात के सूबेदार सरबुलंद खाँ के मध्य युद्ध का वर्णन
- नोट: यहाँ भी ‘राजस्थान’ शब्द का प्रयोग राजा की राजधानी या निवास स्थान के अर्थ में किया गया था
4. महाराजा भीमसिंह का पत्र (1791 ई.)
- जोधपुर के महाराजा भीमसिंह ने जयपुर के सवाई प्रतापसिंह को लिखे पत्र में ‘राजस्थानां’ शब्द का प्रयोग किया
‘राजपूताना’ नाम की उत्पत्ति
जॉर्ज थॉमस (1800 ई.) – प्रथम प्रयोगकर्ता
- मूल निवास: आयरलैंड
- पद: ग्वालियर के मराठा शासक महादजी सिंधिया के सेना में कमांडर
- महत्व: ‘राजपूताना’ शब्द का सर्वप्रथम स्वतंत्र रूप से इस भू-भाग के लिए प्रयोग किया
- पुस्तक: “Military Memoirs of Mr. George Thomas”
- प्रकाशन: विलियम फ्रेंकलिन द्वारा, लॉर्ड वेलेजली ने प्रकाशित करवाया
- राजस्थान में प्रवेश: शेखावाटी क्षेत्र में सर्वप्रथम आए
- मृत्यु: 1802 ई. में बहरामपुर (बंगाल) में
मुगल साहित्यकारों की भूमिका:
- मुगल लेखक ‘राजपूत’ शब्द की बहुवचन में ‘राजपूतान’ लिखते थे
- इसी से ‘राजपूताना’ (राजपूतों का देश) नाम प्रचलित हुआ
कर्नल जेम्स टॉड का योगदान
‘द एनाल्स एंड एंटिक्विटीज ऑफ राजस्थान’ (1829 ई.)
पुस्तक की विशेषताएं:
- दूसरा नाम: “सेंट्रल एंड वेस्टर्न राजपूत स्टेट्स ऑफ इण्डिया”
- प्रकाशन: दो भागों में (1829 और 1832 में)
- समर्पण:
- प्रथम खण्ड – इंग्लैण्ड के राजा जॉर्ज चतुर्थ को
- द्वितीय खण्ड – इंग्लैण्ड के राजा विलियम चतुर्थ को
- संपादक: विलियम क्रुक
- हिन्दी अनुवाद: गौरीशंकर हीराचंद ओझा द्वारा (सर्वप्रथम)
- महत्व: इस भू-भाग के लिए ‘राजस्थान’ शब्द का सुनियोजित प्रयोग
- अन्य नाम: पुरानी बहियों के आधार पर इसे ‘राजवाड़ा’ या ‘रजवाड़ा’ भी कहा
कर्नल टॉड की दूसरी पुस्तक:
- नाम: “द ट्रेवल्स इन वेस्टर्न इण्डिया” (1839 ई.)
- प्रकाशन: उनकी पत्नी जुलिया क्लटरबक द्वारा
- समर्पण: विलियम हंटर ब्लेयर को
राजस्थान को आधिकारिक मान्यता
एकीकरण के दौरान (25 मार्च 1948)
- राजस्थान एकीकरण के दूसरे चरण में पहली बार ‘राजस्थान’ नाम जुड़ा
- नाम: पूर्व राजस्थान संघ (भरतपुर, धौलपुर, करौली, अलवर)
- राजधानी: कोटा (अस्थायी)
संवैधानिक मान्यता (26 जनवरी 1950)
- भारतीय संविधान लागू होने के साथ राजस्थान को संवैधानिक मान्यता मिली
- यह भारतीय गणतंत्र का एक राज्य बना
वर्तमान स्वरूप (1 नवम्बर 1956)
- राज्य पुनर्गठन अधिनियम 1956 के तहत
- राजस्थान को वर्तमान भौगोलिक स्वरूप प्राप्त हुआ
- आबू-दिलवाड़ा तहसील (पूर्व में बॉम्बे राज्य का भाग) राजस्थान में शामिल
- सुनेल-टप्पा क्षेत्र (झालावाड़) मध्य प्रदेश को स्थानांतरित
परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण तथ्य
✓ बसंतगढ़ शिलालेख – ‘राजस्थान’ शब्द का प्राचीनतम लिखित प्रमाण
✓ मुहणोत नैणसी री ख्यात – पुस्तक में सर्वप्रथम उल्लेख
✓ जॉर्ज थॉमस – ‘राजपूताना’ शब्द के प्रथम प्रयोगकर्ता
✓ कर्नल जेम्स टॉड – ‘राजस्थान’ शब्द को व्यापक प्रचलन दिया (1829)
✓ 25 मार्च 1948 – एकीकरण में प्रथम बार ‘राजस्थान’ नाम जुड़ा
✓ 26 जनवरी 1950 – संवैधानिक मान्यता
✓ 1 नवम्बर 1956 – वर्तमान स्वरूप की प्राप्ति

